समृद्धि के बीच ताल ठोकती तबाही
बैबस जीवन , बैलगाम पुरोधा वोटोे की बैबसी अगर बाधा है तो समाधान अहम व्ही. एस. भुल्ले 24 सितंबर 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा जिस तरह की सियासत , सेवा , कल्याण का अस्तित्व आजकल सत्ता सौपानो में पैठ जमा चुका उससे लगता नही मौजूद जीवन में किसी का भी कल्याण होने बाला है ।फिर चाहै वह व्यक्ति , परिवार , समाज , राज्य , राष्ट्र् हो । परिणाम कि आज समृद्धि के बीच ताल ठोकती तबाही विकास के नाम इस कदर से बैलाम हो चुकी है कि उसके दुशपरिणाम विकास पुरोधाओ की नाक के नीचे बीच चैराहै ढकरा रहै है मगर सियासत और सत्ताये है कि वह यह मानने तैयार ही नही कि साधन संसाधन संपदा सामथ्र्य पुरूषार्थ समय किस बैरहमी से स्वार्थ बस बरबाद हो रहै है । और सुबिधा , सेवा , कल्याण के नाम गाॅब गली ही नही नगर शहर महानगरो में बैअहाई के बीच बिलाप हो रहै है । फिर मसला शिक्षा , स्वास्थ , संस्कारो का हो या फिर अर्थहीन बैलगाम विकास जिस तरह से प्राकृतिक संरचनाओ की अनदेखी कर विकास की गंगा बिगत बर्षो से बहाई गई अब उसके सिर्फ रूझान ही नही साक्षात परिणाम सामने आने लगे है जो बड़े ही डराने बाले और जान लेवा साबित हो...