्स्वार्थवत सत्ताओं का पतन, सबसे बड़ा राष्ट्र धर्म जागरुक नागरिक बना सकते है समृद्ध, खुशहाल, जीवन और राष्ट्र सविनय अवज्ञा ही सार्थक रास्ता
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है किसी भी व्यवस्था में जब लोग राजनीति तथा अपने अधिकार और कत्र्तव्यों से अनभिज्ञ होते है और अपने निहित, छणिक, स्वार्थो के चलते अपने नैसर्गिक अधिकार कत्र्तव्य एवं मूल्य सिद्धान्तों के प्रति जागरुक नहीं रहते, ऐसे समाज, संस्था और लोगों का पतन सुनिश्चित होता है और जीवन कष्टप्रद रह, संघर्षपूर्ण हो जाता हैं। आज जिस तरह से लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वार्थवत सत्ता, संगठन, संस्थाओं के अपवित्र अघोषित गठबंधन के चलते स्वच्छंद जीवन में घुठन, फ्रसटेशन का वातावरण निर्मित हुआ है वह किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है। कहते है सत्य से संघर्ष और सत्य से संग्राम पहाड़ में सिर मारने के अलावा और कुछ नहीं। जिस तरह से प्रकृति में हवा, पानी के प्रवाह को संपूर्ण रोक पाना असंभव है जो एक संपूर्ण सत्य है। उसी प्रकार किसी विचार, किसी की भावना उसकी आशा-आकांक्षाओं को रोक पाना असंभव है। क्योंकि न तो आज तक कोई सत्य को असत्य साबित कर पाया और न ही पलट पाया और जिसने भी इसे पलटने की असफल कोशिश की उसका आज इस महान भूभाग पर नामों निशान तक नहीं। फिर चाहे वह इत...