कैश लैस की तरफ बढ़ा जन , मलाई काटता तंत्र ....? तीरंदाज
समृद्धि के नाम कंगाली की दस्तक व्ही. एस. भुल्ले भैया - बधाई के पात्र है हमारे तांत्रिक अर्थशास्त्री , और समृद्धि के रथ पर सबार सम्राट क्या कहानी मेरे आका कि मने तो सुनने से पहले ही धन्य हो लिया । म्हारी जन अकांक्षा क्या केश लेश के घोड़े पर सबार हुई मानो मलाई काटने बालो कि बाढ़ सी आ गई इसे ही कहते समृद्ध तंत्र अब वह लोक के बीच हो या फिर किसी भी तंत्र मे यू तो तंत्र के भी कई प्रकार होते है मगर म्हारे बालो के जो हाथ लगा वह तो धन्य कर देने बाला है अब वह कंगाली से धन धान्य कर दे या फिर धन से यह तो फूटा हमारा भाग्य है मगर सच बोल्यू तो भाया अपनो के ही बीच मने तो धन्य हो लिया । और भरी जबानी मे ही बूढ़ा हो लिया अब तो पथराई आॅखे भी कुछ न देखना चाहै क्योकि जो दिख रहा है वह किसी बुरे सपने से कम नही मगर कै करू मानव हुॅ इसलिये मनहूसियत भी नही पाल सकता सो म्हारे जैसै लोगो का जब तक समृद्ध जीवन है तो संघर्ष तो करना पढ़ेगा । और समृद्धि के इन मुजाहिदो से लड़ना होगा भैयै - लगता है भाया थारी मुफलिसी को तने दिल पर ले गया इसलिये तने आज तीसरी लहर की पूर्व संध्या पर इस तरह की तल्ख बात कर रहा ...