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Showing posts from November, 2021

कैश लैस की तरफ बढ़ा जन , मलाई काटता तंत्र ....? तीरंदाज

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समृद्धि के नाम कंगाली की दस्तक  व्ही. एस. भुल्ले  भैया - बधाई के पात्र है हमारे तांत्रिक अर्थशास्त्री , और समृद्धि के रथ पर सबार सम्राट क्या कहानी मेरे आका कि  मने तो सुनने से पहले ही धन्य हो लिया । म्हारी जन अकांक्षा क्या केश लेश के घोड़े पर सबार हुई मानो मलाई काटने बालो कि बाढ़ सी आ गई इसे ही कहते समृद्ध तंत्र अब वह लोक के बीच हो या फिर किसी भी तंत्र मे यू तो तंत्र के भी कई प्रकार होते है मगर म्हारे बालो के जो हाथ लगा वह तो धन्य कर देने बाला है अब वह कंगाली से धन धान्य कर दे या फिर धन से यह तो फूटा हमारा भाग्य है मगर सच बोल्यू तो भाया अपनो के ही बीच मने तो धन्य हो लिया । और भरी जबानी मे ही बूढ़ा हो लिया अब तो पथराई आॅखे भी कुछ न देखना चाहै क्योकि जो दिख रहा है वह किसी बुरे सपने से कम नही मगर कै करू मानव हुॅ इसलिये मनहूसियत भी नही पाल सकता सो म्हारे जैसै लोगो का जब तक समृद्ध जीवन है तो संघर्ष तो करना पढ़ेगा । और समृद्धि के इन मुजाहिदो से लड़ना होगा  भैयै - लगता है भाया थारी मुफलिसी को तने दिल पर ले गया इसलिये तने आज तीसरी लहर की पूर्व संध्या पर इस तरह की तल्ख बात कर रहा ...

कानून की धज्जिया उड़ाते पालनहार , सूचना देने से बचते है

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  शिवपुरी में सूचना प्राप्ति के लिये चक्कर लगाने साथ अपील और करना होता लम्बा इन्तजार  वीरेन्द्र शर्मा  1 दिसम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  सूचना न देने को लेकर जिस तरह से म. प्र. का शिवपुरी जिला खूखार होता जा रहा है वह इसी बात से ही स्पष्ट है कि सूचना मागने बालो को महिनो झुलाया ही नही जाता बल्कि महिनो चक्कर लगवा कभी कभी तो अपील मे जाने के बाद भी हरेसमेन्ट तक किया जाता है । जिसमे प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क ,पी. एच. ई . लोकनिमार्ण विभाग से लेकर कई ऐसे विभाग है जो जिन्होने सूचना न देने के नये नये कीर्तिमान स्थापित कर रखे । मन गणन्त फीस जमा करने की सूचना से लेकर डाक व्यवस्था की व्यवहारिक खामी का जमकर दुरूपयोग सूचना न देने को लेकर किया जाता है । जबकि हर विभाग मे सहायक सूचना अधिकारी है मगर फिर भी कार्यालीन समय मे सूचना अधिकारी के ही दर्शन हो पाते है न ही सहायक सूचना अधिकारी के बैचारे आबेदक भटक भटक कर या सूचना मांगना ही छोड़ जाते है या फिर लौटकर ही नही आते । जहां तक प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क का सबाल है तो यहां महाप्रबंक तो दौरे पर ही बने रहते है तो पी. एच. ई मे कई आवे...
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  कोरोना: नवम्बर दिसम्बर की संभावना से सावधानी का समय  सुशासन के बुद्धिकौशल , बैबसी से सबक लेने का वक्ज  असावधानी के चलते कही फिर न बिलखना पढ़े हमें  व्ही. एस. भुल्ले  30 नवम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  मृत्यु के साथ जीवन का जो संघर्ष हमने मई जून मे झेला है भोगा है वह आज भी लोगो की इस्मृति में है कैसै लोगो सड़क अस्पतालो की चैखटो एम्बूलेन्सो मे दम तोड़ा है भले ही आज सही आकड़े हमारी जानकारी से कोसो दूर हो कितने बच्चो ने अपने माता पिता बहिनो ने भाई तो बिलखते बिलखते माता पिता के आगे ही बैटे बैटियो ने इस दुनिया को छोड़ा है श्मसान कब्रिस्तानो मे क्या हालात रहै कौन नही जानता हमारे संसाधन सरकारे शासन कितना कुछ कर सके सभी न देखा अगर विपक्ष की माने तो श्मसान कब्रिस्तान के आकड़े लाखो मे है । अब जब कि सरकारो का बुद्धिकौशल सामथ्र्य सबाब पर है तब समुची दुनिया के देश खबर फैलते ही संकृमित देशो की उड़ाने बन्द कर चुके है तब हमारे यहां दिशा निर्देश ही जारी हुये अर्थात जब कोरोना भारत मे अस्तित्व मे ही नही था तब भी आवश्यक दिशा निर्देश सलाह मशविरा हुआ था परिणाम कोरोना विदेश से आया ...

स्मेक , पर सी. एम. का पुलिस को तबाही , बर्बादी का संदेश

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माफिया , मतांतरण , गौचर पर भी सुशासन को आदेश  वीरेन्द्र शर्मा  30 नवम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म. प्र.  आर्थिक तंगी से कराहती जनता की पहली प्राथमिकता भले ही फिलहाॅल आर्थिक समृद्धि हो जिसका ओर छोर फिलहाॅल उसे नजर नही आता कारण केन्द्र से प्राप्त धन की तंगी और कोरोना मे पानी की तरह पैसा खर्ज होने के चलते प्रदेश की अर्थव्यवस्था मे प्रवाह बनाने बाली वह राशि जो छोटे वर्ग के लिये रोजगार का बड़ा माध्ययम थी जिसके अघोषित रूप से केन्द्रीयकरण ने जहाॅ स्थानीय रोजगार व बाजार मे नगद प्रवाह जाम कर दिया जो विगत 3 बर्षो से किसी न किसी कारण से जारी है हालात यह है कि अब न तो लोगो के पास काम है और न ही धन जिससे उसके सामने जीवन निर्वहन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है उस पर से तीसरी लहर की सुगबुहाहट ने लोगो को बैहाल कर दिया है । जो छोटा मोटा व्यवसाय छोटे स्तर पर हो जाया करता था वहा पूूॅजी फंसाने बालो को 2-3 बर्षो से भुगतान नही हो रहै । तो वही दूसरी ओर गैग गिरोह बन्द मानसिकता के चलते सुनियोजित ढंग से करोड़ो अरबो के इतने बड़े बड़े प्रोजक्ट बनाये जा रहै है जो निर्धारित शासकीय दर से 25 से 30 प्रतिशत कम...

नैतिक प्रशिक्षण , परीक्षण , जबाबदेही के अभाव में दम तोड़ता लोक - तंत्र

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  विधान को दर किनार कर निदान के अस्त्र से निस्तनाबूत होते सरोकार  मजाक बने जीवन मूल्य अनाथ हुआ सेवाकल्याण  व्ही. एस. भुल्ले  27 नवम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  विधान विरूद्ध निदान के अचूक अस्त्र से सेवा कल्याण का जो सम्राज्य आज समक्ष है वह बड़ा ही डराने बाला है लोकतंत्र की आढ़ मे निस्तनाबूत होते जीवन और संस्थागत सरोकार जिस तरह आज ओधे मुॅह पढ़े है और जबाबदेही अन्धी हो मातमी माहौल मे बिलाप करती दिखती है वह लोक और तंत्र के लिये एक बड़ा मजाक है जिसमे अनाथ हुये सेवा कल्याण को भी नही सूझ रहा कि वह शेष जीवन को कैसै संतावना दे ढाढस बधाये जहां रूधन तो है मगर आॅसू किसी की भी आॅख में नही । दिल में दर्द तो है मगर सब कुछ होते हुये भी दवा नही आज जिस विधान पर विलाप हो रहा है उसकी आत्मा को बिदा किये तो अर्सा हो लिया मगर आज भी विधान पर बिलाप करने बालो के बीच कोई क्षोभ या शोक नही । विधान मे तो जनता द्वारा चुने गये प्रतिनिधि का सदन मे स्वतंत्र अस्तित्व है जिसका पालन आज भी निष्ठापूर्ण ढंग से होता है मगर क्या कभी किसी को यह देखने मे आया कि सदन मे लाया गया विषय और प्रस्ताव वैच...

साहसपूर्ण सत्य और निढाल हुये सियासी सिद्धान्त

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बात अब फैमली तक सीमित नही रही , बल्कि गैंग गिरोहबन्दी तक जा पहुॅची है , संकट मे लोकतंत्र का मूल  सृजन ही श्रेष्ठविद्या और समृद्ध जीवन का सिद्धान्त  व्ही. एस. भुल्ले  26 अक्टुबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  निश्चित ही आज वह पवित्र ग्रन्थ दिवस था जिसे हम संबिधान कहते जिसे मनाने लोकतंत्र का झंडा थाम उसे आगे ले जाने बाले सभी दलो को उपस्थित रहना था शायद आयोजन का भाव भी यही रहा हो जिसे देश की लगभग डेढ़ अरब जनता अंगीकार करती है मगर इस आयोजन मे सा दल बल सत्ता पक्ष तो दिखा मगर विपक्ष नजर नही आया अब इसके पीछे के कारण जो भी हो मगर यह एक समृद्ध लोकतंत्र और समृद्ध जीवन की आश लगाये बैठे उन 80 करोड़ सस्ते राशन के मोहताज लोगो के लिये शुभ संकेत नही जिनका आधार इनके पुरूषार्थ से जुड़ा है । निश्चित ही लोकतंत्र मे आस्था रख इसकी समृद्धि का सपना देखने बाले आज मायूस होेगे जो इन्है अपने गाड़े पसीने की कमाई से सीच खुद भूखा रख इनकी समृद्धि पर नाज कर इनके भ्रामण आचरण व्यवहार पर तालिया ठोकने में कभी पीछे नही रहते । आज देश के प्रधान ने सच कह ही दिया हो भले ही वह सियासी हो मगर वह एक सम्पूर्ण सच है अगर...

जीवन मे असंतोश , निर्णय अभाव , अर्कमण्यता तथा लोभ कभी संबृद्ध जीवन का मार्ग प्रस्त नही कर सकते

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सटीक निर्णय के प्रति समर्पण ही जीवन ही सिद्धता है  कर्म , न्याय से दरिद्र सत्ताये कभी सार्थक सिद्ध नही हुई  समृद्ध जीवन को कर्म तो सत्ताओ को संसाधनो से समृद्ध होना अहम , जीवन मे निष्ठा का अभाव खतरनाक  व्ही. एस. भुल्ले  24 नवम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  कहते है अगर जीवन मे त्याग परिश्रम न्याय , समर्पण का भाव भंग हो जाये तो वह ऐसे बांझ जीव के समान होता है जिसका सृजन मे अस्तित्व तो होता है मगर उसका योगदान कुछ भी नही , इतिहास गबाह कि कर्म न्याय से दरिद्र सत्ताये अपनी सिद्धता सिद्ध करने मे कई मर्तबा अक्षम असफल हुई है फिर उनके नाम कीर्ति जो भी रही हो क्योकि जीवन मे जीवन को कर्म तो सत्ताओ को संसाधनो से समृद्ध होना समृद्धि का प्रतीक माना गया है जिसमे अगर किसी जीवन मे निष्ठा का अभाव आ जाये तो वह सिर्फ सृजन ही नही जीवन के लिये भी घातक होता है क्योकि सही समय पर सटीक निर्णय की जीवन सिद्धता और उसकी समृद्धि मे बाध्यता रही है । बाते बहुत है मगर आज समृद्ध जीवन के लिये समय का तकाजा है कि मानव को सिर्फ आर्थिक दरिद्रता ही नही संस्कार संसाधनो की दरिद्रता से भी मुक्ति पानी है औ...

नोचतूप मंत्र के आगे डकराता मूलमंत्र .............? तीरंदाज

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  बैड़ागरग के कागार पर कल्याण  व्ही. एस. भुल्ले  भैया - मने थारी वैधानिक शान में कोई गुस्ताखी तो नही कर दी वरना म्हारी अभिव्यक्ति भी अनाथो की तरह डकराती नजर न आये मगर कै करू म्हारे शब्द कोष में तो पहले ही से कंगाली मुफलिसी छायी हुई है उस पर से हाथो हाथ एक नई खबर आयी है । काड़ू बड़बड़ाये जा रहा था और कल्याण के बैड़ागरग पर सबाल उठा रहा था अब म्हारे को तने ही बता नोचतूप तंत्र तने कही सुना देखा है कौन नही जानता जीवन का मूलमंत्र जो काड़ू मने नया गणित समझाने की कोसिश कर रिया था ।  भैयै - वावलो की बस्ती से और कै उम्मीद की जा सकती है । काड़ू तो काड़ू ठहरा थारी मती कै फिर ली है जो तनै काड़ू के सुर मे सुर मिला रिया है और अभिव्यति के नाम साक्षात अनुभूति करा रिया शै कै थारे को जरा सी भी लज्जा बाकी नही जो तने तंत्र के शुभ अवसर मातमी बाध्ययंत्र बजा रहा है  जैसै तैसै तो म्हारे पंच परमेश्वरो की नई सल्तनत खड़ी होने की राह खुली है और नाशपीटा अर्र बर्र बके जा रहा है कै थारे को जनता के लिये जनता द्वारा जनता का फाॅरमूला समझ मे नही आ रहा है मने तो बोल्यू तने काड़ू को छोड़ और दिन रात अपनी फील्ड ज...

तपस्या को लेकर कटे बबाल पर यक्ष सबाल

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अहंकार पर फिर सिद्ध रही अहिंसा  सत्य से प्रधानमंत्री का सीधा संवाद  व्ही. एस. भुल्ले  20 नवम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  श्रेष्ठतम संस्कार में फलीफूली सियासत कभी इतनी घटिया भी हो सकती है शायद ही जीवन मूल्यो को सियासत मे आस्था आधार मानने बालो ने कभी सपने में सोचा होगा न ही उन महामानवो कभी उम्मीद की होगी जो राजनीति से धर्म अर्थात मानव धर्म को अलग न रखने के पक्ष धर रहै और समुचा जीवन बड़ी त्याग तपस्या के साथ निर्वहन कर हमे सियासत की समृद्ध विरासत हमे सौप गये मगर दुर्भाग्य की हम उसे अक्षुण रखने मे उसे संरक्षित करने असफल हो गये । परिणाम कि आज कल सर्वोच्य पद से कही गई बात पर भी सियासत आज अविश्वसनीय दिखी और मीडिया जगत मे बबाल काटती दिखी जो न मानव जीवन न ही राष्ट्र् जन और नही समृद्ध सियासत के हित मे है । कारण जो जीवन मूल्य सियासत की आत्मा थे वह लगभग 30 साल का सफर तय कर आज उस मुकाम पर जा पहुॅचे जहाॅ से लौटना मुश्किल ही नही न मुमकिन सा लगता है मगर देश के सर्वोच्य प्रधान पद को शुसोभित करने बाले प्रधानमंत्री ने अचानक तीन कृषि कानूनो को बापस लेने की घोषणा क्या कि मानो सियासत मे...

सीधी भर्ती का फंसा पैंच पुलिस को पढ़ सकता है भारी

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 एक सेकड़ा से अधिक उप पुलिस अधीक्षको की दरकार  वीरेन्द्र शर्मा  16 नबम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  म.प्र. सामान्य सुरक्षा के साथ आजकल सायवर अपराधो की जिस तरह संख्या बढ़ रही है और समाज मे जिस तरह से अपराध सर उठा रहै ऐसे जरूरी है कि समय रहते संसाधनो के साथ मानव संसाधनो की पूर्ति भी होती रहै मगर कोरोना काल के चलते जिस तरह प्रक्रियाये प्रभावित हुई है उसने हर क्षैत्र को प्रभावित किया है उसमे से ही एक संभवतः पुलिस विभाग भी है जहां लगभग एक सेकड़ा से अधिक पुलिस अधीक्षको की कमी विभाग को खल रही है । जिसकी पूर्ति सीधी भर्ती से की जानी थी अगर सीधी भर्ती प्रक्रिया जल्द से जल्द पूर्ण कर भी ली जाये तो विभाग को फिर भी इतने पद भरने लगभग 3 या 4 बर्ष का लम्बा इन्तजार करना होगा जो कानून व्यवस्था की दृष्टि से विभाग पर भारी पढ़ सकता है बैहतर हो कि सरकार हस्तक्षेप कर इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान खोजे जिससे उपअधीक्षको की कमी को पूरा किया जा सके क्योकि जिस तरह से पुलिस के सामने अपराधो की चुनौती बढ़ रही है अगर ऐसे मे विभाग मानव संसाधन खड़े करने मे पिछड़ता है तो यह कानून व्यवस्था की दृ...

जन सेवको की सेवा ,प्रतिनिधियो की आस्था से थर्राया जनतंत्र

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ढसक मे डूबा सामथ्र्य पुरूषार्थ   16 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  म.प्र. - यहां आज बात कर रहे है हम आज ऐसे ऐतिहासिक जिले जिसका एक सुनहरा तो एक कलंकित इतिहास है चूकि सोच सकारात्मक रहै इस लिये बात सिर्फ और सिर्फ सकारात्मक ही होना चाहिए सो समुचा फोकस सेवा और जन आस्था पर रहै तो वह पठनीय भी रहेगा और मौजूद पीढ़ी के विचारिणीय भी कहते सत्ता ने किसको छोड़ा है जिसे अहंकार न हो बस एक मौका मिल भर जाये मौका मिलते ही सेवक शासक तो वह जन जिसके वोट पर सत्ता विभिन्न माध्ययमो से हासिल होती है वह जनता बन जाती है जिसके कल्याण का भार ढोते ढोते सेवको की कमर चैड़ी तो जनता की घिग्गी बन्द हो जाती है संपदा का शोषण , धनार्जन अलग विषय मगर जिस अन्दाज मे सेवको की लाटरी सेवा मे लग जाती है वह किसी से छिपी नही ऐसा कुछ विगत 30 बर्ष से इस समृद्ध जिले मे देखने मिल रहा है जिसे लोग म.प्र. मे शिवपुरी जिले के नाम से जानते है जिसमे 5 विधान सभा पौहरी , कोलारस , शिवपुरी , करेरा , पिछोर तो संसदीय क्षैत्र गुना ग्वालियर लगते है  । यो तो इस जिले कि ख्याती के कई आयाम रहै है जिसने समय वे समय इस जिले को देश की चर्चा ...

जीवन को चुनौती देता , छदम विकास

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विलाप के बीच , बिलखती मानवता  सत्ताओ के स्वार्थ में सफर करते सृजन सरोकार  व्ही. एस. भुल्ले  16 नबम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. अगर जीवन में डर , बैबसी समृद्ध खुशहाॅल जीवन की बाध्यता है , और सर्बकल्याण का भाव अपंग तो जीवन मे ऐसे भाव का त्याग कर देना ही उचित है । यू तो किसी विद्यवान ने लिखा था कि भय न्याय का पुत्र होता है और बैबसी निर्बलो की निशानी जिसके लिये गणित विज्ञान अर्थात अध्यात्म ज्ञान व्यवहार से अनभिज्ञ मानव जीवन दीक्षा योग्य न था ऐसे सेकड़ो उदाहरण जीवन इतिहास मे दर्ज है जिनका समय परिस्थिति अनुसार या बिषय अनुसार भाव और कर्तव्य रहा मगर इन सबके पीछे सृजन मे जीवन के वह मूल्य सिद्धान्त रहै जिनकी अपनी सिद्धता थी और वह जीवन मे समय समय पर विभिन्न परिपेक्ष्य मे सिद्ध भी हुये और उन्है जीवन मे सराया भी गया । मगर यथार्थ के ज्ञान विज्ञान को विसार जिस तरह से उधार के ज्ञान विज्ञान की होड़ इस जम्बू द्वीप भरत खण्ड पर क्या शुरू हुई कि अपना सब कुछ गबां देने बाद भी यह होड़ थमने का नाम नही ले रही । सत्ताये आयी गयी , समय वे समय बदलती रही आज भी क्रम जारी है फिर भाग छोटा रहा हो या...

जीवन में संख्याबल सुख ,समृद्धि , न्याय का आधार नही

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नैसर्गिक ज्ञान , विज्ञान , विधान ही जीवन संरक्षण में सक्षम  जब जब सत्ताये कर्तव्य विमुख हुई जीवन का बड़ा नुकसान हुआ है व्ही. एस. भुल्ले  14 नबम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  यू तो लोकतंत्र मे संख्या बल जीत हार का आधार रहा है मगर सख्या बल की गणना का आधार क्या समर्थन जुटाने क्या हो यह मानव जीवन द्वारा अंगीकार विधान पर निर्भर करता है । हर नागरिक समूह राष्ट्र् का अपना अपना विधान व संख्या बल सिद्ध करने का आधार है मगर जिस संख्या बल को हम अंगीकार करते है वह सीधे सीधे संख्या बल को ही स्वीकार करता है । मगर लोकतंत्र की आढ़ मे विधान विरूद्ध लोकतांत्रिक व्यवस्था से दूर हक न्याय हासिल का आधार संख्या बल के आधार पर सार्वजनिक रूप से सिद्ध दिखाई देता है उससे न तो जीवन मे सुख समृद्धि न्याय का आधार सिद्ध होता है न ही जीवन को संरक्षण प्राप्त होता है जब किसी भी राष्ट्र् समाज मे अंगीकार विधान को बिसार संख्या बल का आधार सिद्ध होता है तो उसके पीछे वह सत्ता ही जबाबदेह होती है जो जन बल के बीच स्वयं की सुरक्षा का आधार खोजती है परिणाम की उस सत्ता को तो सुरक्षा मिल जाती है जिसकी जबाबदेही आम जन...

शिवपुरी में शासन की मंशा विरूद्ध कार्यालीन आदेश

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सातो दिवस की कार्य व्यवस्था सूचनार्थ  नीरज जाटव  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  प्राप्त जानकारी के अनुसार हाॅल मे दिनांक 12 नबम्बर 21 को जिला आबकारी कार्यालय से जारी सातो दिन की कार्यव्यवस्था का आदेश चर्चा का बिषय बना हुआ है कारण जब म.प्र. शासन ही नही केन्द्र ने भी कार्य दिवसो की घोषणा कर रखी है ऐसे मे यह शासकीय आदेश के उददेश्य क्या है यह तो आबकारी विभाग के मुखिया ही जाने मगर सच यह है कि कार्य की दृष्टि से सातो दिन किस किस कार्य के लिये रहेगे यह आदेश अवश्य जारी हुआ जिसे लेकर मातहत बड़े ही पशोपेश मे है हालाकि जारी कर्ता अधिकारी से कारण जानने सम्पर्क किया गया मगर सम्पर्क नही मगर सच यह है कि अब सातो दिवस कार्य विभाजन अनुसार बगैर किसी अवकास ही शायद कर्मचारी अधिनस्त अधिकारियो को आगामी आदेश तक कार्य संपादित करना होगा । 

न्याय की दिशा में बढ़ता जनतंत्र , म.प्र. में भव्य उत्सव

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भगवान बिरसा मुण्डा जी की जयंती  13 नबम्बर 21 विलज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  भोपाल के जंमूरी मैदान में आयोजित भगवान बिरसा मुण्डा जी की जयंती के भव्य आयोजन को लेकर एक ओर जहां आमजन उत्साहित है तो सत्ता या सियासी दलो की सक्रीयता ने इस भव्य आयोजन मे चार चांद लगा दिये आयोजन की भव्यता इस बात से परिलच्छित होती है कि इस आयोजन मे प्रदेश भर से आने बाले लोग के बीच आकर देश के प्रधानमंत्री संबोधित करने बाले है । साथ ही वह अत्यआधुतिक रेल्बे स्टेशन का भी उदघाटन करने बाले है जिसका नामाकरण भी वीरांगना रानी कमलापति के नाम होने बाला है देर से ही सही आम जन मानस के बीच सराहनीय शुरूआत तो हुई जिसमे सियासी दल भी पीछे रहने तैयार नही एक ओर जहां सत्ता का आयोजन भोपाल मे हो रहा है तो तो वही दल काॅग्रेस भी पीछे रहने तैयार नही अच्छी बात है कि भव्य दिव्य पुरूर्षो आत्माओ से उनकी कीर्ति से मौजूद आने बाली पीढ़ी को परिचित कराने का दौर शुरू हुआ है निश्चित ही यह मौजूद या आने बाली पीढ़ी के लिये दूर की कोणी साबित होगा । 

राजकोष के कबाड़े पर राजपुरूषो की चुप्पी , पुरूषकृत होते जबाबदेह

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अतिबर्षा के नाम अरबो का नाश  प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क के मूल को लेकर उठे सबाल  13 नबम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  किसी भी प्राकृतिक आपदा के अपने दुस्परिणाम , परिणाम आना स्वभाविक है मगर जब आपदाये मूल पर ही सबाल खड़े करना शुरू कर दे तो बिषय विचारणीय स्वतः हो जाता है मगर राजकोष के कबाड़े पर जिस तरह से राज सत्ता और राजपुरूषो ने चुप्पी ओढ़ रखी है वह दर्दनाक भी है और शर्म नाक भी ये सही है कि अतिबर्षा का दंश समुचे ग्वालियर ने भोगा है वह किसी से छिपा नही मगर सबाल विकास की गुणवत्ता को लेकर आज जनमानस के सामने है वह बड़े ही डराने बाले है । मगर हद तो तब होती है जब राजसत्ता जबाबदेह लोग दण्ड के नाम पुरूषकृत होने की कतार मे हो क्योकि आज यक्ष सबाल सभी विधि बिशेषज्ञो के आगे यही है कि अगर जरा जरा सी आपदाओ में वह ढह जाये अपना अस्तित्व ही खो दे जिन्है मूर्त रूप देने मे करोड़ो अरबो का जनधन राजकोष से खर्च किया गया और विकास का वह तिलिस्म कागज के पत्तो की तरह 5 दिन की बर्षा मे ढह गया जिसे आज हम अतिबर्षा के नाम जानते है । अगर विकास का सच यह है तो राजसत्ता पर सबाल उठना तय है उसके सामथ्र्य पर...

भरोसा तोड़ते भाग्यविद्याता , जन जीवन हुआ निराश

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ज्ञान के अभाव में पीढ़ियो से द्रोह दरिद्रता के संकेत  विनाश पर उतारू जीवन की समृद्धि विकास  सत्ता के मोह में डूबा पुरूषार्थ  व्ही. एस. भुल्ले  2 नबम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  या तो विधान बनाते वक्त कुछ कमी रही गई या फिर विधान अंगीकार करते वक्त वह निष्ठा जीवन में नही रही परिणाम कि मौजूद जीवन उस विधान को अक्षरशः स्वीकारने तैयार है न ही उस विधान को बनाने बाले लोगो को वह सम्मान देने तैयार है जिन्होने इतिहास को साक्षी मान बर्तमान की मौजूदगी मेे जीवन के भबिष्य को खुशहाॅली समृद्धि के लिये गढ़ने का काम किया निश्चित ही सोच ज्ञान के प्रकाश मे एक ही रही होगी कि उनका जीवन तो जैसा कटना था कट गया मगर आने बाली पीढ़ी इस दरिद्रता से दो चार न हो अब इस दरिद्रता के कई क्षैत्र हो सकते जैसै धन , ज्ञान , सामर्थ , पुरूषार्थ , संस्कारो की दरिद्रता सेवा कल्याण के भाव की दरिद्रता ये तो वह वृहत स्वरूप है जीवन की आवश्यकताओ को जिनके विश्लेषणो इतिहास भरा पढ़ा है मगर एक बढ़ी उम्मीद हर युग हर समय हर जीवन को उस जीवन से अवश्य रही जिनकी आस्था प्राकृतिक सिद्धांत अनुरूप स्थापित विधान मे रही भावना स...

सत्ता की दीवाली , ये कैसी कंगाली .......शुभकामनाये ? तीरंदाज

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व्ही. एस. भुल्ले  2 नबम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  भैया - दीवाले के बीच दीवाली सत्ता चकाचक सेवक चकाचक बाजार हुआ बैहाॅल अब मने कै करू म्हारे को तो प्रभु सहारे ही प्रभु आगमन का इन्तजाम करना होगा एक ओर महगांई तो दूसरी ओर कंगाली मगर मने तो शुभकामनाये देना चाहुॅ म्हारे प्रभु को जिनकी कृपा से दीवाली पर दिया जला खुशियाॅ मनाने का अवसर तो मिला खीले गुजिया सिकलपारे का दौर तो शुरू हुआ मगर इस दीवाली मे तो प्रभु से सिर्फ इतना कहना चाहुॅ कि है प्रभु राम वह तो आप ही कि आसिम कृपा है वरना आपके भक्तो ने तो हम दीन हीनो को इस पावन पर्व पर कही का नही छोड़ा आपकी मर्यादा आपका त्याग जन जन के लिये समर्पण तो आदि अनन्त है आप जो हमारी अगाध आस्था आप पर जो जन जीवन का विश्वास है वह भी अन्नत है मगर खुशहाॅल जीवन के द्रौहियो को आप दण्ड देगे ऐसा हमारा विश्वास है जो आज सेवा कल्याण के नाम आपकी कीर्ति को आपके नाम की आढ़ मे कलंकित करने मे लगे है । ये प्रभु आपने तो एक जन मात्र की शंका कुशंका को दूर करने कितना बड़ा योगदान राजा ही सम्राट के रूप मे किया जिसका आज तक कोई दूसरा उदाहरण कोई भी मानव जीवन प्रस्तुत नह...