आराध्य से आस्थाओ की कामना .................तीरंदाज ?
प्रभु त्रिलोकीनाथ की शरण में सियासत व्ही.एस. भुल्ले 23 अप्रेल 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा भैया - मने तो आज बगैर प्रसादी के ही मदमस्त हो रहा हुॅ और किसको क्या बोल्यू मारे तो मगज में ही कुछ सैट नही हो रहा है । आखिर म्हारे महान जन तंत्र , लोकतंत्र , म्हारी महान सभ्यता , संस्कृति , संस्कार , सभा , परिषद , समितियो से समृद्धी बाले महान समृद्ध भूभाग पर आखिर यह हो क्या रहा है ? आस्था आराधना ऐसी कि देखने सुनने बालो का भी गला सूख रहा है । एक ओर राजा है तो दूसरी ओर महाराजा और उनके कददावर सिपहसालार जो अपनी अपनी कामनाओ को लेकर एक दूसरे की बखिया उधेड़ने एक दूसरे पर पिल पढ़े है । मगर म्हारे को लागे कि आस्थाये कही गलत दरवाजा तो नही खटखटा रही है । क्योकि सर्बकल्याण मे समस्त सृजन कल्याण मे , प्रभु तो ध्यान में है । अगर बैसमय प्रभु का ध्यान भंग हुआ और खुदा न खास्ता प्रभु का ध्यान भंग हुआ तो कही ऐसा न हो कि प्रभु के दो नैत्र खुलने के साथ उनका कही तीसरा नैत्र न खुल जाये । इतिहास महान ग्रंथ गबाह है । कही ऐसा न हो कि आराध्य कि अराधना में विघ्न पढ़ जाये और अर्थ का अनर्थ न हो जाये । ये अ...