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Showing posts from April, 2023

आराध्य से आस्थाओ की कामना .................तीरंदाज ?

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  प्रभु त्रिलोकीनाथ की शरण में सियासत  व्ही.एस. भुल्ले  23 अप्रेल 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  भैया - मने तो आज बगैर प्रसादी के ही मदमस्त हो रहा हुॅ और किसको क्या बोल्यू मारे तो मगज में ही कुछ सैट नही हो रहा है । आखिर म्हारे महान जन तंत्र , लोकतंत्र , म्हारी महान सभ्यता , संस्कृति , संस्कार , सभा , परिषद , समितियो से समृद्धी बाले महान समृद्ध भूभाग पर आखिर यह हो क्या रहा है ? आस्था आराधना ऐसी कि देखने सुनने बालो का भी गला सूख रहा है । एक ओर राजा है तो दूसरी ओर महाराजा और उनके कददावर सिपहसालार जो अपनी अपनी कामनाओ को लेकर एक दूसरे की बखिया उधेड़ने एक दूसरे पर पिल पढ़े है । मगर म्हारे को लागे कि आस्थाये कही गलत दरवाजा तो नही खटखटा रही है । क्योकि सर्बकल्याण मे समस्त सृजन कल्याण मे , प्रभु तो ध्यान में है । अगर बैसमय प्रभु का ध्यान भंग हुआ और खुदा न खास्ता प्रभु का ध्यान भंग हुआ तो कही ऐसा न हो कि प्रभु के दो नैत्र खुलने के साथ उनका कही तीसरा नैत्र न खुल जाये । इतिहास महान ग्रंथ गबाह है । कही ऐसा न हो कि आराध्य कि अराधना में विघ्न पढ़ जाये और अर्थ का अनर्थ न हो जाये । ये अ...
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  निर्दयी मानवता से दहला समृद्ध समाज  बांझ नैतिकता से , तार तार होते जीवन सरोकार  समृद्ध खुशहाॅल जीवन का मूल , सिद्धांत एक है भले ही समझ अलग अलग , समझ के अभाव में , बैआधार होता , जीवन आधार  अहंम अहंकार अनादिकाॅल से अनिष्ट का द्योतक रहै है    व्ही.एस. भुल्ले  17 अप्रेल 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  काश स्वकल्याण से दूर , समृद्ध समाज यह समझ पाये कि सत्य क्या है जीवन का अर्थ क्या है मानव का धर्म कर्म क्या है और मानवता के मायने क्या है ? तो यह उस समृद्ध समाज के लिये सबसे बड़ी उपलब्धि होगी जिसके लिये किसी भी भूभाग पर जीवन को समृद्ध समाज के रूप में जाना जाता है । जिसकी पहचान बैरहम त्याग तपस्या और अनगिनत कुर्बानियो बैखोफ पुरूषार्थ कर , जीवन मे स्थापित कि और जो प्रमाणिक भी है । मगर दुर्भाग्य आज उसी पुरूषार्थ के उत्तराधिकारी उस सत्य और समता भाव से अनभिज्ञ हो , ऐसा आचरण व्यवहार शिक्षा , संस्कृति , संस्कार के रूप में स्थापित करने पर तुले है जिससे मौजूद ही नही आने बाली पीढ़िया तक आने बाले समय में स्वयं पर गर्व करने के बजाये स्वयं को शर्मसार मेहसूस कर स्...

आत्म सम्मान से बांझ ,समृद्ध सृजन की दुर्दशा .........तीरंदाज ?

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श्रेष्ठ जन, सभा , परिषदो की निष्ठा पर बड़ा सबाल  व्ही.एस.भुल्ले  14 अप्रेल 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  भैया - अब मने सिर्फ जमीदोस ही नही सुपुर्दे राख , खाक होना चाहुॅ । मने न लागे अब कोई इन्साफ होने बाला है । मने तो अब समझ नही आ रहा कि आखिर मने तो करू तो क्या करू ! अगर ऐसा ही नैसर्गिक समृद्ध जीवन में चलता रहा तो कैसा मानव मानवता , व्यक्ति , परिवार समाज , राष्ट्र् , विश्व का निर्माण होगा जिसका आधार सिर्फ और सिर्फ समृद्धि खुशहाॅली के नाम बांझ होने के अलाबा और कुछ नही होगा । क्या समृद्ध जीवन के मायने सिर्फ शरीर , भोजन , निद्रा , मैथुन , और निस्पादन तक सीमित हो जायेगा । मने तो जीवन का बर्तमान , भूत , भबिष्य को देख सिर्फ और सिर्फ राख होना चाहै ।  भैयै - बाबलै आखिर तने इतना हताश निराश क्यो हो लिया कै थारे को मालूत कोणी हर रात के बाद दिन भी होता है । यही समुचे जीवन का सत्य और इसकी प्रमाणिकता जीवन का आधार फिर तने क्यो बाबला हुआ जा रहा है ?  भैया - दर्द म्हारे को म्हारा नही दर्द तो म्हारे को उस आस्था इन्सानियत का है जिसके लिये हजारो करोड़ो कुर्बानिया त्याग तपस्या...

सिंगल विंडो सेवा कल्याण योजना ..............तीरंदाज ?

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एक मुश्त कल्याण परियोजना  व्ही.एस. भुल्ले  12 अप्रेल 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  भैया - मने तो लागे मने एक मुश्त कल्याण परियोजना की घोषणा कर डालू , सिंगल विंडोे सेवा कल्याण योजना को हाथो हाथ लोंच कर डालू जिससे किसी का कल्याण हो या न हो मगर म्हारा और म्हारे बालो का कल्याण तो मने सुनिश्चित लागे । जिस सियासत में वैचारिक आधार टूट रहै हो जीवन मूल सिद्धांत मातम मनाने बैबस मजबूर हो रहै हो ऐसे में गर मने एक मुश्त कल्याण योजना को लांच कर डालू तो म्हारे तो म्हारे सत्ता को लालाहित विघन संतोषि भी बगैर हाथ हिलाये  ठिये ठिकाने लग जायेगे और मुई सत्ता भी म्हारे बालो के आगे पैढ़ भरती नजर आयेगी । मने तो लागे 20- 25 का भाव लगा डालू और हाथो हाथ विखरी पढ़ी सत्ता पर कब्जा जमा डालू । इतने पर तो म्हारे को भी भाव मिल जायेगा । मने न लागे इतना कल्याण होने पर सत्ता सिंहाघन और कोई हथिया पायेगा ।  भैयै - मुये चुप कर गर सुन लिया किसी विघन संतोषी ने तो थारी तो थारी म्हारी काठी भी अतिंम संस्कार को तरस जायेगी और दफन कफन होने से पूर्व ही थारी म्हारी राख की एन आई टी लग जायेगी ।  भैया ...
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  राजकोष की लूट पर सिपहसालारो में खिची तलबार ...............तीरंदाज ?  राजकोष को सबसे बड़ा खतरा राजपुरूषो से  व्ही.एस. भुल्ले  10 अप्रेल 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  भैया - म्हारी छाती तो फटने को है । सुना है अब तो अपना ही अपने को लूटने में लगा है । राजकोष , राजपुरूष तो दूर की कोणी अब हर कौर पर हेराम हो रहा है । कै मने सेकड़ो बर्ष पुराने चाड़क्य काल को झूठा मान लू और हाथो हाथ राजपुरूषो के बीच अपनी सैटिंग जमा लू , मगर कै करू किस पर विश्वास करू हर एक पुरूषार्थी एक दूसरे की खाल उधैड़ ऐसी धोकनी बनाना चाहता है जिससे सख्त से सख्त लोहा भी तार , वायर बन जाये और जहां जैसी जरूरत हो वहां वह उन अपनो के काम आये जो मुखिया बन स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध करने में लगे है , इतना ही नही स्वयं को युग पुरूष कहला स्वयं का जीवन सिद्ध करने शेष अन्य लोगो की तरह असफल कोसिस इस जीवन में कर रहै है । इतिहास गबाह है आज इस तरह के लोगो का न तो कोई वंशज है न ही नाम लेवा पानी देने बाला है । भाया में बर्तमान नही भूत की बात कर रहा हुॅ और बन्द पढ़े इतिहास के वह पन्ने पलट रहा हुॅ जिसमें लिखी हर अहम बा...
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 सत्ता का आधार विश्वास , विश्वास का आधार निष्ठा  स्वार्थ के लिये सत्ता का उपयोग , विरोध कोई नई बात नही  सृजन में सर्बकल्याण ही समृद्ध खुशहाॅल जीवन का मूल आधार  अवसर की निष्ठा ही सच्चा मानव धर्म  व्ही. एस. भुल्ले  9 अप्रेल 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  कहते है किसी भी जीवन में निष्ठा और जीवन को मिला अवसर जीवन की श्रेष्ठता सिद्ध करने काॅफी होता है । फिर वह जीवन समुचे भूभाग पर मौजूद कोइ्र्र भी जीवन हो नभ , जल से लेकर थल पर मौजूद करोड़ो करोड़ जीवन इस बात के साक्षी है कि उनकी सृजन में नैसर्गिक निष्ठा का रूप जो भी हो मगर मानव जीवन को छोड़ शेष जीवन की निष्ठा और उनके कर्तव्य निर्वहन में कोई नैसर्गिक बदलाव नही । सिर्फ एक मानव जीवन ही ऐसा है जो इस सजृन में अपना ऐ विवेकनी पूर्ण अस्तित्व रखता है । जो अपने विवेक विवेकनी के बल स्वयं के नैसर्गिक स्वभाव के अनुकूल या प्रतिकूल आचरण व्यवहार करता रहा है । जिसने कभी सत्ता का अगुआ वन शेष जीवनो के बीच अपने सर्बकल्याण के नैसर्गिक स्वभाव बस खुद को श्रेष्ठ  सिद्ध करने में स्वयं को सिद्ध किया तो कई अवसरो पर वह असफल अक्...
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  आत्मसात सत्ता और टूटता विश्वास  अंगीकार सत्ताओ पर बड़ा सबाल  स्थापित जीवन , सृजन मूल्य से घात खतरनाक  श्रेष्टजन , संस्थाओ , पर टिका समृद्ध खुशहाॅल जीवन का भार  सृजन , मानव धर्म रक्षा की दरकार  व्ही. पी. भुल्ले  8 अप्रेल 2023 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  कहते है श्रेष्ठजनो का पुरूषार्थ सृजन , सर्बकल्याण में आदि अनादिकाल से सार्थक सफल और श्रेयकर रहा है । जिसके पीछे सत्ताओ पर अगाध विश्वास और उन सत्ताओ का सर्बकल्याण में वह पुरूषार्थ जिससे खुशहाॅल समृद्ध , सर्बकल्याणकारी जीवन का मार्ग प्रस्त होता रहा है । और उन जीवन मूल्य स्थापित जीवन सृजन सिद्धान्तो की रक्षा संरक्षण का कार्य निर्विघन ढंग से होता रहा फिर कीमत जो भी रही हो और समुचे जीव जगत कि इतनी लंबी सुखद यात्रा उसी विश्वास का परिणाम है जिसे जीवन आत्मसात कर आज तक समृद्ध खुशहाॅल जीवन के रूप में देखता भोगता आ रहा है मगर अब जबकि अंगीकार सत्ताओ से जीवन का विश्वास टूट रहा है तो ऐसे में समीक्षा उस महान सभ्यता संस्कृति संस्कार को अछुण रखने आवश्यक है जिसमें हर जीवन कि अगाध आस्था अनादि काल से रही है । जिस...