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Showing posts from October, 2021

जागिरो में बटा लोक , जमीर बैचता तंत्र ...........? तीरंदाज

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व्ही. एस. भुल्ले  25 अक्टुबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  भैया - चुनावी वैला पर तनै कै अर्र बर्र बोल रिया शै कै थारे को मालूम कोणी पूर्ण चुनाव से पूर्व उपचुनाव चल रिया शै जिससे म्हारे महान लोकतंत्र का कोरम पूरा हो सके और म्हारा अर्धतंत्र बैखौफ जागिरो मे बटे लोक की सेवा कल्याण पूरे मनो भाव से कर सके और थारे जैसै चिन्दी पन्ने चैका बालो का मुॅह बन्द कर सके । रहा सबाल जागिर जमीर बैचने का सो भाया लोकतंत्र मे गाहे बगाहे खरीदने बैचने का इतिहास है अगर कोई नया इतिहास लिखा हो रहा है म्हारे माननीय द्वारा तो थारी छाती मे दर्द कैसा ? भैयै - दर्द ही नही छाती फटे थारे जैसै बिघन संतोषियो की जो हर सेवा कल्याण पर सबाल उठाना अपना धर्म समझते है और कर्म के नाम सिर्फ और सिर्फ बौद्धिक अययासी या फिर कलदारो के आगे चापलूसी करते है जमीर द्रोही बन अपनी ही कौम को बदनाम करते है ।  भैया - सच बोल्या जमीर तो न जाने कब का द्रोह के चलते दम तोड़ चुका है । सेवा कल्याण मे के सर्राटे मे अब तो सिर्फ गरीब खड़ा है जिसके दर अब तो अमृत बरस रहा है । गांब गलियो मे सर्राटे भरता सेवा कल्याण भय , भूख , भ्रष्टाचार से मुक्त...

अस्तित्व से संघर्ष करता , सेवा कल्याण , आस्थाये हुई बैलगाम

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सतत सत्ता की जंग में दम तोड़ते सरोकार  व्ही.एस. भुल्ले  23 अक्टुबर 2021 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  एक अरब का आंकड़ा सुन सब्र भी होता है और स्वस्थ जीवन को ढाढस भी बंधता है जिसके लिये वह सभी कर्मयोगी धन्यबाद के पात्र है जिनके पुरूषार्थ से देश के करोड़ो लोगो का जीवन कोरोना की काली छाया से मुक्त हुआ है निश्चित ही यह अकल्पनीय आकड़ा है मगर यह सत्य उस सामर्थ के पुरूषार्थ का जिसने यह अकल्पनीय कार्य कर दिखाया क्योकि शायद ही ऐसा कोई शहर गांब रहा हो जहां इस कोरोना की काली छाया न पड़ी हो बहुत से ऐसे लोग कोरोना काल मे उतने सौभाग्य शाली नही रहै और उन्है अपना बहुमूल्य जीवन गबांना पढ़ा मगर आज सन्तोष है कि एक बढ़ी आबादी को कोरोना से बचाने मेें हम सफल रहै मगर अभी भी ऐतिहात की जरूरत तो फिर भी है और उन संसाधनो को दुरूस्त करने की जिनकी कमी कोरोना कहर के दौरान देखी गई । बहर हाॅल जो भी हो मगर आज सबसे यक्ष सबाल यह है कि जिस तरह से सतत सत्ता की जंग मे स्थापित सरोकार दम तोड़ रहै है और जिस तरह से असतित्व का संघर्ष सेवा कल्याण से चल रहा है उसके चलते आज आस्थाये भी बैलगाम नजर आती है अब ऐसा क्यो है यह तो समय ही...

खुद को दोहराता सियासी इतिहास , अवसर गबांता कांरबा

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जीवन सिद्धान्त के विरूद्ध लड़खड़ाती सिद्ध आस्था  अहंकार से घिरी सियायसत सामर्थ और पुरूषार्थ  अशुभ असफलता से भयभीत आस्था  व्ही. एस. भुल्ले  10 अक्टुबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  यू तो अनादिकाल से ही असुरी शक्तियो से खुशहाॅल समृद्ध जीवन को संरक्षण की दरकार रही है और समय ने हर सामर्थ पुरूषार्थ को समृद्ध जीवन के संरक्षण उसकी रक्षा मे एक अवसर अवश्य दिया है जिसके गबाह ग्रन्थ इतिहास है क्योकि समुची दुनिया को संचालित करता वह परमपिता परमात्मा है जिसने जीवन मे सन्तुलन का पालन करने अपनी सबसे सुन्दर कृति मानव को सक्षम बनाया जिससे वह समस्त जीव जगत जीवन को संरक्षण दे उनका जीवन समृद्ध खुशहाॅल बनाये और मानव को समृद्ध खुशहाॅल रखने पैड़ पौधे जीव जन्तुओ उसके संरक्षण का भार सौपा जो उसके कर्तव्य निर्वहन उसे समय समय पर ज्ञान और उसका मार्ग प्रस्त करेगा जो स्वतः ही सन्तुलन के सिद्धान्त और मानव धर्म रक्षा इन्सानियत की सम्पूर्ण पाठशाला है क्योकि जब मानव भ्रमित या अहंकारी हो तो उसे इसका भान रहै कि मानव जीवन के रूप मे उसका धर्म कर्म क्या है । आज जिस रावण को बुराई के प्रतीक के रूप हर बर्ष दह...

तार तार नैतिकता में बैबस संस्थाये , बिलखते सरोकार

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बैलगाम सियासी संघर्ष में जीवन हुआ निढाल  सबैधानिक जबाबदेहियो पर गंभीर सबाल  वीरेन्द्र शर्मा  8 अक्टुबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  यू तो सत्ता का सामर्थ अनादिकाल से स्वभाव अनुरूप आम जीव जगत भोगता सराहता आया है जो इतिहास मे आज दर्ज है और श्रेष्ठ परिषद सभाओ मे जन कल्याण की खातिर समय बैसमय उनका उल्लेख भी आदर अनादर के बतौर किया जाता है कहते है इतिहास होता ही उस आभास के लिये है जिससे आम जीवन मौजूद जीवन या जीवन के भबिष्य को बैहतर बनाने उससे सीख ले एक ऐसे वातावरण का निर्माण कर सके जिससे ख्याति या सिद्धता आम जन जीवन मे सराही जा सके और मानव जीवन की उपायदेयता सिद्ध की जा सके । मगर आज कल छोटे से छोटे या बड़े बड़े से ऐसे घटनाक्रम जो सृजन ही नही आम मानव जीवन के कलंक कहै जाते है उन पर कुतर्क पूर्ण व्यान नैतिकता को तार तार करने बाले सबाल आम जीवन ही नही जीवन सरोकारो को झझकोरने काॅफी है । मौजूद सियासत मे हद तो तब हो जाती है जब स्वयं को श्रेष्ठ घोषित करने जीवन को कलंकित करने बालो के पक्ष मे ऐसी ऐसी दलील और उदाहरण प्रस्तुत किये जाते है कि सिर्फ मानवता ही नही नैतिकता भी शर्मा जाये और सार...

सार्बजनिक जीवन में संत्तव, सामर्थ , पुरूषार्थ से सिद्ध परिपूर्ण प्रमाणिक परिणाम किसी श्रेय या पहचान के मोहताज नही होते

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बशर्ते परिणाम सृजन के सारथी और सामर्थ सिद्ध हो  जीवन में कृतज्ञता से शिकायत , सरोकार हो सकते है , मगर वह कभी व्यर्थ नही हो सकते , जो जीवन का आधार भी है   व्ही. एस. भुल्ले  7 अक्टुबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  मानव जीवन मे कोसने सराहने का जो संघर्ष कृतज्ञता के नाम सृजन मे आज कल चल रहा है उसको लेकर जीवन मे शिकायत सरोकार हो सकते है मगर कहते कृतज्ञता कभी व्यर्थ नही हो सकती क्योकि मूलतः वह जीवन का आधार है और सार्बजनिक जीवन में संत्तव सामर्थ पुरूषार्थ से परिपूर्ण प्रमाणिक परिणाम किसी श्रेय या पहचान के मोहताज नही होते बशर्ते परिणाम सृजन के सारथी और सामर्थ सिद्ध हो मगर स्वस्वार्थ में डूबे उन जीवनो का क्या ? जो स्वकल्याण को ही सर्बकल्याण मान जीवन पर्यन्त सामर्थ की सार्थकता और पुरूषार्थ पर सबाल खड़े कर स्वयं को सिद्ध समझते रहते है अफसोस कि ऐसे लोगो को जीवन पर्यन्त इस बात का एहसास ही नही हो पाता की अन्त समय जो जीवन कष्ट मे है सब कुछ होने बाद उसके पीछे के परिणाम क्या है ? बहरहाॅल सृजन मे ऐसे कई परिणाम प्रमाण जीवन मे रहै है और है मगर जीवन आज भी यह स्वीकारने तैयार नही सार्थक...

सजृन मे मानव धर्म की रक्षा , जीवन को समृद्ध खुशहाॅल बनाने मूल्य सिद्धान्तो की श्रेष्ठता सभी की जबाबदेही

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  सिर्फ सत्ता , सियासत , दल संस्थाये ही सक्षम नही बल्कि श्रेष्टजनो का योगदान भी अहम  व्ही. एस. भुल्ले  6 अक्टुबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  राष्ट्र् तो समृद्ध खुशहाॅल तब होगा , जब आमजीवन समृद्ध खुशहाॅल होगा और यह तब होगा जब निष्ठा पूर्ण कर्तव्यनिर्वहन  सृजन सिद्धान्त अनुरूप होगा मगर इसे वही श्रेष्ठ सज्जन पुरूष कर सकते जिनकी आस्था मानवधर्म रक्षा और जीवन मूल्य सिद्धान्तो मे होगी जिनकी पूर्ण आस्था सर्बकल्याण में हो क्योकि यह कार्य किसी अकेले सत्ता सियासत दल संस्थाओ के बस की बात नही जब तक जन के जन के बीच यह भाव नही आ जाता कि सृजन अनुसार मानव जीवन के क्या मायने है ओर मानव जीवन के रूप में उसके क्या कर्तव्य है तब यह संघर्ष समृद्ध खुशहाॅल जीवन के लिये अनवरत रहने बाला है 21 बी सदी मे जिस पटरी पर आज मानव जीवन दौड़ रहा हो सकता उसकी स्वकल्याण कारी  प्राप्त शिक्षा के अनुरूप समृद्ध खुशहाॅल उसकी समझ अनुसार सार्थक नजर आये मगर इससे वह जीवन कभी सफल सिद्ध नही रहने बाला सच तो यह है कि भौतिक बिलासलता के आखंड मे डूबने आतुर आज का जीवन शायद किसी भी सूरत मे यह समझने तैयार नही कि स...

अपार संम्भावनाओ की गढ़ है सिंधिया स्टेट की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिवपुरी

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  पर्यटन ,कला ,खनिज ,फूड , फिल्मसिटी , ज्ञान विज्ञान ऐतिहासिक विद्या प्राकृतिक संपदाओ से पटा है क्षैत्र  वीरेन्द्र शर्मा  4 अक्टुबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  हालिया खबर यह है कि एक मर्तवा फिर से सिंधिया स्टेट की ग्रीष्मकालीन राजधानी रही शिवपुरी को लेकर सारे देश में चर्चा सरगर्म है कारण ंिसधिया परिवार के बर्तमान मुखिया एक मर्तवा फिर राजनीति के केन्द्र मे है और म.प्र. के लोगो कि महात्कांक्षाये म.प्र. मे बड़ती हवाई सेवाओ को लेकर कुछ ज्यादा ही प्रबल है । कारण केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य की दरियादिली की उन्होने मंत्रालय संम्हालते ही म.प्र. के कई शहरो से हवाई सेवाओ की झड़ी लगा दी जिससे उत्साहित लोगो अब उन क्षैत्रो मे भी हवाई सेवाओ के विस्तार की चर्चा करने लगे है जो विकास के क्षैत्र मे नई सम्भावनाओ को फलीभूत करने मे सक्षम समर्थ है । ये अलग बात है कि एक समाचार मे पत्र से चर्चा मे उन्होने भी जन अकाक्षाओ की बात उन तक पहुॅचने की स्वीकार की है । मगर जो संभावना शिवपुरी को लेकर विकास के पटल पर फलीभूत हो सकती है वह सामथ्र्य वह प्राकृतिक संमृद्धि शायद अन्य जगह देखने जो ग्...

संघर्ष के रास्ते सत्ताउन्मुखी सियासत ,सेवाकल्याण हुआ हैरान

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  सेवा को विसार सियासी संग्राम डूबी सियासत  निर्दोष मौतो को लेकर उ.प्र. में मचा सियासी कोहराम  राजधर्म की खातिर सियासत पर सरकार हुई सख्त 5 अक्टुबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  निर्दोष मौत कही पर भी हो कारण जो भी हो मगर उन्हे उचित नही कहा जा सकता अकारण ही जीवन का अन्त बैसै भी सृजन मे जघन्य अपराध माना गया है । और वह मानव धर्म के खिलाफ भी कहा गया है अब जब की ऐसी ही घटना उ.प्र. के लखीमपुर खीरी मे हुई और खबरो के अनुसार 8 निर्दोष लोगो की जाने गयी है । जिससे संभावित खतरे को भाप और जघन्य मौतो पर राजधर्म की खातिर सरकार ने जो ऐतिहाती कदम उठाये है वह भले ही सराहनीय कहै जा सकते मगर उन 8 लोगो की जान बापस नही आ सकती यह सत्य है मगर दुर्भाग्य कुछ दशको से जिस रास्ते देश मे सियासत चल पढी है उसके परिणाम पूर्व संभावित है मगर सियासत करने बालो लोगो को इससे छोटा रास्ता शायद अब कोई नजर नही आता जो लोकतंत्र के लिये आज सबसे बड़ा खतरा बनता जा रहा है । क्योकि न तो आज सत्ताधारी या विपक्ष के दल यह समझना चाहते न ही कुछ लोगो को यह समझाना चाहते है कि जिन लोगो के लिये जिनके द्वारा चुनी जाने बाली सरकार ...

सजृन में आग्रह , अहिंसा का तिरस्कार ही अहंकार है

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सर्बकल्याण मे श्रेष्ठता श्रेष्ठ , आचरण ,संस्कार ,व्यवहार की आग्रही होती है , फिर वह सत्ता हो या फिर सेवा  व्ही. एस. भुल्ले  3 अक्टुबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  हजारो बर्ष की त्याग तपस्या परमपिता परमात्मा के साक्षात या श्रवण युक्त सृजन में जीवन के मूल संदेश , सृष्टि मे मौजूद ज्ञान विज्ञान साक्षात गुरूकुल विश्वविद्यालयो के बाबजूद अज्ञानता या उस विद्या से असंवाद की स्थति मे जीवन के श्रेष्ठतम मूल सिद्धान्तो से संघर्ष जीवन मे कोई नई बात नही यह तो अनादि काल से जीवन के बीच रहा है मगर श्रेष्ठ समृद्ध खुशहाॅल जीवन की जिज्ञासा ने मानव को हमेशा श्रेष्ठ कर्म के माध्ययम से जीवन को सिद्ध करने का मार्ग प्रस्त किया है उसके रूप स्वरूप जो भी रहै है मगर सत्य एक ही रहा फिर वह तब की स्थति मे रहा हो या फिर अब की स्थति मे हो उदय और अस्त जन्म और मृत्यु के बीच की या़त्रा जैसी भी रही या रही हो मगर सत्य हमेशा एक ही रहा है । और रहेगा यह मानव जीवन को वह , जिस विद्या माध्ययम से समझे या फिर अनभिज्ञ रहै मगर जिसने भी इसे जानने की कोसिश की या थोड़ा वहुत भी समक्षा उसका जीवन भी सफल रहा और सिद्ध भी ह...

दबाब के दर्द से कराहते दल , खण्ड खण्ड सियासत हुई बैलगाम

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शोसण के खिलाफ उठा तूफान , तार तार होते सामाजिक सरोकार  सत्तागत सरोकारो मे , दम तोड़ते सियासी , मूल्य सिद्धांत  वीरेन्द्र शर्मा  2 अक्टुबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  म.प्र. के बुदेंलखण्ड के संभाग मुख्यालय पर छिड़े सामाजिक सग्राम के पीछे की सच्चाई जो भी हो मगर सागर के खेल मैदान से उठ रही आवाजे डराने बाली है जिसमे सामाजिक संघर्ष के पदचाप स्पस्ट सुनाई पढ़ते है । बैसै भी आज के लोकतंत्र मे सामाजिक चेतना की आढ़ मे किसी भी समाज का किसी अन्य समाज बिशेष के खिलाफ व्यक्तिगत या मंचो से बिष वमन सियासी लाभ के लिये आम बात हो गयी है और ऐसा नही कि ऐसा बिष वमन आज ही हो रहा है अगर हम यो कहै की गाहै बगाहै बिष वमन का दौर सियासी या सत्तागत लाभ के लिये विगत तीन दशको से खुलेयाम चल रहा है समाजो के बीच समरसता के विधान को स्वीकारने बाले विधान रक्षको के रहते सब कुछ हो रहा है कारण लोकतांत्रिक दलो का सत्ता की खातिर पीछे रास्ते बिष वमन की स्वीकार्यता और सियासत मे संख्या बल वोट की खातिर दबाब कि सियासत को अघोषित दौर पर स्वीकारना कभी इतना भयानक रूप भी ले सकता है जिसकी कलपना शायद ही किसी ने की हो ...

खण्ड खण्ड महात्वकांक्षा मे लुटता राजकोष

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 मूल्य सिद्धान्त से विमुख जीवन हुआ लाचार   सत्ता संघर्ष मे बिलबिलाता जीवन , सर्बकल्याण हुआ अनाथ  व्ही. एस. भुल्ले  1 अक्टुबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  लोकतंत्र के नाम राजतंत्र , सम्राज्यबादी सोच पर आज चर्चा भले ही निर्थक हो चुकी हो मगर डन्डे के जोर पर सेवा कल्याण आज का सियासी दस्तूर बनता जा रहा है । लोकतंत्र मे वोट और घसिटते जीवन की बैबसी ऐसी भी हो सकती है कि लुटते राजकोष पर लगभग सभी की सहमति फिर वह राजी हो या गैर राजी यह एक अलग विषय है मगर खण्ड खण्ड महात्वकांक्षाओ के बीच आज सियासी तौर पर सेवा कल्याण के नाम जो हो जाये वह कम है । मगर धन्य है वह लोग जो चन्द रूपये की खातिर स्वयं को कलंकित कर आने बाली पीढ़ियो को भी कलंकित करने पर उतारू हो जाते है मगर कहते है समय को किसने देखा है एक समय वह भी था जब राजसत्ता के खिलाफ आवाज उठाने पर सर कलम कर दिये जाते थे और जनता से बसूले गये वैरहमी पूर्ण कर राजकोष कहलाते थे मगर उस समय भी राजकोष मे सेंध लगाने या लगबाने बालो को राजद्रोही मान उचित दण्ड दिया जाता था उसको खर्च करने की एक व्यवस्था थी मगर आजकल लोकतंत्रो मे जिस त...