Posts

Showing posts from August, 2018

संविधान, संवैधानिक संस्थाओं को सशक्त, सक्षम बनाने में संस्था, संगठनों की भूमिका अहम कृतज्ञता ही बना सकती है मजबूत लोकतंत्र

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  कहते है कि कभी तो जाने अनजाने में ऐसा कुछ गलत हुआ है जिसकी प्रतिक्रिया बस ऐसा कुछ गलत अब हमारे सामने है। जो किसी भी बुद्धिजीवी समझदार जागरुक व्यक्ति को विचलित कर देता है।  अब यह राष्ट्र जन प्रेम से ओत-प्रोत शान्ति, अहिंसा का मार्ग हो या फिर वह  संघर्ष पूर्ण मार्ग जो हिंसा वेमन्यस्ता से होकर गुजरता है।  ये अलग बात है कि दोनों का मुकाम और लक्ष्य एक थे। मगर रास्ते अनेक आज जिस तरह से संविधान की मंशा और संवैधानिक संस्थायें दबाव पूर्ण माहौल के बीच तथा आम जन, विचलित मानसिकता के साथ जीवन निर्वहन करने पर मजबूर है। ऐसे में सामाजिक, राष्ट्र भक्त, संस्था, संगठनों की भूमिका संविधान व संवैधानिक संस्थाओं को मजबूत शसक्त बनाने में अहम हो जाती है।  क्योंकि किसी भी व्यवस्था के लिए उसके संविधान से बड़ा और कोई विधान नहीं हो सकता व खासकर लोकतांत्रिक उस राष्ट्र के लिए तो बिल्कुल भी नहीं जहां के नागरिकों ने अपने विधान का मान-सम्मान रखते हुए अपने महान संविधान को अंगीकार किया हो। जिसकी मंशा व भावना की रक्षा की जबावदेही उन संवैधानिक संस्थाओ...

कत्र्तव्य विमुख कत्र्ताओं की कृतज्ञता से कराहता प्रदेश, झूठ, अहम, अहंकार के आगे बैवस लोकतंत्र ्रस्वराज के वैचारिक प्रयासों पर सत्ता, संगठनों का कुठाराघात

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से आजकल बौद्धिक संपदा के दुरुपयोग का प्रचलन वोट राजनीति के चलते चल निकला है उसका परिणाम है कि लोग एक मर्तवा फिर से यह सोचने पर मजबूर है कि हमारी बौद्धिक संपदा क्यों विदेशों में अपनी प्रतिभा प्रदर्शन हेतु चली जाती है।  यंू तो जब भी जिस भी सत्ता, वैचारिक गिरोह, संगठन, संस्थाओं ने संसाधन, सत्ता, बल, अहम, अहंकार चिरस्थाई सत्ता के बसी भूत हो, अपनी ही बौद्धिक प्राकृतिक संपदा, प्रतिभाओं के दमन का रास्ता इख्तियार किया है। उसका न तो आज अस्तित्व ही शेष बचा है न ही नामों निशान रह गया है। जबकि सत्ता शासक, संगठनों का कार्य अपने राज्य के बुद्धिजीवी, प्रतिभाओं को संरक्षण देने और उन्हें संसाधन जुटा स्वछंद वातावरण मुहैया कराने का होता है।  मगर जब सत्ता स्वयं अहंम, अहंकार में डूब झूठ के सहारे, संसाधन, धन, बल का उपयोग बौद्धिक, प्राकृतिक संपदा, प्रतिभा दमन में लगा दें तो न तो ऐसे समाज व्यवस्था, सत्ता का भला हो सकता है और न ही उन लोगों का जिनके कल्याण के नाम वह अस्तित्व में होती है। जो राष्ट्र जन सेवा के नाम सत्ता सुख उठाने दूसरों का हक छीनने ...

सुल्तानगढ़ में 9,पवा में 1 और अब मोहिनी सागर में डूबने से 2 की मौत, पत्राचार और पुरुस्कार से नहीं, निकल सकी सरकार

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी। शिवपुरी जिले में सुल्तानगढ़ के जघन्य घटनाक्रम को अभी पूरा एक माह भी नहीं हुआ कि पर्यटन स्थल पवा में डूबने से एक बच्चे की मौत और अब मोहिनी सागर डेम में 2 लोगों की दर्दनाक मौत डूबने से हो गई।शुक्र है कि साथ नहा रहे अन्य 5 लोगों की जिन्दगी समय रहते बच गई। मगर सरकार और प्रशासन की लापरवाही की पराकाष्ठा यह है कि जब सुल्तानगढ़ में 9 लोगों की बह जाने से मौत हुई और बमुश्किल स्थानीय लोगों की मदद से लगभग 25 लोगों की जाने बचाई गई। तब जाकर प्रशासन पत्र लिखकर इस तरह के पर्यटन स्थलों को सुरक्षित बना और सरकार ने खुद को खतरे में डाल जान बचाने वाले स्थानीय लोगों को 5-5 लाख का पुरुस्कार दिया और प्रदेश भर के अखबारों में भोपाल से खबर छपवा यह जता, अपने पुरुषार्थ दिखाने की कोशिश सरकार ने की, कि सरकार कितना सार्थक, सम्मानित और सफल कार्य किया।  यह सही है कि जिन लोगों ने अपनी जान जोखिम डालकर लगभग 25 लोगों की जान भरी रात पानी में उतर बचाई वह 5-5 लाख पुरुस्कार ही नहीं, रैस्क्यू टीम में नौकरी पाने के हकदार भी थे।। मगर सिर्फ उन्हें 5-5 लाख देकर इस तर...

खुशहाल प्रदेश की बदहाल व्यवस्था गाडिय़ों की आवाज से सहर जाता है दीवान

Image
व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी। यूं तो मौका था म.प्र. के ही गांव खैरोना का जहां शासकीय कार्यक्रम खत्म होने से पहले 100 फीसदी विकलांग दीवान गुर्जर अपने दादा के साथ कई लोगों की मदद से तेज चलती साईकिल पर अपने घर वापस जा रहा था। शरीर और दिमाग से विकलांग बैचारा दीवान यह भी नहीं समझ सकता कि उसे क्या हुआ है। तेज जाती साईकिल पर जाते दीवान के दादा श्याम सिंह को रोककर पूछा कि इतनी जल्दी कहां जा रहे हो। अभी तो कार्यक्रम खत्म भी नहीं हुआ। इस पर दीवान के दादा श्याम सिंह का बैवसी भरे स्वर में जबाव था कि भैया तुम ही जा बैचारे को कछू दिवा दो। साईकिल नहीं तो पेंशन ही दिवा दो। कई बार आ चुके कार्यक्रम में, मगर अबे तक कोहू मदद नहीं भई। दीवान गुर्जर पुत्र रामेश्वर गुर्जर उम्र लगभग 15 वर्ष के दादा यह कहते-कहते आंख में आंसू भर लाये कि भैया जा मोड़ा की कोहू मदद नहीं कर तू। का करे कई बार सचिव से व अन्य लोगन से निवेदन करो। मगर कोई मदद नहीं करता। मगर दीवान को साईकिल पर ले जाते युवकों से जब पूछा गया कि आप लोग इस इतनी जल्दी क्यों ले जा रहे हो। इस पर उन्होंने कहा कि यह गाडिय़ों की ...

कॉग्रेस: शिवपुरी में सफाये का खतरा बरकरार, बड़े बदलाव की दरकार

Image
धर्मेन्द्र गुर्जर दि.एम.पी.मिरर समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी। शिवपुरी जिले की 5 विधानसभा सीटों पर जिस तरह के हालात 2018 को लेकर बन रहे है वह कॉग्रेस के लिए मुश्किल में डालने वाले हो सकते है। क्योंकि जिस तरह से सत्ताधारी दल भाजपा सरकार की हितग्राही मूलक योजनाओं के माध्यम से लोगों के बीच अपनी पैठ बनाने में लगे है। वहीं कॉग्रेसी आपसी सरफुटब्बल कर व्यानबाजी में मशगूल है। जिसका भरपूर लाभ सत्ताधारी दल, प्रधानमंत्री आवास, शौचालय, उज्जवला, मुद्राकोष, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री स्वरोजगार संबल, आयुष्मान, कन्यादान जैसी लोग लुभावन लाभकारी योजनाओं के माध्यम से उठाने में लगा है।  जहां तक कोलारस विधानसभा क्षेत्र का सवाल है तो उपचुनाव में ही कॉग्रेस अपनी जीत का आंकड़ा लगभग 28 हजार से घटाकर 8 हजार कर चुकी है और आये दिन विरोधाभासी खबरें भी कॉग्रेस के लिए शुभसंकेत नहीं। वहीं पिछोर विधानसभा में भले ही कॉगे्रस का 25 वर्ष से एक छत्र राज हो। मगर पिछले विधानसभा चुनाव में जीत-हार के लगभग 8 हजार के अंतर में साबित कर दिया कि हालात अब पहले जैसे नहीं।  रहा सवाल करैरा की सुरक्षित सीट का तो यूूं तो इ...

दलीय गैंगवार के दंश से कराहता देश सत्ता और शौहरत में डूबा लोकतंत्र आशा-आकांक्षा रौंधती संगठित सत्ता, संस्कृति

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। गांव, गली के पीडि़त, वंचित अभावग्रस्त लोगों की आशा-आकांक्षा, जनाकांक्षाओं को छोड़ जिस तरह से राष्ट्र, जन कल्याण, सेवा के नाम देश के दलों में आरोप-प्रत्यारोपों का गैंग बार छिड़ा है। उसके चलते देश का वैचारिक आधार भले ही कराहने लगा हो। मगर व्यानों के गैंगवार का दंश झेलते देश में अब तो संस्कार, संस्कृति ही नहीं परम्परायें, निश्छल प्रतिभायें भी दम तोडऩे पर मजबूर है।  देखा जाए तो गिरोहों का रुप धारण करते दल, संगठन भले ही अपना आधार विचार बताते हो। मगर सत्ता के लिए देश में जिस तरह से गैंगबार छिड़ा है उसे देखकर, सुनकर सिर्फ इतना ही कहा जा सकता है कि आशा-आकांक्षायें कहीं सत्ता संघर्ष में स्वार्थवत लोगों के बूटो तले न रौंध दी जाये।  क्योंकि आज जिस तरह से अहंम, अहंकार जनाकांक्षाओं पर भारी है वह किसी से छिपा नहीं और जो उम्मीद संवैधानिक संरक्षण प्राप्त लोगों से देश को थी वह भी सत्ता व उनकेे  अघोषित गठजोड़ के आगे दम तोड़ती नजर आती है।  फिलहाल सत्ता, शौहरत में डूबते लोकतंत्र को सबसे बड़ा खतरा, सत्ता के लिए नवउदित संस्कृति से है। साथ...

चरण पादुका बनी मौत पादुका, 10 लाख गरीब, मजदूरों की जिन्दगी से खिलबाड़, वोट के लिए पागल सत्तासीनों का जघन्य अपराध

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   आखिर 21वीं सदी में कोई भी सभ्य समाज, लोकतांत्रिक संस्थायें, संगठन व लोकतंत्र को जिन्दा रखने की जबावदेही ओड़े लोग इतने स्वार्थी और निष्ठुर कैसे हो सकते है। जो वोटों की खातिर जनधन से जिन्दगी की बजाए मौत बांटने का कार्य कर गुजरे और समुची व्यवस्था ही नहीं, लोकतंत्र के स्तंभ मुंह में मुसीका डाल चुप रहने पर मजबूर हो। मगर सबसे बड़ी शिकायत तो उस चौथे स्तंभ से है जो धन पिपासूओं का सार्गिद बन प्रदेश में घटे इतने बड़े जघन्य घटनाक्रम पर चुप है और उन धन पिपासू मीडिया प्रबंधकों के आगे अपने स्वाभिमान को छोड़, अपनी पहचान मिटाने पर मजबूर है। जनता तो बेचारी भोली-भाली है। मगर सर्वाधिक जबावदेही तो हमारी अपनी है कि हम उसे सही रास्ता दिखा अपने पुरुषार्थ के बल एक मजबूत लोकतंत्र एवं प्रदेश के गांव, गली, गरीब, मजदूर, किसान, पीडि़त, वंचित, अभावग्रस्त लोगों के जीवन को समृद्ध, खुशहाल बना, आने वाली पीढ़ी के जीवन को सहज और समृद्ध, खुशहाल बनाए।  मगर अफसोस कि प्रदेश से जिस तरह की खबर आ रही है और अगर देश के प्रतिष्टित अखबार पत्रिका में प्रकाशित प्रथम पृष्ठ दिनांक 25 अगस्त...

कत्र्तव्य निर्वहन के बजाए, कुर्तक की पराकाष्ठा , सत्ता के लिए बड़े पैमाने पर जनधन बर्बाद , स्वार्थ और संसाधनों के आभाव में, पंगू हुआ पुरूषार्थ

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार से वा।  जिनके लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था की शुरुआत हमारे पूर्वजों ने कड़े संघर्ष, अनगिनत कुर्बानियों के पश्वात की थी जिसके चलते एक समृद्ध लोकतांत्रिक प्रणाली अस्तित्व में आई है। आज वह अपने मूल मार्ग, उद्देश्यों से भटक स्वार्थवत सत्ताओं की राज्य, जनकल्याण से इतर स्वार्थ सिद्धि का माध्यम साबित हो रही है। जिसमें घोषित अघोषित तौर पर सत्ता के लिए बड़े पैमाने पर लोक धन, जनधन, जो गाड़े पसीने की कमाई गरीबों से टेक्स के रुप में प्राप्त होती है, बर्बादी हो रही है। जो किसी भी स्वस्थ्य लोकतंत्र या राज व्यवस्था के लिए एक अक्षम्य अपराध ही कहा जायेगा।  क्योंकि राजकोष वह धन होता है जो विभिन्न माध्ययमों से टेक्स के रुप में जनता से ही प्राप्त होता है। अगर राजकोष, राज्य, जनकल्याण, विकास के बजाये स्वार्थी सत्ताओं की स्वार्थ पूर्ति या सत्ता प्राप्ति के लिए घोषित अघोषित तौर पर लोक कल्याण, जनकल्याण के नाम बर्बाद होने लगे। समझो लोकतंत्र खतरे में है। किसी भी सत्ता, शासक, शासन का राजधर्म होता है कि वह सत्ता से संबंध औपचारिक, अनौपचारिक तौर से जुड़े उन लोगों से रा...

सिंधिया के नेतृत्व में संभव है, सरकार - सत्ताधारी दल ही नहीं, शेष कॉग्रेस भी बनी सिंधिया का सरदर्द

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   2018 के आसन्न विधानसभा को लेकर म.प्र. में जिस तरह की चर्चाये राजनैतिक गलियारों में सरगर्म है। उन्हें देख, सुनकर कहा जा सकता है। जैसा कि राजनैतिक पण्डितों का भी मानना है कि सिंधिया के नेतृत्व मेें म.प्र. में एक सफल सरकार कॉग्रेस बना सकती है। कारण जिस तरह से सिंधिया समुचे प्रदेश में कॉग्रेस को लेकर चल रहे है और जो निशाना उन्होंने ग्वालियर-चम्बल, मालवा, भोपाल, बुन्देलखण्ड सहित महाकौशल, विदर्भ, मालवा, भोपाल निमाण में अपने साथी वरिष्ठ सहयोगियों की मदद से साध रखा है और निरंतर दौरों के माध्यम से पार्टी में जान फूकने की कोशिश कर रहे है। वह किसी से छिपा नहीं ऐसा नहीं कि सिंधिया को महाकौशल, विदर्भ वघेलखण्ड, बुन्देलखण्ड निमाण क्षेत्रों में कार्यकत्र्ताओं का व नेताओं का भरपूर सहयोग नहीं मिल रहा। बल्कि वरिष्ठ कॉग्रेसी नेताओं के दौरे, बैठकों के माध्यम से वह भी कॉग्रेस को पार घाट लगाने की जुगत में है। मगर जिस तरह से ग्वालियर-चम्बल, मालवा, इन्दौर से लेकर झाबुआ और होसंगाबाद, भोपाल से लेकर विदिशा, सागर, रीवा से लेकर छतरपुर तक सिंधिया को जनसमर्थन आ...

जान की बाजी लगा अपनी व्यथा सुनाने पर मजबूर, बेजुबान सड़कों पर जान देता पशुधन, भीभत्स मौंतो से अंजान शासन

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। नेशनल हाईवे हो या फिर स्टेट हाईवे या कोई सड़क तेज रफ्तार वाहनों का शिकार होते पशुधनों की मौंतो पर किसी को दु:ख हो या न हो। मगर आये दिन वाहनों से होने वाली भीभत्स मौंतो का महापाप किसके सर हो यह तो शासन ही जाने। मगर जो अंजानापन शासन सरकरों के बीच इन बेजुबानों की मौंतों को लेेकर बना हुआ है। वह बड़ा ही शर्मनाक है।  फॉरलेन के रुप में बनी नई-नई चमचमाती सड़कों पर दिन-रात उमड़ता पशुधन का हुजूम इस बात का गवाह है कि कहीं न कहीं पशुधन की परिसंपत्ति गऊचर पर अतिक्रमण हुआ है। जहां अब न तो उनको खाने चारा है न ही तालाब पोखर शेष रहे। जहां उन्हें सहज पेयजल उपलब्ध हो सके। खानाबदोसो की हालत में विचरण करते क्या आवारा क्या पालतू हर तरह का पशुधन खुर की बीमारी से बचने और निर्भीक रुप से भोजन की तलाश में सड़कों के किनारे विचरण करते है और आराम के समय सड़कों पर आ जाते है। रात्रि में गुजरने वाला हैवी ट्राफिक के चलते कई पशुओं की आये दिन भीभत्स मौंते हो रही है। कुछ तो कई दिनों तक बीच सड़क पर ही अपनी अंतेष्टि के इन्तजार में पड़े-पड़े अंतिम गति को तरसते है। तो कुछ का भंडारा उड़ाने म...

बौद्धिक भामाशाहों से कराहता प्रदेश, आंकड़ों के आगे दम तोड़ती अनुभूति कुर्तक की बजाए, कृतज्ञता की होती, तो न कराहता प्रदेश

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समा चार सेवा।  जिस तरह से सत्ता या सत्ता में बैठे लोग, दल लोगों की पीढ़ाओं से भरी खबरों व आरोप-प्रत्यारोपों की काट-छांट करने भ्रामक प्रचार-प्रसार, भाषण व आंकड़ों के माध्यम से पूर्ति करने की, अक्षम, असफल कोशिशें भाड़े या वैचारिक बौद्धिक कुर्तकियों के सहारे करने के बजाए, उन्होंने अपनी कृतज्ञता की होती और पूर्ण निष्टा ईमानदारी से अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन कर, अपनी जबावदेही उत्तरदायित्वों का निर्वहन किया होता, तो आज जब चुनावी वयार चलने को है। ऐसे में उन्हें उन भाड़े के या वैचारिक बुद्धिजीवियों के कुर्तकों के रणकौशल का सहारा अपनी छवि चमकाने न लेना पड़ता।  ऐसी सत्ता और सत्ता मेंं बैठे लोगों को यह समझने होगा कि यह विरासत ऐसे तपस्वी लोगों की है। जिन्होंने पीडि़त, वंचित, आभावग्रस्त, गांव, गली, गरीब, किसानों के लिए अपना ऐश्वर्य अपने प्रियजनों को छोड़, पूर्ण निष्ठा ईमानदारी से अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन किया व समुचे जीवन सादगी पूर्ण जीवन जीते हुए कड़े संघर्षो का सामना कर स्वयं की राष्ट्र, समाज व दलों में सार्थकता सिद्ध की। मगर उन्होंने सृजन व सर्व...

सैलाब का सच बैतरजीह प्राकृतिक संपदा का दोहन, लूट, वनो से छेड़छाड़, अतिक्रमण विनाश की जड़

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  भूकम्प, आंधी, तूफान, सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि का दंश झेलते हुये इस वर्ष या इससे पूर्व वर्षो में देश के कई प्रदेशों ने जो जल सैलाब का दंश झेला है वह किसी से छिपा नहीं। मगर इस मर्तवा जिस तरह से उत्तराखण्ड, हिमाचल, केरल, महाराष्ट्र ने जल सैलाब देखा और भोगा है। वह समुचे देश प्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था ही नहीं, समुचे मानव जगत सहित आम नागरिक के लिए विचारणीय विषय है।        कहते है जिस तरह से आम मानव के लिए सुगम रास्ते, पुल, पुलिया की आवश्यकता होती। उसी तरह से समुद्र से उठने वाले मानसून के लिए भी प्राकृतिक हाईवे जो समुद्र में मिलने वाली नदी, नाले, झरने, जंगल, वृक्ष, पहाड़ के माध्यम उपलब्ध होते है। मगर लालची, स्वार्थी मानव स्वभाव व लापरवाही की श्रोत हमारी संवैधानिक संस्थाओं के चलते इस तरह से मानसून के हाईवे, सड़कों के किनारे अतिक्रमण, बैतरजीह प्रकृति को दोहन प्राकृतिक संपदा की सुनियोजित लूट ने आज प्रकृति मानसून को विनाश के लिए मजबूर कर दिया। परिणाम मानसून पश्चिम बंगाल से उठे या दक्षिणी पश्चिमी भाग से पानी से भरे ताकतवर बादल या तो सीधे उत्तर...

गैर इरादतन जल समाधि में 10 दर्दनाक मौत कलेक्टर का निर्जीव पत्र बनेगा कवच

Image
दि.एम.पी.मिरर अजीव दास्ता है, मेरे लोकतंत्र की,जो निर्जीव पत्रों के माध्यम से बड़े से बड़े कष्ट, जिन्दा लोगों के हर लिए जाते है। अभी हॉल ही में बीमारू राज्य से तेज विकासशील राज्य का तमगा लिए महान म.प्र. के शिवपुरी जिले पर 9 सुल्तानगढ़ व पवा जल प्रपात पर सैलाब मेें वह जाने, डूब जाने से सेकड़ों जिन्दगियों के रहते, इतने बड़े सर्वकल्याणकारी, जनकल्याणकारी निजाम, शासन, सरकार के रहते गैरइरातन जल समाधि मौत से नहीं बचा सकी।  मगर कहते है कि देर आए, दुरुस्त आए, कलेक्टर का निर्जीव पत्र तो अब गैर इरातन दुर्घटनाओं का कवच बनेगा, जिससे अकाल मौंते न हो। मगर यहां यक्ष सवाल यह है या समझने वाली बात यह है कि जिस वन क्षेत्र में यह दर्दनाक मौते हुई। क्या उस बन वीट में कोई फॉरेस्ट गार्ड, फॉरेस्टर डिप्टी रेन्जर, रेन्जर स्तर के अधिकारी तैनात नहीं, क्या अनुभाग अधिकारी, वन मण्डल अधिकारी की पहुंच से यह क्षेत्र दूर है ? सुल्तानगढ़ जहां 9 व्यक्तियों की बहने से व पवा में एक बालक की डूबने से मौत हुई है।  क्या विधायक, जनपद अध्यक्ष, जनपद सदस्य, सरपंच, सचिव व सयुक्त वन  प्रबन्धन, सुरक्षा समितियों का...

संघर्ष की मिशाल बना एक जीवट-जीवन सेवा के साथ समाज, सर्वकल्याण के भाव से स्वयं को अछूता नहीं रख सके: आर.एन सिंह

Image
5 फरवरी सन 1958 को उ.प्र. के आगरा जनपद के गांव राजपुरा मेंं, श्रीमती प्रमिला देवी के घर जन्में आर.एन सिंह के पिता श्री हेत सिंह की वह चौथी सन्तान है। पिता हेत सिंह ने खेतीबाड़ी कर अपने छ: बच्चों को अच्छी शिक्षा-दीक्षा दी। जिनमें उनकी 2 पुत्री और 4 पुत्र शामिल थे। मगर पढ़ाई-लिखाई मेंं अपने चौथे नंबर के पुत्र आर.एन.सिंह का गेरा रुझान देखते हुए उन्होंने उन्हें प्राथमिक शिक्षा गांव राजपुरा, हाईस्कूल सैंया व इंटरमीटियट की शिक्षा आगरा के सेंट चाल्स स्कूल से उत्तीर्ण करने के पश्चात उन्हें उच्च शिक्षा के लिए रायपुर भेज दिया। जहां उन्होंने प. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ इन्जीनियरिंग बी.ई. की शिक्षा गोल्ड मेडल के साथ प्राप्त की तथा सन 1981 में एन.आई.टी. में सन 1981-82 तक अस्सिटेंट प्रोफेसर की नौकरी की। तथ्यपश्चात आपने म.प्र. लोक सेवा आयोग की परीक्षा दी। जिसमें उन्होंने पूरे म.प्र. में प्रथम स्थान प्राप्त कर म.प्र. शासन के जल संसाधन विभाग में सहायक यंत्री के पद पर नियुक्ति प्राप्त की और जल संसाधन में ही लम्बी सेवाकाल के पश्चात 2018 में कार्यपालन यंत्री पद से वह निवर्तमान हुए। चूं...

आदर्श राजनीति के अटल जी की, अंतिम विदाई

Image
व्ही.एस.भुल्ले एक विद्यवान आदर्श अटल राजनीति के धनी स्व. अटल जी के बारे में आज जितना लिखा जाए उतना कम है और यहीं एक आदर्श व्यक्ति के लिए सच्ची श्रद्धाजंली होगी। क्योंकि वह जिन आदर्शो राजनीति के लिए जीवन पर्यन्त जिये और जिस राष्ट्र और कल्याण को उन्होंने सर्वोपरि मान अपने सिद्धान्तों से जीवन पर्यन्त समझौता नहीं किया। एक बिंदास जीवन बेबाक शैली के पत्रकार, राजनेता कवि और इस महान राष्ट्र के प्रधानमंत्री बतौर उन्होंने ऐसा कोई कार्य नहीं किया। जो इन महान क्षेत्रों और पदों को उनकी कृतज्ञता को याद करते हुए शर्मिन्दा होना पड़े। बल्कि अटल जी को याद करके लोग इस राष्ट्र व इस राष्ट्र के जन पर गर्व करेगें। निश्चित ही आज वह हमारे बीच नहीं रहे। मगर राष्ट्र व जन के प्रति उनकी कृतज्ञता हमेशा यह राष्ट्र और जन हमेशा याद रखेगा।  जय स्वराज 

म.प्र. में सरकार और शासन का शर्मनाक प्रदर्शन आजादी के दिन जल प्रलय से जूझा जीवन कई घंटों के संघर्ष के बाद बची जान

Image
दि.एम.मिरर समाचार सेवा।  वीरेन्द्र शर्मा म.प्र. शिवपुरी। शिवपुरी शहर ही नहीं, ग्वालियर में लोग जब 72वें स्वतंत्रता दिवस मनाने की खुमारी में डूबे थे। तभी एक दर्दनाक दुखत खबर शिवपुरी से 45 व ग्वालियर से लगभग 65 किलोमीटर दूर सुल्तानगढ़ जल प्रपात से खबर आई कि अचानक आए जल सैलाब में 12 लोग बह गए व लगभग 30 से अधिक लोग तेज जल सैलाब के बीच मौजूद चट्टान पर फसे हुए है। दोपहर 3 बजे आई खबर से दोनों ही शहरों में हड़कंप मच गया और प्रशासनिक तंत्र अपनी व्यवस्था जुटाने में। तमाम मशक्कत के बाद शाम 6 बजे तक सार्थक सहयोग की मुद्रा में नजर आए शासन और सरकार ने हेलिकॉप्टर की मदद से 5 लोगों को तो लिफ्ट करके बचा लिया। मगर शेष देर रात 10 बजे तक तमाम मदद और हेलिकॉप्टर की मदद के इंतजार में जान बचाने टापू नुमा चट्टान बैठ ईश्वर से प्रार्थना करते रहे।  ये अलग बात है कि इस बीच देर शाम तक जहां शासन के आलाअधिकारी सहित केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर एवं म.प्र. सरकार की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया घटना स्थल पर पहुंच चुकी थीं तथा शासन के आला अधिकारी भी मौके बारदात पर मौजूद थे। जब देर रात तक हेलिकॉप्टर न...

दुसाहसियों की टोली के रहते शहर हुआ दुर्दशा का शिकार दि.एम.पी.मिरर समाचार सेवा।

Image
धर्मेन्द्र सिंह गुर्जर शिवपुरी। शिवपुरी जैसे सुन्दर शहर की दुर्दशा को लेकर अब यह चर्चा सरगर्म है कि शिवपुरी में समय-समय पर तैनात दुसाहसियों की टोलियों ने कभी सिंधिया स्टेट की राजधानी रहे इस शहर को अब कहीं का नहीं छोड़ा। दुर्दशा ऐसी कि एक सुन्दर शहर की आवो-हवा ही नहीं, उसकी सुन्दर शक्ल-सूरत भी अब बदसूरत नजर आने लगी है। सुन्दर-सुन्दर चौड़ी सड़के, सुन्दर चौराहे मनोरम वातावरण दोनों समय शुद्ध पेयजल, 24 घंटे बिजली बेहतर साफ-सफाई और मशक के पानी से नालियों की धुलाई, सीवर लाईन, सुन्दर नालों के रूप में तालाबों की वेस्ट वीयर बरसाती पानी का यथोचित निकास आवारा पशुओं के लिए कांजी हाउस, गऊशाला बढिय़ा सचिवालय, अधिकारी निवास, कोठियां, मनोरंजन क्लब, सांस्कृतिक भवन, पोलो ग्राउण्ड, हॉस्पीटल, स्कूल, कॉलेज, घने जंगल, जल कुण्ड, झरने, प्रपात, शहर से सटा नेशनल पार्क व शहर के अंदर-बाहर मौजूद दशियों तालाब इसकी पहचान थी। मगर अब मुख्य सड़कों पर गड्डें, दल-दल, कीचड़, ऊबड़-खाबड़ नालियां, ऊंट पुल की शक्ल में नालियों के ऊपर ऐप्रोच पुल-पुलियां सड़क पर गस्त करते आवरा पशुओं की सरायें एवं गलियों मोहल्लों में खोलते सी...

संविधान से विमुख सत्तायें, स्वराज में बड़ी बाधा सत्ताओं का सर्वोच्च समर्पण व आस्था अहम: व्ही.एस.भुल्ले

Image
मुकेश तिवारी  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 72वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने बुद्धिजीवियों के बीच अनौपचारिक चर्चा के दौरान कहा कि संविधान से विमुख सत्तायें, शासक ही स्वराज के मार्ग में बड़ी बाधा है। जब तक सत्ताओं का सर्वोत्तम समर्पण उनकी आस्था संविधान की मंशा अनुरुप नहीं होगें तब तक स्वराज का सपना अधूरा ही रहेगा।  क्योंकि जिस तरह से आजाद भारत में संविधान की भावना अनुरुप सत्तायें राष्ट्रीय भावना एवं कानून का राज स्थापित करने में असफल, अक्षम साबित होती रही है। उसके पीछे के कारण जो भी रहे हो। मगर वर्तमान साक्ष्य इस बात के गवाह है कि कार्य तो हुआ मगर पूर्ण मनोयोग से नहीं हो सका। परिणाम कि जो निष्ठा पूर्ण भागीदारी राष्ट्र जनकल्याण में राष्ट्रजनों की होना थी। उसका मार्ग हमारी सत्तायेंं सुनिश्चित कर,उसे प्रस्त नहीं कर पायी।  संसाधन बेतहासा अंदाज में लुटते रहे, सिकुड़ते संसाधनों, सुविधाओं, सेवाओं के चलते अभावग्रस्त लोग बैवस, मजबूर, बिलबिलाते रहे। मगर हमारी सत्तायें उनको ढांढस बधा, उनके आंसू पोछने में अक्षम, असफल साबित होती रही।...

आदर, अनादर,आस्था का विषय लोकतंत्र की अघोषित हत्या पर अन्य दलों की चुप्पी खतरनाक स्वयं स्वार्थों से निकल, युवाओं को खुद संभालना होगी, चुनाव और सत्ता की कमान

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम समाचार सेवा स्वराज के लिए संकल्पित और देश की आजादी के लिए जीवनपर्यंत संघर्षरत रहे महात्मा गांधी के शैक्षणिक सहयोगी शिक्षाविद बाल गंगाधर तिलक से लेकर शहीद भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद का मानना था कि उनका सर्वोत्तम बलिदान उस आजादी के लिए हो। जिसमें २-५ लाख अंग्रेजों के जाने के बाद अंग्रेजी मानसिकता व आचरण व्यवहार वाले चंद ऐसे लोग देश की सत्ता संचालन के मुखिया न बन जाये। जिससे देश के गरीब आभावग्रस्त पीडिृत, वंचित लोगों का जीवन अपनो के ही बीच कष्ट पूर्ण संघर्षपूर्ण न बन जाये। बल्कि उनकी मंशा थी कि देश में ऐसा स्वराज स्थापित हो, जिसमें देश के गांव, गली, नगर, शहर का हर पीडि़त, वंचित, आभावग्रस्त नागरिक स्वयं का राज महसूस कर, स्वयं के जीवन को समृद्ध, खुशहाल बनाने में सक्षम हो। मगर दुर्भाग्य कि देश के लिए वेसकीमती कुर्बानी देने वालों के देश में आजादी के पश्चात संवैधानिक तौर पर चुनावों में लाखों-करोड़ों रुपए के चुनावी खर्च की सीमा एवं दलों, संस्थाओं, संगठनों के रुप में विचार, विचारधारा के नाम मौजूद तथाकथित गोलबंद गिरोहों की सक्रियता, संपन्नता, सक्षमता ने साफ कर दिया कि ...

72 वें स्वतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर चंदे की चर्चा लोकतंत्र,जनतंत्र में कर बाध्यता है चंदा नहीं सत्ता, सरकार प्रमुख सहित सहयोगी जोड़ेंगे चंदा

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अब इसे 21वी सदी का सबसे बड़ा मजाक समझा जाए या दिवालियापन जो 14 वर्षो तक सत्ता सुख भोगने वाले दल मुख्यमंत्री सहित,  दल सेगाड़ी भरे भारी, प्रभारी चंदा इक_ा करेंगे। अब एऐ से मे अगर कोई कंगाल दिवालिया दल संस्था चंदा या जरूरतमंद भीख मांगे तो समझ में आता है मगर जिस दल की 14 वर्ष से सरकार है,जिसके मंत्री, मुख्यमंत्री, मातहत, जहाज हेलीकॉप्टरों सहित लाखों रुपए की वातानुकूलित ऐसी कारों मैं सफर कर शाही जीवन जीते हो जिस दल के पदाधिकारी सहयोगी संगठनों के जवाबदेह लोग चार पहिया वाहन का सफर करते हो सरकार के मातहतों कार्यालय आवासों पर कीमती वाहन खड़े रहते हो ऐसे मे चर्चाओं की माने तो इतना ही नहीं देश भर मे सर्वाधिक चंदा, सैकड़ों करोड़ बतौर और स्वयं को 10 करोडी सदस्यों वाला दल होने का दम भरता हो उसे चंदे की क्या जरूरत है। अगर मान भी लिया जाए कि पर सदस्य दस हजार भी इक_ा हो तो लगभग 10 हजार करोड़ तो वैसे ही इक_ा हो जाएंगे। अब यह दल की जिद है या जुनून जो 230 विधानसभा क्षेत्रों से 25-25 लाख रुपए का चंदा जन सहयोग से इक_ा करने की  चर्चा मीडिया में सरगर्म ह...

पहले धंधा, अब चंदा सेवा कल्याण की पराकाष्ठा से बिलबिलाते लोग

Image
व्ही.एस.भुल्ले अब इसे हम हमारे महान लोकतंत्र या लोकतांत्रिक व्यवस्था में सेवा कल्याण की पराकाष्ठा कहे या फिर सुशासन या इसे अपना भाग्य या दुर्भाग्य। कि जिस राज्य में पीडि़त, वंचित, आभावग्रस्त, नैसर्गिक सुविधाओं को मोहताज डकराते  गांव गली के बिलबिलाते लोग घूम रहे हो। सुना है ऐसे प्रदेश में सत्ता भक्तों की मंडली चुनावी बेतरणी पार करने की गरज से चंदे के रुप में सहयोग हासिल करने निकल पड़े। मीडिया में छपी खबरों की माने तो शिव के शहर   शिवपुरी में भी सत्ता के बड़े-बड़े ओलिया और भक्तों की भीड़ का मंच लगा  था और महंतों की मंडली से हासिल निर्देशों के तहत चंदे का निर्धारित टारगेट भी हाथों हाथ सार्वजनिक हुआ था। जिसमें हर विधानसभा से लगभग 25-25 लाख का जनसहयोग निर्धारित है।  मगर यहां समझने वाली बात यह है कि अपने सहज जीवन को बिलबिलाते लोगों से तो शायद कोई उम्मीद महंत ओहदेदारों को भजकलदारम की न हो। मगर बेचारे लगे मंच की भजन मंडली में मौजूद सत्ता की मलाई बटोरने बालों पर फिलहाल आफत आन पड़ी है । सुना अब तो 2-5-10 नहीं आंकड़ा 20 के पार है पहले तो अघोषित केंद्रीय कृत व्यवस्थ...

कत्र्तव्य बोध कराते, कत्र्तव्य विमुख शासक व स्वार्थवत सत्तायें बड़ी विडंबना है मेरे बैवस देश की, भाषण वीरों से पटा लोकतंत्र ज्ञान-विज्ञान बांटने में जुटे, संवैधानिक पदों पर बैठे, जबावदेह लोग

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। युवा देश का झुनझुना लिए देश के युवाओं को विगत दो दशक से कत्र्तव्य बोध कराते, कत्र्तव्य विमुख शासक व स्वार्थवत सत्तायें अपनी संवैधानिक शपथ और दायित्व भूल इस तरह से भाषण वीरों की टोली में तब्दील हो जाएंगीं किसी ने सपने में भी न सोचा होगा। मगर मेरे देश की विडंबना और वैवसी ऐसी है कि यह सब कुछ जानते बूझते स्वयं के निष्ठा पूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन चुनाव के समय वोट और समय से टेक्स के रुप में नोट देने के बावजूद भी समृद्ध, खुशहाल जीवन तो दूर की कोणी प्रकृति प्रदत्त नैसर्गिक सुविधा हासिल करने के लिए भी भीषण संघर्ष अपनो के ही रहते अपनो के बीच करना पड़ रहा है।  सबसे बड़ा दुर्भाग्य और बिडंबना तो यह है कि जिन लोगों या लोकतांत्रिक संस्थाओं के पास आम जन के या समुचे भूभाग के सर्वाधिकार सुरक्षित है और जिन्हें अपनी संवैधानिक शपथ अनुसार अपनी जबावदेही निष्ठा पूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के साथ पूर्ण करना चाहिए। वह संवैधानिक पदों पर बैठ अपने कत्र्तव्यों से विमुख कलफदार कुर्ता-पजामा पहन सुबह से ही हेलिकॉप्टर, हवाई-जहाज, आलीशान करोड़ों के रथ व लग्झरी वाहनों में बैठ...

महान विरासत की दुर्दशा पर विचार विधान छोड़, संवैधानिक आस्था के आगे धर्म संकट

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। मान्यवर, श्रीमान, माननीय, माई-बाप आखिर आप क्यों अक्षम असफल साबित हो रहे हैं। अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करने और उत्तरदायित्व निभाने में, हमें आज भी आपसे बड़ी उम्मीद और आपमें हमारी गहरी आस्था है, आप लोग इस बात से भली भांति परिचित हैं कि हम गांव गली के लोगों ने अपने महान संविधान को अपने विधान से सर्वोच्च मान सिर्फ स्वीकार ही नहीं, उसे निस्छल भाव से अंगीकार भी किया है। जिसकी पवित्र, प्रमाणिक शपथ लें, आप लोग हमारी ताकतवर लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंग ही नहीं, इस राष्ट्र, राज्य, नगर, शहर, गांव, गली के माई बाप भाग्य विधाता है। मगर आप लोगों के रहते आज भी हम अभाव ग्रस्त और हताश, निराश है तथा प्रकृति प्रदत्त नैसर्गिक सुविधाओ के मोहताज।  क्या आप लोगों को हमारी दुर्दशा देख, यह नहीं लगता कि किस बेरहमी से सत्ता, सोच, धन के बल पर अहम, अंहकार के बूटो तले किस बेरहमी से हमारी आशा आकाक्षांओं रौंधा जा रहा है।  हम निरअपराध बैवस लोगों ने, न तो कभी सत्ता में भागीदार, न ही ऐश्वर्य युक्त, बिलासिता पूर्ण जीवन मांगा। हम और हमारे पूर्वज तो तब भी अपने मान सम्...

म.प्र. कॉग्रेस-जीत से पहले, हार की रिहर्सल, रीवा-छतरपुर बने नजीर

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। आचरण के आभाव में अनुशासन हीनता किसी भी संगठन में होना कोई नई बात नहीं। मगर स्वयं के सेवादल को भूल, आरएसएस के मुरीद नेताओं को सोचना चाहिए कि सेवादल समाज में सिर्फ सेवा भावी कार्य ही नहीं करता था। बल्कि नेताओं को सुरक्षा और कार्यक्रमों में अनुशासित बेहतर व्यवस्था का भी उत्तरदायित्व निभाने का कार्य उसके द्वारा पूरी निष्ठा के साथ किया जाता था। कभी जिसका नेतृत्व राष्ट्रीय अध्यक्ष के रुप में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने कर सेवा दल को समुचे देश में एक नई पहचान और ऊंचाई देने का कार्य किया। मगर स्व. राजीव गांधी के बाद जिस तरह की दुर्गति इस संगठन की हुई वह शायद ही किसी से छिपी हो। काश कॉग्रेसे नेता आरएसएस के मुरीद होने के बजाये स्वयं के अनुवांशिक संगठन की दशा सुधार उसे सही दिशा दी होती तो 14 वर्ष से म.प्र. में सत्ता का वनवास काट रही कॉग्रेस और भाजपा की सत्ता से बिलबिलाती जनाकांक्षाओं को रीवा, छतरपुर जैसे स्तर हीन अनुशासन हीनता वाले घटनाक्रमों को न देखना पड़ता और न ही क्षत्रपों में बटी कॉग्रेस ेको जीत से पहले ही हार की रिहर्सल सरेयाम ...

बैवस तकनीक, विज्ञान को मुंह चिढ़ाता विकास ्प्रकृति के कहर से अन्जान अहंकार, तबाही को तैयार

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  प्रकृति व महामानवों ने सृष्टि में समस्त जीव-जगत तथा मानव के सृजन कल्याण समृद्धि का सपना देखते वक्त व उस मानव को अपने गर्भ से, अपनी  सर्वोत्तम कृति मान गढ़ते वक्त सपने में भी न सोचा होगा कि वह जिस मानव को अपनी सम्पूर्ण सर्वोत्तम कृति मान सृजन कल्याण के लिए संरक्षित कर समर्वधित कर रहे है। कभी उसी मानव के अहंकार के चलते उसकी यह सुन्दर कृति और सृष्टि के विनाश का कारण बनेगी।  उसे क्या पता था कि वह मानव के रुप में अपनी जिस सर्वोत्तम कृति को  स्वयं व समस्त जीव जगत नव, जल, थल, चर के सम्वर्धन संरक्षण के जबावदेही सौंपी है। एक दिन वहीं मानव अपने निहित स्वार्थ बस सर्वकल्याण को दरकिनार कर तथा अपने नैसर्गिक उत्तरदायित्व को भूल, अपने अहम, अहंकार में डूब, स्वयं ही सृष्टि, सृजन कल्याण में सबसे बड़ी बाधा साबित होगा।  उसे तो शायद उस वक्त ये भी एहसास न रहा होगा कि जिस आध्यात्म, ज्ञान, संस्कृति, संस्कारों के साथ सृष्टि में मौजूद सर्वोत्तम शिक्षा का ककहरा समझा। जिसे सृजन के लिए रख छोंड़ा है एक दिन वहीं मानव स्वार्थवत सत्ताओं द्वारा परोसे जाने वाली विला...

वातानुकूलित और समृद्ध हुई लोक, जनसेवा, कल्याण की मिशाल बना प्रदेश मुखिया हेलिकॉप्टर, जहाज, तो मातहत लग्झरी वाहनों में सवार

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। विकास सेवा कल्याण की जो इबारत प्रदेश में विगत 14 वर्षो में जो लिखी गई और उसके चलते सेवा विकास कल्याण की जो बेमिशाल तस्वीर साफ हुर्ई उसे बताने वह आंकड़े ही काफी है जो कि एक बीमारु राज्य की तस्वीर किस तरह बदली फिर वह आंकड़ें कृषि, सिंचाई, बिजली, सड़क से संबंधित हों या फिर सेवा कल्याण से जुड़े सरोकारों से। अगर प्रचार-प्रसार में प्रचलित  आंकड़ों केी माने तो सभी क्षेत्रों में बेमिशाल कार्य हुआ। जिन्हें हम शासन के विभागों द्वारा जारी विज्ञापनों में भी देख समझ सकते है। अरबों रुपया विज्ञापनों अन्य प्रचार, संवाद, पंचायत, सम्मेलनों पर खर्च, इस बात के गवाह है कि प्रदेश ने विकास, सेवा कल्याण ही नहीं, लोग सेवा कल्याण को देख, समझ, उसे मेहसूस भी कर सके। जिसे सेवा कल्याण विकास की ऐतिहासिक मिशाल ही नहीं, उसे अनुकरणीय भी कहा जायेगा। जिस बीमारु राज्य में कभी प्रदेश का मुखिया जब तब हेलिकॉप्टर, जहाज से व सरकार के  मातहत व हमारे माई-बाप के नाम से प्रचलित श्रीमान, टूटी-फूटी जीवों या फिर जिला स्तर पर एक दो एम्बेस्डरकार के सहारे गांव, गली की खांक छान लो...