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Showing posts from June, 2019

विकास पर भारी उजाड़ लगभग 13 हजार जल उपभोक्ता पर 100 करोड़ से अधिक खर्च जघन्य आर्थिक, अपराध पर सरकार की चुप्पी, चर्चा का विषय

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है शिवपुरी में जो हो जाये सो कम उदाहरण सामने है। जिस शिवपुरी को सिंधिया राजवंश के उराधिकारियों ने अपने संस्कार, शिक्षा अनुरूप इस क्षेत्र की सेवा आजाद भारत में पूरी निष्ठा ईमानदारी से कर विकास के के नये आयामों से जोड़ा था वह षड़यंत्रकारी सियासत और स्वार्थवत संगठित लोग एवं तथाकथित सिपहसालारों के आचरण व्यवहार के चलते आज की सियासत से ढैया बाहर नजर आती है। जो सेवा, विकास के नाम दर्दनाक भी है और शर्मनाक भी। सबसे बड़े दर्द दुख की बात तो यह है कि आज जिन सिद्धान्तों मूल्यों की राजनीति और सत्याग्रह की सियासत हताश है। इससे बड़ा षड़यंत्रकारी सियासत का और कोई दूसरा उदाहरण हो नहीं सकता। आखिर शिवपुरी में ऐसा क्या हुआ उस महान सेवा भावी सियासत को जिस पर गर्व कर कभी लोग स्वयं को गौरान्वित मेहसूस करते थे हो सकता है कि संस्कार, आचरण का शिवपुरी यह श्राफ हो। मगर स्वीकार्यता ही सत्य है जो भविष्य निर्धारण की हामी भी है और वर्तमान का कटु सत्य भी। मगर देखना होगा कि जबावदेह लोग समस्याओं से जूझती शिवपुरी के जनादेश और विकास सेवा के नाम मचे उजाड़ को किस तरह से लेते है। क्योंकि जिस श...

बजट व्यवहारिक ही नहीं उसका मूल आधार प्राकृतिक सिद्धान्त अनुरूप हो

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। हम समृद्ध, खुशहाल थे , है और रहेगें। आज जरूरत नई शुरूआत के साथ, शिक्षा, प्रतिभा, सम्मान के साथ विद्या, विद्ववानों को सहज न मिलने वाले अवसरों के पहचान की है। जो प्रकृति से सामजस्य बैठा विज्ञान और व्यवहार में बेहतर सामजस्य स्थापित कर अपने हुनर की सिद्धता साबित कर समूचे विश्व को सटीक स्पष्ट संदेश दें सके और समूची पृथ्वी पर मौजूद जीव जगत के जीवन को समृद्ध, खुशहाल बनाने की दिशा में अपनी भूमिका तय कर सके। मगर यह तभी संभव है जब इस महान भूभाग पर कत्र्तव्य निर्वहन निष्ठा, और पूर्ण ईमानदार होने के साथ राष्ट्र-जन को समर्पित हो और व्यवहारिकता के काफी नजदीक जो यह तय करने काफी हो कि प्रकृति अनुकूल क्या यथा संभव है और क्या असंभव।  जय स्वराज

राष्ट्र नीति पर भारी वोट नीति पर्यटन, रोजगार सामरिक दृष्टि से अहम है सवाईमाधोपुर से झांसी रेलमार्ग संसद में शेजबलकर का सवाल सटीक

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से ग्वालियर, श्योपुर छोटी रेललाइन को बड़ी रेल लाईन में बदलने में रेल विभाग झांसी सवाईमाधोपुर रेलमार्ग की अनदेखी कर तत्पर दिख रहा है वह अफसोस जनक ही नहीं शर्मनाक भी है। एक तरफ वोट नीति है तो वहीं दूसरी ओर राष्ट्र नीति की दरकार जो राष्ट्र हित को सर्वोपरि मानने हमें बाध्य करती है। यूं तो झांसी सवाईमाधोपुर को जोड़ने वाले रेलमार्ग के मुद्दे को स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले विगत दो दशक से क्षेश्रीय नेताओं, मंत्रियों,  तत्कालीन सरकारों के सामने लाते रहे हैं। परिणाम कि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. माधवराव सिंधिया के वक्त भी इस रेलमार्ग का सर्वे कराया गया था और जैसा कि ग्वालियर के सांसद विवेक सेलजबरकर ने लोकसभा में बताया कि 2015 में भी इस रेलमार्ग का सर्वे हुआ था। मगर रोजगार, पर्यटन सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस रेलमार्ग का न तो रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कोई संज्ञान लिया, न ही रक्षा मंत्रालय सहित पर्यटन मंत्रालय ने राष्ट्र हित के सबसे अहम मसलें पर कोई दिलचस्पी दिखाई। देखा जाए तो सिलचर से लेकर जेसलमेर को जोड़ने वाले एन. एच.आई मार्ग की तर्ज पर लगभ...

राष्ट्र नीति पर भारी वोट नीति पर्यटन, रोजगार सामरिक दृष्टि से अहम है सवाईमाधोपुर से झांसी रेलमार्ग संसद में शेजबलकर का सवाल सटीक

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से ग्वालियर, श्योपुर छोटी रेललाइन को बड़ी रेल लाईन में बदलने में रेल विभाग झांसी सवाईमाधोपुर रेलमार्ग की अनदेखी कर तत्पर दिख रहा है वह अफसोस जनक ही नहीं शर्मनाक भी है। एक तरफ वोट नीति है तो वहीं दूसरी ओर राष्ट्र नीति की दरकार जो राष्ट्र हित को सर्वोपरि मानने हमें बाध्य करती है। यूं तो झांसी सवाईमाधोपुर को जोड़ने वाले रेलमार्ग के मुद्दे को स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले विगत दो दशक से क्षेश्रीय नेताओं, मंत्रियों,  तत्कालीन सरकारों के सामने लाते रहे हैं। परिणाम कि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. माधवराव सिंधिया के वक्त भी इस रेलमार्ग का सर्वे कराया गया था और जैसा कि ग्वालियर के सांसद विवेक सेलजबरकर ने लोकसभा में बताया कि 2015 में भी इस रेलमार्ग का सर्वे हुआ था। मगर रोजगार, पर्यटन सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस रेलमार्ग का न तो रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कोई संज्ञान लिया, न ही रक्षा मंत्रालय सहित पर्यटन मंत्रालय ने राष्ट्र हित के सबसे अहम मसलें पर कोई दिलचस्पी दिखाई। देखा जाए तो सिलचर से लेकर जेसलमेर को जोड़ने वाले एन. एच.आई मार्ग की तर्ज पर लगभ...

कानून की धज्जियां उड़ाते, पालनहार बगैर बिल के म.प्र. में 20 हजार करोड़ का कारोबार आम मतदाता की जान से खिलबाड़

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. में यूं तो आबकारी महकमा वाणिज्यकर के अधीन आता है जो फिलहाल जीएसटी से भी बाहर है। मगर किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी संवैधानिक संस्था खुद ही कैसे कानून की धज्जियां उड़ा सकती है। जबकि उपभोक्ता के अधिकारों की रक्षा के लिए कई संस्थायें कानून के तहत विराजमान है। आखिर कोई भी संवैधानिक संस्था या उसके अधीन ठेकेदार कैसे उपभोक्ता को बगैर बिल दिये रोजाना लाखों, करोड़ों, अरबों का व्यापार कर सकता है। अरबों ही नहीं म.प्र. में तो यह व्यापार लगभग 20 हजार करोड़ के आसपास होने की संभावना है। जबकि आबकारी महकमें का मसला तो सीधे-सीधे खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता की जीवन रक्षा से जुड़ा है फिर बगैर बिल के कैसे हजारों करोड़ का व्यापार चल रहा है। यह बात आज मतदाता और संवैधानिक संस्थाओं को समझने वाली बात होनी चाहिए। जय स्वराज

सर्वोच्च पद की, सदन में, सत्य की स्वीकार्यता सृजन में सराहनीय

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से देश के प्रधानमंत्री ने देश के सर्वोच्च सदन में सच को स्वीकार कर देश वासियों सहित सियासी दलों को स्पष्ट संदेश दिया है कि बिहार में चमकी बुखार का दुख है और सार्गिदगी भी जो 7 दशक की सबकी सबसे बड़ी विलफलता है जिसके लिए हम सभी दोषी है। बहरहाल सर्वोच्च पद की सर्वोच्च सदन में सत्य की स्वीकार्यता और सर्वोच्च सदन में सबसे बड़े दल के नेता के सटीक तर्क के मायने सियासी गलियारों में जो भी हो। मगर इस महान राष्ट्र के लिए यह शुभसंकेत है। जो सभी को समझने वाली बात होना चाहिए। जय स्वराज

कोहराम को तैयार कर्तव्य, विमुख व्यवस्था

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते हैं अगर बातें या उपदेशों से भला हुआ होता तो शैक्षणिक, स्वास्थ्य, प्राकृतिक रूप से समृद्ध यह भू भाग ना तो किसी संस्कृति, समृद्धि का मोहताज होता, ना ही समृद्ध, खुशहाल, सभ्यता के नाम यह कंगाल होता, न ही कर्तव्य विमुख व्यवस्था का दंश झेलता यह महान भूभाग इस पर मौजूद समाज इतने बैवस मायूस होते शायद महान भू भाग को संरक्षित, संवर्धित, सुरक्षित रख विरासत में अपनी आने वाली पीढ़ी को सौंपते वक्त उन त्याग पुरुषों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा। मगर सत्य का सारथी यह महान भूभाग इस बात का साक्षी है कि जिस तरह से हमारे अपनो की स्थापित व्यवस्था में हमारे अपने नौनिहाल यह महान भूभाग, भविष्य हमारी प्रतिभाये, विधा विद्वान, मेहनतकस, सेवा भावी, सृजन को समर्पित लोग हताश-निराश है वह किसी से छिपा नहीं। उदाहरण स्वरूप हम देखे तो इस महान भूभाग का जर्रा जर्रा विभिन्न प्रतिभाओं से पटा पड़ा है। प्राकृतिक संपदाओं के अथार्य भंडार गर्व करने के बजाए स्वयं पर शर्म महसूस कर रहे हैं। स्थापित व्यवस्था में मौजूद संस्थाओं के संस्कार, कर्तव्य विमुख तो व्यवस्थाओं को स्वीकारने वाल...

कर्त्तव्य विमुख व्यवस्था का कलंक कलपते लोग समृद्ध राष्ट्र की विचित्र तस्वीर लजिजत नहीं, वेशर्म व्यवस्था

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। स्वयं को समृद्ध खुशहाल बनाने संघर्षरत एक समृद्ध राष्ट्र की कर्त्तव्य विमुख व्यवस्था, लजिजत होने के बजाये इतनी बेशर्म हो तो लापरवाह विचित्र व्यवस्था का अक्स ही नहीं तस्वीर का अंदाजा लगाया जा सकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति के नाम परजीवी हो चुकी हमारी कर्त्तव्य, जबाव विमुख व्यवस्था का चेहरा इतना कुरूप हो सकता है किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा। आखिर हम समृद्ध, खुशहाल विरासत के उत्तराधिकारी होने के बावजूद ऐसी दुर्दशा पर कैसे गर्व मेहसूस कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर सकते हैं।जिसके संरक्षण में एक दो नहीं पूरे 100 दीपक किन्हीं परिवारों के बुझ जाए। कारण साफ है कि कर्त्तव्य जबाव विमुख व्यवस्था का स्वस्थ शिक्षा, संस्कृति के अभाव में बोलबाला, और जबावदेह लोग स्वयं के निहित स्वार्थ पूर्ति में झूठ का सहारा ले, सत्य को झुठलाने की असफल कोशिश करते हैं तो परिणाम, बैवस, बेजुबान, मायूस लोगों को सृजन त्याग के बावजूद भी अकाल काल का शिकार हो भोगना पड़ता है। आज जब हम गांधीजी के 150 वर्ष पूर्ण होने पर नवभारत निर्माण के साथ जी.डी.पी. को 50 अरब डॉलर के ...

श्राफ मुक्ति की शुरुआत करेगा स्वराज सामर्थ, समृद्ध, प्रदेश में संसाधनों की दुर्दशा सभाषद, परिषद मुखिया मंत्रियों की अग्नि परीक्षा

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। यह अलग बात है कि जम्मू दीप, आर्यव्रत भरतखंडे के नाम से चिरपरिचित इस महान भू भाग आज भारतवर्ष के नाम से जाना जाता है। जिसका अध्यात्म प्राकृतिक समृद्धि, सामर्थ, पुरुषार्थ, शिक्षा, संस्कृति का अपना एक सुनहरा इतिहास, है जिसकी प्रमाण, प्रमाणिकता समूचे विश्व में किसी से छिपी नहीं है। मगर जाने अनजाने में गोवंश के साथ हुए घोर अन्याय अत्याचार को भी भुलाया नहीं जा सकता। अगर सैकड़ों वर्ष बाद राष्ट्रभक्त, संगठन कांग्रेस की ओर से उस गोवंश के संरक्षण संवर्धन की शुरुआत मध्यप्रदेश में गौ सेवकों, संगठनों, प्रबुद्ध वर्ग की पहल पर हुई है तो उसे सटीक अंजाम तक ले जाना स्वराज में आस्था रखने वालों का धर्म भी है और कर्म भी और मानवीय सभ्यता का उत्तरदायित्व भी। जम्मू दीप और आर्यव्रत भरतखंडे के उत्तराधिकारियों का दायित्व है कि वह अपनी मूल, सभ्यता, संस्कृति, शिक्षा को पहचान एक नई शुरुआत 2019 में करें जिससे श्राफ मुक्ति का मार्ग तो प्रस्तसत होगा ही साथ ही एक राष्ट्रभक्त संगठन को भी घोर श्राप से मुक्ति मिलेगी। क्योंकि सामर्थ, पुरुषार्थ के साथ स्वास्थ्य शिक्षा का मूल भा...

मैं जनसेवा में था, हूं और जीवन पर्यन्त रहूंगा- ज्योतिरादित्य सिंधिया स्वयं की समीक्षा अहम

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व्ही.एस.भुल्ले आम जन के बीच सतत भ्रमण अकंल्पनीय विकास कार्यो को लाने के बाद मिली करारी हार पर काॅग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, पूर्व लोकसभा सचेतक, केन्द्रीय मंत्री, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का खबरोंनबीसों के बीच कहना था किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। क्योंकि कोई भी व्यक्ति परिपूर्ण नहीं होता। पहले मैं स्वयं फिर संगठन और फिर मेरे सेवाभाव में रही कमियों को तलाशूगां। मैं जनसेवा था, हूं और जीवन पर्यन्त जनसेवा में ही रहूंगा। बहरहाल जन चर्चाओं, बेहतर समझ तथा स्वच्छ समृद्ध सोच रखने वालों की माने तो वह दुखित तो है और अब क्षेत्र की आवो हवा को लेकर चिन्तित भी। सवाल फिलहाल ये नहीं कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह संसदीय क्षेत्र सक्षम नेतृत्व विहीन हुआ है बल्कि सवाल यह है कि संवाद, समझ के स्तर में बड़ा बदलाव हुआ है। अब इसके पीछे के कारण कई हो सकते है। भ्रामक प्रचार, राष्ट्रवाद, जीवन्त संगठनात्मक दक्षता, संवाद, समझ की कला। आर्थिक तंगी, समृद्धि प्रबल होते हुए संगठनात्मक रूप से समाजों का रसायन शास्त्र और आम जन के बीच आचार, व्यवहार, सूचना शास्त्र। मगर जब हम नीति और सिद्धान्तों की राजनीत...

रोड, वोट मैफ के साथ, सार्थक सुपरविजन की दरकार निर्णायक क्षमता और कटु श्रवण के अभाव में अर्कमण्यता का दंश झेलता राष्ट्र भक्त संगठन

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वीरेंद्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है बाढ़, तूफान, प्राकृतिक, मानव जनित आपदा पश्चात जिन लोगों की दिलचस्वी रूचि, सृजन, मानव, कल्याण में न हो। ऐसे व्यक्ति, साथी, सहयोगियों को छोड़ उनका त्याग करना ही उचित होता है और ऐसे लोगों का साथ उचित होता है। जो सारथी, सहयोगी, शुभचिन्तक बन, सृजन, सर्वकल्याण के लिए स्वयं के पुरूषार्थ की सिद्धता साबित कर, मानव जीवन की उपयोगिता सिद्ध करें।  मगर यह तभी संभव है जब नेतृत्व निर्णायक क्षमता अनुरूप निर्णय कर स्वयं की सिद्धता संगठन में साबित कर, नये कारवां को खड़ा करने देश भ्रमण करे। क्योंकि कहते है समय अनादिकाल से सृजन में तो सार्थक हुआ है। मगर निहित स्वार्थवत लोगों का सगा नहीं रहा। अब चूंकि समय आ चुका है राष्ट्र भक्त संगठन और उसके नेतृत्व को स्वयं की सिद्धता साबित करने का, ऐसे में साक्षी है। गुजरे 25 वर्ष जिनकी समीक्षा उपरांत सटीक निर्णय होना चाहिए। समीक्षा इसलिए नहीं कि 2014 के बाद 2019 में काॅग्रेस की करारी हार हुई है। बल्कि इसलिए कि देश के 10 करोड़ मतदाताओं ने काॅग्रेस की सिद्धता में समर्थन व्यक्त किया है। जरूरी है उस जनादेश का सम्मान जो...

नीति का दंश झेलती नेकनियत सत्य से मुंह, छिपाती सियासत

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। फैसला जाप्ते में जनता जनार्दन का देश के सामने भले ही, इस महान देश की आशा-आकांक्षाओं का कटु सत्य हो। मगर कुछ परिणाम साक्षी है। जिन्होंने नीति के दंश के चलते नेकनियत को हताश ही नहीं निराश भी किया है। अगर हम यो कहे कि सत्य से मुंह छिपाती सियासत का नंगा सच आज की राजनीति में यहीं है तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।   ये अलग बात है कि कहीं न कहीं निर्दोष होने के बावजूद हमारा अक्श, सिस्टम, अहंकारी, लापरवाह और सार्गिद अहंकारी हो जाते हैं। ऐसे में आशा-आकांक्षाओं का दिगभ्रमित होना स्वभाविक है। खासकर तब की स्थिति में जब हम संकल्पित हो निष्ठापूर्ण, सेवा, कल्याण के लिए संकल्पित रहते है और सत्य के आग्रही बन स्थापित मूल्य सिद्धान्तों से समझौता न कर कत्र्तव्य निर्वहन की पराकाष्ठा करते है। मगर जब-जब हम अपने मूल स्वभाव के विपरीत आचरण, व्यवहार या फिर अति विश्वास के चलते औपचारिक अनौपचारिक तौर पर कत्र्तव्य विमुख होते है। ऐसे में इंसानियत के  स्वार्थवत दुश्मनों के लिए माहौल अनुकूल होता है। जो अपने स्वार्थ, झूठ अहंकार सिद्धि के लिए दिन दो दिन नहीं इन्तजार कर ...

शिक्षा नीति के मसौदे से अनभिज्ञ स्वराज मैकाले का मातम मनाने मजबूर

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। पूर्व मानव संसाधन मंत्री की काबलियत को लेकर भले ही कई सियासी सवाल इस महान देश में रहे हो। मगर उस महिला मंत्री के सार्थक प्रयास और जीवटता को यह देश कभी भुला नहीं सकता।  उसके प्रयास कितने सार्थक, सफल, असफल हुय यह तो सत्ता के लिए मौजूद सियासी दल तथा मौजूदा सरकार व देश में मौजूद शिक्षित अशिक्षित समाज, परिवार, व्यक्ति ही जाने। मगर नई शिक्षा नीति के जाप्ते से स्वराज आज भी अनभिज्ञ है। अगर स्वराज मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले की माने तो यकीनन तौर पर प्रयास तो सार्थक है। मगर इनकी सफलता पर संदेह स्वभाविक है। कारण विषय वस्तु और क्रियान्वयन के सार्थक प्रोग्राम का अभाव। कारण नैसर्गिक सिद्धान्त से इतर सियासी अहंकार। जय स्वराज