विकास पर भारी उजाड़ लगभग 13 हजार जल उपभोक्ता पर 100 करोड़ से अधिक खर्च जघन्य आर्थिक, अपराध पर सरकार की चुप्पी, चर्चा का विषय
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है शिवपुरी में जो हो जाये सो कम उदाहरण सामने है। जिस शिवपुरी को सिंधिया राजवंश के उराधिकारियों ने अपने संस्कार, शिक्षा अनुरूप इस क्षेत्र की सेवा आजाद भारत में पूरी निष्ठा ईमानदारी से कर विकास के के नये आयामों से जोड़ा था वह षड़यंत्रकारी सियासत और स्वार्थवत संगठित लोग एवं तथाकथित सिपहसालारों के आचरण व्यवहार के चलते आज की सियासत से ढैया बाहर नजर आती है। जो सेवा, विकास के नाम दर्दनाक भी है और शर्मनाक भी। सबसे बड़े दर्द दुख की बात तो यह है कि आज जिन सिद्धान्तों मूल्यों की राजनीति और सत्याग्रह की सियासत हताश है। इससे बड़ा षड़यंत्रकारी सियासत का और कोई दूसरा उदाहरण हो नहीं सकता। आखिर शिवपुरी में ऐसा क्या हुआ उस महान सेवा भावी सियासत को जिस पर गर्व कर कभी लोग स्वयं को गौरान्वित मेहसूस करते थे हो सकता है कि संस्कार, आचरण का शिवपुरी यह श्राफ हो। मगर स्वीकार्यता ही सत्य है जो भविष्य निर्धारण की हामी भी है और वर्तमान का कटु सत्य भी। मगर देखना होगा कि जबावदेह लोग समस्याओं से जूझती शिवपुरी के जनादेश और विकास सेवा के नाम मचे उजाड़ को किस तरह से लेते है। क्योंकि जिस श...