मूल से संघर्ष करती मानवता
निढाल हुआ पुरूषार्थ अवसर के अभाव में हताश निराश आशा अकांक्षा बगैर सक्षम शुरूआत के असंभव है , कल्याण व्ही.एस.भुल्ले 31 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. तार तार आस्था विश्वास के बीच मानवता , निढाल पुरूषार्थ आज भले ही मूल से संघर्षरत हो मगर अवसर अभाव में जिस तरह से आशा अंकाक्षाये बिलबिला रही है वह मानवता के लिये किसी कलंक से कम नही क्योकि जब तक सक्षम शुरूआत सुधार की नही हो जाती तब तक मौजूद समस्या से पार पाना असंभव है । आज हर एक उदय तो चाहता है मगर अस्त होने के डर से सहम जाता है । जो हर जीवन में सुनिश्चित होता है मगर इस सत्य की अस्वीकार्यता ही आज जीवन का सबसे बड़ा बिडंबना और दुर्भाग्य है । जो आज हर समझदार और समझ रखने बाले मानव के लिये अहम होना चाहिए । क्योकि हमें आज यह नही भूलना चाहिए कि जिन विभूतियो को याद कर हम बड़े गर्व गौरव की अनुभूति करते है । वह उस सत्य स्वीकारता का ही परिणाम है जिन्होने सत्य स्वीकारते वक्त कभी तनिक सी भी कोताही नही कि और हमें एक ऐसी भव्य दिव्य विरासत रख छोड़ी जिस हम नाझ करते नही थकते फिर कीमत जो भी रही हो । बैहतर हो हम अपने मू...