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Showing posts from May, 2022

मूल से संघर्ष करती मानवता

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  निढाल हुआ पुरूषार्थ  अवसर के अभाव में हताश निराश आशा अकांक्षा  बगैर सक्षम शुरूआत के असंभव है , कल्याण  व्ही.एस.भुल्ले  31 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  तार तार आस्था विश्वास के बीच मानवता , निढाल पुरूषार्थ आज भले ही मूल से संघर्षरत हो मगर अवसर अभाव में जिस तरह से आशा अंकाक्षाये बिलबिला रही है वह मानवता के लिये किसी कलंक से कम नही क्योकि जब तक सक्षम शुरूआत सुधार की नही हो जाती तब तक मौजूद समस्या से पार पाना असंभव है । आज हर एक उदय तो चाहता है मगर अस्त होने के डर से सहम जाता है । जो हर जीवन में सुनिश्चित होता है मगर इस सत्य की अस्वीकार्यता ही आज जीवन का सबसे बड़ा बिडंबना और दुर्भाग्य है । जो आज हर समझदार और समझ रखने बाले मानव के लिये अहम होना चाहिए । क्योकि हमें आज यह नही भूलना चाहिए कि जिन विभूतियो को याद कर हम बड़े गर्व गौरव की अनुभूति करते है । वह उस सत्य स्वीकारता का ही परिणाम है जिन्होने सत्य स्वीकारते वक्त कभी तनिक सी भी कोताही नही कि और हमें एक ऐसी भव्य दिव्य विरासत रख छोड़ी जिस हम नाझ करते नही थकते फिर कीमत जो भी रही हो । बैहतर हो हम अपने मू...

स्थानीय सरकारो का कुंभ शुरू

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जरूआ , खोसोओ की बाढ़ से मचा मैदाने जंग में हड़कंप ....? तीरंदाज   व्ही. एस. भुल्ले  भैया - सियासत के मण्डलेश्वर महामण्डेश्वरो के सियासी संघर्ष के बाद शुरू हुये स्थानीय सरकारो के कंुभ मे किसको कितना पुण्य प्राप्त होगा यह तो परिणाम तय करेगे मगर जरूआ खोसोओ की तैयारियो को देख म्हारा तो कलैजा मुॅह को आबै आखिर मने कै करू बैसै भी म्हारे जैसै मूढ़धन्यो को इस दिन के लिये कितना संघर्ष झेलना पढ़ा है यह तो म्हारे से बैहतर कौन जान सके है मगर जरूआ खोसोओ की बाढ़ देख म्हारा तो दिल ही बैठा जा रहा है । एक जरूआ पूॅछ रहा था और खोसो खड़ा कान लगाया सुन रहा था के इस मर्तवा सियासी मैदान में वाक्य में जंग छिड़ेगी । या फिर न्याय के नाम शान्ति की खातिर फिर से तारीख बढ़ेगी ।  भैयै - जब भीषण गर्मी और बारिस पूर्व घोर घोषड़ा हो चुकी है । और लोकतंत्र के रक्षको की प्रेस कान्फ्रेन्स हो चुकी है तो अब गाॅंब गली की सरकारो के लिये भीषण संग्राम छिड़ना तो तय है । रही बात जरूआ खोसोओ की तो थारे जैसै लोगो को गर्व होना चाहिए कि पहचान मिट जाने के बाबजूद भी उनका बजूद , आधार , अस्तित्व हमारे बीच भरा पढ़ा है । पहले तो उनका स्थान ...

कमजोर सत्ताये समृद्ध , खुशहाॅल जीवन की बड़ी बाधा

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  सृजन कल्याण से विमुख सामथ्र्य पुरूषार्थ को कठोर दण्ड , नियति का सिद्ध विधान  स्वकल्याण , स्वयं भू ज्ञान विनाश की जड़  सर्बकल्याण से इतर उन्मादी संस्कार सर्बनाश के संकेत  व्ही. एस. भुल्ले  28 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  अब कोई कुछ भी कहै लिखे पढ़े या दिखे परिणाम समक्ष है जिसे झुठलाना जीवन की बड़ी भूल ही कहा जायेगा । कहते है सत्ताये अनादिकाल से ही वैभव शक्ति समृद्धि का केन्द्र रही है जिसका जिसका अस्तित्व आधार जनस्वीकार्यता और उसका कर्म धर्म सिर्फ सर्बकल्याण ही रहा है जिसका आधार जन , लोक जीव जगत कल्याण में अनादिकाल से समूहिक ही रहा है जिसमें श्रेष्ठतम संस्कारो की मान्यता हमारी विरासत रही है । मगर जब जब स्वकल्याण में स्वभू ज्ञान में डूबी सत्ताओ ,सामथ्र्य शक्ति ने उन्माद का रास्ता स्वीकार कर श्रेष्ठता हासिल करने का प्रयास किया वह तब तब लांछित कलंकित होती रही। मगर आज जब हम एक ऐसे दौर में कर्तव्य , जीवन निर्वहन को बैबस मजबूर है जिसके परिणाम न तो आज न ही कल सफल सक्षम सिद्ध होने बाले है न ही हमारी वह विरासत सिद्ध होने बाली है जो कभी सिद्ध भी थी और सफल भ...

गैंग गिरोहबंद सियासत में बड़े सियासी गैंगबार के आसार

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आम आशा अंकाक्षाओ के नाम छिड़ा सियासी संग्राम  सेवा कल्याण अनाथ तो सर्बकल्याण हुआ बांझ  विनाश नीति से थर्राई राजनीति  व्ही.एस.भुल्ले  22 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  सर्बकल्याण के भाव के बीच गहरी जड़े जमा चुका स्वकल्याण गैंग गिरोहबंद सियासत में कभी इस तरह बांझ होगा किसी ने शायद सपने में भी न सोचा होगा । और सेवा कल्याण अनाथ बन अपनो के ही बीच इस तरह बिलाप करेगा तथा आम आशा अकांक्षाओ के नाम छिड़े सियासी संग्राम के बीच ऐसा घमासान मचेगा जिससे आज आम जन जीवन ही नही राजनीति तक थर्रा रही है । इससे साफ है कि सियासत में पनपते नये नये गैंग गिरोहो में बढ़ती महात्वकांक्षाओ , स्वकल्याण के भाव के बीच अब जबरदस्त गैंगबार होना तय है । मानो वैचारिक आधार पर सर्बकल्याण का नारा बुलंद करने बाले वह सियासी दल भी आज बौने साबित हो रहै हो । जिस दल का कार्यकर्ता सत्ता में बैठ अपने दल के वैचारिक आधार को मजबूत करने के साथ आम आशा अकांक्षाओ को पूर्ण करने ऐड़ी चोटी का जोर लगा स्वयं को धन्य समझते थे आज ऐसे दलो के मुखिया सत्ता के पिछबाड़े बैबस खड़े नजर आते है और आज कल सत्ता ही नही कई संगठनो मे प...

मेरे सरकार आये ...............? तीरंदाज

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भक्त भगवान की अन्तर कथा और व्यथा  व्ही.एस.भुल्ले  21 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  भैया - म्हारे को लागे अब तो तने भी सियासी हो लिया । जो तने म्हारे प्रभु राम के भजन को गाये जा रहा है और भक्त भगवान की अन्तर कथा की व्यथा बड़े ही दिमाक को छोड़ दिल से गा रहा है आखिर कै हो लिया जो तने अब तो म्हारे जैसेेेेेे नामचीन सेवक को भी घास डालने तैयार नही है आखिर ऐसा क्या हुआ है बाबले। जो तने पंच परमेश्वरो और हमारे बार्ड सेवको को चुने जाने की पूर्व संध्या पर इस तरह से यशोगान गा रहा है ।  भैयै - म्हारा यह यशोगान थारी समझ मे नही आने बाला क्योकि ये दिल की बात है न की दिमाग कि सो तने तो चुप ही कर और अपने चिन्दी पन्ने की तैयारी कर थारे को भक्त भगवान की कहानी समझ न आने बाली ।  भैया - कै थारे को मालूम कोणी आखिर दिल की बात होती ही कुछ ऐसी है जो दिमाक बालो को कम ही समझ आती है । मने तो इस बात को लेकर खुश हुॅ आखिर गुस्से मे ही सही सरकार ने याद तो किया और यह कहा भी कि बुरे वक्त में अपनो के साथ रहना चाहिए ।  भैयै - तो इसमे बाबले ऐसा क्या टूट पढ़ा है जो तने पहाड़ सर उठाये घूम रहा है इस...

अन्तिम पन्ति का कल्याण और उनका सामथ्र्य सफलता कुन्जी

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  विश्व का चमात्कारिक नेतृत्व पाकर आज देश गौरान्वित है , श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया केन्द्रीय  नागरिक उडडन मंत्री  हिन्दवी स्वराज की स्थापना छत्रपति शिवाजी महाराज की देन  बुरे वक्त में साथ रहना हमारी महान संस्कृति  वीरेन्द्र शर्मा भुल्ले  21 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  अपने एक दिवसीय प्रवास पर शिवपुरी पहुॅचे केन्द्रीय नागरिक  उडडयन मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आयोजित पदाधिकारी कार्यकर्ता बैठक को संबोधित करते हुये कहा कि आज देश , देश यश्सवी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नेतृत्व पाकर स्वयं को गौरान्वित मेहसूस करता है । जिस तरह से प्रधानमंत्री जी ने कोरोना काल मे देश के आम जन जीवन की रक्षा के जी जान लगा दी और दश दश सालो मे बनने बाली वैक्सीन हमारे वैज्ञानिको साइन्टिस्टो ने एक ही बर्ष मे बना करोड़ो जाने बचाये जाने का कार्य हुआ जब रूस यूक्रेन युद्ध मे हमारे हजारो बच्चे फंसे थे तब भी प्रधानमंत्री जी के हमारी टीम को रबाना करते वक्त एक ही शब्द थे हमारे एक एक बच्चे को सुरक्षित निकाल कर लाना है संसाधनो की कोई कमी नही होने दी जायेगी ...

अब जागे है हुजूर ...........?

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विकल्प से जूझते दलो के आगे बड़ा चैलैन्ज  व्यवहारिक , वैचारिक आधार बचा सकता है अस्तित्व  आर्थिक कंगाली बन सकता है बड़ा संकट  वीरेन्द्र भुल्ले  16 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  मंथन चिन्तन और नये संकल्प के परिणाम भबिष्य में क्या होगे यह तो फिलहाॅल भबिष्य के ही गर्भ में रहने बाला है । मगर कभी देश के सबसे बड़े दल और सबसे अधिक सत्ता मे रहने बाले दल की बात करे तो जो उम्मीदे आम जन को थी शायद वह विभिन्न रिपोर्टो के आगे आने और अमन में लाने के साथ ही शायद दफन हो ली मगर फिर भी उम्मीद तो की ही जा सकती है । अगर हम इस महान दल के साथ देश भर में फैलै विभिन्न क्षैत्रीय दलो को देखे तो प्रदर्शन के मामले मे अभी भी यह दल मौजूदा सत्ताधारी दल से कोसो दूर है कारण साफ है देश भर में बढ़ता उसका वैचारिक आधार उसके वैचारिक अनुवांशिक संगठनो की भरमार साथ ही कैडर बैस उसकी मार्गदर्शक संस्था का कंधे से कंधा मिलाकर साथ और जमीनी संगठनात्मक ताकत के बल पर सियासी तौर फौरी मुददो के सहारे बढ़त ले सत्ता तक पहुॅच बना लेना उसके लिये आज एक अचूक शस्त्र साबित हो रहा है जहां खुला संबाद और प्रतिभा प्रदर्शन को खु...

पिछड़ो का मसीहा बनने काॅग्रेस भाजपा आमने सामने

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  एक देश कानून बाले ही नही ,आरक्षण को पालने बाले भी मैदान में  वोट की वैदी पर कोई होंम को तैयार नही  वीरेन्द्र शर्मा  14 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  माननीय न्यायलय के स्पष्ट मत के बाबजूद म.प्र. में पंचायत नगरीय चुनाव होगे या नही यह संसय अभी भी बना हुआ है मगर म.प्र. के दोनो ही प्रमुख विपक्षी दल सारे प्रदेश में प्रेस कान्फ्रेस कर यह सिद्ध करने की कोसिस में लगे है कि कौन कितना बढ़ा पिछड़ावर्ग का हितैसी है मगर यहां यक्ष सबाल यह है । इसमे एक दल तो वह है जो समुचे देश मे सभी के लिये एक कानून का पक्ष धर है तो दूसरा वह दल है जो आरक्षण की मिशाल ले खुद को झुलसा चुका है । आरक्षण हो मगर नियत पर शंका इस बात के संकेत है कि वोट की वैदी पर बड़े अनुष्ठान कर्ता के रूप मे अपना नाम तो चाहते है मगर हाॅम नही करना चाहते । अब इसके पीछे का मतव्य क्या है यह तो वही सियासी दल जाने जो सेवा कल्याण के नाम समाज को यहां तक ले आये है कि सेकड़ो बर्षो से साथ में स्नेह प्रेम से रहते चले आ रहै लोग एक दूसरे को बैमस्य भाव से देखने मजबूर हो रहै है । हो सकता ऐसे दलो की नजरो में वह मानव जीवन की श...

देशभक्ति जनसेवा की शहादत , दर्दनाक

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बैलगाम होते अपराध अपराधी  , सियासत हुई शर्मसार   भय , भूख , भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था पर उठे सबाल  देश के ग्रहमंत्री की नसीहत भी न आई काम  वीरेन्द्र शर्मा  14 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  काश कुछ दिन पूर्व देश के ग्रहमंत्री की नसीहत को म.प्र. शासन और उसके आलाअधिकारियो ने गम्भीरता से लिया होता तो शायद आज हमें यह दर्दनाक दिन न देखना पढ़ता और देशभक्ति जनसेवा का अपना कर्तव्य निभाते उन नौजबानो इस तरह शहादत न देना पड़ती घटना दुखद और किसी भी चुस्त दुस्त व्यवस्था को शर्मसार करने काॅफी है । चूूॅकि आज म.प्र. पुलिस ही नही म.प्र. ने अपने जांबाज निष्ठ नौजबानो को खोया है । और म.प्र. सरकार के मुखिया ने भी सम्मान निधि के साथ परिजनो को नौकरी तथा सम्मान के साथ अन्तिम संस्कार की बात कही है । मगर जो नुकसान म.प्र. का हुआ है और जो सबाल सुरक्षा को लेकर यक्ष हुआ है उसका जबाब कैसै और कब मिलेगा यह समझने बाली बात है । पुलिस अपराधियो के बीच संघर्ष कोई अब नई बात नही रह गई है । खरगौन घटना में सीधे पुलिस अधीक्षक पर फायरिंग और अब तो गश्ती दल को ही मौत के घाट उतार देना इस बा...

सत्यानाश के कागार पर गैंग गिरोहबंद सियासत

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  स्वार्थवत महाकांक्षाओ अखाड़ा बना सेवा कल्याण  जनाकांक्षाओ से द्रोह पर उतारू सियासी कांरबा  जनधन का उजाड़ बना बैड़ागरग का आधार   वीरेन्द्र शर्मा  12 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  म.प्र. मौजूदा हालात पर गैग गिरोहबंद स्वार्थवत सियासत का आकलन जो भी हो उनका सत्ता पाने या पुनः सत्ता हथिया सत्ता मे सतत बने रहने का गणित जो भी हो मगर सच यह है कि सूचना क्रान्ति के इस बिकराल दौर में सिर्फ आम जनता ही नही बल्कि बच्चा बच्चा सेवा कल्याण और स्वार्थवत सियासी सच्चाई से बाकिफ हो चला है कि सेवा कल्याण विकास के नाम विगत 30 बर्षो से म.प्र. मे चल क्या रहा है । मगर यक्ष सबाल वही है कि आवाज कौन और कैसै उठाये यथार्त यह कि बच्चो को शिक्षा भोजन चाहिए तो युवाओ को रोजगार तथा बुजुर्ग को आर्थिक सुरक्षा जिससे वह अपना उत्तरार्ध सुकून से बिता सके । तथा अपने भबिष्यो का भबिष्य समृद्ध खुशहाॅल देख सके । मगर लाखो करोड़ के कर्ज में डूब चुके इस प्रदेश मे समृद्ध स्वस्थ खुशहाॅल जीवन का कोई बैसिक आधार खड़ा हो सका न ही वह संसाधन खड़े हो सके न ही स्वच्द सियासी आधार तैयार हो सका जिससे स्वयं व...

भय , भूख , भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था का साहसिक कदम

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जांच ऐजेन्सियो को लेनी होेगी जांच पूर्व अनुमति  सीधे हाथ डालने पर शासन की रोक  10 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  अगर खबर सही है तो म.प्र. को भय भूख भ्रष्टाचार मुक्त ने साहसिक निर्णय ले यह सिद्ध कर दिया है कि जांच ऐजेन्सिया चोटी के अधिकारियो पर अब बगैर शासन अनुमति सीधे हाथ नही डाल सकेगी । ऐसा खबरे इसलिये स्पष्ट करती है कि अब खबर यह कि अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 में धारा 17- ए जोड़ दी गयी है । जिससे अब भ्रष्टाचार करने बालो को सुरक्षा कबच मिल चुका है । ये अलग बात है कि इस मुददे को लेकर भले ही कांग्रेस हमलाबर हो मगर पका आम सीधे पके आम के मुॅह के मुहाने तक पहुॅचने के इन्तजार मे वह शायद यह भूल रही है कि आम तो तब पकेगे जब बारिस हो मगर वोटो कि बारिस से पूर्व पके आम की उम्मीद मे कही पूर्व कि भांति मौगा गबां मुॅह घायल न कर ले । हालिया तो ओ बी सी आरक्षण और पंचायत नगरीय चुनावो के लेकर हुये हालिया निर्णय से काॅग्रेस से बांछे खिली हुई है मगर जिस भय भूख भ्रष्टाचार के मुददे को लेकर जो सत्ता में आरूढ़ हुये थे वही आज भ्रष्ट आचरणो के संरक्षण में कानून बना म.प्र. में या समुचे ...

इनायत नजर से पूर्व पुख्ता इन्जाम

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  कैसे लगेगी भ्रष्टाचार पर लगाम  झारखण्ड के गड़बड़ झाले से एलर्ट मोड पर शासन  जांच ऐजेन्सियो की हरकत पर म.प्र. में लगाम .......? तीरंदाज  व्ही. एस. भुल्ले  8 मई विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  भैया - बड़े पैमाने पर नोट गिनने मशीन लेकर पहुॅचने बाली जांच ऐसेन्सियो पर मानो म्हारे महान प्रदेश में तो पुख्ता इन्तजाम हाथो हाथ हो लिया है । सुना है शासन का फरमान है कि अब म्हारे चोटी के या नम्बर एक माईबापो की शिकायत से पूर्व म्हारे प्रदेश के मुखिया से लेनी होगी । बुरा हो करोड़ो नोट गिन मशीनो के जबरदस्त प्रदर्शन कर हमारे माईबापो को हैरान परेशान करने बालो अगर झारखण्ड से गड़बड़झाले की खबर और करोड़ो की अकूत खबरचियो ने न दिखाई होती आज इस तरह म्हारे माईबापो को एलर्ट मौड पर आ अलसुबह ही भ्रष्टाचार की शिकायतो का पिटारा लेकर घूम रहै बिघन संन्ताषियो पर लगाम न लगाई होती अब तो म्हारे को यह सक खुली आॅखो सता रहा है कि खाउॅगा न खाने बालो कि टोली आने से पूर्व ही मोर्चा बाजी सुरू हो ली ।  भैयै - बाबले कै थारे को मालूम कोणी भाई की नजर बड़ी गहरी है । सो उसकी नजरो से बच पाना मुश्किल ही नही...

सृजन में सर्बव्यापी , निस्वार्थ , स्पर्शी , श्रेष्ठतम शिक्षा , संस्कार , संस्कृति , कल्याण का प्रतीक है मात्रशक्ति , नमन

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मूल से विमुख जीवन दुर्दशा  मात्रशक्ति सृजन है , तो समाधान भी  व्ही.एस. भुल्ले   8 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  आज जब हम विश्व महिला दिवस पर मात्र शक्ति को याद कर गर्व गौरव की अनुभूति करते हुये स्वयं को धन्य समझते है मगर सृजन की धरा और श्रेष्ठतम शिक्षा संस्कारो संस्कृति सहित निस्वार्थ जीवन कल्याण का प्रतीक को हम विभिन्न नामो रूपो मे याद करते है उम्र जितनी भी उसका एहसास अनुभूति आज मेहसूस करते है। शायद हम महान भारतवंशियो का यही महान मूल है जिस पर आज भी हम जाने अनजाने लाखो हजारो बर्षो बाद गर्व गौरव की अनुभूति कर स्वयं गौरान्वित मेहसूस करते है । इसलिये हमारे लिये आज मात्रशक्ति हमारे यहां पूज्यनीय है तो सृजन का आधार भी देवी है तो देव भी है अगर हमें अध्यात्म का ज्ञान है या कर्म में विश्वास या सर्बकल्याण मे निस्वार्थ विश्वास है तब कि स्थति में बहुत कुछ समझ समझा सकते है शेष मौजूद जीवनो को अगर मानव जीवन से शेष जीवन को अलग कर दे जो अपने मूल मे निष्ठ रह आज भी अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठ है और सिद्ध भी मगर मानव जीवन जो स्वयं के सिद्ध समाधान के लिये जन्म से ही सिद्ध था और शेष...

धैर्य ध्रुर्बीेरण के अचूक अस्त्र से अस्तित्व से जूझते दल

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स्वस्वार्थ महात्वकांक्षाये ले डूबी वैचारिक आधार  बैलगाम सियासी सरोकारो के बीच अधर मे अस्तित्व ,आधार  बैरहम संघर्ष से सहमा जीवन आधार  व्ही. एस. भुल्ले  7 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  यू तो सत्ता से सर्बकल्याण , सर्बकल्याण के नाम सामथ्र्यशालियो द्वारा आम आशा अकांक्षाओ की लूट खसोट का अध्याय इस महान देश में नया नही है । इतिहास गबाह है जब जैसी सत्ताधारियो की मंशा समझ रही आशा आकांक्षाओ को बैसा कुछ भोगना सहना पढ़ा मगर जब हम उस जघंन्य इतिहास को बिसार जनता द्वारा जनता लिये जनता द्वारा संचालित व्यवस्था में और सर्बकल्याण के लिये सत्ताये अस्तित्व में है । जनता के शासन को आज लगभग सात दशक का समय हो गया है और अब वह आशा आकाक्षाये निर्मूल सिद्ध होने लगी है । ऐसे में सबाल यह उठता है कि आखिर चूक कहा हुई जो आज हम एक मर्तवा फिर से संघर्ष के मुहाने पर आ पहुॅचे है । कारण साफ है स्वस्वार्थ और अनियंत्रित महात्वकांक्षाये जो न तो उन वैचारिक आधारो को सुरक्षित रख पायी न ही उस अस्तित्व को संरक्षित रख पायी जो एक मजबूत लोकतांत्रिक सत्ता का आधार होता है । आज जब ऐसे विचारो का आधार अस्तित्व द...
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  म.प्र. में हो , गौलोक की स्थापना  भव्य दिव्य विरासत बचाने सभी का सार्थक योगदान अहम  मूल से विमुख , समृद्ध खुशहाॅल जीवन , असंभव  श्रेष्ठतम संस्कारो का प्रतीक है , गौवंश  धमेंद्र सिंह गुर्जर  6 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  जीवंत शिक्षा , स्वस्थ समृद्ध स्वाभिमानी सर्बकल्याण मे निहित जीवन को अपने वैचारिक आधार से समय पर समय प्रोत्साहित करने बाले स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही. एस. भुल्ले ने अपने भ्रमण कार्यक्रम के दौरान मौजूदा हालात पर अपने अपने नैसर्गिक कर्तव्य निर्वहन की महत्वता पर चर्चा करते हुये कहां कि संतोष का विषय है कि कुछ तो हो रहा है मगर परिणाम तब तक प्राप्त नही हो सकते जब तक की मानव अहम अहंकार छोड़ स्वयं के मूल को बचाने बड़े पैमाने पर सार्थक प्रमाणिक प्रयासो की सार्थकता सिद्ध नही कर लेता । दुर्भाग्य यह है कि मूल से इतर जीवन की सार्थकता सिद्धता तो , अपनी अपनी समझ अनुसार सभी चाहते है और लोग कर भी रहै है । मगर समृद्ध खुशहाॅल जीवन का मूल क्या है इस पर तनिक भी विचार नही करना चाहते । उनके लिये समझने योग्य बात यह है कि वह अपने अपने सामथ्र्य पुर...

श्रेय से दूर सामथ्र्य का प्रदर्शन

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अधभुत पुरूषार्थ की शालीन व्याख्या  दिशा तो ठीक है , अगर प्रयास , प्रदर्शन सार्थक रहा तो सर्बकल्याण मे दूर की कोणी साबित होगा निष्ठ योगदान  विदेशी सरजमी पर सर्बकल्याण की दहाड़  व्ही. एस. भुल्ले  4 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  आज समुचा बैबस विश्व विनाश की संभावना के बीच त्राहीमाम कर है और बड़ी ही आशा की नजरो से निदान के लिये भारत की ओर देख रहा है ऐसे में भारत का सर्बकल्याण में सार्थक प्रयास, प्रदर्शन इस बात का संकेत है । कि कुछ तो हस्ती है हमारी जो मिटटी नही, मिटाने से क्योकि सक्षम अधभुत पुरूषार्थ की जो शालीन व्याख्या विदेशी सरजमी पर जो देखने सुनने मिली वह किसी बड़े योगदान से कम नही , श्रेय दूर सामथ्र्य का प्रदर्शन ऐसा भी हो सकता है शायद ही किसी ने सपने मे सोचा हो मगर ऐसा हुआ । धन्यबाद के पात्र है हमारे प्रधानमंत्री और उनकी वह टीम जिसने ऐसी विकट परिस्थिति में सर्बकल्याण का स्पष्ट संदेश देने सार्थक परिश्रम किया जो सराहनीय ही कहा जायेगा धन्यवाद साधुवाद के पात्र है हमारे प्रधानमंत्री जिन्होने विदेशी सरजमी पर भारत की सर्बकल्याण में लीन उस महान संस्कृति संस्कारो को प...

मूल से द्रोह , पहचान अस्तित्व का संकट

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भ्रम का शिकार जीवन दुर्दशा का शिकार  नव संस्कृति , संस्कारो के सैलाब में तार तार होते सरोकार  स्वार्थ महात्वकांक्षाये लेे डूबी समृद्ध सृजन , जीवन आधार  व्ही. एस. भुल्ले  3 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  कहते है जीवन या सृजन में जब भी कोई अपने मूल से द्रोह करता है तो वह निश्चित ही आने बाले समय में अपने अस्तित्व ही नही पहचान का भी मोहताज हो जाता है । जिसके मूल में वह भ्रम और वह नव संस्कृति , संस्कार होते है । जिनका मूल स्वार्थ और महात्वकांक्षा होती है । जो आज सीधे तौर पर समृद्ध जीवन को चुनौती देने में कतई कोई संकोच नही करती जो आज समृद्ध जीवन ही नही भबिष्य के लिये एक बड़ा संकट सिद्ध हो इसमें किसी को भी अब कोई संदेह नही होना चाहिए । तर्क तथ्यो से बिमुख परिणाम इस बात के प्रमाण है कि कही न कही जीवन अब उस संस्कृति , संस्कारो को अंगीकार करता जा रहा है । जो स्वयं मूल से द्रोह के कारक है । और बर्तमान ही नही भबिष्य में वह अस्तित्व ही पहचान के लिये बड़ा संकट पैदा करने बाले है । ये अलग बात है कि अपने अस्तित्व से विमुख सत्ताये निश्चित ही सही मार्ग समझ देने में आज तक जो अक्षम...

पशुवत संस्कुति में स्वाहा होता मानव आधार

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शिक्षा , स्वास्थ , सुरक्षा हुई तारतार  बैलगाम हुये सियासी सरोकार  व्ही. एस. भुल्ले  2 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  मानव आधार से संघर्ष करते पशुवत संस्कार कभी मानव सभ्यता में इतने प्रभावी हो सकते है शायद ही किसी ने सपने में सोचा होगा । मगर तार तार शिक्षा , स्वास्थ , सुरक्षा की सिद्धता इस बात का प्रमाण है कि बैलगाम सियासी सरोकार समृद्ध जीवन की विद्या को किस तरह से रौधने में लगे है । साम्राज्यवादी सोच की छत्रछाया मे पनपते पशुवत संस्कार मानो अब जीवन आधार बनते जा रहो हो जिस पर गर्व गौरव मेहसूस करने मे आज न तो सत्ताये , न ही शिक्षा , स्वास्थ , सियासी माफिया और न ही सुरक्षा सरोकार शर्म मेहसूस करतेे है । मगर आज का यथार्त सत्य यही है । जहां सत्ता का आधार ही संख्याबल हो और वही संख्या बल का आधार विवेक पर भारी तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि हम किस व्यवस्था का भाग है । और उस व्यवस्था से आम मानव जीवन को क्या उम्मीद रखनी चाहिए मगर यथार्त के बीच हम मानव जीवन के मूल को ही भूल जाये यह भी संभव नही जो शिक्षा कभी समर्थ सुस्कुत जीवन समाज का मूल आधार हुआ करती थी जिसमे स्वास्थ ज्...

छल छिद्रान्वेशण में डूबा पुरूषार्थ

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स्वार्थवत संघर्ष में दम तोड़ता विश्वास  विरासत से विमुख सर्राटे भरता सर्बकल्याण  परिणाम शून्य अनुभूति में छटपटाते जीवन सरोकार    व्ही. एस. भुल्ले  1 मई 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  आज बात बखेड़ा कोई कितना ही बड़ा क्यो न कर ले मगर स्वार्थवत लोगो को अवश्य अन्तिम शैया पर पढ़े उस महान शूरवीर का जिज्ञासा भरा संवाद अवश्य सुनना पढ़ना चाहिए जो महान ग्रन्थ गीता में लिखा है । जो भगवान कृष्ण और भीष्म पितामह के बीच हुआ । उसका सार अपनी अपनी समझ से समझने बालो के जो भी हो मगर मेरी समझ कहती है कि धर्म और कर्म के परिणाम स्वरूप प्राप्त परिणामो की वह जिज्ञासा भर थी जिसे जानने सृजन में मानव कर्म धर्म की ही वह व्याख्या थी जो उस संवाद से सीख देती है । क्योकि पितामह का सीधा सबाल स्वयं उस सृष्टि के पालन से हार से जिसके सम्मुख मानव जाति महान धर्माबलंबियो शूरवीर धर्मवीर को विनास हुआ विनाश इतना भयाभह था कि अच्छे अच्छो की रूह कांप जाये । पितामह के तर्क भगवान राम से लेकर प्रभु कृष्ण के काल में मानव कर्म धर्म को लेकर थे । और प्रभु का उत्तर भी वही था जो हर काल में रहने बाला था और जो सम्पूर्...