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Showing posts from October, 2019

कमलनाथ सरकार की कार्यवाही से मैं सन्तुष्ट नहीं- गंगाराम घोसरे सदस्य राष्ट्रीय कर्मचारी आयोग सिंधिया को दिया दिल से धन्यवाद

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। पीडित परिवारों के बीच दीवाली मनाने दिल्ली से शिवपुरी पहुंचे राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग भारत सरकार सामाजिक न्याय एवं अधिकारित मंत्रालय गंगाराम घोसरे ने कहा कि वह म.प्र. की कमलनाथ सरकार की पीडित परिवार के प्रति असंवेदनशीलता को लेकर पूर्णताः अंसतुष्ट है। बेहतर हो कि म.प्र. के मुख्यमंत्री कमलनाथ स्वयं दीपावली पश्चात पीडित परिवार की सुध लेने शिवपुरी आये। वहीं उन्होंने काॅग्रेस राष्ट्रीय महासचिव तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के द्वारा पीडित परिवार की गई व्यक्तिगत मदद के लिए आयोग की ओर से आभार व्यक्त किया, तो वहीं दूसरी ओर उन्होंने कलेक्टर शिवपुरी और पुलिस अधीक्षक शिवपुरी द्वारा पीडित परिवार को तत्काल न्याय दिलाने के लिए धन्यवाद दिया। जब उनसे विलेज टाइम्स संपादक वीरेन्द्र शर्मा द्वारा पूछा गया कि वर्ष भर के त्यौहार दीपावली के दिन शिवपुरी आने का आपका उद्देश्य क्या है और आयोग सदस्य के रूप में जिनके लिए आयोग है उन्हें क्या संदेश देना चाहेंगे। इस पर राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के सदस्य गंगाराम घोसरे कहा कि मेरा सभी देश के सफा...

दीपोत्सव पर अरमानों का दीवाला...............तीरंदाज ?

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व्ही.एस.भुल्ले भैया- बाबा के राज्य में साढे 5 लाख से अधिक दीप प्रज्जलन का विश्व रिकार्ड बन रहा है तो वहीं हरियाणा सहित महाराष्ट्र राज्य में नई सरकारों का दीपोत्सव शुरू हो भाव, मोल भाव के सहारे सत्ता में भागीदार का फाॅरमूला फिक्स हो रहा है। इस बीच महालक्ष्मी पूजन की खरीददारी के बीच नये वस्त्र के नाम तने (लंगोट) खरीद रिया शै, कै तने बावला शै। जिस त्यौहार की तैयारी महीनों पूर्व और वस्त्रों के धमाकेदार व्यापार के बीच होती है और तने एक वर्ष के त्यौहार पर (लंगोट) खरीद रिया शै, कै वाक्य में ही दीपोत्सव के पावन पर्व पर थारा दीवाला निकल गिया शै। भैये- दीवाला निकले थारा मने तो दीपोत्सव पर अपनी महान विरासत, सभ्यता, संस्कृति को संरक्षित करने की कोशिश कर अपने व अपनो का भविष्य सुरक्षित कर रहा हूं। कै थारे को मालूम कोणी कि (लंगोट) की महिमा ही आज हमारी महान समृद्ध, सुसंस्कृत सभ्यता की तीसरी उपलब्ध विरासत है और म्हारे को तो लागे कि (लंगोट) ही अब भविष्य का वह सम्पूर्ण वस्त्र और अस्त्र साबित होने वाला है। जिसका नाम भी एक न एक दिन गिनीज बुक में दर्ज होगा। क्योंकि अब (लंगोट) ही हमारी महान विरासत का अचूक...

सेवा कल्याण के नाम, स्वयं से छल, आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। फिलहाल गांव, गली लोकतंत्र के नाम जिस तरह से टाॅप टू वाॅटम ऊपर से लेकर निचले स्तर तक अघोषित रूप से माफियाराज स्थापित होता जा रहा है वह किसी भी सभ्य संस्कृति, संस्कार, सभ्यता के लिए घातक है व्यक्ति, परिवार, समाज ही नहीं इससे मिलकर बनने वाले उस राष्ट्र महान भूभाग के लिए भी अघोषित रूप से संग्राम है जो पथराई आंखों से अपनों के ही कारण बडी विभीसिका देख रहे है वह भी समृद्ध, खुशहाल जीवन की उम्मीद में। मगर न तो किसी को इस भावी विभीसिका का दर्द है न ही शर्म, हजारों वर्षो की तपस्या को पलीता लगा जिस तरह से सेवा कल्याण के नाम स्वयं स्वार्थपूर्ति का नंगा नाच चल रहा है वह किसी से छिपा नहीं। बेहतर हो हम अपने लिए न सही कम से कम अपनी आने वाले पीढ़ी के लिए तो कुछ त्याग कर सकते है। अगर हम स्वयं के लिए न सही अपनो के लिए ही इतना भी नहीं कर पाये तो इससे बडी अक्षमता, असफलता मानव समाज एवं उस महान सभ्यता, संस्कृति, संस्कारों के लिए और कोई हो नहीं सकती। जय स्वराज

चमकदार सपनों का, दर्दनाक जनाजा पठानी बसूली का प्रमाणिक प्रमाण सेवा के नाम, जनधन ही नहीं, आमजन की आशा-आकांक्षाओं की सरेयाम लूट शर्मनाक

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। किसी भी सेवा कल्यायण का चेहरा इतना वीभत्स हो सकता है अगर इसका नंगा नाच सरेयाम देखना है तो मुरैना, ग्वालियर से इन्दौर, आगरा, मुम्बई राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 3 पर देखा जा सकता है। जो अब एन.एच.एआई में मर्ज हो चुका जहां फिलहाल सेवा जनसुविधाओं को तिलांजली दे, सरेयाम पठानी बसूली की जा रही है। जो देश को सुदृण सर्वसुविधा युक्त सडक के नाम बडा मजाक और उन नेताओं के लिए शर्मनाक है जो स्वयं को सबसे बड़ा जनसेवक समझते है। अगर हम सडक परिवहन मंत्री की बात करें तो उनके प्रमाणिक सर्वसुविधा युक्त सडकों के बडे-बडे दावे-दावे टी.व्हीं अखबारों में रहते है और उनके अहंकारी मातहतों के टाॅल के पक्ष में जो असम्भ अतार्किक तर्क होते है वह एक आजाद भूभाग में जीवन निर्वहन कर रहे कत्र्तव्यनिष्ठ, कत्र्तव्य निर्वहन में लीन रहने वाले को बड़े ही कचोटने वाले है। स्वयं के अहंकार में लीन एन.एच.ए.आई के कुछ आला अफसर ही नहीं, मातहतों को इतना बड़ा मुगालता है कि कानून की आड़ में सेवा सुविधा के नाम कत्र्तव्य विमुख हो आशा-आकाक्षाओं का दमन जिस तरह से विगत 10 वर्ष से करते रहे है वह किसी से छिपा नहीं। मगर दुर्भ...

अहिंसा के दूतों का स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने स्वागत कर अभिवादन किया एकता परिषद के अन्तर्राष्ट्रीय संयोजक राजगोपाल पी.व्ही. से बतियाये स्वराज के मुख्य संयोजक

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। दिल्ली से जैनेवा को निकली एकता परिषद की पैदल यात्रा के लिए स्वराज संयोजक ने माला पहनाकर यात्रा का नेतृत्व कर रहे राजगोपाल पी.व्ही. का स्वागत किया तथा कलेक्ट्रेट से लेकर उनके पडाव स्थल तक पैदल मार्च कर अपनी भावनाओं से अवगत कराया। उन्होंने राजगोपाल पी.व्ही से इस दौरान चर्चा में कहा कि आप धन्य है जिन्होंने अपना समूचा जीवन पीडितों, वंचितों की आवाज बुलंद कर 10 देशों से होकर 11 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा करने का जो अदम्य साहस संकल्प एक शान्तिदूत के रूप में समूचे विश्व को देने की शुरूआत की है यह अवश्य सार्थक होगी और 150 वर्ष बाद एक मर्तवा पुनः गांधी विचार की सार्थकता सिद्ध होगी। 

विश्व शान्ति सौहार्द के लिए चल निकले शान्तिदूत 2 अक्टूबर 2020 को जैनेवा पहुंचेगी यात्रा अहिंसा के प्रशिक्षण केन्द्र बनायेंगे, अहिंसा से बडा विश्व में कोई अस्त्र नहीं- राजगोपाल पी.व्ही.

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 2 अक्टूबर 2019 से शुरू होकर 2 अक्टूबर 2020 में जैनेवा पहुंचने वाली शान्तिदूतों की यात्रा 10 देशों का सफर तय कर शान्ति सौहार्द और अहिंसा का संदेश देगी। यात्रा का नेतृत्व कर रहे एकता परिषद के अंतर्राष्ट्रीय संयोजक राजगोपाल पी.व्ही ने विलेज टाइम्स संपादक वीरेन्द्र शर्मा से अनौपचारिक चर्चा में कहा कि विश्व में अहिंसा से बडा और कोई दूसरा अस्त्र नहीं और महात्मा गांधी इसकी जीती जागती मिशाल है। उनका संदेश अपने आप में सम्पूर्ण है उन्होंने कहा कि हम सौभाग्यशाली है जो हमारे भूभाग पर ऐसे अदभुत व्यक्तित्व और कार्यशैली के धनी महात्मा गांधी जी ने जन्म लिया और उसे अपनी कर्म स्थली भी बनाया। विश्व शान्ति के लिए गांधी के संदेश से बडा आज कोई दूसरा संदेश नहीं हो सकता।  आज कुछ लोग है जो गांधी विचार को भुलाना चाहते है मगर हमारी केन्द्र की और म.प्र. की सरकार ने गांधी जी की जयन्ती के 150वीं वर्ष पूर्ण होने पर जिस तरह से उत्साहपूर्ण मनाने का निर्णय लिया है और गांधी के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का जो कार्य किया है उस पर हर नागरिक को गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह चम्बल घाटी...

सियासत में हार जीत कोई, अन्तिम सत्य नहीं निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन सबसे बडी जीत

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है स्वार्थवत सियासत में सजगता का अभाव और स्वार्थवत महत्वकांक्षी सिपहसालार सैनिकों का बडा समूह होने के बावजूद कभी कभी राजा हार जाता है। लेकिन सत्ता, सियासत में सजगता संवाद सटीक सूचना व समर्पित सलाहकारों का बडा योगदान होता है। जब सियासत की इस सच्चाई से अनभिज्ञ कोई सद पुरूष प्रत्याशित परिणामों के विपरीत स्वयं को पाता तो इसमें संदेह नहीं होना चाहिए कि हालिया तौर पर नहीं कई वर्षो का यह अप्रत्याशित परिणाम है। अन्तर निहित अपारदर्शी कारण कई हो सकते है। खासकर जब सत्ता सिंहासन का मार्ग जनतांत्रिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होकर गुजरता हो। मगर उन जनाकांक्षाओं का क्या जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सदपुरूष के साथ खडी रही। जो आज स्वयं को ठगा सा मेहसूस करती होगीं। बहरहाल जाने अनजाने ही सही, जिस कुरूप सियासत का चेहरा पथराई आंखों में नजर आता है। वह बडा ही दर्दनाक है। ये अलग बात है कि कुछ क्षण के लिये सच ओझल हुआ है। मगर जल्द ही किसी चमकदार चेहरे के रूप में बुझती आशा-आकांक्षाओं के बीच लोगों के सामने हो तो किसी कोई अतिसंयोक्ति नहीं होनी चाहिए। 

मैं जनसेवा में दिल से हूं, दिमाग से नहीं- सिंधिया

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अप्रत्याशित घटनाओं पर दर्द तो होता है मगर मैं आपके साथ हूं, मैं दिमाग से नहीं दिल से काम करने में विश्वास रखता हूं और इस क्षेत्र की लोगों की सेवा ही मेरा अंतिम लक्ष्य है, अनौपचारिक पत्रकारवार्ता के पश्चात जब विलेज टाइम्स संपादक वीरेन्द्र शर्मा ने काॅग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया से पूछा कि आपने कहा कि दुःख दर्द में आप हमेशा जनता के साथ खडे रहते है और आप चुने हुये प्रतिनिधि न होने के बावजूद भी समूचे ग्वालियर-चंबल ही नहीं मालवा म.प्र. की सेवा में और लोगों के दर्द बांटने में जुटे है। आपके दर्द में क्षेत्र की जनता कब आपका दर्द बांटे, उसके लिए आप कब समय निकालेंगे ? इस पर श्रीमंत सिंधिया ने कहा कि वह अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन में लगे है। मगर उसके बावजूद भी कोई ऐसा अप्रत्याशित घटनाक्रम होता है तो दर्द होता है। चूंकि जनसेवा मेरा अंतिम लक्ष्य है और मैं क्षेत्र के लोगों के साथ अभी हाल ही में मैंने मालवा, मंदसौर ही नहीं मुरैना, भिण्ड, ग्वालियर, अशोकनगर, शिवपुरी का दौरा किया है। सुबह शुरू ...

सृजन में सत्ता, सियासत, सेवा में सार्थक समझ अहम बडा नुकसान हुआ है सेवा, कल्याण, कृतज्ञ सेवा में जुडे लोगों का

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से आज के माहौल में सेवा, कल्याण तथा सृजनात्मक सत्ता, सियासत का चीरहरण हो रहा है तथा लोकतंत्र की सभा में मौजूद बडे बडे विधा, विद्ववान, बलशालियों के रहते लोकतंत्र का अस्तित्व आधार, अपमानित हो रहा है तथा सत्ता सिंहासन, बैवस, मायूस नजर आते है यह सत्य किसी से छिपा नहीं। अगर यो कहे कि सत्य के आग्रही और सविनय के माध्यम से जन राष्ट्र, लोग, कल्याण की बात जीवन के मूल्य सिद्धान्त के चलते सडक पर और कुटिल सियासत के सम्राट, सत्ता, सियासत के सिरमौर है तो कोई अति संयाक्ति न होगी। मगर कहते है समय व सटीक, समझ व बफादार, सिपहसालारों के आभाव मंे जब स्वयं की असफलता का दोष सक्षम होने के बावजूद दूसरों में देखने पर बादय हो तो इससे बडी अक्षमता उस सेनापति शासक, सभाषद या संगठन प्रमुख, सेवा कल्याण के लिये और कोई नही हो सकती। जब-जब लोग सर्वकल्याण से दूर स्वयं के स्वार्थ को अपना पुरूषार्थ मान लेते है और सम्पूर्ण विश्वास आसपास मौजूद सिपहसालारों में व्यक्त कर देते है। तब-तब ऐसे उदाहरण प्रायः आम होते है। अगर आज कुछ सक्षम सेवा, कल्याण से जुडे सेवाभावी लोग अपनी कृतज्ञ...

स्वराज का असर अनाथों की सेवा को लेकर सख्त हुये नाथ मं.प्र. मुख्यमंत्री ने की गौ-सम्बर्धन संरक्षण की समीक्षा

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धर्मेन्द्र सिंह विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जैसा कि विदित है कि विगत एक दशक से कामधेनु वर्ग की सृजन, समृद्धि, खुशहाली में उपायदेयता को लेकर संघर्षरत व्ही.एस.भुल्ले द्वारा एक वैचारिक जागरण का अभियान स्वयं के मौजूद संसाधनों के बीच छेड रखा है। जिसके तहत कामधेनु वर्ग के मान-सम्मान और उनके स्वाभिमान की रक्षा हेतु गोष्ठियां, चर्चा तथा जल संरक्षण सहित गौ-सम्बर्धन के क्षेत्र में वैचारिक चर्चा छेड रखी है। उसी का परिणाम है कि जिन स्कूलों में कभी समाज, सत्ता, सियासत के लोग जाने से खिचखिचाते थे आज पूरे स्वाभिमान के साथ लोग दशा दिशा देने विद्यालय, महाविद्यालयों का रूख कर रहे है। जल संरक्षण को लेकर भी आज देश में चर्चा सरगर्म है।  जिस तरह से चुनाव से पूर्व गौ-सम्बर्धन, संरक्षण का वचन म.प्र. के मुख्यमंत्री ने दिया था उस क्रम में म.प्र. में लगभग एक हजार गौशालाओं को खोलने का लक्ष्य निर्धारित हुआ है। मंदगति से चलता गौशालाआंे के निर्माण पर स्वराज के मुख्य संयोजक ने सार्वजनिक तौर पर जब सरकार को चेताया तब जाकर हालिया तौर पर म.प्र. के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बेजुबान अनाथ गौवंश की सेवा के लिये नाथ ब...

चल पडे जैनेवा, पर्यावरण शान्ति दूत

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। लगभग 10 हजार किलोमीटर लम्बी पैदल यात्रा कर विश्व शान्ति और पर्यावरण की रक्षा के लिए जन जागरण में निकली शान्ति दूतों की यात्रा गांधी जयंती के 150 वर्ष पूर्ण होने पर दिल्ली से शुरू होकर बरधा की ओर कूच कर चुकी है। जिसमें तमाम पर्यावरण प्रेमी शान्ति दूत के रूप में गांधी विचार धारा को आगे ले जाते समाजसेवी, त्याग पुरूष महा हस्तियां शामिल है। महान गांधीवादी श्री सुब्बाराव, राजगोपाल पी व्ही के अलावा कई महान हस्तियां इस यात्रा में भाग ले रहीं है। जिसे 10 हजार किलोमीटर की यात्रा तय कर जैनेवा पंहुचना है।

श्रीमानों आप ही कुछ करो हमारे माननीय तो वोट, सत्ता नीति के आगे बैवस और लाचार है स्वराज का खुला पत्र

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है लोकतंत्र की सबसे बडी ताकतवर संस्था कार्यपालिका में संविधान प्रदत्त शक्तियों के चलते आप शासन की शक्ति का अहम भाग है। जिसे सीधे तौर पर संवैधानिक संरक्षण व लोक-जन राज्य, राष्ट्र, नगर, गांव, वार्ड की सेवा कल्याण विकास में विधि सम्वत क्रियान्वयन के अधिकार प्राप्त है।  लोकतंत्र में आमजन के वोट के बल 5 वर्ष के लिए सेवा कल्याण को चुने जाने के चलते वोट व सत्ता की खातिर माननीयों की बैवसी मजबूरी तो जान पडती है। मगर श्रीमानों आपको तो विधि सम्वत शासकीय सेवा में आने के बाद 60 वर्ष की उम्र तक सेवा, विकास, कल्याण का बगैर किसी बैवसी लाचारी के संवैधानिक अवसर प्राप्त है। फिर स्वस्थ सोच, सेवा, कल्याण से हम गांव, गली के लोग बैवस, नैसर्गिक सुविधाओं से मेहरूम क्यों है। आखिर आप लोग भी तो हमारे ही बीच से तो है और शासकीय सेवा से निवृत होने के पश्चात आपको भी तो हमारे ही बीच तो रहना है तथा आपके द्वारा सम्र्बधित संरक्षित मार्गदर्शित व्यवस्था में आप और हमको इसी लोकतंत्र में किसी न किसी नगर, शहर, गांव, गली में रहना है।  धन्यवाद के पात्र है हमारे म.प्र के...

विजन के आभाव में शुरू होने से पूर्व ही दम तोड़ती महत्वकांक्षी योजना सृजन में कत्र्तव्य ही जबावदेही ही सिद्धता होगी

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। वर्षो से वेमौत मरने पर मजबूर हमारे बेजुबान पशुधन को विगत 1 वर्ष पूर्व गांव-गांव गौशाला खोलने की घोषणा से एक बडी उम्मीद मानवीय जगत में बनी थी। जिसके लिए स्वराज विगत एक दशक से राष्ट्र के कामधेनु वर्ग के मान-सम्मान एवं पुर्न स्थापन के लिए संकल्पित है और अपने संसाधनों के बीच संघर्षरत था। गांधी जी के इस विचार को आगे ले जाते हुये कि उच्च साध्य की प्राप्ति हेतु उत्तम साधन अहम होते है। इसी तारतम्य में स्वराज द्वारा एक वैचारिक अभियान की शुरूआत की जिसमें मानव सभ्यता एवं जीव, जगत के कल्याण हेतु कामधेनु वर्ग, बच्चे, युवा, बुजुर्गो के कल्याण एवं उनके मान-सम्मान सहित उस महान भूभाग के कल्याण हेतु शुरूआत की गई। जिसमें शिक्षा से लेकर जल सम्वर्धन और फिर गौ संरक्षण हेतु वैचारिक आधार पर नये सिरे से एक शुरूआत हुई।  परिणाम कि जहां म.प्र. सरकार ने अपने वचन, पत्र में हर गांव में गौशाला खोले जाने का वचन मानव जगत को दिया। मगर प्रभावी सोच और क्रियान्वयन का आधार स्पष्ट करता है कि हाालिया तौर पर कोई बडी राहत इस अहम वेजुबान गौवंश को नहीं मिलने वाली। कहते है किसी भी व...

गेधुओं के हाथ, गंगा स्नान की कमान...............तीरंदाज ? कत्र्तव्य विमुख व्यवस्था की व्यथा

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। भैया- स्वच्छता, सिंग्गल प्लास्टिंग पाबन्दी जल संरक्षण के दौर में 10 मिनिट में हन्ड्रेड तो 5 मिनिट फिफ्टी, इन्क्लेव और दे दनादन डिवेटोें के बीच लगता है कि तू एक्सक्लुसिव पढ़ रहा है। लगता है हरियाणा ही नहीं महाराष्ट्र चुनाव से भी थारा टिकिट कट गया है।  भैये- मुये चुप कर म्हारे को तो उफनती गंगा में जंगली जानवर जीव जन्तुओं के गंगा स्नान के कवरेज का ठेका मिल गया है।  भैया- तो क्या 2 अहम प्रदेशों में होने वाले सत्ता परिषदों के चुनावों का थारी नजर में कोई मूल्य नहीं। जिससे हमारा कत्र्तव्यनिष्ठ लोकतंत्र चलने वाला है। विगत 72 वर्ष में न सही अब तो थारे जैसे चित्रकार, पत्रकार, काले पीले पन्ने वालों का जीवन समृद्ध खुशहाल होने वाला है।  भैये- खैर तू फिलहाल तो कत्र्तव्य विमुख व्यवस्था में समृद्धि, खुशहाली के सपने छोड मने तो यह पता कि जीव जन्तुओं के गंगा स्नान कवरेज का ठेका तुझे कहां मिला ?  भैया- सुनना चाहे तो सुन म्हारे धर्म ग्रन्थों में वान्यप्रस्थ आश्रम का पूरा अध्याय है। सो मने तो आजादी से पूर्व 1 अगस्त को 50 का होते ही वान्यप्रस्...

मूल आधार खोती विरासत बंटाढार सोच सियासत के आगे गिड़गिड़ाती समृद्धि खुशहाली

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स  समाचार सेवा। कहते हैं किसी भी जीव जगत मानवीय सभ्यता, संस्कृति का मूल आधार उसकी उत्पत्ति सृजन और अंत के बीच जीवन को समृद्ध, खुशहाल बनाने वाली वह विरासत होती है। जो उसे वंशानुगत रूप में प्रारब्ध से प्राप्त होती है। उसकी अपनी संस्कृति और संस्कार होते हैं। मगर किसी भी सभ्य समृद्ध समाज में उसकी संस्कृति, संस्कार बंटाढार सोच सियासत का शिकार हो और समृद्धि, खुशहाली गिड़गिड़ाने मजबूर हो, तो इससे बड़ा दुर्भाग्य उस सभ्यता संस्कृति, समृद्ध, खुशहाल विरासत का कोई और नहीं हो सकता। खासकर समृद्ध, सुसंस्कृत, संस्कृति के उत्तराधिकारी इस सच को जितनी जल्दी समझ पाएं उतना बेहतर होगा वैसे भी सुधार को लेकर बड़ी देर हो चुकी है और कई पीढ़ियों संघर्षपूर्ण जीवन के बावजूद अभावग्रस्त रह इस कड़वे दंश के साथ विदा ले चुकी है। अब न तो  हमारे बीच वह समृद्ध स्वस्थ शिक्षा, स्वास्थ्य और संसाधन रहे जिसके लिए हम महान समृद्ध, खुशहाल जीवन की विरासत के उत्तराधिकारी के रूप में विश्व भर में जाने जाते है। मगर आज बंटाढार सोच सियासत के चलते मानवीय नस्ल बतौर जिस मुकाम पर है ऐसे में हम महान विरासत क...

सृजन में सार्थक सक्रियता और यथार्थ चरित्र ही समाधान है नैतिक जीवन मूल्यों का तर्पण समृद्ध, खुशहाल जीवन का मार्ग

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है कि समृद्ध, संस्कृति के सामर्थ से विदेशी सत्तायें न तो कभी अनभिज्ञ रही, न ही उसे कभी दरकिनार कर सकी और न ही वह स्थापित भारतीय संस्कृति के खिलाफ वह सामर्थ जुटा सकी। जिससे वह अपनी उपनिवेशित सोच को स्थाई रूप से मूर्तरूप दे पाती। मगर हमने भ्रमपूर्ण जीवन मूल्य अपना नई संस्कृति को आत्मसात कर अपने पूर्वजों की समृद्ध, खुशहाल विरासत को ही अनजाने में ही सही कलंकित करने का मार्ग प्रस्त किया। जिसके दुष्परिणाम हर क्षेत्र में हमारे सामने है। फिर वह व्यक्ति परिवार, समाज, धर्म, अर्थ, राजनीति का क्षेत्र हो या हमारा पुरूषार्थ और सामर्थ। हमने हमारी महान संस्कृति से अनभिज्ञ रह नैतिक चरित्र पतन के एक से बढकर एक कीर्तिमान स्थापित किये। अब इसके पीछे के कारण जो भी रहे हो। कहते है मानवीय जीवन और सृजन में कारण और कारक तो पहले भी रहे है और समाधान भी आये। जो हमारे ग्रन्थ, शास्त्र इतिहास में दर्ज है तथा महा मानव महापुरूषों के नाम व उनके चरित्र भी दर्ज है और उनकी जीव, जगत, मानवता के प्रति रही कृतज्ञता भी सुनहरे अक्षरों में उल्लेखित है। मगर आज जब हम एक ऐसी कृतज...

विनय, सत्य के आग्रही, यथार्थ चरित्र के साथ, सार्थक कर्मयोद्धा की 150वीं जयंती नैतिक, जीवन मूल्यों के सच्चे प्रणेता है गांधी सच मायने में, कहने के बजाये गांधी, करने के बडे़ पक्षधर थे

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। नैतिकता का डर तो आक्रान्ताओं को भी था अब तो हर क्षेत्र में नैतिक पतन का साम्राज्य दिखाई पडता है कहते है कि भारतीय नैतिकता, संस्कृति, संस्कारों के डर से एक मर्तवा विदेशी सत्ता को भी गांधी के साथ न्याय करने पर विवश होना पढ़ा। मगर आज जब व्यक्ति, परिवार, समाज, धर्म, अर्थ, राजनीति मेें नैतिक पतन पराकाष्ठा की ओर अग्रसर है। ऐसे में गांधी कैसे मानवीय जीवन में सार्थक हो सकते है। यहीं यक्ष सवाल हम समृद्ध, खुशहाल विरासत के उत्तराधिकारियों के समक्ष होने चाहिए। जिसके लिए हमारे पास हमारे दिव्य महापुरूष ही नहीं महात्मा गांधी द्वारा चरितार्थ वह मार्ग ही है जिस पर चल हमें स्वयं के पुरूषार्थ के माध्यम से एक समृद्ध, खुशहाल और शान्त प्रिय जीवन की पटकथा लिख उसे चरितार्थ करना होगा। यहीं आज महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजली होगी।