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Showing posts from November, 2019

वन पर्यावरण सुरक्षा के नाम मानवीय, प्राकृतिक संपदा, जीव जगत का भया दोहन शर्मनाक मनमानी विधि में दम तोडता सृजन, समृद्धि का विधान

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। आज जिस तरह का संकट मानव ही नहीं समूचे जीव-जगत सहित एक समृद्ध सृष्टि के सामने स्वार्थवत विधियों के चलते विधान के विरूद्ध आ खडा हुआ है आज उस पर विचार ही नहीं प्रमाणिक व्यापक संवाद की दरकार है। सवाल विधि सम्वत वन और पर्यावरण की सुरक्षा की जबावदेही ओडे उन जबावदेह उन संस्थानों की है जो इसके लिए उत्तरदायी ही नहीं जबावदेह भी है।  वन पर्यावरण की सुरक्षा निःसंदेह मानव ही नहीं समूचे जीव जगत के संरक्षण, सम्बर्धन एवं सृष्टि विधान को संरक्षित करने अहम है। अगर हम विज्ञान को छोड अध्यात्म की बात करें तो कहते है कि संतुलन ही प्रकृति की नियम है और प्रकृति स्वयं को सुरक्षित संरक्षित करने में संक्षम है। मगर कहते है कि प्राकृतिक शक्तियां आज भी मानवीय सोच से अंजान और अदृश्य है तथा विज्ञान हजारों वर्ष की विरासत को समेटे आज भी प्राकृतिक उथल-पुथल और प्रकृति के नियम सिद्धान्तों आचरण, व्यवहार, संस्कृति के प्रमाणिक सूत्र स्थापित करने में अक्षम, असफल रहा है। अगर विज्ञान के पास कोई पूर्व अनुमान या प्रमाणिक तथ्य मौजूद भी है तो वह आज भी प्राकृतिक हलचल का पूर्व अनुमान य...

आत्मरक्षा की मोटी कीमत चुकाता, इन्सान स्वयं की अक्षमता असफलता का शुल्क बसूलती सत्ता, सरकार लायसन्स हथियार रखने की कीमत हुई औकात से बाहर

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। हर दो वर्ष में नवीनीकरण शुल्क से स्टाम डियूटी शुल्क का बढता दायरा इस बात का प्रमाण है कि सत्ता, सरकारें स्वयं की अर्कमणयता, असफलता, अक्षमता का भी शुल्क स्वयं की कत्र्तव्य विमुखता के साथ बसूल कर सकती है। लोकतंत्र में आस्था रखने वालों के लिए एक अजीब सी बात है। हालात यह है कि अपने नागरिकों को पुख्ता सुरक्षा न देने पर उसे आत्मरक्षा हथियार लायसन्स देने वाली सरकारें शायद यह भूल जाता है कि कोई भी नागरिक व्यवस्थागत सुरक्षा के आभाव में स्वयं की सुरक्षा पुख्ता करने हजारों लाखों रूपए खर्च कर हथियार खरीदता है और हर दो वर्ष में नवीनीकरण शुल्क सहित स्टाम्प डियूटी चुकाता है। मगर उनका क्या जो स्वयं की जान को खतरा देख अपना सब कुछ दांव पर लगा हजारों रूपये के हथियार खरीद अपनी सत्ता सरकारों की अर्कमणयता, अक्षमता का दंश झेलते है। मगर जब सत्तायें सरकारें शासन, अपनी इस कत्र्तव्य विमुखता को राजस्व प्राप्ति शुल्क बसूली का माध्यम बना ले फिर चाहे वह राजी-गैर राजी समाज सेवा के नाम शुल्क बसूली का माध्यम बना ले। इससे बडी दर्द की बात किसी नागरिक को नहीं हो सकती और इससे बडी...

नैतिक मूल्यों की मईयत और निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन का जनाजा जबावदेही के मातम में स्वार्थवत संस्कृति और जश्न के अंदाज खतरनाक

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से आज सृष्टि के नियम को भूल स्वयं को सिद्ध करने में लीन कोई भी मानवता का इतना दुर्दान्त वीभत्स सच मानवता में विश्वास रखने वालों के सामने होगा किसी ने सपने में भी न सोचा होगा। मगर यह कटु सत्य है और मामला सृष्टि सिद्धान्त अनुरूप साफ है बैसे भी प्रकृति सन्तुलन का नियम है। अगर ऐसे में सत्ता संतुलन को सिद्ध करने का प्रयास है तो वह कितने सिद्ध होने में कामयाब होंगे यहीं बात आज हर आध्यात्म, विचार, व्यक्ति, विधि विद्ववान को मानवता की खातिर समझने वाली होना चाहिए। काश हमारे बच्चे, युवा, बुजुर्ग इस सार्थक सत्य को समझ पाये, और अपनी संपदा, विधा, विद्ववान को समझ उनका मान-सम्मान कर पाये जो यथार्थ सत्य को समझा उसकी सार्थकता सिद्ध करते हो। आज के समय समस्त सृष्टि और मानवता के लिए सबसे बडी बात होगी जो संभव भी है और स्वतः सिद्ध भी। 

महान सभ्यता, संस्कृति को सरेराह मुंह चिढाती मैकाले की शिक्षा और पश्चिमी संस्कृति स्वराज का आधार सृष्टि में सृजन पूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन हर जीव की नैसर्गिक प्रवृति का निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन सृष्टि का मूल आधार

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। किसी भी जीव की नैसर्गिक सिद्धता ही स्वराज है जिस तरह का द्वन्द आज एक महान जीवन्त संस्कृति और पाश्चात्य संस्कृति के बीच चल रहा है वह एक राष्ट्र भक्त विद्ववान को समझने काफी है। जिसने अपनी अनन्य राष्ट्र भक्ति के चलते व्यवहारिक अनुभव के आधार पर शिक्षा का ऐसा सूत्रपात किया जो उस राष्ट्र के प्रभुत्व को समूचे विश्व से ओझल होने के बावजूद भी उस राष्ट्र की संस्कृति को जीवन्त रख अनौपचारिक रूप से अपने राष्ट्र की मंशा को सिद्ध बनाये रखने में सिद्ध हो रहा है। शायद यहीं उस महान सभ्यता संस्कृति का दुर्भाग्य कहा जा सकता है। जो अनादिकाल से शस्त्र से शास्त्र से अपने अपने नैसर्गिक गुण के कारण जब तब परास्त होती रही।  मगर अब हमें तय करना है कि लाख बाधाओं के बावजूद, हम क्या है हमारे अतीत, वर्तमान, भविष्य क्या है। अगर हम इस महान भूभाग व विरासत के उत्तराधिकारी यह तय कर पाये जो सहज सक्षम है तो यह हमारी सिद्धता होगी और सफलता भी और हमारी आने वाली पीढी की सिद्ध हस्त विरासत हुई।

पशुवत आचार विचार का शिकार होती महान संस्कृति विधान विरूद्ध व्यवहार, महान संविधान को संदेश

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है विधि, विधान संविधान विरूद्ध आचार व्यवहार कभी विधि सम्वत नहीं हो सकता फिर उसका आधार प्राकृतिक, नैसर्गिक हो या फिर संस्कारिक क्योंकि हजारों वर्ष की त्याग-तपस्या बलिदान का प्रमाण इस महान भूभाग पर सत्य की खातिर हजारों लाखो कुर्बानियों के रूप में इतिहास में दर्ज है आज यहीं समझने वाली बात मौजूद मानवता के लिए होना चाहिए। फिर उसकी श्रेणी बच्चे, युवा से लेकर बुजुर्ग की ही क्यों न हो, समझने वाली सबसे अहम बात यह भी है कि अगर सृष्टि, सृजन के हजारों वर्ष बाद पेड-पौधे, पशु-पक्षी अपने कत्र्तव्यों का निष्ठापूर्ण निर्वहन करने में सक्षम है और कर रहे है तो फिर मानवता पर सवाल क्यों ? क्योकिं आज वह अपनों के बीच अपने ही महान भूभाग पर अक्षम असफल साबित हो रहे है। अगर ऐसा ही बेहिसाब वेदिशा कृतज्ञता का कारवां चलता रहा तो कैसी मानवता और समाज का निर्माण होगा उसे वर्तमान में पैर पसारते विधान विरूद्ध आचार व्यवहार से समझा जा सकता है। बेहतर हो कि हम सत्य को समझे जाने और निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन से सत्य को साक्षी मान स्वयं के पुरूषार्थ कृतज्ञता  स्वयं को ...

सेवा के नाम, सत्ता बंटवारा कैसे सिद्ध हो सत्ता की सार्थकता..........?

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। शब्द वहीं दर्द भी और वहीं क्योंकि जनसमस्याओं का जख्म भरने के बजाये और गहरा होता जा रहा है। समाधान की उम्मीद ऐसी कि समृद्ध, खुशहाल जीवन का सपना देखने वाली आशा-आकाक्षाओं की आंखे तक पथरा रही है। मगर सुध लेने वाला कौन है आज यहीं यक्ष सवाल सृजन में निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन करने वाले हर मानव के सामने होना चाहिए। जिसका समाधान ही मानवता की सार्थकता है। मगर लगता नहीं स्व कल्याण, सेवा, विकास में डूबा मानव, समाज स्वार्थवत सत्ताओं के रहते इतनी आसानी से इस सत्य को समझ स्वीकारने वाला हो। जो सुसंस्कृत मानवता सभ्यता के अस्तित्व ही नहीं आधार के लिए आज की सियासत में सबसे बड़ा खतरा है।  दुर्भाग्य पूर्ण सपना उन महान मानव, व्यक्ति, परिवार, समाज के लिए है जिनके पूर्वज बगैर बहुमूल्य जीवन की परवाह किये मानव सभ्यता को सुसंस्कृत कर संस्कार बनाने के लिए कडी त्याग तपस्या कर अनगिनत कुर्बानियां मानव जीवन की सिद्धता की खातिर देते रहे तो कुछ आज भी दे रहे है और महान मानव के रूप में हमारे साक्षी है शायद इस सत्य को हम स्वार्थवत, सत्ताओं, व्यक्ति, परिवार, समाजों के रहत...

मातम, मनाती, मानवता गुलछर्रे उडाते भाई लोग.............तीरंदाज ?

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व्ही.एस.भुल्ले भैया- मुये चुप कर जोडी बन्धन की बैला पर गठबंधन से पहले तने कै बोल रिया शै, कै थारे को मालूम कोणी म्हारे महान लोकतंत्र का इतिहास, वर्तमान, भविष्य थारे को नहीं दिख रिया शै। देश में सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की आंधी चल रही है विश्व पटल पर हमारी ख्याति बढ रही है स्वयं की जान बचाने एक महान राष्ट्र की महान सियासत हर रोज, शर्मिन्दा हो कलंकित हो रही है।   भैये- तो स्वयं स्वार्थ में डूबे इस समर युद्ध में मने कै करूं। काडू बोल्या कि आने वाले भविष्य में सत्ता तो हमारे साथ ही आयेगी, क्योंकि अब संस्कृति संस्था हमारे ही होंगे और सभ्यता को भी लोकतंत्र के नाम हम ही गढने वाले होंगे। जिसकी सार्थकता भी होगी और सिद्धता भी।  भैया- गोलबन्द, प्रायवेट लिमिटेड सियासी संस्कृति का यह सच हो सकता है मगर अन्तिम या सम्पूर्ण सच नहीं।  भैये- तो क्या बैचारे उन बेजुबानों, अंधे, बेहरे जीवों की दुनिया निष्ठा पूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के पश्चात ऐसे ही वेमौत मारी जायेगी।  भैया- बावले ऐसी कुछ नहीं हमारा लोकतंत्र विधि सम्बत है और हमारे पालन-हार कत्र्तव्य निष्ठ, जबावदेह फिर सवाल...

गिरोहबन्द व्यवस्था में दम तोडते, मूल्य और सिद्धान्त अगर मौजूद व्यवस्था का सच यह है तो सवाल अवश्य होना चाहिए

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  आज की व्यवस्था में लोकतंत्र सेवा कल्याण का सच इतना कुरूप, वीभत्स हो तो इस महान भूभाग पर विचार अवश्य होना चाहिए। कहते विचार संवाद मंत्रणा से ही बडी से बडी समस्या का समाधान अनादिकाल से सिद्ध रहा है। मगर जब किसी भी व्यक्ति, परिवार, समाज में स्वार्थवत सिद्धि के लक्ष्य हो तो गिरोहबन्द सियासत का प्रार्दुभाव होना स्वभाविक है जो अब धीरे-धीरे मानव, परिवार, समाज, राज्य, राष्ट्र जीवन, मूल्य, मूल, सिद्धान्तों व निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन करने वालों के बीच घातक साबित हो रही है। आचार विचार चाल चरित्र का वर्तमान स्वरूप यह सिद्ध करने काफी है कि आजादी पश्चात इस महान भूभाग के भोले, भाले भावुक लोगों से कही तो कोई चूक हुई। जिसके दंश मौजूद पीढी ही नहीं, आने वाली पीढी भी कभी इस मौजूद मानवता को माफ करने वाली नहीं। जिसके लिए आज मौजूद पीढी मानव अस्तित्व में मौजूद है। काश इस सच को हम समझ पाये। कहते है सत्य, सहज, सरल है बस जरूरत इसे समझने की है। अगर इस सत्य को मानवता समझ पाई तो यह मानवता की सबसे बडी उपलब्धि होगी। बरना समस्त शेष जीव जगत तो सत्य को साक्षी मान अपन...

ये भी मर जाये तो राशन नहीं मिलेगा सर्वे चल रहा है वर्तमान व्यवस्था का व्यवहारिक सत्य

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। मौजूद व्यवस्था में अगर किसी को यह मुगालता है कि बैवस मजबूर अभाव ग्रस्त लोगों को मातहतांे की दया, दान या पुरूस्कार स्वरूप भले ही सस्ते राशन के रूप में मिल जाये तो असंभव भी है। मगर आज का सबसे बडा सत्य व्यवस्था का यह कुरूप चेहरा उस कत्र्तव्य विमुख व्यवस्था है जिसके निष्ठापूर्ण निर्वहन का बखान व्यवस्थागत लोग करते नहीं थकते।  मामला म.प्र. का है हुआ कुछ यूं कि जनसुनवाई में एक बैवस गरीब महिला के मिलने वाले बन्द हो चुके सस्ते राशन को प्राप्त करने का था सो आवेदन पश्चात दुर्भाग्य बस आवेदिका का पति चल बसा, जब उक्त जानकारी सम्बन्धित अधिकारी को दी गई इस पर उसका सपाट सा जबाव था कि अगर वह भी मर जाये तो भी राशन नहीं मिलेगा। क्योंकि फिलहाल सर्वे चल रहा है। अब इस बेरहम व्यवस्था को कौन समझायें कि सस्ते राशन के इन्तजार में आवेदक तो हक होने के बावजूद मर गया कम से कम शेष मौजूद उसके परिवारजनों के प्रति तो सहानुभूति होना चाहिए न कि तिरस्कार का भाव। 

निष्ठापूर्ण, कत्र्तव्य निर्वहन की सिद्धता सिद्ध करता लोक सेवक प्रचार-प्रसार से इतर प्रमाणिकता की जुगाली करते परिणाम

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वीरेन्द्र भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  बात म.प्र. के जिला शहर शिवपुरी से जुड़ी है कभी अपनी सभ्यता, सुन्दरता, तो कभी जंगली जीव, जन्तु, घने जंगल, झरने, तालाब, तो कभी खूंखार डकैतांे के नाम कुख्याती तो कभी जनकल्याण, सेवा से जुडी योजनाओं को पलीता लगाने के नाम चिरपरिचित जिले में ऐसा भी हो सकता है। जहां कोई लोक सेवक प्रचार प्रसार से दूर अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के परिणाम ही नहीं प्रमाणिकता तौर पर सिद्धता सिद्ध होने पर भी चुप रहे। इससे साफ है कि निष्ठापूर्ण, प्रमाणिक कत्र्तव्य, निर्वहन, अपने कत्र्तव्यों के प्रति आज के माहौल मे निष्ठापूर्ण सिद्ध करे तो वह उसकी सिद्धता ही कही जायेगी।   ऐसा ही कुछ आज कल म.प्र. के शिवपुरी जिले में चल रहा है। मगर अच्छे कार्यो की चर्चा न होना इस शहर का दुर्भाग्य हमेशा से रहा है। मगर यह कटू सत्य है कि जिस तरह से शिक्षा स्वास्थ रोजगार के क्षेत्र में यह शहर एक लोक सेवक रहते, समृद्ध होने आतुर है यह सत्य बहस का विषय हो सकता है। मगर इस कटृ सत्य पर विचार अवश्य होना चाहिए अगर ईमानदारी निष्ठा का प्रमाण आज की व्यवस्था में किसी को देखना है तो उसे शिव...

षड़यंत्र, स्वार्थवत सियासत का कडवा सच, चैराहे पर

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। विगत एक माह से जिस तरह से सत्ता को लेकर जिस तरह के घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजधानी मुम्बई में घट रहे है जिस तरह से सत्ता सियासी जोड-तोड, वेमेल गठजोड सियासी मंचों पर दिख रहे है उन पर विचार उपरान्त इतना तो कहा समझा जा सकता है कि अब मौजूदा लोकतंत्र में आमजन की आशा-आकांक्षाओं, सेवा कल्याण के नाम पर जिस तरह से सियासी परम्परायें तार-तार हो रही है और परदे के पीछे की षडयंत्रकारी स्वार्थवत सियासत पवित्र सेवा कल्याणकारी सोच के रूप में सामने आ रही है वह भारतीय राजनीति की पवित्र सोच राष्ट्रीय मानव जीव, जगत कल्याण उन्मुखी सोच, विचार, आचार, व्यवहार का चीरहरण करने जैसी दिखाई पडती है। आज जिस तरह से पवित्र सियासत सात्विक सोच के नाम आमजन मानस को भ्रमित कर षडयंणपूर्ण सियासत और स्वयं स्वार्थो को सिद्ध किया जा रहा है। निःसंदेह ऐसी आदृश्य छलपूर्ण सियासत को किसी भी सभ्य समाज व्यवस्था में सत्य के लिए सिद्ध नहीं कहा जा सकता। मगर वर्षो से परदे के पीछे चलने वाली षडयंणकारी स्वार्थवत सियासत का आज के लोकतंत्र में शायद यह सबसे कडवा कटू सच है तो इसमें किसी को अतिसंयोक्ति न...

अन्तर द्वन्द से जूझती कमलनाथ सरकार एक मंत्री मेट्रो, तो दूसरा मंत्री स्वच्छता को लेकर गांधीगिरी में जुटा

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। फिलहाल अगले माह म.प्र. की कमलनाथ सरकार के कार्यकाल का 1 वर्ष पूरा करने को है। इस बीच कमलनाथ सरकार के मंत्रियों के बीच अपने-अपने कत्र्तव्य, उत्तरदायित्वों को लेकर जुनूनी जंग छिडी है वह किसी से छिपी नहीं। हाल ही की बात है कि म.प्र. शासन के खाद्य व शिवपुरी जिले के प्रभारी मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर नाले की गन्दगी देख फावड़ा ले स्वयं नाले में उतर गये तो वहीं उनके मातहत अधिकारी उन्हें नाला साफ करते देखते रहे। इसके उलट सुबह ही प्रदेश भर में साफ-सफाई का जिम्वा संम्हाले नगरीय प्रशासन विभाग के मंत्री की खबर आई कि वह इन्दौर, देवास में मेट्रो चला रियल स्टेट की नीतियों का बूस्टर डोज देना चाहते है। फिलहाल तो म.प्र. के ग्वालियर-चम्बल में खाद्य मंत्री के स्वच्छता अभियान की खबर जहां सरगर्म है, तो वहीं न्याय से पीडित, वंचित, अभावग्रस्त लोगों का एक वर्ग ऐसा भी है जो कमलनाथ सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों की हनक के चलते शासन के दर पर अग्नि स्नान करने पर तुला है।  हाल ही की तीन घटनायें प्रशासनिक कार्यालयों के दर पर हताश-निराश होने पर अग्नि स्नान के सामने है...

सच को मुंह चिढा, संस्कृति, संस्कार सरोकारों का शमशान बनता समृद्ध, सुन्दर शहर

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अगर यो कहे कि बीयाभान घने जंगलों के बीच मौजूद पठारी क्षेत्र के ग्राम सीपरी में सिंधिया स्टेट की ग्रीष्म कालीन राजधानी शिवपुरी के रूप में बसा छोटा-सा सर्वसुविधा युक्त सुन्दर शहर जिसे तत्कालीन राजवंश के शासकों द्वारा मात्र 5000 हजार की आबादी के हिसाब से शुद्ध पर्यावरण हाईटेक तकनीक से लैस 100 वर्ष पूर्व बताया गया था जो प्राकृतिक रूप से वातानुकूलित होने के साथ सुन्दर सडक, सीवर, स्ट्रीट लाईट, खेल मैदान, औषधीय एवं फलदार वृक्षों के साथ विभिन्न सुविधाओं संस्कारों से सुविधा एवं उच्च सामाजिक सरोकारों, संस्कारों से लैस था। मगर आजादी के पश्चात जिस तरह से स्वार्थवत लोगों के रहते आज यह सुन्दर सुसंस्कृत, सुविधायुक्त शहर दुर्गति का शिकार है इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। इससे बड़ा दुर्भाग्य इस सुन्दर शहर का और कोई दूसरा हो नहीं सकता कि जिस शहर को पूरे आत्म भाव के साथ बसा उसे सुन्दर सुविधा, सेवा, कल्याण के साथ बसाया गया। जिस शासक ने अपने मातृ प्रेम पुत्र धर्म और उच्च संस्कारों की छाप छोडने की खातिर अन्तिम निवास इस शहर को बनाया। जिस शासक ने हमेशा प्रजा को...

मजबूरी पर मंदी का आंकलन

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। मंदी की बजह, अंकों का प्रदर्शन या सियासी गणित जो भी हो मगर बाजार से पैसा, रोजगार, काम अवश्य बाहर हो रहा है। प्राकृतिक आपदा पर उत्पादकों का मुआवजा जनधन, रिण धन का केन्द्रीयकृत नीतियों के तहत बड़े स्तर पर बंटवारा साथ ही सतत सत्ता में बने रहने का सियासी जुनून के अलावा आर्थिक मंदी अनेकों अनेक के उदाहरण हो सकते है।  मगर यथार्थ यह है कि बड़े-बड़े सपने पाले, भोले-भाले भावुक नागरिक युवा परेशान है। अगर वाक्य में ही विगत 1 दशक से देश की अर्थ व्यवस्था का लगभग 70 फीसदी भाग प्राकृतिक आपदा मुआवजे का मोहताज है तथा 20 फीसद नगद अर्थ व्यवस्था को ताकत देने वाले सत्ता से जुड़े प्रतिष्ठान कंगाल व 10 फीसद बैंकों से पोषित प्रायवेट संस्थान मंदी के शिकार है वह भी सत्ताओं के कई आर्थिक बुस्टरों के पश्चात तो आखिर सच क्या है इस महान अर्थव्यवस्था का ? यह बात आज हर नागरिक युवा को समझने वाली होना चाहिए। जब सत्ता पदों से सुशोभित लोगा फिल्मी दुनिया की कमाईयां समाज, सृष्टि से जुडे शादी समारोहों से आर्थिक मन्दी न होने के उदाहरण प्रस्तुत करते है तो सत्ता से सवाल अवश्य होना चाह...

गिरोहबन्द, सियासी संस्कृति गांधी दर्शन में बाधा सत्य की सहज, स्वीकार्यता ही समाधान

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। बापू की 150वीं वर्षगांठ पर सत्ताओं, समाजसेवी संस्थाओं द्वारा गांधी जी की याद, आज की मौजूद सियासी संस्कृति का स्वीकार्य सत्य भले ही हो, मगर गांधी दर्शन में आज की गिरोहबन्द सियासी संस्कृति सबसे बड़ी बाधा है। इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि आज सत्ताओं, सियासत के बीच विद्या, विद्ववान, गांधीवादियों का सहज अवसर के अभाव में दमन हो रहा है। यह समृद्ध, सुसंस्कृत विरासत के लिये शुभसंकेत नहीं। विगत 30 वर्षो में जिस तरह से सियासी हल्कों में काॅपोरेट, गैंगबन्द संस्कृति का प्रार्दुभाव हुआ है वह बडा ही दुर्भाग्य पूर्ण है। अगर वाक्य में ही गांधी की प्रसांगिकता भारत में शेष है तो निश्चित ही हमें गांधी जी के उस वाक्य का अनुशरण अवश्य करना चाहिए। जिसके लिए उन्होंने कहा था कि उत्तम साध्य के लिए उचित साधनों का होना आवश्यक है और ग्राम स्वराज के सपनों को साकार करने सत्ता की पहुंच उन गरीबों तक होना चाहिए जिनके लिए सत्तायें होती है। मगर भारतीय राजनीति का सच यह है कि जिस तरह से सतत सत्ता में बने रहने सेवकों के झुण्ड गिरोहबंद हो चुक है और अब सत्ता का मार्ग लगभग यही...

सियासी अखाडा बना, जिला स्तरीय शिविर आवेदनों के अम्बार और प्रोटोकाॅल उल्घन पर मंत्री की मौजूदगी में मंच पर विधायक का सवाल

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. के जिला शिवपुरी जनपद पंचायत बदरवास की ग्राम पंचायत खतौरा में आयोजित जिला स्तरीय शिविर जिले के ही प्रभारी मंत्री आला अफसर आमजन की मौजूदगी मे सियासी अखाड़ा बन जायेगा। शायद ही किसी ने सपने में सोचा हो। मगर 15 नवम्बर 2019 को ग्राम खतौरा में आयोजित जिला स्तरीय शिविर का कडवा सच है। जहां मंच पर जिला कलेक्टर के आते ही आवेदनों का अम्बार पट पढा तो वहीं दूसरी ओर उदबोधन पश्चात आवेदकों ने जाते समय मंत्री का रास्ता रोक लिया जैसे तैसे मंत्री आश्वासन, निर्देश के बाद आगे बढ सके। इससे पूर्व सम्बोधित कर गरीबों को न लुटने देने तो गरीबों को बाजिब हक मिले यह व्यवस्था सुनिश्चित करने अफसरों को ताकित तथा शासन द्वारा एप व्यवस्था का लाभ ले, स्वच्छता अभियान की अहमियत आने वाली पीढ़ी के लिए बताते दिखे। तो वहीं 20 वर्ष पश्चात विष्णु पुत्र फूल सिंह काछी की बनी। राजस्व किताब के सहारे शिविरों की अहमियत बताते रहे। मंत्री उदबोधन पश्चात अचानक मंच का माइक थाम क्षेत्रीय विधायक कोलारस, छमा के साथ मंच के प्रोटोकाॅल उल्घंन पर उखड पढे और बोले मेरा मंत्री जी से आग्रह है कि मैने ...

प्रमाणिक पहचान से मुंह मोडता पुरूषार्थ जनधन, सत्ता, सियासत, आशा-आकांक्षाओं की लूट पर मौन शर्मनाक स्वार्थवत, गिरोहबंद संस्कृति की जकड में सत्ता सौपान

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  समृद्ध, सशक्त, मजबूत लोकतंत्र की आड में मौजूद गांव, गली को अपनी सम्प्रभु सरकारों सत्ता का एहसास कराने वाली पंचायत नगरीय संस्थाओं में जब से चुनावी सुगबुगाहट शुरू हुई है तब से म.प्र. में पैर पसार चुकी स्वार्थवत गिरोहबंद सियासी संस्कृति का एक मर्तवा फिर से जनधन, आशा-आकांक्षाओं, सेवा, कल्याण, विकास के नाम लूट की तैयारियां शुरू हो चुकी है। जो किसी भी सभ्य समझदार, जागरूक, युवा, नागरिक, व्यक्ति, परिवार, समाज को शर्मसार करने काफी है।   सत्ता सुख भोग जनधन, जनाकांक्षाओं, आशाओं की लूट करने वाले तथाकथित लोग यह बखूवी जानते है कि किस तरह से भावुक, भोले-भाले, अभावग्रस्त लोगों से वोट हासिल कर जीत-हार का गणित स्वयं के पक्ष में बैठाया जा सकता है। शायद यहीं कमी हमें 5 वर्ष तक रूलाने, कलफाने काफी होती रही है। आजकल जिस तरह से स्वागत, सम्मान, भण्डारे, अन्नकूट, मिलन-समारोह, तोहफे, आओभगत, चरण स्पर्श तो कभी अंजाने शख्स का अभिवादन अचानक उमडता आत्म प्रेम शायद आज की सियासत के यह छल करने के वह उदाहरण है जो हमारे सपने आशा-आकांक्षाओं और आत्म-सम्मान, स्वाभिमान को...

सियासी सत्ता लूट पर मजमों का दौर शुरू

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जब से नगर, शहर, गांव, महानगर सरकारों के मुखिया तथा नगरीय चुनावों में जनप्रतिनिधियों के चुनावों की नई खबर आई है। भले ही खबर के साथ मौजूद नगरीय पंचायत सरकारों के कार्यकाल खत्म होने का सवाल यक्ष हो। ऐसे में जनाकांक्षाओं की लूट के लिए एक मर्तवा फिर से सेवा, विकास, कल्याण के नाम नये-नये तरीके से सियासत मजमा बना सजाई जा रही है। कहीं पर वेमौसम भण्डारें, तो कहीं मिलन, सम्मान, समारोह, तो कहीं-कहीं अन्नकूट का दौर चल पडा है। अगर बगैर दल के प्रत्याशियों को चुने जाने की खबर सही है तो म.प्र. में निराधार दल और खासकर सत्ताधारी दल को यह खबर शुकून भरी हो सकती है। तो वहीं 15 वर्ष तक सत्ता सुख भोग चुके दल को दर्द देने वाली हो सकती है।  बहरहाल जनसेवा के नाम स्वयं के सेवा कल्याण में चुनाव में जीत के पश्चात डूबने वालो की वांछे खिली हुई है। क्योंकि जैसी कि फिलहाल अपुष्ट खबरे है कि अध्यक्ष का चुनाव अब सीधे जनता के वोट से न होकर जीते हुये पार्षदों के वोट से होना है ऐसे में स्वभाविक है कि आने वाले समय में जीते हुये जनप्रतिनिधियों की पूछ परख बढना सियासी गलियारों ...

बगैर तकनीक विशेषज्ञ के अरबों के निर्माण जनधन बर्बादी का अलग विधान वन विभाग को विभीषक, वरदान

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। वन पर्यावरण का संरक्षण सम्बर्धन उतना ही अहम है जितना आम जन का जीवन मगर वन पर्यावरण संरक्षण सम्बर्धन की आड में विभीषक आचार व्यवहार का प्रदर्शन हो जनधन स्थापित नैतिक विधि विरूद्ध बर्बाद हो ऐसे में इस अहम मसले पर चर्चा आवश्यक है कौन नहीं जानता कि वन विभाग निर्माण के नाम बगैर किसी तकनीक विशेषज्ञ के अरबों खर्च कर चुका है। वृक्षारोपण के नाम पर्यावरण को समृद्ध कर जंगली जानवर, पशु-पक्षियों के भोजन युक्त वृक्षों पेडों से तौबा करता यह विभाग के सामने गया। सबसे बडा सवाल तो यह है कि हमारा पशुधन या पशुओं का चारा आज सबसे बडे संकट में घिर गया है। दर-दर भटकता पशुधन, पल पल बेमौत मरता पशुधन इस बात का प्रमाण है कि वन पर्यावरण संरक्षण के नाम कुछ तो गलत हो रहा है जो विधि सम्वत तो हो सकता है। मगर नैतिक रूप से न्याय संगत नहीं। 

सुविधा अधूरी, बसूली पूरी सडक परिवहन राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधीकरण की पठानी बसूली, परेशान लोक, जन

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सुन्दर, सुविधा सडकों के नाम टाॅल पर मारपीट पठानी बसूली के चर्चे भले ही आम हो, कई मर्तवा तो माननीय न्यायालयों के चैखट तक इस तरह के मामले जा पहुंचे है। मगर सडक परिवहन मंत्रालय का राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधीकरण है। जो न तो सुधरने तैयार है न आम-जन की दुविधा समझने तैयार। परिणाम कि उसके अहंकार पूर्ण, गैर जिम्मेदार रवैया के चलते सडक सुविधा के नाम होने वाली पठानी बसूली से लोग हैरान परेशान है तो कई लोग घायल हो सडक दुर्घटनाओं में मरने मजबूर। हालिया उदाहरण पूर्व निर्मित एनएच 76 कोटा-झांसी तथा एनएच 3 आगरा-मुम्बई राष्ट्रीय राजमार्ग का है। जिस पर टोल बसूली तो जारी है मगर निर्माण आज भी अधूरा पडा है। जिसमें सबसे बुरा हाल तो शिवपुरी जिला मुख्यालय वायपास का है जिसकी लम्बाई लगभग 17 कि.मी. है जिसका अधूरा निर्माण कर निर्माण एजेन्सी छोडकर जा चुकी है और समूचे वाहन क्षतिग्रस्त पुल व हिचकोले वाले बडे-बडे गड्डा युक्त मार्ग से गुजरने मजबूर है जिस पर कभी भी कोई गम्भीर दुर्घटना घटित हो तो किसी को अंतिसंयोक्ति की नही होना चाहिए। सुन्दर सुविधा युक्त सडक सुविधा युक्त सड...

नए संघर्ष को जन्म देती कांग्रेस, राहुल का हस्तक्षेप अहम कई वर्षों की तपस्या, वैभव, अनगिनत कुर्बानियों का परिणाम है कांग्रेस

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वीरेंद्र शर्मा। विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  राजनीति के धुरंधर और कांग्रेस आलाकमान के दरबारियों के षड्यंत्र का शिकार एक युवा तुर्क अंदर और बाहर षड्यंत्रकारी सियासत का शिकार हो भले ही कांग्रेस संगठन के मुख्य धारा से अलग हो सकता है। मगर यह संपूर्ण सत्य नहीं क्योंकि उसे जो कांग्रेस मिली, जो ना तो कांग्रेस के मूल आधार है न ही पंडित नेहरू के समाजवाद, इंदिरा के कृतज्ञ समृद्धबाद और राजीव के विकास बाद सत्ता विकेंद्रीकरण पर चलने तैयार थी बल्कि स्वार्थ व चापलूसी में डूबे एक ऐसा संगठन जिसे एक नेक दिल इंसान राष्ट्र-जन को समर्पित चाहता था। बगैर किसी अपराध के कर्तव्य निर्वहन से दूर वह नौजवान भले ही इस संगठन से दूर अब एक सिर्फ कार्यकर्ता और सिर्फ सांसद हो मगर नैतिक जवाबदेही का तकाजा है कि वह अपने ही संगठन में हस्तक्षेप कर कम से कम मध्यप्रदेश में तो काॅग्रेस को दफन होने से बचाए। जहां कमलनाथ जैसा एक प्रभावी मुख्यमंत्री चाणक्य नीतियों में पारंगत दिग्विजय सिंह जैसा नेता और 1.5 घंटे सोने वाला युवा तुर्क ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेता हो। अगर आज भी जमीर नहीं जागा तो भले ही मध्यप्रदेश में लोक जन के वि...

मंडी टैक्स को पलीता, सुविधा के नाम पर सिफर व्यवस्था

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विलेज टाइम समाचार सेवा    घपले घोटाले के टैक्स चोरी का गढ़ बन चुकी शिवपुरी मंडी में इन दिनों सत्ता की दमक के चलते किसान फिलहाल खून के आंसू रोने पर मजबूर है तो दूसरी ओर जगह-जगह अघोषित तौर पर फल फूल रहीं मंडी चर्चा का विषय है। मंडी प्रांगण के बाहर खुलेयाम खरीदफरोद इस बात का प्रमाण है कि मंडी प्रशासन का खरीद करने वालों को खुला संरक्षण प्राप्त हो जिसस मंडी समिति को लाखों रूपये का चूना लगता दिखाई पडता है। अपुष्ट सूत्रों से मिली खबर के अनुसार मंडी कर्मचारियों के वेतन तथा मिलने वाले अन्य वित्तीय लाभ को प्राप्त करने उन्हें परेशान कर अवैध धन राशि की मांग की जाती है। अगर यो कहें कि सत्ता के संरक्षण में लोक जन धन की अधिकारियों की नाक के नीचे लूट मची है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्योंकि जिस तरह से एबी रोड, पोहरी टोंगरा रोड सहित इंडस्ट्रियल एरियों में मंडी सजी है वह किसी से छिपी नहीं।

आज भी अध्यात्म न समझे तो मिट जायेंगे

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। हजारों वर्ष की त्याग-तपस्या पर मातम मनाती मानवता आज जिस मुकाम पर है वह बडा ही दर्दनाक है। जिस मानव पर कभी गर्व होता था और जिस पर समूची संस्कृति गर्व करती थी वह पेड-पौधे, पशु, पक्षी, जानवरों की कृतज्ञता देख इस सृष्टि में उस मानवता को आज शर्मसार होना चाहिए। हो सकता है यह कलयुग का अन्तिम सत्य हो, क्योंकि कालचक्र की गति स्वतः ही निर्धारित होती है और स्वप्रेरित भी।  हो सकता है मौजूद मानव, समाज इस सत्य से सहमत न हो, काश स्वयं स्वार्थ और अहंकार को छोड शायद ही इस सृष्टि का एक भी ऐसा उत्तराधिकारी नहीं जो अपनी कृतज्ञता सिद्ध कर सके। कहते है सृष्टि तो उसकी गोद में मौजूद हर जीव को अपनी संतान मानती है और उसी गर्व गौरव के साथ उसका लालन पालन करती है। मगर, अगर उसकी सर्वोत्तम कृति मानव है जो स्वयं के विनाश की पटकथा लिखने तैयार है तो यह उसका नैसर्गिक गुण और अध्यात्म के अभाव में उसके अधिकार कत्र्तव्य निर्वहन से विमुखता, अहंकार, स्वार्थ है। जो सिर्फ मानव जगत ही नहीं समूचे जीव, जगत के लिए घातक है। फिर पृथ्वी पर मौजूद वह जो भूभाग राज्य, राष्ट्र, नगर, गांव, गल...

किसी भी व्यक्ति, परिवार, समाज, राज्य, राष्ट्र का नैतिक पतन, उसके विनाश की संभावना मूल अस्तित्व, आधार से बगावत, कुव्यवस्था के संकेत पहचान का प्रमाण ही सृष्टि में जीवन की सार्थकता

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।     आज बात अहम अहंकार की नहीं बात है प्रमाण, प्रमाणिकता के साथ पहचान की है। बात उस चरित्र और नैतिक सम्मान की है जिस पर हर सभ्यता, संस्कृति, संस्कार, व्यक्ति, परिवार, समाज, राज्य, राष्ट्र गर्व कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता है। मगर दुर्भाग्य कि जिस तरह से हम करोड़ो वर्ष की त्याग तपस्या को तिलांजलि दे, स्वयं स्वार्थ में डूब स्वयं के जीवन के प्रति कृतज्ञ हो स्वयं को संकल्पित साबित करना चाहते हैं। इससे बड़ी मूखर्तापूर्ण बात जीवन की सार्थकता के मुगालते पालने वालों के लिए और कोई हो नहीं सकती। आज मानवीय जीवन के सामने यही सबसे बड़ा यक्ष सवाल है। हो सकता है कि भले ही इसका हालिया जवाब ना हो मगर विगत 30 वर्षों में जिस तरह के जनमानस का निर्माण विश्व के सबसे समरथ खुुशहाल भाग पर हो चुका है वह दर्दनाक भी है और शर्मनाक भी। मगर हमें मंगूल राजवंश के उस सम्राट को नहीं भूलना चाहिए जो अपने कर्तव्य निर्वहन के साथ स्वयं एवं अपने राष्ट्र की पहचान के लिए अकूत दौलत, शोहरत, सत्ता होने के बावजूद अपने दादा, पिता के साथ युद्ध लड़ अपनी सार्थकता सिद्धता साबित ...

कब मुक्त होंगे सिंधिया, सियासी सेंधमारों से

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विलेज टाइम समाचार सेवा यूं तों भारतीय राजनीति में चुनावी हार-जीत के एक से बढकर एक उदाहरण, मूल्य, सिद्धान्त, जीवन, मूल्यों की राजनीति करने वाले नेताओं के रहे है। जिसमें बाबा साहब से लेकर स्व. इन्दिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, अर्जुन सिंह तथा वर्तमान में राहुल गांधी, कमलनाथ, दिग्विजय सिंह इत्यादि नाम भी इस लोकतांत्रिक सियासत में सुमार रहे है। अगर ऐसे में सियासी सेंधमारी के चलते सिंधिया को भी राष्ट्रवाद, मोदी लहर या अन्य कारणो ंसे हार से दो-चार होना पडा है तो यह आज की राजनीति की न तो पहली शुरूआत है और न ही आखिरी। मगर इसके उलट अगर हम देखे तो अपने गुना संसदीय क्षेत्र में ही नहीं, समूचे ग्वालियर-चम्बल संभाग में एक से बढकर एक लीक से हटकर अप्रत्याशित हजारों करोड की योजनाओं को ला, उनको मूर्तरूप देने वाले सिंधिया अपने सार्वजनिक जीवन में भी कभी सामाजिक सरोकार से दूर नहीं रहे और समय वेसमय सुख दुख की घडी में क्षेत्र के लोगों के बीच आते-जाते बने रहे, जो कि उनके सार्वजनिक जीवन की जबावदेही के कत्र्तव्य निर्वहन की आदत में सुमार है। मगर उनके सियासी कुनवे या कुनवे के बाहर बढती सेंधमारों की फौज या सिय...