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Showing posts from December, 2019

स्थानीय सरकारों के महाकुंभ में, सत्ता की डुबकी लगाने गिरोहबंद अखाडों का आगमन शुरू सेवा के नाम लामबंद होती स्वार्थवत सियासत और स्वार्थवत लोग

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। स्थानीय सरकारों के होने वाले चुनावी महाकुंभ में गिरोहबंद सियासी अखाडों द्वारा फेके जा रहे आंकडो पर संज्ञान लिया जाये तो सेवा के नाम सत्ता लूट के लिए लामबंद सियासी स्वार्थवत लोग जीत हासिल करने लाखों करोडों फूकने की बात करते नहीं थक रहे है। ये अलग बात है कि म.प्र. के मुखिया म.प्र. के माफिया की नाक में नकेल कसने पर आमादा हो। मगर जिस तरह से लोकतंत्र के नाम सेवाभावी संस्थाओं में स्वच्छ, स्वस्थ प्रशासन देने के नाम माफिया राज की तैयारियां शुरू हो चुकी है वह डरावने वाली है।  हालांकि जिस तरह से म.प्र. सरकार ने सेवाभावी संस्थाओं को उनका सम्मान लौटाने स्थानीय सरकारों के चुनाव को दलीय आधार से इतर कराने का निर्णय लिया हो और किसी भी प्रकार से ऐसे लोग, चुनी जाने वाली नई स्थानीय सरकारों के भाग न हो उसके लिए भले ही पुख्ता इंतजाम करने का मंसूबा हो। मगर जिस प्रकार से म.प्र. में आरक्षण प्रक्रिया पश्चात स्थानीय चुनावों को लेकर सक्रियता सियासी लोगों के बीच कम बल्कि ऐसे लोगों के बीच ज्यादा देखी जा रही है जो किसी भी कीमत पर चुनाव जीतकर स्थानीय सरकार के मुखिया य...

गुना सिटी कोतवाली बनी आईएसओ

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। यूं तो म.प्र. में कई थानों को आईएसओ ग्रेट में लाकर बेहतर पुलिस सेवा के लिए तैयार किया जा रहा है। इसी तारम्य में गत दिनों सिटी कोतवाली गुना को आईएसओ आवार्ड दिया गया जिसे नगर निरीक्षक अवनीश शर्मा द्वारा प्राप्त किया गया। आईएसओ ग्रेट के तहत थाने की विभिन्न शाखाओं को अपडेट किया गया है तो वहीं समूचे थाने का अपग्रेडेशन कर उसे सुसज्जित किया गया। देखना होगा कि गुना जिले के और कितने थाने जल्द ही इस श्रेणी में आते है। हालांकि गुना पुलिस अधीक्षक राहुल कुमार लोड़ा का मानना है कि इससे बेहतर पुलिस सेवा के साथ लोगों को अच्छी सेवायें पुलिस के माध्यम से प्राप्त हो सकंेगी।

कलेक्टर ने गाउण्ड निरीक्षण किया 8 से 22 तक शिवपुरी में होगी सैन्य भर्ती

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। शिवपुरी कलेक्टर अनुग्रह पी ने सैन्य अधिकारियों एवं पीडब्लूडी सहित अन्य अधिकारियों के साथ भर्ती स्थल फिजीकल ग्राउण्ड का निरीक्षण किया तथा मौजूद अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। ज्ञात हो कि उक्त तैयारियां शिवपुरी में होने जा रही नये रंग रूट भर्ती के संबंध में पूर्व से ही व्यवस्थायें चाक-चैबंद की गई है। इस मौके पर कलेक्टर के अलावा अपर कलेक्टर आर.एस. बालौदिया, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेंद्र सिंह कंवर एवं पीडब्लूडी कार्यपालन यंत्री व्ही.एस. गुर्जर एसडीओ हरिओम अग्रवाल, खेल अधिकारी सहित वरिष्ठ सैन्य अधिकारी एवं एसडीएम अतेन्द्र सिंह गुर्जर सहित पुलिस के अधिकारी भी मौजूद थे। 

हनक का सवाल ही नहीं, शासन की मंशा अनुरूप सेवायें सुलभ हो यह लक्ष्य: अनुग्रह पी

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र.। शिक्षा के स्तर में म.प्र. के शिवपुरी जिले में आज हालिया सुधार में 4 महीने का वक्त लगा जिसमें प्रशिक्षण से लेकर सतत बैठकों में समझाइस और टीम बनाकर जिलेभर के विद्यालयों का सतत भ्रमण रहा है। रहा सवाल सियासी हनक का तो शासन पर किसी भी प्रकार की हनक का सवाल ही नहीं उठता। हमारी कोशिश है कि शासन की मंशा अनुरूप जनकल्याणकारी सेवाभावी योजनाओं का क्रियान्वयन हो और लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ सहज रूप से मिल सके। जहां तक मुख्यमंत्री जी द्वारा माफियाओं के खिलाफ शासन को फ्री हेण्ड देने का सवाल तो हमने संबंधित विभागों के साथ बैठक की है जिसमें राजस्व, वन, नगरीय निकाय पंचायतों को ऐसे लोगों की लिस्ट तैयार कर कार्यवाही करने के निर्देश दिये है। जो संगठनात्मक तौर पर कानून की अवेहलना कर सार्वजनिक सम्पत्ति का दुरूपयोग कर मालिकाना हक स्थापित करते है। ऐसे लोगांे के खिलाफ शासन की मंशा अनुरूप कडी कार्यवाही विधि सम्वत करने की तैयारी की गई है। जिले में लोगों को ग्रामीण क्षेत्र में मनरेगा के तहत पर्याप्त रोजगार उपलब्ध हो सके उसके लिए नये प्रोजक्ट बनाये जा रहे है। जल्द ही शिवपुर...

सत्ता की हनक और सुख भोगते स्वार्थवत लोग छल से छल्ली हुई आशा-आकांक्षायें

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। बैवस मजबूर आभावग्रस्त लोकतंत्र में स्वार्थवत लोगों की सत्ता लूट को सभ्य समाज भले ही भ्रष्टाचार करार दें और इस नाम का विलाप कर दुखती रग और कलेजे को ठण्डा कर लिया जाये। मगर लोकतंत्र में सेवा कल्याण विकास के नाम छल से छल्ली हुई आशा-आकांक्षायें आज भी चींख-चींख अपनी बैवसी का बखान करती नहीं थकती। जिस तरह से आज से 26 वर्ष पूर्व म.प्र. की पटवा सरकार 16 वर्ष पूर्व दिग्विजय सरकार और 1 वर्ष पूर्व शिवराज सरकार को गांव, गली के गरीबों ने वोट की ताकत से तख्ता पलट कर धूल चटाई वह समूचे म.प्र. में किसी से छिपा नहीं। फिर इन सरकारों के दल काॅग्रेस, भाजपा रहे हो या फिर सियासी दांव पैंच से यह सरकारें सत्ता में आने के बाद स्वयं सिद्ध रही हो। मगर आम गांव, गली, गरीब, बेरोजगारों की कौम को कुछ हासिल नहीं हो सका और ना ही म.प्र. के युवाओं को सम्मानित रोजगार मिल सका, ना ही वह उन संसाधनों के हक पाने लायक रहे जिनकी लूट सत्ता के संरक्षण में स्वार्थवत लोगों द्वारा बड़ी ही बेरहमी से विगत 26 वर्षो में की गई और आज भी विधि की आड़ में और सत्ता की हनक के आगे जारी है।  यह स...

नीर, क्षीर,मक्खन, घी, दूध 56 भोग से समृद्ध भूभाग पर मौत का कारोवार

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। धन्यवाद का पात्र है कमलनाथ का निजाम, जो आज माफिया राज पर कहर वनकर टूट रहा हैं। फिर वह दूध, सत्ता, भू,रसद, शिक्षा, स्वास्थ, रोजगार माफिया हो, या फिर घोषित-अघोषित, सिपह-सालारों का कारवां हो। मगर जिस तरह सें सत्ता सियासत के गलियारो मे सत्ता का खौफ, बेखौफ ढंग से बोल रहा हैं। यही आज सबसे बड़ी समझने वाली बात हैं। कोई स्वयं का सियासी कद, तो कोई स्वयं कि समृद्धि, तो कोई सर्व कल्याण को लेकर म.प्र मे संघर्षरत हैं। मगर स्वराज फिलहाल शैया पर हैं। जिसके लिए महात्मा गाॅधी ने ग्राम स्वराज तो पण्डित जी ने अन्तोदय की कल्पना कि तो, स्व. राजीव गाॅधी ने नगरीय-निकाय पंचायती राज की स्थापना कि मगर परिणाम स्वार्थवत लोगो के सत्ता मे रहते सार्थक नही हो पाये। जो सत्ता उन्मुख सियासत के लिये शर्मनाक ही नही, दर्दनाक होना चाहिए। मगर म.प्र के मुख्यमंत्री ने माफिया राज के खिलाफ जो पुरूषार्थ दिखाया हैं। वह काबिले गौर है। देखना होगा कि स्वार्थवत सियासत, समर्थन के बीच वह अपने स्वभाव अनुरूप स्वयं के जीवन के सिद्धात कैसे सिद्ध कर पाते हैं। आज म.प्र मे यही सबसे बड़ा यक्ष सवाल है और सेवा कल्याण उन्म...

वैधानिक विश्वास पर अराजक अविश्वास, जघन्य लोकतंत्रिक अपराध सटीक सियासत के अभाव में दुर्बल साबित होता जवाब विधान अंगीकार करने वालो का, विधि सम्मत संस्थाओं, प्रधानमंत्री पर विश्वास उनका मूल कत्र्तव्य

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व्ही.एस भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सटीक सियासी जवाब के आभव सनसनी, युक्त सियासत न तो व्यक्ति परिवार, समाज, राष्ट्र के हित मे हैं न ही, किसी भी सियासत के हित मे हैं। जबकि, देखा जाये तो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था मे, विधान को अंगीकार करने वालो का सच्चा कर्म धर्म, विधि सम्मत संस्थाओ के साथ प्रधानमंत्री पर विश्वास होता हैं। मगर जब वैधानिक विश्वास पर अराजक अविश्वास किया जाये तो उसे जघन्य लोकतांत्रिक अपराध ही कहा जायेगा। आज जब नया हिन्दूस्तान, संुस्कत राष्ट्र का निर्माण हो रहा हैं। ऐसे मे प्रमाणिक तथ्य विहीन सवाल अपने-आप मे शर्मनाक सवाल होना चाहिए। मगर ऐसे मे इस महान भारत वर्ष के शासक, संस्थाओ का कत्र्तव्य है कि वह निष्ठापूर्ण कर्तव्य निर्वहन के लिये अपने ेधर्म, राजधर्म का पालन करे। यही उनकी अपनी महान विरासत, संस्कृति कि सिद्धता होगी। जिसका सतयुग, त्रेता द्वापर से लेकर कलयुग तक त्याग, तपस्या अनगिनत, अप्रत्याशित कुर्बानिया का, अपना समृद्ध सुसंस्कृत सुनहरा इतिहास रहा हैं। आज बक्त है 56 भोग का आहार लेने वाले इस महान भूभाग के महान नागरिको के पास जहाॅ, फल-फूल खादन्नय से लेकर, जीवन मे अ...

विधि-विधेयता के पालनहारों के संरक्षण मे माल काटता भूमाफिया शासकीय भूमि की लूटपाट पर, सार्वजनिक, सत्तात्मक चुपी, विधि-विधान पर कलंक

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। माफिया के खिलाफ आर पार के मूड मे म.प्र के मुख्यमंत्री भले ही, अपनी सरकार के सार्वजनिक वैधानिक सिपहसालारो को अपनी मंशा स्पष्ट कर चुके हैं। उसके परिणाम की प्रत्याशा मंे माफिया आंतक से तस्त्र पथराई आखो मे आशा कि किरण सी नजर आयी मगर लगता नही कि विधि-विधयताओं के सरंक्षण में आदम खोर हो चुकी व्यवस्था धन पिपासुआ के रहते माफिया नाम के कलंक से मुक्त होने वाली हैं। क्योकि जिस तरह से म.प्र के ग्वालियर, चम्बल ही नही अन्य संभाग सहित शिवपुरी जिले मे सार्वजनिक शासकीय भूमि कि विधि के पालन हारो के संरक्षण मंे लूटपाट हुई है वह किसी से छिपी नही। गौवंश की चरनोई तालाबो के कैचमेन्ट ऐरिया, नदि-नालों के कैचमेन्ट ऐरिया को जिस तरह से भू-माफिया निगल गये वह अपने आप मे बडा सवाल है। मगर लगता नही कि इस सुन्दर समृद्ध शहर मे माफिया का कुछ होने वाला हैं। नीचे से लेकर उपर तक उपकृत होने का आलम यह है कि यहाॅ माफिया राज चरम पर है। जो मुख्यमंत्री जी के लिए विचारनीय होना चाहिए। 

सहज स्वस्थ, सिद्ध शिक्षा को संघर्षरत एक लोक सेवक

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। तमाम कयासों के बीच निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन का नजारा अगर किसी को देखना है तो वह शिवपुरी म.प्र. अवश्य आये। जहां एक युवा आई.ए.एस. की कार्यशैली में बिगडे शिक्षागत ढांचे में सुधार का जुनून सवार है जुनून हताश-निराश बेरोजगार युवाओं को पुख्ता रोजगार मिले उसके लिए प्रारम्भिक तैयारी का पूरा खाका तैयार है वह भी वैद्यानिक रूप से निर्धारित कत्र्तव्य निर्वहन के अलावा स्वार्थवत, समाज, सिस्टम के बीच संवैधानिक पुरूषार्थ की कृतज्ञता सिद्ध करती यह एक आई.ए.एस. अपने कत्र्तव्य निर्वहन की सिद्धता में नहीं लगता कि कि वह सिस्टम के अलावा भी अन्य किसी सरोकार का मोहताज हो। बहरहाल जो भी हो काश देश के युवा आई.ए.एस. शिवपुरी कलेक्टर अनुग्रह पी की तरह किसी भी क्षेत्र में इस तरह की कार्यशैली का अनुशरण कर पाये, क्योंकि सकारात्मक सोच और निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन सृष्टि का सिद्धान्त है फिर क्षेत्र जो भी हो। 

देश के पुरूषार्थ पर स्वार्थवत, सियासी सवाल शर्मनाक झपट मार खेल से मीडिया की मुक्ति अहम

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सत्य के नजदीक काॅग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, सांसद राहुल गांधी का सवाल के पीछे जो भी छिपा हो और मंच से दिया व्यान भले ही सियासी हो, लेकिन देश में लोकतंत्र के चैथे स्तम्भ के रूप में मौजूद तथाकथित मीडिया से इस महान राष्ट्र, सभ्यता, संस्कृति और यहां के भोले-भाले भावुक नागरिकों को सजग रहना अहम है। अब अपने राष्ट्र की खातिर, आजादी के सिपाही राष्ट्र भक्त वीर सावरकर के संघर्ष के वक्त स्थिति अपना पुरूषार्थ साबित करते वक्त क्या रही इस सत्य को मौजूद इतिहास साक्षी है। राष्ट्र के प्रति उनकी कृतज्ञता को लेकर अंग्रेजों द्वारा उन्हें दी गई काले पानी की सजा यातनायें, महात्मा गांधी से उनका संवाद, ये यथार्थ भी है और प्रमाण भी। मगर राहुल जिस तरह से सावरकर गांधी के अन्तर को अपने कार्यकत्र्ताओं को यह बताने की कोशिश कि वे सत्य के लिए मरना पसंद करगेंगे, मगर माफी नहीं मागेंगे। यह उनका अपना मूल्य सिद्धान्त है जिसकी सिद्धता की उम्मीद राष्ट्र को अवश्य की जानी चाहिए। क्योंकि व्यक्ति के जीवन मूल्य और सत्य के लिए किया गया पुरूषार्थ की सृष्टि में मानव को महामानव होन...

सरकार चाहती तो 1 वर्ष में म.प्र. एक मजबूत अर्थव्यवस्था और रोजगार के हब का साक्षी होता सियासी स्वार्थवत सिद्धता यशमेन मूडधन्य सलाहकारों ने निकाला सत्ता का दिवाला नहीं लिया मुख्यमंत्री ने समाधान पर संज्ञान संविधान निर्माता या ग्राम स्वराज सहित अन्तोदय में आस्था रखने वाले सत्तासीनों ने अगर इन मूल्य मंत्रों को समझा होता तो भारतीय जनमानस ही नहीं म.प्र. के समृद्ध सशक्त संसाधन और युवाओं को आभाव बेरोजगारी का दंश नहीं झेलना पडता है।

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. में एक योग्य अनुभवी सक्षम निर्णायक नेतृत्व तथा संपदा संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद परिणाम एक वर्ष में सिफर नजर आये तो सिस्टम पर सवाल होना स्वभाविक है और सराहना के बजाये सवाल तो सत्ता सरकार और उसके मुखिया से भी होना स्वभाविक है। मगर माफिया के खिलाफ आंशिक उपलब्धि भर से म.प्र. में लगभग 7 करोड के प्रति सेवा, कल्याण की सिद्धि नहीं हो सकती, न ही इससे गांव, गली, गरीब, युवा, बेरोजगार, बुजुर्गो का जीवन सहज रूप से निर्वहन हो सकता। जिसके लिए आवश्यक है म.प्र. में स्व-संचालित मजबूत अर्थव्यवस्था जिससे लोग अपना जीवन निर्वहन पूर्व निष्ठा के साथ अपनी आशा-आकांक्षा अनुरूप कर पाये। मगर दुर्भाग्य कि निर्णायक क्षमतावान नेतृत्व और मुख्यमंत्री म.प्र. में होने के बावजूद भी स्वार्थवत सियासी सिद्धता ने ऐसा होने नहीं दिया। सत्ता में हिस्सेदारी की रेवडिया इस तरह बंटी या सियासी संगठन की भेली गुड की तरह ऐसी जमी कि चींटी-चेटो, मक्खी, ततईयों के पौ-बारह हो लिये।  बहरहाल सवाल वहीं कि गांव, गली, गरीब को केन्द्र व राज्य सरकारों के नवगठन के पश्चात आखिर सिर्फ सिफर ...

सुंदर, सुविधायुक्त, सड़कों के नाम विधि संवत, मनमानी, जनधन भावनाओं की लूट आधी अधूरी घटिया सड़कों का दंश झेलता देश स्वच्छंद सरकार की छवि को पलीता लगाता एन.एच.आई.

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। घने जंगलों को काट, हरे भरे वृक्षों को पुनः रोपित कर हरियाली लौटाने तथा चिकनी साफ सुंदर सुविधायुक्त सडक मुहैया कराने विधि संवत शुल्क वसूली कराने वाला एन.एच.आई. कभी गुणवत्ता साफ सुंदर सड़क सड़क निर्माण इकाई के रूप में जाना जाता था जिसका जन्म ही शायद साफ-सुथरी गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण के लिए हुआ। मगर दुर्भाग्य कि जिस तरह से इसकी ख्याति आज मनमानी विधि संवत पठानी बसूली और घटिया सड़क निर्माण सहित जन भावनाओं की लूट के रूप में बढ़ रही है वह दर्दनाक ही नहीं शर्मनाक भी कही जाएगी। मगर यहां सबसे बड़ा सवाल राष्ट्र, जन सेवा में जुटी केंद्र सरकार पर है जिसकी चमकदार फिजा पर आखिर एन.एच.आई. क्यों कालिख पोतने में जुटी है। सुंदर सर्वसुविधायुक्त सुरक्षित सड़कों के नाम पर देश का नागरिक परिवहन कर से लेकर बीमा, पेट्रोलियम पदार्थ में वेट अन्य वस्तुओं में जीएसटी कर के अलावा एन.एर्च.ए.आइ. द्वारा हर 60 किलो. पर सडक शुल्क चुकाने के बावजूद कटी फटी हरियाली विहीन एवं पेट्रोलिंग वाहन एम्बूलेंस, हेडर सुविधा से मोहताज ऊंट डिजाइन पुल पुलिया व सरफेस विहीन सडकों पर आज लोग यात्रा करने पर वैवस मजबूर...

जीते जिंदा हो, भारत रत्न की दरकार संघ सोनिया, मोदी या फिर शाह

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व्ही.एस.भुल्ले  कहते हैं कोई भी सभ्यता, संस्कृति, समाज का इतिहास उसकी कृतज्ञता निष्ठा पूर्ण कर्तव्य निर्वहन पर निर्वहन करता है। अगर कृतज्ञता निष्ठा पूर्ण और सिद्धता साक्षी हो तो इतिहास लिखा ही नहीं उसे साक्षी सहित सिद्ध भी किया जा सकता है। स्व. पटेल, नेहरू, शास्त्री,  इंदिरा, राजीव, बाबा साहब, नरसिंहराव, अटल, मनमोहन की पद अनुरूप सिद्धता के बाद अगर कोई साक्षी है तो आज के दौर में संघ, सोनिया, मोदी, शाह की कृतज्ञता निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन जिस तरह से दादा साहब फालके पुरूस्कार को समय से देने का कार्य शुरू हुआ उसी तरह कि जिन्दा दिली भारत रत्न के मामले में सत्ता सरकार और समाजों को भी दिखाना चाहिए। अगर यह महान राष्ट्र अकल्पनीय, असंभव और निःस्वार्थ निर्णयों का साक्षी रहा है या आज बन रहा है। जो अपनी नई पहचान को समृद्ध, साक्षी बनाने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन कर रहा है यह बदलाव पर मानवीय सभ्यता और समृद्ध राष्ट्र में विश्वास रखने वालों को सहर्ष स्वीकार्य होना चाहिए अथार्थ जो भी अपने कत्र्तव्यों के प्रति निष्ठ व्यक्ति हो उसे जीते जिंदा ही भारत रत्न मिलना चाहिए। जय स्वराज

विधि की आड में, सम्वत होता माफियाराज.....तीरंदाज ?

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व्ही.एस.भुल्ले भैया- जिस तरह से म्हारे म.प्र. के नाथ ने समाज में कलंक साबित होते नाग-नाथों की बामियों पर बुल्डोजर चला नाथने का अभियान छेड रखा है लगता है कि जनतंत्र की आड में सत्ता में समय-समय पर काबिज होता रहा काॅरपोरेट कल्चर और समाज में कलंक साबित होती मानवीय कृतज्ञता इस बात का प्रमाण है कि गांव, गली, नगर, शहर ही नहीं महानगर, प्रदेश में पहले विधि की आड में, सम्वत माफियाराज की छत्र-छाया ने एक व्यवस्थागत तंत्र और सुसंस्कृत समाज का बेडा-गर कर दिया है। आखिर मने म्हारे स्वराज का कै करूं, नाग-नाथों पर चलता हथोडा म्हारा तो यह देख, सुन कलेजा मुंह को आवे। भैये- तने तो बावला शै, कै थारे को मालूम कोणी 15 वर्ष में विधि की आड में पनपे तथाकथित सम्वत माफियाराज को खत्म करने के नाम पिछले रास्ते से फिर से क्या माफियाराज का आगाज हो रहा है और सेवा, विकास, कल्याण के कार्यो का पूर्व निष्ठा जबावदेही के साथ निर्वहन हो रहा है। मने तो बोल्यू कि भाया स्वयं सेवा, कल्याण, विकास या सार्वजनिक सेवा, कल्याण, विकास के मार्ग में अब तो जो भी आडे आयेगा या फिर विधि को ताक पर रख सत्ता को सरेयाम पिछले दरवाजे से धमकायेगा ...

घटिया सडकों की पूरी बसूली सडक, सेवा, सुविधा के नाम आमजन की खुलेयाम लूट विधान को विसार स्वार्थवत समाधान में डूबी सत्तायें

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से देश भर में अच्छी सडकों एवं सडक किनारे सुविधाओं के नाम टोलों पर सरेयाम आमजन की सडक, सेवा, सुविधा के नाम लूट मची है वह किसी से छिपी नहीं। ऊंट पुल पुलिया परखच्चे उडती सडकें अपने जन्म से 1 वर्ष भी पूरा नहीं कर रही और परखच्चे उड जाते है। मगर पूरी शुल्क बूसली का काम टाॅलों द्वारा बडी ही निष्ठा के साथ आमजन को परेशान किया जाता है। अगर हम बात करें ग्वालियर से लेकर देवास तक कि एनएचआई द्वारा निर्मित सडकों की तो हालात ये है कि खस्ता सडकों की हालत और क्षत-विच्छेत हो चुकी संकेतक या अन्य सुविधाओं सहित सडकों पर हिचकोले मारते वाहन एनएचआई की इंजीनियरिंग एवं जिस कीमत पर सडकों का निर्माण किया गया है उससे जाहिर होता है कि विधि ही नहीं संविधान निहित आम नागरिकों के अधिकारों का खुलेयाम चीरहरण कैसे किया जा रहा है इससे शर्मनाक बात और क्या होगी कि जिन सडकों को बने 1 वर्ष भी नहीं हुआ और उनके या तो परखच्चे उड गये या उन पर पेंच के रूप में थिगडे लगाने पड रहे है। कई जानें इन उम्मदा सडकों पर जाने बाद भी एनएचआई की निद्रा नहीं टूटी, न ही परिवहन मंत्रालय को इस...

जनसेवा, सत्याग्रह से लेकर सडक तक जीवन मूल्य सिद्धान्त पिछले दरवाजे से सत्तारूढ सियासत की हनक से हलाकान सवाल बनेगा नया दल या दल में दिखेगा समाधान

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वीरेन्द्र भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है समुद्र में सुनामी से पहले की शान्ति का अहसास किसी को न हो, मगर सुनामी के साथ तबाही के परिणाम किसी से नहीं छिपे। फिर वह सुनामी, सडक, समुद्र की हो या फिर सियासत की। मगर यहां हम चर्चा सियासी सुनामी की इसलिए भी कर रहे है क्योंकि प्रकृति के विधान विरूद्ध पिछले दरवाजे से सत्तारूढ सियासत की हनक से कई सियासी सवाल हलाकान है और जनसेवा, सत्याग्रह से लेकर सडक तक जीवन मूल्य सिद्धान्त, निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन परेशान है। जो आज की षडयंत्रपूर्ण सियासत का नंगा सच है। अब इस सच से कितने सियासी लोग सहमत असहमत है यह तो आने वाला समय ही तय करेगा।  मगर अन्दर खानों की खबर यह है कि 30 दिसम्बर से पूर्व सियासी गलियारों में एक ऐसा तूफान उठने वाला है जो सियासी समुद्र में सुनामी लाने काफी है। संभावित सुनामी के मंथन में नया दल बनेगा या फिर दलों का स्वरूप और सत्ता स्वरूप तय होगा यह तो फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। मगर म.प्र. की बलबती होती षडयंत्रपूर्ण सियासत साथ ही पिछले दरवाजे से सत्ता सियासत हथियाने वालो की अग्नि परीक्षा है। क्योंकि जिस तरह से काॅग्रेस ...

सत्ता, शौहरत, दौलत की जकड में दम तोडता निजाम असुरक्षित सडक, नाली, चैराहे हवा में बात करते वाहन

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वीरेन्द्र भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अब इसे किसी भी स्मार्ट शहर का सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य जहां चैक चैराहों पर सडक पार करते वक्त या नालियों के नजदीक से गुजरते वक्त कब कैसा हादसा हो जाये परवाह किसे है, न तो सचेतक बोर्ड है, न ही कोई इन्डीकेटर मनमाने ढंग से फर्राटे भरते वाहनों को आलम यह है कि कौन कहा से रोंग साइट आ जाये कोई रोकने वाला नहीं। कारण सत्ता शौहरत, दौलत की जकड में डूबा निजाम इतना निर्दयी नजर आता है। मानो कि हर माह मोटी पगार भत्तों को प्राप्त करने के बावजूद उसकी कोई जबावदेही ही नहीं, न ही समूचे निजाम में कोई ऐसा कोतवाल जो कत्र्तव्य विमुखता पर सवाल खडे कर निकम्मी होती व्यवस्था के कान ऐठ सके। साधारण से कार्यो से कत्र्तव्य विहीनता इस निजाम व्यवस्था को कहां ले जाकर छोडेगी कहना मुश्किल मंदी के नाम वाहन उघोग पर उडेलने वाले निजाम को शायद पता ही नहीं कि जितने वाहन सडकों पर है उतनी सडक ही पैदल चलने वालों को नहीं बची, रही सही कसर ऊबड-खाबड, खुली नाली और अतिक्रमण की जकड में दम तोडती सडकों ने पूर्ति कर दी जो शिवपुरी जैसे शहर के लिए दर्दनाक ही नहीं शर्मनाक भी है। मगर लगता नहीं, स...

ये है देश का मिजाज, कत्र्तव्यनिष्ठा बनी इन्सानियत का ताज पुलिस कीर्ति, आसमान पर दुर्दान्त अपराधियों पर आत्मरक्षार्थ संगीनों का कहर

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस हैदराबाद की दुर्दान्त, बलात्कार, हत्याकाण्ड पर समूचा देश खोल उठा था इन्सानियत, फवद-फवद कर रो रही थी और बैवसी बैचेन। मगर जब पुलिस से हथियार छीन भाग रहे दुर्दान्त अपराधियों पर आत्मरक्षार्थ पुलिस की दहाडती संगीनों का मुंह ठाय-ठाय करते ठीक उसी जगह खुला, जहां दुर्दान्त बलात्कारियों ने बलात्कार पश्चात पीडिता को जिन्दा जला दिया था तो चारों अपराधियों में से कुछ ढेर तो मरणासन्न थे। इससे पूर्व कि उन्हें जीवन रक्षक सहायता मिल पाती चारों ढेर हो चुके थे। यह खबर आते ही मानो समूचा देश उस पुलिस के नाम की वाह-वाही करते नहीं थका। जिसके नाम पर लोग जब तब तोहमत मलते नहीं थकते थे। मगर आज हैदराबाद तेलंगाना पुलिस ने समूचे देश में पुलिस का नाम रोशन कर दिया। सडक से लेकर संसद तक पुलिस की निष्ठा, कत्र्तव्य को सराहा गया। इससे देश के मिजाज को समझा जा सकता है। अब देश की सियासत सिस्टम को समझना यह है कि इन्सानियत की खातिर किये गये निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन को देश की आवाम कैसे हाथों हाथों सर का ताज बना लेती। काश षडयंत्र पूर्ण सियासत और सड़ांन्ध मारता वह सिस्टम इस सच क...

क्या सिंधिया नया दल बनाएंगे......?

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वीरेंद्र भुल्ले मैं कांग्रेस का सिपाही हूं, मैं जन सेवक था जनसेव हूं और जब तक जनता चाहेगी मैं जन सेवा में ही रहूंगा। अगर सिंधिया पार्टी बनाते है तो सबसे पहले मैं उनके साथ जाऊंगा विधायक, सोशल मीडिया पर सिंधिया का नया एडरस न जाने कितने अनगिनत सवाल अनौपचारिक तौर पर सियासी गलियारों में है। इतना ही नहीं सत्ता से लेकर संगठन तक आंदोलन, धरना, रैली, सत्याग्रह, जनसेवा और 15 वर्ष तक सत्ता के खिलाफ सड़क पर संघर्षरत सिंधिया को सियासत सत्ता से दरकिनार रखना ऐसे में अटकलों पर सवाल स्वभाविक है। मगर समय समय पर सिंधिया यह भी स्पष्ट करने से नहीं चूकते कि वह राजनेता नहीं जनसेवक हैं वह एक कांग्रेस के सिपाही हैं। मगर इसके उलट सियासी चर्चा फिलहाल यह है कि सिंधिया तो नया दल बना सकते हैं या फिर भाजपा में जा सकते हैं, सच क्या है यह तो आने वाला समय ही तय करेगा। अगर इस खबर में जरा भी सच्चाई है तो आने वाले दिन कांग्रेस को म.प्र. में भारी पड़ने वाले हैं। मगर किसी भी अप्रत्याशित सियासी कदम उठाने से पूर्व समझने वाली बात यह है कि रण से पूर्व सेनापति, सिपहसालार, सलाहकारों की कृतज्ञता, निष्ठा, संसाधनों की समीक्षा अवश्य ह...

जीवन्त शिक्षा, संस्कृति, संस्कारों का अभाव, जघन्य, दुर्दान्त, वीभत्सकाण्ड

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। निर्भया से लेकर हैदरबाद के नाम से चिरपरिचित दर्दनाक, शर्मनाक घटना क्रम इस बात के साक्षी है कि मानवता कितनी निर्दयी और पुरूषार्थ कितना नपुशंक हो गया है अब इसके के कारण जो भी हो। मगर आज इस महान भूभाग पर एक महान संस्कृति बगैर किसी अपराध के बदनाम है इतना हीं नहीं वह महान सभ्यता संस्कृति, शिक्षा, संस्कारों का भी मंुह काला हो रहा है जो इस तरह के घटनाक्रमों के लिये कतई उत्तरदायी नहीं। ऐसी स्थिति में अपना पुस्षार्थ सिद्ध कर मानवता को कृतज्ञता साबित करना इस महान भूभाग पर मौजूद मानव का कत्र्तव्य है क्योंकि आज भी समूचा जीव जगत अनुशासित कत्र्तव्यनिष्ठ और अनुशासित है तो फिर मानवता पर सवाल क्यों ? यहीं यक्ष सवाल आज हम सभी के लिए होना चाहिए। जय स्वराज

गर्वपूर्ण, निकम्मापन, निरलज्जता पूर्ण पुरूषार्थ, फिर भी शर्म नहीं गर्भ...........तीरंदाज

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व्ही.एस.भुल्ले भैया- इतने पर तो मैं समृद्ध, खुशहाल, महान बन जाऊंगा। अपरिपक्व म्हारा लोकतंत्र भले ही रहे। इस पशुवत जीवन के बावजूद कम से कम सम्राट नहीं तो महान तो कहलाऊंगा। भैये- काला मुंह हो तेरा, तू कै अर्र-बर्र बक रिया शै कै थारे को मालूम कोणी म्हारी महान सभ्यता, संस्कृति, संस्कार, शिक्षा जिसका आधार सिर्फ और सिर्फ त्याग तपस्या और अनगिनत कुर्बानियां रही है म्हारी महान विरासत इतिहास गवाह है म्हारी समृद्ध, खुशहाल, जीवन की। तने तो बावला शै थारे को मालूम कोणी म्हारे पूर्वजों ने अपना समूचा जीवन सर्वकल्याण सेवा, कत्र्तव्य निर्वहन जबावदेही के उच्च जीवन मूल्य सिद्धान्तों की खातिर जिया है पुरूषार्थ की पराकाष्ठा की है, शायद ही कोई सभ्यता, संस्कृति ऐसी रही हो, जो हमारी महान संपदा संस्कृति को छू पाये जो म्हारे पूर्वजों द्वारा सौंपी गई हमें हमारी महान विरासत है।  भैया- तो फिर सत्ता, सियासत, समाज, परिवार, व्यक्ति के बीच पतन की पराकाष्ठा क्यों ? जघन्य हत्या, बलात्कार, भ्रष्टाचार, नैतिक पतन की पराकाष्ठा क्यों ? आखिर क्यों उस महान भूभाग पर, ऐसे-ऐसे दुर्दान्त उदाहरण देखे जा रहे है। क्यों आज हमार...

माननीय श्रीमानों हम एक मर्तवा फिर से अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन में अक्षम, असफल सिद्ध हुये पैचाचिक कृत्य से कंलकित हुई मानवता पशु-पक्षी जीवों पर गर्व होना चाहिए

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस मानवता पर प्रकृति, सृष्टि, सृजन के लिए निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन पर गर्व रहा है। आज उस उच्च जीवन मूल्यों वाली मानवता को शर्मसार कर दिया है। यूं तो समस्त जीव, जगत के सृजन में संरक्षण, सम्बर्धन की जबावदेही मानव की ही रही है। मगर जबावदेही से इतर वह जीवन मूल्यों को लेकर हमारी निष्ठायें नंपुशक साबित होती रही है वहीं सामाजिक परम्परायें, संस्कार, आज अवलाओं की श्रेणी में है। धिक्कार होना चाहिए ऐसे पुरूषार्थ और कृत्यों पर जो विरासत को कलंकित करने काफी हो। एक ऐसी महान विरासत जहां मातृ-शक्ति को पूज्यनीय मान उन्हें पूजा जाता है और सामाजिक सरोकारों को लेकर मातृ-शक्ति की रक्षा के लिए प्राणों तक का बलिदान हो जाता है। आज हमें गर्व नहीं शर्म से कंलकित होना चाहिए। क्योंकि जिस तरह के कृत्य समाज के अन्दर सडकों पर नजर आ रहे है फिर चाहे वह दिल्ली, हैदराबाद के मामले हो या अन्य जघन्य मामले इस तरह के कृत्य कभी भी उस महान विरासत को उस मानवता को गौरान्वित करने वाले नहीं हो सकते, जिसका लोहा सारे विश्व में माना जाता रहा है।  मगर माननीय, श्रीमानों आप तो हमारे...

किसानों को लेकर कांग्रेस सरकार पर बरसे भाजपाई कड़े आरोप-प्रत्यारोप के बीच सार्थक सवालो पर विमुख दिखे वक्ता

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। शिवपुरी। म.प्र. शिवपुरी मसला था कि प्रदेश भर में भाजपा द्वारा काॅग्रेस सरकार की असफलता किसानों की वादा खिलाफी के खिलाफ प्रेस काॅन्फ्रेस का जिसकों भाजपा प्रदेश कार्यकारणी सदस्य प्रवक्ता व जिला भाजपा अध्यक्ष कोलारस विधायक ने सम्बोधित किया। इस मौके पर भाजपा द्वारा आयोजित जिला कार्यालय पर शिवपुरी मंडल अध्यक्ष, वरिष्ठ भाजपा नेता, पदाधिकारी, मीडिया प्रभारी सहित पूर्व मंत्री दर्जा प्राप्त नेता उपस्थित थे। लिखित प्रेस नोट में उल्लेखित बिन्दुओं पर प्रवक्ताओं द्वारा अपने-अपने विचार रखे। जैसे ही उपस्थित मीडिया से यक्ष सवाल विधान अनुरूप कत्र्तव्य निर्वहन से संबंधित दागे गये उस पर नेतागण सिर्फ कांग्रेस सरकार की असफलता और किसानों से वादा खिलाफी की बात करते नजर आये।  मगर न तो उन्होंने जीएचटी से मिलने वाले राज्य के हिस्से की राशि और न ही विगत 3 वर्षो से फसल बीमा की राशि पूर्व सरकार द्वारा जमा न किये जाने पर कोई सीधा उत्तर दे पाये। मगर भाजपा नेताओं के तेवरों से साफ था कि भाजपा किसानों को लेकर कांग्रेस सरकार से आर-पार के मूड में है।