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Showing posts from December, 2021

सजृन में सर्बकल्याण ही मानव की श्रेष्ठतम कृति

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जीवन की श्रेष्ठतम कृति को कलंकित करता मानव स्वभाव  लज्जित होती विरासत और उत्तराधिकारी  व्ही. एस. भुल्ले  30 दिसंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  अगर इतिहास धर्मग्रन्थो की माने तो न जाने कितने जन्मो के उपरान्त मानव को मानव जीवन प्राप्त होता है । जिसे कभी सर्बकल्याण में समर्पित कर मानव स्वयं पर गर्व और गौरव मेहसूस करता था मगर आज यक्ष सबाल यह है कि आखिर अपने कर्म से समृद्ध सृजन और सृष्टि सिद्धान्तो मे उच्च आस्था रखने बाला वह मानव विरासत मे मिली उस समृद्ध कीर्ति समृद्धि को कैसै लज्जित , कलंकित कर सकता है ।  जबकि सृष्टि मे सर्बकल्याण को समर्पित मानव की त्याग तपस्या उसका जीवन को उत्कृष्तम योगदान जिसने उसे पूज्यनीय सराहनीय सम्माननीय स्थान दिलाया कारण हजारो यौनियो के पश्चात मानव जीवन का सर्बकल्याण मे समर्पण उसका वह विश्वास योगदान जो मानव जीवन की उपायदेयता सिद्ध करता है । निश्चत ही यह उस पीढ़ी का सर्वोच्यतम योगदान ही कहा जायेगा जिसने जीवन के अर्थ उसकी उपायदेयता सिद्ध करने मे स्वयं जीवन का योगदान दिया और जीवन की समृद्धि के लिये एक से बढ़ कर एक कुर्बानी दी और मानव जीवन...

न्याय की खातिर जनाकांक्षाओ का दमन

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कही घातक सिद्ध न हो ध्रुर्वीकरण का अस्त्र  वीरेन्द्र शर्मा  27 दिसंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  कहते है भय न्याय का पुत्र होता है । मगर वह जब गैंग गिरोह बन्द हो तो वही न्याय दमन का रास्ता अखतियार कर लेता है जिसमे ध्रुर्वीकरण का अस्त्र कब घातक स्वरूप इखतियार कर ले कहा भी नही जा सकता जिसके दिग्दर्शन हालिया तौर पर सियासत कर चुकी है ऐसा नही कि ध्रुर्वीकरण के घातक स्वरूप को सियासत ने पहली मर्तबा देखा हो इससे पूर्व भी सियासत कई मर्तवा इससे दो चार हो चुकी है जब इस अस़्त्र से इस अस्त्र को इजात करने बाले नही बच सके और तौबा कर चुके उस अस्त्र की मारक क्षमता पर नाज करने बाली सियासत भले ही कई मर्तवा लहुलुहान हुई हो मगर उसने आजादी के ही 70 बर्ष नही सियासी ज्ञान रखने बालो ने हजारो बर्ष का इसका कुरूप चेहरे का इतिहास पढ़ा देखा है और सेकड़ो पीढ़ियो ने इसे भोगा है मगर क्या करे सतत सत्ता का मार्ग ही ऐसा है जो इसी रास्ते सतत सत्ता का मार्ग प्रस्त करता है । मगर जब आज पूर्वबत ध्रुर्बीकरण का अस्त्र सिद्ध हुआ है वह भी सतत सत्ता की खातिर उससे आने बाले परिणाम क्या होगे यह तो आने बाला समय ही ...

विधान विलाप और राजकोष कबाड़े पर राजपुरूषो की चुप्पी

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धरा को कलंकित कृतज्ञता , अनाथ होता जीवन आधार  व्ही.एस.भुल्ले  26 दिसंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  अगर यो कहै कि विधान विलाप और राजकोष कबाड़े पर जिस तरह से राजपुरूषो ने जो चुप्पी ओढ़ रखी वह किसी जघन्य अपराध से कम नही । धरा को कलंकित करती कृतज्ञता की कीर्ति क्या होगी सहज अन्दाजा लगाया जा सकता मगर जबाबदेहो का निरूत्तर होना भी एक बड़ा द्रोह ही माना जायेगा ये अलग बात है कि कर्म मे विश्वास रखने बाले आज भले ही श्रेष्ठ पुरूषार्थ के मार्ग पर अग्रसर हो मगर परिणामो की सार्थकता का सिद्ध न हो पाना अपने आप मे एक सबाल है । आज अनाथ होता जीवन आधार भले सार्थक छड़ो मे भी विलाप करने पर विवश हो मगर विमुख जीवन से सार्थक उम्मीद बैमानी ही कही जायेगी । अगर हम बात करे तो राजकोष का अर्थ सिर्फ धन से न होकर उस समुची संपदा से जो मानव , प्राकृतिक , विद्या , प्रतिभा , से जुड़ी उस उर्जा से है जिसका सटीक व्यवस्थापन से है । अगर यो कहै कि जड़ , तत्व , जीवन , जल मे मौजूद वह उर्जा जीवन की संपदा है जीवन का राजकोष है जिसके बिगाड़ पर आज भी राजपुरूर्षो की चुप्पी किसी बड़े संदेह को जन्म देने काॅफी है । जिसका निष...

खण्ड खण्ड असतित्व का अखण्ड आधार

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   श्रेष्ठ समझ संस्कारो के अभाव मे सृजन का बंटाढार   जीवन आधार से द्रोह संगीन अपराध  व्ही. एस. भल्ले  26 दिसंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार म.प्र.  मौजूद जीवन संघर्ष का बास्ता कोई जो भी दे मगर खण्ड खण्ड असतित्व के सहारे जो अखण्ड आधार की कोसिश समय काल खण्डो मे जब जब होती रही वह श्रेष्ठ समझ संस्कारो के अभाव मे मानव जीवन को सिर्फ कलंकित ही नही बल्कि सृजन का बंटाढार भी करती रही है आज भी जिस तरह से समृद्ध जीवन के नाम अध्यात्म और जीवन आधार से द्रोह अतिज्ञान या अज्ञानता के कारण चल रहा है वह मानव जीवन के लिये पूर्व वत संगीन अपराध सिद्ध हो इसमे किसी संदेह नही होना चाहिए । जीवन मे सब कुछ साक्षी , दिग्दर्शित होने के बाबजूद जीवन द्रोह कितना सार्थक सिद्ध होगा यह तो समय ही सिद्ध करेगा मगर समृद्ध सिद्ध जीवन और मूल आधार का फाॅरमूला इसी तरह परवान चढ़ता रहा अभी तो शिरूआत है आगे जीवन का सफर कैसा रहने बाला है इससे हर समझ बाला अच्छी तरह विदित है । सत्ता सामथ्र्य के लिये गैग गिरोह बन्द आधार खण्ड खण्ड आस्थाओ के बीच कितना सिद्ध रहने बाला है अगर जीवन का संघर्ष एक अखण्ड आधार का है तो...

मरता जमीर और जिन्दा लोग

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बैखोफ सामथ्र्य के पुरूषार्थ से थर्राया जन जीवन  स्वकल्याण के आगे बिलबिलाती आशा अकांक्षा  व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  फिलहाॅल मरते जमीर पर चर्चा सार्थक न हो मगर जिन्दा लोगो के लिये जुगाली का विषय तो हो ही सकता है मगर इस सब बीच जिस तरह से बैखौफ सामथ्र्य का पुरूषार्थ चल रहा है और बिलबिलाती आशा अकांक्षाओ का विश्वास टूट रहा है वह उससे जीवन के मूल का थर्राना स्वभाविक है मगर स्वकल्याण मे डूबा या कांरबा कहा जाकर रूकेगा यह तो वह सामथ्र्यशाली पुरूषार्थी ही जाने जिन्है शायद इतिहास का ज्ञान ही नही छोटे से जीवन को आदि अनन्त मान चुके उन स्वकल्याणकारियो को कौन समझाये कि इससे पूर्व भी बड़े बड़े पुरूषार्थी सामथ्र्यशाली इस भू भाग पर रहै आज उनका नाम लेने बाला पानी देने बाला उनका स्वअंश हमारे आपके बीच से ओझल है अगर कुछ कही शेष है तो उनकी वह कीर्ति यश नही फिर किस बात का गुमान आज यह सबसे बड़ी समझने बाली बात है जो इक्टठा कर उनके आज कोर्ट कचहरी कर रहै है तो कुछ आज उन्है कोश रहै है जिनके कारण उन्है आज सब कुछ होने के बाबजूद यह दुरदिन देखने पढ़ रहै है कहते सब कुछ आयने की तरह साफ है...

झूठ के सेवा कल्याण से थर्राती आस्था विश्वास

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सुशासन की आढ़ मे माल कूटते मातहत  विधि विधान को आयना दिखाती मलाई काटूओ की जमात  23 दिसंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  सुशासन के रथ पर सबार सेवा कल्याण की ध्वजा फहरा कोई कितनी ही सम्रांट बनने की कोसिश क्यो न करले अगर मलाई काटुओ का कांरबा इसी तरह बढ़ता रहा तो वह दिन दूर नही जब आस्था विश्वास का जनाजा बगैर कंधो के नजर आये श्रंगारीे संस्कृति मे डूबी सत्ता सियासत भले ही प्रबन्धन को अला उददीन का चिराग समझ इस अहंकार मे डूबी हो कि उसका क्या उसका सामथ्र्य पुरूषार्थ प्राप्त उसकी कीर्ति आदि अनन्त है मगर कल उन्है भी इसी समाज मे आना है जहां सेवा कल्याण का कारबा झूठ की बिना पर सरपट दौड़ रहा है बिगड़े हालातो मे अब तो यह उम्मीद नही कि राशन पानी नगद सहायता राशि ईधन दवा की मोहताज वह बढ़ी जमात भी कुछ कर पायेगी जो आज की सियासत सत्ता के रहमो करम की मोहताज है अब ऐसे मे उम्मीद सिर्फ उस उपर बाले से ही की जा सकती है जिसने कर्म को ही सर्बोपरि कहा है अब ऐसे मे कर्म और मलाई काटुओ द्वन्द्व होना स्वभाविक है देखना होगा सेवा कल्याण के इस दौर मे और आस्था विश्वास को कब तक बिलखना पढ़ेगा । 

बलिया कटिया बाहूबली बिमुखता ने बैठाला बिजली का भटटा

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बिल उपभोक्ता परेशान शासन प्रशासन चिरनिद्रा मे लीन  लाइन लोस मरम्मत का गौरख धन्धा चरम पर  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  बिजली की निरंतर सप्लाई से बल्ले बल्ले बलिया कटिया बाहूबलियो की बाछे भले ही खिली हो मगर आम उपभोक्ता बिजली और बिल के नाम खून के आंसू रोने पर मजबूर है लगातार मरम्मत कार्य का अलग अलग क्षैत्रो मे चलने से बिजली सप्लाई भले ही निरबिबाद हो रही हो मगर शिकायत निवटान का जो तरीखा बिमुख व्यवस्था ने अपना रखा है वह आम उपभोक्ता को रूला देने बाला है न तो हैल्पलाइन ही अलाउददीन का चिराग बन पा रही न ही निरंतर सप्लाई आम उपभोक्ता को उसके कष्टो से निजात दिला पा रही बैचारा उपभोक्ता या तो सड़क पर समाधान ढूढ़ रहा है या चुप होकर नियती को कोश रहा है मगर बर्षो से फलते फूलते लाइन लोस के गौरख धंधे पर अब अवश्य सबाल हो रहै जो बिजली के लिये विचार का विषय होना चाहिए । बैबजह की झुझलाहट और सड़क पर संग्राम से कुछ हाथ लगने बाला नही बैहतर हो कि सुनियोजित तरीके से योजना बना कटिया बलिया बाहूबलियो से आम उपभोक्ता को निजात दिलाने की कोसिश हो और कर्तव्य बिमुख लोगो के खिलाफ सख्त कार्यवाही फिर उनके आका ...

आजादी का अमृत महोत्सव , अमृत वाणी , और अलख

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स्वतत्व की चुनौती बनी चिन्ता   खुले , स्वस्थ शास्तार्थ , समझ , संस्कारो के अभाव मे मन , कर्म , विचार , आचरण हुये अनाथ  व्ही. एस. भुल्ले  23 दिसंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  कहते है स्वराज पाने में श्रेष्ठता के साथ सृष्टि , सृजन सिद्धान्त से विज्ञ अभिभूत होना अहम होता है मगर गैंग गिरोह बन्द संस्कारो के बीच जीवन सरोकारो का तार तार होना स्वभाविक हेै जिसमें मन , कर्म , विचार , वचन , संस्कार अनाथ नजर आये यू तो सृष्टि सृजनकर्ता की महिमा अपार है जिसे सच्चे मन कर्म बचन संस्कारो से ही जाना पहचाना जा सकता है और स्व के मूल को पहचाना जा सकता है आज जब स्व तत्व जाग्रत कर जीवन के श्रेष्ठ योगदान का अवसर संकल्प इतिहास को जानने समझने का मौका हमारे पास है जिसके हम साक्षी भी है तो इसमे सभी की सहभागिता उतनी ही आवश्यक है जितनी स्व निर्धारित विधि के अधीन जीवन निर्वहन कि और सर्बकल्याण की क्योकि अगर जन्म से लेकर बर्तमान के अन्त तक हम जीवन सरोकारो के विधान को त्याग स्व मे डूबी संस्कृति के भाग बनते है तो फिर कल्याण असंभव है और सेवा अनाथ और समृद्धि भी इसी तरह बिलख बिलख कर काल परिस्थित...

बदले परिवेश में पत्रिकारिता , कलंकित होती कीर्ति

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बिमुख निष्ठा से तार तार होते सरोकार  वीरेन्द्र शर्मा  20 दिसंबर 21 शिवपुरी  कहावत तो ये थी कि गोली और बोली का इस्तमाल सोच समझकर करना चाहिए इसी तरह लेखन भी पूरी समझबूझ और तथ्यो के आधार पर होना चाहिए । क्योकि किसी भी व्यवस्था मे यह वह कारगार हथियार है जो लक्ष्य भेद कर ही दम लेता है मगर इस अस्त्र का उपयोग किसी भी व्यवस्था मे समृद्ध समाज और जीवन के लिये होता रहा है जिसके लिये इसे लोकतंत्र का चैथा स्तंभ भी कहा गया मगर आज जिस तरह से इस विद्या का स्व या सामूहिक स्वार्थ के लिये हो रहा है वह शर्मनाक ही कहा जायेगा । अब इसके पीछे के कारण जो भी हो मगर कीर्ति को कलंकित करने का जो कांरबा चल पढ़ा है वह कहां जाकर थमेगा फिलहाॅल कह पाना मुश्किल है आज कल तथ्यो से परे जिस तरह से साॅसल मीडिया को माध्ययम बना समाज या समाज के अंग या फिर संस्थाओ कि बखिया उधेड़ हुनर चमकाने का दौर नामचीन माध्यमो मे चल पढ़ा हे अगर कुछ दिन और ऐसे चलता रहा तो विश्वास खोती समाज मे सम्मानित बिरादरी कब पहचान के अधंकार मे समा जायेगी शायद ही किसी भान हो क्योकि विजय रथ पर सबार सम्राट बनने का जो सपना भाई लोगो ने सजा रखा है वह य...

पंचायत चुनाव को लेकर पक्ष विपक्ष मे नूराकुश्ती

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  श्रेय सियासत की होड़ मे संबैधानिक सरोकार तार तार  म.प्र. काॅग्रेस भा.ज.पा. का एक दूसरे पर दोसारौपण  वीरेन्द्र शर्मा  22 दिसंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  पिछड़ा वर्ग का खेरोगार बनने जिस तरह से म.प्र. की सियासत मे तलबारे खिची है उसका उग्र रूप आज सदन से लेकर प्रेस ब्रीफिंग मे देखने मिला एक दूसरे पर आरोप लगाते पक्ष विपक्ष दोनो ही स्वयं को पिछड़ा वर्ग के सबसे बड़े पैरोकार सिद्ध करने मे लगे रहै मगर सच क्या है सूचना क्रांति दौर मे बच्चा बच्चा समझ रहा है मगर पहले दूसरे चरण के लिये आवेदन कर चुके उन उम्मीदवारो का क्या जो स्वयं को चुने का सपना पाल विगत कई बर्षो से त्रिरस्तरीय पंचायत चुनावो का इन्तजार कर रहै थे । आज जहां म. प्र. के शिवपुरी जिले मे काॅग्रेस और भाजपा जिला अध्यक्षो ने स्वयं के दल को पिछड़ा वर्ग का सबसे बड़ा हितैसी साबित करने की कोसिश की तो वही चुनावो की तारीख टलने की अफबाहै खूब जोर पकड़ती रही मगर मूल मुददो से इतर जिस तरह से पक्ष विपक्ष सियासी नूराकुश्ती कर रहै है इससे किसका भला होने बाला है यह तो यही दल जाने मगर इतना तो तय कि फिलहाॅल पंच परमेश्वर चुने जान...

हड़ताल हड़ताल के खेल में सेवा कल्याण धड़ाम

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मजबूत लोेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेकतंत्र की हुंकार से थर्राया सर्बकल्याण  वीरेन्द्र शर्मा   17 दिसंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  म. प्र. के चर्चित शहर शिवपुरी मे जब से हड़ताल हड़ताल का खेल क्या शुरू हुआ कि स्वच्छता सेवा कल्याण चारो कोने चित पढ़े दिखाई देते है । जगह जगह गन्दगी के अम्बार तो मुॅह माॅगे शुल्क पर नसीब सुबिधाये घसिटती नजर आ रही है । यह उस मजबूत लोकतंत्र का ही प्रमाण है जिसमे लोक की आशा आकांक्षाओ का भुर्ता सरेआम हो रहा है मगर अनदेखी के आभाव मे सेवा शफत भले सरेआम रंभा रही हो मगर चुप कराने बाला दिखाई नही दे रहा । जिनके हक का शोषण हो रहा है उनकी पीढ़ा तो जायज है मगर जो मुॅह माॅगे शुल्क या मोटे वेतन पर सेवाये दे सेवा बाधित कर रहै है उनका क्या ? मगर कहते है नकारात्मक सोचना कहना दोनो ही सभ्य समाज मे धूर्तता का सूचक है सो सकारात्मक ही सोचना चाहिए इसलिये सकारात्मक यह है कि जितना चुप रहा जाये वही समाज और लोकतंत्र तथा सेवा कल्याण के हित मे है अब ऐसे मे सर्बकल्याण थर्राये या हड़ताल के रथ पर सबार लोकतंत्र का परचम लहराये इसमे किसी संदेह नही होना चाहिए कि आने बाला समय अ...

साख खोती सरकार

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अराजकता को आमंत्रित करते जबाबदेह लोग  सरकार की चुप्पी पढ़ सकती है भारी  हड़ताल हड़ताल से थर्राया शिवपुरी शहर  कचरे ढेर और कंगाली को लेकर पनपता आक्रोश  वीरेन्द्र शर्मा  17 दिसंबर 21 शिवपुरी  सेवा कल्याण के धरासायी होते सपनो के बीच जिस तरह से शिवपुरी मे हड़ताल हड़ताल का खेल कुछ दिनो से चल रहा वह कब घातक सिद्ध हो कहा नही जा सकता मगर जिस तरह की चिंगारी देखी जा रही है वह किसी डराबने सपने से कम नही । नगर पालिका से लेकर जिला चिकित्सालय तक चल रही सफाई कर्मियो की हड़ताल तो समझ आती है कि उनके वेतन भत्तो का मसला नही सुलझ रहा जिसके चलते गदंगी के अंबार इकटठे होते जा रहै है । तो वही दूसरी ओर आचरण व्यवहार को लेकर म. क्षै. वि. वि. कम्पनी के अधिकारियो और अभिबाषको के बीच छिड़ी जंग अपना व्हंगम रूप दिखा रही है तो वही लोक निर्माण की साख पर लगा बटटा भी कुछ कम नही अगर अपुष्ट खबर की माने तो गत दिनो बुलाई निविदा मे एक भी फाॅर्म नही बिचा परिणाम की शासन के विज्ञापन मे पैसा तो खर्च हुआ मगर कोई ठेकेदार निविदा डालने नही पहुॅचा इससे स्पष्ट है कि सरकार की साख किस स्तर पर जा पहुॅची बहरहाॅल जो भी ...

विधान से इतर सड़क पर समाधान की ओर बढ़ता लोकतंत्र

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  बढ़े अस्त्र के रूप मे उभरता निष्ठा में व्यावधान  हको की जंग मे हाफनी भरता लोक - तंत्र  वीरेन्द्र शर्मा  16 दिसंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  यू तो किसी भी सेवा का पहला चरण उस सफत से शुरू होता है जो सौपे गये कार्य के प्रति निष्ठा समर्पण को ज्ञात कराती है और उसे निमित का धर्म ठहराती है फिर बात है उसे पवित्र विधान की जिसे सेवा लेने या देने बाले दोनो अंगीकार करते है जिसके निपटान के लिये तमाम संस्थाये है मगर कुछ दिनो से हको के नाम जिस तरह से लोक और तंत्र दोनो हाफिनी भरने पर मजबूर है उसने जीवन का ककहरा ही बदल दिया अगर दुर्घटना हो जाये तो जाम हड़ताल अगर बिबाद हो जाये तो जाम हड़ताल अर्थात मौजूदा गतिविधि यह बताती है कि न तो कानून का अब कोई काम रह गया न ही उस विधान का जिसको अंगीकार कर लोग हक हुकूको का कबच पहन जनभावनाओ को उस सेवा कल्याण को लहुलुहान करने से नही चूक रहै जो शफत उन्है सेवा मे आने से पूर्व दिलायी जाती है । फिर चाहै वह शासकीय सेवाओ से जुड़ी सेवाये हो या स्वास्थ , सुबिधा से जुड़ी सेवाये अब तो ऐसे ऐसे महकमो मे भी हड़ताल के अचूक अस्त्र पैर पसार रहै है जो सेवा ...

कंगाली के कागार पर लोकनिर्माण विभाग , ठेकेदारो का मोहभंग , नही डाला किसी ने टेन्डर

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  करोड़ो का बकाया है , विभाग पर , साख खोती सरकार  नीरज कुमार  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  यू तो लोकनिर्माण के कंगाली के किस्से आम थे उस पर से गत दिनो विभाग द्वारा बुलाये गये टेन्डरो पर एक भी आवेदन का न आना इस बात का प्रमाण है कि विभाग की कंगाली किस स्तर पर जा पहॅुची है । 30 से लेकर 50 फीसद कम दर टेन्डर ले प्रतिस्पर्धा करने बाले ठेकेदार लगता है अब मुॅह माॅगी दरो पर भी काम करने लेने तैयार नहीे कारण लंबित भुगतानो का 2 2 बर्षो से भुगतान न हो पाना जब कि देखा जाये तो लोकनिर्माण राज्यमंत्री शिवपुरी जिले से ही आते है अगर लोगो कि माने तो 2 बर्ष पूर्व मंत्री के शासकीय बंगले को चमकाने बाले ठेकेदार भी दर दर भटक कर्जदारो से मुॅह छिपाते घूम रहै है । मगर इन हालातो का असर न तो सरकार पर है न ही विभाग पर देखना होगा कि अर्थ अभाव मे लोकनिर्माण का भटटा पूरी तरह बैठ जाता है या फिर आने बाले कुछ समय मे इसकी माली हालत मे कुछ सुधार आता है । 

जीवन दायनी की सुध से सुधरेगे , जीव जगत के हालात

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सत्ता के सर्वोच्य शिखर से स्वराज के साथ सुराज की बात  पुरूषार्थ को सहज सुलभ मंचो की जरूरत  व्ही. एस. भुल्ले  16 दिसम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  ऐतिहासिक मौके पर सत्ता के सर्वोच्य शिखर से स्वराज के साथ सुराज की बात उन महान संस्कारो के लिये सुखद बात हो सकती है मगर यह तभी संभव है जब पुरूषार्थ के लिये सहज सुलभ मंच नसीब होगे । जीवनदायनी की कीर्ति उसके त्याग पर एक लम्बे अंतराल के बात संज्ञान भी सियासत और सत्ता सहित उन जीवनो के लिये भी सौभाग्य की बात है जो अतिज्ञान या अज्ञानता बस अपने मूल को भूल उनमे ही मटठा डालने के कार्य मे जुटे थे निश्चित ही प्रधान मंत्री जी के संकल्प से उस महान राष्ट्र् मे उम्मीद की किरण का रोशनी मे तब्दील होना स्वभाविक है जो बर्षो से अपने उदय होने के इन्तजार मे थी । बाबा भोले नाथ माॅ गंगा के तट से प्रधानमंत्री के संकल्प मे गौवंश के कीर्ति उनके कल्याण महत्वता की बात तथा जितना जरूरी स्वराज उतना ही जरूरी सुराज का शंखनाद इस बात का धोतक है कि अगर टाॅप टू बाॅटम निष्ठापूर्ण कार्य हुआ तो कोई कारण नही जो समृद्ध भूभाग एक मर्तवा फिर से समुचे विश्व मे अपनी की...

सृष्टिगत , सुसंस्कृत , आधार पर अंकुश अस्तित्व से द्रोह

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अनवरत संघर्ष को बुलावा देता समृद्ध जीवन  व्ही. एस. भुल्ले  11 दिसंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  इसमे किसी को संदेह नही होना चाहिए कि कर जीव अपने अस्तित्व अनुसार उसे प्राप्त सामर्थ के साथ जीव जगत का भाग बनता है और अपने कर्म अनुसार अपना आधार सुनिश्चित करता है जो आजाद स्वच्छंद होने साथ के मूल से जुड़ा रहता है जब बात सर्बकल्याण की आती है तो उसे सृष्टि के सृजन सिद्धान्त मे आस्था रख उन संस्कारो मे स्वयं को ढालना होता है जो उसके जीवन की सृजन या़त्रा को सार्थक सफल बनाने और उसके बहुमूल्य योगदान को सिद्ध करने में सहायक होते है । मगर कहते है जब सृष्टिगत आधार पर ही अकुंश हो तो फिर वह कैसै स्वयं और सर्बकल्याण के अस्तित्व सुरक्षित संरक्षित करने मे सिद्ध होगा आज यह जीवन मे सबसे बड़ा सबाल है । अब इस पर चर्चा हो या न हो वह अलग विषय है मगर जिस तरह से समृद्ध जीवन के मार्ग मे अंकुश है वह किसी द्रोह से कम नही फिर वह प्रकृति जन्य तत्व हो या फिर जीवन ये अलग बात है कि प्रकृति जन्य तत्व तो जीवन के किसी भी द्रोह को निस्तनावूत कर अपना संतुलन बना लेती है मगर जीव जगत खासकर मानव जगत का क्या ? जो अपने ...

अधांधुद दोहन के संघर्ष में अर्थ नही मूल गबाॅंने का दर्द

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सत्ता सियासत भले ही स्वयं को दोष सिद्ध न समझे मगर सत्य से बचना इतना आसान भी नही  जीवन की कीर्ति ही उसके यश , पहचान का प्रतीक रही है  व्ही. एस. भुल्ले  10 दिसम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  कभी ज्ञान , संस्कार , विद्या सबसे बढ़ा धन मानव जीवन में सिद्ध रहै है । कई पुरानी कहावते भी हमारी संस्कृति में समय वे समय प्रमाण देती रही है । मगर युग काल परिस्थिति अनुसार उनका सार भी बदलता रहा है क्योकि इतिहास का अस्तित्व इस लिये होता है कि जीवन उससे सीख लेकर वह अनुभव हासिल कर सके जिससे बर्तमान बगैर कोई भूल किये सुधार के साथ आगे की पीढ़ियो का मार्ग समृद्ध जीवन के लिसे प्रस्त कर सके । इतिहास बताता है कि समय काल परिस्थिति अनुसार अर्थ का मूल उसका स्वरूप कैसा रहा है । और मानव धर्म जीवन धर्म के मायने कैसै कैसै आगे बढ़े है किस जीवन को श्रेष्ठ और किस जीवन को दरिद्र निरूपित किया गया है । आज जब हम पूर्ण रूप से अर्थ युग के मुहाने पर है जहां नीति नैतिकता धर्म ज्ञान विद्या संस्कार मूल के दर्द से कराह रहै और दोहन का दर्द नासूर साबित हो रहा है ऐसे मे सत्ता सियासत पर सबाल उठना लाजमी है । वह इसलिये...

नैसर्गिक स्वभाव विरूध समृद्ध जीवन असंभव

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उदय अस्त जीवन का सत्य है , ज्ञान का प्रकाश अहंम व्ही. एस. भुल्ले  9 दिसम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  जीवन में समृद्ध जीवन ज्ञान का अभाव ही जीवन का बड़ा संकट सिद्ध होता है कर्म संस्कार उसके जीवन के सारथी मगर जिज्ञासु स्वभाव मानव जीवन , जीवन उत्कंठाओ भोग वृति के चलते उस भाव को छू ही नही पाता जिसे समृद्ध जीवन कहा गया है गहरी लालिमा के साथ उदय कब गहरी लालिमा से पूर्व अस्त हो जाता है जीवन समझ ही नही पाता मगर सत्य से इन्कार नही किया जा सकता उसकी स्वीकारोक्ति है जीवन का सत्य है कर्मभूमि के मैदान मे पुरूषार्थ करता जीवन कब सृजन मार्ग से दूर चला जाता है यह मानव जीवन समझ ही नही पाता । कारण प्रकृति मे सृजन मूल्य सिद्धान्तो से अनभिज्ञ रहना जो ध्यान ज्ञान और कर्मज्ञान से संभव है हर क्षण संज्ञान सूचक से लैस मानव जीवन कब भूल कर जाता है जब तक वह समझ सुन जान पाता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है । सृस्टि मे मौजूद जीव जगत के संरक्षण का भार कब मानव जीवन के कंधो से कम तर हो जाता है यह वह मेहसूस ही नही कर पाता जबकि प्रकृति में एक ही जीवन ऐसा होता है जिसको प्रकृति ने सबसे उत्कृष्ट सक्षम बनाया है...

हुनर के सहारे उॅची उड़ान की तैयारी , पंख फैलाता उडडयन मंत्रालय

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मीडिया के मंच से सिंधिया ने बताया खाका  9 दिसम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  जिस आशा अकांक्षा के साथ मोदी सरकार ने श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया को उडडयन मंत्रालय सौपा है लगता वह जल्द ही फलीभूत होती दिखाई दे तो किसी अतिसंयोक्ति नही होनी चाहिए क्योकि जिस तरह से सिंधिया ने मीडिया मंच पर उडडयन मंत्रालय की नई उड़ान का खाका देश के सामने रखा है अगर वह मूर्त रूप लेता है तो निश्चित ही वह अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के क्षैत्र मे दूर की कोणी साबित होगा यह सही है कि अगर उडडयन मंत्रालय हवाई कनेक्टे विटी को छोटे छोटे मार्गो से जोड़ सही दिशा देने मे सफल रहा तो इसमे दो राय नही कि केवल हवाई यात्रा सुलभ कराने बाला यह मंत्रालय सिर्फ सेवा प्रदाता के साथ ही कौशल विकास से छोटे छोटे सेवा उद्योग खड़े करने मे अग्रणी भूमिका मे होगा जिससे तरल मुद्रा प्रदाय के साथ तत्काल औपचारिक अनौपचारिक रोजगार  उपलव्ध कराने बाला प्लेटफाॅर्म साबित होगा और लोगो के बीच समृद्धि का आधार भी बनेगा । देखना होगा सिंधिया का यह सपना और प्रधानमंत्री के सपनो का अक्स कब आकार लेता है । 

अदम्य सैनिक का असमय गमन , नमन

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  वीरेन्द्र शर्मा  9 दिसम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  निश्चित ही आज देश ने अपना बड़ा योद्धा एक अकल्पनीय दुर्घटना मे खोया है जो एक बड़ी छति है देश शोक मग्न है आज जिस कीर्ति को एक अदम्य सैनिक , सी डी एस के रूप में बिपिन रावत ने प्राप्त किया है वह उनके शानदार सैनिक जीवन , सेना प्रमुख , उनके सार्बजनिक जीवन की उत्कृष्ट सर्वोच्य कृति है जिसे देश हमेशा याद रखेगा और समय वे समय उनकी कृतज्ञता को सराहा जायेगा । निश्चित ही दुखद घड़ी है , समय है ईश्वर उनकी पुण्य आत्मा को आत्मसात करे ऐसी हमारी प्रार्थना है । 

अस्तित्व से जूझता आधार , अस्थांचल की ओर वैचारिक आस्था आकांक्षा

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कैडर बैस दल मे बढ़ता घमासान  वीरेन्द्र शर्मा  9 दिसम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  जिन दलो मे पानी पानी पी पी कर मंच सभाओ में कार्यकर्ता सर्वोच्य , संगठन सर्वोच्य के नारे बुलंद किये जाते है ऐसे ही दलो में आजकल अस्तित्व आधार को लेकर जबरदस्त घमासान छिड़ा है ये अलग बात है कि इसकी आहट भले ही किसी हो या न हो मगर इतना तो तय है कि सुनामी से पहले जो शांति ऐसे दलो मे नजर आ रही है वह बढ़ी ही डराने बाली है । क्योकि जिस लोकतांत्रिक आधार पर आज जिन दलो का अस्तित्व है शायद वह आधार आतंरिेक अस्तित्व आधार के संकट से जूझ रहै है । लोकतांत्रिक प्रक्रिया से दूर दलो की शोभा बढते पद सौपान जिस तरह से बढ़ दशा और दिशा तय करने में लगे है । या फिर कृपा से प्राप्त पद कार्यकर्ता की उपेक्षा कर रहै है उससे आशा आकांक्षा भले ही मायूस हो मगर उनका वैचारिक आधार अभी भी उनकी बैढ़िया बन उन्है वह सब कुछ करने से रोक देते है जिसके लिये आज सियासत खूखार मानी जाती है । अगर यो कहै कि म.प्र. देश का एक ऐसा प्रदेश है जहां लम्बे अर्से से दो ही दलो का बोलबाला रहा है मगर इस दंश से एक भी अछूता नही मगर सबसे बढ़ी चिन्ता तो उ...

सर्बकल्याण का अवसर गबांते सामर्थ पुरूषार्थ , बांझ होती कीर्ति

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बर्तमान में डूबे भूत , भबिष्य के आगे विकट संकट  अहंम अहंकार के आगे कलंकित होती मानवता  व्ही. एस. भुल्ले  7 दिसंम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  किसी गीतकार विद्या विद्यवान ने सच ही लिखा है और किसी महापुरूष ने बखूबी गाया भी गाया भी है । विद्यना तेरे लेख निराले समझ न आते है । युग युग के साथी बिछड़े जाते है । हालाकि यह भावार्थ उन लोगो के कतई श्रावण योग्य या पठनीय नही हो सकते है जिनकी आस्था स्व कल्याण मे सर्बोपरि हो जो मानव जीवन में भय ग्रस्त हो , जिनके जीवन की समृद्धि का आधार सिर्फ और सिर्फ अत्यअधिक संग्रहण या समुचि जीवन व्यवस्था स्व संचालित कर समझ अनुसार कल्याण सेवा का भाव हो जो सृजन मे स्वयं की भूमिका सिर्फ स्वयं के सामथ्र्य से प्राप्त उस शक्ति संसाधनो को स्वयं के पुरूषार्थ का परिषाद मान भोगना और बांटना में विश्वास रखता है जबकि इतिहास भरा पढ़ा है ऐसे उदाहरणो से ऐसा लोग ने पूर्व मे किया और सोचा भी मगर बर्तमान इस बात का प्रमाण है कि ऐसे लोगो के नाम तो सुबिधा अनुसार लेने बाले है मगर पानी देने बाले उनकी कीर्ति को जिन्दा रखने बाले शायद ही मौजूद हो जिन लोगो ने भी मानव...

गैंग गिरोहबन्द सियासत में गैंगबार के आसार

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गोलबन्दी को मजबूत करते सियासी सरगना  खबरियो पर टिका भबिष्य का आधार  वीरेन्द्र शर्मा  2 दिसम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  कहते है किसी भी लोकतंत्र का सियासी आधार भले ही वैचारिक होने के साथ संगठनात्मक हो और जबाबदेही भी सामूहिक हो मगर कहते है परिबर्तन ही प्रकृति का नियम है सो अगर अब लोकतांत्रिक सियासत का आधार गैंग गिरोहबन्दी की ओर अग्रसर है तो इसमे किसी को कोई संदेह या अतिसंयोक्ति नही होना चाहिए । शब्दो का उल्लेख अप्रिय हो सकता है मगर सियासत का सच अब यही शेष दिख रहा है । जहां नीति मूल्य सिद्धांतो से इतर सियासी शक्ति हासिल करने वह सब कुछ देखने सुनने में आता है जो समृद्ध सियासत मे मनाही है मगर अपने अपने अस्तित्व को भयाग्रस्त सियासी लोगो की मजबूरी यह है कि वह सियासी जीवन मे कोई रिस्क नही लेना चाहते जिससे उनके भबिष्य को कोई खतरा हो उनकी सियासत को कोई जोखिम हो इसलिये यश मेन से लेकर ऐसे लोगो को सियासत में अधिक तरजीह मिल रही है जो धन जन बल जुटाने मे अधिक सक्षम और कारागार हो जिनके पास ऐड़ी से लेकर चोटी तक की खबर रखने बालो का नेटवर्क हो फिर भले ही उनकी सेवा कल्याण कोई आस्था हो...

गैंग गिरोहबंन्दी में बिलखते सरोकार

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आधार खोते मूल्य सिद्धान्त  सत्य स्वार्थ के संघर्ष मे , सृजन हुआ बांझ  व्ही. एस. भुल्ले  1 दिसम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  सत्य के अनुयायी समय अनुसार आज भले ही संख्या में कम हो और स्वार्थ का कांरबा भरा पढ़ा हो मगर इस संघर्ष मे जिस तरह से सृजन बांझ घोषित होने पर बैबस मजबूर वह बड़ी ही दुखद बात और सज्जन जनो को चिन्ता का विषय भी मगर जिस तरह से मानव जीवन मे गैंग गिरोहबन्दी ने अपनी पैठ जमायी है वह समृद्ध जीवन के लिये शुभ संकेत नही । मगर आज का सत्य यही है । जिसे अस्वीकार कर पाना किसी भी श्रेष्ठजन के लिये संभव नही । मगर कहते है नियती को कौन टाल सकता है । ऐसा नही कि ऐसी स्थति मानव जीवन सृजन में पहली मर्तवा बनी हो बल्कि इसे पूर्व अनादिकाल से ऐसी स्थतिया बनती बिगड़ती रही है क्योकि दुर्जनो के लिये बर्तमान श्रेयकर तो सज्जनो के लिये भूत बर्तमान भबिष्य की उनके कर्म मे प्रधानता रही है जिसके लिये ऐसे महापुरूष आज भी जाने जाते उन महा मानवो को श्रद्धा पूर्वक मानव जीवन आज भी याद करता है । मौजूद मानव जीवन मे हो रहै जीवन मूल्य सिद्धांतो उपेक्षा यह समझने काॅफी है कि आज हम बैबजह बहुत...