सजृन में सर्बकल्याण ही मानव की श्रेष्ठतम कृति
जीवन की श्रेष्ठतम कृति को कलंकित करता मानव स्वभाव लज्जित होती विरासत और उत्तराधिकारी व्ही. एस. भुल्ले 30 दिसंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. अगर इतिहास धर्मग्रन्थो की माने तो न जाने कितने जन्मो के उपरान्त मानव को मानव जीवन प्राप्त होता है । जिसे कभी सर्बकल्याण में समर्पित कर मानव स्वयं पर गर्व और गौरव मेहसूस करता था मगर आज यक्ष सबाल यह है कि आखिर अपने कर्म से समृद्ध सृजन और सृष्टि सिद्धान्तो मे उच्च आस्था रखने बाला वह मानव विरासत मे मिली उस समृद्ध कीर्ति समृद्धि को कैसै लज्जित , कलंकित कर सकता है । जबकि सृष्टि मे सर्बकल्याण को समर्पित मानव की त्याग तपस्या उसका जीवन को उत्कृष्तम योगदान जिसने उसे पूज्यनीय सराहनीय सम्माननीय स्थान दिलाया कारण हजारो यौनियो के पश्चात मानव जीवन का सर्बकल्याण मे समर्पण उसका वह विश्वास योगदान जो मानव जीवन की उपायदेयता सिद्ध करता है । निश्चत ही यह उस पीढ़ी का सर्वोच्यतम योगदान ही कहा जायेगा जिसने जीवन के अर्थ उसकी उपायदेयता सिद्ध करने मे स्वयं जीवन का योगदान दिया और जीवन की समृद्धि के लिये एक से बढ़ कर एक कुर्बानी दी और मानव जीवन...