Posts

Showing posts from May, 2019

सेवा सुविधा के नाम मनमाने ढंग से धन उगाही अड्डे बनते एन.एच.आई टोल सत्ता के अहंकार में कलफती सेवा, सुविधा, लोकतंत्र

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। देश में सेवा, सुविधा, जनकल्याण यूं तो इतना बड़ा ब्लैक हाॅल है। जनधन को ठिये ठिकाने लगाने का जिसका दुरूपयोग सत्तायें राष्ट्र-जन हित के नाम जब-तब करती रही है। मगर मनमाने निर्णयों की आड़ में प्रकाशित कुछ गजट नोटिफिकेशनों पर नजर डाले जो साफ हो जाता है कि जनसेवा, सुविधा के नाम कैसे लोकतांत्रिक मूल्यों की व आमजन के अधिकारों की हत्या होती है वह एन.एच.ए.आई द्वारा निर्मित सड़कों और उन पर बने टोल टेक्स पर आय दिन देखी जा सकती है। भले ही एन.एच.एच.आई द्वारा स्वयं के खर्चे या पी.पी मोड पर सड़कों का निर्माण देश भर में किया जा रहा हो।  अभी हालिया मामला आगरा-मुम्बई राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 3 पर बने टोल टेक्सों पर देखा जा सकता है। लगभग 300 कि.मी. लम्बे राष्ट्रीय राजमार्ग पर 5 टोल है। जहां रात्रि मेे सम्भ्रान्त लोगों की यात्रा बाधित कर उन्हें अभद्र भाषा शैली से अपमानित करने से लोग नहीं चूकते। उदाहरण बतौर कई टोलो के कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस प्रकरण तक दर्ज मारपीट के मामले सामने आये है। उल्लेखनीय बात तो यह है कि जो सुविधायें सड़क निर्माण प्रोजक्ट में सन्नहित है...

लोकतंत्र का जनादेश विविधता से भरे देश, समाज, परिवार, व्यक्तियों का आदेश

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।    जब अप्रत्याशित परिणामों की प्रमाणिकता जीत हार के रूप में सामने होती है। तो उनकी सार्थकता, सफलता समझ-बूझ पर सवाल होना स्वभाविक है। मगर समझ की बात तो तब है जब ऐसे परिणामों की समीक्षा निष्ठापूर्ण और ईमानदारी के साथ की जाये। इस महान भूभाग पर अप्रत्याशित परिणाम आना कोई नई बात नहीं फिर क्षेत्र जो भी रहा हो। बल्कि यह महान भूभाग ऐसे अप्रत्याशित परिणामों का हमेशा से साक्षी रहा है जिसे हम ईश्वरीय कृपा या भाग्य सहित चमत्कारिक परिणाम कहते रहे है। विविधता किसी भूभाग ही नहीं, समाज, परिवार, व्यक्तियों के अन्दर भी होती है फिर व्यवस्थायें जो भी रही हो, उनका सच भी परिणामों के रूप में साक्षी रहा है। मगर स्वयं की सफलता, सिद्धता, सार्थकता साबित करने में वहीं प्राणी मात्र सिद्ध होता है जो सजग रह, सेवा, सर्वकल्याण के मार्ग को आत्मसात कर स्वयं के पुरूषार्थ के बल स्वयं को सिद्ध करता है।   ये अलग बात है कि कभी कभी सिद्धता होने से पूर्ण सार्थकता सिद्ध न हो। मगर सजग, सेवा, कल्याण और पुरूषार्थ का मार्ग बन्द नहीं होना चाहिए। यहीं सृजन में जीवन के उच्चतम...

आधात्म का इतिहास गवाह है कि सिद्धता के लिए वर्ष, सदी, युग नहीं, बल्कि कुछ पल क्षण ही काफी रहे है समृद्धि में समझ, सम्मान स्वाभिमान अहम

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।    भारतवर्ष वह महान भूभाग है जहां विलक्षण प्रतिभायें संपदायें जिसकी कौख से समय-समय पर जन्म ले, अपना सामर्थ सिद्ध साबित करती रही है। यह 20-21वी सदी के पूर्व व भविष्य में आने वाले समय का सच है। सच यह भी है कि यह महान भूभाग संपदा, सामर्थ, प्रतिभाओं का मोहताज न तो तब था न ही अब और न ही भविष्य में रहने वाला है।  मगर यह तब तक असंभव जब तक कि इस महान भूभाग की महान शिक्षा, संस्कृति पर लगे कलंक को हम नहीं मिटा लेते और जब तक हम अपने, विद्या, विद्यवान, प्रतिभाओं को सिद्ध नहीं कर लेते। यकीनन तौर पर हमें इस सत्य को स्वीकारने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए कि हम तब भी समृद्ध, खुशहाल थे आज भी है और भविष्य में भी रहेगें। मगर इसकी सिद्धता तभी संभव है जब इस महान भूभाग पर मौजूद सत्तायें, सभासद संभायें अपनी अमूल्य संपदा, प्रतिभा, विधा, विद्ववानों को उचित सम्मान के साथ उनके स्वाभिमान की रक्षा करे। क्योंकि विज्ञान अध्यात्म का मोहताज रहा है, न कि अध्यात्म विज्ञान का और हमारी विरासत की खूबसूरती अध्यात्म और विज्ञान का ही सम्मिश्रण है तथा हमारा सामर्थ, ...

गौ सम्बर्धन की प्रभावी रणनीत तैयार, म.प्र. में 927 गौशालायें शुरू

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. काॅग्रेस सरकार में गौ-संरक्षण सम्बर्धन नीति के रणनीतकार भले ही परदे के पीछे रह गौशाला संचालन की प्रभावी रणनीत तैयार कर सरकार का प्रस्ताव भारत सरकार को भेज चुके हो। मगर फिलहाल श्रम आधारित लगभग 1000 गौशालाओं के विरूद्ध 927 गौशालायें म.प्र. की कमलनाथ सरकार शुरू कर चुकी है। इतना ही नहीं श्रद्धा, मुद्रा आधारित गौशालायें भी म.प्र. में केन्द्र सरकार से स्वीकृति मिलते ही शुरू की जा सकेगीं। जहां श्रद्धा आधारित गौशालाओं का आधार गोकुल ग्राम मिशन के तहत होगा।  वहीं इसके प्रबन्धन का आधार शास्त्र देवीस्कन्द, पुराण आधारित होगा। तो वहीं मुद्रा आधारित गौशालाओं के लिए कम्पनियों को प्रोत्साहित कर उन्हें मूर्तरूप दिया जायेगा। देखना होगा कि कमलनाथ सरकार कब तक इन गौशालाओं को मूर्तरूप दे पाती है। जिसका वचन उन्होंने अपने चुनावी वचन पत्र में दिया था। 

विरासत से अनभिज्ञ पुरूषार्थ को मोहताज, समर्थ, समृद्ध कौम पर कायरता का कलंक शर्मनाक

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। उजड़ते खुशहाल समृद्ध भूभाग पर हार मातम जीत का जश्न कोई नई बात नहीं, हजारों सेकड़ों वर्ष का इतिहास साक्षी नहीं, गवाह है। ऐसे में इतिहास और स्वयं की समृद्ध, खुशहाल विरासत से समझने वाली बात यह है। कहते है मुद्रा अर्थशास्त्र की धुरी तो शिक्षा से सर्वांगीण विकास, सृजन में सुरक्षित, सम्र्बधित रहता है। और यह भी सच है कि विद्या, विद्यवान किसी भू-भाग विशेष के न होकर समस्त जीव, जगत, मानव, कल्याण के मोहताज होते और सत्य को साक्षी मान उसमें आस्था रखने वाले।  मगर कहते है जब विद्या, विद्यवानों की विधा सुरक्षा, संरक्षण के अभाव में बैवस मायूस हो और मातृ भूमि की रिणी तो सत्य के मायने बदलते देर नहीं लगती। शायद लार्ड मैकाले ने भी 1836 के लगभग वहीं किया जो उसका राष्ट्र धर्म था। मगर अफसोस कि हम राष्ट्र की आजादी के लिए तो लोगों को जागृत कर पाये। मगर सुसंस्कृत, समृद्ध, खुशहाल जीवन के लिए लोगों को तैयार नहीं कर पाये।  जो निस्वार्थ, स्वार्थवत सत्ताओं, विद्या, विद्यवानों का कत्र्तव्य भी था और जबावदेही भी मगर हम हमेशा ही आजाद भारत सहित इतिहास में अक्षम असफल रह...

काॅग्रेस देशांटन का वक्त सेवा कल्याण में पुरूषार्थ ही साबित करेगा सिद्धता

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। यह बात तो काॅग्रेस को 2014 में समझ स्वयं की सिद्धता साबित करने की शुरूआत कर लेनी चाहिए थी कि खुला सम्पर्क, संवाद, नये शुभचिन्तक सहयोगियों की सीधी तलाश देश भ्रमण से ही संभव ही। मगर बफादारी, चापलूसी के विष और जनाधार का आवरण ओढ़ संगठन में मौजूद विष कन्या रूपी लोगों ने ऐसा होने नहीं दिया। जो एक महान विचारधारा के लिए शर्मनाक भी होना चाहिए और दर्दनाक भी।  मगर कहते है कि देर आये दुरूस्त आये 2019 में मिली करारी हार के चलते अब काॅग्रेस अध्यक्ष को अपना इस्तीफा वर्कींग कमेटी को सौंप देशांटन के लिए निकल पड़ना चाहिए। ज्ञात हो कि काॅग्रेस विचारधारा से जुड़े एवं काॅ्रग्रेस विचार को संरक्षित करने वाले राष्ट्र भक्त एवं महात्मा गांधी, सुभाषचन्द्रबोस, लालालाचपतराय, गोपालकृष्ण गोखले, बालगंगाधर तिलक सहित पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू, स्व. इन्दिरा गांधी, स्व. राजीव गांधी ने भी देशांटन कर काॅग्रेस को मजबूत कर, राष्ट्र-सेवा जनसेवा का आधार तैयार किया था। ठीक उसी प्रकार राहुल गांधी को भी एक काॅग्रेस नेता और गांधी परिवार के उतराधिकारी होने के नाते अपनी क्...

धन, दधिचियो का नंगा नाच अक्षम्य

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से पशु-पक्षी, जीव, जन्तु ही नहीं, मानव को दांव पर लगा मानवता को कलंकित करने वालो की फौज इस महान भूभाग पर अज्ञानता निहित स्वार्थ बस बढ़ रही है वह शर्मनाक भी है और दर्दनाक भी। काश हम अपनी महान शिक्षा अध्यात्म, सभ्यता, संस्कृति, संस्कारों को सुरक्षित रख पाये। मगर सबसे बड़े दर्द और शर्म की बात तो यह है कि हम अपने द्वारा निर्धारित सत्ता में अपने विद्या, विद्ववान प्रतिभाओं को आवश्यक अवसर नहीं जुटा पाये।  यह कटू सच है कि अगर हम अपने विधा, विद्ववान, प्रतिभाओं को संरक्षण दे, उन्हें उचित अवसर मुहैया करा पाये तो प्रतिभायें विदेशी भूभाग की मोहताज न होगी। क्योंकि हम उचित शिक्षा के आभाव में आज हम हर क्षेत्र में निपुण प्रबन्धक और नौकर तथा मस्तक विहीन फौज तैयार कर रहे है। यह हमारी सबसे बड़ी अक्षमता, असफलता है जो आज नहीं तो कल हमारी असफलता, अक्षमता सिद्ध करने काफी है। काश इस सच को हम समझ पाये अपने ही हाथों अपनी महान प्रतिभाओं का दमन इससे बड़ा दंश किसी भी मानवीय सभ्यता, जीव-जगत के लिए कोई हो नहीं सकता। जय स्वराज

महान समृद्ध, राष्ट्र-जन के पुरूषार्थ प्रमाणिकता का दिन 23 मई

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 17वीं लोकसभा के लिये आशा-आकांक्षायें जो भी हो इस महान समृद्ध भू-भाग राष्ट्र-जन की। मगर सत्ता हासिल करने सक्रिय दल, संगठन एवं स्वार्थवत व्यक्ति, समूहों के मुद्दे जो भी रहे हो। लेकिन 7 चरण में 542 संसदीय सीटों के हुये सम्पन्न चुनावों का परिणाम निसंदेह 23 मई को समूचे राष्ट्र के सामने होगा। मगर जिज्ञासा यह है कि भोले-भाले शान्त प्रिय बैवस मायूस महान विरासत संस्कृति को साक्षी मान क्या फैसला आने वाला है यह फिलहाल समय का तय करेगा है।  जबकि सत्य यह है कि इस महान भूभाग पर न तो कभी कोई समस्या रही, न ही इस भूभाग पर निवासरत लोग कभी कत्र्तव्य पुरूषार्थ विहीन रहे। जिन्होंने न तो कभी अपनी सभ्यता, संस्कृति, संस्कारों को छोड़ा, न ही कभी अपने कत्र्तव्यों से मुंह मोड़ा।  ये अलग बात है कि स्वार्थवत सत्ताओं के रहते अपनी महान शिक्षा को अवश्य खोया है। मगर कहते है खून बोलता है इसलिये वंशानुगत गुणों ने न तो इस महान भू-भाग राष्ट्र-जन को कभी निराश किया, न ही कभी अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य जबावदेहियों को लाख मुश्किलों के बावजूद दागदार होने दिया। यहीं हम महान ...

पुरूषार्थ प्रमाणिकता का परिणाम 2019

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सबकुछ गवाने के कगार पर जा पहुंचे एक महान राष्ट्र में प्रमाणिक परिणाम इस बात के गवाह होगें कि हमारी सृष्टि, सृजन उन्मुख सिविक सेन्स आज भी जिन्दा है, कारण जो भी रहे हो। बैसे भी कहते है जिस राज, सत्ता, समाज, संगठन का आधार सटीक सूचनाओं संघर्षो के आधार पर कमजोर हो उसका पतन सुनिश्चित होता है।  कहते है जिस व्यक्ति, परिवार, समाज का मूल आधार प्रकृति विरूद्ध, प्रभावित हो। उसका पतन भी सुनिश्चित होता है। दुर्भाग्य बस आज यह स्थितियां हमारे बीच मौजूद है। क्योंकि हमने हमारा महान अध्यात्म, प्रतिभा, शिक्षा को ही नहीं, अपने जमीर को स्वार्थवत रह अज्ञानता बस धन लालसा में दांव पर लगा रखा है या कलंकित किया है जिससे मुक्ति ही हमारा धर्म, कर्म और मानवता जीव, जगत के प्रति निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य होना चाहिए जो सृष्टि सम्वत ही नहीं हर जीव के स्वच्छंद, समृद्ध, खुशहाल जीवन का मूल आधार है।  जय स्वराज 

सत्य की जीत सुनिश्चित सेवा, सत्याग्रह, विकास कल्याण पर सवाल सत्य से विमुख सियासत, पर संशय स्वभाविक

Image
वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। एम्जेक्ट पोल के आंकड़े जो भी हो कहे और ज्योतिष्यिों की भविष्यवाणी जो भी हो। मगर वह निरर्थक नहीं हो सकती। सियासत में अपवाद होना स्वभाविक है। उन्हीं में से एक शिवपुरी गुना संसदीय क्षेत्र का होना एक सत्य है। मगर इस क्षेत्र का सत्य यह है कि इस क्षेत्र के लोग भावुक होने के साथ काॅफी समझ बूझ वाले है। फिर सियासी लोगों की समझ जो भी हो। मगर कहते है कि अगर लोगों में उनके नैसर्गिक, गुण, कत्र्तव्य, जबावदेहियों सुरक्षा संरक्षण का भाव न हो तो वह इतिहास बदलने ही नहीं, नये इतिहास के साथ सत्य के साक्षी होने के लिए भी काफी है। फिर उसका आधार प्रारारव्ध हो या विरासत के साथ वर्तमान निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन जबावदेही। इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि सत्य और समय न तो किसी सियासत का मोहताज रहा है न ही सत्याग्रह जैसे आग्रह के लिए वह बैवस क्योंकि सत्य का आग्रह ही सत्याग्रह है और इसका परिणाम भी सत्य होता है। जय स्वराज

जनसेवक रहना मेरा अन्तिम लक्ष्य- सिंधिया

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अशोकनगर, गुना-शिवपुरी की जनता सेवा मैंने अभी तक निष्ठापूर्ण ढंग से की है और भविष्य में भी करता रहूंगा। अगर जनता चाहेगी तो मैं जीवन पर्यन्त जनसेवा जुटा रहूंगा। क्योंकि मैं जनसेवा में हूं और मैं अन्तिम सांस तक जनसेवा ही और कल्याण के मार्ग पर चलूंगा। क्योंकि मेरा सार्वजनिक जीवन में राजनीति नहीं जन सेवा में विश्वास है और जीवन में यहीं मेरा अन्तिम लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि विगत वर्षो में अपने क्षेत्र में जो कुछ भी मैं कर सका वह जनता का स्नेह आर्शीवाद और उसकी ताकत से ही चाहे वह ग्वालियर-देवास फाॅरलेन, रेल, मेडीकल, इन्जीनियरिंग, पाॅलोटेकनिक काॅलेज, खेल परिसर, पेयजल, बिजली तथा रोजगार के लिए प्रतिबंधित 5 पत्थरों खदानों की स्वीकृति प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना और यह क्रम विकास का सेवा कल्याण का इसी तरह जारी रहेगा। जब उनसे पूछा गया कि सवा घन्टे की निद्रा, सेवा कल्याण के साथ मूल्य सिद्धान्तों की राजनीति कैसे कर पाते है। इस पर उन्होंने कहा कि मैं राजनीति नहीं जनसेवा करता हूं और जनता के आर्शीवाद स्नेह और कृपा से यह कर पाता। 

उन्माद नहीं, सृजन से संभव सर्वकल्याण सत्ता के लिए, राष्ट्र सम्मान, संस्कारों का तिरस्कार घातक

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सत्ता के लिए जिस तरह का उन्माद राष्ट्र सम्मान, संस्कारों को तिलांजली दें, लोकतंत्र के महाकुंभ में अवतरित हुआ है वह भविष्य में शर्मनाक ही कहा जायेगा। क्योंकि सर्वकल्याण उन्माद से नहीं सृजन से संभव है यह बात आज सभी के लिये समझने वाली होना चाहिए। सियासत में वैचारिक मतभेद होना स्वभाविक प्रक्रिया है। मगर जब वह मन भेद में तब्दील होने आतुर हो। जिसमें राष्ट्र का मान-सम्मान स्वाभिमान, उसके संस्कार दम तोड़ने पर मजबूर हो, ऐसी सियासत कभी कल्याणकारी नहीं हो सकती।  फैसला अन्तिम दो चरण के चुनाव में आम मतदाता को लेना होता है। क्योंकि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है।

भोले-भाले भावुक देश में, सत्ता उन्माद

Image
व्ही.एस.भुल्ले यूं तो इतिहास गवाह है आज उन लोगों के बीच जो एक महान भू-भाग समृद्ध, खुशहाल राष्ट्र की विरासत को मूर्ख समझ सत्ता हासिल करने उन्माद में, स्वार्थवत रह सेवा कल्याण के नाम स्वयं को समृद्ध, सार्थक, सक्षम सिद्ध करना चाहते है। जो समय वे समय स्वयं को सार्थक, सफल सिद्ध कर, महान बनने का असफल प्रयास करते है।  कहते है कि कभी न कभी इतिहास स्वयं को अवश्य दौहराता है। समय-समय पर व्यवस्थायें भी बदली और संचालनकत्र्ताओं का स्वरूप भी अगर कुछ नहीं बदला तो वह सत्ता हासिल कर, सर्वकल्याण का तरीका जो न तो तब सफल रहा, न आज सार्थक, सफल नजर आता है। कारण सत्य के प्रति आस्था का आभाव और स्वार्थवत उन्मादी व्यक्ति, विचारों का समय वे समय असफल आभास। बहरहाल जो भी हो भूत, वर्तमान, भविष्य जैसा भी हो। मगर भोले-भाले भावुक लोगों के बीच बैवसी, मायूसी रहने के बावजूद वह महान कौम न तो तब कत्र्तव्य विमुख हुई और न अब होने वाली है। इसलिए हमें सत्य को साक्षी मान, स्वयं को सफल, सार्थक सिद्ध होने का इन्तजार निष्ठापूर्ण सृजन के साथ अवश्य नैसर्गिक गुण अहिंसा भाईचारा प्रेम के माध्यम से अवश्य करना चाहिए। जिसके वर्तमान ह...

सभा में संस्कृति पर तो बोले, मगर संस्कारों पर नहीं

Image
वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। शिवपुरी। सर सियासत में सत्ता के लिए संस्कारों का चीहरण हो रहा है आप संत भी है और सत्ता प्रमुख भी, क्या संदेश देना चाहेगें। विलेज टाइम्स के सवाल पर हवाई पट्टी पर कुछ न बोल बाबा आगे बढ़ गये और चैपर में बैठ अगले पड़ाव की ओर रवानगी डाले गये।  यूं तो उ.प्र. के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी, शिवपुरी म.प्र. में भाजपा प्रत्याशी के.पी. यादव के समर्थन में सभा करने आये थे। जहां वह लगभग 3 घन्टे की देरी से पहुंचे। इससे पूर्व शिवपुरी हवाई पट्टी पर योगी कि सुरक्षा के लिए उ.प्र. से आये सुरक्षा अधिकारी, पर्याप्त वाहन व जेमर गाड़ी न उपलब्ध कराने की चर्चा करते देखे गये। बहरहाल कुम्भ जैसे धार्मिक सांस्कृतिक आयोजन सहित मोदी सरकार की उपलब्धि गिनाते तो सुने गये, तो वहीं रिण माफी व बिजली कटौती पर म.प्र. सरकार पर तंज कसते रहे। ज्ञात हो कि योगी की शिवपुरी में लगभग एक घन्टे की यात्रा पर फिलहाल चर्चाऐं सरगर्म है। मगर जो सवाल उन्होंने शहजादी शब्द को मंच पर बोल उछाला उस पर फिलहाल काॅग्रेस की ओर से भले ही कोई प्रतिक्रिया न हो। मगर एक सत्ता प्रमुख और संत की संस्कारों ...

अजीब है लोकतंत्र की महासभा और लोकतंत्र के किरदार

Image
व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की सभा में जबावदेह सभासद तर्क, कुतर्क, संस्कार, संस्कृति को तिलांजली दें, सत्ता रस को हासिल करने गोलबन्द है यह इस महान लोकतंत्र के महासभा के लिए घातक ही नहीं, शर्मनाक भी कहा जायेगा। आज जब देश के करोड़ों-करोड़ मतदाता मतदान के अंतिम चरण के मुहाने पर है। संवैधानिक, संस्थायें निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के मार्ग पर, ऐसे में अघोषित तंत्र की कत्र्तव्यनिष्ठा देखते ही बनती है। जो एक ऐसी सभा के साक्षी या सहयोगी बन उस संस्कृति और संस्कारों के चीरहरण के साक्षी या सहयोगी है और मौन रह या तो ठहाके लगा रहे है और अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे है। ऐसे सभासद या सहयोगियों को न तो कभी इतिहास माफ करेगा, न ही इस महान भू-भाग पर इस राष्ट्र की महान विरासत के वंशजों के रूप में उन्हें जाना जायेगा। जो आने वाले समय में दर्दनाक भी होगा और शर्मानाक भी। जय स्वराज    

सत्ता के लिए संस्कारों का चीरहरण लोकतंत्र की सबसे बड़ी सभा में, सभासदो की चुप्पी शर्मनाक कर्म व धर्म युद्ध में तब्दील चुनावी महासंग्राम जीत, सच और सर्वकल्याण की होगी

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अगर इतिहास पर जायें तो, इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि इतिहास आज नहीं तो कल अवश्य स्वयं को दोहराता है। कहते है सृजन, सेवा कल्याण के लिए सत्तायें भी बदलती रही है और व्यवस्थायें नया रूप लेती रही है। मगर सत्य अनादिकाल से आज भी यथावत है। अगर आज सत्य के साक्षी रहते भी लोग भ्रमित होते है, तो यह उन लोगों का दुर्भाग्य कहा जायेगा। जो स्वयं के जीवन को समृद्ध, खुशहाल तथा सुनहरे सपने और सर्वकल्याण को साक्षी देखना चाहते है। मगर दुःख और दर्द तब होता है जब लोग सत्य साक्षी होने के बावजूद अपना मार्ग भटक लक्ष्य खो देते है।  सत्य यह है कि भूत, वर्तमान या भविष्य का आकलन जो भी हो। मगर तब न अब हम न तो अकूत संपदा आध्यात्म, प्रतिभाओं से बांझ थे न ही आज है। जरूरत आज उनके संरक्षण, सम्बर्धन की सच यह है कि हम पहले भी सशक्त समृद्ध, खुशहाल थे और आज भी है और हमारा महान भू-भाग भी वहीं है। मगर यह तभी संभव है जब व्यक्ति, परिवार और वैचाारिक उन्माद, अहम, अहंकार से निकल हम निष्ठापूर्ण अपने-अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन प्रमाणिक जबावदेही के साथ कर स्वयं को सार्थक, सफ...

कितना सफल होगा एक निष्ठा, सत्य और सत्याग्रह सवा घन्टे की निद्रा, दिनचर्या शुरू होते ही संवाद, सम्पर्क के साथ मूल्य सिद्धान्त, सेवा, विकास, कल्याण की सतत देर रात तक यात्रा

Image
वीरेन्द्र शर्मा    विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  सियासी संग्राम के दौरान कितनी सार्थक, सफल होगी यह तो आने वाला समय ही तय करेगा। मगर आज एक मजबूत सेवाभावी, कल्याणकारी लोकतंत्र का तकाजा है कि जब मतदान का दौर चल रहा है। ऐसे में आम मतदाता को सत्य से अवगत कराना हर जागरूक समझदार नागरिक का कत्र्तव्य होना चाहिए।  आज जब सियासत जीवन, मूल्य, सिद्धान्त, सेवा, कल्याण को दरकिनार कर, सत्ता को सर्वोच्च और अंतिम लक्ष्य मान, साम, नाम, दण्ड, भेद के सहारे सियासत जीत हासिल करना चाहती हो। ऐसे में अहम हो जाता है कि चुनावों में भाग्य आजमा रहे लोगों का आकलन। ऐसे में अगर निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के साथ सेवा, विकास, कल्याण को साक्षी मान, मत देने का पैमाना लोग समझ पाये तो निश्चित ही मौजूद लोगों का ही नहीं, आने वाली पीढ़ी का भी जीवन, समृद्ध, खुशहाल और सार्थक होगा। यह आम मतदाताओं को अपने क्षणिक निहित स्वार्थ छोड़ समझने वाली बात होनी चाहिए।

सेवा, कल्याण, संस्कारों को सार्थक करती अदभुत शख्सियत

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। लक्ष्य जब सर्वकल्याण हो, ऐसे में व्यक्तिगत उपेक्षा, पीढ़ा के कोई मायने नहीं रह जाते। क्योंकि सार्थक, सफल, सिद्ध जीवन में सत्य ही सर्वोपरि होता है। जिसकी सिद्धि ही सृजन, कत्र्तव्य निर्वहन की सर्वोच्च सार्थकता और प्रमाणिकता होती है। आज जब चुनावी दौर चल रहा है और 5 वर्ष के लिए लोकतंत्र में सरकार को चुना जाना है। ऐसे में अच्छे-सच्चे, सेवाभावी जनप्रतिनिधि चुने जाये यह आम बुजुर्ग, ुयुवाओं को समझने वाली बात होनी चाहिए। 

सृजन में जीव की सार्थकता ही, सृष्टि का मूल आधार यह महान भू-भाग न तो कभी विलक्षण प्रतिभाओं का मोहताज रहा, न ही इसका गर्भ प्रचूर संसाधनों के नाम वांझ

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  आज इस महान भू-भाग की सार्थकता, सिद्धि में सबसे बड़ी बाधा निहित स्वार्थ और अहम अहंकार है। हमारा अतीत गवाह है कि हम अपनी प्रतिभाओं, आध्यामितक, पुरूषार्थ के बल विश्व गुरू थे और है तथा रहेगें। काश इस महान विरासत के वंशज इस सत्य को समझ पाये तो यहीं हमारे स्वयं की सबसे बड़ी सार्थकता, सफलता और सिद्धता होगी।  देखा जाये तो इस महान भू-भाग पर शिक्षा, स्वास्थ, रोजगार कोई मुद्दा नहीं। जरूरत एक सार्थक पहल की है। जो हमारी बौद्धिक संपदा, प्रतिभा और पुरूषार्थ से संभव है और यह तभी संभव होगा कि जब सेवा, कल्याण से जुड़े लोग इस सत्य को समझ पाये। 

सियासी तूफान में अस्तित्व का संकट

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। देश के राष्ट्रीय दल सहित प्रादेशिक क्षेत्रीय दल अपने अपने मुद्दों को लेकर भले ही अपनी-अपनी जीत के लिए सजग रह, ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे हो। मगर भोले भाले भावुक लोगों के देश में सत्ता के लिए मचा कोहराम किसी से छिपा नहीं मगर सियासी दल है कि स्वर्ण रजीत रथो पर सवार भावनाओं की पताकाऐ फहरा सत्ता संग्राम में जुटे हैं। भले ही स्वार्थ स्वर्ण रजित रथो के तले आशा आकांक्षाएं दम तोड़ने पर मजबूर हो। मगर सत्ता हासिल करने मद में चूर लोगों को किसी की परवाह कहां ? जीवन मूल्य सिद्धांतों की चिन्ता पर रोटी सेकती सियासत को शायद यह अनुमान नहीं कि इस महान भूभाग की जनता बेबस मुफलिस मजबूर हो सकती है मगर कभी सत्य और स्वाभिमान से समझौता नहीं कर सकती। यह आज सभी को समझने वाली बात होना चाहिए।

मजबूत लोकतंत्र में प्रबंधन कम, संवाद अहम होता- प्रभुराम चैधरी शिक्षा मंत्री मध्यप्रदेश शासन

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी। मध्यप्रदेश शासन के शिक्षा मंत्री प्रभु राम चैधरी ने पत्रकारों से बतियाते हुए विलेज टाइम्स के सवाल पर कहा कि मजबूत लोकतंत्र के लिए प्रबंधन नहीं, संवाद जरूरी है। संवाद से ही लोगों का जीवन समृद्ध स्वस्थ शिक्षित व सृजन में सर्वोत्तम कृति साबित हो सकता है इसीलिए हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष न्याय योजना की बात करते हैं और हमारे नेता सिंधिया 5 वर्षों तक आम जन के बीच सम्पर्क और संवाद करते हैं। परिणाम कि वह क्षेत्र के चहुंमुखी विकास को मूर्त रूप देने में आज सफल और सक्षम हुए है। कांग्रेस ने हमेशा वचन निभाने का कार्य किया है। हम गांधीजी के बताए मार्ग पर रघुकुल रीत सदा चली आई प्राण जाये पर वचन न जाई को सिद्धांत के काम करते हैं, ना कि भाजपा की तरह झूठ फरेब और जुमलों की राजनीति।

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में बड़े घोटाले की आशंका

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। लगभग अघोषित माफिया अंदाज में संचालित किसी संस्था के कर्तव्य निर्वहन का सच इतना कड़वा हो सकता है। संवैधानिक संस्थाओं में आस्था रखने वाले भोले वाले नागरिकों ने भी कभी सपने में भी ना सोचा होगा। मगर यह कटू सच है कि जिस तरह से ग्रामीण सड़कों के निर्माण में क्वालिटी से समझौता कर निर्माण हुआ वह किसी से छुपा नहीं। परिणाम कि कई रपटा, पुलिया दम तोड़ रहे हैं तो कहीं-कही सड़कों के परखच्चे उड़ चुके हैं। कारण नियुक्त दक्ष कंसलटेंट कंपनियों के नाम अपात्र संसाधन विहीन लोगों का कंसलटेंट कम्पनियों में काम करना और दक्ष बन जाना है। जहां तक उधड़ी सड़कों के सुदृढ़ीकरण का सवाल है। तो सुदृढ़ीकरण के नाम करोड़ों फूंकने के बाद क्या हुआ देखा जा सकता है। हालात यह है कि जिस तरह से राजनैतिक संरक्षण या कर्तव्य विहीन धन लालचियो ने संवैधानिक दायित्वों के विरुद्ध अघोषित रूप से माफिया राज को संरक्षण दे रखा है वह मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में देखने लायक है। बहरहाल जो भी हो जिस तरह की चर्चाएं फिलहाल मध्यप्रदेश की प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क प्राधिकरण इकाई को लेकर सर गर्म है यह ग्रामीण विकास मंत्री, प्र...

नक कटा का दंश..............? तीरंदाज

Image
व्ही.एस.भुल्ले भैया- 17 वीं लोकसभा के अवसर पर तू कै अर्र बर्र बोल रिया शै। भैये- कै थारे को मालूम कोड़ी कै म्हारे महान लोकतंत्र में नक कटा की कहानियों का दौर चल रिया शै। भैया- कै तने बावला शै, जो थारे को मालूम कोणी कि म्हारा राष्ट्र आज 21वीं सदी में मजबूत हो रिया शै। भैये- मुंह काला हो तेरा जो थारे को धन, स्वयं स्वार्थ के चलते राष्ट्र भक्तों का विभिन्न दल नाम संगठन, परिवार आज जन कल्याण सेवा में के लिए लोगों का जबरदस्त हुजूम दिख रिया शै। सवा अरब के पार इस महान भूभाग पर पुरुषार्थ, सृजन, कल्याण सेवा के लिए म्हारा तो मन मचल रिया शै। इतना ही नहीं अपनी महान विरासत बचाने इस महान भूभाग का बच्चा-बच्चा वोट डालो बोल रिया शै। भैया- मगर आज नक कटा की कहानी ही क्यों ? भैये- सुन ना चाहे तो सुन, भले ही किसी विद्वान ने किसी समाचार पत्र के माध्यम से सच्चाई समझाई हो। मगर यह कटु सत्य है। भैया- सच बोल्यू तो भाया, कै म्हारी भी इस लोकतंत्र के उत्सव में चल जाएगी, कम से कम मने न सही थारी भावी तो सांसद बन जाएगी। भैये- चुप कर, गर किसी मनचले, सत्ता, स्वार्थी, धन लालचियों ने सुन लिया तो थारी तो थारी म्हारी...

बढ़ती कसावट के बीच मुखर मतदाता

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। न्याय, राष्ट्रवाद के बीच प्रबल स्थानीय मुद्दों की न फरमानी का दोषी कौन है उसका परिणाम भले 23 मई को सामने आया। मगर राष्ट्रीय ही नहीं स्थानीय मुद्दों को लेकर चर्चाएं फिलहाल सरगर्म है। अगर आम शहरी मतदाताओं की माने शिवपुरी में रोजगार, शिक्षण, संस्थान, शुद्ध पेयजल स्थानीय स्तर पर अहम मुद्दा है। मगर वह राष्ट्रीय मुद्दों को भी दरकिनार करने तैयार नहीं। देखना होगा 23 मई को गुना संसदीय क्षेत्र से किसके सर बंधेगा जीत का सैहरा यह देखने वाली बात होगी।

गुना का किला फतेह करने दोनों ही राष्ट्रीय दलों ने झौंकी ताकत

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। वर्तमान चुनाव को लेकर व गुना संसदीय क्षेत्र के नेतृत्व को लेकर व्यवहारिक, बौद्धिक, धु्रवीकरण फिलहाल चरम पर है। मगर जिस तरह की बेमेल मंशा गुना संसदीय क्षेत्र में इतिहास रचने जा रही है। यह आम गांव, गली के गरीब मतदाताओं को समझने वाली बात होना चाहिए।  अगर व्यवहारिक आकलन दुरुस्त है तो आम मतदाता नहीं समझ पा रहा की संघीय व्यवस्था की क्या जवाबदेही, उत्तरदायित्व होते हैं। एक सांसद पद को वोट देते वक्त उनकी क्या आशा आकांक्षा अपने सांसद से होनी चाहिए यह 21वीं सदी के लोकतंत्र के लिए दर्दनाक ही कहा जाएगा जो आज तक हमारी सरकारें संवैधानिक व्यवस्था आम मतदाता को वोट डालने के अलावा ना तो संघीय ढांचे में एक सांसद के कर्तव्य उत्तरदायित्व समझा पाई, न ही यह स्पष्ट कर पाई कि राष्ट्रीय, राज्य तथा स्थानीय स्तर के मुद्दे क्या होना चाहिए। कैसे लोकतंत्र मजबूत हो और विकास कल्याण के लिए कैसे जनप्रतिनिधि और सरकारें चुनना चाहिए और किसी भी स्थिति में अच्छे-सच्चे, सक्षम जनप्रतिनिधि और सरकारें चुनना चाहिए जिससे स्थानीय स्तर पर लोग भली-भांति परिचित होते है। 

अतिआत्मविश्वास से भरा राष्ट्रवाद सिद्ध, सफल होगा या समय चक्र का शिकार मौजूद यक्ष सवाल को लेकर सांसत में देश

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अतीत गवाह है, कि कोई भी विचार, विचारधारा अपने मूल आधार के रहते कभी असफल, अक्षम साबित नहीं हुई। अगर कभी कोई अक्षम, असफल हुआ है तो वह व्यक्ति, समूह जिसने अहम, अहंकार निहित स्वार्थो के चलते उस विचार, विचारधारा को तिलांजली दें स्वयं को सफल, सक्षम सिद्ध करने का जाने-अनजाने में अक्षम, असफल प्रयास है।  अब इसे हम महान भू-भाग भारतवर्ष के लोग अपना सौभाग्य समझे या दुर्भाग्य समझे या फिर समय की बलिहारी कहे। जो आज भी हम समृद्ध, खुशहाल जीवन को मोहताज है। कारण जो भी हो या रहे हो। मगर समयकाल परिस्थिति यह समझने काफी है कि 2019 में न्याय भी होगा और राष्ट्रवाद भी रहेगा। मगर भविष्य क्या होगा यह फिलहाल भविष्य के गर्भ में है।  मगर समझने वाली बात आज इस महान भू-भाग पर यह है कि हमारा भूत, वर्तमान चमत्कारों से भरा रहा है। अगर यहां की प्रतिभाओं को संसाधन और संरक्षण मिला तो भविष्य भी हमारा चमत्कारिक होगा। जिसकी कल्पना समूचे विश्व में सिर्फ इसी महान भू-भाग पर की जा सकती है, जो समझने वालो के लिये समझने वाली बात होना चाहिए। 

मतदान से पूर्व, मतदाताओं का अहम प्रश्न कि कैसे बने मजबूत लोकतंत्र

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   जिस चुनावी प्रक्रिया के चलते आज 80 फीसद लोग सीधे सत्ता के अवसरों में भागीदारी के लिए मोहताज तथा राष्ट्र-जन सेवा को लेकर मोहताज हो। ऐसे में लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता अवसरों को पाने का पैमाना धनबल, बाहुबल, धर्म, जाति, क्षेत्र पर आ टिका हो। ऐसे में मजबूत न्याय प्रिय निष्ठावान, निष्पक्ष लोकतंत्र की संभावना नाकाफी साबित होना स्वयं में एक सवाल है। अगर संस्थागत संवैधानिक पदों पर अवसरों का पैमाना पर मापे तो विधायिका, कार्यपालिका का कर्तव्य विधि अनुरूप निष्ठापूर्ण निर्वहन  है और सत्ता हासिल करने का आधार तथाकथित तौर पर गिरोहबंद लोग, लोकतंत्र में सक्रिय हो। ऐसे सवाल होना तो लाजमी है। मगर दुर्भाग्य कि लोकतांत्रिक व्यवस्था लोकतंत्र बचाने की जो सबसे बड़ी उम्मीद लोकतंत्र के चैथे स्तंभ से होती है। मगर आज जब कत्र्तव्य विमुखता के सर्वाधिक सवाल इसी स्तंभ पर है। भले ही आज धन, बल, सत्ता स्वार्थ के चलते प्रदूषण का शिकार हो। मगर जिस तरह भोले भाले भावुक मायूस बेबस लोगों के बीच सत्ता हथियाने का खेल फिलहाल 4 चरणों में होने के साथ ही अगले तीन चर...