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Showing posts from September, 2021

जन के दूर दर्शन , संवाद सेतु के बजाये सीधा संवाद

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मिनिट टू मिनिट कार्यक्रम से जन का दर्शन तो , सेतु से संवाद पर संसय बरकरार  विभिन्न कार्यक्रम पश्चात हजारो को संबोधित करेगे मुख्यमंत्री  वीरेन्द्र भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  30 सितंबर 21 अगर खबरो की माने तो म.प्र. के मुख्यमंत्री 1 अक्टुबर को अपने निर्धारित कार्यक्रम अनुसार 12ः55 पर शिवपुरी हबाई अडडे हैलीकाॅप्टर द्वारा पहुॅचेगे जहां से वह विभिन्न कार्यक्रम पश्चात मुख्य कार्यक्रम स्थल पहुॅचेगे और उपस्थित जन समूह को लगभग 40 मिनिट संबोधित करेगे यू तो चल रही चर्चाओ के अनुसार कार्यक्रम पूर्णतः शासकीय है मगर जिस जनदर्शन को लेकर प्रदेश मे चर्चा है उसका कोई स्पष्ट खाका साॅसल मीडिया या प्रिंन्ट मीडिया पर शायद उपलब्ध नही अगर जारी खबरो के आधार पर माने तो दर्शन तो किसी भी सभा का भाग होता ही मगर अलग से कुछ है ऐसा स्पष्ट नही न ही जन संवाद मे सेतु का कार्य करने बाली मीडिया के साथ संवाद को लेकर कोई स्पष्ट है पत्रकारो के लिये परिचय पत्र के साथ अवश्य गेट न. 1 से प्रवेश की पात्रता है निश्चित ही कई दिनो की तैयारियो के बाद होने बाले इस कार्यक्रम मे हजारो स्वसहायता समूह से जुड़...

गरीबों के मसीहा , महाराज माधव राव सिंधिया

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  एक समय यह नारा बड़ा मशहूर था  वीरेन्द्र शर्मा  30 सितंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  आज उनकी पुण्यतिथि है । गरीबो के मसीहा महाराज माधव सिंधिया अब बात उनके दादा कैं श्रीमंत माधौ महाराज कि हो या फिर स्वयं कै. श्रीमंत महाराज माधव राव सिंधिया की लोगो उन्है आम भाषा में इसी तरह पुकारते थे एक समय तो यह सार्वजनिक जीवन मे नारा बन गूजने लगा मगर एक समय ऐसा भी आया कि लोगो को उस सत्य को भी स्वीकारना पढ़ा जो जीवन का सत्य है निसंदेह वह व्यक्तित्व पुण्य आत्माये आज हमारे बीच नही मगर उनकी कीर्ति आज हमारे बीच है उनके जीवन की कृतज्ञता आज हमारे बीच है अगर यो कहे कि यह मानव जीवन का सबसे बड़ा तमगा कोई उन्है सिंधिया राजवंश के उत्तराधिकारी के कारण हासिल नही था बल्कि उनके सार्बजनिक जीवन मे किये गये वह अधभुत कार्य व्यवहार के कारण हासिल था । उबड़ खबड़ पथरीली क्षैत्र को हरा भरा व जंगली इलाको सिंचाई से समृद्ध 100 पूर्व आज न नसीब होने बाली जन सुबिधाओ को क्षैत्र को लोगो मुहैया कराना फिर वह शिक्षा ज्ञान विज्ञान प्रकृति कृषि रोजगार अत्यआधुनिक सुबिधाओ को जुटाने से जुड़ी विद्याये हो या फिर लोगो के ...

डिटेल न डी. पी. आर आत्मनिर्भर हुआ सुराज , सम्राज्य की तलाश मे जुटे सियासी सरोकार

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  भटकते बैरोजगार , निराशा मे डूबा सेवा कल्याण  व्ही. एस. भुल्ले  29 सितंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  विज्ञापनो की बाढ़ और सुखर््िायो मे डूबा सेवा कल्याण भटकते बैरोजगार बैकारी को जो भी नाम दे मगर सम्राज्य की तलाश मे जुटे सरोकारो की हकीकत यह है कि बगैर डिटेल डी.पी.आर. के आत्मनिर्भर सुराज अब सरचढ़कर बोल रहा है ये अलग बात है कि अपनी कृतज्ञता से देश को कृतार्थ करते देश के प्रधानमंत्री जो भी उम्मीद जाहिर करे ओर देश को मिले अवसर को भुनाने कितना ही जोर क्यो न दे मगर हकीकत यह है कि स्वार्थवत सियासी सरोकार उस पवित्र मंशा को पारघाट लगने देगे इसको लेकर चर्चा आजकल कुछ ज्यादा ही सरगर्म है । ऐसा नही कि सुराज लाने बाले ही अपने अपने सियासी गणित को बैठाने मे लगे हो अगर यो कहै कि एक दूसरे को कोसने बाले भी सुराज की तरफ भृरकुटी तानने के बजाये एक ईमानदार कोसिश पर सबाल खड़े कर रहै है जो सियासी गलियारो के कान खड़े करने काॅफी है मगर कहते है जिन्है सेवा मे भी सियासी नफा नुकसान नजर आता हो और जिनको के स्वार्थो के आगे जन राष्ट्र् कल्याण भी गौड़ नजर आता ऐसी सियासत से उम्मीद भी क्या कि जा सकत...

पुण्यभूमि पर जघन्य अपराध , दर व दर भटकती जीवनदायनी

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करोड़ो फूकने के बाबजूद नही मिला जीवन को आसरा  जीवन की तलाश मे मौत को गले लगाता गौवंश  व्ही. एस. भुल्ले  29 सितंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  काश विधान को त्यागते और संबिधान को स्वीकारते वक्स गौवंश को भी मत का अधिकार प्राप्त होता तो शायद ही यह दुर्गति इस महान गौवंश की होती न ही उन्है जीवन की तलाश मे मौत नसीब न होती मगर हमारे लोकतंत्र मे इस तरह की घटनाये आम हो चली है सड़को पर वाहनो की चपेट मे आने से गौवंश की श्रंखलाबद्ध मौतो का नजारा भी आम न होता न ही उन्हे चारे पानी की तलाश मे दरदर भटकना पड़ता धन्य है वह राजवंश जिनके राज मे गौवंश की अपनी मिलकियत हुआ करती थी और आम मानव की भांती उसे भी कर्म के साथ स्वाभिमानी जीवन जीने का अधिकार था उसके अपने निस्तारी तालाब पोखर झरने बाबड़ी कुये और हर गाॅब मे चरनोई भूमि और जंगलात मे स्वछंद चरने के अधिकार थे । जिसे संबिधान निर्माताओ ने भी यथावत रखा मगर दुर्भाग्य उनका यह अधिकार उनके हाथो से कब छीन लिया गया कोई बताने तैयार नही हद तो तब है जब आज भी गाय का दूध घी सर्बोपरी और गाय के गौवर से गौधन , गणेश प्रतिमा बनाई व पूजी जाती है और चैखटे ...

बटोने मे बन्दरबाट तो जनधन पर जनदर्शन की चर्चा सरगर्म

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स्वराज को आयना दिखती सियासत शर्मसार होते महान लोग  व्ही. एस. भुल्ले  29 सितंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  आफत के नाम बटती राहत के बटोने मे बन्दरबाॅट तो वही जनधन पर जनदर्शन की चर्चाये आजकल जिस तरह से परवान चढ़ रही है वह लोकतंत्र मे आस्था रखने बालो के लिये काबिले गौर होना चाहिए । ऐसा नही कि म.प्र. मे ऐसा पहली मर्तवा हो रहा हो मगर सियासत के सिपारी किलरो क्या या तो उन्हे पावर चाहिए या फिर धन सो स्वराज को आयना दिखाने बालो का गोरखधंधा विगत 15 बर्षो से .खूब फलफूल रहा है मजे कि बात तो यह है कि भाई लोग शेर की खाल ओल सियासत के नाम मेमनो का शिकार कर खुद को जंगल राजा घोषित कर राजसी ठाट बाट से सियासत चमकाने मे मशगूल है अब सच क्या है यह तो वह चर्चाओ को सरपैर दे हवा मे उड़ने की सलाह देने बाले ही जाने या फिर सियासत मे गहरी समझ रखने बाले ही जाने मगर इतना तो सच है कि कही तो कुछ गड़बड़ है जो जनधन पर कभी सम्मेलन तो कभी जनदर्शन पर सबाल उठते है बैसै भी सियासत मे दर्शन लेने देने का मामला कभी इतना होगा किसी ने सपने मे न सोचा होगा मगर प्रभु की कृपा से खूब फल फूल रहा है । मगर उन पथराई आॅखो का...

भयमुक्त न्याय मे गिड़गिड़ाता जीवन ..............? तीरंदाज

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हताश निराश जीवन को नैसर्गिक समृद्ध जीवन की दरकार  व्ही. एस. भुल्ले  28 सितंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  भैया - जीवन फन्दे पर झूल रहा है , कभी कभी ट्र्ेनो के सामने कूद रहा है तो कही कही हताश निराश हो जीवन लीला समाप्त कर रहा है मगर उस जीवन को न तो नैसर्गिक न्याय न ही सामाजिक न्याय मिल पा रहा है । गिड़गिड़ाता जीवन आज भी समृद्धि खुशहाॅली की तलाश मे तिलतिल मर रहा है आखिर यह हो क्या रहा है । आखिर सेवा कल्याण और भय मुक्त न्याय क्या कर रहा है ?  भैयै - मुये चुप कर क्या थारे को म्हारा 21बी सदी का भारत समृद्ध होते नही दिख रहा है अंतरिक्ष मे झड़े गड़ रहै मिशाइलो की गूॅज से दुश्मनो के दिल धड़क रहै गाॅब गरीब को सस्ता राशन स्वास्थ बीमा पेयजल के पैकेज मिल रहै है फिर भी थारे कलैजे को ठंडक नही जो तने अर्र बर्र बोल रिया शै ।  भैया - प्रभु का काम चल रहा है सेवाओ का सैलाव तो कल्याण का पहाड़ फूट रहा है मने जाड़ू मगर म्हारे मगज मे एक बात न आबे कि तो फिर जीवन संघर्षो से हार अपना असतित्व क्यो खो रहा है । पहले तो कभी कभार ही जहाजो का हल्ला नगर शहर गाॅबो मे सुनाई पढ़ता था अब पूरा का पूरा बैड़ा...

संबिधान उन्मुख सरकारो में विधान उन्मुख सरकारो की उपेक्षा

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  गाॅब गली में पनपता सत्ताओ के प्रति आक्रोश  छल से छल्ली होता ग्राम स्वराज  धर्मेन्द्र सिंह गुर्जर  28 सितंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  छल न तो किसी सत्ता का अपने ही जनो के बीच न तो कभी पुरूषार्थ रहा है न ही न ही सफल सामथ्र्य का इतिहास मगर आज जिस तरह से व्यवस्था के नाम संबिधैानिक सरकारो का व्यवहार विधान उन्मुख गाॅब गली की सत्ताओ के प्रति प्रतीत हो रहा है उससे भले ही सेवा कल्याण की बांछे खिली हो मगर जो आक्रोश आज गाॅब गली मे सत्ताओ के प्रति पनप रहा है वह बढ़ा घातक है उन स्वार्थ वत सत्ताओ या सत्तासीनो के लिये , जो सर्बकल्याण से इतर स्वकल्याण को ही अपना परम धर्म कर्म मान चुके है और वह किसी भी कीमत पर सत्ता से विमुख नही होना चाहते । फिर गाॅब गली के बीच मौजूद ग्राम गली स्वराज का सपना छल्ली छल्ली हो बीच चैराहे पर ही दम क्यो न तोड़ दे मगर जब लोकतांत्रिक व्यवस्था मे जब सत्ताओ के प्रति मे उनकी पहचान के विश्वास का संकट उत्पन्न होता है तो स्वभाविक ऐसी परिस्थितियां पैदा होती है मगर कहते है अहंकार मे डूबी सत्ताओ को न तो इनका छौव होता है न ही अफसोस जैसा की पंचायती राज ...

कृतज्ञता को खण्डित करती सियासत , सामर्थ हुआ बैलगाम

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सत्य के प्रति प्रधानमंत्री की कृतज्ञता और सार्थकता  व्ही. एस. भुल्ले  20 सितंबर 21 सियासत सत्य के प्रति प्रधानमंत्री की कृतज्ञता के मायने जो भी निकाले मगर जो सार्थकता मानव जीवन के रूप मे सिद्ध हो रही है वह सार्थक ही कही जायेगी तौर तरीको को लेकर भी आरोप प्रत्यारोप हो सकते है मगर जिस बैबाकी से राष्ट्र् से जुड़े मुददो पर प्रधानमंत्री की जो राय रहती है उसकी सार्थकता को नकारना धूप रोशनी दिखाने से कम नही मंच भले ही मीडिया को हो सबाल भी मीडिया का हो मगर जिस शालिनता से वह बड़ी से बड़ी बात या राय दे जाते है वह सियासी जीवन के लिये एक नई सीख ही होती है हाॅल ही में उन्होने एक सबाल के जबाब मे कहा कि भय सार्वजनिक जीवन या व्यक्तिगत जीवन मे हर किसी को होना चाहिए फिर मे हुॅ या कोई अन्य वह यही पर नही रूके उन्होने यहा तक कहा कि सेना डर देश के दुश्मनो मे और कानून का डर हर उस व्यक्ति मे होना चाहिए जो स्वयं को कानून से बड़ा समझते इतना ही नही उन्होने एक मर्तवा यह भी कहा था कि मे न खाउगा न खाने दूगा आज यह सिद्ध है अगर सियासी आरोप प्रत्यारोप छोड़ दे तो एक भी मामला ऐसा नही जिसकी चर्चा धुर बिरोधी भी प्रमाणिक...

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़को के घटिया निर्माण से करोड़ो की सड़के स्वाहा , गाॅब का जीवन हुआ दूभर

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बर्षो से जमे गिरोहबन्द प्रबन्धन में हाफनी भरती ग्रामीण सड़के  आकाओ के संरक्षण मे भयमुक्त अमला मनमानी पर उतारू  20 सितंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  म.प्र. के ग्वालियर चंबल संभाग मे हुई बारिस को भले ही सुनीयोजित ढग से तबाही त्राषदी का नाम दिया जाये मगर सच्चाई कुछ इसके उलट है देखा जाये तो करोड़ो अरबो की लागत से निर्मित या निर्माणाधीन प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़को जो हाॅल हुआ है वह किसी छिपा नही खासकर जो हालात ग्वालियर के शिवपुरी और चंबल के श्योपुर जिले मे बने है एक माह से अधिक समय निकल चुका है मगर सड़को की हालत आज भी जश की तश बनी हुई है खासकर जिन सड़को के परखच्चे उड़ चुके है या जो सड़के दल दल मे तब्दील हो आम ग्रामीण जीवन के सुविधा के नाम श्राफ बन चुकी है उनकी सुध लेने बाला कोई नही है जब की कर माह करोड़ो लाखो के रूपये के भुगतान हो रहै है तो कही कही मेन्टीनेन्स के नाम भी भुगतान हो रहै है ये अलग बात है कि नियम अनुसार हर सड़क की 5 बर्ष तक की गारन्टी होती है और सड़क खराब होने पर ठेकेदार को ही रखरखाब करना होता है मगर ठेकेदार मातहतो के संरक्षण मे या तो हीलाहबाली करते है या फिर औपचारिक...

भयमुक्त लोक - तंत्र में भड़भड़ाती आत्मा , सर्बकल्याण की , संघर्ष ने सम्हाली कमान .....................? तीरंदाज

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व्ही. एस. भुल्ले  भैया - आजादी के सत्राबदी बर्ष और म्हारे प्रधान के जन्म दिवस पर बधाईया लेने देने बांटने , लिखने पढ़ने भाषण देने के बजाये के गणित .खोल रिया शै कै थारे को मालूम कोणी म्हारे महान देश मे आजादी का सत्राहब्दी बर्ष और जोर शोर से म्हारे त्याग पुरूष प्रधान जी का जन्म दिवस मन रहा है और तने संघर्ष के तराने छेड़े जा रहा है कै थारे को बधाईयो से भरा साॅसल मीडिया और गूगल गुरू पर अटे सबालो का कचरा नजर नही आ रहा है जो तने सर्बकल्याण मे संघर्ष के नये फाॅरमूले फैकै जा रहा है । मने तो बोल्यू जिस तरह म्हारे म.प्र. मे जान बचाने मंच से ही जिस तरह जनता जनार्दन को खुश करने मातहत हाथो हाथ चटक रहै है और भाई सेवा कल्याण के नाम अपना अपना घर भर रहै है यही तो सच्चा और अच्छा लोक और तंत्र ।  भैयै - मने जाड़ू तने भी विरोधियो की भाषा बोल रिया शै और शुभ बर्ष और दिन पर अर्र बर्र बोल रिया शै कै थारे को मालूम कोणी हाॅल ही मे तो लग्गर से बदल डाले फिर भी थारी छाती ठंडी होने का नाम न ले रही आखिर तने कै चाबे कै शेष बचो को भी बदल डाले ।  भैया - तने तो संघर्ष बादियो की तरह बोल रिया शै कै थारे को मालूम ...

गुजरात में रूपाणी की छुटटी भूपेन्द्र को मिली गददी

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कई निशाने साधने मे सफल रहा आलाकमान  वीरेन्द्र शर्मा  13 सितंबर 2021 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  अपनी पूर्ववत शैली अनुसार सियासत मे निर्णयो के लिये जानी जाने बाली भाजपा ने एक मर्तवा फिर से सियासत को चैकाया है वह भी 4 के बर्ष के मुख्यमंत्री रहै रूपानी की जगह पहली बार के विधायक भूपेन्द्र पटेल को गुजरात का नया मुख्यमंत्री बना । निश्चित तौर पर सियासी खबर भले ही यह हो कि आगामी विधान सभा लोकसभा चुनावो के मददेनजर जैसा की कर्नाटक या हालिया अन्य प्रदेश मे देखा गया मगर सियासत का यह सम्पूर्ण सत्य है इस पर सबाल अवश्य हो सकते है मगर सच यह है कि रूपानी अब गुजराज के लिये पूर्व और भूपेन्द्र गुजरात का बर्तमान है अगर ऐसा ही अन्य प्रदेशो मे भी आगामी दिनो मे देखने मिले इसमे किसी को कोई अतिसंयोक्ति नही होना चाहिए भले ही पद प्रतिष्ठा केडर बैस होने का सियासी परिणाम हो मगर कैडर का आधार अब आज कि सियासत मे कितना बचा है इसे प्रबन्धन के रास्ते देखा जा सकता है अगर यो कहै कि प्रबन्धन की छत्रछाया मे आम वोटर भी कैडर बैस विचारो से भटकता जा रहा है भूत भबिष्य को भूल और अब वह बर्तमान मे ही जीना चाहता है तो यह ...

द्रौह पर उतारू वृति , समृद्ध जन जीवन पर बड़ा संकट

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एकोहम द्धित्तीय नास्ती , भूतो न भबिष्यति  जीवन सरोकार , सर्बकल्याण पर हाबी स्व आचरण व्यवहार  व्ही. एस. भुल्ले  11 सितंबर 2021 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  जन जीवन कल्याण समृद्धि और जीवन सरोकारो से जुड़ा क्षैत्र जो भी हो सभी दूर एक ही बीमारी नजर आती है जो अब धीरे धीरे समृद्ध जन जीवन के लिये एक बड़ा खतरा सिद्ध हो रहा है मानो आम जीवन मे मौजूद वृति अव खुलेयाम यह कह रही हो कि एकोहम द्धित्तीय नास्ति भूतो न भबिष्यति फिर वो सत्ता पद सौपान हो या फिर सियासत , समाज अर्थ हो विज्ञान व्यक्ति परिवार से लेकर समूह संगठन संस्थाये सभी प्रभावित हो रही है और जन जीवन संकट से घिरता जा रहा है ऐसे मे अब यक्ष सबाल यही है कि कौन किसको समझाये और कैसै जीवन को यह बात समझ मे आये कि जीवन के आधार क्या है कैसै समृद्ध जीवन का मार्ग प्रस्त हो सकता है । कैसै आम जीवन खुशहाॅल हो सकता है । कार्य कठिन हो सकता है मगर असंभव कतई नही मगर अब विचार भी आम जीवन को ही करना है जो एकोहम द्धितीय नास्ति के भूतो न भबिष्यति की ध्वजा थाम समृद्ध खुशहाॅल जीवन के मार्ग पर चल पढ़ा है कहते है जब सामर्थ पुरूषार्थ भी ज्ञान के अभाव मे ज...

साख के संकट से जूझती सेवा , कंगाल हुआ कल्याण

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लज्जित होती मानव सभ्यता दर्शक बना पुरूषार्थ  फोटो शेसन आश्वासन , आफत मे राहत से थर्राई मानवता  व्ही. एस. भुल्ले  9 सितंबर 2021 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  यू तो सेवा का संकट संघर्ष कोई नई बात नही मगर सेवा के नाम सेवा की साख पर जिस तरह से बटटा सरेराह लग रहा है और कल्याण चीख चीख कर अपनी कंगाली का हाॅल ये बयान कर रहा है वह लज्जित होती मानव सभ्यता पर सबाल खड़े करने काॅफी है पुरूषार्थ के दर्शक बने रहने से यह बात तो बिल्कुल साफ है कि फोटो शेसन आश्वासन , आफत मे राहत से थर्राती मानवता आज भले ही चुप हो मगर यह चुप्पी और कब तक रहेगी यह मानव समाज को सोचने बाली बात होना चाहिए । जिस तरह से मानव समाज के बीच आजकी इन्सानियत के कत्ल का दौर शुरू हुआ है ऐसा नही कि मानव समाज उससे बाकिफ न हो मगर सीमाओ दायरे मे बटा मानव समाज फिलहाॅल कुछ भी करने की स्थति मे नजर नही आता कारण जो भी हो मगर इतना तो तय है कि जिस तरह से सेवा साख पर स्थापित संस्था संगठनो को शुसोभित करने बालो के कारनामे आये दिन सुर्खिया बन मानव जीवन मे सुख्र्र लाल हो रहै समाज के अन्दर ही समाजद्रोही फल फूल रहै है वह भी सेवा के नाम उससे...

मूल आधार से संघर्ष करती महात्वकांक्षाये व स्व विचार

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कुतर्क की बैदी पर स्वः होती संस्कृति और संस्कार  सत्ताओ की कर्तव्य विमुखता मे बैबसी हुई तार तार  व्ही. एस. भुल्ले  8 सितंबर 2021 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  यू तो समृद्ध खुशहाॅल जीवन का संरक्षण संर्बधन सत्ता शूरवीरो का धर्म और कर्म रहा है । मगर जब जब सत्ताये कर्तव्य विमुख हुई उसका दुसपरिणाम हमेशा ही बैबस जीवन को भोगना पढ़ा है तार तार बैबसी के बीच अगर हम यो कहै कि जीवन ने मानव धर्म के अभाव मे बड़ी बड़ी त्रासदी देखी है मगर कुतर्क की बैदी पर स्वः संस्कृति संस्कार इस तरह से अपने समृद्ध अस्तित्व के लिये संघर्षरत होगे किसी ने शायद ही सपने मे सोचा होगा आज जीवन के मूल आधार से खुला संघर्ष करती महात्वकांक्षाये विनासक स्व विचार इस मानव समाज को आने बाले समय मे क्या पहचान और आने बाली पीढ़ी को क्या को विरासत मे क्या छोड़ेगे यह कहना तो जल्द बाजी होगी मगर जो परिदृश्य उभर रहा है वह बड़ा ही वीभत्स जान पड़ता है जो न तो मानव समाज के हित मे है न ही पृथ्वी पर मौजूद जीवजगत के हित मे मगर विधान व्यवहार मे समाज मे सब चल रहा है कुर्तको के सहारे नये नये मनगड़त स्व शोध तर्क की मानो बाढ़ सी आ गयी है मगर मूल...

लुटेरो मे भी स्वामी बन सेवा करने की गजब चाहत रही है

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सत्ता स्वभाव को लेकर उठते सबाल , बहस होती बैमिशाल  सर्बकल्याण जीवन का मूल धर्म सेवा कल्याण आधार  व्ही. एस. भुल्ले  7 सितंबर 2021 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  सर्बकल्याण के मूल धर्म से बिमुख जीवन का मूल आधार भले ही नैसर्गिक रूप से सेवा कल्याण ही रहा हो मगर सेकड़ो बर्षो से जो संस्कृति इस मानव जीवन के लिये अभिषाप बनी शायद उसमे विराम आज भी ओझल नजर आता है विभिन्न आक्रांताओ से लेकर सत्ताओ के विभिन्न रूप मे घर चुकी स्वामी बन सेवा करने चाहत क्या लुटेरे संस्कारो की गुलाम हो सकती है यह चर्चा आज कल आम जीवन मे तेज है । अगर मशखरो की माने तो आक्रांता तो इस महान भूभाग से बर्षो पहले चले गये या उनके नामो निशान तक मिट गये हो मगर जो अनाथपन आज गांब गली मोहल्लो या चंबल घाटी या शहर महानगरो छाया है अब वह अबूझ पहली उन लोगो के लिये बनता जा रहा है जिनकी दिलचस्बी दस्यु सरगना डकैत डाॅन भाई दादा गुन्डो के इतिहास खगालने मे रहती थी मगर दो दशक बीतने को है मगर कोई ऐसा नाम ढूढे नही नजर आता जिस पर कोई फिल्म या कहानी लिख ली जाये या फिर कोई डाकूमैन्टरी तैयार की जाये शायद यही दर्द सियासत मे थोड़ी बहुत सोच समझ...

सियासी संघर्ष में सफर करते जीवन सरोकार

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स्व ऐजन्डो के रथ पर सबार महात्वकांक्षाये संग्राम को तैयार  समृद्ध खुशहाॅल सर्बकल्याण का सपना हुआ तार तार  व्ही. एस. भुल्ले  1 सितंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  सरोकारो की नुमाईस लगा जन भावनाओ को लूट महात्वकांक्षा पूर्ति पर जश्न मनाने बालो को क्या पता कि सत्ता सियासत से इतर भी सार्बजनिक जीवन के कुछ सरोकार ऐसे होते है जिन पर समुची सृष्टि का आधार टिका है जन जीवन के कल्याण का भाव छिपा है । मगर स्व ऐजेन्डो के रथ पर सबार आज की महात्कांक्षाये मानो भीषण संग्राम छेड़ सर्बकल्याण के ऐसे ऐसे आधार तैयार करना चाहिती है जिससे कल्याण तो दूर की कोड़ी ऐसे में सिर्फ सपने ही शेष बच इसमे भी संदेह होना स्वभाविक है । जिसमें जीवन सरोकार की तो मानो बाठ लगना ही तय है कारण साफ है हर एक का अपना ऐजन्डा है हर एक की अपनी महात्वकांक्षा फिर वह इकिल्ला हो या समूह में मगर उन निरीह जन जीवन का क्या जो कल्याण की आश लगाये बर्षो से सिर्फ उस सपने को सजोय बैठा है जो अब इस संघर्ष के दौर में मुश्किल ही नही न मुमकिन सा लगता है आज सियासत के आगे पुरूषार्थ कल्याण जिस तरह से हाफनी भर रहा है वह शायद ही किसी से छिपा ...