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Showing posts from January, 2022

अपारदर्शिता का शिकार नई आबकारी नीति

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  न तो उपभोक्ता का ख्याल न ही संसाधनो का ध्यान  लगभग 40,000 करोड़ के व्यवसाय और 15000 करोड़ के राजस्वदाताओ से बैरूखी वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  मद्यपान या मद्यनिषेध की सच्चाई की म.प्र. में जो भी हो , और समुचे प्रदेश में रोजगार के लाले मगर इस बीच लगभग 40,000 करोड़ के शराब व्यवसाय से संभावित 15000 के राजस्व में कटौती कर राहत कि बात हुई हो मगर नई आबकारी नीति का मजमून जानने बालो का कहना है कि यह तो अपारदर्शी नीति है जिसमे पारदर्शिता अहम विषय से नदारद नजर आती है फिर चाहै वह उपभोक्ता संरक्षण की बात हो या फिर मौजूद संसाधनो की बात हो । जब सरकार के लिये मद्यनिषेध को नकार राजस्व अहम हो तो फिर मुॅह माॅगे दाम चुकाने बाले उपभोक्ता के संरक्षण की बात न हो तो उन उपभोक्ताओ के साथ अन्याय ही माना जायेगा जो अपने गाड़े पसीने की कमाई स्वयं के स्वास्थ को दांव पर लगा सरकार को इतना मौटा राजस्व देता है जिसे सामाजिक तानो के साथ दण्ड विधान का भी निष्ठापूर्वक पालन करना होता है । साथ ही वह अमला जो संख्या बल मे तो अर्पाप्त है ही कही कोई घटना दुर्घना होने पर दण्ड का भागीदार भी हो...

सत्ता लूट में समय गबांते जीवन सरोकार

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 सियासी सूत्रो से सहमी सियासत  भययुक्त व्यक्ति , परिवार , समाज , सियासत , सत्ताओ की भयाभय स्थति  समय और स्वकल्याण के आगे दम तोड़ता सर्बकल्याण  व्ही. एस. भुल्ले  29 जनवरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  कहते है सर्बकल्याण मे ईश्वर की श्रेष्ठत्तम कृति के रूप मे प्राप्त अमूल्य मानव जीवन के वह बहुमूल्य भाग बचपन युवा यौवन और अपने उत्र्तराध को गलाने बाले उन महामानवो उनकी भव्य दिव्य कीर्ति जो उन्होने अपनी त्याग तपस्या सामथ्र्य पुरूषार्थ के बल स्थापित की ऐसी भव्य दिव्य विरासत को उनकी आने बाली पीढ़ी इस तरह कभी कलंकित शर्मसार करेगी उन्होने सपने में भी न सोचा होगा । जिस सामथ्र्य पुरूषार्थ कीर्ति पर गर्व कर मानव स्वयं को गौरान्वित मेहसूस कर सकता था क्या वह इतनी क्रूर , निर्दयीे , और हिसंक हो सकती है जिसे दया , प्रेम , त्याग , अहिंसा , शांति सर्बकल्याण की घुटटी पीढ़ी दर पीढ़ी संस्कारिक तौर पर पिलाई गयी हो । आज भी मानवता को जिन्दा रखने मानव के रूप मे मौजूद जीवन न जाने कितने दिवस , रीति , नीति , त्यौहार मनाते है मगर मानव जीवन मे संस्कारिक तौर पर मानव जीवन आज उनका कितना पालन कर...

ममत्वभरे दुलार की थप्पी से अनाथ सियासत जीवन सरोकार

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संस्कार , संवेदनशीलता की पराकाष्ठा तक का जीवन संघर्ष  वीरेन्द्र शर्मा  25 जनवरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  आज उस दिव्य भव्य पुण्य आत्मा की पुण्यतिथि जिन्होने राजपथ त्याग लोकपथ को अंगीकार कर सिर्फ सामाजिक सरोकार ही नही सियासत को भी कृतज्ञ किया वह भी निस्वार्थ जिन्है आज हम लोकमाता के नाम से पुकारते है , कै. राजमाता विजयाराजे सिंधिया उस असाधारण व्यक्तित्व और संवेदन शीलता की प्रतिमूर्ति थी जिससे आज सिर्फ सियासत ही नही जीवन सरोकार भी अनाथ नजर आते है । धर्म के प्रति गहरी आस्था नित दिन पूजन भजन और आमजन से आत्मीय सरोकार संकट या समस्या को लेकर अतिसंवेदनशील कै राजमाता विजयाराजे सिंधिया मे संस्कृति संस्कारो को लेकर बैहद गंभीरता अन्याय किसी के भी साथ हो अन्यायी कितना बड़ा क्यो न हो वह सीधे लोहा लेने का सिर्फ दम ही नही उदाहरण भी प्रस्तुत करती रही । बात फिर देश की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इन्दिरा गाॅधी से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री स्व. डी.पी. मिश्रा की हो या राममन्दिर की रही हो उन्होने संस्कार सिद्धान्तो के एक से बढ़कर एक उदाहरण अपने जीवन में प्रस्तुत किये सार्बजनिक जबाबदेहियो को ...
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  सत्ता लालसा में हदे तोड़ती सियासत  स्थापित मान्यताये शेष न रही तो सत्ता , सियासत के मार्ग भी सुरक्षित नही रह पायेंगे  लोकतंत्र की कमजोरी का लाभ उठाते कर्तव्य बिमुख लोग  व्ही. एस. भुल्ले  22 जनवरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  लोकतंत्र की कमजोरी का लाभ उठा कर्तव्य बिमुख लोग जिस तरह से वोट की बैबसी की आढ़ में जिस तरह से अपना अपना इकबाल बुलन्द कर सत्ता तक पहुॅचना या सतत सत्ता में बने रहना चाहते है उन्है यह समझना होगा कि अगर स्थापित मान्यताये शेष न रही तो सत्ता सियासत के मार्ग भी सुरक्षित नही रह पायेगे । क्योकि जिस तरह से सियासत सत्ता के लिये हदे तोड़ने तैयार है उससे किसी का भी भला होेने बाला नही है । फिर वह सेवा कल्याण की आढ़ मे स्थापित मान्यताये तोड़ने का सबाल हो या फिर सत्ता हथियाने के नाम सिद्धान्त तोड़ने का सबाल हो बल्कि होना तो यह चाहिए था कि सत्ता में रहने बाले या सत्ता तक पहुॅचने ऐड़ी चोटी का जोर लगाने बाले उन बिषयो पर विचार करते उन्है लागू करने पुरूषार्थ करते जिससे सर्बकल्याण ही नही सभी का भला और सभी का जीवन समृद्ध होने का मार्ग प्रस्त होता मगर दुर्भाग्य आ...

सन्नाटे को चीरती कोरोना की सुनामी

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आप स्वस्थ रहै , मस्त रहै ,भयभीत न हो , सिर्फ मास्क लगाये  साढ़े 3 लाख का आंकड़ा पार करती सुनामी  वीरेन्द्र भुल्ले  21 जनवरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  सन्नाटे को चीरती कोरोना की सुनामी आज भले ही चैखट पर हो मगर सिर्फ साबधानी के अलावा इससे डरने की जरूरत नही मुॅह पर मास्क , हाथ पर सेनेटाइजर या साबुन से धौते रहै और भीड़ भाड़ से दूर रहै जितनी जल्द हो अपनी वैक्सीन तत्काल लगावाये जिन्है नही लगी हो उन्है भी समझाये कि सिर्फ वैक्सीन ही व्यक्ति को कोरोना से बचा सकती है और साबधानी ही इससे सुरक्षित रख सकती है । जीवन अमूल्य है इसकी रक्षा करना , शरीर को स्वस्थ मस्थ रखना , खुशहाॅल जीवन रहै इसके लिये बताई गाईड लाइन का पालन करना ही अब कोरोना से बचाव व स्वस्थ मस्त जीवन का आधार है । किसी भी हालत मे स्वयं को भयभीत न होने दे और न होने दे आज यही स्वस्थ जीवन की सबसे बड़ी जरूरत है । ये अलग बात है कि अब देश मे एक दिन में कोरोना संक्रमितो  का आंकड़ा साढ़े तीन लाख के पार जा चुका है और सक्रिय संक्रमितो की संख्या बढ़ कर लगभग 18 लाख के पार जा चुकी है अगर ऐसे मे भी हम न चेते तो अवश्य हमे वह दृश्य ...
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जीवन में सत्य की स्वीकार्यता शर्म नही गर्व का बिषय  संयम ही हो सकता है समृद्ध जीवन का आधार  अल्प समय में अकूत धर्नाजन बड़ी बाधा  दिशा विहीन पुरूषार्थ कभी कल्याणकारी नही रहा  व्ही. एस. भुल्ले  20 जनवरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  कहते है जीवन में सत्य कि स्वीकार्यता पर शर्म नही गर्व होना चाहिए क्योकि जीवन में संयम ही समृद्ध जीवन का आधार हो सकता न कि अल्पसमय में अकूत धनार्जन की प्रवृति जो समृद्ध जीवन के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है । और न ही दिशा विहीन पुरूषार्थ कभी सर्बकल्याण मे सार्थक सिद्ध रहा है मगर इन बिषयो पर जिस तरह से मानव जीवन में कर्तव्य विमुखता देखी जा रही है वह बड़ा चिन्ता का विषय है जिस विचार होना आज के मानव जीवन मे अतिआवश्यक है क्योकि मानव जीवन जिस तरह से धर्म मत पंथ , जाति क्षैत्र या विचारो के नाम आक्रमक देखा जा रहा है वह किसी के भी हित मे नही मानव का यह आचरण व्यवहार न तो उनके हित मे है जो स्व कल्याण के लिये समूहबन्द हो या व्यक्तिगत तौर पर हवा दे स्वयं के हित साधना चाहते है या साध रहै है और न ही उस मानव समूह या मानव जीवन के हित मे है जिनके कल्याण...

मुफतखोरी की आत्म निर्भरता

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सर्बकल्याण में सत्ता का अचूक अस्त्र  कर्तव्य विमुखता मे बिलखती मानवता बिलबिलाते लोग  वीरेन्द्र शर्मा  16 जनवरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  सर्बकल्याण मे सत्ता के लिये अचूक अस्त्र साबित होती मुफतखोरी की आत्म निर्भरता अब भले ही सत्ता सियासत का सिरमौर बन चुकी हो और अनुशासनहीनता , कर्तव्य बिमुखता बिलबिलाती मानवता बिलखते लोगो के लिये दोषी करार सिद्ध हो मगर वह प्रगतिशील समाज और न ही किसी समृद्ध शाली जीवन के लिये कभी सफल सिद्ध घोषित करार नही दिये जा सकते ये अलग बात है कि आज के सियासी दौर मे सत्ता का मार्ग मुफतखोरी की सियासत से होकर गुजरता हो मगर यह सर्बकल्याण का सार्थक मार्ग कभी घोषित नही हो सकता यह आज कर सेवाभावी , सामथ्र्यशाली पुरूषार्थी , समझदार समर्पित त्यागशील मानव के लिये समझने बाली होना चाहिए जो सर्बकल्याण को ही सबसे बड़ा कर्म और निष्ठापूर्ण कर्तव्य निर्वहन को धर्म मानते है क्योकि जीवन में परिश्रम ही वह सबसे बड़ा समृद्धि का मार्ग कहा गया है जो कड़ी मेहनत के लिये सार्थक सार्थी सिद्ध रहा है । आज जब सत्ता के सहारे सेवा कल्याण मे जीवन का योगदान देने बालो के लिये म...

नवसमाज निर्माण से अनभिज्ञ , धर्म जाति मे उलझा पुरूषार्थ

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  समृद्ध जीवन मे कंगाली का भूचाल ................तीरंदाज ? व्ही. एस. भुल्ले  भैया - गर म्हारे को भी कोई वाशिंग मशीन मिली तो मने भी गंगा स्नान कर आउॅगा और सारे पुण्य पाप हाथो हाथ धो मने भी समृद्ध निशकलंक समाज में शामिल हो इसी जीवन में धन्य हो जाउॅगा । और जाति पाति से पीछा छुड़ा धर्म के ही आधार या फिर जीवन पद्धति के आधार पर ही नव समाज निर्माण का भाग बन स्वयं की सात पीढ़ियो को धन धान्य बना जाउॅगा । रहा सबाल कंगाली के भूकंप भूचाल का तो वह भी म्हारा ही नही म्हारी आने बाली पीढ़ियो का कुछ भी नही उखाड़ पायेगा । और आने बाले समय में समय चक्रवति सम्राट का परचम म्हारे बालो का फहरायेगा ।  भैयै - बाबलो की तरह तने यह कै अर्र बर्र बोल रिया शै कै थारे को मालूम कोणी एक तरफ सीत लहर तो दूसरी तरफ औलावृष्टि का कोहराम मचा है । उधर बाबा के राज्य के राज्य मे सत्ता के लिये जबरदस्त तोड़फोड़ का दौर चल रहा है । सुना है पाॅच बर्ष तक सत्ता की मलाई अपनो की भलाई की खातिर फाकने बाले सत्ता का जहाज किनारे पर पहुॅचने से पहले ही डूबने की खबर से पूर्व ही जहाज छोड़ कूदने मे लगे है और फिर किसी नये जहाज की सबारी करने हु...

उ.प्र. - समृद्ध सियासत का महामंथन

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गोलबंद होते सामथ्र्यशाली और पुरूषार्थी    नियती तय करेगी सार्थकता और सफलता  जरासी चूक खत्म कर सकती है किसी का भी अस्तित्व  वीरेन्द्र भुल्ले  14 जनवरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  चुनावी घोषणा के साथ जिस तरह से उ.प्र. मे छोड़ने जोड़ने का घमासान छिड़ा है उसे देखकर तो सिर्फ यही कहा जा सकता है कि जैसै समृद्ध सियासत के लिये के महामंथन शिरू हो चुका हो , गोल बन्द होते सियासी सामथ्र्यशाली पुरूषार्थी हर एक यह सुनिश्चित कर लेना चाहता है कि सियासी महामंथन से निकलने बाली बैशकीमती हर बस्तु उसके हिस्से मे हो और मंथन से निकलने बाला सियासी अमृत किसी भी सूरज में उसके हाथो से ओझल न होने पाये । जिसमे सियासी दलो का अपना अपना संख्या बल है तो किसी किसी पर अपना अपना गणित तो साथ ही वैचारिक आधार सहित जाति क्षैत्र तथा व्यक्तिगत संख्याबल है अब ऐसे मे अपना अपना अस्तित्व बचाने बालो का भी इन दलो मे खासा दखल है । अगर हम सृजन के अनुशासन टूटने पर हुये मंथन की बात करे तो उस समय के मंथन मे देवता , असुर सभी का योगदान रहा था जैसै की हम कथा कहानियो मे सुनते आये कि दुरभाषा ऋषि के श्राफ से ...

सियासी सत्ताओ ने उजाड़ दी कई पीढ़ी

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कुसंस्कृति का शिकार होता समृद्ध जीवन   अहंम अहंकार में डूबा सियासी कांरबा , आज भी लोक समृद्धि और बैजान तंत्र का मोहताज  वीरेन्द्र शर्मा  10 जनवरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  अगर हम व्यवस्थागत देखे तो 5 बर्ष का र्निधारित समय लोक कल्याण , सेवा , विकास के लिये पर्याप्त माना गया है मगर जो सियासी दल सत्ता साधन , शक्ति संपन्न होने के बाबजूद क्रमशः 45 , 30 बर्ष सत्ता शासन मे रहने के बाबजूद आजादी के लम्बे अन्तराल के बाद एक ऐसे स्थान पर खड़े है । और जिनकी सेवा कल्याण के लिये यह सत्ता शासन मे आये वह आज जन रोजगार , सृजन योग्य संस्कारिक शिक्षा , सहज सस्ती या निशुल्क स्वास्थ सेवा संसाधन , शुद्ध पेयजल , प्रतिभाये पुरूषार्थ संसाधनो की मोहताज है । अब इसके लिये दोषी जो भी करार दिया जाये मगर समृद्ध जीवन से द्रोह करने बाले इस कृत्य के लिये वह जनमानस कतई जबाबदेह नही ठहराया जा सकता जो , अपनी बैबसी , मायूसी , स्वयं के कल्याण के आग्रह के लिये जानी पहचानी जाती है । और जो सत्ता सियासी दलो के भ्रमपूर्ण आचरण व्यवहार का शिकार हो स्वयं की समृद्धि अक्स इन सियासी ताकतो मे तलासती है ।...

विधान त्याग विधि को विकृत कर ब्रम्हाण्ड चलाने का मुगालता

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मानवीय भूल का दंश भोगता बर्तमान , भोगेगा भबिष्य  यह मानव को गर्व नही शर्म का बिषय   स्वकल्याण में डूबी आस्थाओ से सर्बकल्याण असंभव  व्ही. एस. भुल्ले  9 जनवरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म. प्र.  सेवा कल्याण या सर्बकल्याण के नाम जिस तरह से स्वकल्याण मे आस्था रखने बालो का कांरबा चल पढ़ा है इसके लिये स्थापित विधान अनुसार ऐसे लोग कभी कसूरबार न ठहराये जाये जो मानवता से उसके कल्याण संरक्षण हर तरह की सुरक्षा की उम्मीद के हक दार अनादि काल से रहै है । जिनकी सेवा कल्याण के नाम लोकशाही की खामियो या लोकशाही से प्राप्त सामथ्र्य शक्ति का लाभ उठा स्वकल्याण मे जुटे गैंग गिरोहबन्द लोग ऐसे धन दानव जो न तो अब विधान मे आस्था मे रखते है न ही उस विधि का सम्मान करते है जिसे हर मानव ने अपने अपने समृृद्ध सुरक्षित जीवन के लिये अंगीकार किया था । अगर यो कहै कि ऐसे मूड़धय स्वकल्याण मे स्थापित होती अघोषित विकृत विधि से समृचुे ब्रम्हाण्ड को चलाने का मुगालता पाल बैठै है तो ऐसे मानव और महामानव बनने को आतुर महानुभावो का भगवान ही मालिक है मगर ऐसे लोग मनुहार के बीच उस विधान के उस दण्ड विधान की भी अ...

सत्ता की लालसा में हदे तोड़ती सियासत

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सैलाव से अनभिज्ञ सियासी सरोकार घातक  अगर विधि , मान्यताये , संस्कार अक्षुण न रहै तो , सत्ता , सियासत भी सुरक्षित नही पायेगी  निष्ठा के अभाव में बैबस सरोकार   व्ही. एस. भुल्ले  8 जनवरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  गैंग गिरोबंद सियासत और कम्पियूटर , साॅफटवेयर इन्टेलीजैन्सी के युग मे भले समृद्ध सामथ्र्यशालियो के मसूबे जो भी हो जिसके दो ही पक्ष हो सकते है सर्बकल्याण या फिर स्वकल्याण अब इनका निर्धारण भी आने बाला समय ही कर समता है मगर बर्तमान जो घट रहा है वह सत्ता , सियासत मे उचित नही कहा जायेगा यह भी भबिष्य का ही बिषय हो सकता है । सियासत मे हालिया घमासान से विधि , मान्यता , निष्ठा से जुड़े सरोकारो को लेकर छिड़ा है । जिसमे आरोप प्रत्यारोपो के साथ ही विधि सम्बत वह व्यवस्था भी एक पक्ष है जिसकी समीक्षा एक वड़ी चूक को लेकर होने बाली है । अगर सत्ता शहीद हुई तो सियासत छिड़ना स्वभाविक है अगर विधि का डन्डा नही चला तो यह उन मान्यता विधि का माखौल होगा जिस पर हमारा लोकतांत्रिक आधार टिका है । ये अलग बात है कि अगर विधि का चाबुक चला तो यह उस सत्ता की नंगी पीठ पर प्रहार हो...

भव्य , दिव्य , विरासत को विकृत करती कर्तव्य विमुखता

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अमूल्य धरोहर का माखौल उड़ाती सियासत  व्ही.एस. भुल्ले  8 जनवरी 22 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  जीवन के सर्बोच्यतम संस्कारो की विरासत , उसके उत्तराधिकारी समाज का , सत्ता , सियासत , स्वार्थ के लिये कभी इतना भी छरण हो सकता है शायद ही उस पीड़ी ने भी कभी सपने मे न सोचा होगा जिन्होने अपनी आने बाली नस्लो , पीढ़ियो या समस्त जीव जगत कल्याण के लिये अपने अमूल्य प्राणो की आहूति , यह भली भांती जान समझते दी कि वह जो इस अमूल्य जीवन को सर्बकल्याण में दाॅब पर लगा रहे है जिसे वह पूरे ऐश्वर्य विलासता से भोग सकते है । मगर उन्होने बगैर कोई छड़ गबाये 84 लाख यौनी बाद प्राप्त जीवन को कठिन तपस्या त्याग बलिदान के रास्ते उच्चतम संस्कार जीवन मे स्वीकार्य समृद्ध संस्कृति नीति , सिद्धान्तो की स्थापना के लिये न्यौछावर कर दिया जिससे वह बर्तमान पीढ़ी सहित भबिष्य की आने बाली पीढ़ियो को यह सुसंस्कृत संस्कार संस्कृति उपहार स्वरूप विरासत में छोड़ पाये । मगर आज मौजूदा हालात में यक्ष सबाल यह है कि हमारे पूर्वजो की अमूल्य विरासत इस तरह बांझ हो सत्ता , सियासत , स्वार्थो के इस तरह मातम मनायेगी जो मानव जीवन की अमूल्य ...

समाधान में चूक सिपहसालारो की कर्तव्यविमुखता या बैबसी

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सर्बकल्याण में पुरूषार्थ का संरक्षण हर सामथ्र्यशाली का धर्म  कीर्ति , कलंक के भंबर मे फंसा पुरूषार्थ  व्ही. एस. भल्ले  6 जनवरी 22 विलज टाइम्स समाचार सेवा म. प्र.  कहते है सृजन मे कर्तव्य मार्ग पर कलंक कीर्ति का जोड़ा होता है और संतुलन उसका आधार मगर जब सामर्थ का पुरूषार्थ सर्बकल्याण में हो तो ऐसे में हर सामथ्र्य शाली का धर्म कर्म होना चाहिए कि वह उसका संरक्षण , रक्षण का कार्य अपना कर्तव्य समझे । अपनी कीर्ति का एहसास कराये जो यश के साथ यशस्वी भी हो भले ही इस कर्म के लिये उसकी कीर्ति स्थापित हो या फिर कलंक हासिल हो मगर पुरूषार्थ के वक्त दिल दिमाक में संकोच नही होना चाहिए । यही जीवन का यथार्त होता है जो सत्य भी है और युगो युगो से सिद्ध भी । हमें यह नही भूलना चाहिए के जीवन का काल चक्र मे बड़े बड़े मानव महामानव कलंक कीर्ति से अक्षुण नही रख सके इतिहास गबाह है । अगर यह सत्य है तो साधारण या आम मानव की क्या वैशाख है इस सत्य से आज हर पुरूषार्थी सामथ्र्यशाली को अवगत होना चाहिए । क्योकि हर जीवन के दो पहलू होते है जीवन मे यश और अपयश जिसका निर्धारण मानव के कर्म अनुसार होता है ।  ...

नरेन्द्र कुमार बने लोकनिर्माण के इन्जीनियर इन चीफ

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वीरेन्द्र भुल्ले  4 जनवरी 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र .  पी. आई. यू में संचालक पद पर पदस्थ मृदु मिलनसार कर्तव्य के प्रति संजीदा नरेन्द्र कुमार को आज म.प्र. शासन द्वारा लोकनिर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता पद पर पदस्थ किया गया है पूर्व प्रमुख अभियंता ए. के. अग्रवाल के सेवा निवृत हो जाने के कारण यह पद रिक्त हुआ था जहां पर राज्य शासन द्वारा नरेन्द्र कुमार को पदस्त किया गया । निश्चित ही लोकनिर्माण के लिये यह सुखद विषय है कि अब एक जीवट व्यक्तित्व म.प्र. के निर्माण विभाग को गति देने के साथ प्रचलित कार्यो दुत्रगति मिलेगी कुमार के ई. एन. सी बनने पर उनके अधीनस्त शुभ चिन्तको के बधाई का तांता लगा है देखना होगा आर्थिक स्थति से जूझ रहै लोकनिर्माण को वह कैसै गति प्रदान करते है । यू तो कुमार को राष्ट्र्ीय राजमार्ग से लेकर , पी. आई. यू के अलाबा विभागीय कार्यो का बड़ा अनुभव रहा है और विभाग मे उनके कार्य प्रति रूचि का लोहा माना जाता रहा है । आज जब उन्है उन्ही के विभाग का चीफ बनाया गया है यह उनकी अपने विभाग और कार्य के प्रति निष्ठा का ही परिणाम है । कि वह अब प्रमुख अभियंता के रूप मे सेवाये ...

स्वराज को शीर्ष पद से पुनः शुभकामनायें ..............? तीरंदाज

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व्ही.एस. भुल्ले  4 जनवरी 22 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  भैया - म्हारी तो गाड़ी भरी कलम घिस ली मगर आज तक कोई संदेश नही आया । जैसै धीर गंभीर समाज पहले भी अहम मौको पर चुप रहा आज भी वह मुॅह में मिश्री डाल शांत बैठा है मगर जब आज सत्ता के शीर्ष पद से पुनः शुभकामना संदेश आया वह भी साॅसल मीडिया के ईमेल पर तो म्हारे को विश्वास हो लिया कि इस महान देश में कोई तो ऐसा पुरूशार्थी है जिसने स्वराज को समझ उसे सम्मान जनक तरीके से शुभकामना संदेश भेजने की कोसिश तो की अगर यह संदेश 130 करोड़ का नेतृत्व करने बाले शीर्ष पद से है तो उसकी सराहना भी होना चाहिए और आभार भी , भले ही मामला साॅसल इन्टेेलीजेन्सी का हो या कम्पियूटर इन्टैलीजेन्सी का हो , फिलहाॅल भाव जिसका जैसा भी हो वह कम से कम अन्तरमन भाव की स्वीकारोक्ति तो किसी को है स्वराज कि जो स्वराज को पुनः शुभकामना संदेश मिला । सच बोल्यू तो भाया मने तो धन्य हो लिया , मगर मने स्वयं को तो धन्य तब समझूगा जब म्हारी महान संस्कारिक विरासत का मार्ग निशकंटक भाव से प्रस्त होगा , और मने अपनी आॅखो से देख उसकी अनुभूती कर सकू । मगर यह तभी संभव है जब बाबा विश्वनाथ ...

भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था का भयानक सच

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 केन्द्रीयकृत व्यवस्था ने छोटे मोटे सेवा , निर्माण, सप्लाई , छपाई उद्योग की निकाली जान  पारदर्शिता के नाम व्यवस्था में पैर पसारता माफिया राज  वीरेन्द्र शर्मा  3 जनवरी 22 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  भय , भूख , भ्रष्टाचार मुक्ज व्यवस्था का चेहरा ऐसा किसी ने शायद सपने में सोचा होगा जब यह नारा म.प्र. की पावन धरा पर बुलंद था तब लोगो बड़ी उम्मीद की थी कि उसे अब एक ऐसी व्यवस्था नसीब होने बाली है जिससे वह अपने अमूल्य जीवन का निर्वहन निरविघन ढंग से नई व्यवस्था में कर सकेगे मगर उसे यह इल्म न था कि जो पारदर्शी व्यवस्था जन्म लेने बाली है उसका स्वरूप इतना भयानक होना कि जिन्दा तो जिन्दा मुर्दे भी सरमा जाये । बहरहाॅल हम बात कर रहै है म.प्र. मे सेवा निर्माण , विकास , छपाई , सप्लाई से जुड़े उन छोटे मोटे धन्धे व्यवसाय की जिससे लगभग औपचारिक अनौपचारिक तौर प्रदेश के 10 फीसद लोगो को सीधा तो लगभग 20 फीसद लोगो को अनौपचारिक तौर पर रोजगार मिलता था । मगर आज इस रोजगार के क्षैत्र मे मातम पसरा पढ़ा है । कारण केन्द्रीयकृत व्यवस्था और पारिदर्शिता के नाम परदा पृथा इसमे किसी को संदेह नही होना ...