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Showing posts from April, 2022

आन्तरिक सुरक्षा सिद्ध करने में अक्षम सिद्ध होती सत्ताये

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स्वस्वार्थ और वोट लालसा मे टूटते जीवन आधार   सत्ता मूल से द्रोह करते मौजूद संसाधन सरोकार  वीरेन्द्र भुल्ले  30 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  भोपाल म.प्र. - गत दिनो देश के ग्रह मंत्री अपने औजस्वी उदवोधन मे सुरक्षा की कमान सम्हालने बाले संसाधनो और म.प्र. की सत्ता को बड़े ही वैज्ञानिक तकनीक से सुसज्जित आधार को अपराध रोकने अपराधियो को कानूनी दायरे मे ला न्याय का राज कायम करने के कई टिप्स दे यह उम्मीद जाहिर कर गये हो कि मौजूद हालात मे सुरक्षा को लेकर क्या चुनौतिया हो सकती है और उनसे कैसै निपटा जाये मगर उनकी पीठ फिरते ही ऐसा कुछ म.प्र. के मौजूदा संसाधनो के बीच ऐसा कुछ नही दिखा जिससे यह कहा जा सके कि जिस संवेदनशीलता के साथ जिस गम्भीरता के साथ ग्रहमंत्री ने आन्तरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने अकेडमी मे बारिक से बारिक पहलू को समझाते हुये उम्मीद जाहिर की वह भली भूत होने बाली है । लगता है सत्ताओ मे अब सुरक्षा के मायने और संसाधनो पर्याय सियासी बनते जा रहै है और जिन संस्थाओ पर जीवन को सुरक्षा देने का भार है वह संस्कारी होते जा रहै है परिणाम की वह अपने मूल को भूल आग्...

कर्तव्य विमुख राजधर्म और समृद्ध जीवन की दुर्दशा

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  सृजन में जीवन रक्षा , न्याय सबसे बड़ा मानव धर्म  जीवन की रक्षा उसका संरक्षण ही सत्ताओ का अस्तित्व आधार  पशुवत संस्कृति से थर्राया सुसंस्कृत मानव जीवन  नैसर्गिक जीवन हुआ निढाल  व्ही. एस. भुल्ले  30 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  सत्ताओ की स्वार्थवत उदारता के चलते जिस तरह से अपनी अपनी आस्थाओ को न्याय पाने दिलाने बगैर राजसत्ता , राजधर्म की परवाह किये सड़क पर संग्राम देखने मिल रहा है उसे देख कर तो बस यही कहा जा सकता है कि सत्ताये आजकल स्वयं ही अपने आधार के अस्तित्व को अस्वीकारने पर आमदा है और ऐसे मे नैसर्गिक समृद्ध जीवन निढाल हो चुका है कर्तव्य विमुख मानव , राजधर्म में जिस तरह से समृद्ध जीवन विलख रहा है और अपनी दुर्दशा पर आंॅसु बहा रहा है । वह उसका यह नैसर्गिक स्वभाव नही क्योकि सृजन मे मानव जीवन रक्षा का बड़ा आधार सिद्ध रहा है । मगर जिस पशुवत संस्कृति का शिकार , आज समृद्ध जीवन हो रहा है वह किसी महापाप ही नही किसी जीवन द्रोह से कम नही है । अगर हम यो कहै कि आज संुसस्कृत सभ्यता जिस तरह से थर्रा रही है उसके परिणाम आने बाले समय में कोई बहुत अच्छे रहेने बा...

बातो के बतासो से लड़खड़ाता निजाम

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बैलगाम हुये सेवादार  अल सुबह सजे दरबार से राहत की उम्मीद  वीरेन्द्र भुल्ले  26 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  मध्य प्रदेश के अगर हम लगभग 53000 गाॅबो की बात छोड़ दे तो प्रदेश के लगभग 52 जिले में ही सेवा सुबिधाओ की हाॅलत नासाज है जिसमें शिवपुरी जिले ही को ले तो विगत 10 बर्षो मे शुद्ध पेयजल के नाम लगभग 200 करोड़ फूक देने के बाबजूद हालात जस के तस बने हुये है । और इस भीषण गर्मी मे शिवपुरी जिला मुख्यालय पर ही टैंकरो का शहर की सड़को पर दौड़ना शुरू हो चुका है । बिलबिलाता लोग कही रतजगा तो कही कही अपने अस्तित्व से संघर्षरत सायकल से पेयजल ढोकर काम चला रहै है । और जबाबदेह लोग लग्झरी कारो के ए सी मे बैठ सेवा कल्याण मे जुटे है । कारण साफ है कि सत्ताये शायद अब मान चुकी है कि किसी चिल्लाने या गिड़गिड़ाने का अब लोकतंत्र मे कोई मतलब ही शेष नही रह गया सो अब सेवादार भी निजाम को देख बैलगाम हो चुके हो जनधन से पगार भत्ते , बगंला , लग्झरी वाहनो का लुफत उठाने बाले शायद यह भली भांती जानते है कि उनका न तो कुछ उखड़ने बाला है न ही कोई कुछ बिगाड़ने बाला है । कहते जब रैइअन ही नैतिक रूप से बा...

मूल को चुनौती देती , महात्वकांक्षाये

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  विध्वंश की व्याख्या से अनभिज्ञ , मानव हुआ बैलगाम  बैड़ागरग के कागार पर हजारो लाखो बर्ष की त्याग तपस्या  टूटते विश्वास पर चुप्पी खतरनाक  व्ही. एस. भुल्ले  23 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  अगर सत्ता सर्बकल्याण की कीमत लोकतंत्र में इतनी वीभत्स खतरनाक है । तो ऐसे समृद्ध खुशहाॅल जीवन से तो उस अभाव ग्रस्त जीवन और जीवन का घोरतम संघर्ष ही , अब मानव और मानवता का सर्बोत्तम संस्कार होना चाहिए । क्योकि जिस तरह से लोेकतंत्र मे आशा अकांक्षाये टूट रही है और बांझो की तरह अपने खुशहाॅल समृद्ध जीवन के लिये विलाप करने बैबस मजबूर  हो रही है । वह किसी वीभत्स सपने से कम नही क्योकि महात्वकांक्षाये अपने ही मूल को भूल हजारो लाखो बर्ष की त्याग तपस्या से स्थापित उस विश्वास को तोड़ने मे जुट चुकी है जो समृद्ध जीवन का मूल आधार है विभिन्न रूपो में मानव जीवन के बीच अपनी गहरी पैठ जमाती आर्थिक सियासी सामाजिक महात्वकांक्षाये आज इतनी बैलगाम हो चली है जिसे न तो अब स्थापित सत्ताओ का कोई भय है न ही उस विधि विधान का डर जिसे अध्यात्म त्याग तपस्या से समृद्ध खुशहाॅल जीवन के लिये उ...

आस्था तोड़ता विश्वास

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सामथ्र्य पुरूषार्थ को लेकर बड़े सबाल   बचपन , जबानी , बुढ़ापा हुआ निढाल   अवसर की अनदेखी से बिगड़ते हालात  व्ही. एस. भुल्ले  21 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  ये अलग बात है कि टूटते विश्वास के बीच सामथ्र्य , पुरूषार्थ को लेकर बड़े सबाल हो और अवसरो की अनदेखी के चलते बिगड़े हालात हो मगर इस बीच आम मूल आस्था का जो विश्वास टूट रहा है वह बड़ा ही घातक है । लोकतंत्र मे निजाम बनाने या बनाये रखने सियासी दलो की अपनी बैबसी मजबूरी हो सकती है । सेवा कल्याण को लेकर उनके अपने अपने सत्तागत लक्ष्य हो सकते है मगर मौजूद परिणाम इस बात के प्रमाण है कि लोककल्याण जनकल्याण , जीवन की समृद्धि में उसका सामथ्र्य पुरूषार्थ आज भी उतना ही अक्षम असफल सिद्ध हो रहा है जितना कभी पहले हुआ करता था । ये अलग बात है कि बाजार के साथ नये नये आचार विचार व्यवहारो का तो विकास हुआ तो वही अधौसंरचना मे भी अमूलचूल परिवर्तन हुआ मगर समृद्ध जीवन के मूल का जो विनाश हुआ है और पानी की तरह पैसा जनधन समय बरबाद हुआ है वह दुखद ही कहा जायेगा क्योकि इसका इतिहास तो होगा मगर वह स्वर्णिम हो यह शायद ही संभव हो अगर...

नजर , नजराना , और दरबार .............? तीरंदाज

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सभासदो की परिषद में लोककल्याण की चर्चा  भैया - मने न लागे कि राजतंत्र के गुलामी के बाद सेवा कल्याण का चेहरा कुछ बदल पाया है । कहने को तो बरस महिनो बाद दरबार सजा था रैययन को उम्मीद थी कि बख्सीस बटेगी , सभासदो को उम्मीद थी कि किल्लत मिलेगी मगर जैसै ही नजरानो के बाद दरबार बर्खास्त हुआ भाई लोगो को बड़ी मायूसी हाथ लगी । सुना निजाम का बजीर कम से कम आम दरखास्तो पर तो नजर करेगा और बिलबिलाते लोगो के जख्मो पर मरहम का इन्तजाम करेगा । मगर जय जय कारो की गूॅज और दरबारियो की आओ भगत मे सब धरी की धरी रह गयी । और देखते ही देखते दरबार बर्खास्तगी के साथ ही निजाम के बजीर  मय लावोलश्कर के साथ आगे बढ़ लिये। सुना है दरबारियो की तो बल्ले बल्ले हो ली और उनकी रसद पानी की भी सुन ली अगर यो कहै कि सारी सभा शुभचिंतक सह पाटियो के मसले सुनने सुलटाने मे ही सुलट ली । अब बैचारी आशा अकांक्षाये छाती कूट रही है और उस दिन को कोस रही है जब राजा रैययन का रिवाज शुरू हुआ और सेवा कल्याण का जन्म हुआ ।  भैयै - महिनो बाद लगे दरबार पर तनै क्यो बिलाप कर रहा है कै थारे को फ्री का राशन तेल नही मिल रहा है ।  भैया - बात स...

अंगीकार विधि विधान में लोकतंत्र

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  लोक का कर्तव्य उन्मुख तो तंत्र का जबाबदेह होना जरूरी  बैधानिक अधिकार प्राप्त व्यवस्था की विडंबना  व्ही. एस. भुल्ले  18 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  समृद्ध , खुशहाॅल , सुंरक्षित जीवन को लेकर अंगीकार विधि विधान में सब कुछ स्पष्ट है मगर व्यख्या में डूबी व्यवस्था का दुर्भाग्य यह है कि वह अंगीकार के दिन से आज तक यह सुनिश्चित करने में क्यों अक्षम , असफल सिद्ध होती रही जिसके लिये लोकतंत्र में उसका वैधानिक अस्तित्व है । अखिर वह क्यो उस मुकाम को हासिल नही कर सकी जिसकी कि आम आशा आकांक्षाओ को आज भी उम्मीद है । करोड़ो करोड़ लोगो के विश्वास पर खड़ा लोकतंत्र क्यो जरा जरा सी बातो पर लड़खड़ाने लगता है आखिर क्यो लोगो का विश्वास टूटने लगता है उनके ही द्वारा अंगीकार व्यवस्था से ? कारण साफ है कि जब तक कर्तव्य उन्मुख लोकाचार और विधि संबत जबाबदेह व्यवस्था अपना अस्तित्व स्थापित नही कर लेती तब तक हमें ऐसे अनेको अनेक अनबुझे सबाल से जूझना पड़ेगा जिनका समृद्ध खुशहाॅल सुरक्षित जीवन से दूर दूर तक कोई बास्ता नही । मगर यह कटु सत्य है कि आजकल ऐसे अनेको अनेक सबालो की आम जीवन ही नही व्यवस्थ...

फूल से कोमल , बज्र से कठोर

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स्वछंद शास्त्रार्थ के अभाव में , दम तोड़ती श्रेष्ठता  स्वयंभू शास्त्रार्थ , ज्ञान , कल्याण में डूबा मानव  व्ही. एस. भुल्ले  16 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  जम्बूदीपे भरत खण्डे , सुसंस्कृत , शोधश्री , शिक्षित , श्रेष्ठ संस्कारी , सर्बकल्याणकारी भाव के उत्तराधिकारी , रहबासी होने पर हर श्रेष्ठ मानव को गर्व भी होता है और उसे गौरव की अनुभूति भी होती है । जो कभी समक्ष सभा , तार्किक , यथार्त शास्तार्थ से सिद्ध था । मगर जब से काल परिस्थिति अनुसार स्वयं स्वार्थ सत्ताओ के अहंकार , महात्वकांक्षाओ के चलते इनका क्षरण हुआ , स्वकल्याण में डूबी मानवता ने सर्बकल्याण का अनादर कर उसे अपमानित किया तब से लेकर अब तक अहंम अहंकार , महात्वकांक्षा , स्वकल्याण का ही झण्डा बुलंद होता रहा । अब इसके उत्तराअधिकारी समय काल परिस्थितिजन्य जो भी रहै हो उनका जो भी सामथ्र्य , पुरूषार्थ रहा हो मगर मानव जीवन और शेष जीवन उतना श्रेष्ठ संस्कारी शोधित शिक्षित सुसंस्कृत सर्बकल्याण में सिद्ध नही हो सका जिसके लिये वह सृजन मे जीवन के रूप मे अस्तित्व मे रहा । कारण वही जो आज भी मौजूद है । जो पहले भी रहा अगर...

हनक की हा हाकार से मचा कोहराम ..........? तीरंदाज

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विधि विद्यान पर उठे सबाल  व्ही. एस. भुल्ले  16 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  भैया - कहते है हनक किसी कि भी हो जब कानून का हेन्टर चलता है तो अच्छे अच्छे डकरा जाते है । फिर वह विधि का माखौल उड़ाने बाले हो या विद्यान को दरकिनार कर अपना हित साधने बालो हो मगर जब से बिल्डोजर काॅल क्या शुरू हुआ है उसने अच्छे अच्छो की नीद उड़ा रखी है । फिलहाॅल तो अन्दर खाने कि खबर यह है कि हनक बालो के बीच अच्छा खासा हा हाकार मचा है । इस बीच फूल से कोमल और बज्र से कठोर होने का जुमला भी बदस्तूर जारी है अब भाया ऐसे मे सच क्या म्हारे तो कुछ समझ नही आ रहा है क्या तालाब नदी नाले नीब खोदने की जगह इसी तरह बैखौफ बिल्डोजर दौड़ेगे और एक से एक आलीशान महलो को इसी तरह कुचलेगे ।  भैयै - डोजर बिल्डोजर की बात तने म्हारे से न कर कै थारे घट की फूटी है जो थारे को सीधी हबाहात की फोटो नही दिखती है । सुना है कभी अपनी एक चिहांड़ से खबर जगत को हिला देने बाला खबर का हाथी बिना दाने पानी के कई महिनो से भूपाल की सड़को पर हफा रहा है । कभी भूपाल मे राज करने बाला खबरो का राजा बुल्डोजर से मिले घावो को आज तक सैला रहा है ज...

सुरसा बनती वोट लालसा

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भ्रष्टाचार और कर्तव्य विमुखता से बिलखा इन्सान  बिगड़ी व्यवस्था पर ताल ठोकते अधिकार  बांझ संरक्षण सुरक्षा पर बिलाप करते समृद्ध जीवन सरोकार  व्ही. एस. भुल्ले  14 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  सुरसा बनती वोट लालसा बिलाप करते समृद्ध जीवन सरोकारो को संरक्षण सुरक्षा के अभाव में कहा ले जाकर कहा छोड़गी यह कहना तो जल्दबाजी होगी मगर भ्रष्टाचार और कर्तव्य विमुखता जिस तरह से इन्सान बिलबिला उठा है आज वह किसी से छिपा नही । बिगड़ी व्यवस्था पर ताल ठोकते अधिकार को भले ही आज स्व स्वार्थो के चलते मानव जीवन के मूल कर्तव्यो का भान न हो मगर जीवन की समृद्धि तब तक जीवन को नसीब नही हो सकती जब तक की जीवन और समृद्ध जीवन से जुड़ी व्यवस्था जबाबदेह कर्तव्यउन्मुख नही हो जाती और भ्रष्टाचार पर लगाम नही लग जाती । मगर आज यह बड़ा ही कठिन सबाल हो सकता है । मगर हल तो खोजना ही होगा । विधि संरक्षण मे स्वयं के अधिकारो को कर्तव्य समझ पुरूषार्थ करने बाले मानव जीवन की सबसे बड़ी दुबिधा यह है कि सही मायने मे न तो वह विधान का ही अनुसरण कर पा रहा न ही वह विधि संबत व्यवस्था को अंगीकार कर पा रहा है । क...

खुशहाॅल जीवन में विधान के साथ विधि का सम्मान भी अहम

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नैसर्गिक निष्ठापूर्ण कर्तव्य निर्वहन ही भय का निदान है  भय न्याय का पुत्र तो समृद्ध जीवन , उसका आधार आस्था   सुशासन में आत्ममुग्ध आस्था , और अवसरो से बंचित बौद्धिक संपदा , मानव संसाधन स्वराज में बड़ी बाधा  व्ही. एस. भुल्ले  10 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  कहते है किसी व्यक्ति , समूह , सत्ता , संगठन में हट और आत्म मुग्ध अहंकार होना कोई नई बात नही , इसका अस्तित्व तो जीवन मे अनादि काल से रहा है । शायद हो सकता है कि सर्बकल्याण से इतर उसका यह स्वभाव नैसर्गिक हो मगर यह कभी समृद्ध जीवन का आधार आस्था नही हो सकता किसी शिक्षा विद ने सेकड़ो बर्ष पूर्व भले ही यह सूत्र प्रतिपादित किया हो कि भय न्याय का पुत्र होता है मगर हमारी नैसर्गिक आस्था कहती है कि समृद्ध जीवन का सम्पूर्ण आधार ही उसकी नैसर्गिक निष्ठा कर्तव्य आधारित होती है जो उसका आधार भी होता है । आज जब विधान का मूल भूल जीवन विधि को भी सहर्ष स्वीकारने में कोताही करता है तो निश्चित ही समृद्ध खुशहाॅल सुरक्षित जीवन का मार्ग स्वतः ही अवरूध हो जाता है । क्योकि जब तक विधान के साथ विधि की मान्यता जीवन मे नही होगी तब...

लोकतांत्रिक सदी के , ऐतिहासिक सुशासित , साॅशल चित्र पर कटे बबाल , पर मानव जगत का संज्ञान .........? तीरंदाज

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व्ही. एस. भुल्ले  9 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  भैया - निष्ठा पूर्ण कर्तव्य निर्वहन पश्चात लोकतांत्रिक सदी का ऐतिहासिक चित्र वायरल करने बालो के बाद अब तो थारी भी हलक में अटकी होगी क्योकि देश भक्ति जनसेवा क्या क्या कर सकती है । हालाकि म्हारे मुखिया इस बात को लेकर मातहतो के आचरण से खासे सख्त नाराज है कि वायरल चित्र से म.प्र. की बैसकीमती फिजा जिसे बनाने मे न जाने कितने करोड़ फूक दिये वह खराब हो रही है और देश मे संदेश अच्छा नही जा रहा है । ये अलग बात है कि निष्ठा पूर्ण कर्तव्य निर्वहन करने बाले मातहत दण्ड स्वरूप लाइन अटैच के साथ देशभक्ति जनसेवा के दायित्व से निलंबित किये जा चुके है । अन्दर खाने की खबर अगर सही है तो कप्तान साहब की निष्ठा से भी मुखिया बहुत कुछ संतुष्ट नही है । हालाकि देशभक्ति जनसेवा के कार्य में जुटे सेवको की दलील थी कि अर्धनग्न अवस्था मे हवालात मे बैठै और प्रभारी के चैम्बर मे नेकर मे खड़े होने के पीछे उनकी बहुमूल्य जान की रक्षा ख्याल रखा गया ये अलग बात है कि उन नागरिको की जान तो बच गयी मगर उनकी इज्जत का जनाजा निकलने से नही बच सका । जिस को लेकर मौजूद ...

कर्तव्य बिमुख होते, सत्ता ,सामथ्र्य , संसाधन

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  झूठ के आंकड़ो ने बिगाड़ा खेल   अनुभूति का अभाव बना आशा अकांक्षाओ का दुश्मन  संकटो से घिरा लोकमत , बिलबिलाता लोकतंत्र  व्ही. एस. भुल्ले  6 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  तकनीक के आगे गिड़गिड़ाता बैबस लोकमत और सरेयाम बिलबिलाता लोकतंत्र भले ही 21सबी सदी की समृद्ध नजीर हो मगर समृद्ध जीवन की अनुभूति का अभाव आज निसंदेह आशा अकांक्षाओ का दुश्मन नजर आता है क्योकि कर्तव्य बिमुख होती सत्ताओ , सामथ्र्य और संसाधनो के बीच झूठ के आंकड़ो ने आजकल जबरदस्त पैठ जमाई है उससे समृद्ध जीवन बिचलित तो आमजीवन का विश्वास डगमगाया हुआ है । कभी करोड़ो को रोजगार तो हालिया आंकड़ा चंद महिने में ही लगभग 13 लाख लोगो को औपचारिक अनौपचारिक रोजगार मुहैया कराता सामथ्र्य भले ही अपने पुरूषार्थ प्रदर्शन पर नही थकता हो और हकीकत उससे भले ही जुदा हो मगर वरवाह किसे जो सत्ता मोह त्याग श्रेष्ठ मानव जीवन का उदाहरण प्रस्तुत कर अपनी संस्कृति संस्कारो को श्रेष्ठता प्रदान करे । अंधी सियासत का कायल हो चुकी सत्ताओ को अब तो यह भान भी न रहा कि जो वह सतत सत्ता के लिये कह सुन रहै है । जिस तरह का आचरण व्...

सत्ता द्वारा , सत्ता के लिये , स्थापित सत्ता , लोकतंत्र से बड़ा घात

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ऐसी सत्ताये कभी कल्याणकारी नही हो सकती  आम नागरिक और युवाओ की समीक्षा बन सकती सारथी  द्रोह पर उतारू सियासी आस्था  व्ही. एस. भुल्ले  6 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  आज जिस रास्ते या पूर्व से जो रास्ता सत्ताये सतत सत्ता मे बने रहने इख्तियार करती रही है या बर्तमान मे भी कर रही है कहते है ऐसी सत्ताये कभी कल्याण कारी नही हो सकती अगर वाक्य में ही हमारे लोकतंत्र मे ऐसी सत्ताओ का बोलबाला बढ़ रहा है और सियासत ऐसी सत्ताओ की गुलाम बन चुकी हो तो फिर शिकायत कैसी ? मगर द्रोह पर उतारू सियासी आस्था का आचरण व्यवहार इसी तरह सत्ता द्वारा , सत्ता के लिये , स्थापित सत्ता की चाकरी करने का बना रहा है । तो वह दिन दूर नही जब लोकतंत्र स्वयं ही बांझो की श्रेणी मे पहुॅच जाये तो किसी को अतिसंयोक्ति नही होना चाहिए । कल्याणकारी भाव के साथ जनतंत्र मे अस्तित्व हासिल कर अपना आधार सुनिश्चित करने बाली सियासत शायद यह भूल रही है कि उसका अस्तित्व भी तभी तक सुरक्षित है जब कि लोकतंत्र बरना अभी तो हालात चाकरी जैसे है आगे यही व्यवहार अगर गुलामी में तब्दील हो जाये तो अचरज की बात नही ऐसे कई स...

कर्तव्य , जबाबदेही पर भारी पढ़ते , अधिकार

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गैंग ,गिरोह , माफिया संस्कृति से जूझते ,जीवन सरोकार  प्रायवेट , लिमिटेड , बहुराष्ट्र्ीय होता , सेवा कल्याण  भ्रमित होता सृजन आधार , डूबती समृद्ध संस्कृति संस्कार  जीवन सिद्धान्त को आयना दिखाते , स्वार्थवत सरोकार  व्ही. एस. भुल्ले  3 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  कहते है किसी भी जीवन का नैसर्गिक स्वभाववस स्वार्थी होना स्वभाविक है । और कर्तव्य के प्रति दृढ़ होना उसकी नैसर्गिक संस्कृति संस्कार जिसका निर्वहन उसे हर कीमत , हर हाल मे जीवन पर्यन्त करना होता है जिसका पालन , सृष्टि मे मौजूद वह हर जीवन करता भी है और उसके लिये वह प्राप्त अपनी नैसर्गिक क्षमता अनुसार बाध्य भी होता है । जो वह अपने जन्म और आधार से लेकर अस्तित्व के साथ लेकर आता है । फिर वह जीवन पैड़ पौधे वनष्पति , जीव जन्तु , पशु पक्षी या फिर मानव के रूप मे हो उनकी जीवन मे अपनी अपनी श्रेष्ठता और सृजन मे उपयोगिता कर्तव्य है जिसका वह अपने जीवन में निष्ठा पूर्ण निर्वहन भी जीवन पर्यन्त करते है । मगर सबसे अहम जीवन मानव का माना गया जिससे उम्मीद विद्याता रख छोड़ी है जिसे सर्बकल्याण के लिये अपने प्राप्...

म.प्र.- सत्तागत नैतिक पतन की पराकाष्ठा

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कोरोना योद्धाओ का शंखनाद  अहम अहंकार में दम तोड़ता विश्वास का आधार  मौत के बंबडर से खुद को छिपाने बालो ने दिखाये तेबर  व्ही . एस. भुल्ले  3 अप्रेल 2022 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  म.प्र. - कभी कभी को तो अब लिखने मे भी शर्म और लेखन से भी इतना घृणा होने लगती है कि आखिर क्या लिखो क्या न लिखो लेकिन जमीर है कि हमें चुप रहने ही नही देता । हाॅल ही मे म.प्र. के अन्दर जो सत्तागत नैतिक पतन देखा मानो उसने पतन की सारी सीमाये तोड़ अपने आप को यह सिद्ध किया कि सत्ता अहंकार कितना अंधा और अहंकारी तिरस्कारी हो सकता है जिसे यह भान भी न हो कि जो कृय वह अपने सामथ्र्य से करने जा रहा है उसका प्रभाव उस समाज उस व्यवस्था पर क्या पड़ेगा उस विश्वास की रक्षा का क्या होगा ? जिसके लिये उसका अस्तित्व है । कभी मौत के बबंडर से खुद को बंगलो बड़े बड़े प्रायवेट अस्पतालो मे छिपा लोगो से लोगो कि जान बचाने की अपील भीख मागने बाले तथा दवा संसाधनो के नाम अरबो फूकने बाले उन जिन्दगी मौत से जूझते कोरोना योद्धाओ कोरोना के सिपाही तो कभी देवदूत की उपमा दे उनका फूलमालाओ से स्वागत , मंचो पर उनकी शान मे कसीदे पढ़त...