Posts

Showing posts from December, 2018

जनता की जीत पर सत्ता का बंटवारा बैवस आलाकमान और मलाई लूटने आतुर, सिपहसालार

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  म.प्र. की महान जनता के जनादेश की जीत पर जीत की दावेदारी जो भी करें। मगर हकीकत यह है कि अहम, अहंकार, भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता ने सत्ता के आचरण, व्यवहार के मद्देनजर एक मौका ऐसे दल को दिया जिसके माथे पर 15 वर्ष पूर्व अहम, अहंकार, भ्रष्टाचार का तिरपुंड खींच उसे सत्ता से विदा किया था। मगर दुर्भाग्य कि 15 वर्ष बाद उसे उसी दल के अलावा कोई विकल्प नहीं मिला। बैसे भी जिस विकल्प पर उसकी मुहर लगी। उसका कोई सार्थक प्रयास जीत के लिए मत हासिल करने में नहीं रहा, सिवाए उसके आलाकमान या उनके सार्गिदों के रोड शो और सभाओं मंदिरों में मत्था टेकने के। बहरहाल अल्प मत ही सही, जो सत्ता उसे मिली उसमें जिस दुसाहस भरे अंदाज में सत्ता की भागीदारी सुनिश्चित हो रही है, उस दुसाहस ने म.प्र. की जनता ही नहीं, आम बुद्धिजीवियों को निराश करने का कार्य किया है। ये अलग बात है कि म.प्र. के नये मुखिया अपनी सूझ-बूझ का उमदा प्रदर्शन कर जनादेश को जन विश्वास में बदलने की कोशिश में लगे है। मगर सत्ता के लिए जिस तरह का आचरण, व्यवहार इस अल्प मत सरकार व आलाकमान की मजबूरी दिख रही है वह फ...

दलों के दंश से कराहता देश अस्तित्व की जंग में अनुभूति, आशा-आकांक्षाओं का कत्लेयाम बेहतर नीतियां, सकारात्मक सोच, प्रमाणिक क्रियान्वयन के आभाव में कलफता सेवा, विकास, कल्याण

Image
व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा।    देश में एक से बढ़कर एक नीतियां, समर्पित नेतृत्वों के रहते सकारात्मक सोच और प्रमाणिक क्रियान्वयन के आभाव में जिस तरह से आशा-आकांक्षा अनुभूति का सरेयाम कत्लेयाम हुआ है उसके चलते बेहतर नीतियां समर्पित नेतृत्वों पर सवाल होना स्वभाविक है। तो वहीं दलों के दंश से समूचा देश कराहने पर मजबूर है। जो त्याग-तपस्या ही नहीं, उन सदपुरूषों सहित इस तंत्र के लिए भी शर्मनाक और दर्दनाक है। जिनका सम्पूर्ण समर्पण राष्ट्र व जनकल्याण में समर्पित रहा है।  कारण प्रमाणिक सांख्यकिय आंकड़े सहित निःस्वार्थ समर्थ ज्ञान का आभाव और अस्तित्व के लिए वैचारिक उन्माद तथा संगठनों के नाम स्वार्थ समूहों के स्वार्थ महत्वकांक्षाओं की जंग में दम तोड़ती गांव, गली, गरीब, किसान की आशा-आकांक्षाऐं, अनुभूूति इस बात की गवाह है कि देश के गांव, गली, गरीब, किसान ही नहीं, मध्यम वर्ग के कल्याण के लिए एक से बढ़कर नीतियां तो बनी। मगर वह दलों के दंश के चलते फली-भूत नहीं हो सकी। जिसे दुर्भाग्य ही कहा जायेगा। क्योंकि जिस देश में 30 फीसदी युवाओं की भीड़ हो और लोग रोजगार के मोहताज इससे ...

जनता की जीत पर, लम्बरदारों में लट्टम लट्ठा किसान, युवा को फाॅरमूले नहीं, तत्काल राहत और स्थाई रोजगार चाहिए

Image
व्ही.एस.भुल्ले मुख्य संयोजक स्वराज विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जनता की जीत पर सवार लम्बरदारों में सत्ता के लिए इस कदर लट्टम लट्ठा होगा। अहम, अहंकार भ्रष्टाचार पीड़ित, गांव, गली, गरीब, किसान, युवा, बेरोजगार और म.प्र. की आशा-आकांक्षाओं ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जिस जनाक्रोश के चलते काॅग्रेस की झोली में अधूरी जीत आ गिरी है और जिस तरह से सत्ता बंटवारे को लेकर घमासान मचा है वह काॅग्रेस के लिए शर्मनाक भी होना चाहिए और दर्दनाक भी। जिस फूट डालों शासन करो की नीति को आज बड़ी-बड़ी सत्तायें, संगठन, अलाउद्दीन का चिराग समझ, अपने निजाम को जिन्दा रखने की संजीवनी मानते है उन्हें पुनः यह समझना आवश्यक है कि जिन्दा कोमों के देश में इस तरह की नीतियां न तो कभी सार्वजनिक तौर पर सफल रही है, न ही प्राशासनिक और राजनैतिक तौर पर। उक्त बात स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने नव गठित सरकार पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही। ज्ञात हो कि स्वराज न तो कोई राजनैतिक दल है, न ही संगठन सिर्फ एक विचार है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से नव गठित मंत्रीमंडल में समृद्ध, खुशहाल म.प्र. के लिए नये-नये फाॅरमूले सुझा...

सत्ता की लूट से आहत, आशा-आकांक्षाऐं फिर बगावत को तैयार सत्ता के आगे कौन समझे इन बेजुबानों की जुबान

Image
व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  विगत दिनों जिस तरह से सत्ता का स्वरूप बदलने आशा-आकांक्षाओं ने बूथ लेवल तक पहुंच निजाम बदलने का कार्य किया और आक्रोशित दिखी, शायद उनके पास आज अफसोस के अलावा कुछ शेष नहीं। क्योंकि जिन चेहरों के चलते काॅग्रेस ने 15 वर्ष का वनवास झेला और आशा-आकांक्षाओं ने 25 वर्ष तक कष्ट झेला, शायद वह आज मायूस हो।  क्योंकि जिस तरह से विगत दिनों से सत्ता का बंटवारा टुकड़ा दर टुकड़ा हो रहा है और सक्षम मुखिया होने के बावजूद भी वह स्वार्थवत लोगों को झेल रहा है उसका परिणाम जो भी हो। मगर इतना तय है कि जनाक्रोश के रथ पर लहराती सत्ता की पताकाऐं जिस तरह से नौंची जा रही है। अगर यहीं हाल रहा तो 2019 में परिणाम अप्रत्याशित हो, तो किसी को अति संयोक्ति नहीं होनी चाहिए।  देखा जाए तो उम्मीद तो आम आशा-आकांक्षाओं को तो यह थी कि अहम, अहंकार, भ्रष्टाचार में डूबी सेवाभावी सरकार को सबक सिखाने के साथ जो भी नया सत्ता में आयेगा वह समृद्ध, खुशहाल जीवन के साथ बेजुबान गौवंश की जुबान समझ उनका भी कल्याण करेगा और सत्ता का व्यवहार आशा-आकांक्षाओं के अनुरूप होगा। मगर किसानों ...

राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण में बोले राठखेड़ा जागरूकता, जबावदेही, जीवन में अहम

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  खादय विभाग एवं जिला उपभोक्ता अधिकार संगठन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के अवसर पर मानस भवन में आयोजित कार्यक्रम में पोहरी विधायक सुरेश राठखेड़ा कहा कि जीवन में जागरूकता, जबावदेही अहम होती है। शोषण की शुरूआत जानकारियों के आभाव में ही होती है। जिसके प्रति हर नागरिक को जागरूक रहना चाहिए।  उक्त विचार पोहरी विधायक सुरेश राठखेड़ा ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बतौर व्यक्त की। इससे पूर्व खादय अधिकारी ने उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के बारे में विस्तार से बताया। वहीं वक्ताओं में पैट्रोल संचालक, तरुण अग्रवाल नापतौल अधिकारी तथा स्वराज के मुख्य संयोजक प्रेस क्लब अध्यक्ष वीरेन्द्र शर्मा भुल्ले जी सहित, पत्रकार श्री संजीव बांझल सहित अन्य लोगों ने भी उपभोक्ता दिवस की उपादेयता पर प्रकाश डाला।  इस मौके पर मंच पर एस.डी.एम  तोमर उपभोक्ता अधिकार संगठन की अध्यक्ष श्रीमती श्वेता शर्मा पत्रकार चौहान चौहान मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन समाजसेवी ग्रीस शर्मा ने किया। 

क्या सच होगा, राहुल का सपना कब खत्म होगा, सत्ता और सत्याग्रह का संघर्ष

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि राहुल के सपनों में सियायत कम और सच ज्यादा होता है। कारण कि वह स्व. पंण्डित नेहरू, स्व.इन्दिरा गा़ंधी और स्व. राजीव गांधी तथा श्रीमती सोनिया गांधी के पुत्र है। जिन्होंने कभी भी राष्ट्र व जन की खातिर, सत्ता को तरजीह नहीं दी। स्व. नरसिंह राव से लेकर, डाॅ मनमोहन सिंह के नेतृत्व में सरकार को राष्ट्र, जनहित में स्वीकार कर, देश के लगभग 80 करोड़ लोगों के लिए शिक्षा, रोजगार, सूचना का संवैधानिक अधिकार दिलाने के बाद खादय अधिकार के लिए बीमार होने के बावजूद भी सदन की कार्यवाही में उपस्थित रहने वाली सोनिया गांधी ने कभी भी सत्ता को तरजीह नहीं दी, न ही मनमोहन सरकार के समय अपराधियों, भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने वाले प्रस्तावित बिल को फाड़ने वाले राहुल ने तरजीह दी। अगर राहुल गांधी चाहते तो वह उस वक्त कभी भी प्रधानमंत्री बन सकते थे। मगर उन्होंने उस वक्त भी सत्ता के बजाए संघर्ष को चुना और गांव, गली, गरीब, किसान, पीड़ित, वंचितो की आवाज को बुलंद किया। इतना ही नहीं उन्होंने रामलीला मैदान के मंच से यह घोषणा भी सरेआम की हैं...

नगरपालिका ने आयोजित किया स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 जागरूकता कार्यक्रम

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  शिवपुरी स्थित गांधी पार्क मैदान मे नगरपालिका परिषद शिवपुरी द्वारा स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसको नगरपालिका अध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह उपाध्यक्ष अनिल शर्मा अन्नी ने सम्बोधित किया। वहीं नगरपालिका सी.एम.ओ, सी.पी. राय स्वास्थ अधिकारी गोविंद भार्गव ने उपस्थित जनसमूह को स्वच्छता के सम्बंध में विस्तार से बताया। इस मौके पर सैंकड़ों की संख्या में महिला, पुरूष, युवा, बच्चे मौजूद रहे।

भारतीय रेल की अदभुत उपलब्धि एक आदमी के भरोसे हो रहा है, 20 ट्रेनों का संचालन पूर्वी, पश्चिमी, काॅरिडोर पर रेल मंत्रालय की सुश्ती घातक

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  देखा जाए तो पूर्वी, पश्चिमी, रेल काॅरिडोर के अहम भाग से अनभिज्ञ रेल मंत्रालय आज भी लोगों को हताश-निराश किए है। अगर इस भाग की इसी तरह रेल मंत्रालय अनदेखी करता रहा, तो इसका दंश समूचे देश को भोगना पड़े तो कोई अति संयोक्ति न होगी।  देखा जाए तो वर्षो पूर्व, पूर्वी, पश्चिमी छोर को जोड़ने वाला लगभग 250 किलोमीटर का प्रस्तावित रेलमार्ग सवाई माधोपुर से झांसी वाया श्योपुर, शिवपुरी आज भी अपनी शुरूआत होने की आस लगाए बैठा है। कई मर्तवा इस मार्ग को लेकर चुने हुए जनप्रतिनिधि और बुद्धिजीवियों द्वारा रेल मंत्रालय के संज्ञान में लाया गया। मगर बुलेट ट्रेन दौड़ाने की जिद ने जहां राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस अहम मार्ग और पर्यटन एवं खनिज फ्रूट प्रोसेसिंग उघोग से जुड़े इस मार्ग पर ध्यान देना उचित नहीं समझा। सबसे बड़ी समझने वाली आश्चर्यजनक बात तो यह है कि जिस शिवपुरी रेल स्टेशन से लगभग 20 रेल गाड़ियां संचालित होती है उस स्टेशन पर समस्त वाणिज्यक सुविधाओं एवं रेल संचालन के लिए मात्र एक आदमी तैनात है। जिसे टिकट वितरण एलाउंस, पूछताछ के साथ लगभग 20 गाड़ियों का संचालन ...

किसान और गौ संरक्षण, सरकार के सामने, बड़ी चुनौती सार्थक पहल से अनभिज्ञ सत्ताधारी दल

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  भले ही कर्ज माफी के ऐलान से फाॅरी तौर पर पीड़ित, वंचित, प्रताड़ित किसानों को राहत की आस बंधी हो। क्योंकि किसान तो वोटर है और गौवंश बेजुबान। मगर उन बेजुबान का क्या, जो आज भी अपना सबकुछ छिन जाने के बावजूद भी अपनी व्यथा सुनाने बैवस और अपने हक के मोहताज है।   ये अलग बात है कि सत्ताधारी दल के वचन पत्र में गौवंश का स्थान है। जिसमें हर ग्राम पंचायत में गौशाला खोलने का सरकार का विचार है। जिस गौवंश के श्राफ से समस्त भारत भूमि कांपती नहीं थकती, उस गौवंश पर सरकार का संज्ञान निश्चित ही सराहनीय कदम कहा जायेगा। बहरहाल जो भी हो, अगर किसान और इन महान गौवंश बेजुबान के साथ न्याय नहीं हुआ तो परिणाम सुनिश्चित है। जो 2019 में सार्थक भी होंगंे और सफल भी। यह म.प्र. की सरकार और काॅग्रेस को समझने वाली बात है। 

मंत्रीमंडल में वर्गीय सन्तुलन अहम जनाक्रोश, आशा, आकांक्षाओं की विसात पर सत्ता सुख हावी

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।        म.प्र. मंत्रीमंडल गठन को लेकर जिस तरह से राजस्थान, छत्तीसगढ़ में सियासी सुगवाहट चल रही है कहीं ऐसा न हो कि काॅग्रेस जनाक्रोश, आशा, आकांक्षाओं की विसात पर सत्ता सुख हावी हो जाये या फिर सत्ता में भागीदारी को लेकर वर्ग सन्तुलन बिगड़ जाए। जो 2019 के लिए काॅगे्रस को घातक साबित हो, तो कोई अति संयोक्ति न होगी।  देखा जाए तो म.प्र. में लगभग 33 प्रतिशत ओबीसी, 22 प्रतिशत सामान्य और 21 प्रतिशत एसटी, 16 प्रतिशत एसटी तथा 8 प्रतिशत अल्प संख्यक वर्ग के लोग रहते है।  जिस तरह के अहम अहंकार भरे निर्णयों ने आम आशा-आकांक्षाओं से अनुभूति को पूर्ववत सरकार को दूर रखा और वहीं कारण कहीं वर्तमान सत्ता का सुख सत्ता में भागीदारी को लेकर सरकार पर भारी न पड़ जाए और इसका भी हर्ष 2019 से पूर्ववत सरकार की तरह सरकार का हर्ष न हो जाए। क्योंकि जिस तरह से बगैर किसी आधार भूत ढांचे के ब्लू प्रिंट निर्माण किए बगैर आशा-आकांक्षाओं पर फाॅरी तौर पर मरहम लगाने की जो कोशिश हो रही है उसके सफल सिद्ध होने में कहीं न कहीं सत्ता का अहम, अहंकार स्पष्ट झलकता है...

कितनी सार्थक, सफल, सिद्ध होगी राहुल को नई सरकार मंत्रीमंडल गठन को लेकर उठे सवाल

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।      जिस तरह से म.प्र. में नई सरकार के गठन के साथ, आए दिन मंत्रीमंडल के नामों को लेकर सोशल मीडिया में चल रही चर्चाओं के मद्देनजर मंत्रीमंडल गठन से पूर्व ही सवाल खड़े होना शुरू हो गए है और जिन आशा-आकाक्षांओं के साथ आम मतदाता केे आक्रोश के चलते उसने काॅग्रेस को वोट दिए थे और जिस युवाओं की भीड़ ने राहुल के बयानों पर विश्वास और सिंधिया के सत्याग्रह को लेकर काॅग्रेस पर विश्वास व्यक्त किया। अब जबकि काॅग्रेस सरकार में है और संभावित मंत्रियों के नाम हवा में। ऐसे में सियासी उठा-पटक के मद्देनजर लोग सवाल करने से नहीं चूक रहे। जिस सरकार की नाकामियों के चलते काॅग्रेस को म.प्र. में 15 वर्ष का वनवास भोगना पड़ा। आज उन नामों को लेकर आम मतदाता सनाके में है। हो सकता है कि काॅग्रेस आलाकमान की 2019 के मद्देनजर अपनी कोई मजबूरी रही हो और सियासी समझ वालों की उसे जरूरत। मगर जिस तरह से संगठन की सत्ता सौंपने में मंत्रीमंडल गठन को लेकर सियासत चल रही है। कहीं ऐसा न हो कि राहुल के मिशन 2019 के लिए, लिए जाने वाले निर्णय बाधक साबित हो।  क्योंकि जिस युवा ता...

अन्नदाता के आगे, खाद की किल्लत, जनादेश का अपमान

Image
व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। वर्षो से आत्महत्या करते अन्नदाताओं को राहत देने में अक्षम रही सरकारों को सबक सिखाते हुए अन्नदाताओं ने भले ही जनादेश के माध्यम से अपने रोष का इजहार किया हो और ऊपर वाले की कृपा से इस वर्ष पर्याप्त रूप में उसे खेती, किसानी के लिए जल का भंडार मिला हो। मगर ऐन वक्त पर खाद की किल्लत ने किसानों को निराश किया है और यह अन्नदाताओं के साथ उसके द्वारा दिए गए जनादेश का अपमान ही है।  अगर म.प्र. में फल-फूल रही ग्रणित राजनीति का संज्ञान ले, तो जिस तरह से आंकड़े सियासी लोगों के माध्यम से सामने आ रहे है। उसके अनुसार विधानसभा चुनाव से पूर्व 4.10 लाख मीर्टिक टन खाद उपलब्ध कराने वाली केन्द्र सरकार इस मर्तवा 3.70 मीर्टिक लाख मीर्टिक टन खाद का आवंटन कर अभी तक मात्र 1.8 लाख मीर्टिक टन खाद ही उपलब्ध करा सकी है। अगर आरोपित आंकड़े सही है तो यह अन्नदाताओ के जनादेश का अपमान ही है। क्योंकि म.प्र. में गठित सरकार को अभी एक सप्ताह भी पूरा नहीं हुआ है और खाद के लिए किसान के आगे संकट कहीं से भी न्यायपूर्ण नहीं कहा जा सकता है।  ये अलग बात है कि सियासी बयानबाजी के ...

राष्ट्रद्रोह का मंच बनता, बेजा सियासी विरोध

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह का मार्ग, गिरोहबन्द तथाकथित सियासी संगठनों ने सत्ता हासिल करने या विरोधी संगठनों को नीचा दिखाने स्वयं को स्वच्छ बेदाग साबित करने का शुरू हुआ है। वह न तो जन, राष्ट्र हित में हैं न ही 80 करोड़ के लगभग सस्ते राशन के मोहताज 30 फीसदी बेरोजगार हाथ और आधे से अधिक अल्परक्त की शिकार आशा-आकाशाओं के हित में है। अपने सियासी कलंक छिपाने दूसरे के मुंह पर कालिख पोत अराजकता को आमंत्रण देती सियासत किसी का भला नहीं करने वाली। जिस राष्ट्र में शैक्षणिक, वौद्धिक, प्रतिभा सम्पन्न मानव संसाधन खुली हवा का मोहताज हो और मानव शक्ति बेकाम ऐसे में आवश्यकता राष्ट्र को सम्हालने के साथ मौजूद संसाधनों के बल ऐसा आधार भूत ढांचा खड़ा करने की है, जिससे पीड़ित, वंचित लोगों सहित गांव, गली, गरीब, किसान का जीवन स्वाभिमानी समृद्ध, खुशहाल बन सके और खाली हाथों को रोजगार मिल सके। क्योंकि वक्त सब देख रहा है और जनता जनार्दन शान्त है। अगर ऐसा ही निहित स्वार्थो की खातिर सियासत में चलता रहा। तो यह इस महान राष्ट्र के लिए दर्दनक होगा और एक महान संस्कृति के लिए शर्मनाक।

शपथ के साथ चुनौतियों का भण्डार सशक्त सियासत और संसाधनों की दरकार

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जनाक्रोश के रथ पर सवार नई सत्ताओं के शपथ का जश्न भले ही विभिन्न रूप नेे एक ही दिन में निवट लिया हो। मगर नव निर्वाचित, सत्ताओें के सामने चुनौतियां कुछ कम नहीं। सबसे बड़ी चुनौती तो छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश, राजस्थान की सरकारों के सामने एक स्थिर सशक्त, सक्षम, सरकार देने की होगी। साथ ही वचन, घोषणा के अनुरूप किए गए वादों को पूर्ण करने की होगी। इसके अलावा स्वच्छ समृद्ध, सशक्त सियासत और ऐसे संसाधनों के साथ आधार भूत ढांचा खड़ा करने की होगी। जिससे मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में गांव, गली, गरीब, किसान, नौजवान की आशा-आकाक्षाओं को पूर्ण कर, उनका जीवन समृद्ध, खुशहाल बनाया जा सके। क्योंकि काॅग्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए कि यह जनादेश, जनाक्रोश आधारित है। 

क्रूर सियासत, भ्रष्टाचार, रोजगार, पीड़ित, वंचित, किसान ले डूबे सरकार झूठ, अहम, अहंकार, आंकड़ो ने किया बंटाढार

Image
व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   समीक्षा हार-जीत की म.प्र. की राजनीति में जो भी हो। मगर संभावित सच से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। जो कि क्रूर सियासत, भ्रष्टाचार, रोजगार, पीड़ित, वंचित, किसान, अहम, अहंकार, विद्ववानों का तिरस्कार और आंकड़ों का कारोबार ले डूबा सरकार।  अगर जीत वालों को ही ले तो वहां भी सेवा कल्याण के लिए निष्ठा पूर्ण संघर्ष करने वालों को दरकिनार कर आमजन, कार्यकर्ताओं की आशा-आकाक्षाओं के अनुरूप उनके साथ काॅग्रेस आलाकमान न्याय नहीं कर सका। जिसकी रामलीला मैदान ही नहीं, कई मंचों पर काॅग्रेस आलाकमान ने दलील दी थी कि यह मंच उन सघर्षशील कार्यकर्ताओं के लिए खाली रखा गया है और किसी भी आसमानी नेता को स्थान नहीं होगा। मगर म.प्र. की सियासत में फिलहाल सियासी सच यह है कि विगत 15 वर्षो में 10 वर्ष का राजनैतिक सन्यास और 5 वर्ष तक प्रदेश के बाहर सियासी जबावदेही लेने वाले मुख्य सियासी मुद्रा में है और केन्द्र की सरकार में सत्ता सुख भोगने वाले सत्ता की प्रमुख भूमिका में। जिन्हें 1 वर्ष पूर्व ही आसमान से उतार म.प्र. में मुखिया बतौर स्थापित किया गया।  देखा जाए...

सेवा, सत्याग्रह-सत्ता और संचालन से बाहर क्रूर सियासत का शिकार शिव और सिंधिया

Image
व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  विगत एक दशक से म.प्र. में शिव की सेवा और सिंधिया के सत्याग्रह के बीच चले घमासान का ऐसा अंत होगा किसी ने सपने में भी न सोचा होगा, न ही रीति-नीति, मूल्य, सिद्धान्तों की सियासत में दखल रखने वाले सियासी पंडितों ने सोचा होगा। आज समूची म.प्र. की सियासत ही नहीं, सियासी मठाधीस भी हैरान-परेशान हो, तो काई अति संयोक्ति न होगी। जहां न तो सेवा का कोई मूल्य रहा, न ही सत्य के आग्रह को क्रूर, सियासत ने सुना। मगर दिलचस्व यह होगा कि जिस जनाक्रोश के रथ पर विजय पताका लहरा जो लोग पीड़ित, वंचित, गांव, गली, गरीब, किसान, बेरोजगारों के कल्याण उनकी सेवा विकास का शंख फूकने आतुर जान पड़ते है। उनकी सतरंगी सेना के संभावित सिपहसालारों के नाम और राजभवन सहित श्यामला हिल्स शिवाजी नगर के मुख्यालय पर चित्र देख-देख हैरान-परेशान है और सेवा तथा सत्याग्रह फिलहाल सनाके में। देखा जाए तो स्वयं को सेवक के रूप में स्थापित करने वाले अब चैकीदारी के मूड़ में, तो वहीं दूसरी ओर म.प्र. की राजनीति में सत्याग्रह को धार देने वाले शान्त है। देखना होगा कि सत्ता के लिए क्रूर सियासत के श...

सत्ता के आगे समझ, सामर्थ की अनदेखी घातक सत्याग्रह के साथ अन्याय

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   निश्चित ही काॅग्रेस का भविष्य चुनौती भरा है और 2019 की चुनौती भी उसके सामने है। ऐसे में जहां उसे सत्ता, संगठन, संसाधनों, समर्पित कार्यकत्र्ता, संगठनों, वैचारिक लोगों से निहत्थे अल्प संगठनात्मक संख्या बल तथा साथ ही सियासी सौदेवाजी के दंश के साथ सत्ता के लिए संघर्ष करना है। जिस सामर्थ की दरकार काॅग्रेस संगठन को मजबूत करने और तीन प्रदेशों में जनाक्रोश, सत्याग्रह के सहारे सत्ता पाने अप्रत्याशित सफलता जन आर्शीवाद से मिली है। शायद आलाकमान उस समझ को तो भुना पाया। मगर जिस सामर्थ, समझ की दरकार आम जन, युवा, पीड़ित, वंचित, गांव, गली, गरीब, किसान को थी। उसका वह अपने निर्णय में सटीक प्रदर्शन नहीं कर पाया, न ही वक्त द्वारा दी जा रहे मौके को वह ठीक ढंग से भुना पा रहा। जो काॅग्रेस के लिए आने वाले समय में शुभसंकेत नहीं कहे जा सकते।  देखा जाए तो काॅरपोरेट लिमिटेड कल्चर की तर्ज पर विगत 4 वर्षो में संगठित काॅग्रेस न तो नये जमीनी लोग, बुद्धिजीवी, विद्ववान, वक्ताओं को जोड़ सकी, न ही उन्हें सम्मानित स्थान दे सकी और न ही वह कोई ऐसा प्लेट फार्म काॅग्र...

समर्थ, सक्षम नेता की विदाई से सनाके में सियासत चैकीदार बनेगें शिवराज

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  अपेक्षित सफलता न मिलने के लिए शिवराज ही जिम्मेदार है यह बात भले ही शिवराज कह चुके हो, तो वहीं म.प्र. की चैकीदारी करने का मन भी वह बना चुके हो। मगर यहां यक्ष सवाल आज यह है कि थोकबन्द, लोककल्याणकारी सेवाभावी, अधोसंरचना निर्माण मुखी योजनाओें की झड़ी लगाने वाली सत्ता को क्यों सत्ता से बाहर होना पड़ा। क्यों म.प्र. के सक्षम, समर्थ नेता को सिहासन छोड़ चैकीदार बनना पड़ा। कारण साफ है कि सत्ता के सार्गिदों का अहम, अहंकार और बैलगाम भ्रष्टाचार सहित रोजगार, सहज, रोजगार उन्मुखी संसाधनों का आभाव रहा हो। बहरहाल हार की समीक्षा तो शायद अवश्य होगी। मगर वह शख्सियत जो देश में एक बड़े नेतृत्व की साक्षी हो सकती थी वह फिलहाल सत्ता से दूर हो चुकी है। ऐसे में किसी को यह संदेह नहीं होना चाहिए कि म.प्र. ही नहीं देश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले इस नेता की कहां चूक रही जो उसकी फलती-फूलती सत्ता को यह दिन देखना पड़ा। अब यह गऊ माता का श्राफ है या सियासत यह तो आने वाला समय ही तय करेगा। 

जनादेश के रथ की राहुल को कमान

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   जिस तरह से देश के 3 हिन्दी भाषी राज्यों की कमान जनाक्रोश के रथ के रूप में राहुल के हाथ लगी है। अब इसे सम्हालना ही राहुल की प्रमाणिकता होगी। क्योंकि जिन 3 राज्यों की जीत ने राहुल को भारतीय राजनीति में स्थापित करने का काम किया है वह हताश-निराश काॅग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो, यह सिद्ध करना राहुल का काम होना चाहिए क्योंकि 2019 कोई दूर नहीं जब देश भर में लोकसभा होना बाकी है।  सबसे अहम चुनौती सत्ता के सही सार्थक संचालन के साथ तेजी से संगठन खड़ा करने के अलावा काॅग्रेस कैम्प में ऐसे लोगों को भी लाने की होगी जो वैचारिक रूप से राष्ट्रवादी व काॅग्रेस के नजदीक है। मगर खेमों में बटे काॅग्रेस के सिपहसालारों की गोलबंदी के चलते काॅग्रेस के बाहर है या चाह कर भी योगदान देने में स्वयं को असफल पाते है।  इसके साथ ही सीधा संवाद ही उन विद्या, विद्ववान आम शुभचिन्तकों से भी कायम करना होगा। जो वादे काॅग्रेस ने जीत से पहले लिए उन पर तेजी से अमल भी 2019 की दिशा तय करेगा। काश राहुल इतना करने में कामयाब रहे तो कोई ताकत नहीं जो काॅग्रेस के अच्छे दि...

जनाक्रोश, जनादेश से सबक, सीख जरूरी सत्याग्रह के आगे सिसकी, सत्ता

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   अगर सियासी, सत्ताधारी दलों ने सत्याग्रह से सीख ली होती, तो उन्हें आज यह सबक जनाक्रोश के चलते जनादेश के रूप में न मिला होता। पूरे 24 घन्टे सत्ता के लिए हार-जीत के आंकड़ों के आगे घिसटते सिसकते दलों ने सपने में भी न सोचा होगा कि उन्हें सेवा कल्याण, विकास के लिए चैकीदार की भूमिका तो मिलेगी और सत्ता का सिहासंन पर बैठने वालों को विश्राम नहीं मिलेगा। जिससे न तो बैखोंफ जन संसाधनों का दुरूपयोग हो सकेगा, न ही सत्ता से गलबईयां कर विपक्ष मौज मस्ती कर सके। बैसे सत्याग्रह का अर्थ सत्य के लिए आग्रह होता है। शायद न तो सत्ता इस सच को समझ सकी, न ही विपक्ष परिणामों को संतोषजनक स्थिति में बदल सका। फिलहाल तो बदली सत्ता और विपक्ष का चेहरा साफ है। अगर यो कहे कि अब विश्राम कहां कि कहावत चरितार्थ हो तो कोई अतिसंयोक्ति न हो होगी। 

किसका होगा राज तिलक, सत्ता या सत्याग्रह में अटका सवाल एक्जिट पोल के आंकड़ों में झूलती जीत-हार

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। आशा-आकांक्षा अनुभूति के प्रचंड भंवर से उठी सुनामी किस-किसका सूपड़ा साफ करेगी फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। अगर इस भंवर से उठी सुनामी ने विकराल रूप धारण किया तो बड़ी-बड़ी सियासी इमारतों और वटवृक्ष की तरह जमे दरक जमीदोष नजर आए तो किसी को अति संयोक्ति नहीं होनी चाहिए। क्योंकि सियासी सैलाब इस मर्तवा साधारण नहीं असाधारण रूप में जान पड़ता है। जिसमें न तो रीति, नीति, प्रबंधन काम आने वाले है, न ही जीत-हार के दावे।  लंबे समय के इंतजार के बाद 5 राज्यों के संपन्न मतदान पश्चात हार-जीत के अनुमान के आंकड़े जो भी जुगाली करते नजर आते हो। मगर यक्ष सवाल अभी भी जस का तस बना हुआ है कि किसकी होगी जीत और किसकी होगी हार उसका उत्तर शायद 11 दिसम्बर को ही तय होगा। मगर तब तक जनादेश या जनाक्रोश का सवाल उलझा रहना स्वभाविक है तथा सत्ता या सत्याग्रह का उत्तर आना भी बाकी है। इस बीच विलेज टाइम्स की संभावनाओं में जो संकेत मिल पाते है उससे इतना तो तय है कि सत्ता या सत्याग्रह के बीच ही फैसला आने वाला है। अब देखना होगा कि जनादेश और जनाक्रोश के बीच किसका राज तिलक होने वाला है...

प्राकृतिक संपदा, संसाधनों की संगठित लूट और शिक्षा, स्वास्थ, पेयजल सेवा कल्याण से विमुखता पतन का कारण

Image
व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सत्ता, सरकार, परिषदों का धर्म होता है कि राष्ट्र या राज्य की प्राकृतिक संपदा, संसाधनों का न तो दुरूपयोग हो पाए, न ही गिरोहबंद लोग, लोगों के हकों को लूट पाए। कहते है कि राष्ट्र कोष या राज कोष को सबसे बड़ा खतरा सत्ता में बैठे लोगों से होता है। जिसकी रक्षा करना, सत्ता प्रमुख ही नहीं, आम जन का कत्र्तव्य भी होता है। मगर सत्ताऐं कत्र्तव्य विमुख हो, अपने दायित्व निर्वहन से मुंह छिपाती है, तो ऐसे में, ऐसी सत्ताओं का लोकतांत्रिक व्यवस्था का, जनता द्वारा, आम मतदाता द्वारा चुनावों के दौरान दण्डित या पुरूस्कृत करना स्वभाविक है।  कहते है किसी भी राष्ट्र में उसकी शिक्षा व्यवस्था उसका मस्तिष्क होता है तो स्वास्थ सेवा उसकी रीड़ और शुद्ध पेयजल सहज समृद्ध राशन उसके स्वस्थ ऊधर की पहचान वहीं खेल, व्यायाम उसके मजबूत पगो की पहचान होती है। मगर इस सच के विरूद्ध जब-जब सत्ताओं ने जाने का दुसाहस किया किया है उनका पतन अवश्य सुनिश्चित रहा है। फिर चाहे वह प्राकृतिक संसाधन, सेवा कल्याण के नाम हकों की लूट रही हो या फिर राजकोष की चोरी, दण्ड अवश्य मिला है। फिर व्यवस्...

राज धर्म का अपराधी कौन...? पुरूषकृत, दण्डित करने की बैला पर, कुछ यक्ष सवाल मतदान के महायज्ञ पर, न्याय की दरकार

Image
व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। लोकतंत्र में सत्ता, सरकार, परिषद, राष्ट्र, राज्य, जन कल्याण सेवा के लिए हर 5 वर्ष में समय आता है। जहां जनता राजधर्म का पालन कर स्वयं व राष्ट्र, समाज के कल्याण तथा समृद्ध, खुशहाल, कल्याणकारी जीवन, भविष्य के लिए गुण-दोष एवं भावी योजनाओं को सामने रख प्रत्याशियों के आचरण, व्यवहार, चरित्र के आधार पर सत्ता, सरकार, परिषद चुनने अपना बहुमूल्य मत दे, वोट दे, मतदान कर उन्हें चुनती है। इस दौरान वह यह भी देखती है कि जनता का वोट, समर्थन, मांगने वाले दल, संगठन, प्रत्याशियों का स्वयं, परिवार, समाज, राष्ट्र एवं पीड़ित, वंचितों के कल्याण, सेवा में अभी तक क्या योगदान रहा ? वह यह भी देखती है कि आम गांव, गली, नगर, शहर, महानगर में निवासरत आम नागरिकों को प्राप्त प्रकृति प्रदत्त तथा सत्ता सरकार प्रदत्त नैसर्गिक सुविधा, सस्ती सृजनात्मक शिक्षा, स्वास्थ सेवा, शुद्ध पेयजल, रोजगार के लिए सहज संसाधनों, रोजगार का क्या हाल रहा ? आखिर क्या कारण रहा जो आजादी 70 वर्ष बाद भी व्यक्ति परिवार, विभिन्न समाज, पीड़ित, वंचितों की श्रेणी में बने हुए है। क्यों बेरोजगार बेकार हाथ, त...

संस्कृति से वंचित सत्तायें कभी समृद्ध, सक्षम नहीं होती

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अगर जहाज, चौपर, लग्झरी वाहनो में सवार सियासी दल गांधी, शहीद भगत सिंह, आजाद, सुभाष चन्द्र बोस सहित पंण्डित नेहरू, पटेल, लोहिया, दीनदयाल उपाध्याय, इन्द्रा गांधी की त्याग तपस्या को नहीं समझ पा रहे तो यह हमारी महान मातृभूमि की महान संस्कृति के लिए दर्दनाक है। जिस तरह से बगैर प्रमाणिक तथ्यों को गरिमापूर्ण पदों पर कीचड़ उछालने की संस्कृति समृद्ध हो रही है वह इस महान भू-भाग के लिए शर्मनाक है।  अब यहां यक्ष सवाल यह है कि आखिर ऐसा इस महान भू-भाग पर क्यों रहा है। तो इसका सीधा सा जबाव है कि सत्ता, सरकारों के लिए जिस कीमत पर जो तिलिस्म महान संस्कृति को तिलांजली दें, तैयार किया जा रहा है वह न तो इस महान राष्ट्र, सत्तासीन या  सत्ता हथियाने घात लगाए बैठे लोगों के, न ही जिनके लिए सत्तायें अस्तित्व में होती है उनके हित में है और न ही किसी धर्म, पथ सहित क्षेत्र, भाषा, जाति की ध्वजा पताका लिए लहराने वालो के हित में है न ही इस महान राष्ट्र के गांव, गली, गरीब के हित में। क्योंकि जिस अशान्ति, अराजकता के रथ पर सवार हम आज सत्ता की जंग जीतने आतुर है। उससे ...

काॅग्रेस सरकार बनेगी, जयपुर में बोले सिंधिया

Image
वीरेंद्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जयपुर। शिक्षा, स्वास्थ, रोजगार, सुरक्षा को लेकर भाजपा पर बरसे सिंधिया ने प्रेस काॅन्फ्रेंस में कहा कि राजस्थान में प्रतिदिन 12 बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के आंकड़े सरकार के लिए शर्मनाक होना चाहिए। भारतीय समाज में मातृशक्ति का सम्मान सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि धर्म, राजनीति का घालमेल राष्ट्र हित में नहीं। मन्दिर बनाने की सीख भाजपा, सिंधिया परिवार से ले। उन्होंने तल्क स्वर में कहा कि धर्म किसी की बपौती नहीं, म.प्र,  राजस्थान में काॅग्रेस की ही सरकार बनेंगी ।