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Showing posts from March, 2021

श्रेष्ठजनो की कर्तव्यविमुखता महात्वकांक्षा का दंश भोगता मानव जीवन

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    प्रारव्ध से परमसुख संसाधनो से समृद्ध श्रेष्ठजनो से ही  सर्बकल्याण की अपेक्षा अनादिकाल से  रही है  व्ही. एस. भुल्ले   विलेज टाइम्स समाचार सेवा  जीवन आज जिस जुजून के रथ पर सबार सर्बकल्याण का सारथी बन श्रेष्ठ कहलाना चाहता है उसमे उसे कितनी सफलता मिलेगी यह तो फिलहाॅल भबिष्य के गर्व है मगर जो सम्राज्य आज हर क्षैत्र मे सर्बकल्याण के नाम फलता फूलता नजर आता है उससे बहुत कुछ हासिल होने बाला है यह कहना फिलहाॅल जल्दबाजी हो सकती है मगर इतना तो तय है कि कर्तव्य की इस निष्ठा से कोई भला होने बाला नही जब तक की उसका भाव प्रमाणिकता की कसौटी पर स्वयं को सिद्ध कर आम जीवन मे अनुभूति का एहसास कराने मे सक्षम सफल सिद्ध नही हो जाता क्योकि इस निष्ठा कर्तव्य की अपेक्षा अनादिकाल से ही श्रेष्ठजनो से रही है जो प्रारव्ध से परमसुख समृद्धि से सम्पन्न सम्द्ध रहै है । जिन्होने इस धर्म का पालन मानव जीवन मे किया वह आज पूजे जाते है सराहे जाते है जो अथक प्रयासो के बाबजूद अक्षम असफल रहै वह भी मानव जगत मे आज भी याद किये जाते है और जब तक यह दुनिया रहेगी याद किये जाते रहेगे मगर सबाल आज वही...

कबिलाई तंत्र में तब्दील होता , जनतंत्र

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गैंग गिरोहबन्दी की जकड़ में जीवन मूल्य और सरोकार  व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  विधि की बैधानिकता और मौजूद विधान पर सबाल निश्चित तौर पर बैमानी ही कही जायेगी क्योकि विधि की बैधानिकता और विधान आज भी उतने ही पवित्र है जैसै हमारे स्थापित विधान है जिनमें अगाध आस्था अनादि काल से मानव की पहचान रही है और उसके जीवन मूल्य उसकी धरोहर जो समृद्ध खुशहाॅल जीवन का मार्ग आज तक प्रस्थ करते आ रहै है । मगन जब आज मानव जीवन राजतंत्र को त्याग जनतंत्र के रथ पर सबार श्रेष्ठ मानव जीवन के लिये , श्रेष्ठ जीवन मूल्यो की ध्वजा लिये चक्रबृति सम्राट बनने की दिशा मे बढ़ चला है ऐसे में कबिलाई तंत्र की खुली दस्तक जनतंत्र पर सबाल खड़े करने काॅफी है । क्योकि जिस तरह से सेवा कल्याण विकास व्यापार के क्षैत्र मे गैंग , गिरोह बन्दी फलफूल रही है और जिस तरह से जीवन मूल्य जीवन सरोकार गाॅब गली मे कलफ रहै है उनकी अनदेखी उतना ही बड़ा जघन्य अपराध है जिसे न तो मानव जीवन मूल्य न ही जीवन के सरोकार न ही विधि विधान आज तक कभी अंगीकार किया फिर समय बैसमय कीमत जो भी रही हो । सारे जहान को मुटठी मे कर लेने के जुनन की जंग...

संकट की घड़ी मे , मानव जीवन को विधि विधान का आभास

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म. प्र. के शिवपुरी ने कायम की मिशाल  मर्यादा उल्लास के साथ मने त्योहार  वीरेन्द्र भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  कोरोना काल के बीच जिस तरह से हर्स उल्लास के बर्ष भर के त्यौहारो को मर्यादा और उल्लास के साथ मनाने की चुनौती थी साथ ही म.प्र. के शहर शिवपुरी मे समझाइस के बाबजूद कोरोना संक्रमितो की संख्या बिस्फोट के साथ जारी थी त्यौहारो के मददेनजर लोगो के अन्दर डर का भाव होना स्वभाविक था मगर जिस तरह जिला प्रशासन की युगल जोड़ी ने निष्ठा को सामने रख कमान सम्हाली और उसके जो सार्थक परिणाम देखने मिले वह निश्चित ही सराहनीय ही कहै जायेगे । विधि के माध्ययम से विधान के सम्मान का शायद यह पहला उदाहरण होगा जहां विधि का भी पूरी निष्ठा के साथ सम्मान हुआ और विधान का पालन भी गरिमा के साथ हुआ जो अपने आप मे मिशाल हे सीमित संसाधनो या यो कहै मौजूद संसाधनो के बीच विधि के पालन का शायद ही कोई उदाहरण इस जनतंत्र मे देखने मिले मगर विधि के रखबालो ने कोरोना काल के बीच बड़ी ही सालीनता के साथ यह कार्य कर दिखाया जिसके लिये बधाई के पात्र है यहां का जिला प्रशासन और उसे लीड करने बाले यहां कलेक्टर एस...

जुनूनो की जंगो से आहत जीवन , जीवन मूल्य हुये लहुलुहान

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व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  जंग प्रकृति मे जिन्दा रहने की रही हो या फिर जीवन को सार्थक सफल सक्षम खुशहाॅल बनाने की रही हो जब तक उसका भाव सर्बकल्याण रहा उन जंगो के परिणाम सार्थक सफल रहै मगर जब जब भाव उसके विपरीत रहै वह जंग निर्रथक बोझ और जीवन को संकट मे डालने बाली रही । फिर सत्ता सरकारे जो भी रही हो आज एक मर्तवा फिर से जीवन सर्बकल्याण की अगुआयी करने संघर्षरत है ऐसे मे निष्ठा की सार्थकता पर चर्चा स्वभाविक हो जाती है मगर लगता है मानव जीवन मे अब यह सबाल सबाल न हो स्वयं सबाल बन गये है तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी । ऐसे मे हर मानव का कर्म धर्म होना चाहिए की वह स्वयं व अन्य जीवनो की जीवन मे उपायदेयता सिद्ध करन जीवन से सार्थक संघर्ष करे और मानव धर्म के मार्ग को प्रस्त करते हुये स्वयं के जीवन की सिद्धता सिद्ध करे आज यही सबसे बड़ी समझने बाली बात हर मानव के लिये होनी चाहिए । जय स्वराज । 

सत्य की जीत पर, सत्य से सामना ............? तीरंदाज

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व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  भैया - फिर होलिका दहन और हमारे सांस्कृतिक सरोकार मगर आत्मसात क्या ? उस पर से कहर ढाता कोरोना आखिर क्या सम्पूर्ण सत्य यही है जिस आज भी मानव समझना नही चाहता है आखिर क्यो ? ऐसे अनगिनत सबाल जीवन मे अनादिकाल से रहै मगर म्हारे मगज मे ये बात क्यो न आवे कि जिन्दा दिली ही नैसर्गिक कर्तव्यो के निष्ठा पूर्ण निर्वहन के साथ सार्थक जीवन का नाम है इतिहास मे जो दफन है हमारी संस्कृति, संस्कार , सभ्यता , जीवन के अर्थ , मूल्य सभी हमारे श्रेष्ठतम मार्ग दर्शक रहै है । कई उदाहरण ग्रन्थो से लेकर इतिहास मे आज भी मौजूद जिनके आभास समय निकल जान के बाद होता जीवन को हो पाता है तब जीवन के पास पश्चाताप के आलावा बहुत कुछ शेष नही रह जाता और यही जीवन की सबसे बड़ी असफलता होती है । निश्चित ही जब अपना कोई दर्द कष्ट मे होता है तो तखलीफ तो होती है मगर जब वह जीवन स्वयं ही अतिविश्वास के चलते बगैर किसी अपराध के दण्डित होता है और कष्ट का भागीदार तब की स्थति मे उसके सहभागी न तो उसकी भगनी न ही वह सज्जन सहपाटी सलाहकार स्वार्थी सहयोगी सभा परिषदे होती है जो उसके लिये सीधे तौर पर उत...

धमाकेदार बापिसी से थर्राया मानव जीवन

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कोरोना के प्रति लापरबाही ठीक नही  व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  रिटर्न कोरोना ने जिस तरह से कुछ राज्यो के कुछ शहर नगर मे रफतार पकड़ी है निश्चित ही वह डराने बाली है मगर जो लापरबाही जीवन मे चल रही है अगर वह इसी तरह चलती रही तो आने बाला समय कोरोना को लेकर कितना वीभत्स होगा आज सभी को समझने बाली बात होना चाहिए । मगर लगता नही की कोई भी बिगड़े हालातो से सबक लेने तैयार हो परिणाम की अब सिर्फ महाराष्ट्र् ही नही दिल्ली सहित अन्य शहरो मे भी कोरोना ने रफतार पकड़ ली है थोकबन्द निकलते संक्रमित लोगो को देखकर कहा जा सकता है कि मानव जीवन , जीवन को लेकर कितना लापरबाह है । हालिया आंकड़े गबाह है कि हमने सब कुछ ठीक ठाक होने के बाबजूद किस पैमाने तक कोताही बर्ती है जिसके परिणाम अब धीरे धीरे हमारे सामने आने लगे है जो ठीक नही कहै जा सकते । बैहतर हो कि हम शीघ्र ही कोविड गाइड लाइनो का पालन सुनिश्चत कर साॅसल डिस्टेन्थ मास्क सेनेटाइजर साबुन औैर बहुत आवश्यक न हो तो घर पर ही रह इस महामारी से स्वयं व अपने को बचाने मे जुटे साथ ही अन्य मानव जीवनो की भी सुरक्षा सुनिश्चित करने मे अपना अमूल्य योगदान...

बाजे और बंगाल को लेकर कटा बबाल...........? तीरंदाज

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व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  भैया - सत्ता सियासत छोड़ बाजे , बंगाल पर कटे बबाल से लाभ जिसका भी हो मगर म्हारे विश्वास है म्हारा भला नही होने बाला डन्डा डाल संस्कृति से अनभिज्ञ म्हारे को कै पता की आने बाले समय मे इसी संस्कृति का बोलबाला बढ़ने बाला है मे ठहरा गाॅब का गबई गबार कै जानू ऐसी समृद्ध सियासत से गूढ़ रहस्य जिसमे अच्छे अच्छे उस्ताद दहाड़े मारते घूम रहै है मगर मुआ सुनने बाला कोई नाय अब म्हारी झाड़ू टोपी को लो एक ही चाल मे डकराती घूम रही है तो वही माननीय बाजे को लेकर म्हारे महान राष्ट्र् मे तलवारे खिची पढ़ी है उस म्हारी दीदी को दात देनी होगी कि वह तो अकेले ही शाही सेना को व्हील चेयर पर बैठ छक्के छुड़ाने मे लगी है तो वही शाही सेना के सम्राट ने बंग बंगाल को फतह करने सीमा पार से मोर्चा खोला है और बंगाल फतह करने फिर से नया फाॅरमूला फैका है अब तू ही बता मने कै करू मीडिया से गायब म्हारी महान पार्टी का जो जाबांजो के अकाल से समय से पहले ही दम तोड़ने पर तुली है ।  भैयै - मुये चुप कर गर किसी ने सुन लिया तो बाजे की तरह ही थारी भी बैभाव बज जायेगी बंगाल का तो जो होना है सो ह...

न रही सांख्यकी, न रहे सूचकांक, बातो के बताशो में उलझी सेवा और बिलबिलाता मानव कल्याण

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सत्ता नशी में डूबते जीवन के सरोकार  व्ही.एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  अभियानो की आपदा और सत्ता नशी मे डूबते सरोकारो से सरोकार आज भले ही किसी को न हो मगर बातो के बताशो मे उलझी सेवा और बिलबिलाता मानव कल्याण यह समझने काॅफी है कि मौजूद व्यवस्था मे जीवन मूल्य के मायने अब क्या शेष रह गये है सांख्यकी सूचकांक से अनभिज्ञ विकास का कांरबा जिस रफतार से सेवा कल्याण के मार्ग पर दौड़ रहा है वह मानव धर्म को कहां ले जाकर छोड़ेगा फिलहाॅल कहना मुश्किल मगर इतना तो तय है कि अगर इसकी दशा दिशा यही रही तो अभियानो के बीच आपदाओ से निजात पाना मुश्किल ही नही नमुमकिल होगा लेकिन समझने सोचने बालो का दुख दर्द यह है कि जिस महान भूभाग की नस्लो ने बचपन से लेकर जबानी मे ही एक से बढ़कर एक कीर्तिमान मानव धर्म की रक्षा की खातिर अपने पुरूषार्थ के बल स्थापित किये वह आज भी एक मिशाल है मगर जिस बचपन युवा पीढ़ी से हम मुखातिब है उन्है देख सोचने पर मजबूर होना निश्चित ही नई बात है कैरियर कोचिंग नैट मे भबिष्य खोजता इस महान भूभाग का भबिष्य न तो जीवन की सांख्यकी न ही सूचकांक समझना चाहता है उस पर से बातो के बताशो की च...

पूॅंजीवाद की खड़ाउ ढोता, सम्राज्यवाद, बैघर हुआ विश्वास

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  कष्टदायी हुआ जीवन संघर्ष, संकट में सरोकार  व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  जिस तरह से सम्राज्यवाद अब पूॅजीवाद की खड़ाउ ढोने पर मजबूर नजर आता कभी यही पूॅजीवाद सम्राज्यवाद के तलबे चाट अपने अस्तित्व के लिये संघर्षरत हुआ करता था मगर जनतंत्र लोकतंत्र मे यह कब इतना शक्तिशाली हो गया कि किसी को एहसास ही नही हुआ और होता भी क्यु ? आखिर सत्ता की भूख होती ही ऐसी है जो बर्तमान की खातिर भविष्य का कत्ल करने मे तनिक भी संकोच नही करती बहरहाॅल कभी सेवाकल्याण मानव धर्म की रक्षा के लिये अपनी सल्तनते सम्राज्य कुर्बान कर गाजर मूली की तरह हजारो लाखो सर कलम करने करवाने बालो ने सपने में भी न सोचा होगा कि जिस पीढी की समृद्धि खुशहाॅली की खातिर वह अपने साम्राज्य और अपनो को कुर्बान कर रहै है वही पीढ़ी आने बाले भबिष्य मे उन्है इस तरह कलंकित करेगी । आज हमे यह नही भूलना चाहिए कि जिस विरासत को हम वैभाव लुटाने पर तुले वह फोकट में नही मिली न ही वह महान संस्कार जो पूर्व शासको ने हमे विरासत के रूप मे अपनी बैशकीमती धरोहर के रूप मे सौपे थे जिसमे शासक का धर्म होता था कि वह सिर्फ मानव धर्म ही नह...

सत्ताओ की सियासी हट मे सिसकते सरोकार, बीच चैराहे बिलखता बैचारा सेवा कल्याण

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  विधान पर भारी, माननीय श्रीमानो की सेवा, सम्मान व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  सेवा सर्बकल्याण के नाम जिस तरह से लोकतंत्र मे माननीय श्रीमानो का सेवा सम्मान विधान पर भारी पढ़ रहा है उसमें सत्ताओ की सियासी हट स्पष्ट नजर आती है क्योकि जिस तरह से बीच चैराहे सेवा कल्याण बिलख जीवन के सरोकार सिसक रहै है ऐसे मे सर्बकल्याण की उम्मीद बैमानी हो जाती है मगर कहते है उम्मीद पर आसमान टिका है सो जनतंत्र मे आस्था रखने बाले हर इन्सान को धृतराष्ट्र् की सभा की भाॅति बड़े बड़े शूरवीरो की भांॅती आज भी करना चाहिए क्योकि अब न तो सभाओ मे विदुर बचे न ही कोई कृष्ण बनने तैयार जो आज के दृर्योधनो कि बात का विरोध कर सके और सभा को सर्बकल्याण की नीति से आगाह करता रहै अब ऐसे मे स्वयं जन की जबाबदेही बनती है कि वही सारथी बन मानव धर्म की ध्वजा लेकर आगे चले और सियासी हटो का जमकर सामना कर सके क्योकि सत्ता सियासत से टूटता विश्वास और सभा परिषदो की शोभा बढ़ाती बैधानिक संस्थाओ में बैठै अधिकांश सदस्यो मे अब लगता वह मादा नही रहा जिससे मानव धर्म की रक्षा और जीवन मूल्यो को बचाया जा सके । सियासी अभियानो मे जु...

टूटता विश्वास, मानव सभ्यता पर कलंक, बढ़ा अविश्वास तो विनाश सुनिश्चित

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मानव धर्म की रक्षा हर मानव का कर्तव्य  मानव जीवन के, कड़े त्याग, तपष्या, अनगिनत कुर्बानी, कठिन, भीषण संघर्ष का परिणाम है स्थापित विश्वास और यही हमारी महान विरासत है ।  व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  पुरानी कहावत थी कि विष दे देना मगर विश्वास नही तोड़ना और यही वह विश्वास है जिसके सहारे मानव जीवन ने अभी तक का सफर समृद्ध खूशहाॅल जीवन के रूप मे तय किया है जिसकी अपेक्षा हर नागरिक को अपनी अपनी सत्ताओ सरकार सिपहसालारो से होती है मगर जब आज हर क्षैत्र मे विश्वास का सूर्य अस्त होता नजर आता है तो हर मानव को इसकी चिन्ता करना चाहिए सत्ताये शासक सरकारे आती जाती रही है रहती है मगर स्थापित संस्थाओ संस्कारो के रूप मे विश्वास हमारा मार्ग दर्शन जीवन मे करता रहता है । और यही वह कटु सच है जिसके सहारे जीवन अपना समय चक्र पूर्ण करता है मगर आज जिस तरह से समाज, धर्म, आस्था, अर्थ, राजनीति व्यवसाय, स्थापित संस्थाओ पर से विश्वास तोड़ आगे बढ़ने अकूत दौलत कई पीढ़ियो की सौहरत बनाने का कारबा चल पढ़ा है वह किसी से छिपा नही, पूर्व के मानव संघर्ष इस बात के प्रमाण है कि जिसने भी स्थापित वि...

परम को परमवीर की दरकार, जनतंत्र की गुहार ......? तीरंदाज

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विधिसंबत बैधानिक लोेगो की अबैध उगाही के बैधानिक धमाके से सेवा कल्याण की सियासत सत्ताओ मे हड़कम्प  व्ही.एस. भुल्ले  भैया - अब तो म्हारे परमवीर को परमवीर न सही भारत रत्न तो बनता है शाॅसल पैपर धमाके की धमक से थर्राते सियासी बुर्ज और बाहर पड़ी जड़े देख म्हारा तो कलेजा मुॅह को आबे बैचारे मरहूम सुसांत के मातम पर मातम मनाने के बजाय प्रेस ब्रीफ्रिग करने म्हारे महान वीर कभी राष्ट्र् जनहित मे इतना जबरदस्त धमाका करेगे शायद ही किसी ने सपने मे सोचा होगा अब जब एंटालिका के सामने जिलेटिन की छड़ धमाके से पूर्व हर माह करोड़ो के जनधन बसूली का धमाका स्वयं बैधानिक व्यक्ति ने कर दिया है जिसकी गूॅंज से ऐटालिका तो नही हिली मगर महान महाराष्ट्र् की सियासत सत्ता के बुर्ज ही नही जड़े बाहर पढ़ी है जिन्है उठाने बाला तक नही दिख रहा अब बैचारे उगाही कर्ताओ का क्या पता था कि सर मुड़ाते ही औलो से सामना होगा और सेवा कल्याण बालो का पूरा का पूरा कुनवा सियासी आग मे झुलसेगा, मने तो लागे कि सेवा कल्याण मे लीन महान जनधन की लूट करने बालो म्हारे लटठधारियो की नजर लग गयी जिन्होने अपना समुचा जीवन सिर्फ इसी उम्मीद मे गला दिया एक दि...

आसमानी सुल्तानी सेवा कल्याण से सहमा इन्सान

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खीर मे सौझ, महेरी मे नियारे की सियासत से सत्ताये हुई बलबान तो जीवन हुआ बैहाल व्ही.एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  अर्थ बदलते सेवा कल्याण के बीच जिस तरह से आसमानी सुल्तानी सेवा कल्याण की बाढ़ आई है उससे फिलहाॅल आम इन्सान सहमा हुआ है । उस पर से खीर मे सौझ महेरी मे नियारे की परवान चड़ती सियासत से सत्ताये भले ही बलबान हुई हो और एक लम्बे अन्तराल बाद सत्ताओ मे धन दौलत व्यापार की पैठ बढ़ी हो मगर ऐसा नही कि ऐसा कोई इस दुनिया मे पहली बार हुआ है जहां जहां जब जब जो भी सत्ताये रही धन बल का मोल तो रहा ही है अगर आजाद लोकतंत्र मे सेवा कल्याण की आढ़ मे धन कबाड़ुओ का बोल बाला बढ़ रहा है तो कोई नई बात नही चैपट संस्थागत ब्यवस्था मे सेवा कल्याण की आढ़ मे लूट के अघोषित अडडे पूरे माफिया अन्दाज मे पनप रहै तो हर्ज ही क्या ? अब न तो ढूड़े से सेवक ही मिल रहै न ही कल्याण मे लीन लोग अगर यो कहे कि सबको अपनी अपनी पढ़ी है अपने अपनो की पढ़ी है तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी । विकेन्द्रिकृत व्यवस्था ने नाम सब कुछ केन्द्रियकृत होने के बाबजूद सेवा कल्याण का कारबा चल पढ़ा है सत्ता के सिपहसालारो के बूटो तले कुचलती व...

जन पीढ़ा का जनाजा, मातम मनाते माईबाप ..........? तीरंदाज

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  व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  भैया- अब मने कै बोल्यू , की छाती कूटते भी म्हारे को शान्ति नसीब नही न ही म्हारे को मुक्ति मिलने बाली मने तो आज सबाल करना चाहु अपने पूर्वजो से कि आखिर उन्होने क्या देख सुनकर म्हारे महान लोकतंत्र को अंगीकार स्वीकार किया जिसके गर्भ से पीढ़ाओ का अम्बार टूट पड़ा है पीढ़ा के जनाजे पर छाती कूटते म्हारे माईबाप मातम मे डूबे है मगर निदान का ओर छोर कहां है किसी को नही पता बंगाल के नंदी ग्राम मे मचे कोहराम की माने तो सिर्फ नन्दि ग्राम ही नही समुचे बंगाल मे बबाल कटा पढ़ा है व्हील चैयर पर दीदी का प्रचार और बंगाल मे सरकार बचाने की जुगाड़ भले ही लोगो को आम लगे मगर आने बाले समय मे आम व्यक्ति के जीवन पर सियासत  भारी पढ़े तो इसमे किसी को अतिसंयोक्ति नही होना चाहिए ।  भैयै - मने तो लागे अब तो तनै भी सियासी पण्डित हो लिया जो भबिष्य वाणी कर लोगो को वर गला सियासत का अर्थ समझा रहा है  कै थारे को मालूम कोणी सियासत बड़ी ही गूण विद्या होवे जिसको समझ पाना थारे जैसै काले पीले  चिन्दी पन्नै बालो की बस की बात नही कै थारे को मालूम कोणी ये वही दी...

स्थापित ब्यबस्था की कब्र खोदती बैठके, जनधन हुआ निढाल

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  राजकोष को सबसे बड़ा खतरा राज पुरूषो से होता है  व्ही.एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  कभी चाड़क्य के शिष्य ने एक सबाल के जबाब मे धनानन्द की सभा मे हो रहै शास्त्रार्थ के दौरान कहा था लगता है सेकड़ो बर्ष बाद भी सबाल और उत्तर जस के तस है भले ही आज हम राजतंत्र का भाग न होकर लोकतंत्र के सहभागी हो मगर अब सबाल यह है कि करे तो भी क्या ? सस्ते मकान को तरसते लोग जो वोट विद्या के चलते सस्ते राशन आयुष्मान का भाग बन भगवान कहलाने लगे हो मगर जो दुरगति भगवान के आर्शीबाद और उसकी परसादी की हो रही है वह किसी से छिपी नही है वातानूकूलित कार्यालय भव्य भवन आलीशान बंगले लग्झरी वाहनो के काफिले चैपर जहाज का सैर सपाटा और बैठको का अम्बार जन जन की ब्यथा समझने काॅफी है करोड़ो अरबो के बजट परिणाम शून्य कल्याण आखिर किसके लिये क्या अब आम नागरिक की वोट और टेक्स के रूप मे नोट देना नियती बन गयी है इतना तो लोग लोकतंत्र के नाम झेल ही रहै थे कि अब सत्ता सरकार शासन की अर्कमड़यता का शुल्क भी आम नागरिक को चुकाना पढ़ रहा हैे फिर वह जगह जगह विधिसम्बत टोल टेक्स हो या फिर सुरक्षा के लिये शस्त्र रखने बाले लोग न ज...

आस्था को अघात और विश्वास से बैरूखी विनास के संकेत

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स्थापित संस्था, संस्कारो का संरक्षण सर्बकल्याण में अहम व्ही.एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  माननीय, श्रीमानो, माईबाप आपकी निष्ठा कर्तव्यनिर्वहन पर हमे कतई संदेह नही क्योकि आप हमारे अपने है क्योकि प्राप्त जबाबदेही के निर्वहन पश्चात हमे और आपको एक साथ ही खुशहाॅल जीवन जीना है मगर आज आपके और हमारे पास उर्जा और समय है कि हम अपना व अपनो का भबिष्य बैहतर बनाने मे अपना अपना योगदान पूरी निष्ठा ईमानदारी के साथ दे मगर क्या करे आघात से आहत आस्था और विश्वास से विमुख होती हमारी कृतज्ञता हमे कलंकित करने पर अमादा है जो हमारी स्थापित संस्था और संस्कारो को लहुलुहान करने काॅफी है । छिनते रोजगार उधार के माल पर धंधा कर परिवार पालने बाले लोग घर का सब कुछ धंधे मे लगा भुगतान के नाम पाई पाई को मोहताज है क्योकि कंगाल खजाने की आढ़ मे राजधानी मे जो अघोषित धंधा चल निकला है उसने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है मगर सुनने समझने बाला कोई नही बर्षो से घर की पूॅजी लगा भुगतान के इन्तजार बैठै लोगो आज भी विश्वास है कि उनकी मेहनत का आज नही तो कल अवश्य भुगतान होगा मगर बर्तमान हालात इस बात के गबाह बनते जा रहै है क...

शेरनी की दहाड़ से सियासी हल्के हुये हलाकान, पश्चिम बंगाल बना, कुरूक्षैत्र का मैदान

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व्ही.एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.   दीदी कहै या बंगाल शेरनी जो जनसमर्थन हासिल करते वक्त हमले का शिकार हुई या हादसे का इसका सच तो वही जाने मगर जिस तरह से विगत एक बर्ष से पश्चिम बंगाल सियासी संग्राम का कुरूक्षैत्र बना है उसके परिणाम आने बाले समय मे जो भी हो मगर ममता की दहाड़ से सियासी हल्के अवश्य हलाकान है होली से पूर्व से मचे सियासी हुड़दंग मे बंगाल का रंग किसको चढ़ेगा और किसका रंग उतरेगा यह तो आने बाला समय ही तय करेगा मगी 35 बर्षो तक सत्ता का सुख उठाने बालो को जिस तरह से बंगाल दीदी सियासी शेरनी ने जनसमर्थन हासिल कर सत्ता से बैदखल किया था वह आज तक बंगाल मे स्वयं की जमीन तलाते घूम रहै मगर लगता नही कि अब नये सूबेदारो के रहते उनकी दाल गलने बाली है पसीने पसीने तो वह भी है जो दीदी को सत्ता से बैदखल कर जनसमर्थन से स्वयं सत्तासीन होना चाहते है मगर जिस तरह से दीदी तोड़ फोड़ के बीच चुनौतियो को मुॅहतोड़ जबाब देने का कार्य कर रही है वह सभी के सामने है जाने बाले जा रहै है और आने बाले आ रहै है मगर भगवा रंग एक है जिसका लक्ष्य राष्ट्र्हित की खातिर अब पश्चिम बंगाल फतह है देखना होगा इस...

जांच ऐजेन्सियो पर बढ़ते सबाल, जनतंत्र मे घातक

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  वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  फिलहाॅल जिस तरह से विधि विरूद्ध वित्त पोषित योजनाओ और अबैध शुल्क बसूली के खिलाफ जांच ऐजेन्सियो का कांरबा चल रहा है उसका सच तो विधि सम्बत आस्था रखने बाले ही जाने या फिर सेवा पारदर्शी परिणाम मूलक सिद्ध हो उसको बनाने क्रियान्वित करने बाले ही जाने मगर जिस तरह की धरपकड़ या शिकायत के आधार पर जबाब तलब करने की संस्कृति चल निकली है उसने जांच ऐजेन्सियो को ही कठघरे मे खड़ा कर दिया है शिकायत कर्ताओ से परेशान लोगो का कहना है कि जांच ऐजेन्सियां शिकायत को सही मान हमारे प्रमाणिक तथ्य दरकिनार कर जो प्रारम्भिक तौर पर हमारे निर्दोष होने के सबूत हो सकते है बजाय के न्यायप्रिय जांच होने के जांच तो प्रभावित होती ही है बल्कि झूठी शिकायतो से मानसिक प्रताड़ना भी होती है जो सुखद नही कही जा सकती न ही जनतंत्र के हित मे बैहतर हो शासन एक ऐसी ब्यबस्था कायम करे जिससे दोषी बचने न पाये और निर्दोष लोग ऐसी शिकायतो और जांचो के बैबजह शिकार न हो पाये क्योकि जिस तरह से लोग सफर कर रहै है तथ्य देखने से स्पष्ट होता है कि कही तो कुछ गलत हो रहा है ।

म.प्र.: सुशासन को सुप्रीमकोर्ट की फटकार, विधि की रक्षा में, असफल सिद्ध सरकार

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व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. विधि की रक्षा उसके पालन मे असफल सिद्ध सरकार को जिस लहजे मे माननीय सुप्रीमकोर्ट ने सुशासन को फटकार लगाई है वह भले ही लज्जाजनक हो मगर लगता नही सेवाकल्याण की ध्वजा फहरा सर्बकल्याण के रथ पर सबार सुशासन कोई सबक लेने बाला है एक विधायक के परिजन से जुड़े अपराधिक मामले मे जो टिप्पणी कोर्ट ने की है वह सुशासन को समझने बाली बात होना चाहिए अगर खबरो की माने तो जस्टिस एम. आर. शाह ने टिप्पणी करते हुये कहा कि मध्य प्रदेश सरकार को यह स्वीकार लेना चाहिए कि वह संविधान के हिसाब से शासन करने मे समर्थ नही है ।

मायावी कला सिद्धस्त होने की होड़ मे मलाईदार महकमे

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दूरभाष है तो सेवा मे नही, मोबाइल है तो उठेगा नही  माईबापो से हलाकान राजा, प्रजा वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  जिस तरह की संस्कृति म.प्र. के मलाईदार महकमो मे पनप चुकी वह इस लोकतंत्र मे किसी के भी हित मे नही जनधन पर बने इन महकमो के घरोधे यू तो शहर से कोसो दूर हे अगर ऐसे मे माईबाप आॅफिस नही बैठै तो समझो आशा अकांक्षाओ का कचूमर बनना तय है खासकर म.प्र. के ग्वालियर संभाग की बात करे तो परिवहन महकमे ने आलीशान भवन जनधन पर सेवा के लिये हासिल किये है उनके हाॅलात कुछ ऐसे ही है करोड़ो के खर्च पर निर्मित यह भवन भले ही शहर के बाहर हो मगर आॅफिस मे कौन कब मिलेगा यह सुनिश्चित नही बैचारे लोग पहले तो दलाली से हैरान परेशान थे अब फिर से उनको उन्ही का सहारा लेना पढ़े तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी शासन सरकार मे बैठै ऐसे कारनामो पर भी गौर करना चाहिए जिससे सेवा का लाभ लोगो को सहज मिल सके और मायावी स्टाल मे मौज करने बालो को सबक काम कठिन है चैक पोस्टो पर टोकन रोकने की तरह मगर असंभव नही काश सेवको और शासको सदबुध्धि आये तो जन तंत्र के लिये बैहतर और उसमे आस्था रखने बालो के लिये राहत की बात ...

जांच ऐजेन्सियो पर बढ़ते सबाल, जनतंत्र मे घातक

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  वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  फिलहाॅल जिस तरह से विधि विरूद्ध वित्त पोषित योजनाओ और अबैध शुल्क बसूली के खिलाफ जांच ऐजेन्सियो का कांरबा चल रहा है उसका सच तो विधि सम्बत आस्था रखने बाले ही जाने या फिर सेवा पारदर्शी परिणाम मूलक सिद्ध हो उसको बनाने क्रियान्वित करने बाले ही जाने मगर जिस तरह की धरपकड़ या शिकायत के आधार पर जबाब तलब करने की संस्कृति चल निकली है उसने जांच ऐजेन्सियो को ही कठघरे मे खड़ा कर दिया है शिकायत कर्ताओ से परेशान लोगो का कहना है कि जांच ऐजेन्सियां शिकायत को सही मान हमारे प्रमाणिक तथ्य दरकिनार कर जो प्रारम्भिक तौर पर हमारे निर्दोष होने के सबूत हो सकते है बजाय के न्यायप्रिय जांच होने के जांच तो प्रभावित होती ही है बल्कि झूठी शिकायतो से मानसिक प्रताड़ना भी होती है जो सुखद नही कही जा सकती न ही जनतंत्र के हित मे बैहतर हो शासन एक ऐसी ब्यबस्था कायम करे जिससे दोषी बचने न पाये और निर्दोष लोग ऐसी शिकायतो और जांचो के बैबजह शिकार न हो पाये क्योकि जिस तरह से लोग सफर कर रहै है तथ्य देखने से स्पष्ट होता है कि कही तो कुछ गलत हो रहा है ।

तो सिंधिया अभी तक मुख्यमंत्री बन गये होते राहुल गांधी

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जितनी चिंता राहुल जी को आज है काश इतनी चिंता तब की होती जब में काॅग्रेस मे था सिंधिया  क्या बैकार गया बर्षो का कड़ा संघर्ष ? वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  म.प्र. में 15 बर्षो तक जन सेवा कल्याण की खातिर कड़ा संघर्ष करने बाले सिंधिया ने कभी रैली प्रदर्शन पैदल मार्च सत्याग्रह सब कुछ तो किया मगर एन वक्त पर 10 बर्ष का सियासी अज्ञातबास काटने बाली सियासत और मात्र 1 बर्ष मे ही सरकार की कमान सम्हालने बाली सत्ता इतनी बैलगाम हो जायेगी शायद ही 15 बर्ष तक सत्ता के खिलाफ संघर्ष करने बाले उस नौजवान नेता ने सपने मे भी सोचा होगा जिस तरह से तथाकथित सत्ता सियासत ने सिंधिया को दरकिनार किया परिणाम कि तत्कालीन सत्ता सियासत को हवा देने बाले अब सड़क पर है अब ऐसे मे राहुल की राय का क्या मतलब शेष रह जाता है यह तो राहुल जाने मगर जो दर्द सिंधिया के जबाब मे छिपा वह अवश्य कई सबाल खड़े करता है फिलहाॅल तो अब सिंधिया राहुल की राह सियासी तौर पर जुदा है मगर सबालो मे दोनो के बीच सम्मान का सिलसिला आज भी बरकरार है । 

कायदे कानूनो की पुंगी बजाते जबाबदेह, सत्ता हुई मदमस्त

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फोटो सेसन मे तब्दील हुआ सेवा कल्याण वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  सत्ता के रथ पर सबार जिस तरह से सेवा कल्याण सरपट दौड़ रहा है उसके परिणाम जो भी हो मगर जिस तरह से मानवता तार तार हो रही है वह किसी से छिपी नही है देखा जाय तो सेवा कल्याण से अटे सर्बकल्याण से जो त्राही त्राही लोगो के बीच मची हो वह भले ही फोटो शेसनो के बीच दम तोड़ दे मगर परबाह किसे 10 हजार के उधार पर जीवन की काया पलटने बाले दावे और रोजगार के लिये छपते विज्ञापनो के बीच लोग समझ ही नही पा रहै कि वह अब सुनहरे भबिष्य के लिये कौनसा सपना बुने चमचे चापलूसो से वाहवाही और जनधन से उड़ने बाले चैपर मे फर्रराटे भरने बालो को क्या पता कि आम जीवन जिन्दा रहने किस स्तर तक संघर्ष करने पर बैबस मजबूर है मगर संकटो से निजात उन्है आज भी नही काश आमजन के इस संकट को जबाबदेह लोग समझ पाये तो आज के समय मे यही दीन हीनो की सबसे बड़ी सेवा होगी ।    

पी. डब्लू. डी. उधार के माल पर घटिया सड़को का निर्माण

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 कबाड़े पर उतारू कारिंदो की जमात, सफर करते लोग  घटिया सड़क निर्माण का हब बनता म.प्र.  नीरज जाटव  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  शासन द्वारा र्निधारित दर से लगभग 25 से लेकर 30 फीसद कम कीमत पर सर्राटेदार सड़क निर्माण चल रहा है और बनने के कुछ दिनो बाद उनका उधड़ना जिस रफतार से शुरू होता है उस पर जबाबदेह लोगो को भले शर्म न हो मगर लोग इन घटिया सड़को पर सफर करने पर मजबूर है पूरे दाम पर घटिया काम का नजारा देखना हो तो लोगो को म.प्र. की सड़को पर सफर अवश्य करना चाहिए । अगर अपुष्ट सूत्रो की माने तो जिस तरह से निर्माण ऐजेन्सियो को मातहतो का संरक्षण जिला संभाग से लेकर राजधानी मे बैठे आला नेताओ का प्राप्त है उसके मददेनजर कोई भी मूॅह खोलने तैयार नही परिणाम की नवीन सड़क निर्माण के कुछ ही दिन पश्चात सड़को पर थिगड़ा लगाने को कार्य शिुरू हो जाता है करोड़ो रूपये फूक तैयार होने बाली सड़को की शिकायत पर तर्क यह रहता है कि कुछ बर्ष तक रखरखाब की जबाबदेही निर्माण एजेन्सी की होती है अब अगर ऐसे मे निर्माण एजेन्सी मनमानी कर घटिया सड़के बना रही है तो इसमे हर्ज ही क्या? देखा जाय तो जिस तरह से म.प्र. के ...

थिगड़ा, घटिया सड़को से चिकनी सड़को की बसूली

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बैबस सत्ता, बैलगाम माईबाप, बैरहम बसूली  व्ही. एस. भुल्ले   विलेज टाइम्स समाचार सेवा  एन. एच. ए. आई के नाम से जग प्रसिद्ध संस्था यू तो भारत सरकार के नवरतनो मे से एक कहा जाती है मगर चिकनी साफ सुथरी सुविधा युक्त सड़को के नाम जो बैरहम बसूली अपने लोगो द्वारा अपने ही लोगो से की जा रही है वह किसी से छिपी नही है मगर हर 60 कि. मी. पर स्थापित टाॅल टैक्स इस बात का परिणाम है एक बैबस सत्ता के आगे किस तरह से माईबाप बैलगाम हो चुके है । थिगड़ा लगी सड़को से सरेयाम चिकनी सड़को की बसूली जारी है अगर मुझे ठीक से याद है तो एन ए एच आई के एक जिम्मेदार अफसर ने कहा था कि अगर अच्छी चिकनी सड़के चाहिए तो टोल तो देना ही होगा । मगर अब सबाल यह है कि रोड टैक्स इन्कमटेक्स, हर उपयोग की बस्तु पर टैक्स ईधन और वाहन पर टैक्स उस पर भी टोलटैक्स मगर फिर भी थिगड़ा सड़क मगर कहते है समरथ को नही कहाॅ दोष गुसाई सो जो हो जाय वह अच्छा शायद प्रधान मंत्री जी ने माहौल हल्का करने ही सही वैक्सीन लगबाते वक्त सही ही कहा था कि देखकर लगाना नेताओ कि चमड़ी मोटी होती है । कभी कभी मजाक मे ही सही प्रधानमंत्री जी भी सटीक बात कह ही जाते है अब ...

मिशन आत्मनिर्भर प्रदेश,आकलन 2.40 लाख करोड़ शिक्षा, स्वास्थ, सड़क, सुरक्षा, संपदा संरक्षण, दोहन, सहित रोजगार को स्थान

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सेवा कल्याण सहित विकास का पूरा खाका तैयार  आय यथावत अतिरिक्त आय के नही दिखे नये प्रावधान  व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  आखिरकार बर्ष 2021-22 का बजट आ ही गया जो म.प्र. के एक बर्ष का लेखा जोखा है जिसमे आत्मनिर्भर मिशन को सामने रख कई बजटीय प्रावधान किये गये है जिसमे शिक्षा, सड़क, स्वास्थ, सुरखा, संपदा संरक्षण, दोहन सहित रोजगार को भी स्थान मिला है मोटे रूप से इसे सेवाभावी कल्याणकारी और विकास उन्मुख बजट कहा जा सकता है मगर सबाल वही है कि क्या यह मूर्त रूप ले पायेगा क्योकि आनादिकाल से ही आयडिया तो सेवा कल्याण के मार्ग पर दुरूस्त रहे है मगर क्रियान्वयन के अभाव मे वह समय वे समय धरासायी होते रहे है । मगर खुशी की बात उन जन प्रतिनिधियो के लिये ज्यादा है जो पिछली सरकार को छोड़कर इस सरकार का भाग बने है कम से कम जन राष्ट्रृहित से जुड़े मुददे पर बात तो हुई अगर क्रियान्वन ठीक से हुआ तो निश्चित ही म.प्र. के लिये यह बजट सुखद और परिणाम मूलक सिद्ध होगा । जय स्वराज ।