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Showing posts from February, 2019

मंच पर कि प्रभारी मंत्री प्रघुम्न तोमर ने गांधीगिरी, 3 मार्च से शुरू होगा शिवपुरी में आई.सी.यू. केन्द्र , गुरूजनों के हाथों मंच पर सम्मानित होना गर्व की बात नहीं, गुरू को मैं सम्मानित करू यह मेरे लिए गर्व की बात है- प्रभारी मंत्री प्रघुम्न तोमर

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जिला चिकित्सा द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में जिला अस्पताल पहुंचे प्रभारी मंत्री प्रघुम्न तोमर ने माल्यार्पण से स्वयं का स्वागत न करा स्वयं के हाथों डाॅक्टरों का माल्यार्पण कर स्वागत किया तथा मंच पर उपस्थित मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी, मेडीकल के डीन, सिविल सर्जन से यह आग्रह किया कि मुझे अभी तारीख चाहिए कि शिवपुरी का आई.सी.यू. कब शुरू होगा। आप तय करें और अभी मुझे तारीख बतायें जिससे मैं लोगों को बता सकूं कि अपनी मालिक जनता और अपने लोकप्रिय नेताओं को कि आई.सी.यू इस तारीख को मेरे महाराज के शहर में शुरू हो जायेगा और भरी सभा में मंच पर चुप खड़े हो गए। लगभग 15 मिनट तक समूचे कार्यक्रम में सनाका-सा खिचा रहा और मंत्री मंच पर मौन खड़े रहे। उसके पश्चात अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि 2 मार्च से आई.सी.यू. शुरू कर दिया जायेगा। इस पर मंत्री ने मौन तोड़ते हुए चिकित्सीय प्रशासन को तीन मार्च तक आई.सी.यू. शुरू करने की बात कही। तत्पश्चात स्व. माधराव सिंधिया महा विद्यालय के कार्यक्रम में पहुंचे प्रभारी मंत्री ने मंच पर पुष्प माला ग्रहण न करते हुए कहा कि...

काॅग्रेस का कुटुम्ब और काॅरपोरेट कल्चर 2019 में काॅग्रेस की नैया डुबाने तैयार

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  काॅग्रेस आलाकमान राहुल गांधी अपने अहम सार्थी प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के सहारे भले ही यूपी फतह करने व काॅग्रेस का जनाधार बढ़ा, काॅग्रेस के लिए दिल्ली का रास्ता साफ करने में जुटे हो। मगर उनकी कड़ी मेहनत से म.प्र., छत्तीसगढ़, राजस्थान में लंबे अंतराल के बाद मिली सत्ता में आसीन लोग और काॅरपोरेट कल्चर और कुटुम्ब सियासत को परवान चढ़ाने आतुर नेता फिलहाल काॅग्रेस की नैया डुबाने तैयार दिखते है। यह किसी से छिपा नहीं कि वर्तमान हालातों के मद्देनजर जिस तरह से लोकसभा चुनाव 2019 की बाजी पलटी है और राष्ट्र हित की खातिर काॅग्रेस को जिस तरह की शिकस्त सियासी तौर पर दिख रही है उसके बावजूद भी म.प्र. में पैर फैला चुके कुटुम्ब और काॅरपोरेट कल्चर ने काॅग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी है।  हो सकता है कि राहुल गांधी की संगठन विहीन काॅग्रेस की कमजोरी का लाभ काॅग्रेसी छत्रप संगठन और सत्ता में हिस्सेदारी बांट 2019 का खौंफ दिखा, उठाने में लगे हो। मगर सरकार की जो चाल-डाल और जो संरचना म.प्र. के सामने सिद्ध हो रही है वह कहीं से भी काॅग्रेस के हित में दिखा...

सुविधा के नाम शोषण सरकारों का शर्मनाक कृत्य आधी अधूरी असुविधा युक्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर कानून की आड़ में उगाही जारी

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  कभी निर्माता एजेन्सी के घाटे, तो कभी गजट नोटीफिकेशन की प्रति दिखाने वाले अघोषित रूप से प्रवक्ता एन.एच.ए.आई. के जिम्मेदार लोग निर्माण एजेन्सी द्वारा टर्मिनेशन का आवेदन दिए जाने की बात कहते हुए नहीं थकते हो और आम नागरिक के शोषण पर चुप रह, तमाशा देखते हो, तो कभी अपनी बैवसी का रोना-रोते हो। मगर जिस तरह से अधूरे सड़क निर्माण पर मनमाने अंदाज में बसूली हो रही है। भले ही उसे गजट नोटीफिकेशन का संरक्षण प्राप्त हो वह नैतिक दृष्टि से उचित नहीं। मगर स्तब्ध करने वाली बात यह है कि शिवपुरी से ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 3 पर हो रही बसूली पर राज्य व केन्द्र सरकारों की बैवसी फिलहाल अपने ही नागरिकों की मदद को तैयार नहीं।  कारण एन.एच.ए.आई द्वारा बनाए गए नियम कानून के चलते मंत्री से लेकर राज्य सरकार के आला अफसर तक मजबूर है। जब हमारे संवाददाता द्वारा सच जानने भारत सरकार के परिवहन पोत जल मार्ग मंत्री नितिन गडकरी के कार्यालय पर फोन लगाया गया तो वहां बताया गया कि आप टोल संयुक्त संचिव से चर्चा करें। उनके फोन पर बताया गया कि आप अधीक्षण यंत्री टो...

बड़ी जिम्मेदारी का समय-राजगोपाल पी.व्ही. संरक्षक एकता परिषद 2 अक्टूबर से जैनेवा पैदल मार्च

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  महात्मा गांधी की 150वीं जयन्ती के अवसर एकता परिषद जैनेवा की और कूच करेगी। 12 देश तथा भारत के म.प्र., छत्तीसगढ़, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल होती हुई यात्रा दिल्ली, उत्तराखण्ड से अटारी पहुंचेगी।  उन्हांेने कहा जल, जंगल, जमीन और मानवीय जीवन तथा पर्यावरण के बेहतर प्रबन्धन के सम्बन्ध में यह यात्रा है। 2 मार्च को भोपाल में गोष्ठी तथा 3 मार्च को रैली निकाली जायेगी। जिसमें 25 जुलाई को होने वाली सुनवाई में केन्द्र व राज्य सरकारों से आग्रह है कि वह वन व अपनी पीढ़ी के जीवन खासकर शहरिया, भरिया, वैगा लोगों के जीवन को ध्यान में रख, अपना-अपना पक्ष रखे। जिससे वन अधिनियम 2013 का ठीक से पालन हो सके और उन्हें उनके अधिकार मिल सके। जिससे उन्हें वन विभाग के उत्पीढ़न से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत ही नहीं समूचे एशिया के लिए यह बड़ी जिम्मेदारी का समय है। क्योंकि हमारे वादे, विज्ञान, समाज, अर्थशास्त्र, शिक्षा के क्षेत्र असफल हो रहे है। हमें नये जीवन की प्रमाणिकता खोजनी है और उसे सफल, सक्षम बना सिद्ध करना है। खासकर इस जबावदेही का मध्यम वर्ग को समझने व समझाने की आवश्यकता है...

सफल रणनीत के साथ ही उत्तरप्रदेश मैं नीति निर्धारित होगी

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  अभी चिन्तन, मंथन चल रहा है, जल्द ही प्रियंका जी के साथ मिलकर उत्तरप्रदेश में रणनीत निर्धारित होगी। जिसमें बच्चे, युवा, महिला, बुजुर्ग सभी के सपने और आशा-आकांक्षाओं को केन्द्र में रखा जायेगा। इसका खुलासा समय आने पर काॅग्रेस करेगी। फिलहाल संवाद, संपर्क जारी है।  उक्त बात काॅग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव उत्तरप्रदेश के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने विलेज टाइम्स संपादक वीरेन्द्र शर्मा से अनौपचारिक चर्चा के दौरान कही। अपने व्यस्तम भ्रमण के बीच सिंधिया ने अपना आखिरी कार्यक्रम रात ढाई बजे खत्म किया और सुबह होते ही वह साढ़े 9 बजे लोगों से जनसंपर्क करते दिखे। जिसको लेकर आम लोगों के बीच यह चर्चा सरगर्म रही कि आखिर रात 3 बजे सोने वाला व्यक्ति फिर अल-सुबह कैसे जग जाता है फिलहाल सिंधिया की दिनचर्या को लेकर चर्चाऐं सरगर्म है। जहां उन्होंने अल-सुबह मंदिर में मत्था टेक भगवान के दर्शन किये, तो दूसरी ओर उन्होंने क्रिकेट मैदान पर पहुंच क्रिकेट भी खेली और काॅलेज पहुंच छात्राओं से भी संवाद किया। 

सिंधिया के साथ खुलकर संवाद किया छात्राओं ने पुलिस बनी आदर्श

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  संवाद कार्यक्रम के दौरान सिंधिया के सवालो पर अधिकांश छात्रायें पुलिस सेवा में जाने की इच्छा व्यक्त करती रही। तो वहीं एक छात्रा ने राजनीति में जाने की इच्छा व्यक्त की। मगर सिंधिया ने समझाईस भरे अन्दाज में महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक राजनैतिक शुद्धिकरण के साथ महिलाओं की भूमिका राष्ट्र निर्माण में प्रतिबिम्बित करते हुए कहा कि अगर काॅग्रेस की सरकार देश में बनी तो सबसे पहला बिल महिलाओं की सरकार और शासन में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लाया जायेगा और उन्होंने कहा कि जीवन में कभी भी अपने मूल्य सिद्धान्तों से समझौता नहीं करना चाहिए। 

मोनो लाॅग में नहीं, मैं डायलाॅग में विश्वास रखता हूं- सिंधिया शुद्धिकरण के लिए स्वयं के प्रयास ही जीवन में सफल रहते है

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। इन्दिरा गांधी गल्र्स काॅलेज के वार्षिक उत्सव के अवसर पर संवाद कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व केन्द्रीय सांसद एवं काॅग्रेस के राष्ट्रीय महा सचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उपस्थित छात्राओं एवं उनके पालक तथा उपस्थित बुद्धिजीवियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मेरा सार्वजनिक या राजनैतिक जीवन में मोनो लाॅग में नहीं, डायलाॅग में विश्वास में है। जिन लोगों का मोनो लाॅग में विश्वास है वहीं मन की बात करते है।  उन्होंने कहा कि समस्त भारतवर्ष ही नहीं, हर नागरिक, युवा, छात्र-छात्राआंे का सपना है कि भारत प्रकृतिशील राष्ट्र बने। उन्हांेने छात्राओं के सवालों पर जबाव देते हुए कहा कि सामाजिक या राजनीति के शुद्धिकरण के लिए स्वयं के प्रयास सफल रहते है। इस बीच सवालों के अन्दर ही छात्राओं ने अपनी व्यवहारिक पीढ़ा और अपने सपनों को सिंधिया के साथ सवालों के माध्यम से साझा किया। इस मौके पर सिंधिया ने पूरे गांधीवादी तरीके से और एक मुखिया बतौर छात्राओं की जिज्ञासाओं का सहानुभूति पूर्वक जबाव दिया। इस मौके पर उनकी धर्मपत्नि प्रियदर्शनीय राजे सहित काॅग्रेस विधायक सहित एन.एस....

रिटार्यमेंट की उम्र 62, पूर्व भाजपा सरकार के निर्णय पर, चर्चा सरगर्म सरकार साफ करें कि सच क्या है ?

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जब निर्णय पारित नहीं, तो क्या अब रिटार्यमेंट की उम्र सिर्फ सिगूफा बचा है। लोकसभा चुनाव से ठीक पूर्व जिस तरह से चर्चा रिटार्यमेंट की उम्र 62 को लेकर आम है। वह प्रमाण के आभाव में सत्य है या असत्य यह साफ होना फिलहाल बांकी है। क्योंकि मसला काफी गंभीर व सीधे तौर पर लोक ही नहीं, तंत्र से भी जुड़ा है। जो म.प्र. के लाखों, हजारों अधिकारी, कर्मचारियों से भी जुड़ा है।  अगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो रिटार्यमेंट की उम्र 62 के निर्णय व उसके क्रियान्वयन की समीक्षा होना चाहिए। साथ ही म.प्र. की कमलनाथ सरकार को हजारों अधिकारी, कर्मचारियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनकी स्थिति व पूर्व सरकार के निर्णय को साफ करना चाहिए कि आखिर सच क्या है ? बहरहाल सच क्या है यह तो प्रदेश की सरकार और शासन ही जाने। मगर 62 वर्ष को लेकर फिलहाल चर्चा सरगर्म है। 

सार्थक राष्ट्र-जन, चिन्तन के आभाव की कीमत चुकाता समृद्ध राष्ट्र सत्ता संचालन में आध्यात्म, पुरूषार्थ अहम

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 90 का दशक आते-आते राष्ट्र-जन के सार्थक, चिन्तन के खात्मे के साथ समरस्ता, सेवा, समृद्धि, विकास के नाम स्वार्थवत सत्ताओं का देश में जो दौर शुरू हुआ 2014 आते-आते तक भले ही उसे विराम मिला हो। मगर यह देश आज भी सक्षम, सफल, समृद्ध नहीं बन सका। फिर कारण जो भी रहे हो।  ऐसा नहीं कि देश में 1989 से लेकर 2014 के बीच कुछ भी नहीं हुआ। बल्कि छणिक प्रयास, सेवा, विकास, कल्याण के नाम सत्ताओं के लिए तो अवश्य प्रयास हुए। मगर वह सत्तायें न तो लोगों को सहज, सरल, सुरक्षित, समृद्ध, संस्कारिक जीवन दे सकी और वह सर्वकल्याण में भी अक्षम और असफल साबित हुईं। परिणाम कि एक स्वाभिमानी संस्कारिक, समृद्ध, राष्ट्र में नैतिक पतन तथा गहरी जड़े जमा चुका भ्रष्टाचार तथा स्वार्थवत लोगों का भोले-भाले लोगों पर लोकतंत्र के नाम अघोषित साम्राज्य स्थापित होता रहा।  देखा जाये तो गिरोहबन्द दलों में तब्दील तथाकथित दल, संगठन, समूह, लोकतंत्र के नाम दम तोड़ती जनाकांक्षाऐं इस बात का प्रमाण है कि अब आशा-आकांक्षाओं का न तो कोई भाव रहा, न ही उसका कोई मोल। अगर देश में सार्थक राष्ट्र-जन के ल...

कर्ज में डूबी, कमलनाथ सरकार की माली हालत पर सवाल आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र, समय की दरकार भुगतान वेतन को भटकते लोग

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  अगर यो कहे कि जब से कमलनाथ सरकार म.प्र. में अस्तित्व में आई है तब से लोगों के संभावित भुगतान तो दूर आम कर्मचारियों को भी वेतन के लाले है। अगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो जिस बेरहमी से सेवा, विकास, कल्याण के नाम म.प्र. को कर्जदार बना, उसे आर्थिक रूप से खोखला कर, म.प्र. में जनधन लुटा है। इस नजीर ने शायद अंग्रेजों को भी पीछे छोड़, म.प्र. की भूमि को भी शर्मसार किया है। मगर दुर्भाग्य कि सियासी गलियारों में आज भी इसकी चर्चा तक नहीं।  फिलहाल तो प्रदेश सरकार के आर्थिक हालातों के मद्देनजर श्वेत पत्र ही एक ऐसा नुक्सा मौजूदा सरकार के पास बचा है। जिससे वह म.प्र. की माली हालत का खुलासा कर दूध का दूध और पानी का पानी कर म.प्र. के लोगों को यह बता सके कि पूर्ववर्ती सरकार ने किस तरह से जनधन का उपयोग किया है और आर्थिक रूप से इस प्रदेश को गर्त में डालने का काम किया है।  बेहतर हो कि जब सरकार श्वेत पत्र लेकर आये और जिससे जैसी कि चर्चा है कि सत्ता सौपानों को ठेके पर उठा जनधन का दुरूपयोग करने वालो का खुलासा हो सक और म.प्र. का आम नागरिक भी इस सत्य से ...

अन्धी हिंसा सार्थक नहीं, संगठित स्थाई समाधान, समय की दरकार

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है कि समस्या जब अनन्त दिखे और समाधान कोसो दूर, ऐसे में वैचारिक निदान ही सार्थक, सफल रहता है। जिस तरह की अंधी हिंसा वैचारिक आधार पर अपनी जड़े गहरी करती जा रही है वह मानवीय सभ्यता और इन्सानियत के हक में कतई नहीं। फिर भूभाग जो भी हो। अगर इसका स्थाई और सार्थक समाधान ढूंढना है, तो हमें संगठित रूप से सृष्टि की सार्थकता और सृजन के मार्ग पर अपनी क्षमताओं के साथ आगे बढ़ना होगा। आज जिस तरह की अंधी खूनी हिंसा विभिन्न भू-भागों पर मत या आवेश बस हो रही है। जिसमें मानव सभ्यता, जीव, जगत का कत्लेयाम हो रहा है। उससे आज तक न तो किसी को कुछ हासिल हो सका है और न ही भविष्य में कुछ हासिल होने वाला है।   कहते है मानव सृष्टि की सर्वोत्तम कृति है जो सफल, सार्थक, सृजन में सक्षम है। जिसके कन्धों पर समृद्ध, खुशहाल जीवन की जबावदेही होती है और सांस्कारिक रूप से एक ऐसे समाज विचार, सभ्यता, स्थापित कर, जो सृजन ही नहीं, समृद्ध, खुशहाल जीवन में सार्थक सिद्ध हो सके। उसी मानवीय कृति का आज आतंक के रास्ते कत्लेयाम उस मानव सभ्यता पर कलंक है। जो सृजन के लिए अस्तित्व में ...

गलतियों से सीख, सफलता की सीढ़ी न तो प्रभावी मुद्दे, वक्ता, न ही जनाधार मार्केटिंग के भंवर में मचा कोहराम

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है, गलतियों से सीख सफलता की कुंजी होती है। मगर जब गलतियां से सीख न ले उन्हें बार-बार दोहराया जाये तो विनाश सुनिश्चित होता है। जिसका समूचा अस्तित्व सीख, समझ पर निर्भर करता है। मगर जब रणनीतकार, सलाहकार, स्वार्थी, महत्वकांक्षी हो तो सुधार की गुजांइस न के बराबर होती है। लगभग ऐसा ही देश के महान संगठन काॅग्रेस के साथ हो रहा है। बरना 2014 की करारी हार से वह सीख लेती। मगर ऐसा हो न सका, न तो विगत 4 वर्षो में काॅग्रेस प्रखर वक्ता जनाधार वाले नेता, ज्वलंत मुद्दे, न ही राष्ट्र को समर्पित सत्याग्रही वैचारिक लोगों वह जोड़ सकी।  आज जिन 3 राज्यों की हालिया जीत को काॅग्रेस अपना हुनर बता रही है। वह भी सिर्फ और सिर्फ एक अहंकारी सत्ता का विकल्प जनता ने दिया है। अब उसे आम मतदाता की मजबूरी कहे या फिर काॅग्रेस नाम पर विश्वास। बरना जिस गिरदावरी, जागीरदारी में बटे दल के क्षत्रपों में चलती रस्सा-कसी से यह सफलता उसे कभी नसीब नहीं होती। जिस जनता की जीत के रथ पर सवार काॅग्रेस के रणनीतकार अब उ.प्र. ही नहीं, देश को फतह करना चाहते है। उन्हे समझना होगा कि इस ...

जबावदेही के अभाव में, कत्र्तव्य विमुखता का नंगा नाच

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  उधड़ी सड़के, जर्जर भवन, ऊंट पुलियाओं की भरमार, अवैध उत्खन्न, शासकीय भूमियों पर अतिक्रमण ही नहीं, जबावदेही के अभाव में कत्र्तव्य विमुखता का आलम क्या है यह देखने, समझने किसी भी गांव, गली के विकास और जबावदेह लोगों की कत्र्तव्य निष्ठा को देख, अन्दाजा लगाया जा सकता है। ऐसा नहीं कि हर माह मोटी-मोटी पगार प्राप्त कर, लग्झरी भवन, वाहनों की सुविधा पाने वाले उन नौकरशाहों और सत्ता, सुख भोगने वाले उन जनसेवकों को यथा स्थिति का पता न हो। मगर लिफाफा संस्कृति के आगे दम तोड़ती जनाकांक्षा वोट देने के बावजूद बेहाल बैवस हो आज स्वयं को ठगा-सा महसूस करती है। मगर जनधन, संपदा की मची लूट को रोकने वाला शायद कोई नहीं, यहीं आज इस महान लोकतांत्रिक व्यवस्था का दुर्भाग्य है। 

बच्चे भविष्य नहीं, भाग्य विधाता बच्चों में सिमटा भूत, वर्तमान, भविष्य राष्ट्र-जन, हास परिहास, स्वार्थवत सत्ताओं का केन्द्र नहीं, बल्कि यह किसी भी भू-भाग का मान-सम्मान, स्वभिमान होता है जब भी इस महान भू-भाग पर संकट रहा बच्चों का मार्गदर्शन, पुरूषार्थ ही सारथी रहा है

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  दुर्भाग्य बस, अहम, अहंकार, स्वार्थवत लोग, मान-सम्मान, स्वाभिमान और इस महान राष्ट्र में जो देख सुन पढ़ रहे है। वह न तो इस महान भूभाग की नियति रही है, न ही यर्थात है। सच क्या है आज इस महान राष्ट्र के उतराधिकारी, बुजुर्ग, युवा, बच्चों को समझने वाली है, हो सकता है बुजुर्ग वंश मोह, युवा बेहतर भविष्य, सपनो के मोह में न समझ, सोच सके।  मगर इस महान राष्ट्र के बच्चों से न उम्मीद होना बैमानी होगी। अगर यो कहे कि यहीं इस महान राष्ट्र के महान भाग्य विधाता होगें इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। अगर हजारों, सैकड़ों वर्ष बाद भी यह राष्ट्र अपने पैरों पर खड़ा है। वह इस महान राष्ट्र के बच्चों का ही पुरूषार्थ है। मगर संदेह का सवाल आज इसलिए यक्ष है कि सियासत, सत्ता जिस तरह से गिरोहबन्द, सियासत का शिकार हो अपने-अपने निहित स्वार्थ, अहम, अहंकार अस्तित्व की जंग में डूब चुकी है। उससे सफल सार्थक परिणामों की उम्मीद रख समृद्ध, खुशहाल जीवन की कल्पना करना बैमानी है। अगर यों कहे कि देश की सियासत सीधे तौर पर दो धु्रवो में बट चुकी है। जहां एक धु्रव वैचारिक आधार प...

न जमीन, न आसमान कैसे होगा जनकल्याण प्रधानमंत्री जी की नियत निष्ठा पर सवाल बैमानी

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  कहते है कि अंग्रेजों ने जब पहली मर्तवा दिल्ली पर जीत हासिल कर, दिल्ली की सड़कों पर विजय जुलूस निकाला तो सड़कों के आजू-बाजू मौजूद लोग तालियां बजा रहे थे। कारण जो भी रहे हो, मगर सुख, दुख में शामिल होने की संस्कृति और पुरूषार्थ का सम्मान शायद इस भू-भाग का नैसर्गिक संस्कार रहा है।  आज स्वार्थवत लोगों के रहते इस महान भू-भाग का यहीं महान संस्कार शायद हमारी महान संस्कृति के उतराधिकारियों के लिए आज की निर्मम राजनीति में नासूर साबित हो रहा है।  जिस तरह से भ्रामक मार्केटिंग के सहारे गिरोहबन्द टीमें सत्ता सुख भोगने और सत्ता हासिल करने, मत के माध्यम से इस महान राष्ट्र को कमजोर कर, स्वयं को समृद्ध, शक्तिशाली बनाने आतुर है वह शायद हमारे महान संस्कार की कमजोरी ही है। मगर जिस तरह की चर्चा आज आम है कि प्रधानमंत्री की निष्ठा, नियत, त्याग, तपस्या पर सवाल सिर्फ बैमानी ही हो सकती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सियासी सवाल होना स्वभाविक है। मगर तथ्य हीन सवाल इस सियासी संग्राम में सम्पूर्ण सत्य नहीं।  सम्पूर्ण सत्य यह है कि 1971 के बाद या त...

प्रमाण, प्रतिष्ठा पावर प्रतिभाओं की प्रमाणिकता से अनभिज्ञ स्वाभिमानी राष्ट्र को प्रभावी प्रधानमंत्री से अनुभूति की दरकार राष्ट्रवाद के ककहरे पर अविश्वास

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। प्रधानमंत्री चाहते तो इस महान स्वाभिमानी राष्ट्र को स्वीकार्य सर्वमान्य सृजन, अनुभूति पूर्ण हल देख सकते थे। रिपोर्ट कार्ड की सार्थकता पर सवाल, समस्या का हल नहीं, बल्कि पुरूषार्थ की सार्थकता ही समाधान हो सकता है। इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि जिस हालात में प्रधानमंत्री जी ने देश को सम्हाला और और एक नया स्वरूप प्रस्तुत किया वह चैकाने वाला हो सकता है। मगर यह सम्पूर्ण सत्य नहीं, जिस तरह स्वयं प्रधानमंत्री ने सदन के अन्दर अपनी त्याग, तपस्या और लक्ष्य को स्वीकारा सत्य हो सकता है। वह भी मौजूदा सियासी ककहरे के रहते।  मगर 55 माह के रिपोर्ट कार्ड में कुछ प्रमाण थे तो कुछ की प्रमाणिकता भी। मगर इस बीच कुछ नहीं था तो वह अनुभूति करने लायक वह क्षण जो राष्ट्र-जन व्यवस्था को यह समझा पाता कि अक्स अधूरा नहीं पूरा है। काश वह अपनी टीम के माध्यम से उस अक्स को वह पूर्ण रूप दे पाते, मगर ऐसा हो न सका। मगर उनकी व्यवहारिक दक्षता बताती है कि अगर लक्ष़्य स्पष्ट, संसाधन सुस्पष्ट सुनिश्चित होते तो परिणाम ही नहीं रिपोर्ट सरकार का रिपोर्ट कार्ड ही कुछ और होता।...

सारथी की मुद्रा में सिंधिया जम्हूरी मैदान में जमकर दहाड़े ज्योतिरादित्य सिंधिया

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। राजशी ठाट-वाट त्याग, राष्ट्र जन सेवा में स्वयं को 18 घन्टे तक झौंकने वाले स्व. माधवराव सिंधिया के इकलौते पुत्र भाजपा की जननी स्व. राजमाता विजयाराजे सिंधिया के सुपौत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह साबित कर दिया कि वह महाराजा होने के बावजूद भी राष्ट्र जनकल्याण के लिए एक सच्चे सारथी भी बन सकते है। जिस दहाड़ के साथ उन्होंने भाजपा को ललकारा है वह कोई साधारण बात नहीं, कारण स्पष्ट है राष्ट्र जन कल्याण और अपने नेता का निस्वार्थ के साथ 2ः30 पर सोने वाले 3ः45 बजे उठने वाले दैनिक व्यायाम के बाद 8ः50 पर तैयार हो सामाजिक व्यवहारिक सरोकारों को पूर्ण कर 9ः30 पर पुनः आम जन को स्वयं को समर्पित नेता की खास बात यह है कि लाख मुश्किलों के बावजूद कभी किसी से शिकायत नहीं की। राष्ट्र जन कल्याण में लीन ग्वालियर-चम्बल के इस शेर का आलम यह है कि जो न तो प्रकृति विरूद्ध किसी सिद्धान्त को स्वीकारना चाहता है, न ही हर हालत में अपने कत्र्तव्य निर्वहन को परास्त होने देखना चाहता। अपने माता-पिता के भक्त इस राजवंशी की कृतज्ञता का परिणाम फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। मगर सच यह ...

क्या ई-टेन्डरिंग के तिलिस्म को तोड़ पायेगी, कमलनाथ सरकार राहुल की मंशा को पलीता लगाती, सरकार

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  राहुल की जम्हूरी मैदान की दहाड़ के पीछे का सच जो भी हो। मगर जिस तरह से उन्होंने गांव, गली, गरीब, नौजवान, किसान के हित में आवाज बुलन्द कर मंच पर मौजूद म.प्र. सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री को हिदायत दी है। उससे साफ है कि वह अपने पिता स्व. राजीव गांधी द्वारा गांव, गली तक सत्ता की हनक पहुंचाने की गरज से संविधान में 73 व 74वे संविधान संशोधन कर देश में पंचायतीराज व नगरीयाराज की स्थापना की। शायद उसी से प्रेरणा लें, राहुल गांधी भी म.प्र. सरकार को गांव, गली अर्थात नगरीय पंचायतीराज के साथ म.प्र. सरकार को चलते देखना चाहते है। इसीलिए मंच से उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह म.प्र. को कृषि प्रधान प्रदेश ही नहीं स्थानीय उघोगों के हव के रूप में देखना चाहते है। उन्होंने यह भी कहा कि अगले 10 वर्ष में वह चाहते है कि म.प्र. में मेडिन म.प्र. ही नहीं, हर जिले गांव का नाम उत्पादन से जुड़े। उन्होंने मंच से यह भी स्पष्ट किया कि म.प्र. में काॅग्रेस सरकार केवल काॅग्रेस की सरकार नहीं, बल्कि आम गरीब, किसान, युवा, नौजवान, माता-बहिनों एवं काॅग्रेस कार्यकर्ता की सरका...

प्रमाणिक समाधानहीन, सच्चा सार्थी साबित हो सकता है, सियासत में प्रतिभा, प्रदर्शन के सहज अवसर और संसाधन हो सकते है सच्चे मार्गदर्शक

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सम्मानजनक, समृद्ध, स्वाभिमानी जीवन एवं गांव, गली के मान-सम्मान, स्वाभिमान के लिए जब तक सत्ता, संगठन, संस्थायें स्वयं को सार्थक सिद्ध करने में सफल नहीं होगीं और उनका संघर्ष इस राष्ट्र के हर नागरिक के मान-सम्मान से जब तक नहीं जुड़ेगा, तब तक मौजूद हालातों में परिवर्तन असंभव है।  गलतियां हुई है मगर उन गलतियों को समाधान न हो यह भी संभव नहीं। समाधान ही सत्ता, संगठन, संस्था, व्यक्ति का कत्र्तव्य होना चाहिए। अगर आज की सियासत में स्वार्थवत सत्तायें, गिरोहबन्द सियासी, संस्कृति, संस्कार, अन्तिम सत्य है। तो इन्सान होने के नाते सृजन, समाधान में कत्र्तव्य निर्वहन की पराकाष्ठा ही संपूर्ण सत्य है। यह समझने वाली हर उस नागरिक, सत्ता, संगठनों, संस्थाओं को होना चाहिए। जो समृद्ध, खुशहाल जीवन की आशा-आकांक्षा रखते है और सर्वकल्याण में विश्वास। जय स्वराज 

स्वार्थवत, गिरोहबंद सियासी संस्कृति की जकड़ में जनतंत्र सच साबित होती सैकड़ों वर्ष पुरानी आशंका

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। पूर्वी-पश्चिमी संस्कृति के फेर में सफर करता समृद्ध,खुशहाल जीवन इतना बैवस बदहाल होगा स्वार्थवत, गिरोहबन्द सत्ताओं और गिरोहबन्द सियासी संस्कृति के बीच शायद सृष्टि रचियता तथा सियासत, सत्ता, संस्कृति, संस्कार निर्माताओं ने भी न सोचा होगा।  यूं तो सैंकड़ों वर्ष तक भारत ही नहीं, समूचे विश्व के अधिकांश राज्य देशों पर कभी अपना साम्राज्य स्थापित करने वाली वृतानियां हुकूमत ने भी न सोचा होगा कि जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था को उसने भी समय-समय पूरी समझ-बूझ के बाद स्वयं को सक्षम बना, जनतांत्रिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था को आत्मसात किया। जिसे वह पूर्वी देशों में कई बार लोकतंत्र की मांग होने के बावजूद उस मांग को दरकिनार कर, लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना से कतराता रहा। क्योंकि वह जानते थे कि न तो पूर्वी भू-भाग की आवो-हवा, आचरण, संस्कार अपने विधान को त्याग नवनिर्मित संवैधानिक व्यवस्था को आत्मसात कर पायेगें और न ही ऐसे देशों में वृतानियां हुकूमत लोकतांत्रिक व्यवस्था का सफल संचालन कर पायेगें।  परिणाम कि हम एक लोकतांत्रिक देश होने के बावजूद सफल, संचालन में बै...

सत्ता के संघर्ष में, बैवस देश वैचारिक, व्यक्तिगत उन्माद बना विनाश की जड़ समर्थ, समृद्ध, राष्ट्र में खुशहाली के लाले

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। लम्बा पढ़ना, लिखना, परिणाम मूलक विचार, रचना, संस्कार, संस्कृति आज स्वार्थवत माहौल में भले ही निरर्थक हो, मगर यह सार्थक सत्य नहीं। न ही यह संभव है क्योंकि सत्य, सत्य होता है। जो आज भी सार्थक है और प्रमाणिक भी। जिस तरह से स्वार्थवत माहौल में सत्ता, संघर्ष सेवा कल्याण के नाम चल रहा है। उसके परिणाम न तो कभी पूर्व में सार्थक रहे, न ही वह वर्तमान व भविष्य में सार्थक रहने वाले है। जिस तरह से स्वार्थवत लोग या वैचारिक उन्मादी संगठन, संस्थायें सत्ता को हासिल करने या सत्ता में सक्रिय बने रहने के लिए सत्ता संघर्ष में सक्रिय है वह किसी भी महान लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक है। बैवस, पीड़ित, वंचित, बेरोजगार, किसान, शिक्षाविद जैसे लोगों को यह समझने वाली बात होना चाहिए। समझने वाली तो आज उन विधा, विद्ववान, प्रतिभाओं को भी है, जो अवसरों के आभाव में अपने ही व स्वयं के द्वारा चुनी गई सत्ताओं के रहते अपनी प्रतिभा, प्रदर्शन का पुरूषार्थ करने में स्वयं को संसाधनों के आभाव में अक्षम और ठगा-सा मेहसूस करते है।  देखा जाए तो सूतखोर संस्कृति की कायल सत्ता, संस्था...