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Showing posts from March, 2020

अभी भी न चेते तो फिर पछताना होगा समृद्ध समाज और सत्ताओं को

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मुख्य संयोजक स्वराज जिस तरह से प्रधानमंत्री के आव्हान पर देश की 130 करोड के लगभग आबादी अपने घरों में और शासन में तैनात जनसेवा में जुटे लोग सडकों पर तैनात है उससे इतना तो स्पष्ट है कि जीत हमारी ही होगी। बैसे भी स्वराज का लक्ष्य ऐसे ही निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन को लेकर रहा है जो कोरोना जैसी महामारी से लडने में आज ब्राहामास्त्र साबित हो रहा है।  ज्ञात हो कि कोरोना की गंभीरता को समझ स्वराज के मुख्य संयोजक ने 16 मार्च के अपने आलेख में यह सलाह मशवरा सत्ता और सरकारों को दिया था कि कोरोना की भयाभयता को देख मौजूद संसाधनों के मद्देजनर तत्काल राष्ट्रीय, प्रादेशिक, जिला नगर, कस्बों की सीमाऐं सील कर आबादी से दूर एक अलग चिकित्सा सेवा जांच, शोध केन्द्र बनाया जाये जिसमें चिकित्सीय सुविधा त्रिस्तरीय हो और उस राष्ट्रीय सेन्टर को एयर टेक्सियों से लैस किया जाये जिससे देश में कहीं पर भी कोरोना से ग्रषित या संभावित व्यक्ति की सूचना मिले तो उसे तत्काल एयर एम्बुलेंस के माध्यम से मौजूद आबादी से दूर उस राष्ट्रीय चिकित्सीय केन्द्र पहुंचा उसकी जांच कर उसे चिकित्सीय लाभ दिया जा सके। मगर दुर्भाग्य कि 16 ...

निष्ठापूर्ण, जबावदेह, कत्र्तव्य निर्वहन की मिशाल बनते मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री उतरे मैदान में

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वीरेन्द्र भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जब से देश के प्रधानमंत्री ने देश के 130 करोड की आबादी के सामने कोरोना के संभावित खतरे को भाप सम्पूर्ण लाॅकडाउन अतः घरों में रहने की घोषणा की है तभी से उत्तप्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल जबरदस्त एक्शन मोड में दिखे और सरकार की ओर से जो भी व्यवस्थायें संभव हो सकती थी उन्हें पूर्ण करने सारे अमले को जुटा दिया। उसके के बाद जहां सडक पर लोगों को राहत बांटती और ढांढस बंधाती पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी और म.प्र. के नये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान दिखे। मगर देश की सर्वाधिक आबादी वाले प्रदेश उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री जो जबावदेह निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन की जो मिशाल तमाम व्यवस्थाओं के निरीक्षण के साथ स्वयं मौके पर पहुंच यह संदेश समूचे अमले को देने की कोशिश की कि वह कोरोना को लेकर उत्तरप्रदेश सरकार कितनी सजग और समर्पित है। सबसे पहले प्रदेश के गरीब, मजदूर और संक्रमित लोगों की चिन्ता कर उनके चिकित्सीय संसाधन और मजदूरों, किसानों के लिये खादय रसद के साथ नगद राशि की जो व्यवस्था कराई गई वह काबिले गौर है। म...

एक प्रधानमंत्री और 130 करोड का देश..... स्वयं, परिवार, समाज, राष्ट्र की खातिर, घर में ही रहे, और एक दूसरे से दूरी बनाये रखे संकट की घडी में में प्रधानमंत्री जी की सीख ही सबसे बडा समाधान

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से कोरोना महामारी के रूप में महा संकट हम भारतवर्ष के लोगों के सामने खडा है। ऐसे में हमारे यशस्वी, तपस्वी प्रधानमंत्री जी की सीख उनके आग्रह उनके निर्देशों का पालन ही आज के समय में स्वयं की रक्षा, परिवार की रक्षा, समाज की रक्षा और राष्ट्र की रक्षा के लिये सबसे अहम है। हम 130 करोड की आबादी वाले इस महान राष्ट्र की जिस तरह से हमारे प्रधानमंत्री जी ने चिन्ता की है ऐसे में हमारी सबसे बडी चिन्ता हमारे अपनो के लिये प्रधानमंत्री जी के वह निर्देश उनका आग्रह कि हम 21 दिनों तक घर में ही रहे और एक दूसरे से दूरी बना परिवार के मुखिया तथा अपने मानव, धर्म का पालन करें। हमें यह विधित होना चाहिए कि हमारी भारत सरकार ने एक लाख 70 हजार करोड रूपये इस महामारी की जंग से लडने सुनिश्चित कर दिये है और स्वयं प्रधानमंत्री जी ने 15000 हजार करोड रूपया इस तरह की बीमारियों के समाधान हेतु अलग से रख छोडे है। हमारी सरकारें पुरजोर हमारी मदद और हमारे स्वस्थ रहने की चिन्ता में जुटी है और समाधान के लिये भरसक मौजूद संसाधनों के बीच प्रयास कर रही है। ऐसे में हमारा कत्र्तव्य है क...

खाद, रसद, दवा, पानी, परिवहन सेवा से परेशान मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री उतरे सडकों पर प्रधानमंत्री की सीख और कोरोना के कहर से बेखबर, म.प्र. शासन जुटा ट्रांसपर पोस्टिंग में

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। भले ही कफ्र्यू के बीच बहुमत सिद्ध कर म.प्र. की सत्ता के मुखिया बने म.प्र. के मुख्यमंत्री भोपाल की सडकों पर उतर आमजन व सेवा में तैनात अधिकारी, कर्मचारियों को ढांढस बधाने में जुटो हो। मगर सरकार बदलते ही आये दिन म.प्र. शासन जिस तरह से ट्रांसपर पोस्टिंग के काम में युद्ध स्तर पर कूद पडा है यह कोरोना के कहर के बीच शर्मनाक ही कहा जायेगा। जबकि पूर्व से पदस्थ अधिकारी पहले से ही म.प्र. के लोगों को सहज पूर्व से रसद, राशन, दवा, पानी, परिवहन सेवा सतत उपलब्ध कराने में अक्षम साबित हो रहे है। ऐसे में नई-नई पोस्टिंग किया जाना अपने आप में शासन और सरकार की मंशा पर सवाल खडे करता है। कौन नहीं जानता कि देश के प्रधानमंत्री ने लाॅकडाउन की घोषणा के साथ ही सरकारों को समझाइस और हिदायत दी थी कि सरकारें कुछ महीने के लिये सारे काम छोडकर सिर्फ और सिर्फ लोगों के स्वास्थ्य और कोरोना के कहर से बचाने में जुटे। मगर ठीक उसके उलट म.प्र. सरकार के पास अभी तक पारदर्शी और प्रभावी ऐसा कोई सिस्टम खडा नहीं हो सका जिसे देख सुनकर कहा जा सके कि म.प्र. में कोरोना से जंग के पुख्ता इंतजाम है।...

कागजी घोडो पर सवार, राहत बनी, आफत कोरोना की जंग को कमजोर करती कुव्यवस्था

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है जीवन को चोट पहुंचाने में जिस तरह से जमजुओं की परम्परा मानवीय जीन में रही है उसी तरह आज की व्यवस्था में कुव्यवस्था सत्ता, शासन, समाज या फिर सरकारों में हो। कहते है जो स्वभाव जमजुओं का जीवन में घातक होता है वहीं स्वभाव किसी भी व्यवस्था में कुव्यवस्था का होता है। मगर कहते है मानव सभ्यता अनादिकाल से ही निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के साथ सेवाभावी सर्वकल्याणकारी रही है। जो कि कोई भी सत्ता, शासन व्यवस्था का मूल आधार होता है। मगर महा विपदा के वक्त जब स्वयं देश के प्रधानमंत्री राज्य सरकारों से एवं शासकों से कुछ महीने के लिये सिर्फ स्वास्थ्य सेवा और कोरोना जैसी महामारी से जंग का आव्हान करते, आग्रह करते, आगाह करते। ऐसे में व्यवस्था, समाज तथा सेवा, कल्याण निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन में पैठ जमाये तथाकथित कत्र्तव्य विमुख लोगो का क्या ? जो मौत के मुहाने पर खडी मानवता को देख कत्र्तव्य विहीन या धन लालसा में जुटे तथाकथित धन लालची आज भी कत्र्तव्य विमुख हो लोगों की जिन्दगी से खिलवाड करने में जुटे है।  कागजी घोडो पर सवार मलाई काटू, अस्त बल, आमजन...

प्रधानमंत्री की चिन्ता व्यर्थ नहीं सडक पर मौत से खेलती व्यवस्था कोरोना से खुद की रक्षा ही स्वजन, प्रियजनों की सुरक्षा काम न हो तो घर में ही रहे

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कोरोना के कहर से जब समूचा विश्व कराहने पर मजबूर है और खौफ से बैवस मजबूर नजर आ रहा है ऐसे में भारत के प्रधानमंत्री जी की चिन्ता उनकी नाराजगी, उनका आग्रह कोई बैवजह नहीं हो सकता। मामला साफ है कि जिस तरह से विश्व भर में लोग कोरोना की चपेट में आ अपनी बहुमूल्य जान गवा रहे है वह कोरोना जैसी महामारी की भयाभयता को समझने काफी है। कहीं पर सीमाऐं सील तो कहीं कफ्र्यू, शट-डाउन की स्थिति उन बेगुनाह जानों को बचाने की शासन और सरकारों की कोशिश है जो जाने-अनजाने इसका शिकार हो रहीं है। फिलहाल की स्थिति में कोरोना से बचने का मात्र एक ही उपाय है कि हम एक दूसरे के संपर्क में न जाये अपने घरों पर ही रहे और अगर कोई ऐसी बीमारी होती है जिसके लक्षण कोरोना से मिलते-जुलते हो तो अवश्य शासकीय डाॅक्टर या फिर शासन द्वारा निर्धारित मोबाईल नंबरों पर संपर्क कर देश एवं मानव जगत पर आई विपदा से लडने में शासन और सरकारों का हाथ हम बटा अपनी अपने स्वजन-प्रियजनों की जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते है। आज यह हर सजग मानव को समझने और अपने प्रियजन, सज्जन, मित्रगण, पहचान वालों को समझाने वा...

स्वराज से समाधान तक, जीवन, संघर्ष, सेवा की सार्थकता कोरोना से व्यक्ति, परिवार, समाज, संस्थायें, सत्ता, सरकार, सभी को एक साथ लडना होगा राष्ट्रीय, प्रादेशिक, जिला, नगर, कस्बों की सीमाऐं सील हो तथा सीमा पर ही स्क्रेनिंग, सेनेट्राईजेशन के साथ, सडक तथा एयर टैक्सियों की व्यवस्था करनी होगी हर जिले में अस्थाई आईसुलेशन वार्ड के अलावा एक राष्ट्रीय त्रिस्तरीय आईसुलेशन जांच, शोध, समाधान केन्द्र एयर टैक्सियों से लैस तत्काल स्थापित हो शट-डाउन के साथ संभावित क्षेत्रों, घरों का हो सेनेट्राईजेशन

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। ज्ञात हो कि जब देश में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 40 के पार भी नहीं हुई थी तब इन सुझावों के साथ व्यवस्थाओं को आगाह किया गया था जिससे यह महामारी व्यापक रूप न ले सके। खुशी की बात यह है कि देश के प्रधानमंत्री ने कोरोना की गंभीरता और व्यवस्था में मौजूद स्थिति को देखते हुये राष्ट्र के नाम अपना संदेश दिया और एक दिन का स्व-प्रेरित जनता कफ्र्यू का आव्हान किया जिसे  एक सुखद संदेश 130 करोड के देश में कहा जा सकता है और भारतवर्ष के मानव, जगत की कृतज्ञता को पहचाना जा सकता है। अगर ऐसा ही आगे भी हम लोग देखकर सीखकर समझकर सटीक सलाह पश्चात स्व-प्रेरणा से स्व-शासित अनुशासित जीवन निर्वहन करते है तो निश्चित ही हम कोरोना जैसी महामारी को हराने में कामयाब अवश्य होगें। शायद हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि शुरू से ही स्वराज की प्रेरणा हर व्यक्ति, हर जीव के निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन से ओतप्रोत रही है। मगर विगत 35 वर्षो में जिस तरह से सत्ता, सियासतों के संरक्षण में अप्रत्याशित नवनिर्मित तथाकथित संस्कृति, संस्कार, व्यक्ति, समाज, परिवारों में स्थापित हुये और जीवन...

घोडे की शै से, खत्म सियासत.............तीरंदाज ?

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व्ही.एस.भुल्ले भैया- ये तो जमा-जमाया सत्ता का खेल ही खत्म हो लिया। मोहरो से भरी शतरंज पर बजीर, हाथी, ऊंट बैवस पडे है और प्यादे खत्म सियासत के खेल में संघर्ष कर सफर में जुटे है। सुना है मामला रैफरियों के हाथों से भी निकल अब थर्ड एम्पायर के चैखटों तक जा पहुंचा है। कै मने शतरंज पर मोहरों की जमी-जमाई बाजी समेट लूं या फिर थर्ड एम्पायर के निर्णय आने तक का इंतजार करूं। मगर कै करू अगर चैसर का खेल रहा होता तो फिर भी उल्टे पासे फिक जाते। मगर भाया ये तो शतरंज है। बैसे भी काडू बोल्या शतरंज में घोडे की शै बडी ही खतरनाक होवे। जिसके सामने कोई मोहरा सीधा अडदंग नहीं आता। क्योंकि शतरंज में घोड़ा ही ऐसा मोहरा होता है जो ढाई घर चलता है। क्या भैया वाक्य में ही म्हारी जमी-जमाई सत्ता, सियासत का खेल खत्म। भैये- मुये चुप कर कै थारे को मालूम कोणी म.प्र. की सियासत में फिलहाल आरपार का खेल चल रहा है। घोडे की ढैया से बजीर बादशाह ऊंट, हाथी ही नहीं प्यादों तक का दम निकल रहा है, तो कहीं आक्रोश बढ रहा है।  भैया- तो क्या मुराद में मिली म्हारी सत्ता की मिलकीयत यूं ही सरेआम लुट जायेगी और म्हारे बापू के विचारों क...

जीवन रक्षा सत्ताओं का धर्म आपातकालीन की तरह जुटे सरकारें राष्ट्र-जन, मानव, जीव-जगत की खातिर कुछ करने का वक्त

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अगर कोरोना के कहर खौफ को लेकर हमारे शासक, सत्ता, सरकारें, वाक्य में ही संजीदा गंभीर है तो कोरोना से बचाव के प्रचार-प्रसार और उपाय गांव, गली, नगर, शहर से लेकर महानगरों तक युद्ध स्तर पर होना चाहिए। जिसके लिए सरकारें तत्काल त्रिस्तरीय फाॅरमूले पर काम कर सकती है।  1. तत्काल राष्ट्र, प्रदेश, जिला स्तर की सीमाऐं सील कर आने-जाने वालों की स्क्रीनिंग सीमा पर ही की जाये।  2. देश में एक हाईटेक राष्ट्रीय, त्रिस्तरीय आईसूलेशन, जांच, शोध, समाधान, उपचार केन्द्र की स्थापना घनी आबादी से दूर होना चाहिए। 3. कोरोना जैसी घातक बीमारियों से चिन्हित व्यक्तियो को राष्ट्रीय आईसूलेशन केन्द्र पहुंचाने ईयर टेक्सियों की व्यवस्था कर युद्ध स्तर पर पर्याप्त संसाधन झौंकना चाहिए। जिससे आये दिन दस्तक देने वाली ऐसी घातक बीमारियों का सामना सुगंमता और सार्थकता के साथ किया जा सके। बेहतर तो यह हो कि हम अपनी प्राचीनतम जीवन सिद्धान्त अनुरूप जीवन निर्वहन के मार्ग प्रस्त करें। यहीं हमारी और मानव जीवन की सिद्ध सार्थकता होगी। 

कोरोना के खौफ से कांपी मानवता जीवन सुरक्षा की मोहताज हुई सत्तायें, संसाधन, सरोकार समाधान को मुंह चिढाती नव सभ्यता, संस्कृति और संस्कार

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। ''अगर हमारी महान कहावतों को विज्ञान, क्षेत्र सूत्र मान लिया होता तो विलासता में वैभव तलाशती मानव, सभ्यता आज विनाश के कगार पर न खडी होती। अगर कहावतों की माने तो कहावत ये थी कि अगर ऊपर वाले ने चुभ दिया है तो चुना भी देगाÓÓ यूं तो लाईलाज बीमारियों का नये-नये रूप में सामने आना अनादिकाल से लगा आ रहा है। भले ही वह कितनी ही घातक क्यों न रही हो। उनका भी इलाज देर सवेर हासिल होता ही रहा है। फिर चाहे वह काला ज्वर से लेकर टी.व्ही, कैंसर, एड्स, प्लैग, स्वाईन फ्लू, मलेरिया, चिकनगुनिया, हैपीटाईस-बी जैसी जानलेवा बीमारियां रही हो। सभी पर मानव सभ्यता ने जीत हासिल की। मगर कोरोना के खौंफ से जिस तरह से समूचा विश्व मानवता थर्राई है वह आज हर मानव को सृष्टि, सिद्धान्त और सर्वकल्याण के मद्देनजर समझने वाली बात होना चाहिए। कभी समूचे विश्व, मानव जगत को अपने आध्यात्म, तपस्या, निष्ठापूर्ण, कत्र्तव्य निर्वहन से सर्वकल्याण के लिए सिद्धान्ता प्रोयोगिक यथार्थ समाधान देने वाला भूभाग भी कभी इतना आतंकित हो। सुरक्षा के नाम निढाल खडा होगा यह हमारे तपस्वी, त्याग पुरूष पूर्व...

अपह्त हुआ लोकतंत्र बैवस हुआ विधान

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वीरेन्द्र भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अगर समृद्ध, सतत वैद्यानिक लोकतंत्र के विधान की सिद्धि और सार्थकता पर विचार हो तो विधि सम्वत व्यवस्था में चुने हुये जनप्रतिनिधि लाखों करोडो जनता का सदन में प्रतिनिधित्व करने के प्रतीक होते है। जब घूमने फिरने के नाम सामूहिक रूप से अपनी जनता और मतदाताओं को छोड सैकडो किलोमीटर दूर होटलों में समय बितायें। जिस पर घोषित-अघोषित आरोप अपहत करने या बंधक बनाकर रखने के हो, ऐसे में विधि की बैवसी साफ नजर आती है। जिस तरह का घटनाक्रम कर्नाटक, महाराष्ट्र के बाद आजकल म.प्र. में देखने और सुनने मिल रहा है वह सेवा कल्याण विकास के नाम किसी भी सभ्य व्यवस्था में शर्मनाक ही कहा जायेगा।  अगर लोकतंत्र में विधि की बैवसी इस तरह के घटनाक्रमों की जननी है तो इसमें सुधार अवश्यम भावी हो जाता है। जिस तरह का जनबल, धनबल, बाहुबल का खेल सत्ता के लिए सर्वकल्याण के नाम हो रहा है वह सूचना क्रान्ति के दौर में किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं कहे जा सकते है। आज जब आमजन को सत्ताओं से तत्काल राहत की दरकार है। ऐसे में लोकतंत्र की बैवसी की चर्चा होना स्वभाविक है। ...

स्थापित विधान की बैवस विधि से वैचेन लोग मजाक उडाते कत्र्तव्य विमुख लोग

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। बात आज समृद्ध जीवन को अंगीकार कर खुशहाल जीवन की आशा-आकांक्षाओं की बैवसी को लेकर है कि वह बैवस विधि की आड में किस तरह से वैचेन नजर आती है। विधि सम्वत निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन कर विधि की रक्षा सम्मान करने वालों का नव संस्कृति में आज जो हाल है वह किसी से छिपा नहीं। कारण विधि सम्वत कत्र्तव्य विमुख लोगों की बढती संख्या और स्वककल्याण में बढती आस्था को माना जा सकता है। जबकि सम्पूर्ण सत्य सर्वकल्याण में निहित है। इतिहास गवाह है कि हमारे पूर्वजों ने कितनी कठोर त्याग-तपस्या कर ऐसे-ऐसे विधान और संस्कृति, संस्कारों की स्थापना की। जिससे आम जीवन समृद्ध, खुशहाल बन सके। मगर आज जिस तरह से स्थापित विधान और विधि के सत्य को अस्वीकार्य कर सर्वकल्याण से इतर स्वकल्याण की होड मची है वह दर्दनाक भी और शर्मनाक भी। जो विधि की बैवसी को समझने काफी है। जिस असुरक्षा के भाव और भंवर में आज आम इंसान फंसता जा रहा है। हो सकता है कि कोरोना जैसी वेलगाम महामारी के संभावित परिणामों इसे समझने काफी है। मगर लगता है कि इतनी जल्दी हम स्वभाविक सत्य को समझने वाले है। जिस जीवन को समृ...

षड़यंत्रपूर्ण सियासत का महा मंथन...............तीरंदाज ?

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व्ही.एस.भुल्ले भैया- आंधी, ओला, सर्द गर्म हवाओं के बीच सिर्फ गमच्छे, लंगोट की अर्ध नग्न हालत में तने कै टोटका कर रहा है कै थारे को मालूम कोणी म्हारा तो समूचा कुनवा ही नहीं, म्हारे निजाम पर भी गहरा संकट आन पडा है। धड़ाम होती म्हारी षडयंत्रकारी सियासत पर मुंये किसी को दुःख, दर्द तक नहीं, सूझ रहा है।  भैये- दुःख, दर्द म्हारी जूती से, मने तो ग्रीष्मकाल से पूर्व षडयंत्रकारियों से दो-दो हाथ कर सुख की नींद सोने अपने अंग वस्त्रों को चटक धूप में सुखा ग्रीष्मकालीन पूर्व की तैयारी कर रहा हूं। क्योंकि काडू बोल्या कि धूप में वस्त्र सुखाने से कोरोना जैसे वायरस के कहर और घातक जीवाणु से उत्पन्न होने वाली बीमारी और स्वच्छ राजनीति में पेर जमायें बैठी षडयंत्रकारी सियासत के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। कहते है प्रकृति के बीच चटक धूप में अंग वस्त्र सुखाने से घातक वायरस, खटमल, जूंऐं ही नहीं घातक बीमारी देने वाले वायरस तक दूर हो जाते है। फिर वह षडयंत्रकारी स्वार्थवत महत्वकांक्षी सियासत हो या फिर कोई बीमारी महामारी हो।  भैया- अब सियासत में सिर्फ मंथन और घातक बीमारियों को रोकने स्क्रीनिंग के दौर...

तीन में से दो पर भाजपा की प्रबल संभावना म.प्र. की सियासी उठापटक का लक्ष्य राज्यसभा, सरकार को कोई खतरा नहीं

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वीरेन्द्र भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जैसे-जैसे म.प्र. की राज्यसभा की तीन सीटों के निर्वाचन का वक्त नजदीक आ रहा है। सियासी उठापटक की गरमाहट स्पष्ट दिखाई दे रही है। अगर अंदर खाने की खबर सही है तो भाजपा नेतृत्व का पहला लक्ष्य म.प्र. की तीन राज्यसभा सीटों में से दो पर जीत हासिल करना हो सकता है। जिस तरह से म.प्र. की कांग्रेस सरकार में उठापटक की दहशत पैदा कर राज्यसभा चुनावों का रास्ता मिल-जुलकर तय हो रहा है उससे साफ जाहिर है कि भाजपा की नजर सरकार की उठापटक से इतर राज्यसभा की दो सीटों पर ज्यादा है। जिस तरह के बयान और खींचतान कांग्रेस भाजपा के बीच बयानों, बैठकों की बीच आ रही है वह सियासी मंसूबों को समझने वालों को स्वतः सिद्ध होना चाहिए। क्योंकि विगत 20 वर्षो की म.प्र. की सियासत इस बात की गवाह है कि म.प्र. की सियासत किस तरह से स्वार्थवत मंसूबों को पूर्ण करने दलों के प्रति निष्ठा और जबावदेही को दरकिनार कर निभाई जा रही है। देखना होगा कि क्या भाजपा के रणनीतकार अपने मंसूबों में सफल हो पायेंगे है या फिर कांग्रेस आलाकमान के मंसूबे धरे रह जायेंगे।  

मानव अस्तित्व की जननी मातृ-शक्ति अनादिकाल से अबला नहीं सबला रही है मातृ-शक्ति का सृजन में निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन उसके सामर्थ, सिद्धि में बड़ी बाधा

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अगर मातृ-शक्ति में ममत्व का महान भाव और कत्र्तव्य निर्वहन के प्रति आघात आस्था सृजन में न होती तो आज भी मातृ-शक्ति से बडा समूचे जीव-जगत में सिद्ध और कोई सामर्थ न होता। जो उसकी सिद्धि में एक बड़ी बाधा रहा है। परिणाम कि जिस मातृ-शक्ति को आज अबला के रूप में तो कहीं संरक्षण, सम्बर्धन बतौर माना जाता है। असल में मातृ-शक्ति सृष्टि सृजन में स्वतः ही सिद्ध है। समझने वाली बात आज यह है कि जिस मातृ-शक्ति के निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन को भूल लोग उसके सशक्तिकरण कल्याण, उत्थान की बात करते है शायद उनकी विधा, ज्ञान, विज्ञान अधूरा है। अगर हमारी आस्था, धर्म में है तो हर धर्म में मातृ-शक्ति की महिमा और उनकी सिद्धता अनादिकाल से सर्वोच्च रही है और जब तक सृष्टि में सृजन का कारवां बढता रहेगा तब तक मातृ-शक्ति की अपनी सर्वोच्चता समस्त जीव-जगत में बनी रहेगी। आज मातृ-शक्ति को संरक्षण, सम्बर्धन, सशक्तिकरण नहीं उसके स्थापित मान-सम्मान और स्वाभिमान के प्रति नमन और कृतज्ञता का वक्त है जो स्वयं में सिद्ध और सार्थक सफल है। अगर यह भाव यह संस्कृति और संस्कार को समूचा मानव जगत ...

तीरंदाज..............? म.प्र. में मचा सियासी मंथन अंत की ओर बढते सियासी षडयंत्र, गांव, गली, गरीब, गौवंश की हाय न ले डूबे स्वार्थवत सियासत और सियासी महत्वकांक्षायें

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व्ही.एस.भुल्ले भैया- मने तो लागे कि अब म.प्र. में षडयंत्रपूर्ण सियासत का अंत होने वाला है। म्हारे को तो डर है कि कहीं गांव, गली, गरीब गौवंश की हाय स्वार्थवत सियासी षडयंत्रों को न ले डूबे। क्योंकि स्वार्थवत सियासी महत्वकांक्षायें फिलहाल म.प्र. में सर चढकर बोल रही है। जिसके चलते जबरदस्त उठा पटक और मंथन की बयार चल रही है। सियासी पंडित 128 की लिस्ट का दावा तो कुछ राज्य सभा में प्रभुत्व तो कुछ सत्ता में भागीदारी को लेकर सियासी मंथन में अपना अमूल्य योगदान देने में जुटे है। काडू बोल्या कि अब तो म.प्र. का निजाम ढोलने वाला है, तो कहीं राज्य सभा में राष्ट्रवादियों का दबदबा हो इसलिए म.प्र. में उठा पटक का खेल खेला जा रहा है। भाया अब तू ही बता कि मने आखिर किसकी सिपारी विकास, सेवा, कल्याण के नाम लू। भैये- तने बावला शै, कै थारे को मालूम कोणी गांव, गली, गौवंश की सेवा, कल्याण, विकास के बाजार में बेटिंग-इन रीचार्ज का उद्योग म्हारे प्रदेश में हाथों हाथ खडा हो लिया है और होर्स ट्रेडिंग को लेकर सत्ता के गलियारो में बवाल कटा पडा है। भले ही इस मंथन से आशा-आकांक्षाओं को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य नसीब न हो।...

विरासत को भूल, विनाश के कगार पर खडी, समृद्ध संस्कृति

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वीरेन्द्र भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सुबह पौने चार बजे उठ सयन संसाधनों को सु-व्यवस्थित रख शौच के लिए घर के बाहर जाना और पुनः घर प्रवेश से पूर्व हाथ पैर धोना, पोछना तथा किसी व्यक्ति से अभिवादन के लिए हाथ जोड अभिवादन करना सुबह ताली बजाकर आराधना करना हर सात दिन में घर में गाय के गोबर से लिपाई-पुताई और भोजन पकाने पश्चात चूल्हे की पुताई भोजन पश्चात बर्तनों की राख से सफाई तथा औषधियों और प्रचुर मात्रा में मौजूद विटामिनों से भरपूर भोजन हमारे नैसर्गिक संस्कार रहे है। फल, दूध, दही, मक्खन-घी हमारे खाद्य के अगुवा रहे है। मगर हम विनाशक संस्कृति के प्रभाव में ऐसे रचे बसे कि आज हम ऐसे मुकाम तक जा पहुंचे जिसके दुष्परिणाम एक भयाभय तबाही के रूप में जब-तब सामने आते रहते है। अगर हमारे संस्कार यहीं रहे तो हमारा आने वाला भविष्य स्वस्थ समृद्ध बना रहे इसमें संदेह स्वभाविक है। क्योंकि हम अनादिकाल से कभी लापरवाह हलाल नहीं रहे। बल्कि हमारे पूर्वजों ने कडी तपस्या और उच्च संस्कार तथा निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के चलते एक ऐसी संस्कृति और संस्कारों को जन्म दिया जो समूचे विश्व के लिए आक्रशित करने एक अबूझ...

जनधन, लूट के गजब अंदाज से हैरान-परेशान जनसेवा धन पिपासुओं की शिकार होती, सत्तायें

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वीरेन्द्र भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जनसेवा कल्याण विकास के नाम म.प्र. में आशा-आकांक्षाओ का फलूदा बनाती स्वार्थवत सियासत, सत्तायें भले ही धन पिपासुओं की महत्वकांक्षा की शिकार हो और जनसेवा, कल्याण, विकास के नाम सियासी गलियारों में मीना बाजार सजा हो। ऐसे में जनधन लूट से घोषित अघोषित मामले जनता जनार्दन के सामने आ रहे है। फिर वह लगभग 60 हजार करोड के तथाकथित ई-टेडरिंग के मामले हो या फिर प्रदेश में गत वर्षो में स्थापित नये अघोषित उद्योग बेटिंग इन रीचार्ज के सेवा कल्याण, विकास से जुडे किस्से हो। अगर ऐसे में हम यों कहे कि स्वार्थवत सत्ता धन पिपासुओं का जमघट, जनसेवा, कल्याण, विकास के नाम सिर्फ और सिर्फ जनधन लूट तक सीमित रह गया है तो इसमें किसी को भी अति संयोक्ति नहीं होना चाहिए। देखा जाये तो जनधन लूट के खेल में मायने यह नहीं रखता कि सत्ता, सरकार पर किस दल का ठप्पा लगा है। मायने यह रखता है कि राजप्रसाद में उनका कितना दबदबा है। अगर म.प्र. में पैर पसार चुकी कुछ तथाकथित गुजरात, साउथ की कंपनियों द्वारा किये जा रहे या किये गये अधोरंचना निर्माण की जांच निष्पक्ष कराई जाये तो साफ हो जायेगा कि ...

सेवा, सुरक्षा को संकल्पित, बाल स्वभाव परीक्षा पूर्व बच्चों के बीच पहुंचे मुख्य संयोजक स्वराज संकल्पित, प्रफुल्लित दिखे भारत के, भावी भविष्य के करणधार

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  परीक्षा पूर्व बच्चों के बीच पहुंचे स्वराज के मुख्य स्वराज व्ही.एस.भुल्ले, देश की भावी पीडी से खूब बतियाये सेवा सुरक्षा को लेकर उत्साहित नौनिहालों का राष्ट्र के प्रति समर्पण और सेवा, सुरक्षा के संकल्प को देख कई मर्तवा स्वराज संयोजक निरोत्तर दिखे। स्वयं के साथ बैठा देख बाल स्वभाव बोला क्या आप भी कल से स्कूल आयेंगे, तो दूसरी ही क्षण भारत का भविष्य बोला कि हमारे घर आप कब आयेंगे बाल स्वभाव की सोच, संस्कार और भावनाओं से प्रफुल्लित बच्चों के बीच स्वराज के मुख्य संयोजक ने कहा कि मेरी इच्छा थी कि परीक्षा पूर्व आपके लिए तनाव रहित माहौल बनाने की। मगर मैं आज भावी पीडी की बाल विद्ववता देख अपने महान राष्ट्र और भविष्य की भावी विरासत पर गर्व ही नहीं उनके बीच स्वयं को पाकर गौरान्वित मेहसूस कर रहा हूं। आज पूर्वजों की त्याग-तपस्या का प्रतिफल और प्राकृतिक समृद्धि का प्रतिफल मुझे स्पष्ट दिखाई दे रहा है। इसके लिए हमारे राष्ट्र की कृतज्ञ सत्ताओं, संगठनों, समाज, परिवार, व्यक्तियों की वह निष्ठापूर्ण, कत्र्तव्य निर्वहन बधाई का पात्र है। जिनके सानिध्य संरक्षण में एक मर्तवा फिर से...

षडयंत्रपूर्ण सियासत में सिसकता, सेवा कल्याण और सत्याग्रह बैवसी का दंश झेलता समृद्ध, खुशहाल समाज

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व्ही.एस.भुल्ले बैवस, मजबूर भीड और स्वार्थवत सियासत सत्ताओं के बीच जो लोग स्वयं को सियासत का शुकरात, चाणक्य समझ स्वयं को कृतज्ञ समझते है शायद वह यह भूल जाते है कि समय और सत्ता कभी किसी एक की मिलकीयत नहीं रही। प्रमाण कि अगर इतिहास में ऐसा रहा तो आज मौजूद व्यवस्था में पुरातत्व विभाग का अस्तित्व ही नहीं होता और आज वह एक से बढकर एक वीरान बांझ हो चुकी दिव्य, भव्य विरासतों को संरक्षित सम्र्बधित नहीं करता। मगर आज जिस तरह से सत्य के आग्रह सत्याग्रह जनसेवा, कल्याण को दरकिनार कर स्वार्थवत सत्तायें सियासत सर चढकर बोल रही है और जिस तरह से लोकतंत्र की बोली मीना बाजार की तरह लग रही है उससे अनभिज्ञ स्वार्थवत ताकतों के रहते सेवा कल्याण, सत्याग्रह भटक, बैवस, मजबूर हो सकता है। मगर सियासत का यह अंतिम सत्य नहीं। क्यांेकि अनादिकाल से सत्य ही सफल सक्षम रहा है फिर समय परिस्थितियां जो भी रही हो वह कभी सक्षम, सफल भी रहा है और सिद्ध भी और भविष्य में भी वह सिद्ध रहने वाला है। अब विचार आज की स्वार्थवत होती सियासत में सत्याग्रह, जनसेवा, कल्याण की खातिर मौजूद सत्ता सियासत, समाज, परिवार, व्यक्ति, विद्यवानों को करना...

अप्रत्याशित हिंसा से बडी तबाही अब तो माई बाप आप से ही, बडी उम्मीद, आप न्याय अवश्य करेंगे

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। माननीय, श्रीमान, माई-बाप आप हमारे अपने ही तो है भारत के सर्वोच्च विधान, संविधान को आंख मूदकर अंगीकार कर, अपने विधान को पीछे रख, हमने आपको सर्वोच्च विधान से प्राप्त शक्ति, संरक्षण में कोई कोताही नहीं बरती। जिससे आप सक्षम अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन में अक्षम, असफल साबित हो। बल्कि हमारे संविधान ने आपको विधि सम्वत शक्तियों संसाधनों से इतना समृद्ध कर रखा है कि आप निर्भीक होकर हमारी सुरक्षा, सेवा, विकास, कल्याण और इस महान राष्ट्र की गांव, गली के साथ राष्ट्र का विकास र्निविवाद कर सके। आखिर आपकी ऐसी क्या मजबूरी है जो आप अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन, सुरक्षा, सेवा, कल्याण विकास के कार्य में सक्षम होने के बावजूद भी जब तब ऐन वक्त पर अक्षम असफल साबित होने पर मजबूर है। आप पर हम पीडित वंचित गांव, गली के लोगो की अगाध आस्था है। आपके निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन पर हमें पूर्ण विश्वास है। आप हमारे अपने ही तो है। आपकी निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन पर हमें  कोई संदेह नहीं। क्योंकि आपको और हमको अपने-अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन पश्चात इसी महान भूभाग पर ए...

सेवा, सुविधा के सत्यानाश के बीच, जनसेवकों की बोली का ग्राफ 30 करोड के पार लोकतंत्र का काला सच

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व्ही.एस.भुल्ले अगर दो पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्रियों के मुख से मीडिया के बीच निकले व्यानों एवं आरोप-अप्रत्यारोपों पर विचार किया जाये तो किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र में इससे बडी शर्मनाक दर्दनाक और कोई बात हो ही नहीं सकती कि जिस म.प्र. में पढे-लिखे, कुशल-अकुशल लोगों के बेकार हाथों को रोजगार न हो और किसी भी सेवा के नाम खुलेआम शुल्क बसूली का खेल प्रमाणिक तौर पर लोक आयुक्त आर्थिक अपराध के छापों से सिद्ध हो और वह भी अदने से कर्मचारी से लेकर आलाधिकारियों तक ऐसे में एक पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा, म.प्र. में 15 साल तक शासन करने वाली पार्टी पर, दूसरे दल के चुने हुये जनप्रतिनिधि विधायकों को तोडने 35 करोड तक के आॅफर की बात कहना, तो वहीं दूसरे मुख्यमंत्री द्वारा वर्तमान मुख्यमंत्री को ब्लैकमेल करने की बात कहना आज की सियासत में यह सिद्ध करने काफी है कि अब जनसेवा, सत्याग्रह और विकास कल्याण की सियासत किस तरह से चैराहे पर नीलाम होने तैयार है। अगर इन आरोप-प्रत्यारोपों में जरा भी सच्चाई है तो ना तो यह लोकतंत्र के लिये शुभसंकेत है और न ही म.प्र. के गांव, गली, गरीब के हित में जिस पर आम प्रबुद्ध नागरिक, नेता, द...