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Showing posts from October, 2018

राहुल को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है पक्ष-विपक्ष को

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वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तेवर के साथ आजकल राहुल सियासी समर में दिख रहे है उसे लेकर राजनैतिक पंडित ही नहीं, स्वयं उनके दल कॉग्रेस और उनके धुर विरोधी दल भाजपा के अपने कयास और विचार हो सकते है। मगर जो उनका व्यवहार और बॉडी लेंग्यूज आजकल दिख रहा है वह कुछ और ही इशारा करता है। अगर राजनीति, समाज और दर्शन को समझने वालो के बीच चल रही चर्चाओं की माने तो जहां उनकी गंभीरता वर्तमान माहौल के मद्देनजर स्पष्ट है तो वहीं वह चर्चाओं का कोई भी ऐसा मंच नहीं, छोडऩा चाहते। जो उनकी आजकल कार्यप्रणाली में शुमार है।  जिस तरह से वह तेलांगना से लेकर राजस्थान, छत्तीसगढ़, म.प्र. के दौरे रोड़ शो और मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा पहुंच सर्वधर्म भाव के प्रदर्शन के साथ दिल्ली की सड़कों पर आम कार्यकर्ता की तरह संघर्ष करते दिख रहे है। इससे लगता है उनके मंसूबे साफ है। भले ही लोग कोई आरोप-प्रत्यारोप उनकी कार्यप्रणाली को लेकर करें। मगर इस बीच उनकी कड़ी मेहनत के बावजूद जो असफलता का भाव प्रदर्शित होता है। उसके पीछे की चर्चा सिर्फ इतनी है कि इतनी सभा, रोड़ शो, रात्रि विश्राम के बावजूद उनकी सुरक्ष...

हाइटेक संसाधनों से लेस भाजपा उतरी मैदान में

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से भाजपा ने राजस्थान फतह करने हाइटेक संसाधनों से लेस चुनावी शुरुआत की है और जिस तरह से मीडिया सेंटरों को जयपुर ही नहीं अन्य जगहों पर उदघाटन कर खोला जा रहा है। उससे भाजपा की मंशा साफ है कि वह इस चुनाव को पूरी गंभीरता के साथ ले रही है और वह चाहती है कि एक बार वह पुन: सत्ता में लौटे। तो वहीं दूसरी ओर राजस्थान में राहुल को हुए दौरे और रोड शो से यह साफ हो गया कि कॉग्रेस भी इस चुनाव को हल्के से नहीं लेने वाली।  मगर आम नागरिक खासकर मजदूर, गरीब, बेरोजगार तबके की माने तो फिलहाल कुछ भी स्पष्ट नहीं। मगर लोगों को अपनी गरीबी, बेरोजगारी और संसाधनों का मलाल अवश्य है। वहीं अन्यत्र प्रदेशों से कवरेज करने पहुंच रही मीडिय में यह मलाल भी कम नहीं कि राजस्थान के बड़े नेताओं को जहां बैठक विश्राम से फुरसत नहीं, तो उनके अहलकारों में सत्ता का नशा अभी कम नहीं है। जो भाजपा के लिए शुभसंकेत नहीं। वहीं जिस तरह से कॉग्रेस में स्वयं आलाकमान को एक दो नहीं तीन-तीन नाम लेना इस बात के संकेत है कि वहां भी बहुत कुछ ठीक नहीं।  अगर खबरों की माने तो कॉग्रेस आलाकमान राहुल की इच्छा...

राजस्थान में वसुन्धरा के नेतृत्व में लिखा होगा नया इतिहास

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व्ही. शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अगर भाजपा के राजस्थान प्रभारी और वरिष्ठ नेताओं सहित टिकट की आस लगाए बैठे नेताओं के मजमून को भांपे तो लगता है कि राजस्थान में वसुन्धरा राजे के नेतृत्व को लेकर न तो दल में कोई सवाल है, न ही पुन: सत्ता में लौटने को लेकर कोई सवालात। भाजपा का विश्वास है कि वह विकास और विश्वास के बल पर 2018 विधानसभा चुनाव में राजस्थान की जनता के आशीर्वाद से राजस्थान में वसुन्धरा जी के नेतृत्व में नया इतिहास लिखा होने वाला है। जो धारणा लोग बना रहे है कि राजस्थान में सत्ता किसी भी दल की हो। वह 5 वर्ष बाद बदल जाती है। मगर इस मर्तवा सरकार के विकास और जनकल्याण के कार्यो बल पुन: राजस्थान में वसुन्धरा जी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने जा रही है। जो राजस्थान के इतिहास होगा। 

टिकटों को लेकर दलों के अन्दर मचा घमासान

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। हालिया मसला देश के दो बड़े प्रदेश, म.प्र., राजस्थान में कुछ अधिक गर्म है। जहां दोनों ही प्रमुख राजनैतिक दल भाजपा, कॉग्रेस में टिकटों की दावेदारी को लेकर संघर्ष छिड़ा है। इस संघर्ष के बीच जहां परिवारवाद को लेकर पार्टियों में आरोप-प्रत्यारोप सातवें आसमान पर है। तो वहीं दूसरी ओर नेतागढ़ अपने परिजनोंं के लिए टिकट दिलाने की जुगत में ऐड़ी चोटी का जोर लगा, प्रदर्शन करने से भी नहीं चूक रहे है। 

सत्ता संभावित राज्यों में राहुल का सीधा संज्ञान हाड़ौती, शेखावटी में बरसेगें, कॉग्रेस आलाकमान

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वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  म.प्र. में प्रभावी रोड शो और सभाओं से उत्साहित कॉग्रेस आलाकमान राहुल गांधी ने लगता है कि सत्ता संभावित राज्यों में अब सीधा संज्ञान लेना शुरु कर दिया है। शायद वह राजस्थान की सत्ता की चाबी कहे जाने वाले हाड़ौती और शेखावटी क्षेत्रों में सभाऐं लेने पहुंच रहे है।  दो दिवसीय दौरे के दौरान जहां वह झालाबाड़ और सीकर में सभाओं को सम्बोधित करेगें। तो वह रात्रि विश्राम राजस्थान में ही करेगें। जो कॉग्रेस के लिए शुभसंकेत कहे जा सकते है। क्योंकि हाड़ौती, शेखावटी वह क्षेत्र है खासकर झालाबाढ़ तो मुख्यमंत्री का गढ़ कहा जाता है। अगर चर्चाओं की माने तो राजस्थान की सत्ता का रास्ता भी इन्हीं क्षेत्रों से होकर गुजरता है। दूसरा लाभ कॉग्रेस को राजस्थान के अलावा राहुल की इन सभाओं से म.प्र. को भी यह होने वाला है कि राजस्थान का काफी क्षेत्र म.प्र. के मालवा की भूमि से जुड़ा है। जो वर्तमान में भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। मुरैना, श्येापुर, शिवपुरी, गुना, उज्जैन, इंदौर, राजगढ़, मंदसौर, रतलाम से लेकर नीमच तक पूरी पट्टी राजस्थान की आवो ...

सार्थी की सियासत से सनाके में सियासी दल सिंधिया की स्वीकार्यता बड़ी

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  यह जुमला यूं तो चर्चाओं का विषय रहता है। आम समाज में कि पिता से बड़ी लकीर अगर पुत्र खींचे तो उसे पिता अपना सौभाग्य समझते है। मगर यहां कत्र्तव्य निर्वहन में द्वंद इतना है कि पिता को आगे माने या बेटे को। 18 घंटे सतत सेवा में लीन उस व्यक्ति का क्या। जिसकी जुवां पर आज तक कोई शिकायत नहीं। कितन भी विषम परिस्थिति रही हो। सहर्ष लोगों से मिलना और मूल्य सिद्धान्तों के लिए सार्वजनिक जीवन को जीना सिखाने वाले बगैर किसी नफा-नुकसान के आज की राजनीति में एक सह्दयी नेता के सार्थी बन उसके समस्त संगठनों में सहभागी बनने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चुनावों के दौरान यह साबित कर दिया कि वह भले ही राजपरिवार में पैदा हुए हो। जिन्होंने एश्वर्य, वैभव को नजदीक से देखा हो। मगर वह अपनी मातृ पार्टी  और अपने आलाकमान सहित हर इंसान के लिए साधारण इंसान है। जिनकी कार्यप्रणाली में क्या छोटे, क्या बड़े सभी कार्य सर्वकल्याण के लिए सुमार है। परिणाम कि आज उनकी स्वीकार्यता ने अच्छे-अच्छे सियासी लोग ही नहीं, संगठनों के छक्के छुड़ा रखे है। मगर प्रमाणिकता तो लोकतंत्र में तो...

सुझाव नहीं, हिसाब और सवाल का वक्त 15 वर्षो में शिक्षा, स्वास्थ्य, समृद्धि, रोजगार का क्या हुआ दहलीज से पूर्व ही सुशासन ने क्यों दम तोड़ा

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते हैं 15 वर्ष में बच्चे, बच्ची जवानी की दहलीज पर होते हैं ऊर्जा की उपलब्धता इतनी कि असंभव को भी संभव कर डालें, जो पैदा हुए वह जवानी की दहलीज पर है, जो जवानी की दहलीज पर थे, वह अब युवा हैं और जो युवा थे वह अब ऑव्हरऐज हो चुके है और जो ऑव्हरऐज थे, वह बुजुर्ग हो चुके है। वह भी न मुराद इस उम्मीद मे कि उन्हें आज नहीं तो कल वह गुणवत्ता पूर्ण, सृजनपूर्ण शिक्षा नसीब होगी, जो शिक्षित या किसी भी विधा में सामर्थवान थे। उन्हें सहज रोजगार ही नहीं, उन्हें उनकी प्रतिभा प्रदर्शन का अवसर मिलेगा, जो बेकार थे, उन्हें संसाधन और काम करने का मौका मिलेगा, जो बुजुर्ग थे, उन्हें यह उम्मीद थी कि अब उनका बुढ़ापा चैन से कटेगा। हर नागरिक को सहज स्वास्थ सेवा, सुरक्षित वातावरण, तो बीमार दुखियों को अच्छा इलाज मिलेगा। जो अपने सामर्थ पर भरोसा करते है उन्हें अपनी मेहनत के बल पर समृद्ध बनने का मौका मिलेगा। मगर पहाड़ से 15 वर्ष बीत जाने के बाद भी आखिर लोगों को क्या नसीब हुआ यह आज समझने व विचार करने योग्य बात है।  आज जब पुन: हम एक बार 5 वर्ष के लिए सरकार व जनसवेक चुनने की मुहाने पर है। त...

स्वार्थवत सत्ताओं का समृद्धि पर संज्ञान अहम, अंहकार को आइडिया की दरकार

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अब इसे सियासत कहे या स्वार्थवत सत्ताओं का येन चुनाव के वक्त, एक मर्तवा फिर से आशा आकांक्षाओं का दोहन वह भी इस शर्त के साथ खुल्लम,खुल्ला अगर है ज्ञान मे दम, तो उसे पूरा करेंगे हम। अब ऐसे मे यक्ष सवाल यह है कि आयडिया के 12 आने और मेहनत के चार आने का सिद्धांत जो स्वार्थवत सत्ताओं मे स्वीकार नहीं। वहां तो आयडिया के  े4 आने, तो चापलूसी के 12 आने। धन्यवाद तो दूर,सक्ल पहचानने में भी उन्हें दर्द होता है। क्योंकि चालक, चापलूस, बौद्धिक चोरो की जर खरीद हाइटेक टीम पूरी कीमत चुकाने के बाद उनकी गोद में जो जा बैठी है। यहां समझने वाली बात यह है कि जो आइडिया कड़ी मेहनत या प्राराब्ध से नसीब होते है जिनमें त्याग-तपस्या ही नहीं, इस अर्थ युग में लाखों खर्च करने के बाद तैयार होते है। उन्हें सिर्फ भावुकता बस, कभी राष्ट्र, धर्म, जाति, क्षेत्र, भाषा के नाम फ्री फोकट मे कोई लुटा दे यह कैसे संभव है। जबकि सेवक अखंड, स्वार्थ के सागर में डूबे हो और बौद्धिक चोरों की जमात ऐसी कि आइडियो को सार्थक होने से पहले या समर्थ होने से पहले ही हाईटेक तकनीक के माध्यम से चुरा ले।  देखा जाए ...

हमारा संघर्ष, संविधान, सम्बत और वैचारिक है न्याय की रक्षा, माई के लालो का कत्र्तव्य: हीरा लाल त्रिवेदी राष्ट्रीय अध्यक्ष सपाक्स पार्टी

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  हमारा संघर्ष, संविधान, सम्बत और वैचारिक है। न्याय की रक्षा माई के लालों का कत्र्तव्य है और इस संघर्ष को हम अंजाम तक ले जायेगें। हम रहे या न रहे, मगर हमारी आने वाली पीढ़ी व मौजूद युवा शक्ति को हम इतना मजबूत और न्यायप्रिय बनाना चाहते है। जिससे हर क्षेत्र में न्याय का सिद्धान्त प्रकृति का सिद्धान्त स्थापित हो। लोगों के जीवन को न्यायप्रिय, समृद्ध, खुशहाल बना सके। हम एक समरसता मूलक एक जुट समाज चाहते है और अपने महान  संविधान की मंशा अनुरुप उसकी रक्षा करना चाहते है। हम म.प्र. ही नहीं, देश में भी यसूलो की राजनीति को जिंदा रख स्थापित रखना चाहते है, हम माई के लाल है और उन अहम, अहंकारी, स्वार्थवत सत्ताओं को यह समझाना चाहते है कि एस्ट्रोसिटी एक्ट और पदोन्नति मे आरक्षण बंद हो, आरक्षण बगैर किसी जाति, क्षेत्र, भाषा, धर्म के बिना आर्थिक आधार पर, हर समाज, वर्ग के कल्याण के लिए हो। सपाक्स सर्वकल्याण, समरसता का हामी है। पक्षधर है, जिसके लिए हमारा संघर्ष जारी है। सपाक्स ऐसी सत्ता, सरकार चाहती है जिसमें न्याय और कानून के राज सहित सभी का कल्याण, समृद्धि के साथ लोगों का...

धु्रवीकरण की जकड़ में लोकतंत्र अन्याय के विरुद्ध न्याय की हुंकार बाधित हुए कत्र्तव्य, अधिकार लूट-झूठ की न हो सरकार

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अन्याय के विरुद्ध न्याय की हुंकार तो इस महान लोकतंत्र में हर एक सियासी व्यक्ति, संगठन भर रहा है। क्योंकि यह भी सत्य है कि सेवा कल्याण के नाम लोकतंत्र में चले अंधड़, आंधी, तूफान ने जिस तरह से कत्र्तव्य अधिकारों का मार्ग बाधित किया है। उससे स्वस्थ लोकतंत्र में आम जन घुटन सी मेहसूस करने लगा है।  जिसके चलते कई सियासी लोग ही नहीं कई संगठन भी हुंकार भर अन्याय के विरुद्ध न्याय का शंखनाद कर सियासी संग्राम में कूद पड़े है। वहीं यह चर्चा भी सरगर्म है कि इनकी हार नैया पार, लूट-झूठ की न हो सरकार। मगर धु्रवीकरण के रास्ते जिस तरह से सियासी लोग और सियासी संगठन बढ़ रहे है उससे लगता नहीं कि न्याय का रास्ता साफ होने वाला है। सत्ता को लेकर समाज, धर्म से लेकर जाति और लोक से लेकर तंत्र तक जिस तरह से, सत्ता  लिए धु्रवीकरण का खेल चल रहा है। उससे अच्छे अच्छों बुर्ज ही नहीं, चूले तक हिलने वाली है। लगभग 200 वर्ष भारत में रहने और 70 वर्ष पूर्व भारत से अंग्रेजों के जाने के पश्चात ही फूट डालों शासन करो का फॉरमूला सत्ता के लिए इतना कारगार होगा किसी ने सपन...

ये कैसा उद्धार..........................? तीरंदाज

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व्ही.एस.भुल्ले भैया- पहले दी पेट की मार फिर जाता रहा गांव, गली का रोजगार, उस पर पढ़ी नोटबंदी की मशक मार, न रुका अन्याय, अत्याचार, भ्रष्टाचार, रहा-सहा गांठ का धन वह भी नोटबंदी की भेंट चढ़ गया। अब जब छोटे-मोटे रोजगार भी जाते रहे। ऐसे में काफुर हुई समृिद्ध, खुशहाली तब नारा आया है। सशक्त देश, समृद्ध प्रदेश, भय, भूख न भ्रष्टाचार, हाईटेक हुआ जीवन का आधार इतने पर तो चल जायेगी और अबकी बारी, सरकार हमारी।  भैये- मुये चुपकर विजयदशमी के दिन जलते राक्षस धमाधम उड़ते पटाखों के बीच म्हारे पंजाब का अमृतसर चींख, पुकारों से दहल गया। हादसा ऐसा कि एक झटके में ही 50 से अधिक बेकसूर जिन्दगियों को खौफनाक अंदाज में निगल गया। कै थारे को थोड़ी बहुत भी शर्म बाकी है जो तू जीत-हार की पिंगी लिए फूंके जा रहा है और सेवा कल्याण के बजाये, बैन्ड बाजे वालो की तरह बजाने वालों के साथ फूंक मारने वालो के भी नाम गिना रहा है।  भैया- गहन दुख, पीढ़ा, दर्द तो इस वीभत्स हादसे पर म्हारे को भी है। वीडियों फुटेज देख कलेजा तो म्हारा भी मातम मना रहा है। इस दुख की घड़ी में मने ही नहीं समूचा देश हादसे के शिकार परिवार जनो के स...

स्वार्थवत, गिरोहबंद, सियासत से सावधान सत्य की अनदेखी, समस्या की जड़ कैसे बने स्वस्थ समृद्ध, लोक-तंत्र जब जड़ोंं में ही मठा पड़ा हो जागोंं युवा तंत्र, अब तो समझों सत्ता का मंत्र

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जीवन में हर व्यक्ति, परिवार, समाज, गांव, गली की अपनी आशा-आकांक्षायें और जीवन के सुनहरे सपने होते है जिसे वह या तो स्वयं की सक्षमता या  सामार्थ के बल पर पूर्ण कर समृद्ध, खुशहाल जीवन जीना चाहते है और अपनी मौजूद या आने वाली पीढ़ी को भी विरासत में समृद्ध, खुशहाल देखना  चाहते है या फिर वह उस सत्ता, सरकार व स्वयं के बहुमूल्य वोट मत से चुनी जाने वाली सत्ता सरकार जनप्रतिनिधियों से वह सरंक्षण, संसाधन अपनी प्रतिभा प्रदर्शन के अवसर चाहते है। जिससे वह अपना व अपनी आने वाली पीढ़ी का जीवन समृद्ध, खुशहाल ही नहीं, सक्षम सफल बन सके।  मगर दुर्भाग्य कि अभी तक हमारी सत्ता, सरकारें, जनप्रतिनिधि आशा-आकांक्षा अनुरुप असफल अक्षम साबित हुए। कारण हमारी शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, समाज की जड़ों में मठा व सियासी तौर पर जड़े जमा गिरोहबंद लोग जो समृद्ध, स्वस्थ लोकतंत्र की आज सबसे बड़ी बाधा है व समृद्ध, खुशहाल जीवन के मार्ग कंटक बने हुए है।  यहां समझने वाली बात यह है कि जिस तरह से गुणवत्ता विहीन शिक्षा ने रट्टू तोतो की अव्यवहारिक फौज खड़ी क...

अबकी बार कॉग्रेस सरकार सिंधिया ने फूका जीत का मंत्र

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  अगर आम गरीब, किसान, व्यापारी, बेरोजगारों की आशा-आकांक्षाओं, माता, बहिनों, बच्चि यों का मान-सम्मान बचाना है तो अबकी बार कॉग्रेस सरकार के नारे के साथ पीडि़त, वंचित, आभावग्रस्त लोगों के बीच जा उन्हें ढांढस बंधाना है। प्रयास ये हो कि कॉग्रेस की एक जुटता और जीत पर सवाल किसी भी स्थिति में न हो, कॉग्रेस ने आजादी से पूर्व, आजादी के वक्त और आजादी के बाद से आज तक अपनी जबावदेही, कत्र्तव्यों का निष्ठा पूर्ण निर्वहन किया है और आगे भी कॉग्रेस अपने कत्र्तव्य, जबावदेहियों का निर्वहन कर, बेरोजगार युवा, किसान छोटे व्यवसायी, मजदूरों की आशा आकांक्षा अनुरुप अपने कत्र्तव्य कर निर्वहन करेगी। उक्त सार टिकट के लिए लामबंद उन नेताओं कार्यकर्ताओं का था। जो सिंधिया से मिलने पहुंचे थे। ये अलग बात है कि अन्दर किससे क्या चर्चा हुई यह तो कॉग्रेसी जाने। मगर सिंधिया नेता कार्यकर्ताओं से दो टूक कहने से भी नहीं चूके। जिसकी चर्चा सोशल मीडिया में आजकल खूब हो रही है। 

अबकी बार झूठ पर प्रहार, 25 लाख लोगों को मिले रोजगार बच्चों को स्वास्थ, शिक्षा, युवा को रोजगार, बुजुर्ग का सम्मान, मुद्दों में हो सुमार

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से गिरोहबंद लोग, दल, संगठन, समाज, जाति, धर्म की आड़ में स्वयं स्वार्थ सिद्धि तथा सत्ता में आने के लिए या बने रहने के लिए नारों का आगाज करते हुए खासकर चुनावी दौर में सामने आते है,तो उनके लिए आम नागरिक का स्पष्ट संदेश होना चाहिए कि अबकी बार झूठ पर प्रहार और 25 लाख लोगों को 6 माह में मिले रोजगार। इतना ही नहीं, बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ और युवा को रोजगार के साथ बुजुर्गो का सम्मान हो। तभी हम महान लोकतंत्र में वह सर्वस्वीकार संदेश देने में सक्षम होगें। जिससे समृद्ध, शक्तिशाली, खुशहाल व्यक्ति, परिवार, समाज व राष्ट्र का निर्माण होगा और यह तभी संभव है जब हम जीत, हार के जुमले से इतर सफल, सक्षम, जीवन पर विचार करे। सफल, सक्षम, जीवन तभी संभव है। जब हम अपने मत का उपयोग अपनी आशा-आकांक्षा अनुरुप चुनाव या मतदान के दौरान अच्छे और सच्चे जनप्रतिनिधि को चुनने में कर सके। मगर दुर्भाग्य कि हम स्वयं परिवार, पड़ोसी, समाज, जाति, क्षेत्र, धर्म से बाहर सोचने, समझने में अक्षम, असफल साबित हो रहे है।  बेहतर हो कि हम सत्य को स्वीकार कर सदमार्ग पर आगे बढ़ राष...

दर्द के बीच, नीम हकीमों का हंगामा

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  बच्चे शिक्षा, स्वास्थ्य, तो युवा रोजगार के मोहताज है बुजुर्गो की हालत ऐसी कि अपनी रक्षा, सुरक्षा, तो ढलती उम्र में शुकून की जिन्दगी जीने हैरान परेशान है। ऐसे में दर्द दे, दर्द हरने वाले नीम हकीमों के हंगामों में पूरी की पूरी कौम परेशान है।  क्योंकि अब न तो समाज, सत्ता, राजनीति की कोई स्वस्थ संरचना बची है, न ही समाज, सत्ता, व्यवस्था की जो स्वस्थ, समृद्ध, खुशहाल, जीवन के लिए ऐसी कोई अधोसरंचना निर्माण कर सके, जिसके चलते आज भी भाई लोग सेवा कल्याण की डिग्री आम मतदाता से हासिल कर नीम, हकीमी करने पर तुले है। सेवा कल्याण के नाम हंगामा ऐसा कि आने वाली पीढ़ी को  विरासत में सिर्फ सुनियोजित झूठ और जनधन की लूट के आंकड़े मिले।  ्रबहरहाल ऐसे में भी सबसे बड़ी जबावदेही उन्हीं लोगों की है जिनके वोट के बल पर दर्द देने वाले ये नीम, हकीम सेवा, कल्याण की डिग्री हासिल कर दर्द हरने के बजाये पूरे पांच वर्ष दर्द पहुंचाते है। अगर दर्द, असहनीय पीढ़ा तथा अन्धंकारमय भविष्य परोसने और झूठ बोलने वालो के बजाये वोट अच्छे और सच्चे व्यक्ति को दे, न कि न...

प्रभावी रणनीत का अभाव सत्ता में बड़ी बाधा करो या मरो के साथ स्वयं सम्हालनी होगी म.प्र. की कमान

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वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जनाकांक्षा, जनभावना को सहजने जब तक रणनीत प्रभावी नहीं होगी तब तक म.प्र. में सत्ता कॉग्रेस से दूर ही बनी रहेगी। भीड़ जुटना, जुटाना अलग बात है। मगर वोट में तब्दील होना अलग बात है, इसमें न तो कॉग्रेस आलाकमान का दोष है, न ही उनके उन रणनीतकारों का, जिनका सीधा संपर्क कभी जमीन से रहा ही नहीं, सो न तो ऐसे रणनीतकारों से जनभावना, जनाकांक्षा पूर्ति से जुड़े मुद्दों की उम्मीद करना चाहिए, न ही बूथ स्तर तो दूर नगर, कस्बों से गायब कर्मठ कार्यकर्ताओं के शून्यपन से क्योंकि संगठन का प्रबन्ध तो मठाधीसों के चलते बैसे भी म.प्र. में 15 वर्ष से धरासायी है। छोड़ बड़े चैनल और अखबारों को, ऐसे में एक ही रणनीत कारगार हो सकती है और वह है महात्मा गांधी की तरह करो या मरों आंदोलन की तरह। क्योंकि अगर कॉग्रेस 2018 चूकि तो उसके लिए कहीें यह निर्णायक सियासी युद्ध साबित न हो। जिसकी कि पूरी संभावना है। मगर कॉग्रेस के लिए जनता की नब्ज समझना जरुरी है। जिसका ज्ञान न तो उन रणनीतकारों को है, न ही उन प्रबंधकों को जो 15 वर्ष में जमीदोष हुई। कॉग्रेस को बचाने में अक्षम, असफल ...

राहुल, सिंधिया ने बिगाड़े म.प्र. में सियासी समीकरण

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जिस तरह से म.प्र. में राहुल, सिंधिया की जोड़ी धूम मचा रही है कभी मंदिर, मस्जिद में कभी गुरुद्वारा मत्था टेक, साथ ही सभा, रोड शो में उमड़ती भीड़ व राहुल के मोदी, शिव सरकार पर प्रभावी हमलों ने विधानसभा चुनावों के सारे सियासी समीकरण म.प्र. में बिगाड़ दिए है जिसे लेकर विपक्षी दल भाजपा का मात्र संगठन भी सनाके में है। अन्दर खाने की खबर फिलहाल सॉशल मीडिया और चर्चाओं में यह है कि टिकटों की रायशुमारी अब नये सिरों से होने लगी है। तो वहीं म.प्र. में बड़ी राहुल की सक्रियता ने कॉग्रेस के बड़े-बड़े दावेदारों व मठाधीसों की नींद उड़ा दी है। अगर राहुल विपक्ष पर इसी तरह प्रभावी हमले बोलते रहे और नये लोगों से मिल, उन्हें वक्ता, प्रवक्ता, प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में मौका देते रहे तो यह कॉग्रेस के लिए मील का पत्थर साबित होगा। 

संगठित गिरोहो की जकड़ में लोकतंत्र

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  न तो आमजन ही समृद्ध, खुशहाल हो सका, न ही आम गरीब,कार्यकर्ता का भला हो सका। संगठित गिरोंहो में तब्दील सत्ता, संगठनों का आलम यह है कि सेवा, विकास, कल्याण के नाम चन्द मुठ्ठी भर लोगों का तो कल्याण विकास हुआ। मगर गांव, गली, गरीब, किसान का कुछ नहीं हो सका। अब जबकि चुनाव एक मर्तवा फिर से सर पर है तो कोई बिलबिलाती जनता को भगवान, तो कोई कार्यकर्ता को मालिक बताने से भी गुरेज नहीं कर रहा है। अब यहां यक्ष सवाल यह है कि ऐसे में कैसे चलेगा लोकतंत्र और कैसे समृद्ध, खुशहाल होगा प्रदेश और कैसे होगा कल्याण।  मगर ऐसे में समझने वाली बात यह है कि वोट देने से पहले आम गांव, गली, नगर प्रदेश में सक्षम, समृद्ध हुए उन सेवकों पर आम मतदाता नजर दौड़ाए और पता लगाए कि आखिर इतने कम समय में उनकी इतनी समृद्धि का राज क्या है। वह कौन से मार्ग है जहां से समृद्धि हासिल हुई। गर इतना पता कर पाये तो निश्चित ही हम अच्छे-सच्चे जनप्रति चुन, साफ-सुथरी सेवा भावी सरकार व  समृद्धि शक्तिशाली लोकतंत्र स्थापित कर पायेगें और हर गांव, गली, नगर, शहर के बैवस, मायूस, आभावग्रस...

आत्मविश्वास से लवरेज राहुल बरसे मोदी,शिवराज सरकार पर लोगों के अभिवादन के साथ मंदिर, मजिस्द, गुरुद्वारे में टेका मत्था अपार भीड़ देख सिंधिया हुए गदगद

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  यूं तो राहुल का दो दिवसीय ग्वालियर-चंबल का दौरा चुनावी था। मगर इसका भरपूर उपयोग राहुल गांधी ने जहां सदभाव व एकता के लिए मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा पहुंच किया। वहीं अपार भीड़ के बीच आत्मविश्वास से लबरेज राहुल ने मंचों का उपयोग मोदी व शिवराज सरकार पर जबरदस्त सटीक हमलों के रुप में किया। रोड शो और आमसभाओं में जुटी अपार भीड़ को देख जहां म.प्र. चुनाव अभियान समिति के संयोजक एवं इसीसी के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया गदगद नजर आए। वहीं रोड शो के दौरान वह प्रभावी नेताओं की राहुल से मुलाकात कराने से भी नहीं चूके। मगर जिस तरह से बड़े-बड़े समाचार पत्रों को कॉग्रेस ने तरजीह दी और छोटे मझोले समाचार पत्रों की उपेक्षा कि वह भी किसी से छिपा नहीं।  पत्रकारों को राहुल के इस दौरे से उम्मीद थी कि वह इस मौके का उपयोग अपनी बात उनके बीच रखने में कामयाब होगें। जो उन्हें सुनना, समझना और अपने समाचार संचार माध्यमों से लोगों तक पहुंचाना चाहते है। मगर प्रदेश कॉग्रेस के मीडिया प्रबंधन ने ऐसा होने नहीं दिया। जिसकी जबरदस्त प्रतिक्रिया संभाग भर के ग्वालियर पहुंचे मीडिया के बीच देखन...

धरातल से दूर टिकटो का दावा* *राहुल पहुंचे ग्वालियर*

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*वीरेंद्र शर्मा* विलेज टाइम्स समाचार सेवा। यूं तो कांग्रेस आलाकमान  राहुल गांधी अपने निर्धारित दो दिवसीय चुनावी दौरे पर ग्वालियर  चंबल की यात्रा पर हैं। आज वह ग्वालियर पहुंचने के बाद दतिया के लिए रवाना हो गये। जहाँ पर वह रोड शो के अलावा सभाओं को संबोधित करेंगे।  मगर इस बीच सोशल मीडिया और समाचार पत्रों मे नित ढंग से टिकटों की लिस्टें छप रही और हार जीत को लेकर दावे चल रहे हैं। साथ ही जिस तरह से स्थानीय क्षेत्रीय मीडिया की अंदेखी हो रही हैं। यह सब कांग्रेस के लिए शुभसंकेत नहीं कहे जा सकते।मगर जिस तरह कांग्रेस के चमकदार नेता के रूप मे सिंधिया की लोकप्रियता समूचे ग्वालियर चंबल से नहीं मालवा से लेकर महाकौशल विध्यं, बुँदेलखण्ड से लेकर निमाड़ तक बड़ी हैं। उसको लेकर सियासी हल्को मे जबरदस्त खलबली हैं। कारण कांग्रेस आलाकमान का  सिंधिया को सीधा बरदस्त और म.प्र. वरिष्ठ नेताओं का राहुल की मंशा अनुरूप म.प्र. का सियासी किला फतह कर राहुल के हाथ मजबूत करना हैं। मगर बगैर धरातल के टिकट दावेदार और अपना आज अस्तित्व बचाने टिकट दावेदारो के आका सच स्वीकारने तैयार ही नहीं। जबकि ग्वालियर च...

दबे पैर, पैर जमाने में जुटा सपाक्स

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वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जिस न्याय की लड़ाई को लेकर सपाक्स सियासी मैदान में उतरने की पूरी तैयारी कर चुका है । भले ही उसके न्याय के मंसूबों को कुचलने राजनैतिक दल सक्रिय नजर न आते हो। मगर इतना तो तय है कि अगर चिंगारी लगी है तो आग तो कहीं न कहीं भड़कना तय है। अब इस आग में किसके सपने किसके मंसूबे इस सियासी संग्राम में खाक होगें यह तो भविष्य के गर्भ में है। मगर जिस फॉरमूले को लेकर सपाक्स चल रहा है अगर वह उसमें रत्तीभर भी सफल हुआ तो सियासी अंखाड़ों के चूलें हिलना तय है। फिलहाल तो सपाक्स दबे पैर अपनी चौसर जमाने में जुटी है। देखना होगा कि समय परिस्थिति अनुसार पांसे किसके पक्ष में पड़ते है। 

राहुल को साबित, स्थापित करने का सही वक्त सिंधिया सचिन के नाम सीधे संभालना होगी म.प्र., राजस्थान की कमान

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  लोकसभा चुनाव 2019 व विधानसभा चुनाव 2018 के मद्देनजर कॉग्रेस आलाकमान राहुल गांधी को स्वयं को साबित व स्थापित करने म.प्र. व राजस्थान में कॉग्रेस मुख्यमंत्रियों के रुप में सिंधिया व सचिन के नाम की घोषणा कर, स्वयं संभालना होगी सीधे कमान।  क्योंकि जिस तरह से म.प्र. में ज्योतिरादित्य सिंधिया व राजस्थान में सचिन पायलट की लोकप्रियता जनता के बीच आसमान छू रही है और राहुल गांधी के नेतृत्व में कॉग्रेस कार्यकर्ताओं में ऊर्जा बड़ी है। उससे उत्साहित जनाकांक्षाऐं जिन्हें टी.व्ही. चैनलों के सर्वे व आम चर्चा में देखा सुना जा सकता है। मगर दुर्भाग्य कि दोनों राज्यों में कॉग्रेस में बायोवृद्ध हो चुके नेताओं के बीच छिड़ी गुटीय जंग से कॉग्रेस को निजात नहीं मिल पा रही। जो अब टिकट वितरण की जंग में तब्दील हो चुकी है।  अगर ऐसे में अपने चितपरिचित अंदाज के लिए भारतीय राजनीति में जाने-जाने राहुल गांधी, सिंधिया व सचिन के चेहरे को बतौर मुख्यमंत्री घोषित करने में कामयाब हो जाते है और वरिष्ठ कॉग्रेसियों को यह समझाने में सफल हो जाते है कि कॉग्रेस ने जीवन प...

सिंधिया के दार्शनिक अंदाज के कायल होते लोग

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वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  आजकल यह चर्चा सियासी गलयारों में बड़े जोर-शोर से चल पड़ी है कि भले ही मंच राजनैतिक मंशा से तैयार हो, या विशुद्ध रुप से राजनैतिक मंच। मगर सिंधिया है जो अपने दार्शनिक अंदाज में सच कहने से नहीं चूक रहे। कभी वह यह कहते नहीं थकते कि इस दुनिया में न तो कोई बड़ा है, न ही छोटा न कोई राजा, न कोई रंक, सब खाली हाथ नंगे आए थे और सभी खाली हाथ नंगे जाएंगें न कोई नेता है, सभी कार्यकर्ता है और लोकतंत्र में कार्यकर्ता ही पार्टी का मालिक होता है।  इतना ही नहीं, पहले भी वह सेवा, विकास, जनकल्याण के लिए सामूहिक प्रयासों की बात कर चुके है और समय-समय पर संस्कारिक बाध्यता के चलते बगैर पक्ष-विपक्ष की परवाह किए बगैर। वह अपने संस्कार व सेवा कल्याण के रास्तों को स्पष्ट कर चुके है। सुबह पौने 4 बजे से दिनचर्या की शुरूआत करने वाले इस नेता को संभवता: कभी किसी से शिकायत नहीं होती सिवाये अपने निर्धारित कार्य और समर्पित कार्यकर्ता बतौर अपने कार्यो को सरअंजाम देने के।  फिलहाल उनके इसी दार्शनिक अंदाज के मुरीद लोग ही नहीं, उनके विरोधी भी अब तो उनका लोहा म...

राहुल के रोड शो, सभा को लेकर सिंधिया का तूफानी दौरा नेता कोई नहीं, सभी कार्यकर्ता

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वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  कार्यकर्ता काॅग्रेस का मालिक नेता कोई नहीं, सभी कार्यकर्ता। भाजपा की चौथी मर्तवा सत्ता प्राप्ति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा साबित हो रहे पूर्व केन्द्रीय मंत्री व म.प्र इसीसी के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर पहुंचते ही जहां कार्यकर्ताओं की बैठक ली। वहीं वह कार्यकर्ताओं को अपने दार्शनिक अंदाज में जोश भरते दिखे। उसके पश्चात वह चम्बल-ग्वालियर क्षेत्र में काॅग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की प्रस्तावित सभा व रोड शो के स्थलों का मुआयना करने कूच कर गए।  ज्ञात हो कि राहुल गांधी 15 अक्टूबर को ग्वालियर-चंबल के दौरे पर आ रहे है जिसके मद्ेदनजर सिंधिया की कोशिश है कि ग्वालियर की चंबल की भूमि से इतना सशक्त संदेश प्रदेश भर मे जाए। जिससे सत्ता के लिए घात लगाए बैठे विपक्षियों के सपने चकनाचूर होते नजर आ ए।

सत्ता का लाभ और वोट का मोह त्यागने से बनेगा शसक्त, समृद्ध, खुशहाल भारत: व्ही.एस.भुल्ले मुख्य संयोजक स्वराज कौन दे कुर्बानी..........?

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धर्मेन्द्र सिंह गुर्जर विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सत्ता लोभ वोट मोह मे डूबी राजनीति इस महान राष्ट्र और जन सहित देश में मौजूद विभिन्न धर्म, पंथ, जातियों का कितना भला कर पायेगी। जिसकी डिस्कनरी से त्याग, तपस्या, कुर्बानी जैसे शब्द सत्ता लोभ और वोट मोह मे बाहर हो चुके है और सेवा कल्याण के मायने सिर्फ वोट और सत्ता प्राप्ति बची है। जिसके चलते वोट धुव्रीकरण के घातक रास्ते भारतीय राजनीति मे भोले भाले भावूक लोगों के बीच सक्षम, सफल साबित हो रहे हैं। यह अलग बात है कि ऐसे में लोकतंत्र में मौजूद तथाकथित कुछ बौद्धिक चोर चापलूस, चालाक लोगों के लिये धु्रवीकरण का रास्ता इस महान लोकतंत्र मे ब्रम्हास्त्र जैसे कारगार हथियार साबित हो रहा हैं।  विगत 30 वर्षो मे जिस धुव्रीकरण के  ब्रम्हास्त्र से लोगों को सत्ता समर्थन, वोट हासिल हुए उसने देश की राजनीति का ही चेहरा पलट दिया और जो लोग स्वच्छ, समृद्ध सेवा कल्याण की राजनीति करना चाहते थे। उन्हें जाने अंजाने, मजबूरी बस भोले वाले भावुक लोगों की आशा आकांक्षाओं का इस्तेमाल कर हासिये पर ढकेल दिया गया। जो किसी भी महान लोकतंत्र के लिए दर्दनाक ही नहीं शर्मना...

वोट की खातिर, अराजकता, अपराध, अपराधियों की अनदेखी, राजद्रोह उपेक्षा की उपज विद्रोह, प्राकृतिक स्वतंत्रता पर आघात, विध्वंस को बुलावा

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार। सत्य को समझ अनुसार मानव, समाज, विद्यवान स्वच्छंदता, स्वार्थ, निस्वार्थ के रहते हम जो भी नाम क्यों न दे। और सत्ताये,ं समय, काल, परिस्थिति अनुसार जो भी व्यवस्था दे। मगर कहते है कि उपेक्षा की उपज विद्रोह और प्राकृतिक, स्वतंत्रता पर आघात विधवंस को बुलावा होता  है। ठीक उसी प्रकार किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वार्थ या वोट की खातिर अराजकता, अपराध, अपराधियों की अनदेखी स्वस्थ व्यवस्था के विनाश का कारण बनती हैं। जिस तरह से हमारे सियासी दल सत्ता की खातिर न्यायालय तथा निर्वाचन आयोग, स्वस्थ्य, स्वच्छ, लोकतंत्र की खातिर राजनीति को अराजक, अपराध, अपराधियों से बचाने की मंशा जाहिर कर चुके है। उसके बावजूद भी राजनीति में आंदोलनों के अपराध की आड़ में पनपते, अराजक, अपराध, अपराधी अब सभ्य समाज ही नहीं सियासत मे विद्रोह, विधवंस के कारण बन रहे हैं। फिर ऐसे लोग सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक क्षेत्रों मे मौजूद हो या फिर जाति, धर्म मे, जब तक हमारी लोकतांत्रिक सियासत इन अराजक, अपराध, अपराधियों से निजात नहीं पा लेती तब तक स्वच्छ, स्वस्थ, मजबूत लोकतंत्र और खुशहाल जीवन की ...

राहुल के रोड शो सभाए को लेकर सिंधिया का तूफानी दौरा नेता कोई नहींए सभी कार्यकर्ता

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वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  कार्यकर्ता काॅग्रेस का मालिक नेता कोई नहींए सभी कार्यकर्ता। भाजपा की चैथी मर्तवा सत्ता प्राप्ति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा साबित हो रहे पूर्व केन्द्रीय मंत्री व मण्प्र इसीसी के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर पहुंचते ही जहां कार्यकर्ताओं की बैठक ली। वहीं वह कार्यकर्ताओं को अपने दार्शनिक अंदाज में जोश भरते दिखे। उसके पश्चात वह चम्बल.ग्वालियर क्षेत्र में काॅग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की प्रस्तावित सभा व रोड शो के स्थलों का मुआयना करने कूच कर गए।  ज्ञात हो कि राहुल गांधी 15 अक्टूबर को ग्वालियर.चंबल के दौरे पर आ रहे है जिसके मद्ेदनजर सिंधिया की कोशिश है कि ग्वालियर की चंबल की भूमि से इतना सशक्त संदेश प्रदेश भर में जाए। जिससे सत्ता के लिए घात लगाए बैठे विपक्षियों के सपने चकनाचूर होते नजर आए।  

कॉग्रेस: अस्तित्व बचाने का अन्तिम अवसर सचिन, सिंधिया की अनदेखी पढ़ सकती है भारी मतदाता की नजर सचिन, सिंधिया पर

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  हिन्दी भाषी 3 राज्य छत्तीसगढ़, राजस्थान, म.प्र. में आसन्न चुनावों से पूर्व जो हर्ष कॉग्रेस का सियासी तौर पर छत्तीसगढ़ में हुआ है फिलहाल वह किसी से छिपा नहीं। मगर जो हालात मप्र., राजस्थान में बने रहे है। अगर कॉग्रेस आलाकमान राहुल गांधी ने उनका संज्ञान नहीं लिया तो इन दो बड़े राज्यों में भी आम मतदाता की मंशा के विरुद्ध बगैर चेहरे के राजस्थान, म.प्र. चुनाव लडऩे जीतने का राग चलता रहा तो परिणाम कुछ भी हो सकते है। अगर सामने आ रहे विभिन्न सर्वे व चर्चाओं की माने तो राजस्थान में सचिन पायलट तो म.प्र. में सिंधिया की चर्चा सीएम चेहरे को लेकर अभी भी सरगर्म है।  ्रमगर सलाहकार, सिपहसालारों के चक्कर में पढ़ कॉग्रेस आलाकमान मंचों से तो सिंधिया व पायलट को खासी तबज्जों तो दे रहा है। मगर राजस्थान में सीएम चेहरा सचिन पालयट तो म.प्र. में ज्योतिरादित्य सिंधिया होगें। यह तय कर घोषणा नहीं कर पा रहा। जो कॉग्रेस के पक्ष में बनते माहौल के लिए घातक हो सकता है।  ये अलग बात है कि राजस्थान में अशोक गहलोत व म.प्र. में कमलनाथ, दिग्विजय सिंह जैसे धुरंधरों...

सिंधिया की, बड़ी स्वीकार्यता

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  अब जबकि चुनावों की घोषणा के साथ मतदान की तारीख तय हो चुकी है और टी.व्ही. चैनल सहित चर्चाओं में आमजन के बीच सिंधिया की स्वीकार्यता बढ़ रही है उससे साफ है कि उनके द्वारा ग्वालियर-चम्बल से लेकर मालवा तो बुन्देलखण्ड से लेकर विन्ध तक जो ताबड़तोड़ दौरे उनके द्वारा किए गए। अब उनका परिणाम आना शुरु हो चुके है। परिणाम कि समूचे प्रदेश में दबी जुबान में आम कॉग्र्रेसी कार्यकर्ता ही नहीं, सिंधिया का नाम ही नहीं, अब तो टी.व्ही. चैनल भी नये-नये सर्वे दिखा रहे है। तो वहीं आम मतदाता भी कॉग्रेस की ओर से सीएम चेहरे को लेकर टकटकी लगाए बैठा है। देखना होगा कि जब चुनाव प्रचार छोड़ टिकटों को लेकर सरफुटब्बल मचा है। ऐसे में कॉग्रेस आलाकमान क्या रुख अपनाता है। देखने योग्य होगा।

आयोग हुआ सख्त, बड़ी लोगो की समस्या आदर्श आचरण संहिता पर कलेक्टर गम्भीर

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विले ज टाइम्स समाचार सेवा।   म.प्र. शिवपुरी। अगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो साइलेन्ट जॉन में सम्मेलन की अनुमति देने वाले अधिकारी को कलेक्टर ने रिलीव किया ही था कि आम जन समस्या से जुड़े कार्यो पर भी ग्रहण लगता दिखाई देता है। फिर चाहे वह बंद पड़ी स्ट्रीट  लाइट हो या फिर बारिश से खराब हुई जानलेवा गड्डों में तब्दील सड़के सभी पर अधिकारियों द्वारा कार्य रोका जा रहा है। जिस तरह से आयोग को शिकायते हो रही है उसके मद्देनजर लगता है कि आयोग शिकायतों को लेकर काफी सख्त हुआ है। परिणाम कि आदर्श आचरण संहिता को लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर के तेवर सख्त नजर आ रहे है, जिससे लोगों की समस्याऐं बढऩा तय है। 

शाह की घोषणा, चुन-चुन कर घुसपेटियों को बाहर करेगें

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी। 18-19 में भाजपा की सरकारें बनने पर घुसपेटियों को चुनचुन कर देश के बाहर करेगें। मैं महान क्रान्तिकारी तात्याटोपे व समूचे उत्तर-भारत में स्नेह मातृत्व से पार्टी को मजबूत करने वाली राजमाता साहब की कर्म स्थली से यह घोषणा करता हूं। उक्त बात भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने ग्वालियर-चम्बल के कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कही।  उन्होंने कहा कि युवा आज तात्या जैसे महान क्रान्तिकारी को आदर्श मानते है तथा भाजपा 12 अक्टूबर से स्व. राजमाता साहब का जन्म शताब्दी वर्ष पूरी आन, वान, शान के साथ मनायेगी। भाजपा कार्यकर्ताओं की राजमाता साहब को सबसे बड़ी श्र्रद्धाजंली म.प्र. में भाजपा की प्रचण्ड जीत होगी। उन्होंने केन्द्र की मोदी व म.प्र. की भाजपा सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि भाजपा अंगद का पैर है और उसके 11 करोड़ सदस्य है। यह कार्यकर्ताओं की पार्टी है। भाजपा के मालिक कार्यकर्ता है हम पं. दीनदयाल उपाध्याय व अन्तोदय के सिद्धान्तो पर चलने वाली सरकार बनाना चाहते है। मगर राहुल बाबा है कि वह राजा, महाराजा और बंटाढार की सरकार बनाना चाहते है।...

कत्र्तव्य विमुख सत्ता और बेजान तंत्र, नैसर्गिक मूल सुविधा एवं अधिकार में बाधा लोकतंत्र में अधिकारों से वंचित रखना शर्मनाक

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में बेजान तंत्र की अर्कमण्यता कितनी घातक हो सकती है। इसका अंदाजा विश्व के महातम लोकतंत्र में नैसर्गिक सुविधा आवाम के मूल अधिकार उनके कत्र्तव्यों से वंचित देख लगाया जा सकता है। जहां तक मूल अधिकारों का सवाल है तो संविधान में उनका स्पष्ट उल्लेख है। मगर इस महानतम लोकतंत्र में अर्कमण्यता की स्थापित होती नजीर ने यह साबित कर दिया कि जिन्हें संवैधानिक तौर पर सशक्त सक्षम बना जिनसे शसक्त सक्षम लोकतंत्र की अपेक्षा की गयी। वह अपने कत्र्तव्य निर्वहन में अक्षम असफल ही नहीं नकारा साबित हो रहे है।  क्योंकि जिन लोगों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को अंगीकार कर उसे स्वीकार किया। उनसे नैतिक कत्र्तव्य निर्वहन की तो अपेक्षा की जा सकती है। मगर संविधान, विधानसभा अनुरुप कत्र्तव्य निर्वहन का दायित्व तो उन संवैधानिक संस्थाओं का होता है। जिन्हें पर्याप्त संसाधन ही नहीं संवैधानिक विधान अनुरुप शसक्त, सक्षम बनाया जाता है।  जब यहीं संस्थायें व इन संस्थाओं में बैठे लोग अपने निहित स्वार्थ, अर्कमण्यता के चलते एक मजबूत लोकतंत्र और लोगों को उन...

सायलेन्ट जॉन में सजा, शाह का पण्डाल कार्यकर्ताओं को मिलेगें जीत के टिप्स

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  म.प्र. शिवपुरी। भले ही कॉग्रेस मीडिया में डकराने के बाद भाजपा पर उसके आलाकमान के सायलेन्ट क्षेत्र में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन की शिकायत निर्वाचन आयोग ले जा पहुंची हो। मगर सत्ताधारी दल के मुख्य शाह का पण्डाल डिस्ट्रिक्ट मजिस्टे्रट कार्यालय व जिला चिकित्सालय के बीच मौजूद तात्या टोपे खेल ग्राउन्ड में र्निभिघन रुप से सज रहा है।  अपुष्ट सूत्र बताते है कि आचार सहिंता लगने के बाद इसलिए ऐसा हो रहा है कि ग्राउन्ड की अनुमति आचार सहिंता के पूर्व ही ले ली गई थी। कहते है समरथ को नहीं दोष गुसाईं। सो आज शिवपुरी में हजारों की तादाद में कार्यकर्ता जुट जीत की टिप्स अपने मुखिया से हासिल करेगें।

सपाक्स के सामने खुला मैदान

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वीरेंद्र भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। मध्यप्रदेश में भले ही भाजपा 15 वर्ष की सत्ता, संसाधन व संपन्न नेताओं की दम पर चौथी मर्तबा मध्य प्रदेश में सरकार बना सत्ता हासिल करने को मंसूबा पाल शासन के खजाने को साफ कर तथा म.प्र. पर डेढ़ लाख करोड़ के कर्ज की परवाह किए बगैर घोषणा पर घोषणा कर चुकी हो। वहीं कांग्रेस मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के बीच उलझ धन-बल व कार्यकर्ता बल की समस्या का सामना करते हुए जवानी जमा खर्च के सहारे सत्ता की जुगत लगने लगी हो। मगर जिस तरह से बसपा व स.पा. ने ऐन वक्त पर कांग्रेस को झटका दें, भाजपा का रास्ता चम्बल, बुदेंलखंड, वघेलखंड में आसान करने का कार्य किया हो। जैसे कि आम चर्चा है और स्वयं राजनैतिक दलों के आपसी आरोप-प्रत्यारोप रहे हो। उससे नवउदित सपाक्स की बांछे  खिलना स्वभाविक है। अगर ऐसे में सपाक्स व्यावहारिक रणनीत बतौर आगे बढ़ती है। तो सियासी तौर पर उसके सामने मैदान फिलहाल खाली है। अब यहां समझने वाली बात यह है कि जिस तरह से सत्ताधारी दल भाजपा जन, धन, बल की स्थिति में सबल है, तो वहीं 15 वर्ष बाद सत्ता की आस लगाए बैठी कांग्रेस भी क्षेत्रीय स्तरों पर कुछ कमतर...

संवाद से समाधान लोकतंत्र की रीड़, शान्तिपूर्ण संघर्ष, जीवन की खूबसूरती, व्ही.एस.भुल्ले से बतियाये राजगोपाल पी.व्ही.

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धर्मेन्द्र सिंह गुर्जर विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 17 राज्यों के लगभग 25 हजार सत्याग्रहियों के साथ एकता परिषद द्वारा भूमि सुधार को लेकर ग्वालियर से दिल्ली पदयात्रा तक शुरु हुए जनआंदोलन में शामिल होने स्वराज के मुख्य संयोजक मुरैना पहुंचे। जहां उन्होंने मंच पर एकता परिषद के संस्थापक पी.व्ही. राजगोपाल से मुलाकात कर, एकता परिषद के आंदोलन को अपना समर्थन दिया तथा उनसे चर्चा करते हुए विलेज टाइम्स संपादक के नाते जब उनसे पूछा कि महात्मा गांधी के दिखाए अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए लगभग 30 वर्ष का समय भूमि समस्या समाधान हेतु आपने संघर्षपूर्ण तरीके से निर्वहन किया है। अगर यो कहें कि भूमि सुधार और गरीब, आदिवासियों को न्याय दिलाने देश भर ही नहीं मानवता के लिए विश्व के ऐसे किसी कोने को नहीं छोड़ा। जहां भूमि समस्या और गरीबों के साथ अन्याय हो रहा है, क्या अनुभव रहा है। इस पर राजगोपाल पी.व्ही. ने अपनी चिरपरिचित शैली में मुस्कुराकर कहा कि महात्मा गांधी जी के बताए अहिंसा के मार्ग के अलावा समस्या, समाधान का और कोई बेहतर रास्ता लोकतंत्र में हो ही नहीं सकता और मैंने विगत वर्षो में संवाद के माध्यम से अहिंसा ...

सामाजिक न्याय समतामूलक व्यवस्था की खातिर तीसरी यात्रा सत्य का सड़क पर आग्रह

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  एकता परिषद के बैनर तले 27 राज्यों के लगभग 25000 सत्याग्रही ग्वालियर से 28 दिन में 330 कि.मी. की पैदल यात्रा कर, दिल्ली पहुंचेगें। जहां वह भूमि सुधार के लिए भूमि संसद करेगें। जन आन्दोलन 2018 के नाम यात्रा का पहला पड़ाव 6 अक्टूबर को मुरैना म.प्र. में होगा।  ज्ञात हो एकता परिषद के संस्थापक राजगोपाल पी.व्ही. 2006 तथा 2012 में भूमि सुधार को लेकर जन सत्याग्रह कर चुके है। मगर आवास, भूमिहीनों के साथ न्यायपूर्ण नीति के न होने के कारण पुन: 2018 जन आन्दोलन के नाम से यह पैदल यात्रा दिल्ली तक हो रही है।  जिसको 3 अक्टूबर को प्रसिद्ध गांधीवादी एस.एन. सुब्बाराव, एकता परिषद के संस्थापक और जन आन्दोलन के नायक राजगोपाल पी.व्ही. सहित म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भी सम्बोधित किया। वहीं 6 अक्टूबर को कॉग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी व पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के भी यात्रा में शामिल हो, सम्बोधित करने की संभावना है।  ये अलग बात है कि जन आन्दोलन सत्याग्रह यात्रा ग्वालियर से कूच कर चुकी है। देखना होगा कि केन्द्...

्गले मिले, मगर दिल नहीं मिल सके सत्याग्रहियों का जत्था पैदल दिल्ली रवाना मुरैना होगा पहला पड़ाव

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सरकारों की बादा खिलाफी से हलाक एकता परिषद के सत्याग्रहियों का काफिला 3 अक्टूबर से ढेरा डाल ग्वालियर से आज दिल्ली की ओर कूच कर गया। ज्ञात हो कि इस सत्याग्रह में लगभग 25 हजार लोगों के रहने की संभावना है। दिल्ली कूच करने से पूर्व सत्याग्रहियों को समझाने पहुंचे म.प्र. के मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को अपने मंच से बताया तथा भविष्य में और प्रभावी क्रियान्वयन का भरोसा दिलाया।  मगर सरकार की बादा खिलाफी से परेशान सत्याग्रहियों को संतोष नहीं हुआ और वह 4 अक्टूबर को सुबह 9 बजे दिल्ली की ओर कूच कर गए। जहां उनका पहला पड़ाव मुरैना होगा। जहां कॉग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तथा म.प्र. चुनाव केम्पेन कमेटी के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया के भी रैली में शामिल होने की संभावना है। इससे पूर्व एकता परिषद के प्रमुख संस्थापक राजगोपाल पी.व्ही ने एकता परिषद की प्रमुख पांच मांगों को मंच से रखा। जिसमें राष्ट्रीय भूमि सुधार परिसर के माध्यम से भूमि सुधार लागू करे। दूसरा राष्ट्रीय आवास के भूमि सुधार कानून 2003 का क्रियान्वयन करे। तीसरा राष्ट्रीय भूमि सुधार नी...

स्मार्ट सिटी मेरा सपना आप साथ दो, संसाधन जुटाने की जबावदेही मेरी: श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया मंत्री म.प्र. शासन प्रदेश का पहला एस्ट्रो टर्फ हॉकी स्टेडियम प्रदेश को समर्पित

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  म.प्र. शिवपुरी।  7.25 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित अत्याधुनिक एस्ट्रो टर्फ हॉकी स्टेडियम म.प्र. शासन की खेल युवा कल्याण, धार्मिक न्यास धर्मस्य मंत्री श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया ने म.प्र. को समर्पित किया। वहीं उन्होंने म.प्र. राज्य टेबिल टेनिस एसोसिएशन के तत्वाधान में शिवपुरी टेबिल टेनिस एसोसिएशन द्वारा आयोजित प्रदेश स्तरीय टेबिल टेनिस प्रतियोगिता के समापन व पुरुस्कार वितरण समारोह में खिलाडिय़ों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप मेरा साथ दो, संसाधन मैं जुटाऊंगीं। जिस तरह से म.प्र. के अन्य खिलाडिय़ों ने विगत 4 वर्ष में म.प्र. का नाम रोशन किया है। आप भी उसी तरह अपना नाम रोशन कर, म.प्र. का गौरव बढ़ा सकते है। खेल वह विद्या है जो व्यक्ति को योग्य सफल, सार्थक, जीवन, निर्वहन की सीख देते है और चुनौती का सामना कर जीवन को सुन्दर सफल बनाने का मार्ग प्रस्त करते है। उन्होंने कहा कि वह भी घुड़ सवारी में नेशनल खिलाड़ी रहीं है और घुड़ सवारी के खुड़ से उन्होंने व्यवहारिक जीवन में बड़ी सीख हासिल की और चुनौती पर विजय हासिल करने का विश्वास हासिल किया ...

मड़ीखेड़ा पहुंची श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया जलावर्धन की पाईप लाईन का किया निरीक्षण

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  म.प्र. शिवपुरी।  आज अल सुबह म.प्र. शासन की खेल युवा कल्याण धार्मिक न्यास धर्मस्य मंत्री श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया मड़ीखेड़ा पहुंची। जहां उन्होंने शिवपुरी शहर के लिए डाली जा रही पाईप लाइन का निरीक्षण किया तथा समय सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।  इस मौके पर नगरीय प्रशासन के इएनसी श्री प्रभाकान्त कटारे, निर्माण कंपनी के अधिकारी, एसडीएम शिवपुरी एलके पांडे, सीएमओ नगर पालिका सीपी राय, एसडीओपी श्री दोहरे सहित बड़ी संख्या में भाजपा नेता व कार्यकर्ता मौजूद थे। 

न्याय को, छटपटाटे संगठन, अघोषित आपातकाल का दंश झेलते, आन्दोलन राजतंत्र मे तब्दील होता, लोकतंत्र

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  सामाजिक, आर्थिक, समानता के न्याय को लेकर म.प्र. की भूमि से शुरु हुए दो वृहत आन्दोलन भले ही अघोषित आपातकाल का दंश झेलने पर मजबूर हो। मगर सामाजिक न्याय को छटपटाते संगठनों का दर्द यह है कि जो सामाजिक अन्याय, न्याय के नाम राजशाही में तब्दील स्वार्थवत सत्तायें कर रही है। उससे लोगों में आक्रोश व्याप्त है। परिणाम कि 30 सितम्बर को भोपाल में आयोजित महा रैली में सत्ता, संसाधनों को दुरुपयोग के बावजूद हजारों लोगों का जुटना और सत्ता के खिलाफ एक सुर में शंखनाद होना इस बात के स्पष्ट संकेत है कि कहीं तो सामाजिक विखराव और असमानता भाव लोगों में घर कर रहा है। वहीं जिस तरह से सामाजिक न्याय के लिए भूमि सुधार को लेकर 4 अक्टूबर से ग्वालियर में सत्याग्रहियों की रैली का धमाकेदार आगाज हुआ है। जिसमें देश भर के विभिन्न राज्यों से लगभग 25000 सत्याग्रही शामिल होने की संभावना है। जैसा कि एकता परिषद के संस्थापक गांधीवादी राजगोपाल पी.व्ही ने कहा है। उन्होंने पत्रकारों के बीच स्पष्ट किया कि सामाजिक न्याय समतामूलक समाज के लिए देश में भूमि सुधार जरुरी है। जिसके तह...