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Showing posts from September, 2019

शहर की थीम रोड़ कार्य गुणवत्ता पूर्ण हो: यशोधरा राजे सिंधिया शिवपुरी विधायक ने किया भूमि पूजन

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। शिवपुरी। विकास के लिए समर्पित पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं शिवपुरी विधायक यशोधरा राजे सिंधिया ने विधिवत पूजा अर्चना कर कुंदाली लेकर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री ज्ञानबर्धन मिश्रा सहित अन्य विभागीय अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे। इस अवसर पर शिवपुरी विधायक यशोधरा राजे सिंधिया ने कहा कि 31 रोड़ 60 करोड़ रूपए की लागत से पीडब्ल्यूडी के माध्यम से शहर में बनबाए गए हैं और बड़े शहरों की तर्ज पर निर्माण किया गया हैं। जिनमें फतेहरपुर रोड़, राजेश्वरी मार्ग, माधवराव सिंधिया मार्ग, टोंगरा मार्ग, सहित अन्य रोड़ बनकर तैयार हैं और अब शहर की बीचों बीच से गुजरने वाली थीम रोड़ 45 करोड़ रूपए की लागत से तैयार की जाएगी जिसका निर्माण कार्य आज प्रारंभ कर दिया गया हैं। शहर के बीचों बीच से गुजरने वाली इस सड़क निर्माण का कार्य जून 2020 तक पूरा कर लिया जाएगा। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक यशोधरा राजे सिंधिया ने पीडब्ल्यूडी विभाग के कार्यपालन यंत्री को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि सड़क का निर्माण गुणवत्ता पूर्ण व समय सीमा में किया जाना चाहिए। यदि सड़क खर...

भारत के चरित्र, आचरण, भाव की संक्षिप्त समीक्षा शान्ति, सर्वकल्याण, मूल आधार, विश्व मंच के 184 देशों को भारतवर्ष का सार्थक संदेश हजारों वर्ष पुरानी समृद्ध, संस्कृति, संस्कार हमारा सामर्थ पुरूषार्थ का प्रमाण बडी विरासत, बडे लक्ष्य शान्ति सर्वकल्याण महान भारतवर्ष का कत्र्तव्य विश्व मंच पर दुरूस्त बोले मोदी

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व्ही.एस.भुल्ले समस्त मानव जीव, जगत का कल्याण हमारा मूल सिद्धान्त का भाव और जन्म तथा अंत के बीच का सार्थक प्रकृति प्रदत्त सिद्धान्त अनुरूप हमारा कत्र्तव्य निर्वहन हमारी मूल संस्कृति का भाव है। जो भारतवर्ष की बहुमूल्य विरासत भी है और हमारे संस्कार भी। जो हर भारतवर्ष के नागरिक में भरा पडा है। भारतवर्ष में शोषण नहीं, पोषण विनाश नहीं, सृजन के पक्षधर लोगों की संस्कृति रही है। हम स्वयं नहीं सर्वकल्याण के भाव के साथ जीते है और स्वयं के सामर्थ, पुरूषार्थ के बल समृद्ध खुशहाल जीवन के लिए जीवन पर्यन्त संघर्षरत रहते है। जो हमारे भाव ही नहीं आचरण और चरित्र से भी स्पष्ट है। हम भारतवर्ष के लोग स्नेह, प्रेम, शान्ति और समृद्ध, खुशहाल जीवन के सार्थी तथा सर्वकल्याण के भाव में लिप्त संस्कृति के उत्तराधिकारी है। यहीं भाव हजारों वर्ष से इस महान भूभाग भारतवर्ष का रहा है। इतिहास गवाह है यहीं बात आज समूचे विश्व की मानवता को भारतवर्ष के संदर्भ में समझने वाली होना चाहिए। जो समूची विश्व विरादरी ही नहीं मानवता में आस्था, विश्वास रखने वाले राष्ट्र और मानव के लिए हो सकती है।  जय स्वराज   

लोकतंत्र में गिरोहबंद, संस्कृति से सियासत की मुक्ति अहम मूल सिद्धांतों की खातिर अध्यादेश लाए, सरकार राष्ट्र, राज्य, नगर, ग्राम, राजनीति में व्याप्त अन्याय, अत्याचार, भ्रष्टाचार, स्वस्थ लोकतंत्र पर कलंक सत्ता सरकार सभा परिषदों के मुखियाओं का चुनाव सीधा हो बजट से पूर्व हर वर्ष सदन को सत्ता, सरकार, सभा, परिषद के निर्णय नीत, क्रियाकलाप परिणामों का मूल्यांकन तथा दो तिहाई बहुमत से पुरस्कृत, अपदस्थ दंडित करने का अधिकार

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वही.एस.भुल्ले कहते हैं मजबूत लोकतंत्र जनतंत्र में एक मजबूत समृद्ध कल्याणकारी सरकार सुरक्षित, खुशहाल, जीवन के प्रति जवाबदेह, भ्रष्टाचार मुक्त तब तक नहीं हो सकती, जब तक उसे प्रमाणिक तौर पर उसे सामर्थवान बना जवाबदेह नहीं बनाया जाता और यह तभी संभव है जब सरकारों के मुखिया जनता द्वारा लोकतांत्रिक माध्यम से सीधे चुने जाये और जनता के वोट से प्राप्त जीत पश्चात वह अपने विवेक अनुसार अपनी सरकार मंत्रिमंडल का गठन कर जन, राष्ट्र, राज्य, नगर, ग्राम के विकास कल्याण समृद्धि, खुशहाली का मार्ग अपनी सरकार की नीति, योजनाओं के माध्यम प्रस्त कर सके तथा हर वर्ष बजट से पूर्व का रिपोर्ट कार्ड परिणामों के रूप में सदन में मूल्यांकन हेतु रखें। सदन को अधिकार हो कि वह अपने दो तिहाई बहुमत के आधार पर सहमति, असहमति दर्ज करा सरकार को पुरस्कृत करें या ठोस प्रमाण नीति के आधार पर सरकार के विरोध में मतदान कर मुखिया के खिलाफ संवैधानिक कार्यवाही का आगाज करें। जिससे अघोषित रूप से किसी भी लोकतंत्र, जनतंत्र में जन्म लेने वाली गिरोहबंद संस्कृति में व्याप्त अन्याय, अत्याचार, भ्रष्टाचार जैसी बुराईयां से लोकतंत्र-जनतंत्र के मूल स...

वोट चोट से सत्ता समृद्धि की सियासत

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता के लिये सबसे अहम वोट होता है और अगर वोट पर ही सत्ता समृद्धि के नाम सटीक चोट करने में महारथ हासिल करले तो सत्ता की समृद्धि तो बढती ही है। अब्बल सतत सत्ता का भी मार्ग प्रस्त होना स्वभाविक होता है। भले ही वोट देने वालो की जमात समृद्ध खुशहाल जीवन का सपना सजा पथराई आंखों से अभाव ग्रस्त विरासत अपनी पीढी को सौंप विदा ले जाये, क्या फर्क पडता है सत्ता, सभा, परिषदों को कहते है कि किसी को फर्क पढे न पढे। मगर संस्थागत ढांचे का जो सर्वनाश होता है। उसका भविष्य बडा ही वीभत्स होता है। शायद आज हम समृद्ध विरासत के उत्तराधिकारी उसी दौर में हो। मगर कहते परिवर्तन प्रकृति का नियम है। अगर लीग से हट हम कुछ कर पाये अपनी प्रतिभाओं, विधा, विद्ववानों को सहज संसाधन जुटा अवसर मुहैया करा पाये तो कोई कारण नहीं जो हम वोट चोट की नीति छोड यकीनन अपनी कौम और भारतवर्ष की सुन्दर समृद्ध कायनात को न बचा पाये। 

आर्थिक समृद्धि में ब्रान्डिंग के साथ, क्वालिटी प्रोडक्ट की उपलब्धता अहम सहज अवसर संसाधनों से सिद्ध होगा सामर्थ, और होगी मजबूत अर्थव्यवस्था आर्थिक समृद्धि से बढेगी अर्थव्यवस्था

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। आज जब देश में 5 ट्रिलेयन की अर्थव्यवस्था बनाने की चर्चा सरगर्म है और बिगडती अर्थव्यवस्था को सम्हालने डोज पर डोज बूस्टर डोज दिये जा रहे है तो वहीं दूसरी ओर देश विदेशी निवेश बढाने के साथ मेड इन इंडिया के सपनों को साकार करने 1.45 लाख के बूस्टर डोज तक दिये जा रहे है।  कहते है किसी भी वृहत अर्थ व्यवस्था के लिये आर्थिक समृद्धि सबसे अहम होती है और आर्थिक समृद्धि तब आती है जब अर्थव्यवस्था से जुढे हर अंग को स्वच्छंद ज्ञान के साथ सहज संसाधन तथा प्रतिभा प्रदर्शन के सहज अवसर उपलब्ध है। क्योंकि बाजार के लिये ब्रान्डिग के साथ क्वालिटी प्रोडक्ट होना अवश्य है। फिर क्षेत्र, मार्केटिंग, निर्माण उत्पादन का हो या सेवा सुरक्षा का जब तक गुणवत्ता पूर्ण उत्पाद और उसकी सहज उपलब्धता न हो तब तक बेहतर से बेहतर ब्रान्डिंग न काफी ही साबित होगी और हमारी मौजूद लोकतांत्रिक व्यवस्था में तो इसलिये भी यह कठिन कार्य है कि संचालक या निर्णय मण्डल में अहम भूमिका गिरोहबंद संस्कृति या पितृ, परिवार तथा विचार संस्कृति के चलते अब विद्या, विद्यवान, प्रतिभा, योजना आयडिया का कोई मूल्य...

स्व नहीं सर्वकल्याण, शान्ति है भारतवर्ष का मूल आधार समृद्ध, खुशहाल, जीवन के मूल्य सिद्धान्त और सामर्थ से भरी है हमारी संस्कृति

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। ये अलहदा बात है कि हम क्या थे और क्या है। मगर जब बात आर्थिक समृद्धि, खुशहाल जीवन की हो ऐसे में अतीत वर्तमान की समीक्षा अवश्यम भावी हो जाती है। जिस काॅम का प्रारव्ध अन्तिम लक्ष्य स्व नहीं सर्वकल्याण शान्ति, समभाव का रहा हो। जिस भारतवर्ष के समृद्ध अस्तित्व को उसका मूल आधार माना जाता रहा हो। यहां तक कि आक्रान्ताओं की बैहिसाब मारकाट अत्याचार महालूट का इतिहास रहते 200 वर्ष की गुलामी भी हमारी आर्थिक समृद्धि का ढांचा न तोड़ सकी और जो डाॅलर आजादी के वक्त एक रूपये के बराबर रहा हो वह एक डाॅलर आज 72 रूपये के पार कैसे हो सकता है। कैसे हमारे समृद्ध, गांव, गली, कुटीर, लघु, व्रहत उघोग कंगाल हो सकते है। आज यहीं यक्ष सवाल इस महान भारतवर्ष के विधा, विद्ववान, गरीब, किसान उघोगों के सामने होना चाहिए। कारण साफ है स्व अतिवादी, सतत, स्वयं भू सोच के साथ सत्ताओं का शासन करना और सतत सत्ता में बने रहने की नीतियांे के निर्माण में जुटे रहना है। क्योंकि जो राष्ट्र 70 वर्ष में भी अपनी समृद्ध, खुशहाल शिक्षा को बचा पुर्नस्थापित कर समय अनुसार आर्थिक नीति बनाने में अक्षम असफल र...

क्या बूस्टर डोज से सजेगी हरियाणा-महाराष्ट्र की सियासत ? बाजार को 1.45 लाख करोड की राहत

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। मजदूर, किसानों को मिले हल्के आर्थिक डोज बाद मेक इन इण्डिया के घोड़े पर सवार रोजगार, कम्पनियों, बैंक, विदेशी देशी निवेश आॅटो रियल स्टेट स्टार्टटप और दीवाली जैसे त्यौहारों की चमक बढ़ाने के साथ महाराष्ट्र हरियाणा जैसे मैनिफेक्चरिंग, कम्पनी बाजार वाले राज्यों के मद्देनजर यूं तो देश भर को लाभ होगा या नुकसान यह अलग बात है कि मगर चुनाव से पूर्व जिस तरह से भाजपा या एनडीए सरकार की बम्फर बूस्टर किसी क्षेत्र को देने की अघोषित तौर पर रही है वह भले ही हताश निराश विपक्ष की समझ से बाहर हो। मगर टुकडे में राष्ट्र-जन कल्याण के सहारे वोट साधने की नीति से फिलहाल इंकार नहीं किया जा सकता। यह सही है कि टेक्स स्लेव कम करने से देशी के साथ विदेशी निवेश भी बडी मात्रा में आ सकता है और रोजगार के साथ खरीददारी मे दिलचस्वी रखने वाले मध्यम व निचले स्तर पर खरीददारी बढ सकती है। जिससे बाजार में स्वतः मांग बढेगी और रूपये का प्रभाव सुन शान पढे बाजार में बढेगा। मगर यहां समझने वाली बात यह है कि अमेरिका यात्रा पर जाने पूर्व जो बूस्टर बम फूटा है उसकी धमक यूरोपीय ही नहीं अरब कन्ट्री तक...

रिटायरमेंट की उम्र में, प्रभावी भूमिका को तैयार सोनिया

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 25 वर्ष पुरानी टीम के साथ एक मर्तवा फिर से काॅग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी अपनी प्रभावी सियासी भूमिका में नजर आ रहीं है। जिस तरह से वह सियासी संगठनात्मक तौर पर निर्णय ले रहीं है उससे साफ है कि अगले कुछ वर्ष काॅग्रेस की बागडोर बुजुर्ग अनुभवी हाथों में ही काॅरपोरेट संगठनात्मक कल्चर के आधार पर ही चलने व रहने वाली है और काॅरपोरेट कल्चर के आधार पर ही सियासी संगठन खड़ा करने की तैयारी है। यह अलहदा बात है कि वर्तमान बदले सियासी परिवेश में पूर्व काॅग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी स्वयं को मौजूद सियासत में चाहकर भी प्रभावी ढंग से स्थापित नहीं कर सके या फिर उन सियासी उस्तादों ने उन्हें स्थापित ही नहीं होने दिया। जिन्हें अपने-अपने पद, संगठनात्मक, सियासी हुकूब जाने का डर था। अब जबकि सोनिया गांधी कह चुकी है कि सोशल मीडिया के साथ सडकों पर संघर्ष भी जरूरी है। शायद वह यह समझने में सफल रही कि सिर्फ निर्जीव, तकनीक, सोशल मीडिया का सत्य क्या है और जीवन्त जुडाव क्या ? सच से कोसो दूर केपिंन आधार यह तकनीक सिर्फ काफी नहीं। जिस सोशल मीडिया व जीवंत, संपर्क...

अंधी, बेहरी व्यवस्था और विचलित लोग कत्र्तव्य विमुखता के कलंग के बीच, विकास, सेवा, कल्याण का महाकुंभ खबर अपुष्ट है.......

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अब इसे हम अपनी व्यवस्था का सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य कि मुंह मांगी कीमत पर देश के करोडों पीड़ित, वंचित, अभावग्रस्त जन का धन चुकाने के बावजूद अपनी ही व्यवस्था में अंधे, बेहरे बैवस जबावदेह लोगों के बीच कत्र्तव्य विमुख कलंकित होती व्यवस्था के चलते सेवा विकास कल्याण के नाम कलफने मजबूर हजारों करोड़ की सड़कों, पुल, पुलियों के सरेयाम उड़ते परखच्चे, बगैर सेवा शुल्क अचेत सेवा और आंकड़ों में दम तोड़ता कल्याण, सेवा विकास के नाम कत्र्तव्यनिष्ठा से इतर जबावदेह लोगों का चीखना चिल्लाना किसी से छिपा नहीं। अगर पुष्ट व्यवस्था की यह अपुष्ट खबर आज की व्यवस्था में भले ही कोई मायने न रखती हो। मगर रोजगार, विकास के नाम अघोषित रूप से सत्ता और तंत्र का इन क्षेत्रों में कब्जा इस बात का प्रमाणिक सेवायें या प्रमुख पदों पर रहे बड़े लोगों के साथ अघोषित हिस्सेदारी से विगत दशक में सत्ता या प्रशासनिक ओहदेे पर रहने वालों की अटूट समृद्धि अवश्य बड़ी शहर-शहर कोठिया, फार्म हाउस, कम्पनियों में अघोषित निवेश भागीदारी, लग्झरी वाहनों मंहगी ज्वेलरी की दास्ता सच समझने काफी है। जो ईओडब्लू लोकायक...

भीषण बाढ, बारिस के बीच समय, संपदा गंवाती सरकारें

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व्ही.एस.भुल्ले जिस तरह से समूचे देश में भीषण बारिस का दौर चल रहा है उसने अपने पिछले सभी रिकार्ड ध्वस्त कर दिये है। ऐसे में सरकारों का कत्र्तव्य था कि वह सेटेलाइट व मैदानी अमलों को बाढ, नदी, नाले सहित क्षेत्रों में बहने वाले पानी तथा लबालब मौजूद जलाशय तालाबों के कैचमेंट ऐरियों का चिन्हित करा ऐरिया निर्धारित करा लेती। जिससे आने वाले समय में जल प्रबंधन का खांका स्पष्ट हो। पेयजल से तृस्त क्षेत्र और भूजल से प्रभावित क्षेत्रों को लाभ आने वाले समय में दिलाया जा सकता था तथा अनियंत्रित होने वाली बसाटों और बारिस के दौरान होने वाली बर्बादी को रोका जा सकता है। मगर लगता नहीं कि वोट नीति में मशगूल सत्ता सरकारों को जल प्रबंधन की कोई बडी चिन्ता हो। बेहतर हो कि अभी समय है सत्ता और सरकारें राष्ट्र व जनहित में जल बहाव सर्वे एवं जल के कैचमेंट ऐरिये को निर्धारित करा ले। तो यह उनकी सबसे बडी कत्र्तव्यनिष्ठा होगी और कत्र्तव्य पालन भी।  

देशी विदेशी, स्थानीय निवेश, काॅरपोरेट सेक्टर के साथ, स्थानीय इनोवेशन जुगाड़, तकनीक, प्रशिक्षण, अवसर, संसाधन अहम, सत्ता शासन का निवेश सृजन परिणाम और पुरूषार्थ, प्रदर्शन में हो, आर्थिक समृद्धि स्वतः सिद्ध होगी

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जब तक ऊर्जा दोहन का मार्ग हम सटीक तौर पर निर्धारित नहीं कर लेते तब तक हमारे तथाकथित सार्थक प्रयास अक्षम, असफल ही साबित होते रहेेंगे। यह सही है कि किसी भी समृद्धि में शक्ति का अपना एक अहम योगदान होता है जो सृजित जीवन सदभाव, सुरक्षा का भाव पैदा करता है। मगर कहते है कि शक्तिशाली होने के लिये स्वस्थ, समृद्ध, जीवन और संसाधन अहम होते है। जिसे सशक्त समृद्ध सहज संसाधनों की आवश्यकता होती है। जो सहज समृद्ध जीवन के निर्माण में सहायक होते है। जब तक हम प्रतिभा प्रदर्शन के ंसाधन और संसाधन युक्त वातावरण निर्माण नहीं कर लेते तथा सत्ता शासकों में अपने देश प्रदेश, जिला, जनपद, गांव, गली में आभावहीन प्रतिभा, विधा, विद्ववानों के प्रति न्याय कत्र्तव्यनिष्ठा का भाव नहीं आता तथा तब तक सत्तायें गिरोहबंद संस्कृति से दूर सर्वकल्याण के भाव के साथ स्थापित र्दुव्यवस्था को दूर नहीं कर लेती जब तक समृद्धि का मार्ग अधूरा ही रहेगा। समृद्धि शक्ति, खुशहाल समृद्ध जीवन के दो पहलू है। जिनके आधार पर कोई भी समृद्ध विरासत ही नहीं वर्तमान का भी निर्माण होता है। प्राकृतिक सच से दूर खींच...

जनाकांक्षाओं के आगे कठघरे में सरकार आशा-आकांक्षाओं को राहुल, सिंधिया से न्याय की दरकार

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  म.प्र. के सियासी मैदान में आक्रोश, जनाक्रोश, सत्याग्रह, रैलियों के माध्यम से भाजपा से समूचे प्रदेश में घूम घूम कर लोहा लेेने वाले काॅग्रेस महासचिव पूर्व केन्द्रीय मंत्री तथा चुनावों के दौरान हर जिले में उद्योग लगा रोजगार का वादा करने वाले पूर्व काॅग्रेस अध्यक्ष, सांसद राहुल गांधी, क्या जनाकांक्षाओं के आगे कठघरे में खड़ी म.प्र. सरकार से कलफती आशा आकांक्षाओं और बेरोजगार हाथों को रोजगार दिला न्याय दिला पायेंगे। राहुल भले ही अब पूर्व काॅग्रेस अध्यक्ष व वायनाड केरल से सांसद हो और सिंधिया सत्ता, संगठन दोनों से ही म.प्र. में सीधे तौर पर बाहर हो ऐसे में राहुल और सिंधिया के नाम काॅग्रेस को वोट देने वालो का क्या अपराध जो अब एक वर्ष पूर्ण होने को है। मगर न तो हर जिले में उघोग का पता है न आशा आकांक्षाओं को इन दोनों नेताओं से बात करने का पोर्ट फोलिया मिल पा रहा है। हताश निराश कार्यकर्ता व नेता भी अब इस तलाश में है कि सत्ता सरकार में भागीदारी कर वह सेवा कल्याण, मूल्य, सिद्धान्त की राजनीति के कीर्तिमान खडा करना चाहते थे। अब उस सरकार में प्रभावी दखल ऐस...

जल्द अस्तित्व में होगी 30 गौशाला मिलावट के 55 में से 12 सेम्पल अमानक

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। शासन की मंशा अनुरूप विभिन्न कार्यो को मूर्त रूप दें, मिलावट करने वाले लोगों पर की गई कार्यवाही के संबंध में शिवपुरी कलेक्टर अनुग्रह पी ने कहा कि हमने लक्ष्य अनुसार जिले भर में 30 गौशालाओं के लिये जमीन आवंटित कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। जिन्हें समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश सम्बन्धित विभाग को दिये गये है। वहीं दूसरी ओर मिलावट करने वालो पर कार्यवाही का सवाल है तो विगत 2 माह में 55 सेम्पल लिये गये। जिसमें से 12 सेम्पल अमानक पाये गये जिन पर एडीएम न्यायालय में कार्यवाही प्रचलित है।   जल संरचनाओं पर बढते अतिक्रमण और वृक्षारोपण सहित सूचना अधिकार की स्थिति पर कलेक्टर ने बताया कि बारिस पश्चात अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कडी कार्यवाही की जायेगी। रहा सवाल व्यापक स्तर पर होने वाले मनरेगा के तहत वृक्षारोपण का तो इस पर रोक क्यों है, पता करते है। जहां तक सूचना अधिकार का सवाल है, तो इसकी स्थिति संतोषजनक है। अभी हाल ही में आयोग द्वारा शिवपुरी भ्रमण के दौरान समीक्षा भी की गई है। एनएचएआई वायपास व शहर के बीचों बीच से गुजरने वाली एनएच सडक को पीडब्लू...

समय गंवाती सरकार, रोजगार को भटकते लाखों बेरोजगार

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाम्इस समाचार सेवा। म.प्र. में रोजगार और संवेदनशील समाधान युक्त लीडरसिप और सियासत की यूं तो कमी म.प्र. में रही है। परिणाम कि आज तक म.प्र. जैसा प्राकृतिक नैसर्गिक रूप से समृद्ध राज्य न तो आज तक औद्योगिक हब बन सका, न ही ऐसे प्रशिक्षित हाथ तैयार कर तीनों स्तरों पर शिक्षा, तकनीक, कुशल, अकुशल लोगों को संसाधन जुटा मौजूद म.प्र. की प्रतिभाओं को जौहर दिखाने के अवसर मुहैया करा सका। जिससे म.प्र. खुशहाल और समृद्ध बन पाता, न ही म.प्र. के सत्ता में रहे नेतृत्व म.प्र. के चहुमुखी विकास का कोई ऐसा खांका खींच सका सिवाये चापलूस भरी सियासत और धूर्त राजनीति सहित रोजगार के नाम प्राकृतिक संपदा और विकास निर्माण के नाम सार्वजनिक धन की लूटपाट के जिसका दुष्परिणाम 70 वर्ष तक तो मौजूद पीड़ियां झेलती ही रहीं भविष्य भी अगर ऐसा ही बना रहे तो इसमें कोई अतिसंयोक्ति नहीं होना चाहिए। अपने-अपने अहम अहंकार में डूबी सत्तायें, संगठन उनके मातहत या फिर सियासी दरबारियों ने विकास, सेवा कल्याण के नाम भले ही म.प्र. के भोले भाले लोगों को बरगला समृद्ध, खुशहाल जीवन का सपना दिखा सत्ता दोहन के माध्यम से स्वयं...

म.प्र.: मिलावट के खिलाफ मुख्यमंत्री का फ्री हेन्ड- मुख्य सचिव अलाली में मस्त मातहत

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाम्इस समाचार सेवा। पुष्ट तथ्यों के आभाव में अपुष्ट खबर यह है कि अलाली में मस्त मातहतों की कत्र्तव्य विमुखता का परिणाम है कि म.प्र. में बड़े पैमाने पर मिलावटखोरी इस बात से भी स्पष्ट हो जाती है कि ग्वालियर में एक बैठक के दौरान म.प्र. शासन के मुख्य सचिव एसआर मोहन्ती ने भी स्पष्ट किया है कि मिलावट करने वालों पर टूट पड़ो क्योंकि मिलावटियों के खिलाफ कार्यवाही करने मुख्यमंत्री ने शासन को फ्री हेन्ड दिया है। उन्होंने तर्क भी दिया कि उत्पादन से अधिक दूध की बाजार में उपलब्धता इस बात का प्रमाण है कि मिलावट किस स्तर पर हो रही है।  मगर यक्ष सवाल यह है कि क्या मिलावट का इतना बड़ा कारोबार रातों रात फल फूल व समूचे प्रदेश पैर पसार सकता है। ऐसे में उत्तर होगा नहीं, तो मतलब साफ है कि इस मिलावटखोरी के धंधे को पनपने में कई वर्ष लगे होंगे। मगर इस सवाल का उत्तर शायद मुख्य सचिव के पास हो कि मिलावटखोरी रोकने तैनात शासन के मातहत अभी तक मोटी पगार ले, कौन से कत्र्तव्यों का पालन निष्ठापूर्ण तरीके से करते रहे जो मिलावटखोरी इतने बड़े पैमाने पर बढ़ गई। आखिर वो लोग कौन है जिनके संरक्षण में मि...

राज्य, समाज और युवाओं की समृद्धि, खुशहाली के लिये पुरूषार्थ, समय की जरूरत

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है किसी भी राज्य, समाज के बेहतर भविष्य निर्माण में सत्ता सरकार, सभा, परिषद एवं जीवंत शिक्षित समाज विधा, विद्ववान, शिक्षकों चुने हुये गांव, गली के जनप्रतिनिधि और निवासरत बौद्धिक रूप से समृद्ध लोगों की अहम भूमिका होती है। कहते है कि जब किसी भी राज्य में लोकतांत्रिक आधार पर सेवा, कल्याण विकास के नाम सत्ता हासिल कर अपने कत्र्तव्यों में अक्षम, असफल, संगठन, संस्थाओं की उपस्थिति बढ़ने लगने लगती है और व्यवस्था सड़ांध मारने पर मजबूर। ऐसे में उस राज्य के कत्र्तव्यनिष्ठ जबावदेह लोगों को दायित्व होता है कि वह नये सिरे से समीक्षा कर ऐसी संस्थायें, संगठन लोकतांत्रिक आधार पर खड़े करें जिससे उनकी सत्ता का मार्ग प्रस्त हो सके और वह अपनी आशा-आकांक्षा सपने अनुसार ऐसी सत्ता, सरकारे, सभा, परिषद स्थापित करें जो ईमानदार, निष्ठा, सेवा भावी एवं कल्याणकारी हों और यह तभी संभव है जब विगत 4 दशक तक सत्ता में रह पुनः सत्ता में काबिज राजनैतिक दल या जो पूर्व में 20 वर्ष में सत्ता भोग चुके सत्ता भोगी दलों से सियासी संघर्ष का रास्ता तय कर संघर्षपूर्ण तैयार हो।  क्योंकि ...

सच से दूर, सपनों का जनाजा

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सपना तो हर मानव का किसी भी व्यवस्था में अपनी सत्ता, सरकार, सभा, परिषदों से पूरा करने का होता ही है। जिससे वह उन्हें व उनके नौनिहालों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा, शुद्ध खादन्न, पेयजल और सुरक्षा मुहैया करा उनका व उनके नौनिहालों का जीवन समृद्ध, खुशहाल बनाने का मार्ग स्वयं की कृतज्ञता के चलते प्रस्त कर सके। जिसमें लोक कत्र्तव्य निष्ठ और तंत्र जबावदेह हो। जिससे राज व्यवस्था मजबूत समृद्ध, सशक्त हो, लोग जनकल्याण और सेवा का कार्य मुस्तैदी से हो सके। अब इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था का सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य कि लोकतंत्र व्यवस्था के जबावदेह लोग संस्था, संगठन सतत सत्ता में रह सेवा कल्याण की नीतियां सत्ता हित को सामने रख बना काॅरपोरेट कल्चर आधार पर क्रियान्वित करना चाहते है। तो वहीं लोकतंत्र का दूसरा भाग अपनी अंधी आशा-आकांशाआंे को पूर्ण करने और अपनी आने वाली पीढ़ियों को सपने साकार करने संवैधानिक दायित्वों का मानवीय नैतिक कत्र्तव्यों को दरकिनार कर सत्ता के सुर में सुर मिला अहंकार पूर्वक अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन करना चाहता है। जिसके लिये शायद मानवीयता...

गौवंश की सेवा को पहुंचे, प्रधानमंत्री स्वराज ने माना आभार

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अपने ही वंशजों के भूभाग भारतवर्ष में अपनों की ही अज्ञानता बस, विगत 5 दशक से हो रही गौवंश की उपेक्षा, अन्याय, अत्याचार पर ध्यान आक्रसित करने स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने गौमाता को उनका मान, सम्मान, हक दिलाने एक वैचारिक अभियान छेड़ रखा है। पहली सफलता तब मिली जब गत वर्ष म.प्र. विधानसभा चुनावों मंे गौवंश संरक्षण सम्बर्धन का मुद्दा बना जिसे म.प्र. के वर्तमान मुख्यमंत्री ने अपने वचन पत्र में शामिल कर म.प्र. में सरकार बनते ही 1000 के लगभग गौशाला समूचे म.प्र. में खोलने का निर्णय लिया। जबकि चुनावों में हर पंचायत में गौशाला की बात कही गई थी। स्वयं के जल, जंगल, जमीन और स्वयं के मान, सम्मान से वंचित गौवंश पीढ़ी दर पीढ़ी मानव, समाज की सेवा कर त्याग तपस्या के बावजूद अपने हक से बेदखल सडकों पर मरने पर मजबूर है। हाल ही में स्वराज विचार के माध्यम से गौवंश संरक्षण सुनिश्चित करने स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने ब्रजधाम की यात्रा की जहां बीमार, घायल, अनाथ गौवंश का हाल देख व्यथित तो हुये मगर उनकी सेवा में जुटे लोगों को देख उन्हें आत्म सन्तोष भी मिला। मगर अब जब...

विभिन्न विभागों ने किया कार्यालय प्रांगण में वृक्षारोपण

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। शिवपुरी। आज 11 सितम्बर को शिवपुरी म.प्र. के जिला मुख्यालय पर विभिन्न विभागों द्वारा अपने अपने कार्यालय प्रांगण में वृक्षारोपण किया गया। जिसमें विभिन्न प्रजातियों के बड़े आकार के वृक्षों को रोपित किया गया। इस मौके पर कलेक्टर अनुग्रह पी, सीईओ जिला पंचायत एचपी वर्मा, एडीएम आरएस बालोदिया कार्यपालन यंत्री आरइएस राजीव पाण्डे, उद्यान सहायक संचालक राजपूत, एसडीएम अतेन्द्र सिंह गुर्जर, डिप्टी कलेक्टर अवस्थी, पीआईयूके डिवीजन प्रोजक्ट इंजीनियर सीपी वर्मा ने भी वृक्षारोपण किया।

मूल्य गंवाती सियासत से, संघर्ष की तैयारी

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। भाजपा की जननी कहलाने वाली प्रभावी संस्थापक सदस्यों में से एक कै. राजमाता विजयाराजे सिंधिया के संघर्ष की याद भाजपा का आन्दोलन देख ताजा हो र्गइं। जब उनकी पुत्री पूर्व मंत्री म.प्र. शासन श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया पार्टी के एक कार्यक्रम की खातिर सडक पर पैदल मार्च करती दिखी। हालांकि इस मौके पर उनके साथ बड़ी संख्या में स्थानीय नेता, विधायक व बड़ी संख्या में कार्यकत्र्ता मौजूद थे। मूल्य सिद्धान्तों की और जन समस्याओं की खातिर ऐसा नहीं कि सिंधिया परिवार का संघर्ष पहली मर्तवा सड़क पर दिख रहा हो। बल्कि इसकी नींव तो कै. राजमाता विजयाराजे सिंधिया 50 वर्ष पूर्व ही रख रख थी और संघर्ष की सियासत का ककहरा राजमाता ने अपने बच्चों में भी संस्कार स्वरूप डाला। परिणाम कै. श्रीमंत माधवराव सिंधिया, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री बसुन्धरा राजे सिंधिया, म.मप्र शासन की पूर्व मंत्री व विधायक श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया तथा काॅग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया के रूप में देखा जा सकता है। जिन्होंने मूल्य सिद्धान्त जनहित की खातिर ...

गुस्सा, ज्ञान बगारने से भारतवर्ष में मौजूद लोकतंत्र का भला होने वाला नहीं कड़े परिश्रम पुरूषार्थ और सामर्थ से मिल सकते है परिणाम

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह का दौर महान भारतवर्ष के लोकतंत्र में समृद्धि, खुशहाली के लिये चल पड़ा है जिसमें गुस्सा और ज्ञान बगारने की प्रवृति प्रबल होने से एक समृद्ध, मजबूत, खुशहाल लोकतंत्र का ककहरा बिगड़ना स्वभाविक है।   जबावदेह विहीन व्यवस्था में आज न तो स्पष्ट उत्तरदायित्वों के रहते प्रभावी जबावदेही नजर आती है न ही वह सपना साकार होता नजर आता जिसे सुबह उठते ही हर नागरिक देख अपने सुनहरे भविष्य की कल्पनाओं में डूब जाता है। जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में होना तो यह चाहिए कि प्रमाणिक जबावदेही के लिये पद अनुरूप यूनिक कोड नाम सहित मोहर हर निर्णय पर अंकित होना चाहिए। जिससे हर निर्णय की जबावदेही तत्काल तय हो सके। मगर दुर्भाग्य कि जिनकों राष्ट्र, ताकत, धन और कानून से पोषित करता है उनकी सैद्धान्तिक जबावदेही तो व्यवहारिक रूप से नजर आती है। मगर व्यवस्था के अंदर व्यवहारिक रूप से परिलक्षित नहीं दिखती। परिणाम कि कत्र्तव्य विमुख लोग और तंत्र को बढ़ावा तथा माननीय श्रीमानों को मनमाफिक ढंग से कत्र्तव्य निर्वहन के साथ व्यवस्था में भ्रष्टाचार की छूट देता है। यूं तो भ्रष्टाचारी रूप...

गौवंश देखने गौशाला पहुंचे व्ही.एस.भुल्ले मुख्य संयोजक स्वराज

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। किसी भी मानव के मन मस्तिष्क, आत्मा पर स्वयं की संस्कृति विरूद्ध, धुंध इतनी गहरी हो सकती है सटीक शिक्षा, संस्कारों के अभाव में जो गौवंश ही नहीं, मानव वंश पर कलंक साबित हो, किसी ने शायद ही सपने में सोचा हो, जिसे आज हम वर्तमान कृतज्ञता के रूप देखने मजबूर है। आज जब सड़कों पर कतारवद्ध बेमौत मरते हम गौवंश देखते है। ऐसे में किसी भी सभ्य सुसंस्कृत समाज का कलंकित होना स्वभाविक है जो मानव जगत के लिये दर्दनाक भी होना चाहिए और शर्मनाक भी।  मगर स्वयं स्वार्थ की धुंध में अंधे समाज को समझना होगा कि गौवंश ही है। जो मानव के अस्तित्व सभ्यता का मूल आधार है। खुशहाली, समृद्धि स्वस्थ हस्ट पुष्ट आर्थिक समृद्धि का मार्ग है। मगर समाज, सत्ता, शिक्षा की उपेक्षा का शिकार गौवंश तो उसका सबकुछ छिन जाने के बाद भी अपना वंश बचाने में कामयाब है। हमें देखना होगा कि मानव कब और कैसे अपने अस्तित्व आधार को बचा अपनी आने वाली नस्लों का भविष्य स्वस्थ, समृद्ध, खुशहाल बना पाता है। समृद्ध, स्वस्थ शिक्षा का अभियान छेड़ने वाले स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने गौवंश समृद्धि, सुरक्षा को लेकर फिलह...

म.प्र. नये दल की संभावनायें प्रबल प्रमुख राजनैतिक के चाल, चरित्र, नीति परिणामों से सांसत में लोग

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  अगर आजादी के 70 वर्ष की सत्ता सियासत के परिणामों पर नजर डाले तो कुछ क्षेत्र में अनवरत विकास हुआ है। खासकर इन्प्रास्टक्चर निर्माण क्षेत्र में। मगर जिन क्षेत्रों में विकास होना था उन क्षेत्रों में प्रत्याशित विकास नहीं हो सका जिसका दंश आज समूचा म.प्र. से झेलने पर मजबूर है। मगर विगत 25 वर्षो में लोकतांत्रित संस्थाओं में लोकतांत्रिक संस्थाओं शिक्षा, स्वास्थ, पेयजल, सुरक्षा, सेवा क्षेत्र का जो सत्यानाश हुआ है वह किसी से छिपा नही। कारण शिक्षित, सेवाभावी समझदार स्वाभिमानी लोगों का सियासत में मार्ग अवरूद्ध हो बंद हो जाना। जिसके चलते अब न तो प्राथमिक, माध्यमिक हायर सैंकण्डरी सहित उच्च शिक्षा के क्षेत्र से लीडरशिप के रास्तों का बंद हो जाना। तो दूसरी ओर बाहुबल, धन बल सहित चाटूकारी, चापलूसी का शिकार हो सियासत का सत्ता भोगी, अर्थभोगी हो जाना रहा। विगत 25 वर्षो में सियासत सत्ता की दुनिया में जो एक से बढ़कर एक कीर्तिमान स्थापित हुये उसने भले ही युवा पीढ़ी के आत्म सम्मान को जाग्रत न होने दिया हो और अति स्वार्थी नागरिकों का आत्म सम्मान निस्तानाबूत हो चुका...

गर्व के छड़ से गुजरा देश भारतवर्ष में चन्द्रयान कामयाब प्रयास परिणाम नहीं, सिद्धता का आधार होते है इसरों को बधाई, साधूवाद

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। भारतवर्ष के चन्द्रयान की अनुभूति से साबित हो गया कि हम सामर्थवान होने के साथ सिद्धस्थ भी है अपने-अपने हुनर पारंगत, परिणाम के अगले चरण से पूर्व अल्प विराम ने जिस सिद्धता के बीज इस महान भूभाग पर अंकुरित किये है। उनके सार्थक होने व व्यापक अनुमानों की अनुभूति में भले ही हमें समय लगे। मगर जितने चन्दा, तारों को चमकाने की हवा, पानी, खाद सवा करोड़ के देश में चन्द्रयान से मिला है आज इस महान अनुभूति और भारतवर्ष के भविष्य को इसे समझने की जरूरत है। इसलिये बधाई के पात्र है हमारे वैज्ञानिक, इसरों और सत्ता तथा मीडिया जिनके सम्मलित प्रयासों से आज भारतवर्ष गर्व मेहसूस कर सार्थक प्रमाणिक भविष्य नहीं सोच के साथ अपने सपनों को गढ़ने तैयार हो रहा है।  जय स्वराज

सत्य से विमुख सियासत, दमन को तैयार संकट में गांधी का सत्य सिंगार के सच से बौखलाई सियासत सड़क पर

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   म.प्र. में टूटती जन, जनप्रतिनिधि, तंत्र की आशा-आकांक्षाआंें के बीच सियासी दखल को लेकर सत्ता में जिस तरह का घमासान मचा है उसका अंदाजा एक मंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से कहे गये सच से लगाया जा सकता है। वहीं काॅग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के सत्य के समर्थन में आने के बाद तथा म.प्र. के मुख्यमंत्री को सबकी बात सुनने और समाधान की बात सार्वजनिक होने के मामले में भले ही फिलहाल कोई सवाल न हो। मगर जिस तरह की चर्चा म.प्र. में अनुसूचित जनजाति से वास्ता रखने वाले मंत्री के खिलाफ कार्यवाही और काॅग्रेस आलाकमान को रिपोर्ट भेजने की चर्चा सरगर्म है तथा जिस तरह से सत्य का दमन करने सड़क पर सियासी विरोध देखने में आया उसे देखकर कहा जा सकता है कि गांधी जी की पार्टी में गांधी विचार का विरोध सत्ता के लिये इस स्तर तक जा सकता है यह साफ है।  ज्ञात हो कि विगत महीनों से नई सरकार में जिस तरह ट्रांसपर पोस्टिंग और सरकार संचालन की चर्चायें आम हुई है। उन्होंने सत्य की सियासत को स्वतः ही कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। अगर सियासी पंडितों की माने तो उनका कहना साफ ह...

गलत शिक्षा, अर्थनीत का परिणाम, 72 रूपये का एक डाॅलर

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। मजबूत समृद्ध भारत की बात न तो तब सुनी गई न ही आज हम समझने तैयार है। चाणक्य का अर्थ शास्त्र और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज का सपना अगर इस भूभाग पर कारगार हुआ होता तो न तो हमें 5 मिलियन की अर्थव्यवस्था का सपना देखना पड़ता न ही बिगड़ती अर्थ व्यवस्था सहित निवेश के लिये किसी और का मुंह ताकना पड़ता।  अगर लिखी गई पन्तियों किवदन्तियों की माने तो चाणक्य का अर्थ शास्त्र, न्याय दण्ड आधारित या राज व्यवस्था से जुड़ा था और एक हद तक व्यापार उत्पादन स्वच्छंद होने के साथ राज नियंत्रित था। मगर आजाद भारत में आर्थिक न्याय, समृद्धि का शास्त्र ग्राम स्वराज के माध्यम से महात्मा गांधी ने अपने विचारों में बुना, उसे तत्कालीन सत्तासीनों ने तत्कालिक जरूरतों को ध्यान में रख दरकिनार करते हुये बड़े-बड़े उघोग, बांध व मिली जुली सामाजिक अर्थ व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश के भौतिक विकास की ओर कारवां चल पड़ा। दूध, कृषि, कम्प्यूटर निवेश, उदारीकरण की क्रान्ति का परिणाम यह हुआ कि कुछ ही वर्षो में एक रूपये बराबर का डाॅलर 72 के पार हो गया। यह अलग बात है कि गिरते रूपये को सम्हालने यूपी...

श्री गणेश आरती के साथ भक्तों को किया प्रसाद वितरण श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया शामिल हुई आरती में

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। शिवपुरी। मध्यप्रदेश शासन की पूर्व मंत्री एवं शिवपुरी विधायक श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया ने कमलागंज में गणेश पंडाल पहुंच श्री गणेश जी की आरती पूजा और उपस्थित भक्तोंजनो को किया प्रसाद वितरण। इस मौके पर गणेश पंडाल में बड़ी तादाद में भक्तजन उपस्थित थे। ज्ञात हो कि इससे पूर्व कमलागंज में निर्माणाधीन भगवान श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर व नवग्रह मंदिर के संबंध में लोगों से जानकारी ली। ज्ञात हो कि करोड़ों की लागत से निर्माणाधीन भगवान श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर की शुरुआत मंत्री रहते श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया ने कराई थी। इस मौके पर उनके साथ भाजपा के कई बड़े नेता भी मौजूद थे।

बैवजह धमाके बैलगाम डीजे और सोशल मीडिया पर फैक न्यूज पुलिस की मजबूरी या अलाली के चलते दुष्वार हुआ शांत जीवन

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह की अराजकता धर्म, संस्कृति, अधिकारों की आड़ में पुलिस की बैवसी अर्कमण्यता के चलते आज गांव, गली, मौहल्ला, नगर मे पैर पसार रही है उससे अब आम शांत प्रिय जीवन, खासकर मानव का जीव, जंतु इत्यादि का जीवन संकट में नजर आ रहा है। अगर यथार्थ पर नजर डाले तो अपना दर्द दुखी इन्सान, जबावदेह लोगों को भी उनकी अर्कमण्यता, अलाली के चलते वयां नहीं कर सकता। कारण शिकायतकर्ता की समस्या का निदान करने के बजाये समस्या बताने वाले के ही गले निदान का फारमूला लगा कत्र्तव्य निर्वहन की मिशाल प्रस्तुत करना है। जो वोट और सत्ता के लिये अन्धे संगठन, सत्ताओं को समझने वाली बात होना चाहिए। अगर यहीं हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब अराजकता किसी भी सभ्य समाज में सर चढ़कर बोले और कत्र्तव्यनिष्ठ तमाशा देख, एक न एक दिन उसी समस्या सागर में सराबोर नजर आये तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।