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Showing posts from April, 2020

सीमित, संकुचित सोच और स्वार्थी संस्कार न तो हमारी विरासत है और न ही स्वभाव समृद्ध जीवन ने सत्ता, समाज को कभी निराश नहीं किया

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। निश्चित ही मेरा यह भाव न तो कोई खबरचियों के लिये खबर है और न ही समृद्ध, खुशहाल जीवन के लिये सबकुछ दाव लगा स्वयं की नैसर्गिक कृज्ञता को कलंकित करने वालों के लिये ज्ञान की बात। हो सकता है कि उन्हें यह बेकार की बात लगे जो जीवन में आज की समृद्ध, सुसंस्कृत पीढी के लिये अछूत हो चुका आध्यात्म लगे। अगर यों कहें कि 150 वर्षो के कालखण्ड में हमारी निष्ठापूर्ण, त्याग-तपस्या अनगिनत कुर्बानियां और हमारी उस महान शिक्षा, संस्कृति, संस्कारों का कचूमर निकल चुका है जिस पर कभी समूची मानव सभ्यता को नाज था तो कोई अति संयोक्ति नहीं होगी। यह कटु कडवा सच है कि सैकडो वर्षो से समृद्ध जीवन ने सत्ता, समाज और सरकारों को बहुत कुछ दिया और वह क्रम सेवा कल्याण के नाम आज भी जारी है, तो फिर सवाल यह उठता है कि आखिर सत्तायें, समाज इतना निष्ठुर स्वार्थी कैसे हो सकता है और उनका स्वभाव इतना अव्यवहारिक असंवेदनशील कैसे हो सकता है। अगर वाक्य में ही हमारे बीच यह भाव है तो इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि आज मानव ही नहीं समूचा जीव-जगत बडे संकट में है। कौन नहीं जानता कि विश्व के...

सील, सप्लाई और सोशल डिस्टेंस को सुनिश्चित करती सत्तायें

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सीमाऐं सील, दवा, राशन, पेयजल सप्लाई के बाद सोशल डिस्टेंस के साथ रोजगार सुनिश्चित करने और मजदूरी के दौरान जीवन को सुरक्षित करने मास्क तथा हाथों को सेनेट्राइज व्यवस्था के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार की शुरूआत कोरोना से युद्ध में कितनी सार्थक होगी भविष्य के गर्भ में है। मगर म.प्र. में हालिया तौर पर एक लाख से अधिक कार्य सृजन किये गये है रोजगार के लिये तथा म.प्र. के ही शिवपुरी जिले में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में मनरेगा के तहत शुरू हुये आवास निर्माण, जल संरक्षण, मास्क और सेनेट्राइज के निर्माण के रोजगार इस बात के गवाह है कि कोरोना के कहर के बीच भीषण गर्मी में राशन के अलावा नगद राशि की भी प्रमाणिक सप्लाई सतत रहने वाली है, तो वहीं जिस तरह से म.प्र. के ही शिवपुरी जिले में पेयजल को लेकर पीएचई विभाग ने सोशल डिस्टेंस के साथ पेयजल प्राप्त करने की युति लगाई है वह भी दूरांचल ग्रामों खासकर हेण्डपम्पों से पेयजल व्यवस्था में दूर की कोणी साबित होने वाली है। देखना होगा कि भीषण गर्मी का दौर शुरू होने वाला है और लाॅकडाउन में भी 3 मई को क्या निर्णय होगा फिलहाल भव...

शराब बंदी के लिये बेहतर वक्त म.प्र. में कोताई पड सकती है भारी

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से विगत एक माह से शराब की दुकानों पर ताला पडा है यह कोरोना की जंग में सरकार का सराहनीय कदम है। अगर सरकार इसे शराबबंदी का अस्त्र बना म.प्र. की आम गरीब जनता को इससे मुक्ति दिलाना चाहती तो उससे बेहतर और कोई वक्त नहीं हो सकता। बेहतर हो कि सरकार राजस्व के लालच को छोड शराब से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान पर होने वाले खर्च दवा और शराब से होने वाले अपराध, एक्सीडेंट, परिवार उत्पीडन जैसी जघन्य घटनाओं की समीक्षा करे, तो उस खर्च की तुलना में शराब से प्राप्त होने वाला राजस्व ऊंट के मुंह में जीरे के समान होगा।  तो वहीं दूसरी ओर इन्दौर में बढते कोरोना के मामले और वहां फैले वायरस की गंभीरता को देखते हुये तथा भोपाल में आये दिन मिलते संक्रमितों को ध्यान में रखते हुये म.प्र. सरकार को बडी ही सजगता से काम लेना होगा। क्योंकि जिस ग्लोबल दौर में हम जीने की आदत डाल चुके है उस दौर में म.प्र. के किसी भी जिले से भोपाल, इन्दौर की कनेक्टविटी न तो दूर है और न ही असहज। वहीं जहां इन्दौर एक तरह से म.प्र. की आर्थिक राजधानी है तो वहीं दूसरी ओर भोपाल शासन की राजधानी ह...

कृतज्ञ मानवता को कलंकित करती, कत्र्तव्य विमुख सेवा प्रमाण-प्रमाणिकता से जूझती आशा-आकांक्षायें सील, सप्लाई, सोशल डिस्टेंस के अचूक अस्त्र से होगा कोरोना का खात्मा

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। आज जब विश्व भर में कोरोना से दो लाख से अधिक मौत और तीस लाख के करीब संक्रमित लोगों की संख्या है वहीं भारतवर्ष में कोरोना संक्रमित लोगों का आंकडा साढे उनत्तीस हजार के पार जा पहुंचा है। जिसमें सर्वाधिक चिन्ता का विषय तो उन पांच राज्यों में है जहां महाराष्ट्र में संक्रमितों की संख्या साढे आठ हजार, गुजरात में साढे तीन हजार, दिल्ली में इक्तीस सौ, राजस्थान में बाईस सौ और मध्यप्रदेश में इक्कीस सौ के पार है यह इस बात का खुला प्रमाण है कि सत्तायें, सरकारें और मौजूद संसाधन कोरोना के कहर के आगे नाकाफी साबित हो रहे है। ऐसे में जरूरत है समूची मानव, सभ्यता के साथ स्वयं अपने प्रियजन, परिवारजन, समाजजन और राष्ट्र-जन के बहुमूल्य जीवन को बचा उनके जीवन को सुरक्षित, संरक्षित करने की है। जिसके लिये हमें व्यक्ति से व्यक्ति, परिवार से परिवार, समाज से समाज और राष्ट्र से राष्ट्र को सील, सप्लाई, सोशल डिस्टेंस का संदेश देना होगा और अपने-अपने नैसर्गिक स्वभाव अनुरूप अपने-अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्यों का निर्वहन प्रमाण-प्रमाणिकता के साथ करना होगा।  आज की स्थिाति में हर ...

कृतज्ञता को कलंकित करता कत्र्तव्य निर्वहन

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कोरोना से भीषण जंग के बीच अगर सप्लाई लाईन में लीकेज होने या फिर संसाधनों की हेराफेरी की खबरों का चर्चा में आना सही है तो कृतज्ञता को कलंकित करने वाला और कोई दूसरा कत्र्तव्य निर्वहन कोरोना के कहर के बीच हो नहीं सकता। आज जब समूची मानव सभ्यता अपने जीवन के भविष्य को लेकर चिन्तित है और कई जगह वह अपनी जान गंवाने पर मजबूर। ऐसे में कुछ लोगों की कत्र्तव्य विमुखता अपनी जान जोखिम डालकर अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन में जुटे लोगों को हतो-उत्साहित करने वाली है। सत्ताओं का राजधर्म ही नहीं उसकी जबावदेही है कि अज्ञानता बस जिस विनाशक संस्कृति को आत्मसात कर जो लोग जीवन के लक्ष्य को लेकर भ्रमित है उन्हें सद मार्ग दिखायें। हालांकि आज की संस्कृति में मौजूद सत्ताओं के लिये यह समझा पाना निश्चित रूप से एक कठिन कार्य है। जहां धन और एश्वर्य को ही लोगों ने समृद्ध, खुशहाल जीवन का उचित मार्ग समझ रखा है। मगर आज जब समूची मानव संस्कृति ही खतरें में है और मानव जीवन संकट में। ऐसे में उन स्वार्थी कत्र्तव्य विमुख लोगों को समझने वाली बात यह होनी चाहिए कि जिस सुखद जीवन के लि...

सर्वकल्याण की बडी बाधा स्वार्थवत महत्वकांक्षी सत्तायें और स्वार्थवत सलाहकार सत्य की अस्वीकार्यता, संपदा लूट का आचरण, सशक्त, समृद्ध, राष्ट्र निर्माण पर, कलंक क्या नैसर्गिक संपदा की लूट और सत्ताओं का अहंकार उसका नैसर्गिक स्वभाव है ? विनाश की ओर बढती मानव सभ्यता

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कभी महाभारत से पूर्व स्वयं प्रभु भगवान कृष्ण ने और लंका दहन से पूर्व स्वयं प्रभु राम ने आग्रह पूर्ण तरीके से अहंकारी, स्वार्थी संपदा चोर लूट करने वाली सत्ता, शासकों को सत्य, धर्म और मानवीय कत्र्तव्यों के बारे में खूब समझाया। मगर अहंकारी सत्ता शासकों ने अपने स्वार्थी चापलूस, चाटूकार, धूर्त महत्वकांक्षी सहयोगी, शुभचिन्तकों की सलाह के आगे उनकी एक नहीं सुनी। यहां तक कि वाणों की अंतिम सैया पर पडे अपने अंतिम सफर के दौरान भीष्म-पितामह जैसे महान बलशाली, वीर योद्धा की सर्वकल्याणकारी बात अहंकारी, स्वार्थी महत्वकांक्षी दुर्योधन ने नहीं सुनी, आज परिणाम हमारे सामने। आज ठीक उसी प्रकार जब विश्व की मानव सभ्यता विभिन्न क्षेत्रों की बौद्धिक संपदा तथा सत्य को अस्वीकार्य कर संपदा लूट के साथ अपने चाटूकार, चापलूस, बौद्धिक चोरों के अहम, अहंकार में डूब मानव सभ्यता यहां तक आ पहुंची है और आज भी सत्ताओं में बने रहने सभा, संस्था, बौद्धिक संपदा के संरक्षण के सिद्धान्त की अनदेखी कर उसके तिरस्कार में जुटी है। ऐसे में मानव सभ्यता के बीच समृद्ध परिणामों की कल्पना सृष्टि सिद...

कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने समूह द्वारा संचालित दुकानों का उद्घाटन किया दुकानों पर मिल रहे हैं मास्क और साबुन

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। मध्यप्रदेश डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा कॉटन के मास्क तैयार किए जा रहे हैं और इन मास्क को आम जनों को उपलब्ध कराया जा रहा है। समूहों द्वारा स्टॉल लगाकर मास्क और साबुन बेचे जा रहे हैं। शुक्रवार को कलेक्टर श्रीमती अनुग्रहा पी और पुलिस अधीक्षक श्री राजेश सिंह चंदेल ने स्व सहायता समूह द्वारा संचालित इन मिनी शॉप का उद्घाटन किया। महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्होंने मास्क भी खरीदे और कहा कि दुकानों पर सैनिटाइजर भी रखें और मास्क और साबुन खरीदने के लिए आने वाले लोगों को भी उपयोग करने की सलाह दें।  कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने ग्राम पंचायत रातौर के ग्राम पंचायत भवन में संचालित जय करौली माता समूह और ग्राम पंचायत नोहरी कला में मां लखेश्वरी समूह और शिवपुरी शहरी क्षेत्र में फिजिकल थाना के पास लक्ष्मी स्व सहायता समूह की दुकान का उद्घाटन किया। उन्होंने महिलाओं से चर्चा कर कहा कि घर घर जाकर भी मास्क वितरण किया जा सकता है। उन्होंने कहा दुकान पर आने वाले लोगों को मास्क,  सैनिटाइजर का उपयोग करने और बार-बार साबुन ...

लडाई लम्बी हो तो इंतजाम भी पुख्ता हो कोरोना को परास्त करने बदलना होगा जीवन निर्वहन और सरोकारों का तरीका

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है कभी-कभी व्यक्ति, परिवार समाज, राज्य और राष्ट्र के सरोकार जीवन निर्वहन में इतने स्वार्थवत महत्वकांक्षी हो जाते है या उनके संस्कार सृष्टि, प्रकृति सिद्धान्त स्वभाव के विरूद्ध एक ऐसी नई संस्कृति अज्ञानता बस इजात कर लेते है जो समूचे मानव जीवन को कंटकग्रस्त और कलंकित करने काफी होता है और सभाओं में शास्त्रार्थ ऐसा कि आंखों से न देखने वाला प्राकृतिक सुन्दरता का विराट वर्णन तो कुछ न सुन पाने वाला व्यक्ति अपनी श्रवण शक्ति का प्रदर्शन इस तरह दर्शाता है कि उससे बेहतर श्रवण शक्ति शायद ही और किसी के पास हो। जब शास्त्रार्थपूर्ण सभाओं में महत्वकांक्षी स्वार्थवत लोग झूठ बोलने और चुप रहने में संकोच न करें और अपने मानव स्वभाव के विरूद्ध आचरण करने लगे ऐसे में कल्पना की जा सकती है कि सृष्टि सृजन में होने वाला निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन कितना सिद्ध रहने वाला है। जबकि हर विधा सिद्धान्त, संस्कृति, संस्कार में सर्वकल्याण का भाव सर्वोच्च रहा है। आज उसी मार्ग पर जब कुछ राष्ट्र-भक्तों की टोली मानवता की सेवा को निकली है जिन्हें निश्चित ही सफलता और सिद्धता मिल...

ग्राम सभा में नहीं हो सका शास्त्रार्थ ई-स्वराज और स्वामित्व से सुधार के संकेत

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। यूं तो पंचायतीराज दिवस पर तकनीकी के माध्यम से सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रख कोरोना की हार सुनिश्चित करने देश प्रधान अपने ग्राम प्रधानों से मुखाबित थे जिसमें जहां गांव प्रधानों ने देश प्रधान के साथ कोरोना की महामारी से निवटने ग्राम पंचायत स्तर पर किये गये प्रयासों को सांझा किया, तो वहीं देश प्रधान ने भी कोरोना महामारी की गंभीरता को देखते हुये दो गज की दूरी के सिद्धान्त का पालन करने का आग्रह किया और समस्त देशवासियों तक इस सूत्र को पहुंचाने का आव्हान किया। देश प्रधान ने निश्चित ही प्रयोग के तौर पर देश के 6 राज्यों में शुरू होने वाली माहती योजना के प्रयास का उल्लेख किया, तो दूसरी ओर उन्होंने ई-ग्राम स्वराज के पोर्टल पर सभी जानकारी और ग्राम विकास की स्थिति जानने-पहचानने का अच्छा अवसर बताया। वहीं स्वामित्व योजना को गांवों में होने वाले विकास और वाद-विवाद निवटारे का माध्यम बताया।  देश को उम्मीद थी कि भारत की आत्मा कहे जाने वाले गांवों के प्रधानों के साथ देश के प्रधान के सामने देश की दशा-दिशा को लेकर शास्त्रार्थ होगा। मगर समय की कमी ने ऐसा ह...

स्वराज के साथी श्री आर.एन. सिंह नही रहे देर रात एम्स दिल्ली में ली अंतिम सांस जीवन निर्वहन में सर्वकल्याण के भाव के साथ निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन की मिशाल थे श्री सिंह - व्ही.एस.भुल्ले

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धमेन्द्र गुर्जर विलेज टाइम्स समाचार सेवा। स्वराज के साथी श्री आर.एन. सिंह अब नहीं रहे, उन्होंने देर रात उनकी लम्बी बीमारी से संघर्ष करते हुये इस जीवन में अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन को अलविदा कह दिया। उनके निधन से उनके शहर शिवपुरी में शोक की लहर दौड गई है। ज्ञात हो कि रायपुर से इंजीनियरिंग में गोल्डमेडलिस्ट स्व. श्री आर.एन. सिंह बतौर उपयंत्री जल संसाधन विभाग में अपनी सेवायें शुरू की और कुछ वर्ष पूर्व ही वह अधीक्षण यंत्री पद से सेवा निवृत हुये थे। सेवा, सर्वकल्यारण के रचनात्मक कार्यो में बढ चढकर भूमिका निभाने वाले श्री सिंह की रूचि जनजागरण के साथ गौपालन जल संरक्षण, स्वच्छता से जुडे कार्यो में गहरी थी उनके कार्यो को देखते हुये बतौर इंजीनियर उन्हें स्वराज के मुख्य संयोजक द्वारा कुछ वर्ष पूर्व सम्मानित भी किया गया था। स्वराज के विचारों में और निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन में आस्था रखने वाले श्री सिंह के निधन पर स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस. भुल्ले और स्वराज के साथियों ने गहरा दुःख व्यक्त किया है। स्वराज के मुख्य संयोजक ने कहा कि जीवन निर्वहन के दौरान सर्वकल्याण के भाव के साथ...

जीवन में स्वीकार्य प्रमाणिक समाधान स्वतः सिद्ध होता है सभा का प्रमाणिक शास्त्रार्थ हो, सिद्धस्त का पैमाना स्वराज से ही सिद्ध होगा स्वस्थ, सुरक्षित, समृद्ध जीवन मांग पूर्ति में मुद्रा, मौजूद संसाधनों का समन्वय देगा स्वस्थ समृद्ध अर्थव्यवस्था कोरोना की भयाभयता में सत्य स्वीकारने का समय सत्ता, सरकार, सियासत, समाज, परिवार, व्यक्ति अगर आज भी न समझे तो कंटक ग्रस्त जीवन से मुक्ति असंभव अज्ञान, अहम, अहंकार, स्वार्थ छोड, लौटना ही होगा सृष्टि सृजन में जीवन के नैसर्गिक सिद्धान्त पर

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अगर आज भी हम निहित स्वार्थ अहम, अहंकार अज्ञानता बस आध्यात्म (व्यवहारिक) ज्ञान-विज्ञान को नकार सैद्धान्तिक विज्ञान में उलझ उसे आस्था धर्म से जोड उसका तिरस्कार करने में जुटे रहे तो आज जिस तरह से कोरोना जैसी महामारी, सारी आर्थिक समृद्धि तकनीक, विज्ञान की शक्ति को नकार जिस तरह से निढाल हुये मानव को अपने आगोस में लें निगल रही है या जिन्हें संक्रमित कर उनके जीवन को संकट डाल रही है। ऐसे में बडे-बडे शक्तिशाली नामचीन लोग ही नहीं महाशक्तियां आम गरीब सभी भयाक्रान्त हो सहमें हुये है और कोरोना के कहर के बीच अपना बहुमूल्य जीवन गंवाने पर बैवस मजबूर है। जहां तक स्वस्थ समृद्ध जीवन और जीवन उपयोगी समृद्ध अर्थव्यवस्था की बात है तो यह स्वराज के रास्ते ही संभव है जिसके लिये सृृष्टि सृजन में जीवन के नैसर्गिक सिद्धान्त अनुसार मांग पूर्ति के बीच मुद्रा और मौजूद संसाधनों का बेहतर समन्वय स्थापित करना अहम होगा। क्योंकि जीवन में नैसर्गिक स्वभाव अनुरूप अनुशासित जीवन का सिद्धान्त हर जीवन में उसका अपना स्वभाव है और प्रमाणिक सभाओं में शास्त्रार्थ हर समस्या का समाधान। आज के ज...

राष्ट्रीय आपदा में कोताही पर कार्यवाही सुनिश्चित हो और सेवा में जुटे लोगों का हो सम्मान कोरोना के कहर के बीच मंत्रीमंडल का गठन

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस सिद्धत्त से देश के प्रधानमंत्री और उनकी टीम देश के 130 करोड लोगों को पूरी संवेदनशीलता के साथ कोरोना के कहर से बचाने में जुटी है तो वहीं दूसरी ओर कई जगह सरकार, शासन में कत्र्तव्य निष्ठा को लेकर सवाल भी उठ रहे है। जिस पर प्रधानमंत्री और उनकी समूची टीम को संज्ञान अवश्य लेना चाहिए। जब देश में कोरोना के चलते राष्ट्रीय आपदा के हालात है ऐसे में कुछ प्रदेश, जिलों में न समझपूर्ण निर्णय सारी मेहनत पर पानी फेर सकते है। एक ओर जहां म.प्र. में संक्रमितों का आंकडा डेढ हजार के पार पहुंच गया है, तो वहीं कुछ नये जिलों में संक्रमण की आमद ने म.प्र. को सकते में डाल दिया है। तो वहीं विश्व में कोरोना का शिकार हो एक लाख अधिक लोग अपनी जान गवां चुके ह। मगर इस सब वेखबर कोरोना से निवटने अपने पांच सदस्यीय मंत्रीमंडल का गठन कर नगरीय निकायों और छात्रों की एडमीशन को लेकर पहली बैठक में निर्णय लिये है। मगर समूचा प्रदेश अभी भी उन आंकडों से अनभिज्ञ है कि कोरोना से निवटने कितने संसाधन प्रदेश में चिकित्सीय सुविधा या चिकित्सा सेवा में जुटे लोगों को कोरोना से बचाव के संसाधन उ...

सील सप्लाई सोशल डिस्टेंस का भट्टा बैठालते, न-समझ जरा-सी चूक पड सकती है जान पर भारी आजादी की छूट पर उमडा जन सैलाब

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कोरोना के कहर के बीच जब सारी उम्मीद माननीय, श्रीमानों पर टिकी हो ऐसे में 25 दिन के लाॅकडाउन पूर्ण और 13 दिन के शेष लाॅकडाउन के बीच अचानक सडकों पर उमडा लोगों का सैलाब और हाथों-हाथ सेवा करने उठे बाजारों के शटर तथा कुछ महिलाओं के हुजूम ने साबित कर दिया कि आध्यात्म को तो पहले ही विज्ञान, विकास की चकाचैंद में हम भुला चुके है। मगर अब तो विज्ञान, विकास के पुरोद्धा सुपर पावर महाशक्तियां भी कोरोना के चलते चारों खाने चित पडे है। हजारों की तादाद में होती मौतों और लाखों की संख्या संक्रमित लोगों के होने के बावजूद तथा प्रधानमंत्रत्री, मुख्यमंत्रियों तथा विधा, विद्ववानों के बार-बार आग्रह समझाइस के बावजूद भी अगर लोग मानने तैयार नहीं कि कोरोना कितनी भयाभय बीमारी है जिसकी विश्व में कोई दवा मौजूद नहीं सिर्फ सोशल डिस्टेंस और घरों में रहकर कोरोना का सामना करने के अलावा। मौत के मुहाने पर खडी मानव सभ्यता को आज भी अपनी आजादी ज्यादा अहम और कोरोना का भय बेकार जान पडता है। कारण सिर्फ आम मानव की आजादी तक सीमित होता तो अलग बात थी कि अगर यह खबर दुरूस्त है कि सप्लाई लाईन ...

बड़ी उम्मीद है इस महान राष्ट्र को तप, त्याग, तपस्या और सन्यास से यथार्थ में आस्था है तो पुरूषार्थ तथा सामर्थ सिद्ध होना चाहिए धन्य होता है महान भारतवर्ष

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अगर तप, त्याग, तपस्या, निष्ठा का प्रदर्शन यथार्थ है तो आस्था पुरूषार्थ के सामर्थ की सिद्धता हमारी प्रमाणिकता होनी चाहिए और यह संभव है कोई असंभव कार्य नहीं। लोकतांत्रिक, व्यवहारिक, व्यवस्था में कुछ सियासी सवाल देश के अन्दर और बाहर यक्ष हो सकते है सत्ताओं की कृतज्ञता को लेकर। वहीं दलों की प्रतिबद्धता के चलते सत्ताओं की अपनी कुछ मजबूरी, बैवसी, स्वस्थ, समृद्ध, खुशहाल जीवन को लेकर हो सकती है। मगर कहते है कि देश से बडा कोई दल नहीं होता। इसलिये राष्ट्र-धर्म का तकाजा होता है कि राजधर्म का पालन हो। अगर आज हमारे जीवन निर्वहन का आधार संवैधानिक और व्यवस्थागत लोकतंात्रिक है तो कानून का पालन हर कीमत पर कडाई से होना चाहिए। यहीं सत्ताओं का राष्ट्र-धर्म होना चाहिए। मगर जिस तरह से सत्तायें मानव जीवन को स्वस्थ, समृद्ध, खुशहाल बनाने संघर्षरत है। ऐसे में उन्हें समझना होगा कि देश के सामने दलों के प्रति प्रतिबद्धता के मार्ग पर शास्त्रार्थ के मूलमंत्र से विमुख हुये बगैर विधा-विद्ववानों का सानिध्य और शास्त्रार्थ का उपयोग होना चाहिए। क्योंकि जिनकी त्याग-तपस्या राष्ट्र...

-अपील- -सभी प्रियजन सज्जन निश्चित रूप से लाॅकडाउन के दूसरे भाग को, सम्पूर्ण सफलता की ओर

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-सभी प्रियजन सज्जन निश्चित रूप से लाॅकडाउन के दूसरे भाग को, सम्पूर्ण सफलता की ओर ले जाने के लिये कटिबद्ध है क्योंकि हमें कोरोना को समूल नष्ट कर अपनी सिद्धता सिद्ध करनी है। क्योंकि हम मानव, जीवन में निष्ठ है, खुद्धार, ईमानदार, अनुशासित है और यह हमारा मानवीय स्वभाव भी है। इसमें न तो किसी प्रियजन को और न ही स्वयं को, कोई संदेह होना चाहिए।  -हम बहुमूल्य मानवीय जीवन में प्रमाणिक शास्त्रार्थ, आध्यात्म, विज्ञान और स्व-अनुशासन की जीती-जागती मिशाल है।  -क्योंकि हमारे महान पूर्वजों ने जीवन में कडी त्याग-तपस्या, कडा संघर्ष अनगिनत कुर्बानी दें असहनीय कष्ट सहकर हमें समृद्ध, स्वस्थ, खुशहाल जीवन की बहुमूल्य विरासत सौंपी है और यह हमारी जबावदेही भी है कि हम मौजूद अथवा आने वाली पीढी का जीवन स्वस्थ, समृद्ध, खुशहाल बनाने में अपना निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन कर स्वयं के साथ मौजूद पीढी व आने वाली पीढी का जीवन सार्थक सफल बना उसे अपने प्रमाणिक पुरूषार्थ से सिद्ध करें। -कोरोना से हम न तो घबरायें और न ही परेशान हो। क्योंकि हम सब एक दूसरे की मदद में तत्पर है और हमारे अपने ही कत्र्तव्यनिष्ठ लोग ...

सील, सोशल डिस्टेंस के बीच सप्लाई चेन को लेकर बढते सवाल बेहतर समन्वय, प्रबंधन ही दे सकता है समाधान

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सीमाऐं सील और देश भर में अलग-अलग कोरोना सेन्टर की स्थापना और शोध के अलावा सोशल डिस्टेंसिंग के माध्यम से जो जंग कोरोना से शुरू हुई है निश्चित ही जीत की संभावनाऐं प्रबल है। मगर सप्लाई चेन खासकर राशन, दवा, पानी और रोजगार को लेकर जो सवाल सामने आ रहे है वह कुछ प्रदेशों में काफी डरावने लगते है। खासकर जिस तरह से म.प्र. में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ रही है और समूचा म.प्र. पहले लाॅकडाउन के बाद दूसरे लाॅकडाउन में प्रवेश कर चुका है। ऐसे में सप्लाई लाईन के कमजोर होने और माॅनिरिटरिंग के साथ राज्य और जिला स्तर पर समन्वय के आभाव के चलते कोरोना के बचाव के संसाधन जैसे मास्क, सेनेट्राईजर और सफाई कार्य में या अन्य सामग्री लेते देते वक्त हेंड गिलेब्स को लेकर सवाल है उनके निदान के जबाव जब सन्तोषजनक न हो जबकि ग्राीष्मकाल शुरू हो चुका है और पेयजल के लिये लोगों को दो-चार होना ही पडेगा। वहीं आम गरीब, मजदूर के सामने विगत दो महीने में रोजगार को लेकर आने वाली समस्या भी सामने है।  ये अलग बात है कि म.प्र. के मुख्यमंत्री के अनुसार वह चैबीसों घंटे अपनी टीम के साथ ...

13 वर्ष लगे समझने-समझाने में स्वराज के रत्नों की सराहना भय न्याय का पुत्र होता है (प्लेटों)

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कोरोना के कहर से आज जब समूची मानव सभ्यता भयाक्रान्त है और कोरोना का भय ऐसा कि जिन समाज के रत्नों को मानव जगत में सम्मान मिलना चाहिए था वहीं रत्न मानवीय स्वार्थ अहम, अहंकार का शिकार हो अपनों की ही उपेक्षा और दया के पात्र बन गये थे तो कुछ अपने नैसर्गिक कत्र्तव्य से विमुख हो धन लालसा में दिग भ्रमित हो मानवीय मजबूरी बैवसी को लूट अपने कत्र्तव्यों को कलंकित करने में लगे थे। आज जब समूची मानव सभ्यता पर कोरोना का कहर टूटा है तो ऐसे में कत्र्तव्यनिष्ठ या कत्र्तव्य विमुख सभी भयाक्रान्त है। लोगों को सूझ नहीं रहा कि वह अपने समृद्ध, खुशहाल, बहुमूल्य जीवन की रक्षा कैसे करें।  आज सारा धन अहम अहंकार महत्वकांक्षाऐं, स्वार्थ, सत्तायें चारों खाने चित पडी है। अगर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को छोड दें शायद ही और कोई मुख्यमंत्री हो जो जगह-जगह पहुंच प्रदेश की व्यवस्थाओं को स्वयं देख रहा हो। ये अलग बात है कि जब समाज के नव रत्नों को स्वराज के मुख्य संयोजक ने पहली मर्तवा 2007 में प्रतीकात्मक नाम कामधेुन वर्ग दें सम्मान करने का संकल्प लें, अपने सीमित...

श्राफ भोगता समृद्ध भूभाग गौ-पालन सिर्फ आध्यात्म नहीं बल्कि मानव जीवन से जुडा सिद्धान्तः व्यवहारिक विज्ञान है अमृतदायिनी के निस्वार्थ, निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन, त्याग तपस्या का तिरस्कार, अपमान पडा भारी जघन्य अन्याय, अत्याचार का दंश भोगती भ्रमित मानव सभ्यता

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कभी भारतवर्ष की मजबूत समृद्ध अर्थव्यवस्था का आधार रहा गौवंश देखते ही देखते भ्रमित मानवता के अहम, अहंकार महत्वकांक्षा स्वार्थपूर्ति और धन लालसा के चलते कभी इतना जघन्य अन्याय, अत्याचार झेलने पर मजबूर होगा किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा। गौवंश मजबूत अर्थव्यवस्था का सिर्फ आधार ही नहीं बल्कि स्वस्थ तंदुरूत मानव जीवन के लिये आध्यात्म न होकर एक सिद्धान्तः व्यवहारिक विज्ञान रहा है और आज भी हो सकता है। आज जब कोरोना या बैक्टिरिया वायरस जनित जानलेवा बीमारी से बचाव की पहली शर्त मानव शरीर में मजबूत प्रतिरोधक क्षमता नियमित साफ-सुथरा कीटाणु बैक्टिरिया वायरस मुक्त वातावरण और मानव शरीर है जिसे पौष्टिक भोजन और सेनेट्राईजेशन के लिये एन्टीवाइटिक्स की आवश्यकता है जो आज का विज्ञान और ज्ञान कहता है, तो निश्चित ही उस मानव सभ्यता भूभाग ने स्वयं ही समृद्ध, स्वस्थ जीवन का अधिकार आज खो दिया है और अपने ही कर्म कुकर्मो से अपना जीवन कन्टोको से भर लिया है। परिणाम कि कोरोना के कहर से समूची मानव सभ्यता कांप रही है और वह स्वस्थ समृद्ध भूभाग भी घरों में बंद हाल बेहाल है जो...

कोरोना के साथ अर्थव्यवस्था को भी बनाये रखना अहम आर्थिक महाशक्ति बनने में सार्थक सार्थी साबित होगा स्वराज

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अब जबकि लाॅकडाउन के खत्म होने की या और बढाये जाने की तारीख में कुछ ही घंटों का समय शेष है और देश के प्रधानमंत्री एक मर्तवा फिर से देश के 130 करोड लोगों को सम्बोधित करने वाले है। ऐसे में 9 हजार से अधिक संक्रमित लोगों की संख्या भी देश के सामने है। संभावना तो विश्व को भी अनेक है और अपने-अपने घरों में बंद रह सोशल डिस्टेंस का पालन करने वालों की अपनी-अपनी अपेक्षायें। ऐसे में देश के प्रधानमंत्री जिनके कंधों पर 130 करोड की आवाम का भार है और विश्व जगत को मदद की अपेक्षा। निश्चित ही भारतवर्ष अनादिकाल से एक ऐसा भूभाग रहा है जिसने न तो अपनी बौद्धिक संपदा और न ही संसाधनों से किसी को निराश किया है और हमारी महान संस्कृति में जीवन की दिनचर्या का भाग भी है कि अगर दरवाजे कोई जरूरतमंद आ जाये तो हम न तो उसे निराश करते है और न ही खाली हाथ छोडते है। मगर यह तो कल ही तय होगा कि जब प्रधानमंत्री देश को सम्बोधित करेंगें। मगर स्वराज का आग्रह है कि यशस्वी प्रधानमंत्री और दिन रात एक कर देश सेवा में जुटी उनकी टीम से कि कोरोना को पस्त करने सील सप्लाई सोशल डिस्टेंस के साथ आय ...

स्वराज का सील सप्लाई सोशल डिस्टेंस का फाॅरमूला कोरोना का परास्त कर मजबूत निर्माण अर्थव्यवस्था में होगा कारगार स्वार्थवत महत्वकांक्षा अहम, अहंकार ले डूबा समृद्ध, स्वस्थ, सशक्त जीवन और शास्त्रार्थ सत्ता का यथार्थ स्वरूप तय करने वक्त स्वराज के मूल में है खुशहाल जीवन और विश्व गुरू बनने आधार

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। स्वार्थवत अहम, अहंकारी सत्ताओं का प्राकृतिक सिद्धान्त से इतर आचरण व्यवहार यूं तो अनादिकाल से रहा है मगर उसकी भयाभयता इतनी विकराल होगी वह न तो आज की सत्ता और न ही सृष्टि, सृजन में अपना निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन करने वाले आम जीव-जगत और मानव ने सोचा होगा जिस कोरोना के महासंकट से सारे विश्व में जीवन को लेकर कोहराम मचा है उससे निदान के लिये सील सप्लाई सोशल डिस्टेंस जैसे कदम जो स्वराज का मूल आधार है कोरोना के खिलाफ भले ही आज एक अचूक अस्त्र और कारगार हथियार हो। मगर जो स्वराज का मूल है और जिसका सत्य आधार है शायद उससे हम मानव ही नहीं समूचे जीव-जगत को बचा पाये। मगर प्राकृतिक सिद्धान्त विरूद्ध जिस तरह से सत्तायें अपनी महत्वकांक्षा, अहंकार और स्वार्थो के चलते शास्त्रार्थ का अर्थात ज्ञान-विज्ञान का तिरस्कार करती रही है। परिणाम कि आज समृद्ध, स्वस्थ, खुशहाल जीवन घिसटने पर मजबूर है।  ये अलग बात है कि प्रकृति से प्राप्त अपने नैसर्गिक स्वभाव अनुरूप कोरोना से तो निवट उसे सील, सप्लाई, सोशल डिस्टेंस के माध्यम से निवटा ही लेंगे। मगर उसके पश्चात जीवन के लि...

सील, सप्लाई, सोशल डिस्टेंस साबित होंगे सार्थक राष्ट्र, राज्य, जिला, अनुभाग, नगर, कस्बा, गांव, गली को ध्यान में रख हो रणनीत तैयार सृष्टि, सृजन में स्वस्थ, समृद्ध, खुशहाल जीवन के लिये नैसर्गिक स्वभाव अनुरूप सामाजिक ज्ञान-विज्ञान ही सार्थक होता है स्वराज पर समय रहते संज्ञान लिया होता तो परिणाम कुछ और ही होते दया, प्रेम, त्याग, निष्ठापूर्ण, कत्र्तव्य निर्वहन ही स्वस्थ, समृद्ध जीवन का आधार है सत्य से विमुख जीवन की सार्थकता सृष्टि में अनादिकाल से संदिग्ध रही है

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। हो सकता है कि स्वभाव विपरीत स्वार्थवत महत्वकांक्षी जीवन अज्ञानता बस लोग इस सत्य को आज का आध्यात्म करार दें इसे ग्लोबल संस्कृति, संस्कारों में नकार सकते है व विलासितापूर्ण संस्कृति, शिक्षा, संस्कारों के मोहपास में फस अज्ञानता को ही ज्ञान-विज्ञान मान सकते है और सृष्टि के सिद्धान्त प्रकृति में हर जीव को प्राप्त है। उसके मूल स्वभाव पर भी सवाल खडे कर सत्य को नकार उसे अस्वीकार्य कर सकते है। मगर कहते है कि जब तक इस सृष्टि में किसी भी भूभाग पर जीवन है तब तक सत्य को न तो कभी अस्वीकार्य किया जा सकता है न ही उसे नकारा जा सकता है। क्योंकि मानव प्रकृति की एक ऐसी अनमोल कृति है जो समूचे जीव-जगत में और वह प्रकृति का श्रंृगार का संरक्षक भी है जो उसकी सुन्दरता के स्वरूप को दिव्य, भव्य, सार्थक सफल बनाने में एक स्वभाविक नैसर्गिक जीवन का अंग है। मगर दुर्भाग्य कि अनादिकाल से मानव की स्वार्थवत महत्वकांक्षायें और नैसर्गिक स्वभाव के विरूद्ध उसका व्यवहार ने आज उसे कहीं का नहीं छोडा है।  देखा जाये तो एक मात्र छोटे से वायरस कोरोना के आगे आज बडी-बडी महाशक्तियां और म...

एक्सन मोड में यूपी सरकार देश के सबसे बडे प्रदेश में बडी चुनौती

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से योगी सरकार कोरोना को लेकर एक्सन मोड में है और जिस तीव्र गति से कदम उठाये जा रहे है वह धीरे-धीरे समूचे देश की राज्य सरकारों को सीखने वाली बात होनी चाहिए। दुर्भाग्य कि जब राष्ट्रीय चैनलों पर चर्चा होती है तो दिल्ली, यूपी को छोड अन्य प्रदेशों के विजुअल बनने के बजाये आंकडो में समेट जाते है तो कभी-कभी अपनी विरासत अनुसार कई अहम कत्र्तव्य निर्वहन में पीछे छूट जाते है। मगर जिस तरह से यूपी की योगी सरकार ने कोरोना की भयाभयता को देखते हुये क्रमशः निर्णय लें कत्र्तव्य निर्वहन करने की जो मिशाल प्रस्तुत की है वह काबिले गौर है।  ये अलग बात है कि कुछ प्रदेशों में अभी भी सरकारें या उनके प्रयास इतने गंभीर नहीं जितने कि राजधर्म अनुसार होना चाहिए। बेहतर हो कि समय रहते सरकारें इसे हल्के में न लें जैसी कि संभावना प्रधानमंत्री अपने राष्ट्र संबोधन के दौरान राष्ट्र के नागरिकों को बताते रहे है। कुछ न सही तो कम से कम प्रधानमंत्री की मंशा का तो ख्याल रखा जाना चाहिए और जिस आवाम के मुखिया मुख्यमंत्री होते है उस राजधर्म का पालन अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य नि...

कोरोना से आरपार की जंग के बीच कुछ यक्ष सवाल राष्ट्र, राज्य, जिला, नगर, कस्बा, सीमाऐं सील के साथ सीमाओं पर सुरक्षा, सेनेटाईजर, स्क्रीनिंग मशीन के साथ परिवहन, दवा, खाद्य, चिकित्सीय सेवा, पेयजल, सुरक्षा सामग्री, मास्क, केप, हेण्ड गिलेब्स, सेनेटाईजर और व्यक्ति से व्यक्ति ही दूरी के सामाजिक सिद्धान्त अनुसार घरों में रहना तथा सहज कुशल, अकुशल श्रमिक शिक्षितों को अस्थाई रोजगार एवं जीवन निर्वहन की दिनचर्या के साथ देश, राज्य, जिलों में मौजूद एवं संभावित संक्रमित मरीज या ऐरिया की यथा स्थिति के अलावा आबादी से दूर राष्ट्र, राज्य, जिला स्तर पर त्रिस्तरीय कोरोना चिकित्सीय सेन्टर की स्थापना जिससे राष्ट्र, राज्य और जिलों में कोरोना से आरपार की जंग में सुनिश्चित जीत की रणनीति स्पष्ट हो सके

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जब से कोरोना के कदम समूचे विश्व और खासकर हमारे भारतवर्ष में पडे है तभी से मौजूद जीवन हाल बेहाल बना हुआ है। कारण अभी तक दुनिया में कोरोना को हराने कोई कारगार दवा का न होना ऐसे में व्यक्ति से व्यक्ति की दूरी अर्थात सामाजिक दूरी और लाॅकडाउन पालन के साथ अपने-अपने घरों के अंदर रहकर कोरोना जैसी महामारी से आरपार की जंग के लिये जुटना यह भारतवर्ष के लिये एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है। मगर जिस तरह का धैर्य और सामर्थ देश के 130 करोड लोगों ने हमारे प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दिखाया है वह काबिले गौर है।  ये अलग बात है कि समूचे देश में लाॅकडाउन के अभी 21 दिन पूरे नहीं हुये है इस बीच भारत सरकार ने तमाम क्षेत्रों में जरूरती रियासतों के साथ लगभग 1 लाख 70 हजार करोड रूपये की व्यवस्था विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कोरोना से लडने रख छोडी है। मगर इस सबके के बावजूद जबकि हमारी सुरक्षा में मुस्तैद पुलिस, स्वास्थय कर्मी, सफाई कर्मी सभी सिपाही बनकर सडकों और चिकित्सालयों में दिन रात राष्ट्र और अपने नागरिकों की जान की रक्षा के लिये बहुमूल्य योगदान दे रहे है। ऐसे पुरूषा...

कै सूर्य देव के क्रोध से होगा कोरोना का सत्यानाश..........तीरंदाज ?

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व्ही.एस.भुल्ले भैया- विश्व भर के गाडी भरे वैज्ञानिक और स्वास्थ सारथी विश्व स्वास्थ्य संगठन, म्हारे सुपर पावर, सुपर सोनिक सभी कोरोना के कहर से चारों खाने चित पडे है। कोई बचाव के उपाय तो कोई दवा के लिये लाॅकडाउन कर कोरोटाइंन करने में जुटा है। स्वयं के अस्तित्व को लेकर विश्व के लगभग 200 से अधिक देश कोरोना के कहर से त्राहीमाम-त्राहीमाम कर रहे है। ऐसे में थारा ये फाॅरमूला ही सूर्य देव के क्रोध से, होगा कोरोना का सत्यानाश। मने तो लागे भाया तने तो बावला हो लिया शै। साडा काडू सही बोल्या म्हारी आजादी के 70 वर्ष बाद भी मने जंगली का जंगली और जाहिल ही रहा। भाया आखिर सच क्या है ? हम श्रेष्ठ, स्वीकार्य, आध्यात्म, ज्ञान-विज्ञान, स्वस्थ, समृद्ध विरासत  के उत्तराधिकारी। कै वाक्य में ही जंगली जाहिल गंवार है।  भैये- तने तो वावला शै द्वपार, त्रेता, सत युग और कलयुग के साथ यह ग्लोबलकाल है जहां सृष्टि सिद्धान्त प्रकृति शिक्षा संस्कृति से ज्यादा ग्लोबल संस्कृति और विज्ञान का राज है। ऐसे में सत्य को खोज लोगों को समझा पाना मुश्किल ही नहीं नमुमकिन है। विश्व के 200 से अधिक राष्ट्र उनकी भिन्न-भिन्न संस...

-कोरोना से निर्णायक युद्ध के लिये भावी, प्रभावी कार्य योजना की दरकार -युद्ध स्तर पर तैयार हो कार्य योजना -सुरक्षा, स्वास्थ्य, रसद, पानी, परिवहन, दवा, रोजगार की उपलब्धता हो सुनिश्चित -एक्सन टीम मोड में रहे राष्ट्रीय प्रादेशिक जिला स्तरीय टीम, हाईटेक हो कंट्रौल रूम -राष्ट्रीय प्रादेशिक कोरोना सेन्टरों की आबादी से दूर हो स्थापना

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। राष्ट्रीय प्रादेशिक जिले की सीमाऐं सील होने के साथ सामाजिक दूरी घरों के अन्दर रहने के बावजूद फिलहाल आने वाले दिनों की भावी कार्य योजना की दरकार अब अहम हो चुकी है। हालांकि लाॅकडाउन समाप्त होने की तारीख और समीक्षा की तारीख सुनिश्चित है और देश का प्रदेश का जिलों का समूचा मैदानी अमला सडक पर जो सुरक्षा, स्वास्थ्य, दवा, पानी की व्यवस्था करने मे जुटा है। मगर लाॅकडाउन के बावजूद जिस तरह से कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या देश व विश्व के अन्य देशों में बढ रही है ऐसे में समय का तकाजा है कि हमारी सत्तायें, सरकार, भावी कार्य योजनाओं में समय रहते सुरक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, दवा, पानी, रोजगार को लेकर युद्ध स्तर पर जुट व्यवस्था बनाने की रणनीत तैयार कर लें। जिसके तहत राष्ट्रीय प्रादेशिक जिला स्तर पर सीमाऐं सील की समीक्षा के साथ आबादी से दूर त्रिस्तरीय कोरोना स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना तथा सुरक्षा, परिवहन, रसद, दवा, पानी, रोजगार सुनिश्चित करने जहां रसद दवा उत्पादन केन्द्रांे से संपर्क बना त्रिस्तरीय कंट्रोल रूमों को और सजग सक्रिय रखने अलग-अलग सेल स्थाप...

-प्रधानमंत्री जी की अपील कोरोना से जंग का सार्थक समाधान -9 मिनिट का ब्लैकआउट और दीया, टाॅर्च, मोबाईल की रोशनी बनेगा सार्थी और समाधान -स्वराज के शस्त्र से समाधान तक कि सार्थक जंग -कोरोना से स्वयं, स्वयं के परिवार, समाज, राष्ट्र की रक्षा ही हर नागरिक का धर्म और कत्र्तव्य -घरों में रहकर तथा एक-दूसरे से व्यक्तिगत दूरी बनाकर ही परास्त होगा कोरोना -आध्यात्म, ग्रंथ, कहावतें गूढ रहस्य नहीं यथार्थ, विज्ञान है

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। विश्व भर में पैर पसार चुकी कोरोना की भयाभयता और देश के 130 करोड नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिये चिन्तित। मगर बगैर विचलित हुये प्रधानमंत्री जिस तरह से देश लोगों को कोरोना की भयभयता से सुरक्षित निकाल ले जाने की कोशिश में जुटे है उसकी दृढता राष्ट्र को सम्बोधित करते हुये उनके शब्दों व धैर्यपूर्ण सम्बोधन में स्पष्ट देखी जा सकती है। जिस तरह से प्रधानमंत्री अपनी सरकार और राज्य सरकारों के साथ इस महामारी से पार पाने के लिये तीन-तीन मोर्चो पर एक साथ लोहा लेने में जुटे है जिसमें नागरिकों की सुरक्षा उनके स्वास्थ्य की देखभाल और लाॅकडाउन अर्थात अघोषित कफ्र्यू में जरूरतमंदों से आवश्यक आर्थिक मदद रसद, दवा इत्यादि से मोर्चे पर समूची मशीनरी को झौप रखा है वह ऐतिहासिक है। मगर जो लोग कोरोना से सीधे जंग लडने सडकों पर तैनात हो सुरक्षा स्वास्थ्य सेवा एवं रसद पानी के लिये जीजान से जुट अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन में जुटे है उन्हें 130 करोड का देश उनकी निष्ठाओं को कभी नहीं भुला सकता। आज जब कोरोना के खिलाफ ब्रहमास्त्र के रूप में व्यक्ति, नागरिक एक दूसरे स...