असुरी संस्कृति की जकड़ मे सत्ता , सियायत , अनाथ हुआ सेवा कल्याण , जबाबदेही हुई बैलगाम
नैसर्गिक निष्ठा पर सबाल , सत्यानाश के संकेत स्वस्वार्थ की पराकाष्ठा से बिलबिलाया जन और जीवन व्ही. एस. भुल्ले 30 जून 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. नैसर्गिक जीवन का तिरस्कार और जन - जीवन पर स्वस्वार्थ का र्निमम प्रहार इस बात के स्पष्ट संकेत है कि समृद्ध जीवन का सत्यानाश अब सुनिश्चित है इस तथ्य को लेकर सृजन मे समझ रखने बालो के बीच बादबिबाद हो सकता है मगर चर्चा का न होना मानव धर्म पर कलंक ही कहा जायेगा । बैसै भी इस तरह की चर्चा आज के सेवा कल्याण मे बैमानी के साथ आम चर्चा योग्य नही हो सकती क्योकि असुरी संस्कार संस्कृति मानव जीवन ही नही सत्ता सियासत मे इस हद तक सिद्ध हो रही है मानो सत्य को स्वीकारना और समाधान के लिये संघर्ष करना कोई जघन्य अपराध हो ऐसा ही वाक्या हाॅल ही मे चर्चाओ मे है म.प्र. के एक कैबीना मंत्री की आम समस्या के प्रति गांधी गिरी को सराहने की बजाये कुछ सबाल हुये है अगर चर्चाओ की माने तो 30 जून के किसी दैनिक समाचार पत्र मे संबाददाता के हवाले से खबर है कि मंत्री की गांधी गिरी से सूबे के मुखिया नाराज है और उनकी शिकायत देश सूबा सरकार से भी की गई ह...