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Showing posts from June, 2021

असुरी संस्कृति की जकड़ मे सत्ता , सियायत , अनाथ हुआ सेवा कल्याण , जबाबदेही हुई बैलगाम

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  नैसर्गिक निष्ठा पर सबाल , सत्यानाश के संकेत  स्वस्वार्थ की पराकाष्ठा से बिलबिलाया जन और जीवन  व्ही. एस. भुल्ले  30 जून 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  नैसर्गिक जीवन का तिरस्कार और जन - जीवन पर स्वस्वार्थ का र्निमम प्रहार इस बात के स्पष्ट संकेत है कि समृद्ध जीवन का सत्यानाश अब सुनिश्चित है इस तथ्य को लेकर सृजन मे समझ रखने बालो के बीच बादबिबाद हो सकता है मगर चर्चा का न होना मानव धर्म पर कलंक ही कहा जायेगा । बैसै भी इस तरह की चर्चा आज के सेवा कल्याण मे बैमानी के साथ आम चर्चा योग्य नही हो सकती क्योकि असुरी संस्कार संस्कृति मानव जीवन ही नही सत्ता सियासत मे इस हद तक सिद्ध हो रही है मानो सत्य को स्वीकारना और समाधान के लिये संघर्ष करना कोई जघन्य अपराध हो ऐसा ही वाक्या हाॅल ही मे चर्चाओ मे है म.प्र. के एक कैबीना मंत्री की आम समस्या के प्रति गांधी गिरी को सराहने की बजाये कुछ सबाल हुये है अगर चर्चाओ की माने तो 30 जून के किसी दैनिक समाचार पत्र मे संबाददाता के हवाले से खबर है कि मंत्री की गांधी गिरी से सूबे के मुखिया नाराज है और उनकी शिकायत देश सूबा सरकार से भी की गई ह...

बांटने डाटने के खेल में जमीर खोती जमुहरियत

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बर्तमान भबिष्य पर समृद्ध जीवन का संकट  व्ही. एस. भुल्ले  27 जून 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  सेवा के नाम हासिल समृद्धि पर धन बल के सहारे जमुहरियत मे कोई स्वयं को कितना ही बड़ा सम्राट , सिद्ध पुरूष क्यो न साबित कर ले मगर ऐसे लोगो का इतिहास गबाह है कि सच मायने मे आज न तो उनका कोई इतिहास है न ही उनका भबिष्य मगर लोग है कि आज भी परिणामो से कोई सीख लेने तैयार नही जिस तरह से सत्ता सियासत के खेल मे जमीर नीलाम होता है सेवा कल्याण विश्वास के नाम ऐसा नही उस खेल से आज जनता परिचित न हो वह सब जानती है और आज सत्ताये सियासत भी आम लोगो की बैबसी मजबूरी को बखूवी समझती है । मगर जो नाश आज जमुहरियत का देखा जा रहा है वह बड़ा ही शर्मनाक है । अगर हम बात म.प्र. की ही करे तो म.प्र. विगत 17-18 बर्षो से एक ही सत्ता है मगर समृद्ध जीवन के नाम उपलव्धि शून्य इसमे कोई शक नही कि आज अपन बर्तमान भबिष्य को लेकर तीन पीढ़िया कतार मे चिन्तित है मगर उनके सामने कोई ऐसा समाधान मौजूद नही जिस पर गर्व कर स्वयं गौरान्वित मेहसूस कर सके यू तो विधान अनुसार 5 बर्ष का समय किसी भी सिद्धि मे बहुत होता है मगर डाटने बांटने ...

स्व श्री बृजमोहन , स्व पार्वती उपाध्याय स्मृति वेक्सिनेशन शिविर संपन्न

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26 जून 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  महते हरनारायण पटेल की प्रेरणा से उपाध्याय परिवार सुभाषपुरा द्वारा माता पिता स्व श्री बृजमोहन स्व श्रीमती पार्वती की स्मृति में आयोजित विशाल वेक्सिनेशन शिविर ग्राम सुभाषपुरा में संपन्न शिविर का उद्घाटन पूर्व में वेक्सीनेटेड बुजुर्ग श्रीमती विमला सिकरवार ने आज के शिविर सबसे पहिले टीका लगवाने आई गांव की सबसे वरिष्ठ बुजुर्ग मातृशक्ति श्रीमती केशर बाई धाकड़ को पुष्पहार से स्वागत कर शिविर का शुभारंभ किया शिविर आयोजक पवन एवम् विवेक उपाध्याय ने  आज के शिविर में महिलाओं ने बड़ चढ़ कर हिस्सा लेना शिविर का सुखद पहलू बताया साथ ही   प्रशाशन्निक अधिकारी कर्मचारियों शिक्षक,पटवारी ,महिला बाल विकास अधिकारी,आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ,बीएलओ के सहयोग की प्रशंसा करते हुए वेक्सिन करोना से एक मात्र बचाव निरूपित करते हुए हर आदमी को वेक्सिन टीका लगवाने पर जोर देकर राष्ट्र धर्म निर्वहन की अपील शिविर समापन पर उपाध्याय परिवार के उपस्थित वरिष्ठ सदस्य भरत शर्मा ने शिविर की सफलता पर प्रसन्नता प्रकट कर जागुरूक ग्रामवासियों को धन्यवाद ज्ञापित कर ग्राम के तरुण शर्मा एवं...

सत्ताओ का शोषक क्रूर स्वार्थी चेहरा शर्मनाक

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  सेवा के नाम कोरोना योद्धाओ का  तिरस्कार   , घातक  व्ही. एस. भुल्ले  26 जून 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  म.प्र. - कोरोना कहर के दौरान जिस तरह से आयुष डाॅक्टरो , नर्सिगं स्टाफ ने अपनी जान जोखिम मे डालकर लोगो को कोरोना से बचाने का कार्य किया वह अधभुत ही नही सराहनीय कहा जायेगा जब अच्छे अच्छे पहुॅच बाले डाॅक्टर , प्रायवेट हाॅस्पीटल चलाने बाले लाखो की पगार व हजारो की प्रतिदिन प्रक्टिस करने बाले कोरोना के भय से प्रतिष्ठान पर ताला डाल घरो मे बैठ चुके थे तब इन्ही कोरोना योद्धाओ ने कम संसाधनो के बीच जान की परबाह न कर सच्ची स्वास्थ सेवा का परिचय दे सत्ता शासन की इज्जत बचाने का काम नेताओ और सरकारो को कलंक से बचाने का कार्य इन्ही योद्धाओ ने किया । ये अलग बात है कि शासकीय सेवा मे लोग निश्चित तौर पर जीवन के बैहतर भरण पोषण के लिये आते है फिर चाहै वह सुरक्षा से जुड़ा कार्य हो या फिर नागरिको की सुरक्षा से लेकर सीमाओ की सुरक्षा का कार्य हो मगर यह भी सत्य है कि जान जोखिम मे डालने का कार्य सच्चे सेवक जनसेवा मे विश्वास करने बाले ही करते है जैसा कि इन आयुष डाॅक्टर नर...

सपना साकार देख में खुश हुॅ , सत्य के मार्ग पर संघर्ष ही जीवन का सही अर्थ है

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सियासत मे मेरी कोई दिलचस्वी नही , न थी और न रहेगी जन सेवा कल्याण ही मेरा अन्तिम लक्ष्य - श्री मंत ज्योतिरादित्य सिंधिया  दिवगंत आत्माओ को दी श्रद्धांजलि , कोरोना से साबधानी , सजकता का दिया संदेश  वीरेन्द्र शर्मा  22 जून 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  सेवा कल्याण को समर्पित सिंधिया ने आज मेडीकल काॅलेज निरीक्षण उपरान्त खबर नबीसो के बीच विलेज टाइम्स के सबाल पर कहा कि सियासत के मेरे जीवन कोई मायने नही , न कभी थे और न ही रहने बाले मेरा अन्तिम लक्षय जनसेवा था और है । निश्चित ही आज मे जनसेवा के सपने शुद्ध पेयजल , सिक्स लेन सड़क , एन टी पी सी काॅलेज , प्रशिक्षण केन्द्र , अत्यआधुनिक मेडीकल काॅलेज , और 100 करोड़ की लागत से सबसे पहले निर्मित नोहरी बिद्युत स्टेशन को मूर्त रूप मे देख में खुश हुॅ मगर सपने साकार करने के लिये जीवन मे कड़े संघर्ष की आवश्यता होती है जिसके लिये तत्कालीन केन्द्रीय स्वास्थ मंत्री गुलाम नबी आजाद , हमारे राष्ट्र्ीय अघ्यक्ष जे. पी. लडढा , मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान , मेरी बुआ श्री मंत यसोधरा राजे सिंधिया और सभी मीडिया बन्धु और नागरिक सभी का मे आभार व्य...

टच , गजब टेक्नोलाॅजी की गिरफत में जिंदगी .......? तीरंदाज

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हजारो बर्ष बाद भी फारमूला कारगार  व्ही. एस. भुल्ले  19 जून 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  भैया- टच का कमाल देख म्हारा तो मगज सूख रहा है मनेे तो समझ ही नही पा रहा कि म्हारे आजाद भारत बर्ष मे हजारो बर्ष बाद भी टच का बैजोड़ कमाल हो रिया शै । आॅख दर्शन दिग्दर्शन के बाद अब म्हारा तो सारा मगज टच के कमाल पर ही खर्च हो रहा है कुन्नु कुनाल तो काड़ू महान बन रिया शै , आखिर सच क्या है ? सच बोल्यू तो भाया जरा से टच से अब तो सारा जहान दिख रहा है ।  भैयै - मुये बाबले कै थारे को मालूम कोणी जरा से प्रभु राम के चरण टच से माता अहिल्लया का उदधार हो लिया था बैचारी गिलहरी का पूरा का पूरा कुल ही तर लिया था जिसके निशान आज भी देखे जा सकते है प्रभु कृष्ण के स्पर्श मात्र से कूबड़ी अम्मा भी सीधी हो ली थी । असल मे म्हारे को लागे थारा ज्ञान अधुरा है इसलिये ही थारा ध्यान टच पर टिका है ।  भैया - मने तो टच स्क्र्रीन की बात कर रहा उस अलाउददीन के चिराग पर थारे से विमर्श कर रहा हुॅ जिसके बैहतर इस्तमाल से सारे कूड़े करकट तर रहै है और हर रोज नये नये पहुॅचे हुये महानुभाव प्रकट हो रहै है काड़ू बोल्या गर तने ...

गजब की गाॅधीगिरी मे जुटे मंत्री जी

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कभी नाले , नाली वाथरूम सफाई तो कभी कोरोना काल मे अस्पताल से लेकर शहर की घुमाई और अब खम्बे पर चढ़ घौसलो की सफाई  वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 21 जून 2021  जिस तरह से विगत बर्षो से मंत्री बनने के बाद म.प्र. शासन के उर्जा मंत्री प्रधुमन सिंह तोमर अपनी गाॅधी गिरी से लोगो का ध्यान अपनी ओर आकृषित कर अपने मातहतो सहित शासकीय सेवको को कर्तव्य निष्ठा का संदेश देने मे लगे है वह काबिले गौर होना चाहिए जिस तरह से मंत्री बनने के साथ ही उन्होने औचक निरीक्षण लोगो के बीच जाना उन्हे सुनना उनका समाधान कराने के साथ स्वयं सेवा कर संदेश देने की शुरूआत स्वयं से की इससे मातहतो ने कितनी सीख ली यह अलग बात है मगर समुचे कोरोनाकाल मे जो जीवटता उन्होने सड़क पर उतर दिखाई वह किसी छिपी नही कई मर्तवा उन्है ऐसे लोगो के आक्रोश का भी सामना करना पढ़ा जिसके लिये शायद ही उन्है दोषी ठहराया जा सके फिर वह बात चाहै मंच की रही हो या फिर बैठक की उन्होने गांधी गिरी का ही सहारा लिया । आज भी उनका मिजाज सेवा से जुदा नही जिसके लिये उन्होने अपना पर्सनल मोबाइल नम्बर तक शिकायत नम्बर बना दिया जिस पर समाधान के ...

श्रेष्ठतम संस्कारो की जीवट यात्रा और सेवा कल्याण का सच

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अधभुत क्षमता , सामर्थ का सियासी संघर्ष  मंहगा पानी , हैदराबाद सी सड़क , खनन से माफिया राज का अंत  वीरेन्द्र शर्मा  20 जून 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  ग्वालियर - अगर हम बात करे सेवा कल्याण की तो गर्व की बात है कि हमारे पास एक ऐसा सियासी चेहरा आज की सियासत मे मौजूद है जिसके अधभुत सामर्थ क्षमताओ की सेवा कल्याण के क्षैत्र मे गर्व से चर्चा कर सकते है उन संस्कारो की अधभुत छटा भी हम देख सकते जिन्है जीवन मे श्रेष्ठतम कहा जाता है और वह नाम श्रीमंत यसोधरा राजे सिंधिया जो फिलहाॅल म.प्र. सरकार मे कैबीनेट मंत्री है । और शिवपुरी जिले की प्रभारी मंत्री है । उनका जन्म दिन है वह दीर्घ आयु के साथ यसश्वी हो कहते अगर अहम मौको पर सार्थक जनसेवा मे समर्पित कृतज्ञा की चर्चा न हो तो यह उस शख्सियत के की कृतज्ञता के साथ अन्याय होगा । अगर एक पत्रकार होने के नाते मुझे ठीक से याद है तो आज से 25 बर्ष पूर्व जब अपनी माॅ और भाजपा की संस्थापक सदस्य भाजपा की जननी कहै जाने बाली कै. श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया की स्थापित सेवा कल्याण की विरासत को सजोने सबारने उनका हाथ बटाने सियासत मे कदम रखा ...

सृजन मे कल्याण के लिये वीर सेना तैयार जल्द शुरू होगा सजृन अभियान

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मुकेश तिवारी  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  अभावग्रस्त बचपन उजड़ती जवानी और अनाथ बुड़ापे का सहारा ढूढ़ने वीर सेना करेगी कूच अन्तिम छोर से शुरूआत का मंसूवा लिये वीरसेना संयोजक ने कहा है कि झूठ फरेब , स्वार्थ पूर्ण जीवन को रोकने आज भी हमने अपने अपनो को नही जगाया तो आने बाले समय मे बचपन जबानी न ही बुढ़ापा ठीक से कटने बाला है उन्होने कहा कि काम कठिन है मगर असंम्भव बिलकुल भी नही । उन्होने के कहा जीवन को सफल बनाने मे स्वार्थवत लोग बांधा बनेगे आपके मसले अपने बतायेगे समाधान के बड़े बड़े प्रचार और तथा आश्वासन देते नजर आयेगे मगर सर्बकल्याणकारी जीवन बिचलित न हो इसके के साबधानी आवश्यक है और वह साबधानी अपने अपनो के बीच रखना है जिससे मानव जीवन स्वार्थवत लोगो के भ्रमजाल मे न फस अपना निष्ठापूर्ण कर्तव्य निर्वहन कर अपने बच्चो का जीवन समृद्ध खुशहाॅल बना सके । और पुरूषार्थ के मौजूद संपदा सामर्थ का उपयोग कल्याण मे कर सके ।    

अघोषित सम्राजवाद से संघर्ष करते , जीवन सरोकार पुरूषार्थ विहीन श्रेष्ठता सामर्थ हुआ तार तार

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सेवा ,शिक्षा , स्वास्थ ,पशुधन , के बाद अब रोजगार का समाचार लज्जाजनक  वीरेन्द्र शर्मा  16 जून 2021 - अगर यो कहै कि आजाद भारत सत्ता सौपानो से निकलने बाली खबरे नये नये कीर्तिमान स्थापित कर अनोखा इतिहास रच स्वयं को धन्य सिद्ध करने के कुचक्र मे फस चुकी है तो कोई अतिसंयोक्ति किसी को शायद नही होनी चाहिए क्योकि जमाना ही कुछ ऐसा है क्योकि सेवा कल्याण की मिटटी पर जिस तरह से कफन दफन की संस्कृति हाॅवी हो चुकी है उसे 21 बी सदी के अगर श्रेष्ठतम प्रबन्धनो मे से एक प्रबन्धन घोषित किया जाये तो यही सत्ता सौपानो की सबसे बढ़ी उपलब्धि आने बाले भबिष्य मे कही जायेगी । कारण लोककल्याण के नाम सम्राज्यवादी आचार व्यवहार की जीवन सरोकारो के बीच स्वीकार्यता और श्रेष्ठजन सामर्थशालियो का पुरूषार्थ विहीन सामर्थ अब यह उनकी बैबसी भी हो सकती है या फिर जनधन के करोड़ो अरबो उलीच लोकतांत्रिक व्यवस्था की कमजोरी का लाभ उठा भोले भाले बैबस अभाव ग्रस्त लोगो के सामने स्वयं को सबसे बड़ा सेवक सिद्ध करने का हाईटैक प्रबंधन हो जिसके मूल धार के प्रवाह मे क्या संस्कृति , संस्कार , जीवन सरोकार सपने सभी दम तोड़ते नजर आते है सत्ताओ के ल...

सुझाव , सहमति , असहमति सभी चारो खाने चित

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ग्रहमंत्री की सटीक मंत्रणा भी हुई दरकिनार  वीरेन्द्र शर्मा  14 जून 2021 - मामला म.प्र. सरकार की पिछली कैबीनेट मीटिंग का है जहाॅ जल संसाधन के प्रस्तावो पर तर्क सहित म.प्र. शासन के ग्रहमंत्री ने तल्ख मगर तर्क पूर्ण टिप्पणी कर सबको सकते मे डाल दिया प्रस्तुत प्रस्तावो पर ग्रहमंत्री का तर्क था की पहले मुख्य कार्य को स्वीकृती दी जाये फिर अन्य कार्यो की क्योकि मुख्य कार्य पहले न होने से एक तो योजनाओ की लागत बढ़ती है तो दूसरी ओर मुख्य कार्य के अधर मे लटक जाने से कई मर्तवा सरकार पैसा समय दोनो ही बर्बाद होते है मगर अन्दर की खबर सही है तो ग्रह मंत्री के मशिविरे को दरकिनार कर उन प्रस्तावो को स्वीकृती दी गयी जिस पर ग्रहमंत्री ने सबाल खड़े किये थे शायद खिन्न ग्रह मंत्री अधूरी बैठक छोड़कर जाते रहै अब सच क्या है यह सरकार और उसके सलाहकार ही जाने मगर खबरो के बाजार यह खबर आजकल बड़े चटकारे लेकर चल रही है ।  

कमेटी के कमाल से सुधरेगे हालात ,तीसरी लहर को लेकर मुख्यमंत्री की चिंता

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सुपरसोनिक सलाहकारो से इतर आम जन से भी सलाह  वीरेन्द्र शर्मा  14 जून 2021 - आपदा के समय जिस प्रबन्धन के सहारे कोरोना काबू आने पर जो आभार का दौर शुरू हुआ लगता है वह थमने का नाम ही नही ले रहा सभी अपने अपने हिसाब से अपनी अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने मे लगे है क्योकि काम जो इतना बड़ा हुआ है हालाकि मरने बालो का तो शायद दुर्भाग्य ही था जो या तो संसाधनो या चिकित्सा के अभाव मे अपनो को बिलखता छोड़ चल बसे और अपने सुनहरे सपनो को पूरा करने से पहले ही जान की बाजी हार गये चिकित्सा सेवा के नाम बैहिसाब लुटे पिटो का क्या और जिन्होने अपने के ही बीच 5 धना 10 मे लिया या फिर मुॅह मांगा दाम राशन बाले को दिया यह भी उस नागरिक का सौभाग्य ही जिसने बिजली की भूल भुलईया मे भीषण गर्मी को अपने सर से निकाल लिया वरना लोग कहते आपदा के प्रबन्धन को नही माना बहरहाॅल अब मुख्यमंत्री तीसरी लहर को लेकर कुछ ज्यादा ही संजीदा है सो उन्होने ऐलान कर दिया कि प्रबन्धन कमेटिया यथावत रहैगी और अगर किसी के पास कोई ऐसी सलाह है तो वह सीधे भी उन्है बता सकते है । मानना न मानना शासन का काम क्योकि क्रायसेस मैनिजमेंट है ही कुछ ऐसा जिसके चलत...

बड़े सूबे मे बड़ी उठापटक , तैबर हुये धरासायी यही सियासी बैबसी ने किया है , सियासत का बंटाढार

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वीरेन्द्र शर्मा  14 जून 2021 - आज यहां हम बात कर रहे हे देश के सबसे बड़े सूबे उ.प्र. की जहां सियासी उठापटक का खेल खुलयाम चल रहा है ये सही है कि कुछ दिनो पहले तक जिस तरह से सत्ता के तैबर परवान चढ़े निश्चित ही उसमे सर्बकल्याण छिपा था मगर अब जिस तरह से तेबर ढीले हुये है उसमे किस किस का कल्याण छिपा है यह तो 2022 के चुनाव परिणाम ही तय करेगे । मगर जहां तक सत्ता स्वभाव की बात है तो जिस तरह सत्ताओ मे सम्राज्य बढ़ने की चाहत और जो तौर तरकीव रही है आज की सियासत भले ही उससे जुदा हो मगर जो शासक अपना अपना सम्राज्य बढ़ने मे कामयाब रहै अनुभव बताता है कि तरीका स्वीकार्य और सर्बकल्याण का वह भाव ही रहा जिस पर छोटे छोटे शासको सहमति या फिर सत्ता के आगे की बैबसी रही हो चूकि तब राजतंत्र हुआ करते थे और राजा का हुकूम हर प्रजा के सरमाथे मगर व्यवस्था लोकतांत्रिक है जनतंत्र है और जनता के वोट निर्धारण करते है कि शासक कौन होगा और जनअकांक्षाओ की पूर्ति सहित शासन कौन करेगा । शायद इसलिये ही संबिधान निर्माताओ ने केन्द्र और राज्य सरकारो की व्यवस्था की और उनके क्या क्या अधिकार होगे इसकी व्यवस्था की मगर सर्बकल्याण के नाम ...

आधार हुआ अपंग , कैसै हो नेतृत्व निर्माण

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सियासी जंग का अखाड़ा बना वैचारिक आधार  च्ही.एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म. प्र.  दल पार्टी संगठन आज की सियासत मे जो भी हो लगभग सभी का व्यक्तिगत या वैचारिक आधार अब सियासी अखाड़ा बन चुका है जहां सर्बकल्याण , जनकल्याण , जनसेवा से इतर सियासी जंग , सत्ता के लिये जंग शायद अब अन्तिम लक्ष्य रह गया है । कारण अपंग आधार के चलते अब मजबूत नेतृत्व के सभी रास्ते बन्द हो चुके है जिसमे धन बाहुबल ने तो मानो सेवा कल्याण के दफन कफन तक की तैयारी रख छोड़ी है । गाॅब गली से लेकर महाविद्यालयो मे गहरी जड़े जमा चुकी मौजूद सियासत जिसने मानो स्वस्थ नेतृत्व को अपंग बनाने का अभियान सा चला रखा है । शिक्षित समझदार युवा नेतृत्वो के नाम जिस तरह से स्वार्थवत सियासत परवान चढ़ी है लगता है अब उसके परिणाम आना शुरू हो चुके है जो सेवा कल्याण की सियासत के लिये किसी भी सभ्य समाज मे दर्दनाक ही नही शर्मनाक ही कहै जायेगे । वैचारिक आधार के नाम जिस तरह से आय दिन विचारो की होली जलाई जाती है वह किसी से छिपी नही है जिस तरह से गाॅब गली मे स्वार्थवत सियासत अब एक से बढ़कर एक नजीरे प्रस्तुत कर रही है वह भी शायद किसी से छिपी...

भविष्य में होने वाली कोरोना बीमारी से बचाव हेतु वेक्सीन लगवाना बहुत जरूरी - रनसिंह परमार।

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शिवपुरी जिले के सतनवाड़ा में सुरु हुआ जिले का  तीसरा आईसोलेसन केंद्र । सतनवाडा ,शिवपुरी । कोरोना महामारी से बचाव हेतु प्रदेश में पिछले एक महीने से चलाए जा रहे किल कोरोना अभियान के तहत आज आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र सतनवाडा में जिले के तीसरे आइसोलेशन केंद्र का शुभारंभ शिवपुरी ब्लॉक के अनुविभागीय अधिकारी एवं एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रनसिंह परमार जी के हाथों संयुक्त रुप से हुआ। उद्घाटन समारोह के कार्यक्रम में आइसोलेशन केंद्र में भर्ती आदिवासी महिला पुरुषों को संबोधित करते हुए अनुविभागीय अधिकारी श्री बाजपेई जी ने कहा कि हम सब ने देखा है कि कोरोना बीमारी की दूसरी लहर के दौरान क्या स्थिति आ रही थी एक तरफ जहां अस्पतालों में बेड मिलना मुश्किल था , वहीं दूसरी ओर मरीजों को ऑक्सीजन मिलना मुश्किल हो गया था इसलिए भविष्य में अगर हमें इस तरह की मुश्किलों से बचना है तो गांव गांव में सभी लोगों को अनिवार्य रूप से वैक्सीन लगवाना होगा उन्होंने एकता परिषद का धन्यवाद देते हुए कहा कि कि संगठन के माध्यम से शिवपुरी जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में कोरोना महामारी के दौर में बहुत  सराहनीय क...

रमषा कोविड -19 आईसोलेशन सेन्टर से स्वस्थ हुये जितेन्द्र ,चद्रभान

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  सी. एच. एम. ओ अर्जुन लाल ने पुष्पगुच्छ दे किया बिदा  नीरज जाटव  म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा  म.प्र. शिवपुरी 11 जून गत दिनो शिवपुरी जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारी डाॅ. अर्जुन लाल ने रमषा कोबिड आइसोशन मे स्वास्थ लाभ ले स्वस्थ हुये जितेन्द्र एवं चद्रभान नाम के दो व्यक्तियो को पुष्प गुच्छ भेट कर सेन्टर से बिदा किया साथ ही उन्है समझाइस देते हुये कहा कि अभी कुछ दिन और आप लोगो को घर के अन्दर ही रहना है तथा मास्क लगाना है । इस मौके सी.एच.एम.ओ. डाॅ. अर्जुन लाल शर्मा के अलावा सेन्टर प्रभारी आयुष चिकित्सा अधिकारी डाॅ शोभा सहित अन्य लोग उपस्थित थे । इस मौके पर स्वस्थ हुये दोनो मरीजो ने सभी चिकित्सीय सेवा भोजन व्यवस्था की सेन्टर मेे सेवा दे रहै स्टाफ और चिकित्सको का अभार व्यक्त किया ।

कोरोना खात्मे से पहले ही खेल शुरू ............तीरंदाज ?

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लोक हुआ डाउन , जनधन उलीचते भाई लोग   व्ही. एस. भुल्ले  भैया - ये क्या ? ये तो खात्मे से पहले ही खेल शुरू हो लिया और तीसरी संभावित लहर के मददेनजर नई तैयारियो का दौर शुरू हो लिया , आखिर थारे को क्या लागे ? कि किलर कोरोना का मामला सुलट लिया , मगर सच बोल्यू तो म्हारे  कानो सुना आॅखो से देखा एक चैनल बाला बोल रिया था कि अभी भी खतरा टला नही , आखिर मने कै समझु कै दुकान सजाना है या अभी भी फटटा ही लगाना और हर रोज उठाना है ।  भैयै - अरे बाबले थारे जैसै मद समझ बालो की ही तो परेशानी है मने तो बोल्यू कै अभी कुछ दिन और सर्ब खा फिर अपना साजो सामान सड़क पर सजा टी वी बाला बाबू सही बोल्या है कि खतरा अभी टला नही है फिर खतरा सरकार का हो या फिर कोरोना का ।  भैया - तो फिर अच्छे दिन कब आयेगे और बैधड़क बाजारो मे मुॅह खोल कब घूम और बोल पायेगे और कब तक कोरोना महान के रहते साॅसल डिस्टेन्थ का पालन करना है और बार बार हाथ धो हाथ साफ करते रहना है और फिर कब होगा सबका साथ सबका विकास हालिया खबर तो खबर नबीसो के बीच से जनधन का उलीचा लगा खुद की छबि चमकाने बालो के कैम्प से आ रही है और गर्मी के मौस...

आस्था से विमुख श्रेष्ठजनो का महाप्रयाण मानवता पर कलंक

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सर्बकल्याण मे न काॅफी साबित होता सारा सामर्थ , संसाधन  अब तो सजग पुरूषार्थ ही बचा सकता है यह सुन्दर कयानात  व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  जिस दुरगति शिकार हमारी महान सभ्यता , संस्कृति , संस्कार आज है यह न तो हमारा प्रारव्ध है न ही भबिष्य हां इसे बर्तमान अवश्य कहा जा सकता है जिसके लिये शायद ही मौजूद पीढ़ी को दोषी होने के बाबजूद भी दोषी आने बाले भबिष्य मे ठहराया जा सके क्योकि आने बाले समय मे वही श्रेष्ठजन दोषी करार दिये जायेगे जो आज अपनी अपनी आस्था से विमुख हो मानवता के इस नाश को अपनी खुली आंखो से देख रहै है । मुझे यह लिखते वक्त कतई अफसोस नही की मे भी एक ऐसे मानव समाज का भाग हुॅ जिसके गैर पुरूषार्थी होने पर आने बाली नस्ले हंॅसने बाली है मातम इसलिये वह नही मनायेगी क्योकि हमारी कृतज्ञता ही कलंकित कही जाने बाली है । अगर हम इतिहास के शुरूआती पन्नो को पलटे तो पायेगे की हूड़ तुर्क चंगेज मुगल अॅग्रजो से लेकर आजादी ही नही आजादी के कई दशको तक हमारी संस्कृति , परिवारिक संस्कार हमारी सभ्यता की रक्षा करते रहै मगर सूचना क्रांती के अनियंत्रित दौर ग्लोवल इण्डिया की चाहत न...

बांझ विधवा पुरूषार्थ की जड़ मे फलित भ्रष्टाचार

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  पहचान खोती संस्थाये , निषफल होता सामर्थ  व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  कहते है सामर्थ कितना ही बड़ा प्रभावी क्यो न हो अगर उसे बांझ विधवा पुरूषार्थ का सानिग्ध प्राप्त हो जाये वह भी फलित भ्रष्टाचार के रहते निषफल हो जाता है इतना ही नही वह स्थापित संस्थाओ के आगे भी उनकी पहचान का संकट खड़ा करने मे सक्षम सिद्ध होता है । अब ऐसे मे कैसै हो सेवा और कैसै हो सर्बकल्याण अपने आप मे स्वयं एक सबाल बन जाता है मगर यह सच है कि ऐसा ही हो रहा है और अभी तक सत्ता सौपानो मे इसका बजूद कायम है । ये अलग बात है कि अब भ्रटाचान न तो समाच संस्था सत्ताओ मे कोई विषय रहा न ही उसकी चर्चा के कोई मायने रहै क्योकि फलित भ्रटाचार पर प्रभावी नकेल का अभाव इस बात का प्रमाण है कि जीवन मे भ्रटाचार कोई बिषय ही नही । क्योकि अब न तो सत्ता के अन्दर भ्रटाचार मापने को कोई यंत्र है न ही संस्थाओ मे होने बाली अनियमितताओ पर प्रभावी अकुश लगाने बाला कोई सिस्टम जो यह सिद्ध कर सके कि आम जीवन मे भ्रटाचार का कोई अंश नही ये अलग बाज है कि मौजूद सौपानो मे हालिया केन्द्रिय सत्ता ने अवश्य इस पर प्रभावी जीत हासिल की ह...

कल्याणकारी सामर्थ से ही संभव है , सर्बकल्याण

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विकृत समाज , संस्कृति मे विवेक की दुर्दशा कोरोना की त्रासदी प्रमाणिक प्रमाण  वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  जब समुचा जीवन ही स्व कल्याण का आग्रही हो जाये और स्वयं का सामर्थ सिद्ध करने मे ही सारा समय निकल जाये तो फिर ऐसे मे किससे सर्बकल्याण की उम्मीद की जा सकती है और अब तो स्वयं के सामर्थ को ही बचा पाना दूर की कोणी होता जा रहा है ऐसे मे विवेक की दुर्दशा विकृत समाज , संस्कृति के चलते होना स्वभाविक है । आज जिस तरह से सत्ता शीर्ष या सत्ता की भागीदारी की बैबसी कोरम पूरा करने के चलते सर्बकल्याण की कीमत पर स्वकल्याण मे तब्दील होती जा रही है वह जीवन सृजन संरक्षण संबर्धन कलंकारी ही सिद्ध होने बाली है । क्योकि आज जिस तरह से श्रेष्ठता और शीर्षता का पैमाना समर्थन या निर्जीव शिक्षा का आग्रही हो चुका है ऐसे सर्बकल्याण के बारे मे सोचना भी बैमानी है । नही तो जो त्राषदी कोरोना के रूप मे मानव जीवन देखी है वह उसे इस स्तर पर न देखनी पढ़ती क्योकि कोरोना काल मे जीवन को सुरक्षा देने , संकट के समय उसका सहयोग करने बाले अनगिनत जा चुकी जानो को बचाने मे सफल हो पाया न ही जान बचाने बैबसी मे...

पुरूषार्थ के अभाव मे कलंकित होता सामर्थ

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  मुख्यमंत्री की चिन्ता व्यर्थ नही , परिणाम पारदर्शी स्पर्शी हो  व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  म.प्र. - कोरोना के कहर से व्यथित म.प्र. के मुख्यमंत्री की चिन्ता व्यर्थ नही क्योकि अपने आलाअधिकारियो की समीक्षा बैठक मे वह स्वयं यह स्वीकार चुके है कि दूसरी कोरोना लहर के शुरूआती कहर को देख वह कई राते चैन से नही सो सके इसलिये किसी भी स्थति मे कोई भी कोताही नही होना चाहिए यह सच है कंगाल खजाने पर जिस तरह से उन्होने संसाधनो की कमी न होने देने का जो बीड़ा उठाया वह भी स्पर्शी ही कहा जायेगा क्योकि पूरे कोरोना कहर के बीच संसाधन जुटाने उन्होने धन की कमी आढ़े नही आने दी जिसे सराहनीय कहा जा सकता है मगर दर्द की बात यह रही की वह चाह कर भी कोरोना का शिकार हुये कई लोगो की जिन्दगी नही बचा सके कोरोना से तो जैसै तैसै कई लोगो अपनी अपनी जान बचाने मे सफल हो गये मगर अब ब्लेक फंगस ने लोगो के जीवन को संकट मे डाल रखा है । जो निश्चित ही एक बड़ी चिन्ता का विषय है अगर दूसरे शब्दो मे कहै तो जिस सामर्थ के साथ मुख्यमंत्री ने जीवन रक्षा का अभियान कोरोना से बचाव का अभियान छेड़ा वह मातहतो ...

जन सरोकार से दूर जनप्रतिनिधियो की चाहत

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हको को कलफते बैबस लोग  वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  म.प्र. शिवपुरी बैसै भी कहते है शिवपुरी मे जो जाये वह कम है क्योकि यहां न तो कोई सुनने बाला है न ही देखने बाला अगर बैबस लाचार लोगो का कोई है तो वह सिर्फ उपर बाला है । असभ्यता मे माहिर यहां बतौर सेवक एक लम्बी चैड़ी जमात है झूठ पर झूठ माने इनकी नियती हो फिर चाहै वह बिजली सप्लाई का मामला हो या फिर मण्डी से हटाये गये सिक्योरटी गार्डो का मामला हो शिवपुरी मे तो समुचे प्रदेश से अलग निजाम का एहसास होना कोई नई बात नही अपने अपने आकाओ के नाम रौव झाड़ते इन महानुभावो को अपने अपने आला अधिकारियो का संरक्षण प्राप्त है जो आम जन को खून के आंसू रूलाने काॅफेी है दिन दिन भर रात रात भर जरा सी आंधी मे बिजली का गुल रहना जब की कोरोना कर्फयू का दौर था रात भर छोटे छोटे बच्चो की गर्मी से चीथ पुकार बुजुर्गो का कष्ट यह मानवीय बैहयाई की वो नजीरे है जिस पर मानवता भी सरमाजाये मगर दुर्भाग्य जबाबदेहो मे कोई शर्म नही बल्कि आम गरीब को हड़काना मानो इन महानुभावो को फैसन बन गया बहरहाॅल तो यही कहा जा सकता है कि है ईश्वर इन महानुभावो को सदबुद्धि...

में मैं के चक्कर मे कही कोणी मोल न हो जाये यह जीवन

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इतना हल्के मे न ले , मानव , मानव जीवन , लाखो , हजारो बर्ष की त्याग तपस्या का परिणाम है मौजूद मानव जीवन  व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  जीवन का मूल्य आज जिस हल्के अन्दाज ले सेवा कल्याण , सर्बकल्याण का मनमाना ढोंग जन जीवन की कीमत पह चल रहा है यह शर्मनाक भी है और दर्दनाक भी फिर ऐसे लोगो से आम जीवन को अब ऐसी कोई अपेक्षा भी नही करनी चाहिए जिससे जीवन समृद्ध खुशहाॅल होता है । अगर सच कहै तो जिनके के लिये मानव जीवन एक तोहफा है बैचारे अब तो वह भी अभाव मुफलिसी बैबसी के चलते या सेवा कल्याण को टूट पढ़े गैग गिरोहबन्द लोगो के चलते यह स्वीकार तैयार है की जो मौजूद जीवन वह जी रहै है । अब तो वही मौजूद जीवन का अन्तिम सत्य है । क्योकि सामर्थ संसाधन सम्पन्न लोगो अपना कर्म और धर्म अब स्व कल्याण मे ही निहित मान चुके है जिसके दर्शन कोरोना काल मे शायद हर समझने बाले व्यक्ति को हो चुके होगे जिस तरह लोगो ने जरूरत के वक्त एक दूसरे को लूटा है कौन नही जानता और जबाबदेह लोगो कैसै मुॅह मे मुसीका लगाये चुप बैठै रहै लोगो बैबसी मे डगडग पगपग बैरहमी से लुटते रहै आज भी समाधान खोजने बालो का आलम यह है ...