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Showing posts from March, 2019

जज की गंभीर टिप्पणी, भ्रष्ट अफसर, लोक सेवकों को देशद्रोही घोषित किया जाये

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। ज्ञात हो कि मद्रास हाईकोर्ट ने राय दी है कि सभी भ्रष्ट न्यायायिक अधिकारियों, लोक सेवकों को देशद्रोही घोषित कर दिया जाना चाहिए। मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस सुब्रमण्यम गुरूवार को तमिलनायडू में एक गांव के प्रशासनिक अधिकारी के आपराधिक भ्रष्टाचार के मामले में लम्बे समय तक निलंबित रहने की चुनौती याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई कर रहे थे। याचिका खारिज करते हुए जस्टिस एस.एम सुपरमण्यम ने गुरूवार को कहा कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार होना संविधान का सबसे बड़ा दुश्मन है। न्यायपालिका को अलग-अलग प्रारूप में फैले भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाने होगें। व्यवस्था का आकलन करते हुए। उन्होंने कहा कि लोक सेवकों का रिश्वत लेना-देना गर्भवत भ्रूण के दौर से ही चलता है। यहां तक सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी लोक सेवकों को घूस दी जाती है। जस्टिस सुपरमरणयम ने कहा कि ऐसे लोग देश विरोधी है। क्योंकि ये इस महान देश के विकास को बाधित कर रहे है। उन्होंने कहा जिस प्रकार आतंकी देशद्रोही होते है ठीक उसी प्रकार भ्रष्ट लोक सेवकों को भी देशद्रोही करार दिया जाये। निःसंदेह यह एक कट...

जीत के जघन्य जुनून में स्वाहा होती सियासत सच से संघर्ष करते सियासी दल

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। हालिया विगत 20 वर्षो में घटे दो घटनाक्रमों पर नजर डाले तो वह जीवन का सच समझने काफी है। यह ऐसे दो सच है जो सार्थक भी हुए और सफल रहे। जिनकी सिद्धता पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। जिसमें पहला उदाहरण धनाड्य, परिवार, बिड़ला से जुड़ा है। स्व. आदित्य बिरला एक ऐसी शख्सियत थेे जिन पर न तो धनी की कमी थी न ही संसाधनों की। यहां गौर करने वाली बात यह है कि जब उन्होंने अंतिम सांस ली, तो वह विश्व के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका के वाॅशिंगटन जैसे शहर में थे जहां विश्व की सर्वोत्तम चिकित्सा उपलब्ध थी। मगर एक बुखार ने मात्र 48 घंटे में सबकुछ समाप्त कर दिया।  दूसरा उदाहरण गोआ के पूर्व मुख्यमंत्री देश के रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर से जुड़ा है। जिन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अमेरिका में ही चिकित्सा लाभ लेने के दौरान अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा था कि आज मैं एक सक्षम, सफल, समर्थ व्यक्ति हूं। जिसके साथ संसाधन, सहयोगी, शुभचिन्तक सभी है। मगर मैं एक बैवस लाचार मौत का इंतजार करता वह व्यक्ति हूं जिसको पता है कि उसकी मौत सुनिश्चित है और आज जिस दर्द और बीमार...

सृष्टि विरूद्ध संघर्ष में, सिद्धता असंभव प्राकृतिक संस्कृति, संस्कार, शिक्षा, आधारित सभ्यता, समृद्ध, समर्थ, जीवन में अहम

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जीवन को सुन्दर, सरल, सार्थक, समृद्ध बनाने में हमारा प्राकृतिक, नैसर्गिक स्वभाव, रचना और सभ्यता अनुकूल संस्कृति, संस्कार, शिक्षा अहम होती है। मगर जब हम समृद्ध, सार्थक, सफल, खुशहाल जीवन के लिए सृष्टि में प्रकृति के विरूद्ध स्वार्थवत समूह या व्यक्तिगत तौर पर संघर्ष करते है। तो अन्नतपूर्ण समस्याओं से ग्रस्त हो, हम एक ऐसा समाज और सामाजिक वातावरण तैयार करते है। जो संपन्न, समृद्ध, सुसंस्कृत, सरल जीवन में बाधक होता है। आज अच्छी-सच्ची शिक्षा संस्कारों से इतर प्रकृति के विरूद्ध हमारे जो स्वार्थवत आचरण का परिणाम है जिसके चलते हम एक ऐसी कत्र्तव्य विहीन धारा के सार्थी सहयोगी, सहभागी बन रहे है जो अनन्त है। शायद यहीं प्रकृति विरूद्ध स्वार्थवत स्वभाव हमारी समस्त समस्याओं की जड़ है। जिससे सचेत होना हमारा कत्र्तव्य होना चाहिए। जिसकी शुरूआत व्यक्ति, परिवार, समाज से हो सकती जो यह सुनिश्चित करे कि व्यक्ति, परिवार, समाज, संस्थाओं, संगठनों का मूल कत्र्तव्य प्रकृति अनुकूल कत्र्तव्य निर्वहन व सृजन में अपनी सार्थकता निष्ठापूर्ण सिद्ध कर मानवीय जीवन ही नहीं, समूचे जीव-...

सिद्धता में सारथी अहम, इतिहास गवाह

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। हर सक्षम, सफल, समृद्ध व्यक्ति का दर्द यह होता है कि उसकी निष्ठापूर्ण सेवा, कत्र्तव्य निर्वहन का सम्मानजनक परिणाम मूलक परिणाम क्यों नहीं मिल पाता है। कारण साफ है कि सच्चे, समर्पित, सारथी, सिपहसालारों का अभाव। कहते है कर्ता कितना ही सक्षम, सफल, सिद्ध, सार्थक क्यों न हो। अगर उसकी जमात में मूर्ख, स्वार्थी, चापलूस, चाटूकारों की फौज हो, तो ऐसी सत्ता सक्षम, समर्थ, सामर्थशाली, विचार, व्यक्ति का पतन, सुनिश्चित होता है जो उसके आधार अस्तित्व ही नहीं, उसकी नेक-नियति का भी पतन करने में सहायक होते है।  जय स्वराज

सफलता, सिद्धता, सीख, समझ व समर्पित सारथी, विद्ववान, सलाहकारों पर निर्भर करती है सक्षम, समर्थ, सेवाभावी नेतृत्व ही ला सकता है समृद्ध ही खुशहाली सच से मुंह छिपाते सरोकार प्रमाण-प्रमाणिकता का अभाव अस्तित्व ही आधार का संकट

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। पहले स्वयं की पहचान फिर राष्ट्रवाद के अगुवा बने संगठन आज भले ही राष्ट्रवादी विचारधारा को समयकाल परिस्थिति अनुसार संख्या बल के आधार पर पहले पायदान पर स्वयं को मानते हो। मगर उससे अन्य किसी राष्ट्रीय विचारधारा का अस्तित्व खत्म नहीं हो जाता। ये अलग बात है कि समय परिस्थिति अनुसार उसे तमगा जो भी मिला हो। मगर क्षेत्रीय स्तर पर निहित मुद्दों की बैसाखियों पर खड़े दल भले ही सत्ता में हो। मगर उनका राष्ट्रीय आधार नहीं हो सकता। यह समझने वाली बात होनी चाहिए। मगर जिस तरह से बन्धन-गठबन्धन का दौर सहमति, असहमति के आधार पर निहित स्वार्थ बस शुरू हुआ है वह न तो समाज हित में है, न ही राष्ट्र हित में है, यह राष्ट्रीय दलों को समझने वाली बात होनी चाहिए। मगर महान लोकतंत्र में सबकुछ चल रहा है। बेतहर हो कि राष्ट्रीय दल अपने अस्तित्व, आधार सेवा, सर्वकल्याण को अन्तिम लक्ष्य समझें, न कि जुनून के रथ पर सवार जीत का ध्वज लिए संस्कार विहीन भाषा शैली के अस्त्र एक दूसरे पर दागे। क्योंकि अनादिकाल से जीवन सृजन से जुड़े अहम मुद्दे किसी लक्ष्य को भेदने में सक्षम, सफल हुए है। ...

जीत का आधार सियासत या वैचारिक अहिंसा से बड़ा अचूक अस्त्र, असंभव

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह की संस्कृति के बीच संस्कारों का प्रदर्शन हो रहा है। उसके चलते साफ है कि 2019 में जीत का आधार सियासी नहीं, बल्कि मजबूत वैचारिक होगा। कहते है कि भूतो न भविष्यते अहिंसा से बड़ा कोई अचूक अस्त्र न तो कोई हुआ है, न ही हो सकता है। बशर्ते हम अहिंसा और स्वराज के अर्थ को ठीक से समझ पाये। मगर यह तभी संभव है जब हम सृष्टि के गूढ़ रहस्य को समझ पाये जो वर्तमान शिक्षा, संस्कृति में संभव नहीं।  मगर अनुभूति का एहसास सिर्फ हमारी महान संस्कृति में ही है और संस्कारों में भी। इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि जब तक कोई भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का वैचारिक अधिकार मजबूत न हो उसका लोकतंत्र में अपना अस्तित्व बचा पाना मुश्किल ही नहीं असंभव है। जिस, जिसने भी लोकतंत्र में अपना वैचारिक आधार खोया है उसे हमेशा हार का ही मुंह देखना पड़ा है।

राजे की उपेक्षा को लेकर सवाल

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अपनी सहज, सरल, आत्मीय सेवाभावी शैली के चलते जो लोकप्रियता प्रियदर्शनी राजे ने हासिल की है और जिस तरह से सियासी तौर पर उन्हें दरकिनार किया जा रहा है उसे लेकर अब काॅग्रेस आलाकमान की घोषणाओं पर सवाल उठना शुरू हो गये है। ये अलग बात है कि वह ग्वालियर की पूर्व राजवंश की महारानी व काॅग्रेस के कद्ावर नेता काॅग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव तथा पश्चिमी उत्तरप्रदेश  के प्रभारी, पूर्व केन्द्रीय मंत्री व शिवपुरी सांसद श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया की धर्मपत्नी है। मगर उन्होंने अपनी लोकतांत्रिक सोच और संस्कारों के बल आम लोगों के बीच जो सम्मान और आत्मीय लगाव पैदा किया वह किसी से छिपा नहीं। अगर जिस तरह से कांग्रेस में उनकी उपेक्षा को लेकर जो सवाल उठ रहे है तथा काॅग्रेस के स्तर पर देखा जा रहा है कि वह कांग्रेस के हित में नहीं। अगर कांग्रेस करो या मरो की स्थिति में राजे को प्रत्याशी बना ग्वालियर या शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में दांव लगाती हैं तो कांग्रेस की सफलता की संभावना प्रबल हो सकती है। क्योंकि जिस तरह से आम कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने ग्वालियर और शिवपुरी म...

राष्ट्र में प्रतिभा, संसाधन, सामर्थ, पुरुषार्थ की कमी नहीं, यह प्रमाण है

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। शिक्षा, संस्कृति, संस्कार विहीन सियासत और स्वार्थवत माहौल के बीच जो सुपर पावर की सिद्धता भले ही आज साबित हुई हो। मगर हम भारत वर्ष के लोगों की प्रमाणिकता, सिद्धता अनादिकाल से रही है फिर उसके रूप स्वरूप जो भी रहे हो, कर्म क्षेत्र जो भी रहे हो। आज भी भारतवर्ष की सहजता, संघर्ष, सफलताएं विश्व के समूचे भूभाग पर अपने जीवन निर्वहन करते लोगों के रूप में हमारे सामने हैं। यह सृष्टि में जीवन निर्वहन की अकाटय प्रमाणिकता ही है। जो पृथ्वी के पूर्वी छोर से लेकर पश्चिमी छोर तक और उत्तरी छोर से लेकर  दक्षिणी छोर तक जिस तरह से भारतवर्ष के लाग संघर्ष त्याग स्वयं कल्याण के साथ सर्व कल्याण के लिए जीवन निर्वहन करते मिल जाएगें, फिर उन देशों के नाम, संस्कृति, भाषा, बोली, सामाजिक वातावरण जो भी हो। दूसरा प्रमाण भारतवर्ष के महानतम लोगों का यह है कि सैकड़ों वर्षों से लुटे पिटे शोषित राष्ट्र के रूप में हमने जब आजाद राष्ट्र के रूप में शुरूआत कर, जो संघर्ष कर स्थाई नीव रखी, उसी का परिणाम है कि हमारी दिशा दशा जो भी रही हो। मगर हमने हमारा पुरुषार्थ, सामर्थ कभी नहीं खो...

निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य, निर्वहन समृद्धि खुशहाली की गारन्टी

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। निहित स्वार्थो में आजकल जिस तरह से मानव संस्कृति तार-तार नजर आती है। ऐसे में निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन ही समर्थ समृद्ध, खुशहाल जीवन की गारन्टी हो सकती है। जो सिर्फ सपने ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य की गारन्टी है। आज जब हम एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में है। ऐसे में हमें लोकतांत्रिक ताने बानों से विदित होना आवश्यक है। जो हमारे मार्गदर्शक भी है और हर जीवन में आवश्यक भी। हम एक ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जीवन निर्वहन करते है। जिसमें हर नागरिक, संवैधानिक, संस्थाओं के अपने-अपने कत्र्तव्य अधिकार है। जिसमें विधायिका, कार्यपालिका से लेकर पंचायतीराज, नगरीय संस्थाओं नागरिकों के अपने-अपने कत्र्तव्य अधिकार है। जिसका निष्ठा पूर्ण निर्वहन ही लोकतंत्र की खूबसूरती और समृद्धि का आधार है। जबकि लोकतंत्र को समृद्ध शसक्त बनाने के लिए होना तो चुनावों में यह चाहिए कि चुनाव के वक्त जनप्रतिनिधि आराम करें और मेहनत जनता किसी भी सच्चे-अच्छे कत्र्तव्य निष्ठ जनप्रतिनिधि को जिताने करें तथा जीतने के बाद 5 वर्ष तक वह जनप्रतिनिधि कड़ी मेहनत कर, जनता की सेव...

माफियाराज से कराहता लोक और तंत्र

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धर्मेन्द्र सिंह  विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  अगर देश, प्रदेश को छोड़, देश के एक छोटे के जिले में ही धन पिपासुओं से माफियाराज का आलम देखे तो जिस तरह से कानून की आड़ में अघोषित रूप से जनधन की उगाई चल प्राकृतिक संपदा की लूट मची है वह किसी से छिपी नहीं। सच और झूठ का प्रमाण तो जबावदेह वह संवैधानिक संस्थायें या पदों पर बैठे वह जबावदेह लोग ही दे सकते है। जिनकी जबावदेही प्राकृतिक संपदा की लूट और कानून की आड़ में हो रही अवैध उगाई को रोकना है। कौन नहीं जानता कि जिस तरह से म.प्र. के शिवपुरी जिले की नदियों से उनका सीना छलनी कर, पनडुब्बी, पाॅकलेन जेसीबी के माध्यम से छलनी किया जा रहा है और आये दिन छापेमारी और फिर अवैध उत्खनन के समाचार सुर्खियां बनते है। सच तो ये है रेत के अवैध माफियाराज का कि जो रेत का डम्फर आज से दो-चार वर्ष पहले 7-8 हजार रूपया प्रति डम्फर बाजार में बिकती थी। आज उसकी कीमत लगभग 24 हजार रूपया प्रति डम्फर हो चुकी है। म.प्र. के परिवहन विभाग के चैक पोस्टो का आलम भी कुछ कम नहीं, जहां आये दिन अवैध बसूली या परिवहन टैक्स चोरी के चर्चे आम रहते है। कारण साफ है कि जिस तरह की प्र...

काॅग्रेस सत्ता की भूखी नहीं उ.प्र. तथा राष्ट्र में गांधी परिवार का योगदान कम नही कल के लिए संघर्षरत राहुल का त्याग अहम

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। एक शसक्त, समृद्ध, परिवार में जन्मे राहुल का दोष सिर्फ इतना है कि वह स्वार्थवत सियासत में अपने पिता स्व. राजीव गांधी की तरह नेकदिल इन्सान है। जिसकी कीमत उन्हें राजनीति की चैखट पर आने के साथ ही चुकानी पढ़ रही है। हो सकता है सियासत का सच भी यहीं हो। मगर राहुल ऐसी सियासत को स्वीकार करेगें यह भी सम्भव नहीं, देश के सबसे बड़े ताकतवर, काॅग्रेस के धुरविरोधियों से गले मिल प्रेम की सियासत का संदेश देने वाले इस नौजवान का सच जो भी हो। मगर सम्भावना पर नजर डाले तो दल के अन्दर और बाहर संघर्ष करते इस नौजवान का अपना एक भविष्य है।  जो निश्चित ही चापलूस, चाटूकार और व्यक्तिगत, वैचारिक धुरविरोधियों को एक दिन सबक सिखाये तो कोई अति संयोक्ति न होगी और यह संभव है। सबकुछ निर्भर समय पर है। कहते है कि सत्य ने सृष्टि से लेकर आज तक किसी कर्म योद्धा को कभी निराश नहीं किया। मगर सम्भावना आज भी यक्ष है।  देखा जाये तो आजाद भारत से पूर्व या वाद में जो योगदान संघर्ष का उ.प्र. तथा गांधी नाम, परिवार या काॅग्रेस का रहा है वह इतिहास में दर्ज है। जितने भी बड़े नेता रहे कहीं ...

हलकट सियासत, हलाक लोकतंत्र

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। एक सभ्य सुसंस्कृत समाज में सेवा कल्याण, सम्प्रभूता स्वाभिमान के नाम जिस तरह की तथ्य विहीन स्वार्थवत, साम्राज्यवादी सत्ती की लकीरे खींची जा रही है। वह भी हलकट सियासत और संस्कार विहीन, संस्कृति के सहारे वह शर्मनाक तो है ही और दर्दनाक तथा किसी भी सभ्य समाज के लिए खतरनाक भी है। हलाकान है वह महान लोकतांत्रिक परम्परायें जिसके बल पर कभी हमें गर्व होता था और हम महान संस्कृति, भू-भाग के उत्तराधिकारी, समृद्ध, खुशहाल समाज के वंशज स्वयं को गौराविन्त भी मेहसूस करते थे।  क्योंकि तब हमारे मार्गदर्शी बन्धु, परिवार जन, मुखिया लिखित आचार संहिता न होने बावजूद, परम्पराओं उच्च संस्कृति, संस्कारों का पालन कर समाज में ऐतिहासिक कीर्तिमान त्याग-तपस्या कर अपने बान्धव बन्धुओं की सेवा कल्याण व मातृ-भूमि के प्रति निष्ठा पूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन कर सर्वकल्याण को सर्वोपरि मानते थे। आज लिखित आचरण संहिता संविधान एवं लिखित लोकतांत्रिक व्यवस्था होने के बावजूद सत्ता के लिए जिस तरह से तथ्य विहीन हलकट नजीरे सिर्फ स्वार्थ और सत्ता साम्राज्य बनाये रखने या बढ़ाने के लिए गिरोहबंद...

राष्ट्र साम्राज्यवाद के बीच सिसकता लोकतंत्र प्रमाण, प्रमाणिकता प्रमुख मुद्दों से इतर निहित स्वार्थ में डूबा सत्ता, संघर्ष

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  सियासी दलों का आधार जो भी हो, मगर सत्ता रूढ़ होने के लिए जिस तरह से स्वार्थवत, साम्राज्यवाद या वैचारिक आधार के बीच सारी संस्कारिक मर्यादायें लांग सत्ता के लिए संघर्ष छिड़ा है। यह सिसकते लोकतंत्र का जीता-जागता प्रमाण नहीं तो और क्या ? आज जिस तरह से कत्र्तव्य निष्ठ ईमानदार संगठन सियासी वैचारिक दल, संवैधानिक संस्थाओं के रहते मजबूत लोकतंत्र और राष्ट्र जनकल्याण की आशा-आकाक्षांयें संघर्षरत है। उसके चलते आम जन राष्ट्र के मुद्दों का सियासी संघर्ष से बाहर होना सच को समझने काफी है।  17वीं लोकसभा के लिए शुरू हो चुके देश भर में चुनावी सत्ता, संघर्ष का सच जो भी हो। मगर जिस तरह से देश की सियासत राष्ट्रवाद और साम्राज्यवाद के दोे धु्रवों में बट चुकी है। यह आज इस महान राष्ट्र के हर बुजुर्ग, युवा, बच्चों को समझने वाली बात है। कहते है कि सेवा कल्याण के नाम सत्ता शोषण की शक्ल जो भी, जैसी भी हो। मगर लगता नहीं कि मौजूदा सियासी संघर्ष की नींव पर राष्ट्र जनकल्याण की ईमारत मजबूत तथा गांव, गली, गरीब किसान का भला होने वाला है। इतिहास गवाह है कि जिस तरह से आजा...

समय के आगे नतमस्तक दल

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वीरेन्द्र शर्मा   विलेज टाइम्स समाचार सेवा। विश्व में जब काॅग्रेस विचार लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार बना, तब मौजूद शसक्त या सत्ताधारी दलों का बजूद तो दूर जन्म तक नहीं हुआ होगा। क्योंकि काॅग्रेस का मूल आधार अहिंसा और सर्वकल्याण समान अवसर और निष्छल स्वतंत्रता रही है। मगर जहां-जहां जब-जब काॅग्रेस का मूल आधार कमजोर जर-जर या अपनी मूल पहचान से इतर हो जर-जर हुआ वहां-वहां उसका न तो आधार और न ही उसका नामो निशान बचा। जहां से अन्य विचार, विचारधारा से युक्त दलों का जन्म हुआ।  ये अलग बात है कि वह लोकतांत्रिक व्यवस्था में संगठनात्मक तौर पर कभी सवाल भी रहे और सत्ताये भी हासिल की और एक मर्तवा फिर से वह अब अपनी पूर्व पहचान व अस्तित्व तथा स्थायित्व के लिए संघर्षरत है। अगर आज भारत में काॅग्रेस विचार के धुर विरोधी या काॅग्रेस के पद चिन्हों पर अलग पहचान बना सत्ता सुख भोग रहे वह दल, संगठनात्मक आधार पर शसक्त और काॅग्रेस से विमुख है। तो यह कमजोरी काॅग्रेस के नाम मौजूद उस संगठन दल, संस्थाओं की है। जो अपने अस्तित्व को संरक्षित नहीं रख सके तो आज किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि जो आवोहवा आ...

सृजन में चिन्ताओं का सार्थक, स्वीकार्य, समाधान, शिक्षा, समाधान और सिद्धता से सम्भव है चिन्तन की सिद्धता, स्वीकार्य सार्थक, समाधान पर निर्भर स्थापित शिक्षा, संस्कृति, संस्कार अहम

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  सृष्टि, सृजन में जीव, जगत, मानव कल्याण को लेकर चिन्तन अनादिकाल से रहे है। मगर उनकी सिद्धता हमेशा स्वीकार्य समाधान में ही निहित रही जिसमें स्थापित शिक्षा, संस्कृति, संस्कारों की हमेशा से अहम भूमिका रही। मगर सबकुछ उस चिन्तन की सिद्धता, सार्थकता पर निर्भर रहा जिसे शिक्षा, संस्कृति, संस्कारों के माध्यम से मूर्त देने का प्रयास हुआ। सृष्टि में सृजन यूं तो अपने आप में एक शिक्षा है जो संस्कृति, संस्कारों का आधार है। बशर्ते वह नैसर्गिक स्वरूप अनुसार सहज स्वीकार्य हो और जिसने अपने मन, वचन, कर्म, आचरण, व्यवहार बस अपने नैसर्गिक गुणों का निष्ठा पूर्वक निर्वहन किया हो।  क्योंकि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सृष्टि में मौजूद जीव, जगत, मानव अपने-अपने नैसर्गिक स्वभाव अनुरूप सृजन के लिए इस सृष्टि में मौजूद है। कहते है परिवर्तन प्रकृति का नियम है और समृद्ध, खुशहाल जीवन अन्तिम लक्ष्य। इसलिए चिन्तन में लक्ष्य तो सार्थक सिद्ध स्पष्ट हो ही साथ ही उसे प्राप्ति के मार्ग भी उत्तम होना चाहिए जिसकेे लिए शिक्षा, संस्कृति, संस्कार अहम है और यहीं चिन्तन की सिद्...

17वीं लोकसभा चुनाव प्रमाण, परिणाम, पारिदर्शिता आधार हो, आस्था और विश्वास का शिक्षा, स्वाभिमान, सम्मान का दर्द आज भी यक्ष 90 करोड़ नागरिक करेंगें 543 सदस्यों के भाग्य का फैसला 7 चरण, परिणाम 23 मई को 29 राज्य 7 केन्द्र शासित प्रदेश, 1.5 करोड़ 18-19 साल के युवा

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा।    गुलामी से उभरे लुटे-पिटे अर्धवस्त्र, ज्वार, बाजरा, मक्का पर निर्भर देश में इन 70 वर्षो में कुछ नहीं हुआ तो यह उन पुण्य आत्माओं, महापुरूषों के साथ अन्याय होगा। जिन्होंने अपनी समझ-बूझ मौजूद संसाधनों के बल इस देश को समर्थ, सक्षम बनाने में अपना अहम योगदान दिया। यहां तक कि राष्ट्र की खातिर अपना अमूल्य बलिदान भी दिया। मगर वर्तमान हालातों के मद्देनजर यक्ष सवाल यह है कि शिक्षा, स्वाभिमान, सम्मान बचाने में आखिर चूक कहां हुई जो हम अपनी समृद्धि, संस्कृति, संस्कारों को नहीं बचा सके, न ही हम अपनी प्रतिभाओं को संरक्षण दें, उन्हें संसाधन सहित प्रतिभा, प्रदर्शन के समान सहज अवसर उपलब्ध करा सके। इतना ही नहीं, अपनों के ही बीच हम दो भागों में बट जीवन के कठोरतम स्तर पर जीने पर आखिर क्यों मजबूर हुये। कारण साफ है कहीं तो चूक हुई है जो एक समृद्ध, सुसंस्कृत, संस्कारित, शिक्षित, खुशहाल स्वाभिमानी देश के बुजुर्ग, युवा, बच्चे ही नहीं, आने वाली पीढ़ी भी, विचलित बैहाल और दृगभ्रमित है, मजबूर, बैवस है। अब सवाल यह है कि एक समृद्ध, खुशहाल, सक्षम राष्ट्र में...

भ्रष्ट तंत्र की हनक से सनाके में लोग सत्ता बदली मगर शक्ल यथावत तबादला उद्योग में तबा होती आशा-आकांक्षा

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। भ्रष्ट तंत्र की हनक से जिस तरह से सत्ता रैंगती नजर आ रही है उससे देखकर तो बस इतना ही कहा जा सकता है कि म.प्र. में सत्ता तो बदली मगर शासन की शक्ल आज भी यथावत है। उम्मीद तो काॅग्रेस के आलाकमान राहुल गांधी के खुले मंच से आम जन की आशा-आकांक्षाओं को दिए वचन के चलते 10 दिन में रिण माफी व हर जिले में उद्योगों की स्थापना को लेकर था। मगर अघोषित रूप से फल-फूल रहे तबादला उद्योग में किसी को रोजगार मिले या न मिले। लेकिन ऐसे में उन आशा-आकांक्षाओं का दम तोड़ना स्वभाविक है। जिन्होंने 15 साल की सत्ता से त्रस्त आशा-आकांक्षाओं ने नई सरकार के रूप में राहुल पर विश्वास कर, काॅग्रेस को सत्ता सौंपी। अगर अघोषित अपुष्ट सूत्रों की माने तो जिस तरह से अघोषित तौर पर शिष्टाचार के नाम भ्रष्टाचार चार कदम आगे बढ़, सेवा के नाम आर्थिक शोषण का कारण बन रहा है वह किसी से छिपा नहीं। तबादलों को लेकर अगर म.प्र. के मुख्यमंत्री की दलील यह है कि जो भाजपा का बिल्ला लेकर चलेगें, तो क्या ऐसे लोगों को पुरूस्कार मिलेगा। ऐसे में मुख्यमंत्री ही नहीं, समूची सरकार को समझने वाली बात यह है कि स्थ...

लोकतंत्र में राष्ट्र-जन, कल्याण से बढ़कर कोई धर्म नहीं

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब आम जन व राष्ट्र अपने विधान की कीमत पर संविधान को अंगीकार करता है तो उसका कत्र्तव्य जबावदेही उसका धर्म होता है। जिसके बिना पर अपने नैसर्गिक अधिकारों की पूर्ति मौजूद व्यवस्था से पारितोष के रूप में चाहता है। फिर व्यवस्था जो भी हो, अगर राजधर्म का पालन न हो और कत्र्तव्य जबावदेही व्यवस्था की मोहताज हो, ऐसे में उस लोकतंत्र की सार्थकता, सिद्धता पर सवाल होना स्वभाविक है। जो किसी भी स्वस्थ, सशक्त, सार्थक लोकतंत्र के लिए शर्मनाक भी है और दर्दनाक भी है। यह एक कड़वा सच हो सकता है बैसे भी जब राष्ट्र-जन कल्याण मूक और सत्ता स्वार्थवत और अहंकारी हो, तो ऐसे में राजधर्म की कल्पना बैमानी हो जाती है।  बेहतर हो कि राष्ट्र-जन इस कटु सच को समझ आने वाले समय में सार्थक निर्णय ले और अपने कर्म, धर्म, जबावदेही की सिद्धता-सिद्ध कर 2019 में अपने वजूद का ऐहसास करा एक सच्चे और अच्छे नागरिक होने की सिद्धता, सिद्ध करें। तभी हम इस महान भू-भाग के महान नागरिक कहला पायेगें।  जय स्वराज 

गिरोहबंद सियासत में गिड़गिड़ाता लोकतंत्र सेवा, विकास, कल्याण से इतर छवि चमकाऊ उद्योग चरम पर देश, दल को दरकिनार कर, सत्ता के लिए छिड़ा संग्राम

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। राष्ट्र-जन, सेवा के नाम गठित दल, देश, संगठन, संस्थायें सत्ता के लिए इस तरह से स्वार्थवत होगें, यह तो लोकतंत्र का सपना देख, राष्ट्र-जन कल्याण की भावना रखने वाले लोगों ने भी सपने में न सोचा होगा।  सेवा, विकास जनकल्याण छोड़ सत्ता के लिए स्वयं की छवि चमकाने सत्ता सुख भोगने वालों के बीच धन, तकनीक और संख्याबल के आधार पर ऐसा संग्राम छिड़ेगा यह भी शायद किसी ने भी न सोचा होगा। सूचना क्रान्ति और दृश्यक्रान्ति के दौर में सत्ता हथियाने वालों को शायद यह मुगालता है कि लोकतंत्र का खड्डा खोदती गिरोहबंद सियासत ही अब वह कारगार कदम या वह अचूक अस्त्र इस लोकतंत्र में शेष बचा है। जिससे सतत सत्ता भोग पीढ़ी दर पीढ़ी सत्ता का साम्राज्य स्थापित कर अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए भविष्य में सत्ता सुरक्षित की जा सकती है।  शायद आज इस महान राष्ट्र और लोकतंत्र का यहीं दुर्भाग्य है कि जिस देश में सत्ता सियासी संग्राम के लिए लोग, दल, देश को दरकिनार कर, सत्ता के लिए स्वार्थ में डूबे है। ऐसे में समृद्ध, सशक्त, खुशहाल राष्ट्र की कल्पना कैसे की जा सकती है। जबकि देश की रीढ़...

सशक्तिकरण के लिए, सिंधिया का संवाद पंचायतीराज लोकतंत्र का मजबूत आधार

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अपने दो दिवसीय संसदीय क्षेत्र के दौरे पर आए पूर्व केन्द्रीय मंत्री काॅग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पहले दिन लगभग 220 करोड़ की लागत से शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय का लोकार्पण कर, सपने साकार करने की बात कही। दो दूसरे दिन पंच-सरपंच सम्मेलन में पंचायतीराज को लोकतंत्र का मजबूत आधार बताया। जिसे और मजबूत बनाने की दिशा में म.प्र. की सरकार द्वारा कार्य करने की बात कही।  उन्होंने कहा कि मजबूत पंचायतीराज की स्थापना से जहां महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने और पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री राजीव राजीव गांधी के स्थानीय सरकारों के सपनों को साकार कर, दिल्ली, भोपाल की सत्ता को गांव, गली, गरीब, किसान की चैखट तक पहुंचाया जा सके। महिला सशक्तिकरण को दिशा देने संवाद कार्यक्रम में पहुंचे श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने समूचे पंडाल में घूम-घूम कर हजारों की तादाद में मौजूद महिलाओं के बीच संवाद किया। साथ ही महिलाओं के सवालों का जबाव देने उन्होंने अपनी धर्मपत्नि सिंधियाराज वंश की महारानी प्रियदर्शनीय राजे से मोबाईल का स्पीकर आॅन कर स...

आतंक, आतंकवाद को मुंहतोड़ जबाव देने, देश के समूचे दल और देश एक है- सिंधिया सरकार को संवेदनशील और देश को सच बोलना चाहिए शहीद का दर्जा और जवानों की शहादत पर सवाल जायज सरकार को जबाव देना चाहिए मेरा सपने देखने भर में नहीं, उन्हें साकार करने में विश्वास है

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। लगभग 220 करोड़ की लागत से पूर्ण होने वाले शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के लोकार्पण के अवसर पूर्व केन्द्रीय मंत्री काॅग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, सांसद, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मैं सपने देखने में नहीं बल्कि उन्हें साकार करने में विश्वास रखता हूं। चाहें मेडीकल काॅलेज हो या एशिया का नम्बर वन एन.टी.पी.सी. का इन्जीनियरिंग काॅलेज, ऊर्जा ट्रेनिंग सेन्टर जिसकी लागत लगभग 185 करोड़ है। हमने अन्नदाता, ज्ञानदाता और जानदाता सभी के सपनों को पूर्ण करने की कोशिश की है। किसानों के रिण माफ, बिजली के बिल हाफ और इस महाविद्यालय से 5 वर्ष में 600 डाॅक्टर (जानदाता) व 1100 बिस्तर चिकित्सालय की सुविधा शिवपुरी-गुना ही नहीं, उ.प्र., बुन्देलखण्ड को मिलेगी। 31 मार्च तक टंकियों तक सिंध का पानी तो मई तक घर-घर पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य है। पत्रकारों के बीच अपने सपने संघर्ष को सार्थक सफल होने पर उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि मैं 5 वर्ष में पीड़ित, वंचित, मानवता से जुड़ी चिकित्सीय सेवा ही नहीं, चिकित्सीय सेवा करने वालों को तैयार करने का सपना पूर्ण कर पाया। दिग्विजय द्वा...

आज होगा सिंधिया के हाथों शिवपुरी का सपना साकार लगभग 200 करोड़ की लागत से तैयार मेडीकल काॅलेज का लोकार्पण करेंगें सिंधिया

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है विरले ही होते वह लोग जो पहले सपना देखते है फिर उसे साकार करते है। शायद उन्हीं विरले लोगों में से एक है पूर्व केन्द्रीय मंत्री व राष्ट्रीय महासचिव काॅग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया है। जिन्होंने पीड़ित मानवता की सच्ची सेवा का सपना देखा और तमाम संघर्ष के बाद उसे 5 वर्ष में पूर्ण कर दिखाया। जिसका लोकार्पण भी आज वह स्वयं अपने हाथों करेंगें।  यूं तो उनके द्वारा देखा एक और सपना मूर्तरूप लेने एशिया के तीसरे सबसे बड़े इंजीनियरिंग काॅलेज के रूप में तैयार है। जिस अत्याधुनिक तकनीक सेवा व सुविधाओं से लैस मेडीकल काॅलेज का आज लोकार्पण होगा। उसकी चिकित्सीय सुविधाओं का लाभ सिर्फ शिवपुरी ही नहीं, बल्कि समूचे गुना संसदीय क्षेत्र सहित यूपी, राजस्थान, बुन्देलखण्ड के लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा।

पावर, प्रदर्शन से अहम प्रतिभा, स्वाभिमान, संरक्षण अहिंसा से बड़ा दुनिया मेें कोई अचूक अस्त्र नहीं- व्ही.एस.भुल्ले मुख्य संयोजक स्वराज

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धर्मेन्द्र सिंह विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  व्यक्ति, परिवार, समाज जब अपनी संस्कृति, शिक्षा, स्वास्थ, संस्कार जैसे अस्त्रों से लैस हो, तो न तो उसे कोई अस्त्र न ही कोई राष्ट्र किसी भी संघारत, घातक अस्त्र से परास्त कर सकता है, न ही वह भविष्य का खतरा बन सकता है। यहीं हम भारतवर्ष के लोगांे का सामर्थ और पहचान रही है। इस महान भू-भाग का मान-सम्मान, स्वाभिमान ही हमेशा से इस राष्ट्र की सार्थकता और संघारक क्षमता रही है। जिसके आगे न तो अर्थ, समाज, राजनीति, विज्ञान का कोई अर्थ अस्तित्व रहा है, न ही उनकी कभी सार्थकता, सिद्धता, सफलता साबित हुई है, यहीं आज हर भारतवासी को समझने वाली बात होना चाहिए। आज के वक्त स्वयं के सामर्थ और सत्ता की नीत-नियत पर संदेह स्वयं की पहचान पर ही एक सवाल है। इसलिए हमें स्वयं की सार्थकता सिद्ध करने स्वयं के सामर्थ का प्रदर्शन करना चाहिए और स्वार्थवत होने वाले सियासी सवालों को दरकिनार कर, उनका तिरस्कार करना चाहिए। यहीं एक सच्चे, सफल नागरिक का कत्र्तव्य होना चाहिए। क्योंकि किसी भी राष्ट्र में सबसे बड़ी जबावदेही जब हालात संस्कृति, संस्कार विरूद्ध शिक्षा और स्वास्थ के अभा...

सिंधिया के लम्बे संघर्ष से मिली शिवपुरी को सौगात लगभग 190 करोड़ से निर्मित अत्याधुनिक मेडीकल काॅलेज का सिंधिया करेंगें लोकार्पण

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचा र सेवा। लगभग विगत 5 वर्ष पूर्व केन्द्रीय मंत्री क्षेत्रीय सांसद एवं काॅग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के अथक प्रयासों से डाॅ. मनमोहन सिंह की सरकार के स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद द्वारा स्वीकृत शिवपुरी के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं एवं मशीनों से लेस मेडीकल काॅलेज का लोकार्पण ज्योतिरादित्य सिंधिया शिवपुरी में करेगें।  प्राप्त जानकारी के अनुसार गत दिनों में बनकर तैयार हुए शिवपुरी मेडीकल काॅलेज के लोकार्पण की तैयारियां पूर्ण की जा चुकी है। ज्ञात हो कि जब से शिवपुरी मेडीकल काॅलेज ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा स्वीकृत कराया गया था। तभी से म.प्र. में मौजूद भाजपा सरकार द्वारा उसे सियासी अखाड़ा बना दिया गया। जिसके चलते कभी स्वीकृत इस मेडीकल काॅलेज के विदिशा जाने की चर्चा सरगर्म रही। तो कभी म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान यह कहते दिखे कि कागजों पर मेडीकल काॅलेज नहीं बनते। मगर क्षेत्रीय सांसद सिंधिया ने हार नहीं मानी।  इस बीच वह कभी केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी लढ्ढा से मिले, तो कभी उन्होंने इस मेडीकल काॅलेज के साथ ह...