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Showing posts from August, 2020

विषम दौर में भ्रमित आशा-आकांक्षा प्रमाणिकता के आभाव में पाखंड बनते पालनहार

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से आजकल सियासी गलियारों में अपने-अपने स्वार्थ पूर्ति के लिये प्रमाणिकता के आधार में पाखंड का बाजार सजा है उससे लोकतंत्र की कमजोरी का लाभ उठा भले ही लोग अपने-अपने स्वार्थ सिद्ध करने में सफल सिद्ध होते हो, मगर इससे समृद्ध सेवा कल्याण की कामना करना बैमानी ही साबित होगा। ये अलग बात है कि भूतो न भविष्यते सिर्फ उस आराध्य को छोडकर कोई पूर्ण नहीं जिसमें अपने-अपने तरीके से लोगों में आस्था है। मगर जब बात राष्ट्र की आती है तो राष्ट्र कोई न तो शब्द है और न ही कोई भूभाग, बल्कि कोई भी राष्ट्र उस राष्ट्र रहने वाले नागरिकों की आस्था और उनके त्याग से निर्मित होता है। जिसके अपने मूल्य सिद्धान्त और सर्वकल्याणकारी नीतियां होती है जिसके लिए उस राष्ट्र में रहने वाले हर नागरिक के मन मस्तिष्क में राष्ट्रीयता का भाव होना आवश्यक होता है। मगर जो स्वभाव स्वयं तक सीमित रह अपनो तक सीमित होने का और स्वयं कल्याण का भाव जीने का आदि हो जाता है उस राष्ट्र का कल्याण असंभव-सा दिखाई देता है। टोले, मजरे, जागिर, राज्य की विरासत से निकले हमारे राष्ट्रीय भाव आजादी के 70 वर्ष बा...

सस्ती लोकप्रियता और वोट बैंक के मोह में स्वाहा होती स्थापित व्यवस्था निदान का भले ही नामों-निशान न हो, मगर नैन-सुखों की सियासत में कोई कमी नहीं

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अगर विगत डेढ दशक ही नहीं, पूरे दो दशक के सत्ता और सिस्टम के उत्तरदायित्वों की बात करें तो जिस तरह से स्थापित व्यवस्था और शासन के मूल कत्र्तव्यों का सत्यानाश सस्ती लोकप्रियता हासिल कर वोट कबाडने को लेकर हुआ है वह किसी से छिपा नहीं। अगर यो कहें कि सक्षम सामर्थशालियों का सर्वकल्याण में वह पुरूषार्थ स्वयं के स्वार्थो के आगे शेष नहीं रहा, तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी। भाई लोग देश के नौकरशाही को भले ही बगैर किसी अपराध के उन्हें मुंह भरकर कोसे या उनके माथे आरोपों की कालिख मले, मगर जब भी कभी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सर्वकल्याण में निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन को लेकर संज्ञान लिया जायेगा, तो वह निर्दोष ही साबित होंगें। कारण कि न तो हम समय से कल्याणकारी, समृद्धशाली शिक्षा पद्धति ही शुरू कर पाये और न ही ऐसे प्रशिक्षण संस्थान और उनकी विशेष वस्तु तैयार कर पाये जो उनके स्थापित स्वभाव को सर्वकल्याणकारी सिद्ध कर पाता। क्योंकि तीन दशक से नैतिक रूप से सियासी गलियारों में सत्ता को लेकर जो तूफान उठा उसने सियासत, सत्ता, सेवा कल्याण ही नहीं पद गरिमा के भी अघोषित रूप स...

कोरोना विस्फोट से दहशत में लोग संक्रमितों ने पकडी रफ्तार

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कोरोना के कारगर इलाज के आभाव में भले ही लोग जीवन बचाने संघर्षरत हो, मगर संक्रमितों की बढती रफ्तार लोगों को दहशत जदा करने काफी है। विश्व में संक्रमितों का आंकडा जहां 2 करोड के पार जा पहुंचा है तो वहीं भारत की बढती संक्रमित संख्या ने आंकडा 30 लाख के पार कर दिया है। मगर इस बीच एक छोटा-सा शहर भी जहां फिलहाल आंकडा एक हजार के पार हो चुका है, तो वहीं शिवपुरी के अलावा समूचे ग्वालियर-चंबल संभाग में भी संक्रमितों की संख्या बडी ही तेजी के साथ बढ रही है जहां आने वाले समय में राजनैतिक दलों की वर्चुअल रैलियां, जनसंपर्क और सदस्यता अभियान को देखकर लगता है कि जल्द ही चुनाव भी होने वाले है। मगर यक्ष सवाल आज भी कोरोना के 7 माह के सफर के बाद जस का तस आम लोगों के सामने है कि कैसे होगा कोरोना का सफाया और कैसे रूके संक्रमितों की रफ्तार।  ये अलग बात है कि फिलहाल पुख्ता प्रमाणिकता के साथ यह कोई नहीं कह सकता कि इसकी कारगार दवा क्या है और बढती संक्रमितों की संख्या पर विराम कैसे लगेगा। सिवाये इस संभावना के, कि मौजूद सत्ता और सिस्टम जिसके कंधो पर लोगों के जीवन रक्षा की...

कत्र्तव्य विमुख सियासत से सहमी मानवता नैतिक पतन की पराकाष्ठा, लोकतंत्र पर भारी भीडतंत्र मानव धर्म की रक्षा सत्ता, सामर्थशालियों का धर्म

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। मानव धर्म की रक्षा और उसका नैसर्गिक संरक्षण, सम्बर्धन सत्ता, सामर्थशालियों का धर्म और कर्म कहा गया है। मानव धर्म की रक्षा उसका संरक्षण सम्बर्धन के कत्र्तव्य स्वरूप इस महान भूभाग पर अनादिकाल से कठोर तपस्या, कडा त्याग तो दूसरी ओर अनगिनत कुर्बानियां और शहादत भी हुई है। मगर कभी कत्र्तव्य और मानव धर्म को सामर्थ, पुरूषार्थ, प्राकृतिक संपदा से समृद्ध इस वीर भूमि ने कभी कलंकित नहीं होने दिया। नैतिक कत्र्तव्य बोध की संस्कृति से समृद्ध इस महान भूमि का मानव हमेशा से ही समस्त जीव-जगत के कल्याण के लिए जीवन पर्यन्त संघर्षरत रहा है। मगर इस मानव ने मानवता की आन-वान और तथा स्वयं के स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया। फिर कीमत जो भी चुकानी पडी हो। मगर आज उन्हीं महामानवों की पीढी के रूप में हम स्वयं को पाते है तो हमारा सर शर्म और लज्जा से स्वतः ही झुका नजर आता है। कारण जिस महान भूभाग पर आज भी हमारा महान गौवंश गौमाता के रूप में पूजा जाता है। जिस गौवंश की सेवा गीता उपदेश देने वाले प्रभु कृष्ण ने की जिस गौवंश का उस महान भूभाग पर जीवन निर्वहन का विधि सम्वत नैसर्गिक अधि...

उत्कृष्ट तकनीकी संस्थाओं की होगी शुरूआत मांग सप्लाई के आधार पर सुनिश्चित होगी नीति

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शासन की खेल युवा कल्याण एवं कौशल विकास तकनीक मंत्री श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया के साथ आये म.प्र. शासन के कौशल विकास आयुक्त एवं तकनीकी शिक्षा सहित राजीव गांधी प्रोद्योगिकी के वाइस चांससलर ने टूरिस्ट विलेज होटल पर आयोजित पत्रकार वार्ता में शिवपुरी भ्रमण पश्चात अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि माननीय मंत्री महोदय और म.प्र. शासन की मंशा अनुरूप शिवपुरी में उत्कृष्ट तकनीकी संस्थाओं के रूप में संस्थानों को विकसित किया जायेगा। जिससे उद्योग और बाजार की मांग के अनुसार छात्रांे को प्रशिक्षित उन्हें रोजगार दिलाया जा सके। इस मौके पर श्रीमंत यशोधरा राजे ने कहा कि उनकी कोशिश है कि प्रधानमंत्री जी के संकल्प अनुसार आत्मनिर्भर भारत निर्माण में म.प्र. का तकनीकी कौशल और शिक्षा की ढांचागत व्यवस्था ऐसी हो, जिसमें हमारी अपनी पीढी और सामर्थ अनुसार आत्मनिर्भर भारत और म.प्र. निर्माण में अपना योगदान दें, सहज रोजगार प्राप्त कर सके। उन्होंने कहा कि आज अधिकारियों के साथ आई.टी.आई पाॅलिटेक्निक और इंजीनियरिंग काॅलेज भ्रमण के पीछे उद्देश्य यहीं था कि हम सारी चीजें व्यवस्...

संतान साते और वैबस गौमाता सियासी दौर में कब मिलेगा समाधान

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अब इसे मैं अपना भाग्य कहूं या सौभाग्य कि संतान साते का पावन दिन और गौमाता मेरे घर पर, आॅफिस में बैठे अचानक दरवाजे पर नजर गई तो देखा कि गौमाता टकटकी लगाये मेरी ओर निहार रही थी और इतमिनान से बैठ मेरी ओर देख रही थी। इतने लंबे समय पश्चात जिस तरह से वह अधिकार स्वरूप बैठी थी मैं भी देखकर चैंक गया कि आखिर आज क्या बात है कि बडी ही बेफिक्र भाव से गौमाता विश्राम कर रही है। एक पल ख्याल आया कि शायद गौमाता यह कहना चाहती है कि क्या हुआ कि मेरे उस अधिकार का जिससे आज समूचा गौवंश वेदखल है। चूंकि कई वर्षो से गौवंश के साथ हो रहे अन्याय को लेकर यूं भी मैं विचलित बना रहता हूं और जब-तब सोई सत्ताओं को जगाने की असफल कोशिश भी करता हूं। यह उसी कोशिश का परिणाम था कि कांग्रेस की पूर्व सरकार में पूरे प्रदेश और गांव-गांव में गौशाला बनाने का अभियान चलाया गया था। मगर सरकार जाते ही फिर वह योजना फिर ठंडे बस्ते में जा पहुंची। बहरहाल जिस गौवंश को विभिन्न सत्ताओं में ही नहीं, नैसर्गिक रूप से भी चारा-पानी और भूमि का अधिकार प्राप्त था आज वह सत्ताओं की अनदेखी और अज्ञानी स्वार्थवत लोगो...

अपनो के बीच वेसुध वैभवपूर्ण विरासत चुनावी वर्ष में शताब्दी वर्ष पर सवाल करते सरोकार

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस सेवा, कल्याण को साक्षी मान जिस सिद्धदत से सियासी रास्तों का मार्ग पूर्व सिंधिया स्टेट की महारानी कै. श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने तय किया और जिस मुकाम तक वह सेवा कल्याण के संदेश को लेकर समूचे देश को परिचित कराने में सार्थक सफल हुई उन्हीं का 2020 वर्ष शताब्दी वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। मगर जिस तरह से उन्हीं की पार्टी और सरकारें सेवा कल्याण और निष्ठा के उनके पवित्र संदेश को देने में अक्षम, असफल साबित हो रही है वह आजकल चर्चा का विषय है। जिस सेवा कल्याण के भाव को बगैर किसी अपेक्षा के जीवन पर्यन्त स्थापित करने में श्रीमंत राजमाता सफल रहीं, फिर वह टाॅप-टू वाॅटम उनका दल हो, जिसको खडा करने उन्होंने सेवा कल्याण की खातिर दिन रात एक ही नहीं वह देश की सबसे सशक्त पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इन्दिरा गांधी तक से टकराने से नहीं चूंकि और जब आयोध्या मामले की जांच कर रहे आयोग के सामने लोग उस आंदोलन से अपनी दूरी बनाने के संकेत देते नहीं थकते थे तब वरिष्ठ नेताओं में सिर्फ राजमाता विजयाराजे सिंधिया ही ऐसी प्रखर नेता थी जिन्होंने कैमरे के सामने यह स्वीक...

सनघटा की सौगात के साथ व्यवहारिक समीक्षा करेंगी श्रीमंत सिंधिया विकास योजनाओं पर होगा फोकस

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अगर खबरो की माने तो म.प्र. शासन की कद्दावर मंत्री श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया सनघटा सिंचाई परियोजना की सौगात के साथ शिवपुरी शहर में चल रही विभिन्न योजनाओं की भ्रमण के माध्यम से व्यवहारिक समीक्षा करेंगी। जहां तक सनघटा मध्यम सिंचाई योजना का सवाल है तो यह लगभग 145 करोड की लागत से मूर्तरूप लेगी जिसका लाभ 50 गांवों के किसानों को होगा और 4630 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। ज्ञात हो कि श्रीमंत सिंधिया अपने निर्धारित कार्यक्रम अनुसार दोपहर 12 बजे शिवपुरी पहुंचेंगी। तश्पश्चात वह इंजीनियिरिंग, पाॅलिटेक्निक काॅलेज सहित आई.टी.आई का भी निरीक्षण करेंगी। शाम को 6 से 7 के बीच उत्कृष्ट विद्यालय में प्रमुख स्कूल और कोचिंग संचालकों से चर्चा पश्चात, शाम 7 बजे होटल टूरिस्ट विलेज पर पत्रकारो से चर्चा भी करेंगी। ये अलग बात है कि कोरोनाकाल के दौरान जिस तरह से उन्होंने बगैर शासकीय मदद का इंतजार किये कै. श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया ट्रस्ट के माध्यम से जिस तरह से शिवपुरी जिला सहित आसपास के जिलों में मास्क, पीपीई किट तथा खादन्न वितरण के साथ शिवपुरी जिले से गुजरने वाले अ...

सियासी उठा-पटक के बीच शिवपुरी में सत्ता की नई सजावट

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। प्रशासनिक हल्कों में ट्रांसपर, पोस्टिंग के अस्त्र का शिकार होना यूं तो शासकीय सेवा का भाग होता है। मगर जब किसी ट्रांसपर पोस्टिंग के पीछे सत्ता का देय स्पष्ट न हो, तो निश्चित ही सवाल होना लाजमी है। सिंधिया स्टेट की ग्रीष्म कालीन राजधानी के नाम से प्रसिद्ध शिवपुरी जिले में हालिया तब्दीली हुई है और प्रशासनिक प्रक्रिया में तब्दीली होना कोई नई बात नहीं। जहां निवाडी से स्थानानांतरित अक्षय कुमार सिंह अब शिवपुरी कलेक्टर होंगे, तो वहीं लगभग 18-20 माह से शिवपुरी की कमान संम्हालें अनुग्रह पी अब कलेक्टर खरगौन होंगी। ये अलग बात है कि उनके कार्यकाल के दौरान कई ऐसी ऐतिहासिक बाते हुई जो निश्चित ही इतिहास में हमेशा याद की जायेंगी। फिर चाहे वह सियासी क्षेत्र से जुडी घटना हो या फिर सेवा से जुडी घटना। अगर हम यो कहें कि सैनिक भर्ती रैली से लेकर कोरोनाकाल तक की प्रशासनिक व्यवस्थाओं में अभूतपूर्व परिणामों के साथ बदलाव हुये वह भी यादगार ही कहें जायेंगे। मगर कहते है कभी-कभी भाषा का व्यवस्था में महत्वपूर्ण भाग होता है। मगर वह सिस्टम से दूर नहीं होते। अगर सुधरण व्यवस्था ...

वेखौफ कोरोना का खतरनाक मंजर अगर संख्या 28 लाख के पार है तो कैसे संम्हलेंगे नगर, महानगर

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जैसी कि संभावना संसाधन एवं समझ के आभाव में वलवती थी लगता है कि अब वह स्पष्ट और सत्य साकार होती नजर आती है। क्योंकि विगत कुछ दिनों में जिस तरह से कोरोना संक्रमण का दिन-दूनी, रात-चैगनी रफ्तार से बढ रहा है और धीरे-धीरे महानगर, नगर ही नहीं गांव, गली तक अपनी पहुंच बना रहा है वह अब किसी से छिपा नहीं। कागजी अश्वों से सजे रथ पर लहराती आदेश-निर्देषों की पताकाओं से साफ है कि अगर कोरोना की रफ्तार यही रही, तो अब उसे चक्रवती सम्राट बनने से कोई नहीं रोक सकता। क्योंकि कारगार दवा के आभाव में लोग जिस तरह से इस बीमारी से दो-चार हो रहे है उसके परिणाम यह स्पष्ट करने काफी है कि अगर सावधानी और स्वस्थ रहने की आदत अगर मानव जीवन में सुमार नहीं हुई तो समूचे मानव जगत को इसके घातक परिणाम भोगने ही होगें। क्योंकि अब न तो समझाने का समय शेष रहा और न ही समझ। ऐसे में सावधानी ही वह अचूक अस्त्र साबित हो सकता है जो मानव जीवन को इस कोरोना से बचा सकता है। 

डेटा मठ पर वर्चुअल संतों का महाकुंभ गूगल गुरू का खेल खराब करते वर्चुअल महागुरू

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। भैया- कंपनी बहादुर की पिच पर बोल्ड होने से बौखलायें म्हारे क्रिकेट विरोधी दुश्मन को राष्ट्रवादियों की एक ही गुगली से गिल्ली छोड क्रीनबोल्ड होने का सौभाग्य भले ही प्राप्त हो चुका हो, मगर जिस तरह से राजनैतिक सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक तौर पर बाउंसरे खुली पिच पर फैंकी गई है उन्होंने विश्व के बडे-बडे खिलाडी और दर्शकों के होसफागता कर दिये है। कंपनी बहादुर की बनी पिच पर वर्षो से धुंआधार बेटिंग करने वाले म्हारे पडोसी को यह मुगालता था कि डे-नाईट खेलने वाली भारतीय टीम बर्फीले मैदान पर उसकी तेज बाॅलों के आगे टिक नहीं पाऐगी। मगर जिस तरह से म्हारी टीम ने दोनों छोर के धुंआधार खेल का प्रदर्शन किया है और एक छोर चैके-छक्के, तो दूसरे छोर से बडे-बडे बाॅलरों को हताश-निराश किया है उससे क्रीनबोल्ड हुए पडोसी की बैवसी को समझा जा सकता है। भले ही हार से घबराई पडोसी टीम पूल की टीमों को भडकाने का स्वयं की हार के बाद अंतिम प्रयास में जुटी हो। मगर लगता नहीं कि कुटनी और डंडे से गांव, गली, मौहल्लों में क्रिकेट खेलने वाली टीम का कुछ बिगाडा है। मगर सबसे बडा संकट तो आजकल डेटा मठ...

खतरनाक जौन में गुडफील का एहसास

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कोरोना कहर हो या आसन्न उपचुनाव जिसको लेकर जिस तरह से सियासी दल और संभावित प्रत्याशी तथा झुण्ड बनाकर अपने-अपने पक्ष में मतदाताओं को करने में जुटे नेतागण भले ही गुडफील मेहसूस कर रहे हो और भावी संभावनाओं के रथ पर सवार हो चक्रवती सम्राट होने की प्रतिस्पर्धा में जुटे हो। मगर इन सिद्ध पुरूषों की समृद्ध संभावनाऐं किस तरह से सिद्ध होंगी यह देखने वाली बात होगी। यूं तो ग्वालियर चंबल ही नहीं मालवा सहित कई विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है जिनकी तैयारियां जोरों पर है। मगर कोरोना कहर के बीच जिस तरह से वर्चुअल बैठकों सहित अपने-अपने स्तर पर जनसंपर्क का अभियान छिडा है उसे लेकर भले ही लोग दहशत में हो, मगर चुनाव जीतने के लिए फिलहाल तो सियासी लोगों की बांछे खिली है। तो वहीं सत्ताधारी दल और विपक्षी दल के लिए फील गुड के बीच जो खतरनाक जौन साबित हो रहे है उनमें एक दूसरे पर कीचड उछाल आरोप-प्रत्यारोपों के बीच विकास और वोट के लिए वहलाने की चर्चाऐं खासी सरगर्म है। देखना होगा कि समय रहते सदबुद्धि के चलते किसे जीत की सिद्धता हासिल होती है। 

सोलंकी को अनुसूचित जाति आयोग सदस्य बनाने नेता हुए लामबंद

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से म.प्र. मंत्रीमंडल गठन पश्चात असंतोष की खबरें गूंज रही थी भले ही भाजपा ने डेमेज कंट्रोल की रोकथाम रणनीतिक तौर पर कर ली हो। मगर ग्वालियर-चंबल की राजनीति में खासा दखल रखने वाले सिंधिया निष्ठ आर.के सोलंकी के नाम की चर्चा सियासी गलियारों में सरगर्म है। सोलंकी को अनुसूचित जाति आयोग का सदस्य बनाने जिस तरह से नेता लामबंद हो रहे है उसे देखकर लगता है कि सिंधिया निष्ठ सोलंकी को उपचुनाव के मद्देनजर कहीं न कहीं एडजस्ट कर उठते स्वरों को दबाने का कार्य क्षेत्रीय नेताओं द्वारा किया जा सकता है। क्योंकि ग्वालियर-चंबल में जिन सीटों पर उपचुनाव होना है उनमें कई सीटें आरक्षित क्षेत्र से आती है। देखना होगा कि सरकार से जुडे प्रबंधक उपचुनाव में उठती इस मांग को कैसे लेती है। 

दबे पांव दहशत बढाता कोरोना विश्व का आंकडा 2 करोड के पार

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है इस दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं, मगर पाने की ललक और प्रयास सर्वोत्तम होने चाहिए। जिनके रथ पर सवार हो किसी भी समाधान को चक्रवती सम्राट बना, उसकी ध्वजा पताका फहराई जा सकती है। मानवीय सभ्यता से जुडा आध्यात्म इतिहास इस बात का गवाह है कि जब-जब उचित साध्य के लिए उत्तम साधनों का उपयोग हुआ है परिणाम सार्थक और सफल रहे। अगर हम भारतवर्ष की ही बात करें तो अगर कोरोना के शुरूआती दौर में ही बगैर सियासत के सार्थक कदम उठा सिस्टम को सटीक दिशा में सक्रिय किया जाता और सियासी सलाहकार तथा अहंकारी व्यवस्था का समन्वय समय रहते सही दिशा में बनाया जाता तो भारत में भी संक्रमितों की संख्या 26 लाख के पार तथा प्रतिदिन के पार 50 हजार के पार न होती, न ही देश को आर्थिक दुर्गति का सामना करना पडता। लेकिन कहते है कि मानव भूल का पुतला है सो इतने बडे देश की व्यवस्था में भूल-चूक होना स्वभाविक है और सियासी सरोकार सियासत की मजबूरी। मगर अभी भी बहुत कुछ नहीं बिगडा क्योंकि संक्रमितों का रिकवरी रेड सुधार पर है जिसका प्रतिशत लगभग 72 के आसपास है। मगर जिस तरह से छोटे-छोटे शहरों में संक...

नये भारत को नई रणनीत की दरकार राष्ट्रीय डाटा संकलन को बनाना होगा समर्थ और समृद्ध सीमा से सटे राज्यों में करना होगा सुरक्षा का विस्तार

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। बदलते भारत और आत्मनिर्भर भारत निर्माण के संकल्प के बीच सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि नये भारत निर्माण में जो रणनीत दीर्घगामी सिद्ध और समर्थ होगी उन विषयों पर गंभीरता से ही नहीं, व्यवहारिक तौर पर भी रणनीत को जमीनी स्तर पर लाना होगा। आज भारतवर्ष विश्व धरातल पर जिस भूमिका के लिए स्वयं को तैयार करने का संकल्प ले चुका है उसे समृद्ध और सार्थक करने में देश के नर्वस सिस्टम को दुरूस्त करना पहली प्राथमिकता होना चाहिए। जिस तरह से मौजूदा केन्द्र सरकार में शिक्षा नीति में परिवर्तन कर जो लंबी छलांग लगाने का खाका खींचा है अगर इसके साथ विभिन्न डाटा संकलन के लिए अगर राष्ट्रीय स्तर पर एक समृद्ध, समर्थ संस्था का टाॅप-टू वाॅटम निर्माण होता है, तो वह राष्ट्र निर्माण में दूर की कोणी साबित हो सकती है। इसके साथ ही जो सबसे अहम सवाल आज भारतवर्ष के सामने सुरक्षा को लेकर है उसके मद्देनजर सरकारों को अपनी सुरक्षा नीतियों की समीक्षा के साथ अंतराष्ट्रीय सीमाओं से लगे राज्यों में नये सिरे से सुरक्षा की समीक्षा करनी चाहिए और जरूरत अनुसार उनका विस्तार तथा व्यवहारिक जीवन से उसे ...

म.प्र. में मेरिट बनेगी रोजगार का आधार भरे जायेंगे खाली पद

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अगर खबर ठीक है तो आने वाला समय 10-12वीं के उत्र्तीण छात्रों को बेहतर रहने वाला है। जिसमें मेरिट तो रोजगार का आधार होगा ही, साथ ही स्थानीय आवेदकों को अधिक मौका मिलने की संभावना है। यूं तो खबर म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान के हवाले से एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित हुई है जिसका खुलासा खबर अनुसार म.प्र. के मुख्यमंत्री ने 15 अगस्त के अवसर पर किया। जिसमें तर्क है कि एक ओर कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे विभागों को सहूलियत मिलेगी, तो वहीं दूसरी ओर भर्ती घोटाले जैसे काण्डों से सरकारों को मुक्ति मिलेगी। देखना होगा कि म.प्र. के मुख्यमंत्री की मंशा कब और कैसे म.प्र. में फलीभूत हो पाती है। 

संकल्प से समृद्धि का सैलाब आध्यात्म से संभव उत्पत्ति से अंत का सिद्धान्त ही समृद्ध, खुशहाल जीवन का विज्ञान जहन की हलचल को जुनून की तलाश

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है कि अगर समझ सही हो और मन शान्त हो तो समृद्ध, खुशहाल जीवन का मार्ग कभी कठिन या असंभव नहीं हो सकता। मगर अनादिकाल या जन्म से मानव के जीवन की दो गलतफहमी की एक उससे सुन्दर और दूसरा उससे अधिक विद्ववान इससे पूर्व शायद ब्राम्हाण्ड में नहीं हुआ। लगता है मानव की यहीं समझ और अहंकार ने उसका पीछा आज तक नहीं छोडा। जो मानव इन दो गलतफहमियों से स्वयं का पीछा छुडाने में सफल रहे वह महा मानव के रूप में जाने पहचाने गये। इस सत्य से कोई भी मुंह नहीं मोड सकता कि जो जीवन विरासत से प्राप्त समृद्ध सभ्यता, संस्कृति, संस्कार के संरक्षण में अपना लक्ष्य जीवन निर्वहन में सिद्ध करने के सार्थक प्रयास करते रहे वह अपना जीवन श्रेष्ठ ही नहीं, समृद्ध खुशहाल बनाने में भी सफल रहे। मगर जब तब मानव सभ्यता अपनी महान संस्कृति और संस्कारों से दूर हुई उसने मानव को अक्षम, असफल सिद्ध कर मानवीय जीवन में दुःख और दरिद्रता का कारण बना। अगर आज भी हम अपनी अनमोल विरासत के सीख लें, उत्पत्ति अंत के सिद्धान्त को जान आध्यात्म के सहारे व्यवहारिक ज्ञान अर्थात विज्ञान के रूप में जीवन निर्वहन को सिद्ध ...

महान मायावी दल.........तीरंदाज ?

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। भैया- आंख लाल, मस्तिष्क पर त्रिपुंड, बिखरी जटा को लेकर तने कहां घूम रहा है, क्या नाथ धाम, वृन्दावन से लौट फुल रूप से बावला हो चुका है।  भैये- बावले, पागल, सिर्री हो म्हारे दुश्मन, मने तो बेवीनार कर सोशल मीडिया के महासागर में मंथन कर, महान मायावी दल का गठन पंजीयन कर अब चुनाव और हाथों-हाथ सरकारों की गठन की सोच रहा हूं। क्योंकि म्हारे को इशारा है कि वेघर घूमती म्हारी गौमाता, गौवंश को अब तो न्याय तभी मिल सकेगा जब म्हारा महान मायावी दल सत्ता में सत्तारूड हो सकेगा। जिसके लिए पहले मने बेवीनार से माहौल बनाऊंगा फिर बीसी और वीडियों-काॅल पर लोगों को अपनी बात समझाऊंगा, साथ ही सोशल मीडिया में करोडा वीवर बना पार्टी का खेल जमाऊंगा और सोशल मीडिया पर ही जमकर प्रचार चलाऊंगा। मगर यह तभी संभव है जब मैं सोशल मीडिया के समुद्र का सफल मंथन कर अमृत-अमृत म्हारे मायावी दल को और सोमरस औरों को पिला पाऊं। क्योंकि बैसे भी सियासी समुद्र में बडी-बडी भेल, क्रोकोडाइल, मगरमच्छ विषधरों का अम्बार भरा पडा है। छोटी-मोटी मछली, कीटपंतगे, हिरण, खरगोश, बंदर, पशुधनों का झुण्ड अभी भी बे...

तिरस्कृत आत्मा, घट-घटे में आधार, कैसे हो समृद्ध जीवन निर्माण सत्य निष्ठा पर उठते सवाल

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है सैकडों वर्ष पूर्व ईश्वर तुल्य संत पुरूष से बचपन में उनके पिता ने गांव वालों की शिकायत पर नाराजगी व्यक्त करते हुए पूछा बेटे तुम गांव छोडकर इस मरघट में क्या करते हो, यह अच्छी बात नहीं। इस पर संत श्री उस बाल स्वभाव ने पिता को उत्तर देते हुए प्रति प्रश्न किया कि पिताजी लोग तो गांव में मरते है, यहां तो आज तक कोई नहीं मरा, बल्कि जो गांव में मर जाते है उनका अंतिम संस्कार यहां होता है, तो लोग जहां मरते है वह मरघट हुआ यहां तो शरीर को मुक्ति मिलती है अर्थात लोग गांव में मरते है इसलिये गांव वालों की शिकायत ठीक नहीं। इस पर उनके पिता निरोत्तर हो गये। ऐसा ही एक सवाल अनायास वर्तमान हालातों के मद्देनजर एक सज्जन पुरूष को संवाद के दौरान यक्ष दिखा, जिस पर उन्होंने संवादकर्ता से कहा कि लगता है कि अब जंगल, जंगल नहीं गांव, शहर, नगर हो लिए और नगर, शहर, गांव अब जंगल बन गये। संवादकर्ता ने बगैर समय गंवाये प्रति उत्तर में पूछा कि यह तुम क्या अनायास सवाल-जबाव कर रहे हो, इस पर वह सज्जन पुरूष बोले कि ईश्वर या सृष्टि ने मानव को अपनी अमूल्य कृति के रूप में सृजित किया थ...

मायानगरी के खुले रंगमंच पर मृत्यु की पटकथा........तीरंदाज ?

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व्ही.एस.भुल्ले भैया- कौन नायक, कौन खलनायक हीरो, हीरोईन, डायरेक्टर, प्रोडूसर, लाईट तथा लेखक, टेक्टनीशियन किरदार है। मायानगरी की गगनचुंबी ईमारतों से रंगमंच पर बरसी मौतों का सच क्या है इसका फैसला तो आॅडियंस अर्थात दर्शक ही कर सकते है। मगर मंच, रंग मंच और फिल्म निर्माण के लिए विख्यात-कुख्यात महानगर में कभी ऐसा भी खुला मंच सजेगा किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा। मगर कै करू धक्के खाती म्हारी इस महान कद-काटी का, जो कोरोना कहर के बीच खुले रंगमंच की पटकथा में दो-दो प्रदेशों की पुलिस के बीच कानूनी लट्टम लट्ठा का नंगा नाच देख रहा हूं, अब तो म्हारे तोता मिट्ठुओं की टोली भी इस रंगमंच पर अपने-अपने किरदार निभाने सरेआम कूद पडी है आखिर इस पटकथा का सच क्या है ? भैये- चुनाव चिन्दी, चन्दा पार्टी गठन से पूर्व सर पर पैर रख कहां भागे जा रहा है और मुंह में गिलौरी डाल, आखिर क्या बढबढा रहा है।  भैया- सुनना चाहे तो सुन, न तो मने इस भीषण बारिश में 10 जनपथ जा रहा हूं, न ही जेसलमेर, मने तो चुनाव चिन्दी चंदा पार्टी के चिंदी पन्ना सहित विधान गठन की सामग्री सर पर रख चुनाव चंदा पार्टी के गठन से पूर्व ही मां गंगा ...

काउंटर किल्लर संस्कृति में दम तोडता सामर्थ पुरूषार्थ गैंगबंद सियासत से कमजोर होता, समृद्ध सृजन सिद्ध सामर्थ, प्रमाणिक पुरूषार्थ, का आधार संतुलन अविश्वास, पूर्वाग्रह कमजोर संकल्प का आधार

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है गैंगबंद होना या संगठित रहना समृद्ध सामर्थ और पुरूषार्थ की पहचान होती हो, मगर इतिहास से अनु भव और वर्तमान पुरूषार्थ  का साक्षी होता है जिसके आधार पर भविष्य का निर्माण सिद्ध होता है। ऐसे में अगर संकल्प सिद्धि के लिए अविश्वास, पूर्वाग्रह की बेसागियों पर समृद्ध खुशहाल जीवन की कल्पना सार्वजनिक जीवन का आधार हो तथा शान्त समृद्ध जीवन के लिए सृजन में संघर्षपूर्ण साधन साध्य हो, तो वह सामर्थ पुरूषार्थ संतुलन के आभाव में कभी सिद्ध नहीं हो सकता। अगर ऐसे में काउंटर किल्लर संस्कृति के बीच सृजन में सडे सिस्टम से समृद्ध खुशहाल जीवन की खोज हो, तो वह असंभव ही नहीं, नमुमकिन होती है। क्योंकि मानव जीवन में जीवंत निर्वहन के माध्यम भी उसकी सफलता असफलता का मूल आधार बनते है वर्तमान और भविष्य की दिशा और दशा तय करते है। क्योंकि किसी भी व्यवस्था में संकल्प लक्ष्य की रीड होता है तो सिस्टम उसका नर्वस सिस्टम जो जीवन को स्वच्छंद फलने फूलने का मार्ग सुनिश्चित करता है और जिससे एक समृद्ध खुशहाल जीवन का निर्माण होता है फिर जीवन निर्वहन की व्यवस्था लोकतांत्रिक हो या राजत...

कोरोनाकाल में मलाई कूटते माईबाप

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से कोरोनाकाल के परिणाम लोगों के सामने आना शुरू हुए और निढाल लोगों का संघर्ष शुरू हुआ वह कब खत्म होगा फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। मगर आये दिन बढते कोरोना के आंकडों से आमजन की जान भले ही सांसत हो। मगर मलाई कूटने वाले पहलवानों की बांछे फिलहाल खिली हुई है। क्योंकि व्यवस्थाओं के भर्राटे में न तो कोई पूछने वाला, न ही कोई बताने वाला, ऐसे में गचागच चल रही व्यवस्थाओं पर अब धीरे-धीरे सवाल उठना ही शुरू हो चुके है। ये अलग बात है कि पीढा के बीच शोध का समय शायद किसी के पास हो, जब बडी-बडी महाशक्तियां, वैज्ञानिक कोरोना के टीके को लेकर ही चारों खाने चित पडे हो। ऐसे में व्यवस्था को लेकर मचे कोहराम में व्यवस्थाओं को लेकर सवाल स्वतः ही यक्ष हो जाते है। मगर कहते है कि अंधेर नगरी चैपट राजा की कहावत जब आमजन की चर्चाओं में ज्वलंत हो, तो संदेह होना स्वभाविक है। फिलहाल देखना होगा कि व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवाल किसी एक संस्था, विभाग, संगठन या व्यक्ति को लेकर नहीं, अगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो जहां जिसका मौका लग रहा है वह सेवा कल्याण की पराकाष्ठा करने से पीछे नहीं हट रहा है...

रोजगार की बाढ से थर्राये बेरोजगार

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। भले ही कोरोनाकाल का दौर हो और लोगों के आगे रोजी रोटी का संकट। मगर रोजगार की बाढ ने ऐसे हालात पैदा कर दिये है कि आंकडों में भले ही लाभांवित होने वालों की संख्या हजारों में हो और करोडो रूपया राज्य और केन्द्र शासन मुहैया करा चुका हो। मगर जिस तरह से लोग रोजगार के लिए भटकते नजर आते है उसे देखकर नहीं लगता कि रोजगार की पहल सार्थक होती दिख रही है। जिस तरह से मनरेगा में मजदूरी के अलावा प्राप्त आवंटन का बटिया बांट हुआ और उसको लेकर उठे सवालों पर जांच की गई भले ही उसमें दोषियों का आंकडा जो भी हो। मगर दोषियों के खिलाफ कारगार कार्यवाही का आभाव इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कहीं न कहीं कोताही का काॅलम कत्र्तव्य निर्वहन के मार्ग में बाधा बना है जो बेरोजगारों के सामने ग्रामीण क्षेत्रों में सामने आ रहा है। अब सच क्या है ये तो कर्ता-धर्ता ही जाने। मगर सवालों का क्या वह तो यक्ष बने ही रहते है। 

शासकीय भवनों पर कुपात्रों का कब्जा राम राज्य की मिशाल बनता शिवपुरी शहर

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से शासकीय भवनों के लिए पात्र महिनों लाईन में लगे रहते है वहीं कई अपात्र अर्थात कानूनी रूप से कुपात्र लोग शासकीय भवनों में वर्षो से कब्जा जमाये बैठे है, न तो उनको किसी कानून की परवाह है और न ही अब आलाधिकारी इतने सक्षम दिखाई देते है कि वह कानून का पालन इन कुपात्रों से करा सके। कहने को शिवपुरी शहर में जिला प्रशासन, जल संसाधन, पीडब्लूडी के अधीन कई भवन शासकीय अधिकारी, कर्मचारियों के लिए मौजूद है। मगर भवन आवंटन का ढर्रा ऐसा बिगडा है कि कई तो सेवानिवृत होने के बावजूद शासकीय भवन नहीं छोडना चाहते, तो कई जिले से या जिला मुख्यालय से वाहन स्थानानातांरण होने के बावजूद मकान छोडना नहीं चाहते। बैवस जिला प्रशासन, जल संसाधन और पीडब्लूडी में हालात ये है कि कोई किसी की सुनना नहीं चाहता। बहरहाल अराजकपूर्ण माहौल के बीच लाईन में लगे कर्मचारियों को उम्मीद है कि कभी तो प्रशासन उनकी भी सोचेगा। जिससे वह पात्रता अनुसार शासकीय भवन हासिल कर शुकून से रह सके। 

कत्र्तव्य, न्याय के समागम की साक्षी बनी आयोध्या संत सभा में साधूवाद के साक्षी बने प्रधानमंत्री सत्य निष्ठा के दर राजधर्म की धर्म-ध्वजा

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। प्रभु राम की जन्मभूमि पर जो संदेश देश के प्रधानमंत्री ने समूचे मानव जगत को दिया वह सार्थक सफल होगा ऐ सी आशा अपेक्षा हर मानव को रखनी चाहिए। जिसके लिए संत सभा में देश के प्रधानमंत्री साधूवाद के पात्र रहे। मगर सत्य शिरोमणी मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम की जन्मभूमि पर जो संदेश राजधर्म की ध्वजा पताका अपने संदेश के माध्यम फहरा, जो राजधर्म का पालन संत सभा के समक्ष हुआ उसे सत्य निष्ठा न्याय के समागम के साक्ष्य के रूप में ही जाना जायेगा। हजारों वर्ष बाद भी आज एक मर्तवा फिर से यह सिद्ध है कि आयोध्या भूमि पर आज भी प्रभु राजाराम और उनके अनन्य सेवक महाबली श्री हनुमान का ही राज चलता है जो प्रधानमंत्री के सम्बोधित संदेश से स्पष्ट है जिसमें सत्य की स्वीकार्यता, सर्वकल्याण का भाव और राजधर्म के निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। इस घटना से इतना तो स्पष्ट है कि नैसर्गिक स्वभाव और प्राकृतिक सिद्धान्त की स्पष्टता स्वतः ही स्पष्ट है जिसे चुनौती देना असंभव ही नहीं, नमुमकिन है। अपनों के बीच अपनों के लिए जनता जनार्दन की खातिर उनके उज्जवल भविष्य सम...

भट्टा बैठालाती बी टीम

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। आज की सियासत में डूबते सियासी संगठनों के सामने सवाल कई हो सकते है मगर फिलहाल चर्चा कांग्रेस जैसे संगठन को लेकर सरगर्म है। एक ओर जहां ए टीम है तो दूसरी ओर बी टीम में डुबाने उछालने की होड मची है अब ऐसे में कांग्रेस के अंदर का सच और तथाकथित मैनेजरों की पहुंच का सच क्या है यह तो कांग्रेसी ही जाने। मगर जिस संभावना को आज से 20 वर्ष पूर्व म.प्र. सरकार के मंत्री स्व. दाऊ हनुमंत सिंह और पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री स्व. अर्जुन सिंह को कांग्रेस संगठन की दशा और दिशा को लेकर चेताया था मगर दुर्भाग्य कि कुछ हो न सका। मगर जो तथाकथित मैनेजर आज सियासी सलाह परोसत स्वयं सिद्ध होना चाहते है वह कांग्रेस में आज भी एक सवाल बने हुए है। जहां तक कांग्रेस की ए और बी टीम का सवाल है तो उसके दिग दर्शन राष्ट्रीय स्तर पर भले ही न हो। मगर म.प्र. में लोगों को स्पष्ट नजर आते है। जिस तरह से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भगवान राम की आस्था और सत्ता में रही कांग्रेस के निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन को लेकर मीडिया के बीच मुखर है और जिस हिन्दू आस्था और आस्था के प्रतीकों पर वह आस्था र...

समझ और शोषण पर उठते सवाल मैनेजरों के हांके से हाफनी भरते विधा, विद्ववान

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जीवन विधा विद्ववान के हुनर और जीवन की रक्षा संरक्षण सम्वर्धन उन्हें समृद्ध बनाने में सत्ताओं का जनहित में बडा योगदान होता है। मगर सियासी मैनेजरों के इशारों पर नाचने वाली तथाकथित मीडिया मैनेजरों से जान बचाने सोशल मीडिया के अंधे कुऐं में कूंदती विधा, विद्ववानों की विधा उनके कीर्तिमान असुरिक्षत हो, जिन्दगी की खातिर लूट पर मजबूर होंगे ऐसा शायद ही किसी ने सपने में सोचा हो। सियासी मैनेजर आज ऐसी विधा, हुनर, ज्ञान का किसी संरक्षित पैमाने के आभाव में बेरहमी से लूट उस विधा को जो सर्वकल्याण में सहायक हो सकती थी उसे अंग-भंग कर स्व-स्वार्थ में नीलाम करने पर तुले है। सियासी गलियारों में विधा ज्ञान का बाजार जिस बीट बाजार के रूप में फल-फूल रहा है सोशल मीडिया में किसी से छिपा नहीं। मगर इस ज्ञान, विधा, विज्ञान की बौद्धिक लूट पर विद्ववानों की चुप्पी कितनी सार्थक, शर्मनाक है यह तो वहीं समझ सकते है। फिलहाल सवाल अनेक है मगर फिलहाल निदान शेष नहीं। देखना होगा कि और कितना समय कालखंड, विधा, ज्ञान के संघर्ष में नियति ने निर्धारित रख छोडा है। 

सर्वमान्य विधि के विधान पर विधि सम्वतों के बीच सडक पर बबाल शर्मनाक स्वयं के नैसर्गिक विधान को त्याग अंगीकार विधान के विरूद्ध आचरण पर उठते संगीन सवाल सुशांत की मौत पर सुलगते जघन्य सवाल

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अब जब अंगीकार विधान का राज हो और विधि सम्वत लोग विधि के नाम पर बैवस बेहाल हो, तो सुशांत की मौत पर सुलगते सवाल उठना तो स्वभाविक है। फिलहाल देश के दो बडे राज्य महाराष्ट्र और बिहार के बीच अपनी-अपनी निष्ठापूर्ण कृतज्ञता को लेकर कत्र्तव्य निर्वहन के हाल बेहाल हो तो फिर सवाल भी किससे और कैसे किये जाये। आज लोकतंत्र का सबसे यक्ष सवाल यहीं है कि जिस मौत और न्याय को लेकर दो राज्यों की पुलिस के बीच विधि सम्वत अधिकारों को लेकर सवाल है उसका सच भले ही भविष्य में सिद्ध हो। मगर विधि सम्वत संस्थाओं के बीच विधि को लेकर खिंची बयानों की तलवारें लोकतंत्र और विधि दोनों के लिए खतरनाक है। इस संशय विवाद में सबसे शर्मनाक बात उस पद प्रतिष्ठा को लेकर है जिसे समूचा देश आईपीएस जैसे सम्मानजनक विधि सम्वत नाम से जाना जाता है और उसकी पहचान एक ऐसे पद के रूप में होती है जिसे सीधे तौर पर संविधान की विधि में संरक्षण प्राप्त होता है। जिसे भारत की जनता जनसेवा, राष्ट्रभक्ति के नाम से भी जानती पहचानती है। बेहतर हो कि संवैधानिक शपथ लें राष्ट्र-जनसेवा का संकल्प लेने वाले इस विवाद की ग...

मानव धर्म, लोक मर्यादा के सर्वोच्चतम संस्कारों की स्थापना का दिन सनातन आस्था पर सवाल असुरिये गुण

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। मानव जीवन में आस्था जो भी जैसी भी हो, या फिर उनका स्वरूप सुरिये असुरिये रही हो। मगर सभी का उद्यगम और समागम ही सनातन आस्था है। विषय शब्द परिभाषा अर्थ को लेकर समझ अनुसार विभिन्न आस्थाओं का सर्वोच्च आस्था के प्रति समर्पण और सवाल हो सकते है उनकी अपनी संस्कृति, संस्कार हो सकते है। मगर लोककल्याण में जिस मर्यादा का मार्ग और मानव धर्म के रूप में कत्र्तव्य निर्वहन का जो मार्ग प्रस्त हुआ उसके सनातन का संबंध होना स्वभाविक है। मगर जीव जगत कल्याण का भाव ही हमे यह सोचने पर विवश करता है कि आखिर सत्य क्या है। यूं तो सृष्टि सृजन में हर जीव का अपना नैसर्गिक स्वभाव और सृजन में प्रकृति से लेकर मानव, जल, थल, और नवचर का अपना-अपना कत्र्तव्य जो सृष्टि सिद्धान्त के उद्यगम और अंत की स्वतः व्याख्या करता है। मगर सृष्टि में मानव जीवन को उसकी अमूल्य कृति और कत्र्तव्य के प्रति कृतज्ञता का पहला और अंतिम प्रायः माना गया है। कहते है कि जीवन में मानव जीवन सृष्टि, सृजन में एक अनमोल अवसर है जिसके कंधों पर सृष्टि के समस्त जीव जगत का भार होता है। जिस लोककल्याण, जन-जीव कल्याण और मा...

कलेक्टर ने जाना विकास कार्यो का हाल

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वीरेंद्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। ये अलग बात है कि शिवपुरी में उपचुनाव संभावित है और राजनैतिक दल भी कमर कसकर मैदानों में कूंद चुके है। ऐसे में जिला प्रशासन के मुखिया तथा अपर कलेक्टर विकास का दौरा होना भले ही स्वभाविक हो। मगर कोरोना से जूझते जिले में बढती कोरोना संक्रमितों की संख्या ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल रख छोडे है। ये अलग बात है कि कोरोना का शुरूआती दौर, जिस सजगकता संवेदनशीलता के साथ सफल रहा। मगर अनलाॅकडाउन और जबावदेह लोगों के गैर जिम्मेदारना व्यवहार से बडे मरीजों ने जिले के लोगों की तपस्या और प्रशासन की मेहनत पर पानी फेर दिया हो। मगर जिले में संक्रमितों की रिकवरी दर दुरूस्त है। ये अलग बात है कि अभी भी कोरोना का खतरा टला नहीं है इसलिये विकास कार्यो के साथ कोरोना नियंत्रित कार्यक्रम में कसावट की अहम जरूरत है। जिस तरह से मरीज निकल रहे है और सरकारों के आदेश-निर्देश पल-पल बदल रहे है वह न तो राज्य के हित में और न ही आमजन के हित मे है। 

सीएम की सीख से सलीके पर लौटे मंत्री

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। भले ही स्वयं के मंत्रियों को कडी सीख देने की सूझबूझ म.प्र. के मुख्यमंत्री को स्वयं कोरोना संक्रमित होने के बाद आई हो, जिसका परिणाम कि जो मंत्री बगैर मास्क के ही सेवा कल्याण में जुटे थे अब उन्होंने मुंह पर मास्क लगाना शुरू कर दिया है। देखा जाये तो इससे पूर्व जिस तरह से माननीय, श्रीमान बगैर मास्क के अपना-अपना निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन कर अनौपचारिक रूप से स्वयं को कोरोनामुक्त सिद्ध करने की कोशिश कर रहे थे लगता है कि सीएम की सीख से उन्हें भी समझ आई और अब अधिकांश माननीय या तो कोरान्टाईन है या चेहरों पर मास्क लगा रहे है।

अर्थ युग में कुलाछे भरता हाईटेक लोकतंत्र अघोषित लिमिटेड, प्रायवेट लिमिटेड के बाद बहु-राष्ट्रीय तंत्र में तब्दील सियासी तंत्र मलाई कूटते माई-बाप मातम मनाते लोग

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है सृजन में सहयोग सम्मान, स्वाभिमान, प्रेम, समर्पण का भाव स्वतः सिद्ध होता है और संतुलन के लिए सृजन में संघर्ष और संहार का विधान भी होता है। मगर सृजन में संतुलन की खातिर दोनों का ही स्थान अहम रहता है तथा मानव कल्याण की कल्पना नैसर्गिक विधान अनुरूप सतयुग, श्रेता, द्वापर का सफर तय कर आज भले ही कलयुग के मुहाने पर हो। मगर अर्थयुग चहुंओर जिस तरह से पैर जमा चुका है और समूचा सियासी तंत्र लिमिटेड, प्रायवेट लिमिटेड और बहुराष्ट्रीय तंत्र के रास्ते चल पडा हो। ऐसे में हाईटेक लोकतंत्र की चर्चा स्वतः बलबती हो जाती है। अघोषित काॅरपोरेट कल्चर में तब्दील सियासी तंत्र से जीवंत कल्याण की उम्मीद भले ही बैमानी लगे। मगर मानव कल्याण, लोककल्याण, जनकल्याण में इसका खुलकर उपयोग यह समझने काफी है कि सियासी मेनेजरों के बल पर स्क्रिप्ट पढते जबावदेह लोग भले ही प्रतीक मात्र चेहरा और लोगों के आदर्श हो मगर इनसे कलफती आशा-आकांक्षाओं का भला होने वाला नहीं। फिर क्षेत्र आर्थिक, सामामिक, राजनीतिक या धार्मिक हो या फिर व्यवहारिक सभी दूर एक सन्नाटा-सा खिचा पडा है और जीवंत, सोश...