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Showing posts from April, 2019

राष्ट्र को समर्पित सिद्धता का वक्त था, वाराणासी का सियासी संग्राम

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस काॅग्रेस का महान इतिहास अनगिनत कुर्बानियों के नाम से जाना जाता है। जिसकी राष्ट्र-जन, कल्याण के प्रति सिद्धता और समर्पण रहा है। उसका स्वयं सिद्धता से बीच सियासी संग्राम से रण छोड़ हो जाना एक सुनहरे इतिहास पर कलंक है। देखा जाये तो चुनावों में हार-जीत मजबूत लोकतंत्र के दो धु्रव है। मगर हार के डर या जीत के अतिविश्वास से स्वयं को सर्वोपरि मानना सार्थक नहीं, क्योंकि लोकतंत्र में लोकमत ही सर्वोपरि और सिद्ध होता है और लोकमत का सम्मान उसका आर्शीवाद किसी भी व्यक्ति, संगठन, दल की सिद्धता में सहायक होता है। काॅग्रेस को वाराणासी सियासी संग्राम में यहीं समझने वाली बात होना चाहिए थी। मगर कि ऐसा हो न सका, जो काॅग्रेस के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बात हो सकती है।

17वीं लोकसभा के महाकुंभ में सायलेन्ट मोड पर मतदाता

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से निर्वाचन आयोग के प्रयासों से विभिन्न माध्यमों से लोगों को अधिक से अधिक मतदान करने के लिए उत्साहित और जागरूक किया जा रहा है यह एक मजबूत लोकतंत्र के लिए सराहनीय कदम हो सकता है। मगर जिस तरह से सियासी रथों पर सवार झूठ, फरेब की पताकाऐं फहरा व्यक्ति, दल, संगठन सियासी संग्राम में सत्ता हासिल करने कूंद पड़े है। उसका परिणाम जो भी हो। मगर जिस तरह से सियासी संग्राम को शंकनाथ करने वाले माध्यमों ने रूक अपना रखा है। उससे निष्पक्ष और सार्थक आवाज से आम मतदाता अवगत हो सके यह दुर्भाग्य पूर्ण है।   कारण चुनावों में धन, बल उपयोग को रोकने कितने ही कदम क्यों न उठाये गये हो। मगर अघोषित तौर पर चुनावों में जिस तरह से धन, बल प्रभावित करने वाली कला, तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है वह आज हर मतदाता को समझने वाली बात होना चाहिए। अगर हम वाक्य में ही एक समृद्ध, सशक्त, खुशहाल लोकतंत्र चाहते है तो आम मतदाता को मतदान बूथ पर पहुंच अपने मत के माध्यम से ऐसे लोगों को सबक सिखाने से कतई गुरेज नहीं करना चाहिए जो महान लोकतंात्रिक प्रक्रिया और एक स्वाभिमानी कौम को भो...

सच से दूर, षड़यंत्रकारी सियासत किसी भी राष्ट्र-जन को घातक

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व्ही.एस.भुल्ले दिन-रात, अच्छा-बुरा, सृजन-विनाश, जन्म-मृत्यु का सन्तुलन और सत्य ही सृष्टि का आधार है। अब ऐसे में सच से दूर सृजन में जीवन, निर्वहन के लिए असन्तुलित सियासत की सिद्धता क्या हो, यह मौजूद लोक-गण-तंत्र में समझने वाली बात होना चाहिए। कहते है कि मानव सृष्टि की वह सर्वोत्तम कृति है जिसके सृजन का समूचा आधार ही जीव-जगत की समृद्धि, खुशहाली है। मगर दुर्भाग्य कि समूचा जीव-जगत तो आज भी अनुशासित तथा कत्र्तव्य निर्वहन के मार्ग पर सार्थक सफल कत्र्तव्य निष्ठ है। मगर मानव बौद्धिक रूप से सक्षम, समृद्ध होने के बावजूद अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन में मोहताज है आखिर क्यों ?  यह यक्ष सवाल आज भी समूचे मानव जगत के सामने है। किसी भी राष्ट्र, भू-भाग की अपनी सभ्यता, संस्कृति हो सकती है। मगर सभी का लक्ष्य एक है। समृद्ध, खुशहाल, राष्ट्र और भू-भाग जिसे तय करना हर नागरिक का कत्र्तव्य होना चाहिए और यह तभी संभव है जब हर मानव अपने-अपने कत्र्तव्यों और जबावदेहियों का निर्वहन वह जिस भी स्थिति में अपना जीवन निर्वहन करता हो। निष्ठापूर्ण ढंग से करे। तभी हम महान मानवीय सभ्यता की विरासत के उतराधिकारी ...

झूठ तंत्र के आगे लड़खड़ाता लोकतंत्र

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। किसी महानुभाव ने शायद सच ही लिखा था कि झूठ का गणतंत्र। ऐसी समझ के पीछे का तर्क या दर्द जो भी हो। मगर व्यक्त भावना में सच का प्रार्दुभाव होना आज के सियासी दौर में स्वभाविक है। यूं तो मसला सोशल मीडिया में फैंक न्यूज सामग्री को रोकने सूचना प्रद्योगिकी अधिनियम 2000 को सार्थक प्रभावी बनाने को लेकर है। मगर महान भू-भाग पर मौजूद लोकतंत्र, गणतंत्र को बचाने उसे मजबूत बनाने कानून बना देना ही काफी नही। अगर इतनी निष्ठा और जबावदेही के साथ कत्र्तव्यों का निर्वहन सियासत में हुआ होता तो आज छदम लोकतंत्र का जन्म ही न हुआ होता, न ही धन लालची, साम्राज्यवादी, सत्ता लोलुप ताकतों की अवैध अघोषित सन्तान के रूप में उसका अस्तित्व स्थापित होता। जिसका न तो जन, राष्ट्र, लोक, तंत्र, गण से कुछ लेना-देना है, न ही सेवा कल्याण आम जन सहित देश की समृद्धि, खुशहाली से कोई वास्ता। सच तो यह है कि फैंक न्यूज सामग्री तथा छवि सुधार तकनीक के नाम जो कत्र्तव्य सोशल मीडिया में जागा है या सोशल मीडिया में छवि चमकाऊ उद्योग भावनाओं की लूट के लिए ये तैयार हुआ है। जिसको लेकर तथाकथित मीडिया...

सत्ता सौपानों से गांव, गली हुआ ढैया बाहर साम्राज्यवादी ताकतों के आगे, नतमस्तक लोकतंत्र न विधान बचा सके, न ही स्वाभिमानी विधि स्वीकार सके

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। छदम लोकतंत्र में दम तोड़ती आशा-आकांक्षायें जिस तरह से साम्राज्यवादी ताकतों ने अकूत धन, प्रभावशाली बल के सहारे लोकतंत्र की आड़ में छदम लोकतंत्र के सहारे दम तोड़ रही है वह सत्ता सुख, स्वार्थवत लोगों द्वारा स्वयं का अघोषित साम्राज्य स्थापित कर सतत सत्ता सुख भोगने का माध्यम छदम लोकतंत्र को बना रखा है जो अब किसी से छिपा नहीें।  जिस तरह से स्वार्थ, साम्राज्य, महत्वकांक्षी अहंकारी युग में सुन्दर भविष्य के सपने देखने वालो का हुजूम बढ़ रहा है उसे समझना होगा कि आखिर ऐसे कौन से सेवाभावी कल्याणकारी लोग है जो निर्वाचन फार्म के लिए हजारों और चुनावों में लाखों घोषित-अघोषित तौर पर खर्च कर भोले-भाले, मेहनतकस, आभावग्रस्त, स्वाभिमानी और नैसर्गिक रूप से समृद्ध लोगों की सेवा करना चाहते है। परिणाम कि जिस राष्ट्र में 50 फीसदी मातायें अल्प रक्त बच्चे कुपोषण और पशुधन अनुपयोगी धन के रूप में मौजूद हो तथा युवा, बेरोजगार, संसाधनों के मोहताज हो। ऐसे में स्वयं के खर्च पर चुनाव लड़ कुबेरपति पार्टियों, हेलीकाप्टर, हवाईजहाज, लग्झरी वाहनों में फर्राटे भरते लोग चुनाव कौन-सी से...

रण छोड़, नीत पर सवाल 2 कदम आगे फिर 4 कदम पीछे की रणनीत आखिर कितनी कामयाब होगी

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। यह कहना जल्दबाजी होगी कि दो कदम आगे चार कदम पीछे पीछे रणनीत कितनी सफल, असफल होती है। मगर यह समृद्ध राजनीति और लोकतांत्रिक, परम्परा का सम्पूर्ण सच नहीं। विगत दो दशक में देश में जिस तरह से देश के सबसे पुराने दल ने क्या खोया क्या पाया सभी के सामने है। मगर गलतियों से सीख न ले पाना नादानी ही कहा जायेगा। परिणाम कि स्वयं के स्वार्थ छोड़ उसके पास न तो समर्पित कार्यकत्र्ता है, न ही वह खाटी नेता जिन पर विश्वास कर आम नागरिक झण्डा उठा सके। सर्वकल्याण, त्याग, बलिदान को समर्पित संगठन का सच यह है कि शनै, शनै वह स्वयं ही अपने कृत्यों के चलते निस्तनाबूत होने के कगार पर जा रहा है। जिसकी न तो कोई नीति शेष रही, न ही रणनीत बल्कि रणक्षोर वीरों में तब्दील यह महान दल, शायद अपने अन्तिम पड़ाव पर है। जिसकी शर्मनाक विदाई भर शेष है। कहते है जिसके कोई मूल्य सिद्धान्त सरोकार, नही होते वह स्वतः ही समाप्त हो जाता है। खासकर युद्ध के मैदान में जिस सेनापति के शौर्य पर सैनिकों की आशा उम्मीद होती है। अगर वह रण छोड़ बन जाये तो जीत हार का अर्थ समझा जा सकता है।  जय स्वराज

खुशहाली को तरसता समृद्ध, देश

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है मानव ही नहीं समस्त जीव, जगत, सृष्टि में सृजन हेतु अपने प्राकृतिक नैसर्गिक गुणों के आधार पर स्वच्छंद खुशहाल सार्थक, सफल जीवन का अन्तिम लक्ष्य रखता है। जो उसका नैसर्गिक कत्र्तव्य और अधिकार भी है। मगर अफसोस कि हम एक समृद्ध, शिक्षित, संस्कारिकता भू-भाग विरासत के उतराधिकारी न तो उन्हें सुरक्षित रख, संरक्षित कर पाये, न ही अपनी नस्लों को अपने महान संसाधनों को संरक्षित कर सहज अवसर उपलब्ध करा पाये। जिस समृद्ध विरासत और महान भू-भाग पर हम गर्व कर स्वयं को गौरान्वित मेहसूस करते थे। बेहिसाब कुर्बानियों से प्राप्त आजादी के पश्चात भी हम विगत 30 वर्षो में सुरक्षित नहीं रख पाये। बल्कि छदम लोकतंत्र और सत्ता के लिए स्वार्थवत धन पिपासुओं के समूहों, व्यक्तियों ने दूध, दही, छांच, नीर और खाद्य औषधि, प्राकृतिक संपदा के भंडार ही नहीं शारीरिक, बौद्धिक, अध्यात्मिक प्रतिभाओं वाले इस महान भू-भाग, राष्ट्र को छदम स्वार्थवत नीतियों के माध्यम से पंगू बना उसके पुरूषार्थ को बदनाम करने का कार्य हुआ। परिणाम सामने है कि कभी समूचे विश्व को खुशहाल, समृद्ध, जीवन का दर्शन दे...

गांधी को नमन पर विचारों पर कफन, शर्मनाक- व्ही.एस.भुल्ले

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कहते है धर्म, मत, पंथ, विचार में भिन्नता हो सकती है, मगर लक्ष्य एक ही होता है। गांधी दर्शन भी लगभग इसी के इर्द-गिर्द है। मगर आजाद भारत में जिस तरह से गांधी जी को नमन और उनके विचारों को कफन तैयार करने का कार्य सत्तामद में चूर, सत्ताओं ने किया है। वह इस महान भारतवर्ष के लिए दर्दनाक भी है और शर्मनाक भी। गांधी कोई नाम नही बल्कि जीवन्त विचार है। जो जीवन में कभी अप्रशासिंग नहीं हो सकता। मगर सत्ता उन्माद और सत्ता मद में डूबे लोगों के लिए भले ही सिर्फ नाम हो सकता है। देखा जाए तो समृद्ध, खुशहाल जीवन का यह जीवन्त आधार है। इस सत्य को सत्ता, सियासी दलों को समझना चाहिए और अपने कत्र्तव्य निर्वहन निष्ठापूर्ण ढंग से करना चाहिए। क्योंकि सृष्टि में उन्माद, हिंसा का कभी कोई स्थान न रहा, न ही हो सकता है। सार्थक, सफल जीवन में इतिहास गवाह है कि नैसर्गिक गुण आधार और निष्ठापूर्ण अनुशासित कत्र्तव्य निर्वहन ही जीवन के सृजन को सार्थक सिद्ध कर सकता है।  जय स्वराज

गांधी की सार्थकता को लेकर, सुब्बाराव जी से बतियाये स्वराज मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। महान गांधीवादी एस.एन सुब्बाराव से गांधी विचार की सार्थकता, वर्तमान परिपेक्ष्य में लेकर, बतियाये स्वराज मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले से बतियाते हुए श्री सुब्बाराव ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि परिपेक्ष्य जो भी हो। मगर गांधी विचार की सार्थकता कभी खत्म नहीं हो सकती, न ही वह कभी अप्रसांगिक हो सकता है। क्योंकि गांधी दर्शन का आधार सत्य और उसकी सार्थकता है और उन्होंने समूचे जीवन काल में ही इसे सिद्ध करके दिखाया और जिसने भी गांधी दर्शन को आत्मसात किया वह किसी न किसी रूप में भारतवर्ष ही नहीं समूचे विश्व में कहीं न कहीं सिद्ध रहा है यहीं गांधी दर्शन की सिद्धता है। कभी जिस ब्रितानियां हुकूमत या लाल निशान समूचे विश्व में नजर आता था। आज वह विश्व मानचित्र में ढूंढ़े नहीं मिलता। क्योंकि समृद्ध, खुशहाल जीवन का मूल मंत्र सत्य, अहिंसा और प्रेम है। जिसका गांधी जी ने सम्पूर्ण जीवन निषठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन किया और यहीं सर्व धर्मो, मत, पंथों का संदेश है। उम्रदराज हो चुके एक थैला 2 नैकर शर्ट के साथ अनुशासित संयमित जीवन निर्वहन करने वाले सुब्बाराव यूं तो स्वयं को घुमक्कड़ क...

राष्ट्र, मानवता को समर्पित, महान गांधीवादी सुब्बाराव जी बोले प्रेम, अहिंसा, कत्र्तव्य, निर्वहन, जबावदेही के साथ समृद्ध, खुशहाल राष्ट्र निर्माण चाहते है

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी। बगैर किसी प्रसंशा, पुरूस्कार की परवाह किए बगैर राष्ट्र मानव, कल्याण के मार्ग पर गांधी जी से प्रेरणा लें, अभी तक अपनी यात्रा जारी रखने वाले महान गांधीवादी एस.एन.सुब्बाराव कहते है कि यह अजीब दौर है जब देखने में आ रहा है कि जो कार्य, जो कत्र्तव्य निर्वहन जबावदेही के साथ राजनैतिक दलों को करना चाहिए था वह कार्य आज समाजसेवी संस्थाओं, संगठनों को करना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें समृद्ध, खुशहाल जीवन के लिए एक बड़ी उम्मीद की किरण युवाओं में दिखाई देती है। उम्मीद है कि वह स्वयं के साथ अपनी आनी वाली पीढ़ियों के बेहतर जीवन उनके भविष्य के लिए पूर्ण निष्ठा जबावदेही के साथ अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन कर, इस राष्ट्र को समृद्ध, खुशहाल बनाने में कामयाब होगें।  उन्होंने गांधी विचार की प्रसांगिता पर बोलते हुए कहा कि अहिंसा का दूसरा नाम गांधी है जिन्हें न तो सीमाओं में बांधा जा सकता है और न ही उन्हें अन्य विचारों से बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि गांधी जी जानते थे कि जिस महान भू-भाग पर उनका जन्म हुआ है वह महान है उसकी समृद्धि, खुशहाली उनकी विरा...

सत्य परेशान हो सकता है मगर परास्त नहीं- सिंधिया मेरे लिए क्षेत्र की जनता, स्थापित मूल्य सिद्धान्त, विकास, सेवा, कल्याण सर्वोपरि

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वीरेन्द्र शर्मा पत्रकारों के सवालों पर प्रति सवाल करते हुए काॅग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पत्रकारों के बीच कहा कि मेरे लिए चुनाव कोई एक माह, एक दिन का नहीं, पूरे 5 वर्ष चलता है, आप गवाह है कि मैं हर माह नियमित आप लोगों के बीच आता हूं, विकास, सेवा, कल्याण की योजनाऐं, धन, लाने से लेकर उन योजनाओं को मूर्तरूप देने के साथ क्षेत्र के लिए और जनता जनार्दन के लिए बेहतर क्या हो सकता है उसका प्रयास करता हूं। एक अन्य सवाल के जबाब में उन्होंने कहा कि मैं सेवा कल्याण, विकास के साथ मूल्य सिद्धान्तों की राजनीति में विश्वास रखता हूं और मेरा तो कहना है कि सत्य परेशान हो सकता है, मगर परास्त नहीं। मेरे लिए मेरे क्षेत्र की प्रिय जनता उसकी सेवा, कल्याण, विकास सर्वोपरि है और इसे मैं हमेशा कायम रखूंगा। 

3 बजे बाॅम्बे कोठी पर सिंधिया करेगें पत्रकारवार्ता

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 19 मार्च दोप. 3 बजे बाॅम्बे कोठी पर पत्रकारवार्ता का आयोजन किया गया है। प्राप्त सूचना के अनुसार इस प्रेसवार्ता को काॅग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया सम्बोधित करेगें।

स्वास्थ और खाद्य मंत्री बतियाये मीडिया से, 20 को करेगें सिंधिया पर्चा दाखिल गांधी पार्क में होगी भव्य सभा

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। शिवपुरी। शिवपुरी स्थित एक होटल में आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान म.प्र. शासन के खाद्य मंत्री प्रघुम्मन तोमर स्वास्थ मंत्री तुलसी सिलावट ने पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा के दौरान कहा कि सिंधिया जी ने क्षेत्र के विकास कल्याण के लिए रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, परिवहन, सड़कों के क्षेत्र में अभूत पूर्व कार्य किए है जो सभी के सामने है। जिन कमियों को आप लोगों ने गिनाया है वह भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के कुशासन और झूठ की देन है। चुनाव पश्चात उन कमियों को दुरूस्त करने में कोई कोताही नहीं होगी। यह विश्वास हम आप सभी को दिलाना चाहते है। गांधी पार्क में होने वाली सभा में हमारे नेता व काॅग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव श्रीमंत सिंधिया अपनी बात रखेगें और हमें उम्मीद है कि क्षेत्र को वह अपना दिल मान, दिन-रात एक कर, योजना-परियोजना और केन्द्रीय शासन से धन लाने वाले श्रीमंत बतायेगें कि भविष्य की रूप-रेखा क्या होगी। विलेज टाइम्स संपादक वीरेन्द्र शर्मा के सवाल पर संघीय ढांचे में एक सांसद की भूमिका पर प्रभारी मंत्री तोमर ने स्पष्ट किया कि संघीय व्यवस्था में केन्द्र, ...

प्राकृतिक आपदा के चलते बिजली व्यवस्था में जरूर कुछ कमी आई है लेकिन जल्द ही हम उसे दुरूस्त कर लेगें- पाराशर जी.एम. मध्य क्षेत्र विधुत वितरण कम्पनी

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। विधुत व्यवस्था को लेकर जिस तरह का आक्रोश आम नागरिकों में देखा जा रहा है उसे लेकर म.प्र. विधुत वितरण कंपनी शिवपुरी के महाप्रबंधक पी.आर. पाराशर ने विलेज टाइम्स से कहा है कि समय पूर्व मौसम में आये बदलाब और लगातार आंधी तूफान के चलते हमारी सप्लाई व्यवस्था अवश्य प्रभावित हुई है। मगर जल्द ही हम दुरूस्त कर, उसे सामान्य कर लेगें। जिसके लिए बकायदा हमने हमारी टीमें तैनात कर रखी है। जिसमें कभी-कभी दुरूस्तीकरण में काफी लम्बा वक्त लग जाता है। मगर जल्द ही सबकुछ ठीक कर लिया जायेगा।

संस्कार विहीन, क्रिमनल, करोड़पतियों से सनी सियासत के बीच दम तोड़ते, सत्य, मूल्य, सिद्धान्त 543 में से 91 के बाद 95 सीटों पर मतदान

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। यूं तो 7 चरण में देश की 543 सीटों पर हो रहे चुनाव के परिणाम 23 मई को आना है। जिसका दूसरा चरण 96 सीटों पर पूर्ण होना है। मगर 2019 लोकसभा के लिए चल रहे मतदान में संस्कार विहीन, क्रिमनल, करोड़पति सियासत का चेहर कुछ नेताओं के रूप में देश के सामने आ रहा है। आज जिस तरह की सियासत, सियासी दल या सियासी लोग चुनाव जीतने बयानों के माध्यमों से संस्कार ही नहीं, मूल्य सिद्धान्तों को दरकिनार कर, अपनी जीत सुनिश्चित करने पर तुले है। प्रमाण कि कई दलों के चोटी के नेताओं पर अनरगल बयानवाजी को लेकर चुनाव आयोग ने कड़ी कार्यवाही की है। तो वहीं बैलूर सीट का चुनाव रद्द करना पड़ा है।   ऐसे में सत्य, सिद्धान्त, मूल्यों की खोज आम मतदाता के सामने सबसे यक्ष सवाल होना चाहिए। मतदान निष्ठापूर्ण सत्य, समृद्ध, खुशहाल,सशक्त राष्ट्र निर्माण के लिए 100 फीसदी होना चाहिए। जिससे शिक्षा, प्रतिभा, विकास के साथ चुनावी प्रक्रिया को और अधिक लोकतांत्रिक सहज, सरल, समानता मूलक और सेवा, कल्याण उन्मुखी बना, सच्चे और अच्छे प्रतिनिधि व सरकार को चुना जा सके और मतदान को 100 फीसदी कर, अपने खुशहाल...

शिवपुरी में सच झूठ के बीच छिड़ा, सियासी संग्राम संवैधानिक जवाबदेही को लेकर चर्चाए सरगर्म सियासत सेवा, विकास, कल्याण बने चर्चा का विषय

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। भले ही शिवपुरी गुना संसदीय क्षेत्र मे कांग्रेस से श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया व बसपा से प्रत्याशी की घोषणा के बाद भाजपा ने अपना उम्मीदवार घोषित न किया हो। मगर सांसद की संवैधानिक जवाबदेही को लेकर आमजन के बीच चर्चाएं अवश्य सरगर्म में है। फिलहाल सच झूठ की सियासत के बीच जीत हार के दावे जो भी हो।  मगर विगत 20 वर्षों का सियासी इतिहास गवाह है। जहां वर्तमान सांसद विगत 20 वर्षों से लगातार अपने सेवा कल्याण विकास सद्भाव समरसता के प्रमाणिक सवालों के साथ निरंतर जीत दर्ज करा मूल्य सिद्धांतों की राजनीति पर अडिक है। तो वहीं विगत 20 वर्षों से अपनी संवैधानिक जवाबदेही को लेकर भी सजग है। अपने संसदीय क्षेत्र में आने वाले गुना, अशोकनगर, शिवपुरी के बेनागा नियमित दौरे प्रशासनिक बैठकों के साथ योजनाओं की सैद्धांतिक व्यवहारिक समीक्षा मौके पर भ्रमण व समय सीमा को लेकर प्रशासनिक तंत्र से सवाल जवाब करते रहे हैं। इसका परिणाम है कि वह विगत 20 वर्ष में क्षेत्र में हजारों करोड़ से निर्मित योजनाओं को मूर्त रूप देने में सफल रहे। फिर चाहे वह रोजगार से जुड़े नवीन निर्मित प्र...

सेवा, सर्वकल्याण को समर्पित सार्थक सच ग्वालियर.चम्बल बना मिशाल

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                                                                              वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। ये अलग बात है कि जब आज की राजनीति में स्वार्थ सर्वोपरि और सेवा कल्याण दूसरे पायदान पर होए ऐसे में सियासी लोगए सत्ताए सरकार और सियासत का सच समझना आवश्यक है। जहां लोग स्वयं के स्वार्थ के लिए सुबह से शाम तक संघर्ष करने नजर आते होए तो कोई अपनी विरासत को संरक्षित करए बढ़ाते नजर आते हो। ऐसे में सेवाए सर्वकल्याण को समर्पित सच का विश्लेषण आवश्यक हो जाता है।  देखा जाये तो ग्वालियर.चम्बल ही नहींए समूचे मण्प्रण् में कई सियासी लोग अपने और स्वयं की स्वार्थ पूर्ति हेतु सियासत में स्थापित हुए और उन्होंने सत्ता और सियासत का वह मुकाम भी हासिल किया। जिसके लिए शख्सियत आज भी सियासत में संघर्षरत है। मगर विगत 20 वर्षो में एक नाम ऐसा भी सियासी हल्कों में सियासतदारों के बीच स्थापित हुआ है ज...

संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को झूठ नहीं देश को, सच बताना चाहिए चुनाव पश्चात देश के सामने होगा सच, गोविंद सिंह राजपूत मंत्री म.प्र. शासन

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वीरेंद्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। शासन के राजस्व परिवहन मंत्री गोविंद राजपूत ने प्रेस काॅन्फ्रेंस के दौरान अनौपचारिक चर्चा के दौरान विलेज टाइम्स संपादक वीरेन्द्र शर्मा के सवालों के संबंध में कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक पद की अपनी गरिमा होती है। मगर संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति या व्यक्तियों को देश से झूठ बोलकर उस पद को कलंकित नहीं करना चाहिए। सत्य अहिंसा कांग्रेस का अनुवांशिक गुण है। सत्य की खातिर कांग्रेस शुरू से ही लड़ती रही है और गांव, गरीब, बेरोजगार की खातिर सत्य के लिए आज हमारे नेता राहुल जी के नेतृत्व में पूरे देश में काॅग्रेस चुनाव लड़ रही है और वहीं लड़ाई म.प्र. में भी हमारे नेता कमलनाथ सिंधिया जी के नेतृत्व में लड़ी जा रही है। जीत काॅग्रेस की ही होगी। उन्होंने विपक्षी दल पर पलटवार करते हुए कहा कि चैकीदार को चोरी का सच देश को बताना चाहिए। चुनाव पश्चात चोरी का सच देश के सामने होगा।  अंत में उन्होंने कहा लोकसभा 2019 का चुनाव सत्ता नहीं सत्य और झूठ के बीच की जंग है, जिसमें सच की जीत सुनिश्चित है। सिंधिया के चुनाव क्षेत्र को लेकर हुए सवाल पर सिंह ने कहा कि सिंधिया की ...

शिवपुरी में जल उद्योग शुरू

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वीरेन्द्र शर्मा विेलेज टाइम्स समाचार सेवा। पिछले वर्ष 600 का टेंकर भीषण गर्मी में कितने का बिचेगा फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। 600 रूपये में 600 लीटर हर महीने शुद्ध पेयजल पीने चुकाने पड़ते है। अब इसे शिवपुरी का सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य कि रोजगार तो कलफते लोगों को रोजगार भले ही नसीब न हुआ हो। मगर शुद्ध पेयजल या नहाने-धोने के जल तथा रोजगार के नाम खनन, रेत, रशद, शराब, उद्योग अघोषित रूप से फिलहाल चरम पर है।  कहते है कि किसी भी सत्ता सरकार का पहला कत्र्तव्य उस जन, नागरिक को जीवोत्पार्जन के लिए रोजगार व रोजगार के अवसर सहज, शुद्ध पेयजल सहित सस्ती शिक्षा मुहैया कराना होता है। मगर दुर्भाग्य कि शिवपुरी में यह अहम सुविधा भी लोगों को सहज उपलब्ध नहीं। अफसोस और शर्मनाक बात तो यह है कि लाखों, करोड़ों रूपया शुद्ध पेयजल के नाम ठिए-ठिकाने लगाने वाली संस्थाओं तथा सरकारों के रहते शुद्ध पेयजल सप्लाई के कई पेयजल प्लान्ट शहर में खुले हुए है। तो वहीं सैंकड़ों पानी के टेंकर शहर की गलियों में दिन-रात फर्राटे भरते घूम रहे है।  ये अलग बात है कि सैंकड़ों करोड़ के शराब व्यवसाय व अघोषित रूप से करोड़ों रू...

गांव, गली की सड़कों पर फर्राटे भरते बेलगाम वाहन

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से आज सुरक्षित परिवहन व्यवस्था विहीन माहौल में दो पहिया, चार पहिया वाहन फर्राटे भरते नजर आते है, तो कभी-कभी ऐसे वाहन प्रशिक्षण विहीन लोगों के हाथों लोगों की मौंत तक का कारण बन जाते है। यह मौजूद सत्ता, व्यवस्था उस समाज और परिवार के लिए दर्दनाक और शर्मनाक भी होना चाहिए। जो स्वयं शिकार होने पर दुःख से रोता है तो दूसरे के शिकार होने पर निहित स्वार्थवत आंख बन्द कर लेता है। 

न्याय, संकल्प, आधार अस्तित्व की संभावनाओं की तू-तू, मैं-मैं के बीच अनुतरित रहे यक्ष सवाल

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व्ही.एस.भुल्ले विेलेज टाइम्स समाचार सेवा। 91 लोकसभा सीटों पर प्रथम चरण के मतदान शुरू होने के साथ ही और न्याय, संकल्प, आधार अस्तित्व की संभावनाओं की तू-तू, मैं-मैं के बीच यह अलग बात है कि राष्ट्र-जन से जुड़े यक्ष सवाल आज भी अधूरे है। जबकि 6 चरणों में 543 लोकसभा सीटों में से शेष बची सीटों पर मतदान होना अभी शेष है।  यह भी अलग बात है कि इस महान राष्ट्र और लोकतंत्र का मिजाज समृद्धि, खुशहाली को लेकर कहीं अल्हड़, मदमस्त, तो कहीं स्वाभिमानी, न्याप्रिय है, तो वहीं इस महान राष्ट्र-जन का भोलापन उसका अनुवांशिक और विरासत का गुण और उसकी पहचान भी है। मगर लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी का अंतिम लक्ष्य सर्वकल्याण, समृद्ध, खुशहाल और अवसरों से परिपूर्ण स्वच्छंद जीवन होता है। जिस संस्कृति का अंतिम सत्य अहिंसा हो, उस समाज में, उस व्यवस्था में अहम मुद्दों का अहम मौकों पर चर्चा विहीन हो जाना कभी न खत्म न होने वाली समस्या व संकटों के संकेत है। कहते है कि हमारी महान संस्कृति का सर्वकल्याण मूल आधार है। जिसमें व्यक्तिगत ही नहीं, एक दूसरे के प्रति सामूहिक, सहयोग, समर्पण हमारे संस्कारों की सिद्धता रही है। ज...

प्रतिभा, संरक्षण, सम्बर्धन से इतर सियासी दलों का सत्ता संग्राम संस्कार बोलते है, सियासत, सत्तायें जैसी भी, जो भी रही हो

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेेज टाइम्स समाचार सेवा। 300 वर्ष के लम्बे अंतराल के बाद इस महान राष्ट्र का सियासी दौर एक मर्तवा फिर से हमारे महान संस्कार, शिक्षा, संस्कृति, सियासत, सत्ताओं को लेकर फिर से नाजूक दौर में है। जब हमारे जन-तंत्र और सियासत को अपना पुरूषार्थ सिद्ध कर, यह साबित ही नहीं, सिद्ध भी करना है कि सरकारें, सत्तायें आयेंगीं और जायेंगीं। मगर यह महान राष्ट्र व इसकी शिक्षा, संस्कृति, संस्कार, स्वाभिमान, सुरक्षित, संरक्षित रहे और यह तभी संभव है जब हम हमारी प्रतिभाओं को संरक्षण दें, उनके सम्बर्धन के साथ अपनी महान शिक्षा, संस्कृति, संस्कारों को संरक्षित, सम्बर्धन करने एक सहज, सशक्त, सेवाभावी, कल्याणकारी, जनप्रतिनिधि सहित हम सरकार चुन पाये।  कहते है समय, परिस्थिति, पीढ़ी जो भी हो, मगर वह कभी अपने अनुवांशिक, नैसर्गिक गुणों संस्कारों से मुंह नहीं मोड़ सकती। इतिहास गवाह है कि अनादिकाल से स्वार्थवत सत्तायें स्वयं की समृद्धि तथा धन लालसा व अहंकारी अपने अहंकार के चलते इस महान राष्ट्र और इस राष्ट्र के न्यायप्रिय भोले-भाले लोगों के साथ छल करते आये है। मगर ऐसी स्वार्थवत सत्ताओं और लोग इ...

कल्पना, कत्र्तव्य, विमुख व्यवस्था में सैया पर पड़ा लोकतंत्र नवसंस्कृति, शिक्षा, संस्कारों की जकड़ में सियासी तंत्र

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। भारतीय लोकतंत्र में नवसंस्कृति, संस्कारों, शिक्षा के चलते जिस स्वरूप में आज सियासी तंत्र दिखाई पड़ता है उसके चलते कल्पना, कत्र्तव्य, व्यवस्था विमुख जन-तंत्र के बीच लोकतंत्र सैया पर पड़ा नजर आता है। कत्र्तव्य विमुख जबावदेही और आरोप-प्रत्यारोप के माहौल में सियासी दल जिस तरह से आर-पार के मूड़ में नजर आते है वह जन-तंत्र दोनों के लिए ही लोकतंत्र में घातक है। मगर इससे बड़ी दुःखत और शर्मनाक बात इस महान जन-तंत्र के लिए यह है कि जिस संविधान के लिए स्वयं के विधान को त्याग उसे अंगीकार किया गया है। उसी से पोषित संवैधानिक संस्थायें और अधिकार प्राप्त जन अपने कत्र्तव्य और जबावदेही को निभाने में अक्षम, असफल साबित हो रहे है। बेहतर हो कि इस लोकतंत्र की बिना पर या तो संगठित अहंकारवाद, लोकतंत्र में स्वयं को वैचारिक या लोक कल्याणकारी संस्थायें ठहराते नहीं थकते, तो वहीं दूसरी ओर परिवारवाद के सहारे अपने वैचारिक संगठनात्मक आधार को राष्ट्र-जन में कल्याणकारी ठहराते है, जबकि हकीकत इससे इतर है।  देखा जाए तो स्वार्थ और महत्वकांक्षाओं में डूबे समर्थ, सशक्त, धन, बल, बाहु...

शपथ, शिकवा, शिकायतों से शराब विभाग में हड़कम्प

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   वीरेन्द्र  शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अपुष्ट सूत्रों की माने तो न तो जबानी जमा खर्च पर है न हीं किसी साधारण आवेदन पत्र पर, बल्कि शासकीय स्टाम्प पर शपथ पत्र के साथ है और यह सीधे विभाग के मुख्य आलाअफसर अर्थात आयुक्त के खिलाफ हैै। जिसमें स्पष्ट उल्लेख है कि उससे लाखों रूपए की मांग की गई। फिलहाल सच जो भी हो, आवेदन में संलग्न शपथ पत्र में जो उल्लेख है वह विभाग का सच झूठ समझने काफी है। अब ऐसे में जब आचार सहिंता के लागू और शासन सरकार के सिद्धान्ता प्रमुख आयोग है जिस पर व्यवस्था का सारा दारोमदार है। देखना होगा कि इस सनसनी खेज शपथ पत्र पर क्या कार्यवाही होती है और शपथ पत्र पर उल्लेखित बिन्दु क्या रंग लाते है यह देखने वाली बात होगी।

अहम मौके पर राष्ट्रवादियों की चुप्पी घातक सीखने बताने में अक्षम, असफल सियासी दल

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। देखा जाए तो महान भारतवर्ष का सत्य यह है कि आज हमारा महान राष्ट्र लगभग 250 वर्ष बाद एक बार फिर से यौवन पर है। जिस राष्ट्र की 65 फीसदी आबादी भीषण जीवन संघर्ष के साथ समृद्ध, सक्षम, सफल, खुशहाल जीवन के लिए संघर्षरत हो। लगभग शेष आबादी अवसर, संसाधन, सरंक्षण की मोहताज हो। ऐसे में सत्ताधारी दल व विपक्षी दलों का संघर्ष की समीक्षा आवश्यक हो जाती है। भले ही सत्ताधारी दल समूचे विश्व सहित राष्ट्र में राष्ट्र कल्याण सेवा के लिए संघर्षरत हो और विपक्ष फिलहाल सत्ता सर्वकल्याण, राष्ट्र के लिए संघर्षरत है। ऐसे मे हमारी शिक्षा, संस्कार, संस्कृति जो हमारे रक्त में है। वह बताती है कि हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था का  सत्य यहीं है कि जो राष्ट्र-जन समाज को समर्पित है। फिर पक्ष हो या विपक्ष या फिर वह संघर्षरत दल ही क्यों न हो। यहां यक्ष सवाल आज भी यहीं है कि बेहतर दल राष्ट्र जन को साक्षी मान उसके कल्याण में अपने मत वोट के माध्यम योगदान दे और जो जिस काबिल हो उसे अपना मत दे और अपने प्रारब्ध और वर्तमान को सफल सिद्ध करें। जय स्वराज

सच्चे समझदार सेवाभावी, जन लोक सेवकों से ही संभव है शसक्त, समृद्ध, खुशहाल राष्ट्र तथा समर्थ, सक्षम सरकार

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। आज समय है कि समय परिस्थिति के थपेड़े खा स्वयं के अस्तित्व व आधार तो लाख संघर्ष की बावजूद बचाने का, क्योंकि 2019 का लोकसभा चुनाव 250 वर्ष बाद उस समृद्ध, समर्थ, खुशहाल महान भारतवर्ष की दिशा,दशा तय करने का है। अगर आज भी हम अपने अमूल्य मत के माध्यम से सच्चे, अच्छे, समझदार, सक्षम सेवाभावी जनप्रतिनिधि का चुनाव में करने सक्षम, सफल नहीं हुए। यह भी तब की स्थिति में जब हमारी पहचान एक समृद्ध, खुशहाल मार्गदर्शक राष्ट्र के रूप में रही है। यह उस विरासत व वंशजों के नाम और स्वयं के साथ बड़ा अन्याय होगा। बेहतर हो कि हम मतदान केन्द्र पर पहुंच अच्छे सच्चे सेवाभावी सक्षम समझदार प्रत्याशी चुने, जिससे एक शसक्त, सक्षम, सेवाभावी, सरकार, चुन स्वयं व राष्ट्र को समृद्ध, खुशहाल बना सके। 

आर्थिक सुरक्षा एल.आई.सी के नाम लुटे राष्ट्र-जन पर चर्चा क्यों नही ?

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। लगभग 4.50 लाख करोड़ की बसूली राष्ट्र-जन से सरेयाम हुई इस देश में इतनी बड़ी आर्थिक बसूली का सवाल भले ही आज यक्ष है  मगर 2001 से 2011 तक आर्थिक सुरक्षा के नाम जनधन की जिस तरह सरेयाम बसूली का सवाल 2019 में भले ही यक्ष न हो। मगर राष्ट्र-जन इस दर्द को कैसे भूल सकता है। कौन नहीं जानता कि एल.आई.सी के नाम देश के नाम चीन घरानों व व्यवसायी कम्पनियों ने कैसे-कैसे प्रलोभन पूर्ण सुनियोजित तरीके से इस राष्ट्र-जन से लाखों हजार करोड़ रूपए बसूल कर, आम-जन, गांव, गरीब, ही नहीं, बल्कि शिक्षित नौजवानों का भी भविष्य चैपट किया गया है। हो सकता समर्थ, सक्षम, लोगों की संगठित इस जनधन लूट का समूचे विश्व में यह पहला मामला हो, जिस पर आज तक न कोई सवाल हुए न ही कोई जांच बैठी। मगर इतने वर्षवाद भी आज जिस तरह से यह अहम सवाल अनुतरित है यह राष्ट्र-जन को सत्ता संघर्ष में जुटे दलों के बीच छिड़ी जंग में समझने वाली बात होना चाहिए। जय स्वराज

अहम मौके पर राष्ट्रवादियों की चुप्पी घातक सीखने, बताने में अक्षम, असफल

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सियासी महान भारतवर्ष का सत्य यह है कि आज हमारा महान राष्ट्र लगभग 250 वर्ष बाद एक बार फिर से यौवन पर है। जिस राष्ट्र की 65 फीसदी आबादी भीषण जीवन संघर्ष के साथ समृद्ध, सक्षम, सफल, खुशहाल, जीवन के लिए संघर्षरत हो। लगभग शेष आबादी अवसर, संसाधन सरंक्षण की मोहताज है। ऐसे में सत्ताधारी दल व विपक्षी दलों का संघर्ष की समीक्षा आवश्यक है। भले ही सत्ताधारी दल समूचे विश्व सहित राष्ट्र में राष्ट्र कल्याण सेवा के लिए संघर्षरत हो और विपक्ष सत्ता में सर्वकल्याण में। ऐसे मे हमारी शिक्षा, संस्कार, संस्कृति जो हमारे रक्त में है। वह बताती है कि हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्य यहीं है कि जो राष्ट्र-जन, समाज को समर्पित है। फिर पक्ष हो या विपक्ष या फिर वह संघर्षरत दल ही क्यों न हो। यहां यक्ष सवाल यह है। बेहतर दल राष्ट्र जन को साक्षी मान उसके कल्याण में अपने मत वोट के माध्यम योगदान दे और जो जिस काबिल हो उसे अपना मत दे और अपने प्रारब्ध और वर्तमान को सफल सिद्ध करें। जय स्वराज

सत्ता के लिए एक मर्तवा फिर से आर-पार के मूड में सियासी दल सियासी दलों के बीच छिड़ी सत्ता की जंग

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सियासी दलों के बीच छिड़ी सत्ता की जंग का सच जो भी हो। मगर राष्ट्र-जन का कितना भला इस जंग से होने वाला है यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल परिणाम भविष्य के गर्भ में है। मगर राष्ट्र-जन को 2019 में समझने वाली बात यह होना चाहिए कि दो धुव्रों में बट चुके सियासी दलों का सच यह है कि जिस तरह से वह विगत 30 वर्षो से सत्ता हासिल कर सत्ता सुख उठा अपना विस्तार करते आये है, वह किसी से छिपा नहीं। इस दौरान राष्ट्र-जन सेवा, कल्याण, विकास के नाम जिस बेरहमी से राष्ट्र और जन लुटा है। जिस तरह से राष्ट्र-जन अपनी महान शिक्षा, संस्कृति, संसाधन, स्वास्थ के लिए कलफा है वह किसी से छिपा नहीं। इस दौरान राष्ट्र-जन, सेवा, कल्याण विकास के नाम सत्तासीन लोगों ने भोले भाले लोगों की भावनाओं को किस तरह छलनी किया है और आम गांव, गरीब अपनी महान शिक्षा, संस्कृति, संसाधन स्वास्थ के लिए कलफा है जिसने शिक्षा, संस्कृति, संस्कार, स्वस्थ, समृद्ध, खुशहाल जीवन के ही मायने बदल डाले। कहते है भूल गलती या विरासत में मिला स्वभाव मनुष्य का स्वभाविक गुण है। जिसे दरकिनार नहीं किया जा सकता, न ही अस्वी...

पावर प्रेसर के बीच प्यासी जनता फुटबाॅल बनती सिन्ध जलावर्धन योजना

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  विगत 30 वर्षो से संघर्षरत शिवपुरी वासी सिन्ध के शुद्ध पेयजल को हासिल करने भले ही टकटकी लगाए बैठी हो। मगर सिन्ध है कि घरों तक आने ही तैयार नहीं। कारण साफ है कि पावर, प्रेसर और प्लालिंग की असफलता, नहीं तो कोई कारण नहीं जो 22.50 करोड़ से पूर्ण होने वाली परियोजना लगभग 100 करोड़ के पार होती। फिलहाल नई चुनौती परियोजना के तहत शहर की लगभग 15 मीटर ऊंची 14 पानी की टंकियों को भरे जाने को लेकर है। अगर पुष्ट अपुष्ट तकनीक ज्ञाताओं की माने तो यह असंभव ही है कि 15 दिन में वाटर टेंको का भरा जाना। कारण सतनबाड़ा फिल्टर प्लान्ट से खूबतघाटी तक पुरानी लाइन की जगह लौहे की नई लाइन डाली गई है। नई लाइन तक तो ठीक है। मगर जो लाइन शिवपुरी वायपास तक पानी आते-आते कई मर्तवा पानी प्रेसर के चलते फट जाती थी।    मगर यक्ष प्रश्न यह है कि जब फिल्टर प्लान्ट से 2 मोटरों के बजाये सिर्फ मोटर से शिवपुरी वायपास हाईडेन्ट तक पानी सप्लाई हो रहा था वह भी 15 प्रतिशत प्रेसर कम करके तब लाइन फट जाती थी। जिसके चलते सतनबाड़ा फिल्टर प्लान्ट से लेकर खूबतघाटी के बीच पुरानी लाइन बदली ज...
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प्रभावी पकड़ के अभाव में गठ-बन्धनो का परिणाम सार्थक नहीं व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। इतिहास गवाह है कि वैचारिक व्यक्तिगत, महत्वकांक्षायें जब-जब लोकतांत्रिक व्यवस्था में हावी रही है और दल, लोकतांत्रिक व्यवस्था के मोहताज, तब-तब वह न तो सफल रहे, न ही सिद्ध हुये। अब्बल परिणाम यह रहे कि क्षेत्रीय खींचतान, व्यक्तिगत, परिवारिक, वैचारिक, महत्वकांक्षाओं की शैया पर पढ़ा राष्ट्र, जन, लोक कल्याण कलफता ही रहा और लोकतांत्रिक सोच मातम मनाती रही। जबकि बन्धन, गठबन्धन सत्ता का मजबूत लोकतांत्रिक आधारन तो कभी स्वार्थवत सियासत में था और न ही हो सकता है। मगर जो परिणाम प्रभावी पकड़ के अभाव में नेतृत्व करने वालो के रहे या तो वह कलंकित हुए या फिर वह अक्षम, असफल साबित हुए। यह भारतवर्ष के नागरिक को 2019 लोकसभा चुनाव में मत देते वक्त समझने वाली बात होना चाहिए।
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लोकसभा 2019 जन दरबार में न्याय की गुहार  न्याय के अभाव में हो सकता राष्ट्र के साथ अन्याय व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। लोकसभा 2019 चुनाव की घोषणा के साथ लोकतंत्र का सबसे बड़ा जन दरबार लग चुका है। जहां तथ्य भी है और दलील भी, किसी का प्रमाणिक कार्ड, तो कोई रिपोर्ट कार्ड सहित भावी योजनाओं के माध्यम से राष्ट्र के हक में न्याय चाहता है। राष्ट्र में उसका मान-सम्मान, स्वाभिमान, गौरव है। तो राष्ट्र को सम्पूर्णता देने वाले गांव, गली के लोग और वह भू-भाग जो स्वयं सम्प्रभु है। जिसके साथ अगर जनतंत्र के दरबार में न्याय नहीं हुआ तो बड़े अन्याय की सम्भावना प्रबल है। तथ्य जो भी हो, दली जैसी भी हो, मगर न्याय आवश्यक है। समूचे राष्ट्र व जन हित में आज समझने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि जो निर्वाचन, मतदान, आम मतदाता नागरिकों द्वारा होगा उसका आधार क्या हो। मत देने का पैमाना क्या हो। केन्द्र की सरकार और उसका मुखिया कैसा हो वह कौन से मुद्दे नीतियां हो जो मत देने का कारण आधार बने, यूं तो हमारे विद्ववान संविधान विदो ने लोकतंत्र में कत्र्तव्य जबावदेही अधिकार स्पष्ट कर चार स्तरीय सत्ता की व्...