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Showing posts from July, 2020

लोकल के वोकल पर स्टार्टप की लंबी छलांग......तीरंदाज ?

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व्ही.एस.भुल्ले भैया- मने तो लोकल के वोकल के अश्व पर सवार स्टार्टप की ऐसी लंबी छलांग, मुये सूतखोर और आदमखोर बैंकों की बगैर मदद के लगा पाऊंगा, मने सपने में भी न सोचा था। मगर कै करूं घडी गांठ का मेकाले की शिक्षा पर लुटा इतना कंगाल हो जाऊंगा और हाथों हाथ करोडों-लाखों लोगों को अपने संक्रमण की चपेट में लेने वाले कोरोना के कहर में बेरोजगार रह, पठानी बसूली वालो का सहयोगी और जनसेवक नहीं बन पाऊंगा, मने कै पता था कि हाथों-हाथ लोकल से वोकल और आॅनलाईन स्टार्टप का जमाना आने वाला है। मगर फिर भी म्हारी कोशिश है कैसे भी मने भी सेवा कल्याण के रथ पर सवार हो खूब सेवा कल्याण के नाम कमा रातों-रात समृद्ध खुशहाल हो जाऊं। कै अभी भी यह संभव है, नहीं तो शेष रहे म्हारे हंडे-कुंडे भी बिच जाये। मगर हमारे सेवा कल्याण के मार्ग सुरक्षित हो तो तने भी जोड-तोड बढा और म्हारे को हर हाल में सेवा कल्याण का जमाई बना, न जाने मुंआ ये कोरोना कब तक चलेगा और तब तक म्हारा लोकल का वोकल और स्टार्टप का सपना अधूरा ही रहेगा।  भैये- मुये चुपकर तने भी सचिव, रोजगार सहायक शिक्षक या शासकीय सेवक बनना चावे। इतना सारा कचडा उडेल दिया म्हा...

ऐतिहासिक निर्णय पर स्वराज का आभार राष्ट्र-जनों को बधाई साधुवाद के पात्र है, प्रधानमंत्री

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। राष्ट्र-जन और मानव धर्म के मार्ग में एक के बाद एक हो रहे ऐतिहासिक निर्णयों पर किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल होना स्वभाविक है और संतोष व्यक्त करना भी स्वभाविक क्रिया है। मगर सृजन के विरूद्ध स्वार्थवत सवालों की स्वीकार्यता अनादिकाल से किसी भी सभ्य सृजनात्मक समाज में नहीं रही है। लोकतंत्र में वैचारिक टकराव और संस्कार अनुरूप भाषा बोली के कुतर्कपूर्ण व्यवहार में अस्वीकार्यता, सहमति-असहमति सियासी, बैवसी हो सकती है। मगर मानव धर्म की बाध्यता सिर्फ और सिर्फ सर्वकल्याण में ही है।  नई शिक्षा नीति 2020 का जो निर्णय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत सरकार ने लिया निश्चित ही वह ऐतिहासिक है। इसे सत्ता का सामर्थ और पुरूषार्थ ही कहा जायेगा जिसकी अपेक्षा सत्ताओं से इस महान भूभाग पर आशा-आकांक्षाओं को सैकडों वर्षो से रही है। निश्चित ही महान भारतवर्ष के महान भूभाग पर 2020 में यह निर्णय भविष्य में युग-दृष्टा साबित हो, तो किसी को अतिसंयोक्ति नहीं होना चाहिए। विगत दो दशक से जिस तरह से अपने संसाधनों के बीच स्वराज ने देश में नई शिक्षा पद्धति और नीति को लेक...

कोरोनाकाल को चुनौती देते, माई-बाप भोपाल में कोरोना विस्फोट से थर्राया मानव जीवन

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से लोकतंत्र के माई-बाप अपने मुखिया की सीख और सेहत को दरकिनार कर कोरोना को चुनौती देने में जुटे है उससे लगता है कि कोरोना कोई संकट नहीं। जिस सोशल डिस्टेंस और मुंह पर मास्क लगाने को लेकर सत्तायें सख्त है और आम जनता पर जुर्माना तक ठोकने से नहीं चूक रही, तो वहीं सत्ता प्रमुख ऐसे ही माई-बापों की ऐसी ही लापरवाही का शिकार हो आज स्वास्थ्य सेवा लेने पर मजबूर है। मगर सत्ता के कुछ सभाषद है मानों उन्होंने अमृत धारण कर कोरोना को खुली चुनौती दे रखी है। जिसमें कई माई-बाप तो सरेयाम मुंह खोले जनसंपर्क और जनता के बीच सीधे संपर्क में आने से नहीं हिचक रहे। ऐसे में यह सत्ता पर सभाषद, सत्ता प्रमुख और म.प्र. की जनता तथा अपने मातहतों को क्या संदेश देना चाहते है यह तो वहीं जाने। मगर जिस तरह की प्रवृति सत्ता पद सौपानों पर कानून की धज्जियां उडाने की पनप रही है उसे न तो लोकतंत्र और न ही संवैधानिक संस्थाओं के लिए उचित कहा जा सकता है। फिलहाल कोरोनाकाल को लेकर जिस तरह के आचरण का निर्वहन सत्ता सौपानों में हो रहा है वह न तो आमजन लोकतांत्रिक संस्थाओं और मुखिया हित मे...

इतिहास रचने में कामयाब सरकार सृष्टि, सृजन में, ज्ञान ही समृद्ध सुसंस्कृत, खुशहाल जीवन का मूल आधार संतुलन सिद्धान्त के विरूद्ध शिक्षा पद्धति और विषय वस्तु बेकार शिक्षा नीति से पूर्व खुला शास्त्रार्थ अहम

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। व्यवहारिक, ज्ञान-विज्ञान से पटे पडे विधानों को दरकिनार कर फलित जीवन ने जिस तरह से स्वार्थवत अंहकारी आसुरी, साम्राज्यवादी दौरों से दो-चार होते मेकाले के शिक्षा सिद्धान्त का लम्बा सफर मानव जीवन में तय किया है। ऐसा नहीं कि समूचा मौजूद भूभाग अन्य शिक्षा विदों से या उनके विचारों से बांझ रहा हो। अगर यो कहे कि मेकाले के अलावा भी विभिन्न भूभागों पर कई महान शिक्षाविद सुधारक, शिक्षक, आचार्य, संत, ऋषिमुनि संन्यासी विभिन्न कालखण्डों में हुए और उन्होंने अपनी वैचारिक पहचान सृष्टि, सृजन में अपने सामर्थ और पुरूषार्थ के बल स्थापित की। जिन्होंने अपने भव्य-दिव्य सृजनपूर्ण ज्ञान से सृष्टि, सृजन में संतुलन सिद्धान्त की महत्वता को इंगित करते हुए मानव जीवन का मार्गदर्शन जीवन को समृद्ध खुशहाल बनाने में अपना बहुमूल्य योगदान दिया। फिर उनके जीवन में इस योगदान की कीमत अपनी जान देकर भी उन्हें क्यों न चुकानी पडी हो। मगर उन्होंने मानव के रूप में मानव धर्म और सृष्टि सिद्धान्त से कभी समझौता नहीं किया। मगर हम यहां मेकाले की चर्चा करने आज इसलिए बाध्य है कि जिस भूभाग पर जीवन, ज...

मौके पर चौका सियासी घमासान में कांपती सत्ता बेहाल सेवा कल्याण पर अंतिम पंक्ति के हुजूम में मार्मिक हलचल

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। भले ही देश के पश्चिमी राज्य राजस्थान में मचे सियासी घमासान को लेकर सत्ता कांप रही हो और वोट के माध्यम से सत्ता को अंगीकार करने वाले लोग उठा-पटक के हालात देख बदबहास हो, मगर कहते है कि जैसे को तैसा मिलना नियति के हाथ होता है। बैसे भी कहा जाता है कि सत्ता अहंकारी, अंधी होती है जो अपना संचालन करने तंत्र के सामने बाध्य होती है। अगर कोई सियासी दल पूर्व में बोया आज काटे तो इसमें किसी को हर्ज नहीं होना चाहिए। क्योंकि सत्ता का स्वभाव ही कुछ ऐसा होता है। मगर म.प्र. के मुखिया के कोरोना संक्रमित होने की दूसरी पाॅजिटिव रिपोर्ट ने सेवा कल्याण की आस लगाये अतिम पंक्ति में खडे व्यक्ति को खासा हताश-निराश कर रखा है। इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि बिगडी व्यवस्था के बीच अपने पिछले कार्यकाल के दौरान जिस तरह से म.प्र. के मुख्यमंत्री ने आम दीनहीन गरीब और अंतिम पंक्ति में खडे व्यक्ति तक सरकारी खजाने की राहत विभिन्न माध्यमों से पहुंचाने की कोशिश की उसे झुठलाया नहीं जा सकता। मगर कहते है कि सियासत होती ही ऐसी चीज है जो कब निहित स्वार्थो के लिए क्या कर दें किस...

लोकतंत्र का माखौल उडाते भाई लोग हदप्रद जनता यह समझने तैयार नहीं कि यह सेवा कल्याण है या स्वार्थ और स्व-कल्याण

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह के हालात सत्ता, सरकार और संस्थाओं को लेकर लोगों के सामने है उन्हें देख आम जनता भी अब भ्रम की स्थिति में नजर आती है। सवाल कई है मगर जिस सवाल की चर्चा इस कोरोनाकाल में आम है वह यह है कि जो निष्ठा और कत्र्तव्य निर्वहन के एक से बढकर एक र्कीतिमान सेवा कल्याण और विकास के नाम स्थापित हो रहे है वह वाक्य में ही सेवा कल्याण है या स्वार्थवत स्व-कल्याण। अगर चर्चाओं की माने तो लोग अब तो यह कहने से भी नहीं चूक रहे कि जब मोटी-मोटी पगार और मनमाफिक वेतन भत्ते हासिल कर मनमानी पर उतारू माननीयों के निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के नाम यह हाल है तो कैसे होगी सेवा और कौन करेगा कल्याण। बैसे भी अभी हालिया बेचारे एक सम्मानीय संपादक महोदय के लेख में कहा गया है कि सरकारों की आय का 90 फीसद धन तो सिर्फ व्यवस्थायें जुटाने बनाने में खर्च हो जाता है और 10 फीसदी विकास के नाम बच पाता है इसमें भी भ्रष्ट लोगों की छीना-झपटी के लिए आपसी मारामारी तो ऐसे में सेवा कल्याण की कल्पना ही बैमानी हो जाती है। देखना होगा कि आम जनता कब अपने हुकूब और माली हालत पर संज्ञान लेगी यह देखने...

चुनावी आहट के चलते जनसंपर्क और विकास कार्यो की धमक बडी चकरघिन्नी हुआ प्रशासन

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जब से चुनावों की सुगबुगाहट शुरू हुई तभी से कई दावेदार धुंआधार जनसम्पर्क जुटे है, तो वहीं सत्ता में शक्तिशाली हुये नेता विकास कार्यो की श्रृंखला के साथ प्रशासनिक मशीनरी पर टूट पडे है। हर एक दावेदार में होड मची है कि कौन अपने विधानसभा क्षेत्र में कितने कामों की स्वीकृति और उन कार्यो का शुभारंभ कर सकता है। जिससे उन्हें क्षेत्रीय जनता की सहानुभूति मिल सके। बहरहाल तो शासन स्तर पर ताबडतोड प्रशासनिक स्वीकृतियां और तैयारियों का दौर जारी है। देखना होगा कि जनता उपचुनाव में किसे कितना आर्शीवाद देती है। 

मंदिर जीर्णोद्वार और शहर की थीम रोड ने पकडी रफ्तार

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। भले ही कोरोनाकाल के चलते एतियात बहुत आवश्यक है मगर इस बीच रूके कार्यो को रफ्तार देने जहां शिवपुरी में जीर्णोद्वार के माध्यम से बनने वाले ऐतिहासिक सत्यनारायण भगवान के मंदिर के निर्माण के साथ शहर की थीम रोड का कार्य रफ्तार पकड गया है। ये अलग बात है कि रिवाईस प्राकंलन के साथ नई स्वीकृति के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां जोरो है। अगर निर्माण और जीर्णोद्वार की रफ्तार यहीं रही, तो जहां शहरवासियों को जल्द ही एक भव्य और दिव्य भवन के रूप में मंदिर देखने मिलेगा, तो दूसरी ओर शहर के बीचों-बीच बनने वाली थीम रोड से शहर का सौन्दर्यीकरण होगा। देखना होगा कि यह कार्य और कितने दिनों में रोड बनकर शहरवासियों को एक ऐतिहासिक पहचान दे पाते है। 

मातहतों का दंश भोगते मुखिया जल्द जन कल्याण की खातिर स्वस्थ होंगे शिवराज

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। यूं तो कोरोना एक ऐसी संक्रमित बीमारी समूचे विश्व में उभरी है जिसकी सावधानी के अलावा न तो कोई काट है और न ही कोई दवा। लगातार बढते संक्रमितों की संख्या ने समूचे मानव जगत को हिलाकर रख दिया है। मगर इस महामारी से भी मानव जीवन कुछ सीख, समृद्ध स्वस्थ जीवन निर्वहन की खातिर करेगा, यह वर्तमान हालातों को देखकर नहीं लगता। अगर खबरों की माने तो जितने सजग और सतर्क रह म.प्र. के मुख्यमंत्री जनसेवा कल्याण का बीडा उठा अपने कत्र्तव्य निर्वहन में लगे थे और मातहत सहयोगियों के आचार व्यवहार को लेकर चिंतित रहते थे वह शायद किसी से छिपा हो। मगर कहते है कि जबावदेह पद पर रहते जबावदेही से मुंह नहीं मोडा जा सकता और उन परम्पराओं को भी नहीं टाला जा सकता, जो संस्कारों के मान-सम्मान और स्वाभिमान से जुडी होती है। शायद निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन का ही वह मार्ग था जहां म.प्र. के मुख्यमंत्री से चूक हुई और वह स्वयं संक्रमित हो गये। सुखद बात यह है कि मुख्यमंत्री का सियासी जीवन जो भी हो, मगर निश्चित रूप से वो मानव के रूप में एक नेकदिल इंसान है और कहते है कि नेकी की जडे पाताल तक ह...

अनमोल अवसर, मगर बेडागरग हो थारा.........तीरंदाज ?

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व्ही.एस.भुल्ले भैया- कंडे पडे म्हारे इस कोरोनाकाल पर और कालिख पुते इस कोविड-19 पर मने कै पता था कि कोरोनाकाल में जन्म लेने से पूर्व ही म्हारी चुनाव चंदा स्वयंभू चिन्दी पार्टी की धरना प्रदर्शन सियासी तोडफोड गठजोड, वर्चुअल रैली और अघोषित तौर पर कारगार गठित अनुवांशिक संघीय संगठन नेताओं की महत्वकांक्षा के चलते इस कलयुग में जन्म लेने से पूर्व ही उसकी भ्रूण हत्या हो जायेगी और म्हारी काठी एक मर्तवा फिर से निढाल हो निठल्ली साबित हो जायेगी। काडू बोल्या कि सृष्टि में मानव जीवन, जीवन का अमूल्य अनमोल अवसर होता है। मगर मने न लागे कि कलयुग में ऐसा कोई मौल-तौल मानव जीवन का अब बचा है।  भैये- मुंए चुपकर तू कै जाने मानव जीवन का मूल्य और भ्रूण हत्या जैसे महापाप का अर्थ अगर आध्यात्म की माने तो जो सजा भ्रूण हत्या के प्रयास पर अश्वतथामा को प्रभु कृष्ण ने दी थी जो अपराध अश्वतथामा ने अभिमन्यु के पुत्र को गर्भ में ही मारने चलाये अस्त्र के रूप में किया था उस अपराध की सजा सुदर्शन चक्र से सर धड से अलग से कर मृत्युदण्ड के रूप में दे सकते थे। मगर अपराध की जघन्यता को देखते हुए प्रभु कृष्ण ने उसके माथे पर लगी ...

जीवनदायनी के अंत पर उतारू जीवन संरक्षक बनते संहारक अपने हकों को सडकों पर भटकता बेजुबान गौधन

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अब इसे सृजन में सृष्टि की विडम्बना कहे या उस आत्मनिर्भर गौधन का दुर्भाग्य जिसका सहषणु जीवन और नैसर्गिक स्वभाव ही उसके लिए अभिशाप बन गया है और जीवंतदायनी शब्द उसे उसके जीवन का अंत नजर आने लगा है। कहते है जब संरक्षक ही संहारक की मुद्रा में नजर आये तो ऐसी संभावनाऐं बलवती होना स्वभाविक है। कौन नहीं जानता कि अनादिकाल से गौवंश गौधन के रूप में जाना जाता रहा है और अपने निष्ठापूर्ण आत्मनिर्भर कत्र्तव्य निर्वहन के बल पर नैसर्गिक स्वभाव अनुरूप पूजा जाता रहा है। मगर दुर्भाग्य कि आज वहीं मानव नस्ल जिसकी पीढियों को अनादिकाल से गौधन ने अपने खून-पसीने से सींच समृद्ध स्वस्थ और खुशहाल बनाता आया वह भी अपने नौनिहालों का हक छीन आज वहीं गौधन को मानव जीवन खून की आंसू रूलाने पर आमदा ही नहीं, बल्कि उसके सहषणु आत्मनिर्भर और सदभाव भरे जीवन को संकटग्रस्त बना रहा है यह वहीं भारतवर्ष है जहां स्वयं प्रभु कृष्ण ने गौधन की सेवा कर स्वयं को धन्य समझ लोगों को धन्य-धान होने का संदेश गौधन की सेवा कर दिया। आज उसी महान भारत भूभाग पर जहां हर जीव का जीवन कानूनी रूप से संरक्षित है। म...

शिवपुरी के बिगडे ढर्रे पर मातम मनाती मानवता सेवकों की कत्र्तव्यनिष्ठा से थर्रायी संस्थायें अलालों को कवच साबित होता कोरोनाकाल

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह की सेवाऐं शिवपुरी शहर में विगत 10-15 वर्षो से प्रचलित है उसे देख लगता है अब मानवता भी जबाव देने लगी है। भ्रष्टाचार के आखण्ड में डूबी अलाल लोगों की मण्डली सेवा के नाम क्या कुछ कर गुजर जाये यह किसी से छिपा नहीं। विगत वर्षो में लोकायुक्त के छापे और कुछ द्वारा की गई कार्यवाहियां और शिकायतें इस बात का प्रमाण है कि भ्रष्टाचार किस स्तर तक पैठ बना चुका है। मामले तो अनेक है मगर जब जबावदेह लोग स्वयं अनदेखी कर और ऐसे भ्रष्ट अर्कमण्य लोगों को संरक्षण देने का काम करे तो फिर शिकायत होना भी अपने आप में बैमानी है। जैसे-तैसे लोग कोरोना से विगत दो-चार महीने से दो-चार हो ही रहे थे कि सेवा की कत्र्तव्यनिष्ठा ने आम लोगों को चारो-खाने चित कर रखा है। सेवकों के हालात ये है कि कार्यालय तो कोरोना की कृपा से चल ही नहीं पा रहे। अगर किसी को दूरभाष पर संपर्क भी करना होगा तो भाई लोग फोन भी न उठाने में अपनी सबसे बडी निष्ठा समझते है। म.प्र. के सबसे सुन्दर शहर का सत्यानाश करने वाले सेवकांे की कुंडली खंगाली जाये तो शहर का भले ही व्यवस्था के नाम पर सत्यानाश हो चुका ह...

न स्थानानांतरण, न ही निलंबन, सीधे बर्खास्त अव्यवस्थाओं से विचलित मुखिया की मातहतों को ताकीत कोताही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अगर दिग दर्शन को छोड सोशल मीडिया दर्शन पर दर्शन देती खबरें सत्य है तो फिलहाल म.प्र. की चैथी मर्तवा कमान संम्हालने वाले म.प्र. के मुख्यमंत्री ने मातहतों को स्पष्ट ताकीत की है और उनके एक्सन मोड में साफ नजर भी आता है कि वह कोताही बर्तने वाले नहीं है। किसी भी व्यक्ति को अब बख्शने वाले नहीं। निलंबन से लेकर स्थानानातंरण और अब तो सेवा समाप्ति के कदम ने मुखिया की मंशा को साफ कर दिया है कि वह अब जो भी आदेश-निर्देश के माध्यम से सेवा कल्याण और अनुशासन के साथ आम जनता के साथ सद व्यवहार चाहते है वह प्रतीक मात्र न हो, बल्कि प्रमाणिक हो। ये अलग बात है कि स्थानानांतरण न ही निलंबन बल्कि सीधी सेवाऐं समाप्त के निर्णय ने फिलहाल मातहतों को सनाके में डाल रखा है। देखना होगा कि मुखिया की यह मंशा भविष्य में कितनी कारगार सिद्ध हो पाती है।  

दुर्लभ अवसर गंवाता मानव कलंकित होती अनमोल कृति प्राकृतिक सिद्धान्त को पलीता लगाता पुरूषार्थ संतुलन को चुनौती देता सामर्थ

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। शिक्षा कालखण्ड अनुसार जो भी रही हो, शिक्षा ग्रहण करने की पद्धतियां जैसी भी रही हो, जिससे र्निमित शिक्षित सु-संस्कृत समाज कभी मानव जीवन के दुर्लभ अवसर को इस तरह से गवा प्रकृति की अनमोल कृति को कलंकित करेगा किसी ने सपने में भी न सोचा होगा। प्राकृतिक सिद्धान्त को पलीता लगाता पुरूषार्थ मानव समाज में आज एक ऐसा यक्ष प्रश्न बन गया है जो आज अपने सामर्थ के बल पर संतुलन तक को चुनौती देने से नहीं चूक रहा। कभी सुर-असुर प्रवृतियों के बीच समृद्ध, खुशहाल जीवन जीने वाला मानव ऐसी र्दुगति में जा पहुंचेगा, जहां से समृद्ध, खुशहाल जीवन के लिए सृजन का मार्ग कंटकों से भरा पडा हो। आज मानवीय जीवन में जितनी भी विसंगतियां सृजन के दौरान मौजूद है वह मानव जाति के द्वारा बुने गए जाल में उलझती नजर आती है। जीवन निर्वहन के सत्य को आध्यात्म और र्निजीव विधा को विधान की उपलब्धि मान जीवन निर्वहन करने वाले आज अपनी कृतज्ञता को ही कलंकित करने से नहीं चूक रहे, बल्कि संतुलन के सिद्धान्त को भी चुनौती देने में नहीं हिचक रहे। आज जब समूची दुनिया कोरोना जैसी महामारी की दहशत से खौप जदा है औ...

स्वार्थवत सियासी शंखनाथ में सफर करती आस्थाऐं वैचारिक संगठन से इतर सिपहसालारी को संघर्ष करते सिपहसालार

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। आज जिस तरह से भारतीय राजनीति का सियासत में नया खाका खिच रहा है उसके भावी परिणाम भले ही भविष्य के गर्व में हो। मगर भविष्य की सियासत पर नजर डाले तो इतना तो तय है कि अब भारतीय सियासत सटीक विसात पकड चुकी है। जिसमें दूध का दूध और पानी का पानी होना तय है। देखा जाए तो जो संगठन आज निःस्वार्थ भाव से सेवा कल्याण और राष्ट्रीय सामर्थ के भाव को लेकर आगे बढ रहे है निश्चित ही उनके कारवां पर उंगली उठाना सूर्य को रोशनी दिखाने के समान है। शेष संगठनों के वैचारिक और व्यक्तिगत आधारों की समीक्षा करें, तो एक भी ऐसा सियासी दल या संगठन उनके सामर्थ के आगे समर्थ दिखाई नहीं पडता। ऐसे में स्वार्थवत और सिपहसालारी या अपनी-अपनी लोकतंत्र में वैचारिक सामंती को बचाने जिस तरह से नैतिक सिद्धान्त और स्वीकार्य व्यवहार की अनदेखी कर सेवा कल्याण के नाम शंखनाथ हो रहा है उससे इतना तो तय है कि उन्हें वैचारिक सिपहसालारी सामंती अवश्य तत्कालिक रूप से मिल जाये। मगर स्थापित सियासी आधार के विरूद्ध उनका अपना मूल आधार बचाना उन्हें मुश्किल ही नहीं नमुमकिन होगा। मगर कहते है कि जो अपने स्वार्थो क...

दुर्लभ अवसर गंवाता मानव कलंकित होती अनमोल प्रवृति प्राकृतिक सिद्धान्त को पलीता लगाता पुरूषार्थ संतुलन को चुनौती देता सामर्थ

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। शिक्षा कालखण्ड अनुसार जो भी रही हो, शिक्षा ग्रहण करने की पद्धतियां जैसी भी रही हो, जिससे र्निमित शिक्षित सु-संस्कृत समाज कभी मानव जीवन के दुर्लभ अवसर को इस तरह से गवा प्रकृति की अनमोल कृति को कलंकित करेगा किसी ने सपने में भी न सोचा होगा। प्राकृतिक सिद्धान्त को पलीता लगाता पुरूषार्थ मानव समाज में आज एक ऐसा यक्ष प्रश्न बन गया है जो आज अपने सामर्थ के बल पर संतुलन तक को चुनौती देने से नहीं चूक रहा। कभी सुर-असुर प्रवृतियों के बीच समृद्ध, खुशहाल जीवन जीने वाला मानव ऐसी र्दुगति में जा पहुंचेगा, जहां से समृद्ध, खुशहाल जीवन के लिए सृजन का मार्ग कंटकों से भरा पडा हो। आज मानवीय जीवन में जितनी भी विसंगतियां सृजन के दौरान मौजूद है वह मानव जाति के द्वारा बुने गए जाल में उलझती नजर आती है। जीवन निर्वहन के सत्य को आध्यात्म और र्निजीव विधा को विधान की उपलब्धि मान जीवन निर्वहन करने वाले आज अपनी कृतज्ञता को ही कलंकित करने से नहीं चूक रहे, बल्कि संतुलन के सिद्धान्त को भी चुनौती देने में नहीं हिचक रहे। आज जब समूची दुनिया कोरोना जैसी महामारी की दहशत से खौप जदा है औ...

एक्सन मोड में जिला प्रशासन

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। भले ही बनी-बनाये पर बिगाड पद चिन्ह बढते कोरोना मरीजों की संख्या को लेकर स्पष्ट दिखाई देते हो, मगर कुछ दिन से जिस तरह से समझबूझपूर्ण आदेश-निर्देश आ रहे है। उनके परिणाम तो आने वाले भविष्य में ही सिद्ध होंगे। मगर जिस तरह से हर वार्ड में टीमें बनाकर संक्रमितों की पहचान तथा आगामी त्याहौर पर बाजारों भीड न हो उसकी व्यवस्थायें चाकचैबंद हो रही है। निश्चित ही परिणाम सार्थक होने की संभावना प्रबल है। मगर अभी भी जिले की सीमाओं पर स्क्रीनिंग मशीन के साथ सतत चैकिंग तथा संक्रमित मरीजों की देखभाल की व्यवस्था आबादी से दूर करने की जरूरत के साथ लोगों को जरूरत की आवश्यक सामग्री की उपलब्धता को सुनिश्चित किया जाना शेष है। अगर यह कार्य सावधानीपूर्वक सुगमता से हो जाता है तो निश्चित ही शिवपुरी जिला जल्द ही कोरोना से मुक्ति पाने में सक्षम सफल होगा। 

अपराध म.प्र. में और न्याय छत्तीसगढ में गौधन न्याय योजना

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। यूं तो हजारों वर्ष पूर्व प्रभु कृष्ण हमारी पूर्व पीढियों को स्वयं गौसेवा कर यह सिखा गये थे कि इस महान भूभाग और इस भूभाग पर बसने वाले मानवों के लिए जीवन में गौधन का क्या महत्व है। मगर जब से हमने हमारा नैसर्गिक विधान और अपनी महान विरासत शिक्षा, संस्कृति को चाहे, अनचाहे तौर पर त्यागना शुरू किया तब से न तो आज तक हम हमारी महान विरासत शिक्षा, संस्कृति, संस्कारों को ही संम्हाल सके और न ही जीवन में बहुमूल्य गौधन का जीवन संरक्षित कर उन्हें सम्बर्धित कर सके। बल्कि नैसर्गिक प्राकृतिक रूप से आत्मनिर्भर स्वभाव का धनी हमारा गौधन न तो तथाकथित शिक्षा, संस्कृति, संस्कारों से उपजे शिक्षाविद और अर्थव्यवस्था संचालित करने वाले लोगों के रहते हम कुछ कर सके, बल्कि अन्तराष्ट्रीय वित्त संस्था तथा संगठनों के आगे कटोरा-छाप बन घूमते रहे। परिणाम कि हमारे तथाकथित शिक्षाविद शासकों की मंडली ने हमें वन-अधिनियम जिसने गौधन से उसके भोजन पानी विचरण के नैसर्गिक अधिकार को छीन लिया, तो वहीं गांवों में अतिक्रामक मानसिकता के चलते सार्वजनिक तालाब और गौचर की भूमियों को छीन लिया। रही-सही...

दहशत की सियासत दम भरते भाई लोग

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। क्या विडम्बना है मौजूद सियासत की, कि चहुंओर दहशत का साम्राज्य दलों में व्याप्त है। मगर इसी सियासत से पोषित भाई लोग है जो अभी भी सेवा कल्याण का दम भरते नहीं थकते। लेकिन सबसे बडी विडम्बना तो यह है कि अपने समृद्ध, खुशहाल जीवन का सपना लिए अपने नैसर्गिक स्थापित विधान को त्याग नये विधान को स्वीकार्य, अंगीकार करने वालों के सामने यह है कि न तो उनका समृद्ध, खुशहाल जीवन ही शेष रहा, न ही नई व्यवस्था में उनके सपने समृद्ध, खुशहाल साबित हो सके। अगर यह कहावत सही है कि एक मछली सारे तालाब को गन्दा कर देती है तो एक भी दरिद्र नंगे भूखे के रहते समृद्ध खुशहाल व्यवस्था कैसे कही जा सकती है वह भी तब की स्थिति जब नंगे, भूखे, दरिद्र, आभावग्रस्तों से समूचा कुनवा पटा पडा हो। आज ही की तो बात है जब हमारे एक प्रियजन, सज्जन टीव्ही पर बैठ जातिगत आंकडों को छोड उच्च, मध्यम और निछले स्तर पर जीवन निर्वहन कर रहे लोगों का महत्व सत्ता, सरकारों, सियासी दलों की नजरों में क्या है स्पष्ट बता रहे थे। जिसमें उनका तर्क था कि उच्च वर्ग चंदा, तो निम्न वर्ग वोट देता है मध्यम तो बैसे भी निठ...

कोरोनाकाल में मंथन........तीरंदाज ? राजा को विष और सभाषदों को अमृत

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व्ही.एस.भुल्ले भैया- कालिख, कंडे पडे म्हारी चुनाव चंदा पार्टी की किस्मत पर, मने तो बोल्यू कि बगैर चुनाव जीते ही सीधे सत्ता सिंहासन पर आसीन होने वाली पार्टी का सदस्य हाथों-हाथ बन जाऊं और मंत्री बन हेलिकाॅप्टर, जहाज, लग्झरी वाहन और फाईव-सेवन स्टार होटलों का सुख उठाऊं, मौका लगा तो हेलिकाॅप्टर, जहाज की सैर कर पेडिंग पडे अपने सारे काम निपटाऊं और जाने, अनजाने में हुए पापों को धोने दर-दर माथा टेक मां गंगा में आचमन कर अपने और अपनों के पाप को धो आऊं। मने तो बोल्यू भाया कोरोनाकाल है सो कोरोनाकाल से निकले अमृत को हासिल करने पूरे ऐडी-चोटी का जोर लगाऊं, साथ ही मायावी बन, मने भी कम से कम इस कोरोनाकाल में तो अमर हो जाऊं, अब इस कोरोनाकाल में बेचारे गहलोत का निजाम बचे या न बचे म्हारे को कै लेना-देना, बैसे भी म्हारे मौन प्रदेश में म्हारे नाथ का कारवां क्यों डूबा बाबा महाकाल के दरबार में इसकी भी तो समीक्षा होना है। सुना है म्हारे लोक और तंत्र में हाईकमान और संगठन के नामों का बडा लोचा है बैसे तो म्हारे संगठनों में लोकतंत्र जिन्दा है। मगर सारे निर्णय तो कमानों को ही लेना है, सो भैया मने तो बोल्यू थारी सि...

बिगडे ढर्रे पर सुधार की कोशिश सांसत में शहरवासी

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। शिवपुरी। जिस उत्साह के साथ शिवपुरी में कोरोना के खिलाफ जंग शुरू हुई थी चार माह गुजरते ही अब वह चारोखाने चित दिखाई पडती है। कोरोना के कोहराम ने विगत चार माह से सिर्फ कोरोना ही नहीं शेष अन्य बीमारियों से जूझते लोगों का जहां जीवन नरक बना दिया, तो वहीं दूसरी ओर रोजमर्रा की मजदूरी कर पेट भरने वाले या मध्यम दर्जे के व्यवसाय करने वालों को खून के आंसू रूलाने छोड दिया है। अब जबकि यह बीमारी और संक्रमणकाल के रूप में इस मौसम को जाना जाता है। ऐसे में एक तो बारिस का न होना। वहीं पेयजल संकट से अभी भी दो-चार होना तथा मच्छरों की बढती भरमार और आये दिन निकलते संक्रमितों ने लोगों को दहशत में डाल दिया है। बगैर किसी प्रमाणिक संरचना के सेवकांे का निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन इस बात का प्रमाण है कि कितनी अक्षम, असफल व्यवस्था के हम साक्षी है। सुना है कोरोना पर नियंत्रण हेतु जिला प्रशासन ने एक सटीक शुरूआत करने की कोशिश अवश्य की है। मगर वह कितनी सार्थक सिद्ध होगी फिलहाल भविष्य के गर्भ में है।  कारण व्यवहारिक अनुभव से अनभिज्ञ निर्णय और संचालन की र्निजीवता इस बात का प्रमाण है कि...

राजधर्म के आभाव में बढता जीवन का संकट लापरवाही बनी दुश्मन

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से विश्व भर में कोरोना विस्फोट हुआ है उसके चलते संक्रमितों की संख्या एक करोड के पार है वहीं भारत में ही आंकडा दस लाख को छूने आतुर है, तो वहीं म.प्र. ने भी बीस हजार संक्रमितों का आंकडा पार कर लिया है। देखा जाए तो जिस तरह से ग्वालियर-चंबल ने संक्रमितों के मामले में रफ्तार पकडी उसमें खासकर शिवपुरी जिले में आये दिन संक्रमित निकलने की जो श्रृंखला शुरू हुई वह टूटने का नाम ही नहीं ले रही और कुछ ही दिन में संक्रमितों की संख्या 231 के करीब जा पहुंची, जो अब लोगों के लिए चिन्ता का विषय बन गया है। देखा जाए तो जिस तरह से रोजगार राशन पानी की सप्लाई से जान छुडाने अनियंत्रित तरीके से अन-लाॅकडाउन की शुरूआत हुई उसने सारी व्यवस्थाओं को धरासाई कर दिया। साथ ही उपचुनावों की आहट और जीत-हार के दांव में जुटे सियासी दलों की निर्भीकता ने भी आग में घी का ही काम किया। मगर कहते है कि विगत 70 वर्षो में प्रशासनिक दक्षता की जो परिपार्टी शुरू हुई वह थमने का नाम नहीं ले रही। वर्तमान समय में सच से मुंह छुपाने और सही समय पर सच न बोलने की जो आपराधिक प्रवृति बढी है वह म...

नाशाज राजा, नर्वस हकीम कोरोना विस्फोट से थर्रायी इंसानियत क्या चूक की चिताओं पर मातम मनाने बैवस होगा मानव

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह की भयाभय स्थिति कोरोना संक्रमण को लेकर उत्पन्न हो रही है हो सकता है राज सत्ता के हकीमों को अभी भी इसका स्पष्ट आभास न हो। मगर कोरोना का यथार्थ सत्य क्या है यह तो स्वयं कोरोना या फिर कोरोना की समझ रखने वाले उस्ताद ही जाने। मगर विश्वभर में कोरोना संक्रमण से बढती लोगों की संख्या और होती लाखों मौतों से इतना तो साफ है कि कुछ तो बीमारी है जिससे जीवन को सावधान रहने की आवश्यकता है। मगर प्रकृति के मस्ष्तिक या नर्वस सिस्टम कहे जाने वाले महान भारतवर्ष के भूभाग पर मानवीय जीवन की निडरता जो कोरोना को लेकर दिखाई देती है। वह कोरोनाकाल में भारतवर्ष की मानवीय समझ और जीवन की श्रेष्ठता समझने काफी है। अगर वर्तमान हालातों के मद्देनजर देखे तो लोकतंत्र में राजा की भूमिका में आम जनता जो अपने वोट और नोट की ताकत से सत्ताओं और सेवकों का निर्धारण करती है और उन्हें पोषित कर सर्वशक्तिमान बनाती है। आज जब मानव जीवन कोरोना के कहर से निढाल पडा है और विज्ञान तकनीक शिक्षा चारो-खाने चित पडी है तथा आध्यात्म सिर्फ आध्यात्म बनकर रह गया है। ऐसे में सैया पर अछेत पडा जीवन और नर्...

अब ठीक है, हमको कुछ नहीं पता कि कोरोना संक्रमित कहां है और कौन नहीं......तीरंदाज ?

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व्ही.एस.भुल्ले भैया- वह कितने कैसे वायरस है उनकी क्या पहचान है और उनका इलाज क्या है तथा कहां और किस रूप में वह पाये जाते जिनकी कदम ताल से म्हारे महान भारत ही नहीं समूचे विश्व में कोहराम मचा है। सुना है पाटली पुत्र में कोरोना का जबरदस्त हमला हुआ है जहां न तो महामहिम का कार्यालय और न ही मंत्री सहित सियासी लोगों का इकबाल संक्रमण से सुरक्षित रहा है। मुंआ टी.व्ही वाला सुबह से ही डकरा रहा है कि बिहार में कोरोना विस्फोट हुआ है, तो वहीं महाराष्ट्र, तमिलनायडू, दिल्ली में कोरोना का आतंक मचा है। बचा तो भाया अब म्हारा मौन प्रदेश भी नहीं है जहां संक्रमितों का आंकडा 19 हजार के पार जा पहुंचा है। विश्व विरादरी बता रही है कि संक्रमितों का मामला समूचे विश्व में सबा करोड के पार, तो म्हारे महान भारत में 9 लाख के पार जा पहुंचा है। अब तू ही बता कैसे बचेगी म्हारी जान और कैसे चलेगी म्हारी चुनाव चंदा पार्टी। क्योंकि अब हमकों कुछ नहीं पता कि किस जगह कोरोना संक्रमण है और किस जगह पर नहीं ? भैये- शोले को चले आधा सैकडा पूरा होने को है मगर तू है कि अभी भी गब्बर सिंह का वहीं डायलाॅग दोहरा रहा है जो उसने शोले फिल्म...

सियासी इशारे पर लोक निर्माण मंत्री को हराने का षडयंत्र करोडों के खर्च से निर्माणाधीन सडक के सत्यानाश का सूत्रधार बनता वन महकमा शिवपुरी के उजाड का कलंक बना स्वार्थवत काकस

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। आज जब कोरोनाकाल में स्थानीय स्तर पर बेरोजगारों को रोजगार तो देश व प्रदेश की मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए आत्मनिर्भर भारत का मंत्र समूचे देश में बुलंद हो रहा है, तो वहीं दूसरी ओर देश के प्रधानमंत्री खजाना खोल आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ देश को आगे बढा रहे है ऐसे में मदमस्त नौकरशाही की विधि आड में अनैतिक सियासी हठधर्मता इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि उसे न तो मानवीय जीवन की जरूरतों सहूलितयों उसकी समृद्धि, खुशहाली से कुछ लेना-देना है और न ही आत्मनिर्भर भारत निर्माण में उसकी कोई आस्था है। भले ही सरकार जनहित में बिृक्ष जैसे बैंकों से करोडो का कर्ज ले, विकास सेवा कल्याण को आगे बढाने ऐडी चोटी का जोर लगा रही हो।  मगर विधि की आड में विकास को पलीता लगाना शायद वन विभाग जैसे महकमें की नियति बनती जा रही है। देखा जाए तो किसी भी परियोजना के बनाने से पूर्व सभी तैयारियां विधि अनुरूप शासन द्वारा उनकों स्वीकृति दी जाती है। जिसमें एक समन्वय समति भी होती है। जिसमें परियोजनाओं से संबंधित विभागों की स्वीकृति भी ली जाती है। मगर जब परियोजना निर्माणाधीन हो ...

संकटों पर संकट और समाधान पर सवाल विकट सियासी सोच और सत्ता की निष्ठा में अगर समाधान रहे तो कुछ यक्ष सवाल भी रहे

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है जीवन में बगैर सोचे-समझे, अगर कोई संकल्प या वचन नहीं दिया है तो मानव धर्म की रक्षा में जरूरत पडने पर ऐसी सभा का भागीदार नहीं होना चाहिए जो मानव धर्म का उपहास उडा मानव जीवन के लिए संकट पैदा करे। जिस तरह से राष्ट्र को सामने रख एक जबावदेह और सुधारात्मक सियासत की शुरूआत समृद्ध, सृजन के लिए लंबे अंतराल के बाद हुई है उसके आचार-व्यवहार को लेकर सवाल होना स्वभाविक है। कहते है कि नदी में शुद्ध जल प्रवाह बने रहने के लिए भीषण बारिस और बाढ का अपना अहम किरदार होता है। मगर कहते है इस बीच जो बर्बादी या उपलब्धि के क्षण लोगों के सामने होते है उस पर संतोष-असंतोष या मायूस होना स्वभाविक है। मगर विगत 6 वर्ष से जिस तरह की सियासत राष्ट्रवाद को सामने रख मानव कल्याण और सृजन के लिए शुरू हुई है उसने कहीं न कहीं सत्ता सौपानों को भी प्रभावित किया है। प्रमाणिक तौर पर भले ही कुछ यक्ष प्रमाण आदृश्य हों, मगर जो मजबूत नींव वातावरण निर्माण में तैयार हुई है निश्चित ही वह सत्ता के सबसे सार्थक सफल प्रयासों में एक गिनी जायेगी। जिसके परिणाम भविष्य का निर्धारण करने सार्थक और स...

सियासी हनक से हलाक आशा-आकांक्षायें सियासी सवालों के साथ अब ढूंढने होंगे सर्वकल्याण में समाधान

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। बहुप्रतिक्षित मंत्री मंडल विस्तार के बाद हुई पहली बैठक में जिस तरह की ताकीद समस्या-समाधान और आमजन के बीच संपर्क तथा सेवा को लेकर मुखिया ने की है। अगर वह सार्थक हुई तो निश्चित ही सेवा कल्याण के क्षेत्र में सार्थक परिणाम लोगों के सामने होंगे। मगर जिस तरह से कोरोना संक्रमण का प्रकोप समूचे म.प्र. मंे बढ रहा है उसके बीच लोगों से संपर्क और समस्या समाधान फिलहाल दूर की कोणी ही जान पडते है। मगर कहते है कि इस दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं, बस जरूरत होती है सार्थक सोच के साथ एक सफल प्रयास की, अगर प्रयास का दौर और समाधान का बोध सत्ता और आमजन के बीच संतुलन बैठाने में सफल रहा तो निश्चित ही आम आशा-आकांक्षाओं के लिए सत्ता की यह सार्थक पहल कही जायेगी। 

बढते संक्रमितों से, बढती चिन्ता आखिर हम स्वयं के जीवन और अपने प्रियजन, सज्जनों के अंजाने में ही सही दुश्मन कैसे हो सकते है संभव हो तो घरों के अंदर ही रहे, बाहर निकलने पर नाक मुंह पर मास्क अवश्य लगायें और हर व्यक्ति से सोशल डिस्टेंस कम से कम 10 फीट या 2 मीटर की दूरी अवश्य रखें तथा शासन और डाॅक्टरों द्वारा सुझाये गये आहार व्यवहार से सभी के जीवन को सुरक्षित करें आज हर व्यक्ति का यहीं सबसे बडा धर्म और कर्म होना चाहिए

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से समूचे विश्व में ही नहीं, हमारे देश-प्रदेश, जिले तथा कस्बा स्तर पर कोरोना संक्रमित लोग मिल रहे है। निश्चित ही वह कोरोना को परास्त करने में कामयाब होगें। मगर इतने बडे देश और एक अरब से अधिक जनसंख्या वाले देश में अगर हर व्यक्ति नागरिक ने अपनी जबावदेही अभी भी नहीं समझ, स्वयं के साथ अपने प्रियजन, सज्जन और अडोसी-पडोसी, नगर, शहर के लोगों के जीवन को सुरक्षित रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभाई, तो यह मानव, जाति ही नहीं, हर उस नागरिक की कृतज्ञता पर कलंक होगा जो स्वयं के जीवन को समृद्ध, खुशहाल और स्वस्थ देखना चाहता है। बेहतर हो कि हम मुंह पर मास्क लगायें बहुत अधिक जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर जाये और ध्यान रखें कि बात करते समय पर्याप्त दूरी तथा किसी भी स्थिति में किसी दूसरे व्यक्ति के संपर्क में न आये। आधा-आधा घंटे या एक-एक घंटे के अंतराल के बाद साबुन या सेनेट्राईजर से हाथ साफ करते रहे और किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर शासन द्वारा नंबर पर संपर्क करें या फिर कोरोना संेटर पर चिकित्सक को अवश्य दिखायें और खान-पान, आचार-व्यवहार से शरी...

विधि के विधान में उलझा बैवस इंसान.......तीरंदाज ?

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व्ही.एस.भुल्ले भैया- मने संविधान को अंगीकार कर सर्वकल्याण में जीवन निर्वहन करने वाला इंसान भी कभी इतना दुर्बल बैवस हो सकता है मने सपनें में भी न सोचा था ज्योई बाजरा खा-खाकर म्हारी पीढियां तो इंसानियत के बीच तर गई। मगर सरवती, काली मूंछ और सूखे मेवाओं की चटखरी के बीच मने न लागे कै म्हारा ये लोक तो दूर की कोणी परलोक भी सुधरने वाला है। अब मैं म्हारे विधान को माने या अंगीकार किये उस संविधान को मानू जो म्हारी मानवता की रक्षा की सम्पूर्ण गारंटी देवे। सुडा है म्हारे बाबा के राज में बुराई को निस्तानाबूत करने जमकर ठायें-ठायें और धायें-धायें का पुरूषार्थ चल रहा है और चुन-चुन कर परलोक जाने वालों का गेट पास कट रहा है। मगर मने तो बोल्यू कि म्हारा मौन प्रदेश भी किसी से पीछे न है इसलिये म्हारे महान मौन प्रदेश में बाबा महाकाल का दरबार सावन के पहले ही हफ्ते शुरू हो, सज चुका है। काडू बोल्या भाया विधान की लीला से गढा इस दुनिया में आज तक कोई ऐसा पैदा नहीं हुआ और म्हारे महान प्रदेश का एक ही शासक विधि अनुसार हुआ जहां सबके साथ आज भी न्याय होता है। आखिर भाया सच क्या है एक तो बाबा महाकाल के पूरे एक माह तक...

कोरोना विस्फोट से दहले दिल संक्रमितों की बढती संख्या से सांसत में सजग लोग

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से विश्वभर में संक्रमितों का आंकडा एक करोड के पार और भारत में आठ लाख के पार होने आतुर है। वहीं ग्वालियर-चंबल में होते कोरोना विस्फोट ने हर उस सजग नागरिक की नींद उडा दी है जो विगत चार माह से घरों में बैठ सोशल डिस्टेंस का पालन असहनीय संघर्ष के बावजूद कर रहे थे। मगर उन्हें क्या पता था कि उनके द्वारा उनके लिए स्थापित व्यवस्था इतनी अकर्मण्य और अहंकारी होगी जो आदेश-निर्देश बैठकों के माध्यम से निदान ढूंढती इस मुकाम पर ला छोडेगी जहां लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाव की विधि ही बैमानी लगने लगे। यह सही है कि सरकारें विगत चार महीन से लगातार कोरोना से बचने के तरीके तो बचाव के लिए कई अभियान चला रही थी। मगर जिस तरह की मुश्तैदी जमीनी स्तर पर होना थी वह नहीं हो सकी। परिणाम कि देश ही नहीं म.प्र. के ग्वालियर चंबल में आये दिन निकलते कोरोना संक्रमितों की संख्या को लेकर कोहराम मचा हुआ है। अगर आंकडो को देखे तो अधिकांश शहरी क्षेत्रों में कोरोना संक्रमित निकल रहे है जिससे सबसे बडा खतरा यह हो गया है कि अब तो लोग समझ ही नहीं पा रहे कि कौन संक्रमित है और कौन स्...

आजाद लोकतंत्र में, आजादी अपराध की राजनीति या राजनीति का अपहरण

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। राष्ट्र जो भी हो, मगर उसके सुनिश्चित विधि अनुरूप संचालन के लिए उसका अपना विधान या संविधान होता है जिसे अंगीकार मान हर नागरिक अपने समृद्ध, खुशहाल जीवन के सपने सजोने के साथ अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के माध्यम अपनी कृतज्ञता सिद्ध करने वैद्यानिक रूप से बाध्य भी होता है। फिर किसी भी राष्ट्र का विधान संविधान लिखित हो, या फिर अलिखित हो। मगर जिस तरह से हमारा लोकतंत्र सर्वकल्याण के लिए अपराधी सियासत का हामी औपचारिक-अनौपचारिक रूप से बनता जा रहा है उससे यह यक्ष सवाल अवश्य ज्वलंत जान पडता है कि हमारे लोकतंत्र में अपराध की राजनीति फल-फूल रही है या फिर लोकतंत्र और लोकतांत्रिक भावनाओं का अपहरण हो चुका है। अगर अपराध में रूचि रखने वाले संस्थाओं के आंकडे या फिर जब तब चर्चाओं में आने वाली सियासत में अपराध से आरोपित अपराधियों की भरमार और जब तब सामने आते सियासत के अपराधिक प्रमाण इस बात के गवाह है कि अब हमारी समूची सियासत को अपराध और अपराधियों ने कहीं न कहीं बडे स्तर पर प्रभावित कर रखा है जो आज हर जागरूक नागरिक को जानने-समझने वाली बात होना चाहिए। जो पर...

विधि के विधान में उलझा बैवस इंसान.......तीरंदाज ?

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व्ही.एस.भुल्ले भैया- मने संविधान को अंगीकार कर सर्वकल्याण में जीवन निर्वहन करने वाला इंसान भी कभी इतना दुर्बल बैवस हो सकता है मने सपनें में भी न सोचा था ज्योई बाजरा खा-खाकर म्हारी पीढियां तो इंसानियत के बीच तर गई। मगर सरवती, काली मूंछ और सूखे मेवाओं की चटखरी के बीच मने न लागे कै म्हारा ये लोग तो दूर की कोणी परलोक भी सुधरने वाला है। अब मैं म्हारे विधान को माने या अंगीकार किये उस संविधान को मानू जो म्हारी मानवता की रक्षा की सम्पूर्ण गारंटी देवे। सुडा है म्हारे बाबा के राज में बुराई को निस्तानाबूत करने जमकर ठाहे-ठाहे और दाहे-दाहे का पुरूषार्थ चल रहा है और चुन-चुन कर परलोक जाने वालों का गेट पास कट रहा है। मगर मने तो बोल्यू कि म्हारा मौन प्रदेश भी किसी से पीछे न है इसलिये म्हारे महान मौन प्रदेश में बाबा महाकाल का दरबार सावन के पहले ही हप्ते शुरू हो, सज चुका है। काडू बोल्या भाया विधान की लीला से गढा इस दुनिया में आज तक कोई ऐसा पैदा नहीं हुआ और म्हारे महान प्रदेश का एक ही शासक विधि अनुसार हुआ जहां सबके साथ आज भी न्याय होता है। आखिर भाया सच क्या है एक तो बाबा महाकाल के पूरे एक माह तक लगने वा...

कोरोना ने बैठाला जीवन का भट्टा दहशत में लोग

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। विगत माहों से जब से कोरोना ने दस्तक दी है तभी से मानवीय जीवन हाल-बेहाल बना हुआ है। कभी जिन्दा रहने जीवोपात्र्जन का संघर्ष तो कभी कोरोना से बचने स्वास्थ्य की चिन्ता, जिसके लिए लोगों ने घरों में रह कष्ट भी भोगा और सुनहरे भविष्य का दंश भी झेला। मगर अब जब कोरोना के दस्तक दिये 4 महीने पूर्ण होने को है। ऐसे में कोरोना की बढती रफ्तार ने लोगों को दहशत में डाल दिया है। अब न तो लोगों की ट्रवल-हिस्ट्री तैयार हो पा रही और न ही संक्रमित व्यक्ति को संक्रमण के कारण मालूम हो पा रहे है। मगर कहते है कि जब जीवन ही स्वकल्याण की सोच में अचेतन हो ऐसे में सर्वकल्याण और संक्रमण से बचाव फिर कैसे संभव है। यह आज सभी को समझने वाली बात होना चाहिए। ये अलग बात है कि आज भी लोग कोरोना संक्रमण के प्रति सजग न हो, मगर आने वाले दिनों में यहीं हाल रहा तो मानवीय जीवन दवा आने तक बडे गहरे संकट में सावधानी के आभाव में पढने वाला है। जो न तो जीवन के हित में और न ही मानवता के हित मेे।  

कोरोना विस्फोट से सहमी मानवता आये दिन बढते कोरोना संक्रमितों की संख्या को लेकर उठे सवाल

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। ये सही है कि खबर सच हो या फिर झूठ किसी को कोई फर्क पडने वाला नहीं। क्योंकि वर्तमान हालातों को मद्देनजर कहा जा सकता है कि ऐसा राज और ऐसी आजादी शायद किसी देश-प्रदेश को मिली हो। कहते है कि जहां समझ समझाईस और जीवन निर्वहन के संस्कार निज स्वार्थो के आगे एक दूसरे से जुदा हो ऐसे में सत्यानाशी संस्कारों का प्रार्दुभाव होना स्वभाविक है। अगर 7 लाख के पार जा पहुंचे देश के आंकडे को अगर हम दरकिनार कर दें और म.प्र. के अन-उपलब्ध आंकडों पर चुप्पी साध लें, तो खुद के शहर का क्या करें जहां आये दिन निकलते संक्रमितों की संख्या ने कोरोना संक्रमण की रफ्तार तेज कर दी है। बढते आंकडो को देख भले ही एक मर्तवा फिर से लाॅकडाउन का सहारा सत्ताओं में और शासन ने लिया हो। मगर जो बिगाड खाता अनलाॅकडाउन के चलते हो चुका है उसके आंकडे जानने और भरपाई करने कम से कम अगर अगले दिन से एक भी मरीज नहीं मिलता है तो मौजूद आंकडों के साथ 7 दिन से लेकर 14 दिन तक तो कोरोना से मुक्ति के लिए इंतजार करना ही होगा।  मगर लगता नहीं कि अगले 14 दिन तक एक भी संक्रमित न मिले। अगर संक्रमित मिलने का क्...