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Showing posts from December, 2020

समृद्ध जीवन के सपने को साकार करने आगे आये युवा हर वर्ग की समृद्धि वीर सेना का लक्ष्य-संजीब जी

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  नीरज जाटव  म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा   आत्मनिर्भर जीवन निर्माण मे सत्ता को अहम सीढ़ी मानने बाले वीर सेना संयोजक आचार्य संजीव जी का मानना है कि जब तक युवा सत्ता का भाग नही बनेगे तब तक जीवन मे समृद्धि का सपना अधूरा ही रहने बाला है इसलिये सत्ता मे भागीदारी की शुरूआत स्थानीय सरकारो मे युवाओ के बर्चस्व से ही होगी म.प्र. के आशन्न स्थानीय सरकारो के चुनावो मे युवाओ की सक्रीयता सहभागिता तय करेगी की समृद्ध आत्मनिर्भर जीवन का सपना कितना सार्थक रहने बाला है वीर सेना ने तय किया है कि वह स्थानीय निकाय संरपच के चुनावो मे अच्छे और सच्चे सेवाभावी युवाओ को अपना नैतिक समर्थन दे उन्हे स्थानीय सरकारो मे उनके दायित्व व कर्तव्य बोध के साथ चुनावी रणनीत के बारे मे भी सिखायेगी जिससे वह अपने मानव कर्तव्यो का पालन पूरी निष्ठा ईमानदारी के साब कर सके युवा जोड़ो अभियान मे जुटे संजीव जी ने कहा कि अगर युवाओ को अपने सपने साकार करना और सत्ताओ मे सहभागिता सुनिश्चित करनी है तो उन्हे एक होना ही होगा क्योकि संख्याबल ही लोकतंत्र मे सबसे बड़ी ताकत और सत्ता सहभागिता का माध्यम होती है ।

कंगाली से जूझते प्रदेश मे बैठक, बैबीनार, वीडियो काॅन्फ्रेन्स, के कन्धो पर सबार विकास, सुशासन, सेवा कल्याण हैरान परेशान जन-तंत्र मे मचा हाहाकार

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  वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाईम्स समाचार सेवा  म.प्र.- कंगाली के बीच जिस तरह से विकास सुशासन, सेवाकल्याण बैठक बैबीनार, वीडियो काॅन्फ्रेन्स के कन्धो पर नजर आता है वह यह समझने काॅफी है कि आने बाले समय मे सत्ता सियासत की क्या दुर्गति होने बाली है मगर विकास वीरो सेवा को समर्पित सेवको का क्या न तो उनके वेतन भत्तो पर इस आर्थिक कंगाली के चलते कोई फर्क पड़ने बाला है न ही अगले 3 बर्ष तक सत्ताओ का कुछ होने बाला है अगर किसी का कुछ होने बाला है तो वह हे दीनहीन जनता जनार्दन जिसे राजी नही तो गैर राजी फिर किसी सत्ता को अगले पाॅच बर्ष के सेवाकल्याण के लिये किसी न किसी को चुनना होगा और फिर करे भी तो क्या ? क्योकि आज कि सियासत मे पराये माल पर न तो दानवीरो कि कमी है न ही दयालुओ कि सो सत्ता के लिये या सत्ता मे बैठते ही धन उलीचने मे हर्ज ही क्या ? और नये नये चैपर, जहाज की सैर कर दानवीर कर्ण कहलाने दर्द ही क्या जनधन है सो समय के साथ खजाना तो भर ही जायेगा नही तो उधार करोड़ो जनता जनार्दन के नाम मिल ही जायेगा जैसै 2 लाख करोड़ का कर्ज बैसै ही और हजारो करोड़ विकास सेवाकल्याण के नाम मिल ही जायेगे फिलहाॅल ...

नरवर और ढला मे बनेगा यूको टूरिज्म केन्द्र

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  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। प्राप्त जानकारी के अनुसार म.प्र. के शिवपुरी जिले मे वन विभाग नरवर और ढला मे यूको टूरिज्म शुरू जल्द ही करेगा हालाकि हालिया तौर वन विभाग के अधिकारियो द्वारा भ्रमण पश्चात पूरी प्रोजक्ट रिपोर्ट तैयार कर स्थानो का चयन यूको टूरिज्म के लिये किया गया है अगर शिवपुरी मे यह दो केन्द्र शुरू हो जाते है तो निश्चित ही यह आने बाले समय मे शिवपुरी पर्यटन क्षैत्र के लिये बड़ी उपलब्धि होगी ।  

सी. एफ. के सख्त तेवर, विभिन्न प्रकरणो मे कई कर्मचारी निलंबित खनन वन माफिया सख्त कार्यवाही

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  म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा वीरेन्द्र शर्मा  म.प्र.- शिवपुरी मे अबैध उत्खनन और वन माफिया से जुड़ी खबरो के बाद हरकत मे आये शिवपुरी वन मण्डल के सी.एफ. लवित भारती ने समझाइस के बाद कार्यप्रणाली मे आशातीत सुधार न होने की दशा मे कई बीट गार्ड और फारेस्टर को निलंबित कर दिया है सू़़त्रो की माने तो कई दिनो से अबैध उत्खनन और वन माफिया से जुड़ी खबरे आय दिन सुर्खिया बन रही थी मगर सी. एफ. की कड़ी कार्यवाही से जहाॅ माफिया सकते मे है तो वही वन महकमे मे भी खासी खलबली है 

जी एस टी के दंश से हलाकान बेरोजगार

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  अव्यवहारिक अहंकारी निर्णयो का दंश झेलता देश  अजीब अंदाज मे सेवाकल्याण, चारो खाने चित पढ़ा आत्मनिर्भर आगाज व्ही. एस. भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा  म.प्र.- भले ही शासन की आय मे इजाफा और दीनहीनो विकास कल्याण की खातिर तथा व्यापार व्यवसाय को सुगम बनाने के लिये सत्ताओ ने देश मे जी एस टी को लागू किया मगर हालिया समझ यह है कि अगर कोई व्यवसाय करना चाहै तो उसे सर्ब प्रथम जी एस टी नम्बर लेना होता है सम्भवता उसकी प्रक्रिया भी उसे आॅन लाइन पूरी करनी होती है जिसमे संवाद का माध्यम अंग्रेजी मे ही आॅनलाइन ही रहता है मगर सबसे अहम सबाल यह है कि रजिष्ट्र्ेशन नम्बर मिल जाने के बाद उस बेरोजगार को हर महीने आॅनलाइन ही रिर्टन फाइल करना होता है अगर वह किसी भी कारणा रिटर्न फाइल न कर सके तो उसे कुछ दिनो या महिनो बाद हजारो रूपये का जुर्माना भरना पढ़ेगा भले वह व्यपार के लिये पूॅजी जुटा पाये या उसे व्यपार करने का मौका मिल पाये यह तो अजीव ही सेवा कल्याण हुआ न । जबकि कौन नही जानता की पूरी कीमत चुकाने के बाबजूद न तो समुचित बिजली ही मिल पाती है न ही बगैर काॅल ड्र्ाप धीमा नैट के चलते कीमत अनुसार संचार सेव...

सत्ता, सियासत, शासन के अहंकारी सेवाकल्याण से सहमा लोकतंत्र, जनतंत्र

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बैलगाम सेवा के दंश से बैहाल कल्याण व्ही. एस. भुल्ले म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा निश्चित ही जब हम इस समाचार की हेडलाइन पढ़ रहै होगे तो कुछ लोगो अच्छा न लगे मगर उस असहनिय दर्द का क्या करे जिसका दर्द निरीह प्राणी बगैर किसी अपराध के भोगने पर मजबूर है मे क्षमा चाहूगा अपने उन प्रियजनो से जो अपने कर्तव्य का निष्ठा पूर्ण पूरी निष्ठा के साथ करने दिन रात एक किये रहते है । बात सिर्फ इतनी सी है कि कुछ लोग अपने निहित स्वार्थवस अहंकारी स्वभाव वस लोगो कि समस्या ही नही सुनना चाहते पर्याप्त भरण पोषण के संसाधन और समस्या समाधान कि शक्ति वैधानिक रूप से प्राप्त होने के बाबजूद कुछ भी करना नही चाहते जब प्रदेश का मुखिया ही यह कहने पर मजबूर हो कि काम बगैर लेनदेन के हो तब आमजन के दर्द के मर्म को समझा जा सकता है । हर माह मोटी मोटी पगारे लग्झरी बाहन बंगले विधि सम्बत बैधानिक अधिकारो के बाबजूद लोगो का बिलखना इस बात का प्रमाण है कि कही तो कोइ्र्र कोताही कर रहा है चैबीसो घन्टे स्वयं को ब्यस्थ सिद्ध रखने मे माहिर और बैठक, जानकारी में दबे इन महानुभावो का भी दर्द यह है कि आखिर वह भी इतनी निष्ठा कर्तव्यपरायणता के आगे ...

अहंकार में डूबी महात्वकांक्षा, आशा अकांक्षाओं के बीच टकराब, मानव, जन, राष्ट्र्हित में और न ही जीवजगत के हित मे

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सार्थक संवाद संबैधानिक समाधान की हो शुरूआत  अन्नदाता का दर्द और सत्ता की सार्थकता को समझना होगा एक दूसरे का दर्द व्ही. एस. भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा  दिल्ली की सीमाओ पर डटे किसानो के बीच मामला कहा उलझा है ये तो सरकार और किसान बता सकते है मगर अभी तक बाहर आये मसौदे से एक बात साफ है कि बात इतनी बढ़ी नही जिसका समाधान न हो सके लेकिन जहाॅ एक ओर सरकार अपनी प्रतिष्ठा को सामने रख समाधान चाहती है तो वही दूसरी ओर किसान भी माॅग से दो कदम पीछे नही हटना चाहते अगर दोनो पक्ष ही बीच के मार्ग को आत्मसात करते हे तो समाधान दूर की कोणी नही रहेगा जो राष्ट्र्, जनहित तथा जीवजगत के हित मे होगा और ही होना चाहिए क्योकि मौजूद सरकार भी देश के अन्नदाताओ द्वारा चुनी हुई है और आन्दोलित अन्नदाता भी इसी देश के है ऐसे समाधान ढूढ़ने कोई बाहर से आने बाला नही यह बात सत्ता और अन्नदाताओ को समझनी होगी तकलीफ सत्ता को या अन्नदाताओ शर्मिदगी तो इस महान राष्ट्र् को उठानी पढ़ रही है और कष्ट नुकसान भी राष्ट्र् को ही उठाना पढ़ा रहा है जिससे न तो सत्ता अछूती रह सकती न ही अन्नदाता मोर्चाबन्दी सियासत, अहंकार भी बना रहै मगर लो...

समृद्धि के सपने को साकार करने सार्थक संघर्ष को तैयार वीर सेना

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अधिक से अधिक युवा जोड़ने का लक्ष्य, संजीव जी नीरज जाटव  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  वीर सेना संयोजक संजीव जी ने विशेष चर्चा के दौरान विलेज टाइम्स से कहा कि  युवाओ की समृद्धि के सपने को साकार करने वीर सेना जय जननी जय वीर सेना के नारे को लेकर सार्थक संघर्ष को तैयार है जिसमे पहला लक्ष्य अधिक से अधिक युवाओ तक पहॅुच बना उन्है जोड़ने का कार्य वीर सेना करेगी जिससे समृद्ध जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर उनके सपनो साकार करने का मार्ग प्रस्त हो सके जिसके लिये जनजागरण से लेकर उनके सामर्थ अनुसार उन्हे सार्थक पुरूषार्थ के लिये प्रोत्साहित किया जायेगा जिससे वह आत्म निर्भर बन स्वयं के जीवन के साथ लोगो के जीवन समृद्ध बनाने मे अपनी मानवीय भूमिका उम्दा प्रदर्शन कर अपने जीवन को सार्थक सिद्ध कर सके उन्होने कहा कि युवा आज जिस निराशा भाव से ग्रस्त है वह जीवन और मानव समाज दोनो के लिये दुखद है इसलिए मार्ग खोजना और मानवीय जीवन की सिद्धता हर युवा ही नही हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए मार्ग कठिन है मगर जीवन मे  असंम्भव कुछ भी नही क्योकि हमारा नारा है कौन लड़ेगा, हम लड़गे, कौन जीतेगा, हम जीतेगे जय जननी...

सूत की डोर पर डोलता समाधान,विश्वास हुआ बैहाल

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जीवन में अनुभूति का अभाव कही, खुशहाॅल, समृद्ध जीवन का काल न बन जाये  व्ही. एस. भुल्ले  म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा जिस सामर्थ पुरूषार्थ के साथ केन्द्र की सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार अपने अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन का प्रदर्शन कर रही है वह किसी भी लोकतांत्रिक ब्यबस्था के लिये अनुकरणीय हो सकता है मगर जिस मझधार मे आज केन्द्र सरकार दिखाई दे रही है वह भी किसी बड़े सबाल से कम नही क्योकि जिस तरह से किसान और सरकार के बीच अड़ीपूर्ण संवाद चल रहा है और देश स्थाई समाधान की उम्मीद मे वह कैसै संभव होगा यह देखने बाली बात होगी जबकि किसान सरकार के बीच उलझे बिबाद को एक माह पूरा होने को है और समाधान आज भी कोसो दूर ऐसे मे कही न कही अनुभूति का अभाव जीवन मे उसका अकाल समृद्ध खुशहाॅल जीवन का काल न बन जाये क्योकि अनुभूति का अभाव सिर्फ किसानो तक सीमित नही हर क्षैत्र मे इसका अकाल सा दिखाई पड़ता है जिससे हर एक आम और खास सभी बाकिफ है मगर दुर्भाग्य की पुरूषार्थ कोई नही करना चाहता अब जब जीवन मे पुरूषार्थ कि शुरूआत हुई है तो अनको अनेक सबाल है समस्या है मगर सर्ब स्वीकार्य समाधान नही है ऐसे मे सत्ताओ ...

पनिहारी के जंगल मे तेंदुये का हमला,एक घायल

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वीरेन्द्र भुल्ले म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा  अबैध शराब, खनन, तेंदुपत्ता के नाम कुख्यात म.प्र. के शिवपुरी जिले के पिछोर रेंज के अंतर्गत आने बाले देवगढ़ के ग्राम पनिहारी के विजयराम को एक जंगली तेंदुये ने हमला का घायल कर दिया जिसे उपचार हेतु जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है जिसकी हालत फिलहाॅल खतरे से बाहर बतायी जा रही है सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम भी मौके पर पहॅची और घायल को उपचार हेतु अस्पताल भेजा ज्ञात हो कि यह यह रेंज खनन और तेंदु पत्ता के नाम से भी कुख्यात है कभी इस क्षैत्र में बड़े पैमाने पर अबैध गांजे की खेती पकड़ी जाती थी तो आज कल यह क्षैत्र बड़े पैमाने पर अबैध शराब पकड़े जाने को लेकर चर्चा मे बना रहता है फिलहाॅल तो विजय राम कैसे घायल हुआ तेंदुये ने कैसै क्यो हमला किया इसकी जांच चल रही है। 

शर्मसार समाज और सत्ताओ की खुली सच्चाई

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न इन्सान नशा छोड़ सका न नशा ही इन्सान को छोड़ सका वीरेन्द्र शर्मा  म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा  देखे तो अनादिकाल से ही नशा किसी भी रूप मे मानव के बीच बना रहा न तो नशा ही मानव का साथ छोड़ सका और न ही मानव सम्पूर्ण रूप से उसे त्याग सका हालात यह है कि जिस नशे को सामाजिक बुराई माना जाता है आज उसे सहर्ष स्वीकारिता मिलती जा रही जबकी सभी नशे की बुराई से बाकिफ है फिर नशा जो भी हो समाज मे जब तब प्रतिबन्धित नशा तो कभी सत्ताओ के लिये सोने की मुर्गी साबित होता शराब कारोबार हो जिससे सत्ताये सरकार चलाने राजस्व के रूप मे हजारो करोड़ रूपये प्रतिबर्ष कमाती है जिससे जहाॅ एक और नागरिको अबैध शराब के सेवन से बचाया जा सके तो दूसरी ओर सुरक्षित मदिरा उपलब्ध करा राजस्व भी कमाया जा सके अगर अन्य घातक नशो को छोड़ शराब की ही बात करे तो सृजन से लेकर आज तक यह मानव समाज मे पैठ जमाये है जबकि सत्ता, समाज जनजागरण के माध्यम से इस बुराई को खत्म करने शुरू से ही संघर्षरत रहै इन्है आखिर कब सफलता मिलेगी ये यही जाने मगर मानव समाज मे नशा जिस तरह से सर चढ़कर बोल रहा है यह सत्ता और समाज दोनो के ही लिये शुभ संकेत नही कहै जा...

समन्वय के साथ कार्य करे, सभी का लक्ष्य सेवा कल्याण होना चाहिए, किसान सम्मेलन मे की सिरकत

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  म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा  म.प्र. सरकार द्वारा आयोजित डिजिटल किसान सम्मेलन मे सिरकत करने आयी म.प्र. शासन की खेल युवा कल्याण मंत्री श्री मंत यसोधरा राजे सिंधिया ने प्रधानमंत्री के सम्बोधन पश्चात कहा कि सरकार की मंशा स्पष्ट है कि किसानो का भला हो और देश के प्रधानमंत्री की मंशा कृषि और किसान कल्याण को समर्पित है उन्होने अपने उदबोधन मे भी स्पष्ट किया है कि सरकार ने किसानो की भलाई के लिये क्या क्या कदम उठाये है तत्पश्चात उन्होने र्निधारित कार्यक्रम अनुसार कलेक्ट्र्ेट सभा कक्ष मे अधिकारियो के साथ बैठक भी की जिसमे उन्होने कहा हम सभी का लक्ष्य सेवाकल्याण है इसलिये हमे समन्वय के साथ कार्य करना है और धीमी गति से चल रहे कार्यो को गति देना है मुझे विश्वास है कि हम ऐसा ही करेगे । ज्ञात हो कि जिस तरह से म.प्र. शासन कि मंत्री अपने क्षैत्र के लगातार दौरे कर मातहतो मे जान फूकने मे लगी उससे इतना अवश्य हुआ है कि निर्माणाधीन विकास कार्यो मे अवश्य गति आयी है मगर उनका हालिया जोर कर्तव्य निर्वहन मे मर्यादा और जबाबदेही को लेकर कुछ अधिक है देखना होगा कि शासन के मातहत कर्तव्य की कसौटी पर कितने ...

लोकतंत्र में वैचारिक विरोध होना स्वभाविक है, मगर प्रमाणिक पुरूषार्थ पर शक मानवीय निष्ठा को शुभसंकेत नही

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विधि तथा मर्यादा विरूद्ध अहंकारी अवरोध खतरनाक स्वार्थवत संघर्ष सिर्फ सर्बकल्याण मे कलंग ही सिद्ध हुये है सक्षम सफल नही रहै व्ही. एस. भुल्ले म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा  पूरा आधा माह गुजरने के बाद अन्नदाताओ का आन्दोलन भले ही आज परिणाम विहीन हो जिसमे दोनो ही ओर से रस्साकसी स्पष्ट दिखाई पड़ती है जहाॅ आन्दोलन कारी अपनी माॅग पर अड़े है तो वही सरकार भी आन्दोलनकारियो और देश भर के किसानो को यह समझाने मे जुटी है कि उसके द्वारा लाया गया कृषि बिल देश के किसानो के हित मे है अब ऐसे मे क्या रास्ता निकलेगा यह तो सरकार और आन्दोलन कारी ही जाने मगर जिस कड़ाके की सर्दी मे किसान सड़को पर जमे है उससे स्पष्ट है कि दर्द जो भी हो, जिसका भी हो कुछ तो ऐसा है कि बात नही बन रही मगर सरकार कि ओर से जो दलील आ रही है वह काफी चैकाने बाली है कि कुछ राजनैतिक दल देश के भोले भाले किसानो को बर गला अपने सियासी स्वार्थ साधना चाहते है जो न तो देश हित मे है न ही किसानो के हित मे कहते है लोकतंत्र मे वैचारिक विरोध स्वभाविक प्रक्रिया है मगर प्रमाणिक पुरूषार्थ पर सबाल खड़े करना उसे अपमानित करना करना लोकतांत्रिक संस्कृति नही हो ...

फिर छोटी छोटी समस्याओ पर बखेड़ा क्यो.....? सृजन में सार्थक समाधान का आधार रही है सत्ताये

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व्ही. एस. भुल्ले म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.- जब सत्ताओ का दायित्व ही आस्था या आधार बत लोगो की समस्या समाधान का हो तो फिर बखेड़ा क्यो यह सबाल किसी भी सम्प्रभु ब्यबस्था मे होना स्वभाबिक है क्योकि सार्थक समाधान ही सृजन मे सत्ताओ का आधार होता है 10 दिनो से दिल्ली को घेर सीमाओ पर डेरा डाले किसान अब स्थाई समाधान चाहते है जिस  पर सत्ता की सहमती उसके प्रयास से सिद्ध है कि सत्ता सिर्फ संवेदनयशील ही नही बल्कि वह भी चाहती है कि राष्ट्र् के अन्नदाताओ कि समस्याओ का समाधान उनकी सहमती से हो जिससे उनका हक उन्है सम्मान जनक तरीके से हासिल हो ये अलग बात है कि भूगोलिक, आर्थिक विविधता के बीच सर्बमान्य हल ढूड़ पाना टेड़ी खीर है मगर कहते अगर प्रयास सर्बकल्याण के भाव के साथ हो तो उनकी सार्थकता भी सिद्ध होती है। और इस आन्दोलन का अन्जाम भी ऐसा ही होना चाहिए-जय स्वराज

अन्नदाताओं का दर्द और दरियादिली का दर्द सत्ता सियासत...........तीरंदाज ?

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। भैया- म्हारे अन्नदाताओं का दर्द छलक सत्ता, सियासत से चलकर सडकों तक जा पहुंचा है। दरियादिली के नदी के नालों उफान पर है। जिसमें दिल्ली के दरवाजे तो मानों बाढ-सी आ गई हो, जो लगता है सब वहां ले जाने पर उतारू है। बाढ की भयाभयता को भाप उस्तादों की फौज अब छोटी-छोटी बाढ चेक स्टाॅप डैम देश भर में आनन-फानन में बांध तो कहीं दिशा पलट सैलाब को तोड़ ढूढने में जुट गई है। तो वहीं सियासत से ढिया छोड चुके दल इन बांध बधाने में सुराग कर दर्द के सैलाब को सुनामी में बदल सत्ता सियासत को भी चारों खाने चित करने में जुट चुके। तो वहीं दूसरी ओर पशु पक्षी जीवों के टेनों में मची खलबली ने टी.व्ही अखबारों में चिल्ला ठंड की पूर्व संध्या पर चिल्ला चोंट कर शांत समुद्र में खलबली मचा भाया आखिर अन्नदाताओं के दर्द के सैलाब और जीव-जगत में मची खलबली का सच क्या है। आखिर सैलाब दर्द का हो या फिर दरिया का। उसके शांत स्वभाव और अपनी गेल जाना ये तो उसका नैसर्गिक स्वभाव है। फिर सत्ता सियासत इतनी बेचैन क्यों ? भैये- चैन में वेचैन मूर्खो कर सवाल है ये तो म्हारी सियासत में सोशल इंजीनियरिंग का भाग ...

समाधान की मोहताज, सत्यनिष्ठा स्वार्थवत सियासत, समाज का समृद्धि के नाम बांझ होना, स्वभाविक घटना

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  समाधान की मोहताज, सत्यनिष्ठा  स्वार्थवत सियासत, समाज का समृद्धि के नाम बांझ होना, स्वभाविक घटना व्ही. एस. भुल्ले म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार कहते है समृद्धि हमेशा सर्बकल्याण की मोहताज रही है और स्वार्थवत भाव बांझ होने का प्रमाण फिर वह सियासत हो या सामाजिक सरोकार जीवन को निर्वहन अनादिकाल से बाधित करने बाला यह भाव भले मानव को सुखदायी रहा हो मगर यह हमेशा समृद्धि के नाम बांझ ही रहा मगर मानव जीवन का अचूक अस्त्र बनता स्वार्थ न तो तब राष्ट्र् जन हित कर सका न ही भबिष्य मे भी ऐसा कुछ करने बाला है जिस पर मानव जाति स्वयं पर गर्व कर स्वयं को गौरान्वित मेहसूस कर सके फिर भी मानव जीवन मे इस दौड़ को हारना नही चाहता और अपने समुचे सामर्थ पुरूषार्थ को सृजन के बजाय स्वस्वार्थ मे फूक देना चाहता है परिणाम कि समाधान की मोहताज सत्यनिष्ठा समृद्धि के नाम बांझ साबित हो रही है जो आज सबसे बड़ी समझने बाली बात होना चाहिए कहते है समाधान के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा असंबाद या सम्पर्क विहीन होना है दोनो ही स्थति ठीक नही काश सत्य निष्ठा की सार्वजनिक सफत लेने बाला मानव इस सत्य को स्वीकार पाये तो यह मानव जीवन की सबसे...

किसान कल्याण को समर्पित है मोदी सरकार- षड़यंत्रकारियो कि नही किसानो की हर बात सुनी जायेगी - लालसिंह आर राष्ट्रीय अनु. सूचित जाति मोर्चा

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। किसान कल्याण मे भाजपा सरकार ने हमेशा ही कल्याणकारी कदम उठाये है और केन्द्र सरकार आज भी किसानो कि हर बात सुनने तैयार है मगर जिस तरह से आधारहीन दल किसानो की ओट लेकर गौरी का किरदार निभाने की कोशिस मे है उन वे कभी सफल नही हो पायेगे क्योकि न तो देश कि मण्डिया बन्द हो रही न ही एम एस पी बन्द हो रही न ही किसी भी किसान की कोई जमीन खरीद कर कब्जा कर सकता है सरकार किसानो के पक्ष मे आज भी खड़ी है और भबिष्य मे भी खड़ी रहेगी कसानो का कल्याण ही हमारी सरकारो हमेशा लक्ष्य रहा है मगर हमारी सरकार उन षड़यत्रकारी दलो के आगे कतई नही झुकेगी जो किसानो की आढ़ मे अपने सियासी मसूबे पूरे करना चाहते है इस मौके पर आर्य के साथ भाजपा जिला अध्यक्ष राजू बाथम, किसान मोर्चे के जिला अध्यक्ष प्रमेन्द्र सोनू बिरथरे प्रदेश कार्यकारणी सदस्य सुरेन्द्र शर्मा एवं बड़ी संख्या मे भाजपा नेता मौजूद थे। 

बड़े ऐलान के साथ स्थानीय सरकारो के चुनावो में आगाज करेगी वीर सेना,हर युवा तक संदेश पहुॅचाने का लक्ष्य

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नीरज जाटव  म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा  स्वराज से प्रभावित आचार्य ने अनौपचारिक चर्चा के दौरान कहा कि वीर सेना अन्तिम लक्ष्य प्राप्ति तक सहयोग और संघर्ष के साथ वैचारिक संवर्धन का रास्ता नही छोड़ेगी और म.प्र. मे आशन्न स्थानीय सरकारो के चुनावो मे बड़े ऐलान के साथ अपना आगाज करेगी तथा विभिन्न माध्यमो से हर युवा तक समृद्धि खुशहाॅली के लिये कौनसा मार्ग मुनासिब है और कैसै लोग युवाओ बुजुर्गो, बच्चो का जीवन समृद्ध खुशहाॅल बना सकते है तथा अनुशासित जीवन के साथ आत्म निर्भर बन स्वराज की कल्पना को साकार कर सकते है क्योकि बर्तमान समय और नेतृत्व समर्थ सक्षम साबित हो सकता है जल्द जमीनी स्तर पर वीर सेना नजर आयेगी । अन्त मे उन्होने कहा कि देश युवा है मगर सटीक दिशा के अभाव मे युवा शक्ति तथा सामर्थ का भरपूर उपयोग नही हो पा रहा जिसके लिये वीर सेना वो माध्यम होगा जिससे लोग युवा बगैर किसी व्यावधान के अपनी आशा आकांक्षाओ की पूर्ति खुद कर सकेगे। 

बैरहम बसूली की चर्चाये सरगर्म, कुर्सी बचाने बड़ा योगदान मातहतो की मनमानी से हलाकान ठेकेदारो ने हथियार डाले

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नीरज जाटव- म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा  आजकल सड़क महकमे मे बैरहम बसूली की चर्चाये कुछ ज्यादा ही सरगर्म है सूत्रो की माने तो मातहतो से हलाकान ठेकेदारो ने काम बन्द कर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह मातहतो के आगे झुकने बाले नही जिन भी लोगो ने कुर्सी बचाने मनमाना चंदा योगदान स्वरूप जिसको भी दिया है उसकी भरपाई हम से क्यो ? अपुष्ट सूत्रो की माने तो मामला प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क से जुड़ा है अब सच क्या है यह तो चर्चा मे लीन लोग ही जाने अगर चर्चाओ मे लेस मात्र भी सच्चाई है तो बरिष्ठ अधिकारियो या फिर सरकार को इस मामले पर संज्ञान अवश्य लेना चाहिए। 

जीवट व्यक्तित्व व्यथित नही, और विश्राम भी नही बिगड़े मौसम के बीच, मातहतो की हालत हुई खराब मंत्री के ताबड़तोड़ दौरो से हरकत मे मशीनरी

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वीरेन्द्र शर्मा म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा  म.प्र.- जिस तरह से म.प्र. की कददावर मंत्री आजकल प्रदेश भर में भ्रमण कर स्वयं विभाग तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, खेल युवा कल्याण सहित अपने विधान सभा क्षैत्र मे भ्रमण कर  मातहतो की हालत पतली किये हुये है उसे देखकर कर कहा जा सकता है कि अब लगता है कि अलाली के दिन लदने बाले है भ्रमण बैठको से हलाकान बैचारे करे भी तो क्या ? क्योकि अब मंत्री को जानकारी कागजो पर नही बल्कि मौके पर खड़े होकर बताना पढ़ रहा है कि कितना काम हो चुका है और शेष क्यो नही हो सका क्योकि कौन नही जानता कर्तव्य निर्वहन मे कोताही बर्तने बालो को म.प्र. कि इन कददावर मंत्री से तत्काल मौके पर ही पुरूषकार स्वरूप समझाइस को सो खेल,कौशल विकास से लेकर तकनीकी महकमो मे हड़कम्प मचा है बैसै भी मन्दिर मठो के जीर्णोद्यार से पहचाने जाने बाली मंत्री हालिया माॅ नर्मदे के घाट पूजा अर्चना कर आत्मनिर्भर प्रदेश के महाअभियान मे जुटी है मगर वह अपने इस महाअभियान को कितना सार्थक सफल कर पायेगी यह देखने बाली बात होगी। अगर उन्है जानने बालो की माने तो म.प्र. शासन की मंत्री श्री मंत यसोधरा राजे आज कि सिय...

मर्यादा तोड़ता अहंकार, स्वस्वार्थ में डूबी महात्वकांक्षाये कही न करदे समृद्ध जीवन का बंटाढार खुशहाॅल जीवन को विश्वास की दरकार

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा  म.प्र.- जिस तरह के हालात समृद्ध खुशहाॅल जीवन को लेकर अहम अहंकार और स्वस्वार्थ में डूबी महात्वकांक्षाओ के चलते बनते जा रहै है ऐसे मे समझ रखने बाले आम नागरिक से लेकर सत्ता सियासत श्रेष्ठ जनो के मन मे विश्वास को लेकर सबाल उठना स्वभाविक है कि कही ये हालात सृजन मे समृद्ध जीवन का बंटाढार ही न कर दे नही तो हमारे पूर्वजो की त्याग तपस्या ही नही उनकी अनगिनत कुर्बानी और पुण्याई कही बैभाव ही बरबाद न हो जाये और उनकी वह पीढ़ी जिस पर उन्हे नाज था वह अपने ही कृत्यो से मौजूद या आने बाली पीढ़ी के आगे कलंकित न हो जाये हो सकता है कि आज के जीवन मे इस संभावना का कोई मूल्य न हो मगर चर्चा संबाद मे हर्ज ही क्या ? ये अलग बात है कि तत्समय मौजूद उपनिवेशी शिक्षा, सदभाव समभाव, सर्बकल्याण, जीवन स्तर मे सुधार और तेजी से विकास को तत्पर सियासत सत्ता कि त्रुटियो के चलते स्वार्थ भरे उन टेडे़ मेड़े रास्तो को तय करते आज यहां तक पहुॅचे है इस सफर मे हमने एक दूसरे को जी भर के कोसा भी है और सराहा भी है और एक दूसरे की मदद की और ली है फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि अब हम न तो एक दूसरे संबाद क...

सड़े सिस्टम में सुशासन की फूक, निराधार पर आत्मनिर्भर का भार सृजन मे भारी पड़ती श्रेष्ठजनो कि उपेक्षा

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  व्ही. एस. भुल्ले  म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा  म.प्र.- अब फाॅरमूला सिस्टम को संचालित करने बाला हो या फिर सियासत को परवान चढ़ाने बाला हो मगर जब सिस्टम का स्वभाव ही सड़ा गला हो या फिर सड़ाध मारती सियासत हो ऐसे मे सुशासन की फूंक के मायने और निराधार से आत्मनिर्भर की उम्मीद की सार्थकता को समझा जा सकता है मगर कहते है आशा हो तो उम्मीद तो की ही जाना चाहिए। कहते आशा पर असमान टिका होता है अगर ऐसे मे म.प्र. के मुखिया मातहतो के संग बैठ सुधार संदेश देते है तो इसमे हर्ज ही क्या बैसै भी सुधार की उम्मीद मे 72 बर्ष गुजर लिये मगर वही ढाक के चार पात सटीक आधार का अभाव आज भी स्पष्ट नजर आता है अब ऐसे मे कैसै हो आत्मनिर्भर का आगाज और कैसै सुधरे सिस्टम आज भी बड़ा सबाल है मगर कहते पद सत्ता है तो कुछ तो करना ही होगा सो सुधार का खयाल भी क्या बुरा है जय स्वराज । सन्नाटे के बीच मशीनों का कोहराम  म.प्र. शिवपुरी यू तो कभी सिंधिया स्टेट की राजधानी रहे शिवपुरी शहर मे विकास को लेकर चर्चाओ दौर सरगर्म बना रहता है मगर हालिया खबर यह है कि महिनो के सन्नाटे के बाद आजकल शहर कि मुख्य सड़क के निर्माण को लेकर...

टोपे की प्रतिमा से बीजक गायब

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वीरेन्द्र शर्मा म.प्र. शिवपुरी महान स्वतंत्रता सैनानी 1857 के वीर क्रान्तिकारी तात्या टोपे के प्रतिमा के नीचे लगे बीजक के नदारद होने की चर्चा आज शिवपुरी में बड़े जोर शोर से सरगर्म है मगर फिलहाॅल जबाब देह लोग चुप है प्रतिमा के नीचे लगा बीजक आखिर कहाॅ है कोई नही जानता या तो वह रखरखाव कर्ताओ का शिकार हो लिया या फिर उसे जानबूझकर कर पोत दिया गया यह तो प्रतिमा का रख रखाब करने बाले ही जाने मगर फिलहाॅल बीजक को लेकर शिवपुरी चर्चा सरगर्म है।

नही बनी बात, क्या होगा सड़क पर संग्राम वार्ता विफल संघंर्ष का ऐलान

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व्ही. एस. भुल्ले  म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा  म.प्र.- कई दौर की वार्ता विफल होने के पश्चात अब यह तो तय है कि सरकार किसान संगठन अब सड़क पर समाधान के लिए आमने सामने होगे कारण की किसान जहाॅ कानून वापिसी पर अड़ गये है तो सरकार अभी भी मान मनोवल मे जुटी है सरकार चाहती है कि मिल बैठकर समस्या का समाधान किया जाये मगर जिस सियासत पर आज देश का संज्ञान है शायद अब उसके दिन लदने बाले है क्योकि विधि विरूद्ध कोई भी आचरण न तो सफल रहा न ही अब रहने बाला है फिर राजतंत्र रहा हो या फिर लोकतंत्र हो और लोकतांत्रिक विधि यह कहती है जब निर्णय एक निर्वाचित सरकार है जिसे विधि से 5 बर्ष का समय मिला है लोक कल्याण मे तो फिर इतना उताबलापन क्यो और जो राष्ट्र् जनहित के नाम अपनी रोटियाॅ सेक अपना सियासी इकबाल बुलन्द करना चाहते जब वह सत्ता मे आ जाय तो पलट ले इस निर्णय को जो इस सरकार ने लिया है विधि तो यही कहती है मगर दुर्भाग्य की यह चर्चा आज कोई नही करना चाहता क्योकि इसमे किसी के सियासी मसूबे पूरे नही होते यही कारण है कि दिल्ली से लेकर देश भर को न्याय अधिकार के नाम दहलाने की तैयारी है जो न तो राष्ट्र् जन हित मे ...

समाधान का सार्थक संदेश देने मे अक्षम साबित होती सत्ताये सर्बकल्याण मे सियासत, श्रेष्ठजनो की बैबसी है या निहित स्वार्थ जो सत्ता की खातिर उन्हे सामर्थहीन बना देता है

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 व्ही.एस.भुल्ले  म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा  म.प्र.- आज सबसे बड़ा यक्ष सबाल यह है कि जब सत्ताये  वैधानिक तौर पर सक्षम सामर्थवान होती है तो फिर वह अहम मुददो पर बैबस सामर्थहीन क्यो नजर आती हेै क्या सर्बकल्याण मे सत्ता और श्रेष्ठजनो का कोई ऐसा स्वार्थ रहता है जो वह उनके निष्ठापूर्ण कर्तव्यनिर्वहन के आड़े आता है विधान अनुरूप हर सत्ता को बहुमत अनुसार 5 बर्ष तक राष्ट्र् जन की सेवा विकास कल्याण का मौका मिलता है और वैधानिक बहुमत के आधार पर निर्णय तथा कानून बनाने का इन सबके बाबजूद सिर्फ वोट या सत्ता ही ऐसे कारक हो सकते है जो कर्तव्य निर्वहन के आड़े आते हो वरना क्या कारण है जो आय दिन अधिकारो के नाम हो हल्ला मचा रहता है बैहतर हो कि सत्ता मे बैठने बाले श्रेष्ठजन आमजन अब इस बात पर बिचार करे कि इतनी बड़ी लोकतां़िक व्यबस्था मे कैसै सार्थक संवादपूर्ण, विश्वास पूर्ण माहोल बने जिससे असंबाद और अविश्वास की गहरी खाई को पाटा जा सके और समृद्धि, खुशहाॅली का माहौल आम व श्रेष्ठ जनो के बीच बनाया जा सके। जिससे स्वराज का सपना नगर महानगर से चल गाॅब गली गरीब तक पहुॅच सके और हमारी प्रतिभा पुरूषार्...

आधार हीनता का आध्यात्म................तीरंदाज ? वैचारिक शून्यता ने किया सियासत का सत्यानाश

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। भैया- मने तो मानू राष्ट्र, जन जीव कल्याण से बडा न तो समूचे भूभाग पर न तो कोई कर्म है और न ही मानव धर्म, मगर उस आधारहीन आध्यात्म का के करूं जो वैचाारिक शून्यता के चलते स्व-स्वार्थ की छत्र-छाया में स्वयं को समृद्ध बना संघर्ष के रास्ते सर्वकल्याण के नाम सियासत का ही सत्यानाश करने पर उतारू है। आज का सियासी विरोध वैचारिक या फिर व्यवहारिक न होकर जीवन मूल्यों से इतर मनमानी पर उतारू दिखाई देता है। कै वाक्य में ही म्हारे मठाधीशों का आधार निराधार हो चुका है जो जन, राष्ट्र कल्याण के नाम विभिन्न वेषभूषा में वेजुबानों की ओट में जान पडता है।  भैये- मुयें चुपकर म्हारे अन्नदाताओं को कड़ाके की सर्दी के बीच पूरे दस दिन सडक पर संघर्ष करते हो लिये है और थारे को मशखरी छूट रही है। इसलिये मने तो बोल्यू थारा आधार इसलिये अभी तक काला-पीला चिन्दी पन्ने में ही सिमटा है और भाई लोग मल्टीकलर से आगे दिघदर्शन की दुनिया में धूम मचा रहे है। भैया- तने तो गुस्सा थूक मने सिर्फ ये बता कै थारी सरकार म्हारी खेती किसानी पर बने कानून का कुछ कर पायेगी या फिर म्हारे अन्नदाताआंे की मशक्क...

सृजन में सियासत से इतर, सार्थक संबाद समस्या का समाधान सत्ता श्रेष्ठजनो का दायित्व, कर्तव्य जमीनी हकीकत से दूर, आधारहीन संघर्ष, विरोध कभी सार्थक नही हो सकते मर्यादित आचरण श्रेष्ठतम जीवन का आधार

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  व्ही.एस.भुल्ले म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा  .- जिस बिषय को लेकर दिल्ली मे किसान अन्दोलनरत है अब इसके पीछे की सच्चाई जो भी हो मगर इतना तय है कि जिस मुददे को लेकर किसान सड़को पर है उसकी सार्थकता निश्चित अपने आप मे एक सबाल है जिसका स्थाई समाधान होना भी लाजमी है मगर इस आन्दोलन मे जो आचार व्यवहार सिद्ध हो रहा है समस्या और सियासत तथा सत्ता का वह समाधान से कोसो दूर नजर आता है देखा जाय तो असल समस्या है सियासत या सत्ता के सहारे वोटो की फसल काटने कि जैसा कि आज तक सेवा समाधान कल्याण के नाम होता रहा है यही वह अविश्वास है आम जन श्रेष्ठजनो के बीच जो कभी किसी नाम से तो कभी किसी नाम के सहारे उन्माद पूर्ण सियासत का बाजार गर्म किये रहता है बेहतर हो कि आम व श्रेष्ठजन सत्ता से सीधा संबाद कर विश्वास के मंच पर अपनी अपनी प्रमाणिकता सिद्ध कर समृद्धि खुशहाली का मार्ग प्रस्त करे जिससे आने बाली पीढ़ी को हम एक श्रेष्ठ जन, समाज होने का प्रमाण विरासत मे दे सके वरना सत्ता के लिये सियासत चमकाने का यह खेल सेवा कल्याण विकास के नाम यू ही चलता रहेगा मगर इससे मुक्ति का सिर्फ एक ही मार्ग है और वह हो सकता है मर...

फिर छोटी छोटी समस्याओ पर बखेड़ा क्यो.....? सृजन में सार्थक समाधान का आधार रही है सत्ताये

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 व्ही. एस. भुल्ले म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.- जब सत्ताओ का दायित्व ही आस्था या आधार बत लोगो की समस्या समाधान का हो तो फिर बखेड़ा क्यो यह सबाल किसी भी सम्प्रभु ब्यबस्था मे होना स्वभाबिक है क्योकि सार्थक समाधान ही सृजन मे सत्ताओ का आधार होता है 10 दिनो से दिल्ली को घेर सीमाओ पर डेरा डाले किसान अब स्थाई समाधान चाहते है जिस  पर सत्ता की सहमती उसके प्रयास से सिद्ध है कि सत्ता सिर्फ संवेदनयशील ही नही बल्कि वह भी चाहती है कि राष्ट्र् के अन्नदाताओ कि समस्याओ का समाधान उनकी सहमती से हो जिससे उनका हक उन्है सम्मान जनक तरीके से हासिल हो ये अलग बात है कि भूगोलिक, आर्थिक विविधता के बीच सर्बमान्य हल ढूड़ पाना टेड़ी खीर है मगर कहते अगर प्रयास सर्बकल्याण के भाव के साथ हो तो उनकी सार्थकता भी सिद्ध होती है। और इस आन्दोलन का अन्जाम भी ऐसा ही होना चाहिए-जय स्वराज

सृजन मे सार्थक भययुक्त नही भयमुक्तउर्जा से संघर्ष करता अहंकार सर्बकल्याण मे अक्षम असफल सिद्ध होता सेवा कल्याण सत्ता सियासत की दरकार

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व्ही. एस. भुल्ले म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा  म.प्र.- अज्ञानता बस आज जिस तरह से मानव सृजन मे मानव के जीवन मूल्यो को दरकिनार कर जिस निष्ठा पूर्ण कर्तव्य निर्वहन मे जुटा और सियासत सत्ताये उर्जा से सीधे संघर्ष को उतावली नजर आती उससे सर्बकल्याण मे सेवा कल्याण की सिद्धता सिद्ध होना असंभव ही नही नमुमकिन सा जान पड़ता है क्योकि सृजन मे सार्थक भययुक्त नही भयमुक्त सत्ता सियासत कि सिद्धता रही है जिसका भाव अनादिकाल से अहिसंक मगर सर्बकल्याण का हामी रहा है जो सृजन मे सिद्ध भी है और सफल भी और अकाटय सत्य भी है । क्योकि सम्पूर्ण सृष्टि सृजन का आधार उर्जा है जिसके मुख्य श्रोत जल,वायु,सूर्य कहै जा सकते है इसके अलाबा भी सृष्टि मे सृजन चक्र न रूके इसलिये मूल जीवन के आधार से प्राप्त जीवन मे भी उर्जा के अशं का सृष्टि संचार रखा है फिर वह पैड़ पौधे जीव जन्तु ,पक्षी, मानव या समस्त भूभाग पर मौजूद कोई भी जीवन हो सभी मे सृजन कि खातिर उर्जा का अंश मौजूद है जिसे रोकना सीधे सृष्टि से ही संघर्ष कहा जायेगा जिस तरह कोई भी ताकत सूर्य के उगने डूबने ,और वायु के वेग कि दिशा , जल के प्रवाह कि दिशा नही बदल पाया ठीक उसी ...

पुलिस की प्रमाणिकता सिद्ध करता पुलिस कप्तान एस. ओ. सहित 5 पुलिस कर्मी निलंबित

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म.प्र.- कौन कहता है कि निष्ठापूर्ण कर्तव्य निर्वहन मे बड़ी बाधाये होती है अगर आप कर्तव्य के प्रति निष्ठ है और ली गई शफत के प्रति आपकी सच्ची आस्था है तो कोई कारण नही जो आप अपने कर्तव्य निर्वहन मे असफल अक्षम सिद्ध हो सामुदायिक पुलिसिंग से लेकर 50-50 के जघन्य डकैत अपराधियो को सीखचो के पीछे पहुचाने पुखता इन्तजाम करने बाला पुलिस कप्तान निष्ठा को लेकर इतना सख्त भी हो सकता कि अपने 1-2 नही पूरे 5 कर्मियो पर भी सख्त कार्यवाही करते हुये निलंबित कर दे। मगर म.प्र. के शिवपुरी पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चन्देल ने समुचे अमले को ही नही सभी को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि कर्तव्य निर्वहन मे कोताही किसी भी स्थति मे बर्दास्त नही की जायेगी फिर इस दायरे मे मातहत हो या फिर अपराधि हो।

जिसका का डर था आखिर वही हो रहा है, दिल्ली में किसान आन्दोलन बैक फुट पर सत्ता सरकार अहंकार मे मिट गये न जाने कितने वंश, अहंकार ही वह शत्रु था जो ले डूबा रावण और कंश सत्य को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर बखेड़ा

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व्ही. एस. भुल्ले म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.- नये कृषि कानून को लेकर दिल्ली की सीमाओ पर मचे बखेड़ा का सत्य जो भी हो आखिर हो वही रहा है जिसका डर पहले से था शायद सत्ता की खातिर आमजन के आगे ढोक लगा सत्ता हथियाने बालो यह इल्म नही रहता कि वोट की खातिर वह जो आचरण प्रस्तुत कर जिस संस्कृति को जन्म दे रहै है आज नही तो कल उसका हिसाब किताब सत्ता और सियासत दोनो को ही देना है मगर 72 बर्षो मे मुगालतो की माहिर सियासत यह भूल जाती है कि हर चीज का अन्त सुनिश्चित है । यह कटु सच है देखा जाये तो जिस अहंकार के रथ पर सबार सत्ताये सर्बकल्याण का परचम फहरा सम्राट बनने आतुर रहती है और समय बैसमय अश्व मेघ यज्ञ का आयोजन कर राष्ट्र् जन कल्याण की समृद्धि खुशहाॅली की खातिर आहूतियाॅ देती नही थकती वह शायद भूल जाती है कि यह लोकतंत्र है जनतंत्र है इसमे सत्ता तभी तक सुरक्षित रहती है जब तक जन लोक कल्याण सुरक्षित, समृद्ध बना रहता है मगर जब जनहित राष्ट्र् हित पर आच आती है तो फिर वही होता है जो दिल्ली की सीमाओ पर हो रहा है बैसै भी यह कटु सच है कि जब जब उर्जा को बाधित कर सर्बकल्याण की कोशिस हुई परिणाम सार्थक सफल नही र...

जिसका का डर था आखिर वही हो रहा है, दिल्ली में किसान आन्दोलन बैक फुट पर सत्ता सरकार अहंकार मे मिट गये न जाने कितने वंश, अहंकार ही वह शत्रु था जो ले डूबा रावण और कंश सत्य को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर बखेड़ा व्ही. एस. भुल्ले म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.- नये कृषि कानून को लेकर दिल्ली की सीमाओ पर मचे बखेड़ा का सत्य जो भी हो आखिर हो वही रहा है जिसका डर पहले से था शायद सत्ता की खातिर आमजन के आगे ढोक लगा सत्ता हथियाने बालो यह इल्म नही रहता कि वोट की खातिर वह जो आचरण प्रस्तुत कर जिस संस्कृति को जन्म दे रहै है आज नही तो कल उसका हिसाब किताब सत्ता और सियासत दोनो को ही देना है मगर 72 बर्षो मे मुगालतो की माहिर सियासत यह भूल जाती है कि हर चीज का अन्त सुनिश्चित है । यह कटु सच है देखा जाये तो जिस अहंकार के रथ पर सबार सत्ताये सर्बकल्याण का परचम फहरा सम्राट बनने आतुर रहती है और समय बैसमय अश्व मेघ यज्ञ का आयोजन कर राष्ट्र् जन कल्याण की समृद्धि खुशहाॅली की खातिर आहूतियाॅ देती नही थकती वह शायद भूल जाती है कि यह लोकतंत्र है जनतंत्र है इसमे सत्ता तभी तक सुरक्षित रहती है जब तक जन लोक कल्याण सुरक्षित, समृद्ध बना रहता है मगर जब जनहित राष्ट्र् हित पर आच आती है तो फिर वही होता है जो दिल्ली की सीमाओ पर हो रहा है बैसै भी यह कटु सच है कि जब जब उर्जा को बाधित कर सर्बकल्याण की कोशिस हुई परिणाम सार्थक सफल नही रहै फिर वह मानवीय उर्जा हो या फिर नैसर्गिक उर्जा परिणाम सामने है जिस ब्यबस्था मे 500 आन्दोलित कर्मियो को पुलिस को लाठी चलाना पढ़े ऐसी सत्ताओ कि संवेदन शीलता का अन्दाजा लगाया जा सकता है हो सकता है सत्ता का स्वभाव ही अहंकारी हो सो वह सेवा कल्याण के लिये काबिज होने के साथ ही अहंकारी हो जाती है बैसै भी कहाबत है कि अहंकार मे न जाने कितने मिट गये वंश अहंकार ही था जो ले डूबा रावण और कंश जय स्वराज। पुलिस की प्रमाणिकता सिद्ध करता पुलिस कप्तान एस. ओ. सहित 5 पुलिस कर्मी निलंबित म.प्र.- कौन कहता है कि निष्ठापूर्ण कर्तव्य निर्वहन मे बड़ी बाधाये होती है अगर आप कर्तव्य के प्रति निष्ठ है और ली गई शफत के प्रति आपकी सच्ची आस्था है तो कोई कारण नही जो आप अपने कर्तव्य निर्वहन मे असफल अक्षम सिद्ध हो सामुदायिक पुलिसिंग से लेकर 50-50 के जघन्य डकैत अपराधियो को सीखचो के पीछे पहुचाने पुखता इन्तजाम करने बाला पुलिस कप्तान निष्ठा को लेकर इतना सख्त भी हो सकता कि अपने 1-2 नही पूरे 5 कर्मियो पर भी सख्त कार्यवाही करते हुये निलंबित कर दे। मगर म.प्र. के शिवपुरी पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चन्देल ने समुचे अमले को ही नही सभी को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि कर्तव्य निर्वहन मे कोताही किसी भी स्थति मे बर्दास्त नही की जायेगी फिर इस दायरे मे मातहत हो या फिर अपराधि हो।

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  जिसका का डर था आखिर वही हो रहा है, दिल्ली में किसान आन्दोलन बैक फुट पर सत्ता सरकार  अहंकार मे मिट गये न जाने कितने वंश, अहंकार ही वह शत्रु था जो ले डूबा रावण और कंश  सत्य को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर बखेड़ा व्ही. एस. भुल्ले म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.- नये कृषि कानून को लेकर दिल्ली की सीमाओ पर मचे बखेड़ा का सत्य जो भी हो आखिर हो वही रहा है जिसका डर पहले से था शायद सत्ता की खातिर आमजन के आगे ढोक लगा सत्ता हथियाने बालो यह इल्म नही रहता कि वोट की खातिर वह जो आचरण प्रस्तुत कर जिस संस्कृति को जन्म दे रहै है आज नही तो कल उसका हिसाब किताब सत्ता और सियासत दोनो को ही देना है मगर 72 बर्षो मे मुगालतो की माहिर सियासत यह भूल जाती है कि हर चीज का अन्त सुनिश्चित है । यह कटु सच है देखा जाये तो जिस अहंकार के रथ पर सबार सत्ताये सर्बकल्याण का परचम फहरा सम्राट बनने आतुर रहती है और समय बैसमय अश्व मेघ यज्ञ का आयोजन कर राष्ट्र् जन कल्याण की समृद्धि खुशहाॅली की खातिर आहूतियाॅ देती नही थकती वह शायद भूल जाती है कि यह लोकतंत्र है जनतंत्र है इसमे सत्ता तभी तक सुरक्षित रहती है जब तक जन लोक ...

माईबाप की हरकत से हलाकान लोकतंत्र के भगवान क्या वाक्य मे ही सत्ता इतनी अहंकारी होती है......?

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व्ही. एस. भुल्ले म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा  म.प्र.-ये अलग बात है कि राजतंत्र परतंत्र के पतन के बाद हमने पूरे स्वाभिमान के साथ इस महान लोकतंत्र को अंगीकार कर गहरी आस्था रख आज तक सहर्ष स्वीकार करते चले आ रहै है अपने वोट,नोट से सत्ता को पोषित करने बालो को क्या पता कि सत्ता इतनी अंहकारी होती है कि जिसके चाकर स्वयं को माईबाप समझ लोकतंत्र के भगवानो हड़काने मे कतई गुरेज नही करते और उनकी आशा अकाक्षाओ को बड़ी ही बैरहमी कुचलने स्वयं को धन्य समझते है। मगर क्या करे जब सत्ता में बैठालने बालो को भी इन्तजार करना पढ़ रहा हो तो फिर सत्ता से बैदखल करने की  आम नागरिक की क्या औखात बहरहाॅल जो भी हो मगर सत्ता से यह उम्मीद नही कि जाती खासकर जब ब्यवस्था लोकतांत्रिक हो और मंच से ढोक लगा जनता जनार्दन को प्रणाम करता हो और जनता को भगवान मानता हो ऐसे मे माईबापो का तल्ख मिजाज अशोभनीय ही कहा जायेगा म.प्र. का यह मामला किसी मंत्री संत्री का नही बल्कि मुखिया से जुड़ा है हालाकि स्वयं पर लज्जित वह श्रेष्ठजन इसे अपमान न मान इसे सत्ता का अहंकार मान इसे सृजन कर्तव्य निर्वहन के मार्ग कि बाधा भर करार देते है और कल्...

प्रधानमंत्री में आस्था हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए बैधानिक विश्वास का संकट राष्ट्र्, जन के हित मे नही विरोध के नाम भ्रम, लोकतंत्र के साथ विश्वासघात

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व्ही.एस.भुल्ले म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा  म.प्र.-अगर देश के प्रधानमंत्री की चिंता यह है कि नीतियो के विरोध की जगह भ्रमपूर्ण माहौल बना बैजा विरोध के स्वर सियासत चम काने चलन शिरू हो चुका है और इसके पीछे वही लोग है जिन्होने किसानो का कभी भला नही किया अगर यह सही है तो यह न तो राष्ट्र्जन, न ही लोकतंत्र के हित मे है कहते किसी भी लोकतांत्रिक ब्यबस्था मे प्रधानमंत्री का पद सिर्फ प्रतिष्ठपूर्ण ही नही बल्किी बैधानिक होता है और उस पर अविश्वास लोकतंत्र के साथ विश्वासघात ही कहा जायेगा ये सही हो सकता है कि जिस तरह से चुनाबी माहोल मे प्रधानमंत्री या फिर मुख्यमंत्री मंत्री पदो को वैधानिक रूप से सुशोभित करने बाले व्यक्तियो का उपयोग हार जीत की खातिर लगाया जाता है यह उसी का दुष्परिणाम है कि आज लोग भ्रम के सहारे प्रधानमंत्री की कही बातो को झूठ ठहराने से नही चूक रहै और लोग अपने प्रधानमंत्री से ऐसे ऐसे सबाल करने से नही चूक रहै जो प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुकूल नही बल्कि सबाल करने बाले अन्जाने मे ही सही सिर्फ अपने प्रधानमंत्री ही नही इस महान लोकतंत्र का भी अपमान कर रहै है अगर नई किसान नीति को ल...

धरातल पर दम तोड़ती, आशा आकांक्षाये न विधान के रहे न संबिधान के बन सके बैखोफ तंत्र मे मयूस लोकतंत्र

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व्ही.एस.भुल्ले म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा  म.प्र.-व्यवहारिक सच से इतर सैधांतिक सच को स्वीकारना आज के जीवन की बैबसी हो सकती है मगर बाध्यता कतई नही जिस सम्द्ध खुशहाॅल जीवन की खातिर कभी आम जीवन ने अपने हजारो बर्ष पुराने विधान को त्याग संबिधान को अगीकार कर अपनी सम्पूर्ण आस्था इस महान लोकतंत्र मे व्यक्त कर अपना विश्वास लोक के कल्याण की खातिर तंत्र पर किया आज आजादी के 72 बर्ष बाद वह मायूस निराश है कारण हमारे तंत्र से जो उम्मीद समृद्ध खुशहाॅल जीवन ने लगा रखी थी वह धरातल पर उम्मीद के मुताबिक मूर्तरूप नही ले सकी और हम अपनो के ही बीच हताश निराश हो लिये आज जिस बैखोफ अंदाज मे सेवाकल्याण सरपट दौड़ रहा है जीवन की रेत पर लकीर तो दिखती है मगर उसके कल्याणकारी पदचाप नजर नही आते आज लोकतंत्र के लिये यही सबसे बड़ा चिन्ता का बिषय हे जिसपर सत्ताओ को अबिलम्ब विचार अवश्य करना चाहिए क्योकि कोई भी सत्ता पहली और आखिरी नही होती सत्ताये आती जाती रहती है मगर विश्वास जीवन मे पहली और आखिरी आस्था होती है जिसे बचाना हर सत्ता सियासत और श्रेष्ठजनो का कर्म और धर्म होना चाहिए। जय स्वराज