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Showing posts from July, 2021

सेवा में राष्ट्र्ीय भाव अहम , बड़ी जबाबदेही - नरेन्द्र मोदी

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स्वराज्य मे साधनो की पवित्रता सार्थक रही है  व्ही. एस. भुल्ले  31 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  राष्ट्र् जन सेवा से जुड़ा बिषय या कोई अहम मौका देश के प्रधान मंत्री हमेशा अपने अनुभव साझा और लोगो की समझ को समझने समझाने का अवसर अवश्य सार्थक करने की पूरी कोसिश करते है मौका था आई . पी. एस. सेवा के 2019 के बैच के नव अधिकारियो के बीच संवाद का सो उन्होने जहां युवा अधिकारियो सेवा मे समझ को समझने की कोसिश की तो वह इस अवसर पर साबरमती आश्रम और स्वराज्य की चर्चा करने से भी नही चूके बल्कि उन्होने नव प्रशिक्षित सेवको को बताया की कैसै महात्मा गाॅधी जी ने सिर्फ नमक आन्दोलन को खड़ा करने अकेले कुछेक लोगो के साथ शुरूआत की और कारबां बढ़ता चला गया जिससे ब्रिटिस सरकार भी हिल गई इस अवसर पर उन्होने सेवा मे लीडर वन राष्ट्र् जन सेवा के कार्य कैसे किये जा सकते है इस प्रकाश डाला और पवित्र साध्य की प्राप्ति मे पवित्र साधनो की क्या महत्वता होती है वह गाॅधी जी के उदाहरण से समझाया । निश्चित ही यह प्रधानमंत्री जी का भाव उन्है और दृढ़ तथा संकल्पि सिद्ध करता है सियासत अपनी जगह और राष्ट्र् जनसेवा अपन...

विश्वास की कसौटी पर आशा अकांक्षाओ का दिवाला

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निष्ठा को लेकर उठते सबाल घातक  वीरेन्द्र शर्मा  31 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  अर्थ अभाव में माखौल बनते सत्ता , सौपानो की बैबसी सच जो भी हो मगर वह निर्देाष सिद्ध हो सर्वजनिक जबाबदेहियो के बीच यह संभव नही क्योकि जुनून के बीच जिस तरह से आशा अकांक्षाओ का दिवाला निकल रहा है उससे निष्ठा पर संदेह होना स्वाभाविक है और यह सही भी है कि जो विश्वास निष्ठा की दम पर सत्ता , सौपानो आम जन के बीच कायम किया था वह सतत सत्ता की महात्वकांक्षा मे स्वाहा होता चला जा रहा है जिसके परिणाम भले ही भबिष्य के साक्षी सिद्ध हो मगर यह उस लोकतंत्र के लिये कतई लाभप्रद नही रहने बाले जिसको लोगो अंगीकार कर अपने वोट की ताकत से उन सत्ता ,सौपानो सक्षम बना अचूक शक्ति प्रदान की मगर आज जिस तरह से अर्थ अभाव मे यह संस्थाये स्वयं बैबस सिद्ध कर रही वह कैसै स्वयं को लोक जन कल्याण मे सिद्ध करेगी तंत्र जो भी हो या रहै मगर जीवन अमूल्य है जो हर व्यक्ति को एक ही बार मिलता है खासकर मानव जीवन जिसके कंधो पर समस्त जीव जगत के कल्याण की जबाबदेही होती है अगर उसका ही जीवन अभावग्रस्त कंटक पूर्ण हो जाये तो वह कैसै मानव ...

ढाई अरब नीलम और साग सब्जी की हाॅट ........? तीरंदाज

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व्ही. एस. भुल्ले   भैया - श्रावण मास में भगवान भोले नाथ के जयकारे के बीच तने कै अर्र बर्र बोल रिया शै के थारे को सच्ची शक्ति भक्ति मे डूबने का समय नही मिल रिया शै जो तने नीलम और सब्जी भाजी की बात कर रिया शै दनादन झमाझम उड़ रही है और साक्षात भोले नाथ की कृपा बरस रही है ।  भैयै - काड़ू बोल्या लंका मे ढाई अरब का नीलम मिला है जिसका भाव भी चोटी के जौहरियो द्वारा हाथो हाथ फिक्स कर दिया है अगर खबर पक्की है तो इतने बड़े साइज का तो आज तक म्हारे आॅगन मे कांच का टुकड़ा तक नही निकला है भले ही म्हारे प्रदेश मे हीरो की खान हो मगर आज तक ऐसा भाग्य किसी का नही चमका है । जो लंका के काॅलंबो मे चमका है ।  भैया - कै थारे को मालूम कोणी कभी म्हारे संयुक्त प्रदेश मे भी बैलाडीला की डील हुई थी मगर हीरो की मैग्जीन उपर ही होने के बाबजूद किसी को धेली भी नही मिली थी वो तो राजा कि कृपा रही कि बात बैलाडीला मे ही दफन कफन हो ली अगर बोली सब्जी भाजी हाॅट मे लग जाती तो मिटटी भी आज सोना उगल रही होती ।  भैयै - थारे मे यही तो खराबी है जो तने हीरो की तुलना सब्जी भाजी से कर डाली है ये अलग बात है कि कहाबते हुआ कर...

ईमान की होली में हाथ सेकता इन्सान , अर्थ के लिये अनर्थ

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समृद्ध जीवन को सिसकते लोग , महात्वकांक्षा हुई बैलगाम  व्ही. एस. भुल्ले  29 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  कहते है इस अर्थ युगी कलयुग मे जो हो जाये वह कम है मगर जिस तरह से ईमान की धधकती होली मे हाथ सेकने की संस्कृति परवान चढ़ी है वह भले ही हालिया फलित न हो मगर इसके दूरगामी परिणाम बहुत भयाभह रहने बाले है । क्योकि जिस तरह से अर्थ के लिये अनर्थ समाज मानव जीवन मे पनप रहा है वह स्वार्थ तो पूरे कर सकता है मगर समृद्ध जीवन किसी को भी मुहैया नही करा सकता क्योकि अपने ही राज मे जिस तरह से आम लोग समृद्ध जीवन को तरस रहै है वह किसी से छिपा नही जिसके लिये उन्है ही जिम्मेदार करार दे देना कोई नई बात नही मगर आज के जीवन का सच अब यही रह गया है । कहने को लोक जन कल्याण कारी सत्ताये है और सेवा भावी सियासत जिनके कंधो पर यह लोकतंत्र टिका है । और लोकतंत्र मे को अंगीकार करने बालो का विश्वास टिका है । मगर दुर्भाग्य कि सत्ता सियासतो के लाख चाहने के बाबजूद आज तक सिर्फ एक दूसरे को कोसने के बजाये सर्बकल्याण का समृद्ध मार्ग प्रस्त नही हो सका । जो 70 बर्षो की आजादी और महान लोकतंत्र के रहते अक्षम ...

बाॅंटने डाटने के खेल मे अकांक्षा हुई अनाथ

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संघर्ष के मैदान मे तब्दील हुआ सेवा कल्याण  जीवन सरोकारो से दूर भागती सियासत  वीरेन्द्र शर्मा  28 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.   आज अनाथ अकांक्षा बड़े बड़े सामथ्र्यशाली , पुरूषार्थियो के बीच भले बिलबिलाने पर बैबस मजबूर हो ऐसे मे गैंग गिरोह बन्द सियासत को क्या लेना देना आज जिस तरह से सेवा कल्याण संघर्ष के मैदान मे तब्दील हो चुका है ऐसे मे आम जीवन को उससे कोई बहुत बड़ी उम्मीद भी नही रखनी चाहिए क्योकि जिस तरह से सियासत सत्ता की खातिर जीवन सरोकारो से दूर होती जा रही है वह न तो आम जन जीवन , या जीव जगत के हित मे है न ही आने बाले समय मे सियासत के हित मे है । सर्बकल्याण के नाम आज जीवन जिस तरह से बिलबिला रहा है वह किसी से छिपा नही मगर सियासी दलील की माने जो कभी खुलेआम व्यक्त होने के नाम वैवा नजर आती है वह भी सत्ता संग सुहागन होते ही सारे सरोकारो का जनाजा निकालने तैयार रहती है अब ऐसे मे सृजन का मार्ग का कैसै प्रस्त हो यह तो वह सेवक और सर्बकल्याण का दम भरने बाले ही जाने मगर इतना तय है कि आज जिस तरह की अपेक्षा सत्ता सियासत मे आम जीवन से बढ़ती जा रही है और मानव संस्कृति छल...

घोटालो की बारूद पर घटिया निर्माण

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म.प्र. के शिवपुरी मे बढ़े घोटालो की आशंका  शासन की निर्धारित दर से 30 फीसद कम दर पर कार्य  कई घोटाले दफन है तो कई दफन होने तैयार  वीरेन्द्र शर्मा  27 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  जनसेवा विकास मे आस्था रखने बाले भले ही दिन रात एक कर जनसेवा विकास के कितने ही ककहरे क्यो न गढ़े मगर मगर खून पसीने से हासिल धन को माटियामेट कर खुद का घर भरने बालो को फुरसत कहां कि वह उन जन सेवको की त्याग तपस्या और जन धन पर रहम रखे भले ही सरकार भी आय दिन छापे मारी कर यह संदेश देने की कोसिश मे हो कि उसकी मंशा गुणवत्ता पूर्ण कार्य कराने की है जिससे आम जन को विकास के माध्यम से बैहतर सुबिधाये नसीब हो सके मगर आज के ऐसा संभव कहा विगत एक दशक मे लगभग सेकड़ो करोड़ के घोटालो को कफन दफन पहना चुके इन धन पिपासुओ क्या वह तो निरन्तर अपनी निष्ठा के बल अपने विकास पर भरपूर खून पसीना पूरी रिस्क के साथ बहा रहै है फिर चाहै वह जलसंसाधन हो जो आजकल बिना साधन के ही समय बैसमय सुर्खियो मे बना रहता है फिर नये नये रूप मे प्रकट वह संस्थाये हो जिनका गठन ही गुणवत्ता पूर्ण निर्माण के लिये किया गया है अगर हम बात ...

अविश्वास , पहचान का संकट , स्थापित संस्थाये हुई बैजान

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घटिया स्तर का प्रदर्शन करते पद और सौपान  बंटाढार की ओर बढ़ती नव संस्कृति और संस्कार  व्ही. एस. भुल्ले  24 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  मौजूद माहौल मे कुलाछै मारती नव संस्कृति संस्कारो के बीच जो अविश्वास पहचान का संकट खड़ा हुआ है और स्थापित संस्थाये जिस तरह से बैजान नजर आती है उससे हजारो बर्षो की त्याग तपस्या , अनगिनत कुर्बानियो का बंटाढार होना तय है जिस घटिया स्तर के प्रदर्शन से अब तो पद सौपान भी शर्मसार है ऐसे मे मानव जीवन की उपायदेयता पर विचार न हो इससे बढ़ी कर्तव्य विमुखता और कोई मानव जीवन की हो नही सकती अपनी अपनी समृद्धि अपने अपनो के विकास मे डूबे जीवन की यह अज्ञानता ही कही जायेगी जिसे आज स्वं स्वार्थ के आगे सेवा , सर्बकल्याण जैसै शब्द अब निशब्द हो चुके है हर एक समृद्ध सामथ्र्यवान शक्तिसाली मानव अपने पुरूषार्थ का उपयोग सर्बकल्याण से इतर स्वकल्याण के लिये कर लेना चाहता है फिर उसके लिये उस महान संस्कृति संस्कारो की होली जले या फिर उसका जनाजा निकले उससे उसे क्या लेना देना सेवा कल्याण के नाम गैंग गिरोह बंन्द होते मानाव समूहो का लक्ष्य जो भी हो मगर आने बाले ...

स्वयं सिद्ध समृद्धि में लज्जित हुआ कल्याण

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छापे उगलते अकूत संपत्ति , भगवान हुये हैरान  वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 23 जुलाई 21  म.प्र. स्वयं सिद्ध समृद्धि मे जो समान भाव सम्पन्नता का प्रदर्शित हो रहा है उसके मायने जो भी हो मगर छापो मे निकलती सेवको के यहां अकूत संपत्ति कितनी जायज या कितनी नाजायज है यह तो बाद मे सिद्ध होगा मगर जो सुर्खिया सेवा कल्याण के बाजार मे सरगर्म है वह कुछ कम नही और हो भी क्यो क्योकि आज के समय जो पकड़ा जाये वह बैचारा बड़ा चोर और जो मसकेई दबा जाये वह साहुकार सो इस पचड़े मे अपने राम की तो राय नही । इतिहास गबाह है इस तरह के पचड़ो से कई तो बैदाग निकल जाते है तो कई बैचारे सेवा कल्याण का मूल्य जीवन भर चुकाते है । क्योकि कि बर्तमान लोकतंत्र मे विधि का राज है न कि ब्रम्ह का विधान सो जो विधिसंबत लोग कहै उसे ही सही मान लेना चाहिए इसी मे विधि विधान दोनो की भलाई है । अब पकड़े जाने बालो मे कोई यंत्री हो या फिर कोई बाबू लगे तो सभी सेवा भाव मे ही है । अब विधि के विधान या दस्यु राज मे कोई इतना बड़ा जनधन पर डाका अकेले ही डाल अपना घर भर ले यह संभव नही कोई तो सरगना होगा मगर आम सामने की मुठभेड़ मे स...

माफिया राज से थर्राया मानव , जन , जीवन

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कंटक , बाधा , अभाव श्रेष्ठ जीवन का आधार नही  सर्बकल्याण मे सत्ता का धर्म समृद्ध जीवन की सुरक्षा , संरक्षण होता है । न कि अपने सामर्थ का अधिकार  व्ही. एस. भुल्ले  20 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  यू सतयुग से लेकर द्वापर त्रेता और अब कलयुग सभी युग मे मानव जन जीवन का आधार सर्बकल्याण मे निहित रहा है जिन्है समय समय पर खुला संरक्षण रक्षण सत्ता और सामर्थ का रहा है । सत्य और समृद्ध जीवन का यह सूत्र कड़े संघर्ष के बाद आज यहाॅ तक पहुॅचा है कहते है जीवन मे कटंक , बाधा , अभाव कभी श्रेष्ठ जीवन का आधार नही हो सकते न ही सर्ब कल्याण से दूर सिद्ध सामर्थ का अधिकार मगर आज तब जब जनता का जनता के लिये जनता द्वारा स्थापित सत्ताओ के रहते गली , गाॅब से लेकर नगर महानगरो तक माफिया राज मानव , जन , जीवन को प्रभावित कर रहा है तो यह समुचे मानव जगत के लिये शर्म की बात होना चाहिए ंमगर लगता नही कि आज श्रेष्ठ समृद्ध जीवन मे इसका कोई मूल्य हो वरना माफिया राज इस तरह से आम जीवन के नैसर्गिक अधिकार को प्रभावित नही करता ऐसा नही कि माफिया राज सिर्फ समाज मे ही जड़े जमा चुका है बल्कि आज इससे न तो सिय...

नेकनियत के नाम निकम्मेपन का नंगा नाच

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लोकतंत्र की आढ़ मे सेवा संसाधनो की लूटपाट  वीरेन्द्र शर्मा  22 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  लोकतांत्रिक आस्था और जन बैबसी के चलते जिस तरह से नेकनियती के नाम नंगा नाच चल रहा है उसके परिणाम भले ही किसी पके फल की तरह टपकने आतुर हो मगर क्या गारंटी है कि वह किसी जरूरत मंद को नसीब हो सके मगर इस बीच जीवन की बैबसी अहम अहंकार के आगे बिलबिलाने , गिड़गिड़ाते गली मोहल्ले घूम रही है हो सकता है उसका यह सामर्थ पुरूषार्थ आने बाले समय मे उसका सारथी बर जाये मगर उन अहम अहंकारियो का क्या जिनका समूचा जीवन स्वयं के जीवन के ऐश्वर्य बनाने मे निकल चला देखा जाये तो लोकतंत्र की आढ़ मे जिस तरह से आस्था , सेवा , संसाधनो की लूट मची है उसे देखकर तो वेशर्मी भी सरमा जाये मगर तो फिर नेकनियत नेकदिली की क्या औकात जो उस पर लगाम लगाने की भी सोच पाये और फिर लगाम लगे भी कैसै जब अदने से अदने सेवको घर ,बैक खाते ,लोकर लाखो करोड़ो उगल रहै है । जिनको रहते करोड़ो की लागत से निर्मित भवन , पुल , सड़क या तो जमीदोस हो चुके है या फिर खुद के जमीदोस होने का इन्तजार कर रहै है । वह तो आज भी मैदानी कमान सम्हाल अपनी निष्ठ...

स्वार्थ के लिये सामर्थ को कलंकित करते तथाकथित वीर

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अपनो के बीच बिलबिलाता आम जीवन  सत्य से विमुख सामर्थ शालियो का पुरूषार्थ , कुल कौम , भावी पीढ़ी ही नही , अपने पूर्वजो की महान कीर्ति , यश , ऐश्वर्य , त्याग , तपस्या को भी पीढ़ी दर पीढ़ी कलंकित करता है ।  व्ही. एस. भुल्ले  18 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  जीवन की बैहतर समझ के साथ जीवन मूल्य सिद्धान्तो के लिये जीवन जीने बालो का आज सबसे बड़ा दर्द यह है कि अब न तो सत्ता न ही सियासत मे और न ही मौजूद समाज संस्कृति संस्कार के बीच आज उनकी कोई भूमिका शेष रही न ही उन्है सुनने समझने मे किसी को कोई दिलचस्वी रही यह आज के जीवन का कटु सत्य है । फिर भी न उम्मीद होना जीवन से द्रोह ही कहा जायेगा । इसलिये मानव धर्म के पालन मे मानव के रूप मे मानव की निष्ठा मानव धर्म की रक्षा उसके संरक्षण मे होना चाहिए मगर दुर्भाग्य की आज तथाकथित सामर्थशालियो की जमात अपने अपने स्वार्थो के सामर्थ को ही कलंकित करने मे जुटे है जो ठीक नही क्योकि आज आम जीवन अपने नैसर्गिक हक को हासिल करने सरेयाम बिलबिला रहा है मगर बैजान सत्ता संसाधनो मे सुनने बाला कोई नही न तो वह मानव संसाधन ही समस्या समाधान मे देवदूत स...

शिष्टाचार के साथ सेवाओ को रफतार

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5 शहरो की उड़ान सेवा शिरू , 100 नये हवाई अडडो तैयारी  वीरेन्द्र शर्मा  17 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  मोदी मंत्रीमंण्डल में नये उडडयन मंत्री बनने के साथ ही सिंधिया ने शिष्टाचार भेटो के साथ ही सपनो के उड़ान की शिरूआत कर दी है जहां मंत्रालय का कार्यभार ग्रहण के साथ ही उन्होने म.प्र. से देश के 5 महानगरो के लिये हवाई सेवा यात्रा की घोषणा की तो 16 जुलाई से उन्होने उनकी शुरूआत भी करा दी । इतना ही नही उन्होने लगभग 100 नये हवाई अडडे तैयार करने की योजना पर भी कार्य शुरू कर दिया है तो वही हर रोज देश के प्रमुख संबैधानिक लोगो से भी सतत भेट का कार्यक्रम बनाये हुये है फिलहाॅल तो उन्होने देश राष्ट्र्पति श्री रामनाथ कोविंद उपराष्ट्र्पति एम. वैकैया नायडु , लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से भेट की है तो वही दूसरी ओर वह म.प्र. के नेता कार्यकर्ताओ से भी मिल रहै है अब इसके पीछे जनसेवा के कारबा को आगे बढ़ाने की जो भी सोच हो मगर फिलहाॅल सिंधिया की सक्रियता के पीछे के सबाल सिर्फ सियासी हो सकते है मगर सच क्या है यह तो केन्द्रीय मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया ही जाने कि किस रास्ते उडडयन ...

कंगाली के बीच वैवीनार बैठको ने बैठाला म.प्र. का भटटा

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संविदा की बैबसी और प्रभारियो के भार से बिलबिलाती जनता  वीरेन्द्र शर्मा  21 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  शासकीय खजाने की कंगाली के बीच जिस तरह से वैवीनार और बैठको का दौर चल रहा है उससे कितना कितनो का भला हो रहा है यह तो सरकार के मुखिया ही जाने मगर सेवा कल्याण का जिस तरह से भटटा बैठा है सरकार स्वीकारे या न स्वीकारे मगर इसका सच अब धीरे धीरे सारे प्रदेश के सामने आने लगा है । तो वही दूसरी ओर शासन मे संविदा की बैबसी और प्रभारी व्यवस्था के भार ने समुचा सिस्टम का कचुमर बनाया है उससे अब जनता भी बिलबिलाने पर मजबूर दिखाई पढ़ती है । मगर जबाबदेहो के कानो पर जूह तक का न रैगना इस बात का प्रमाण है कि समृद्ध प्रदेश अब किस संकट से घिर चुका है । आमदनी चबन्नी खर्चा रूपया के भबर मे फसी सरकार नैया अब तक तो जैसे तैसै उधार के माल पर सेवा कल्याण और विकास के सपने साकार करने उताबली थी मगर लगता है बढ़ते खर्चो के बीच वह भी अब न काफी साबित हो रहा है मगर सरकार के धन पर रोजी रोटी चलाने बालो को क्या पता था कि एक दिन ऐसा भी होगा जब सरकार की प्रतिष्ठा धन को लेकर इतनी दयनीय हो जायेगी कि व्यापार म...

लूट की छूट से भगवान हुये हैरान , भक्तो की भक्ति और पुजारियो की निष्ठा पर उठे सबाल .............? तीरंदाज

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  निष्ठा के नाम तीनों लोको मे मचा कोहराम  व्ही.एस. भुल्ले  16 जून 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  भैया - श्रावण मास की पूर्व संध्या और भगवान भोले नाथ के पावन मास के अवसर पर तने यह क्या अर्र बर्र बक रिया शै के थारे को सावन का पावन मास और शिव भक्ति का 30 की जगह मात्र 15 दिन का भक्तिमय समय नही दिख रिया शै सो तने लूट की छूट और भक्त पुजारियो की निष्ठा पर सबाल खड़े कर रिया शै । क्या मृत प्राय समाजो के तीनो लोको मे वाक्य मे ही कोहराम मच रहा शै । म्हारे को तो पक्की खबर यह है कि कंगाल खजाने पर प्रसादी के नाम फांको का दौर चल रहा है अब न तो वह खीर मालपुओ के वह भण्डारे रहै न ही भगवान को 56 भोग खिलाने वाले जिजमान रहै सो तने काहै को माथा फोड़ी कर रहा है और बैबजह ही इस महान भक्ति योग के बीच कंटक बन बांधा बन रहा है ।  भैयै - बात तो थारी सो आने सच मगर कै करू म्हारे महान सेवक चितक का मल्टी कलर और मल्टी कलर मे दिग्दर्शित उन ब्रम्हबचनो पर ही मुर्दालोक की बात रख रहा हुॅ जहां सेवक भक्त जनो का कोरोनाकाल मे भी अर्दश्य कुंभ चल रहा है और भगवानो की आॅखो के सामने ही खुलयाम लूटपाट का खेल ...

जबाबदेह मुक्त , बैजान ब्यवस्था से समृद्धि की उम्मीद

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  सबालो की सुलगती ज्वाला मे खाक हुये जीवन सरोकार  व्ही.एस. भुल्ले  16 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  आर्थिक कंगाली के बीच जिस तरह से कामगार जीवन घसिटने पर मजबूर है वह किसी से छिपा नही मगर दुर्भाग्य कि प्रदेश की इस दुर्गति पर कोई भी मुॅह खोलने तैयार नही रोजगार के अकाल के बीच कामगारो के बीच शासन की कंगाली के चर्चे भले ही आम हो मगर किसी को भी शर्म है यह कोई कहने तैयार नही खाली खजाने पर कोरोना का पर्दा कब तक पढ़ा रहेगा यह तो वह नीति नियोक्ता ही जाने जिन्है आम जीवन अपनी समृद्धि खुशहाॅली के लिये चुन कर उन सत्ता सौपानो तक पहुॅचाते है जहां आम जीवन को सरल समृद्ध बनाने के फैसले लिये जाते है जहाॅं आम जीवन की समृद्धि खुशहाॅली के सपनो को अमली जामा पहनाये जाते है मगर जीवन की कंगाली इस बात की गबाह है कि काम ठीक से नही हुआ नही और हो भी कैसै कहते है जब निर्जीव व्यवस्था के रथ पर जबाबदेह मुक्त जीवन की ध्वजा पताखा फहरा रही हो तो फिर जीवन कैसै खुशहाॅल समृद्ध बन सकता है जो व्यवस्था का स्थाई भाग है उनका जीवन फिलहाॅल भले ही आर्थिक चिन्ताओ से मुक्त हो मगर आम जीवन जिस तरह से बिलख रह...

स्वराज मुख्य संयोजक व्ही. एस. भुल्ले ने किया वृक्षारोपण

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नीरज जाटव  15 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  म.प्र. शिवपुरी स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही. एस. भुल्ले ने आज विश्राम भवन के प्रागण मे वृक्षारोपण किया इस मौके पर पी. डब्लू. डी. के कार्यपालन यंत्री बी. एस. गुर्जर सहायक यंत्री हरिओम अग्रबाल उपयंत्री गौड़ के अलावा शासकीय ठेकेदार हरिओम शर्मा तथा भा.ज.पा. नैत्री उषा भार्गव ने भी पीपल बरगद अशोक नीम इत्यादि के वृक्षो को रौपा ज्ञात हो कि इससे पूर्व म.प्र. शासन की खेल युवा कल्याण कौशल प्रशिक्षण तकनीकी रोजगार मंत्री श्रीमंत यसोधरा राजे सिंधिया एवं कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह एस. पी. राजेश सिंह चंदेल ने भी वरगद पीपल नीम के वृक्षो को विश्राम भवन प्रागण मे रौपा । 

अन्दर बाहर की अदाबत से सनाके मे सियासत

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  सफर करता सेवा कल्याण और जीवन सरोकार  वीरेन्द्र शर्मा  14 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  म.प्र. की सियासत मे हालिया तौर पर दो अन्दर खाने की खबरे सुख्र्रिया बनी हुई है । जिससे म.प्र. की सियासत का पारा चढ़ना तय है जिसमे पहली खबर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के हिन्दु विरोधी व्यानो को लेकर पार्टी के ही नेता के उस पत्र का जिक्र है जिसमे काॅग्रेस आलाकमान को इस व्यान बाजी से अवगत कराया गया है कि इस तरह के ब्यानो से काॅग्रेस को लम्बे से समय से नुकसान हो रहा है । तो दूसरी खबर सत्ता धारी दल से है जिसकी सरकार के एक मंत्री दूसरे मंत्री से बैबजह मुंहबाद मे भिड़ गये यह मामला म.प्र. सरकार के दो कैबीना मंत्री श्रीमंत यसोधरा राजे सिंधिया और अरबिन्द भदौरिया के बीच का है जिन्है तीसरे मंत्री विश्वास सांरग ने समझाइस दे शांत कराया अब इन बाद बिबादो के पीछे असल मसला क्या है यह तो सियासत मे दखल रखने बाले लोग या सियासी दल ही जाने मगर इन घटनाक्रमो से इतना तो तय है कि म.प्र. मे सब कुछ ठीक नही चल रहा जिसके शिकार दोनो ही दल जान पढ़ते है । अगर यो कहै कि बर्तमान मे घोषित अघोषित तौर दोन...

लोकनीति , सत्ता , शिक्षा से मिलेगे नये आयाम

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धोखा , धमाका , दहशत से मुक्त व्यवस्था से  , होगी समृद्धि और , होगा कल्याण   परिणामो की प्रमाणिकता से सिद्ध होता सत्ता का सामर्थ  व्ही. एस. भुल्ले  13 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  जिस लोकनीत , सत्ता , शिक्षा के सहारे समृद्ध भूभाग पर कल्याण का कांरबा बढ़ रहा है वह खासकर उन लोगो के लिये काबिले गौर होना चाहिए जो उधार की सियासत या विरासत के सहारे षड़यंत्र पूर्ण आचरण से सत्ता मे काबिज हो सियासी स्वस्वार्थ पूरे कर बड़े जनसेवक जन नायको मे अपना नाम लिखबा सियासत मे अमर होना चाहते है । और लोक , जन की आशा अकांक्षाओ से इतर अपनी सात पीढ़ियो के आर्थिक भबिष्य को सुरक्षित करना चाहते । मगर कहते परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है सो बदलाव के इस दौर मे किस किस को क्या हासिल होगा यह तो भबिष्य की बात है मगर इतना तो तय है कि जिस तरह से आम जीवन को धोखा , धमाके , दहशत से मुक्ति मिली है और दहशत फैलाने बालो पर लगाम कसी है वह किसी छिपी नही । मानवता के दुश्मनो को घर मे घुसकर मारने की जो परिपाटी शुरू हुई है वह इन्सानियत , मानवता के दुश्मनो के गले की हडडी साबित हो रही है । अगर यो कह...

लिंक पर पदमश्री , एहसास तो था अब विश्वास भी है .......? तीरंदाज

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  व्ही. एस. भुल्ले  12 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म. प्र.  भैया - अब म्हारे को पूर्ण विश्वास हो लिया कि यह महान राष्ट्र् बिल्कुल सही हाथो मे है । मगर कै करू आखिर भ्रम भी तो कोई चीज होबे सो अब म्हारा सारा भ्रम भी दूर हो लिया अब लिंक पर कुछ मिले न मिले म्हारे को म्हारा विश्वास अवश्य मिल गया । मगर म्हारी पीढ़ा तो बस आज भी यही है कि जीवन मे पुरूषार्थ का सम्मानित निश्चित ही गर्व गौरव की बात होती है और खासकर अपनो के हाथ पुरूषकृत होने मे व्यक्ति को गर्व और गौरव की अनुभूति भी होती है मगर कहते है असली गर्व गौरव की बात तो तब होगी जब इस महान राष्ट्र् का हर नागरिक स्वयं को गौरान्वित मेहसूस करेगा ।और यह तभी संभव है जब हम हमारी महान शिक्षा संस्कृति को अपने अपने सामर्थ पुरूषार्थ से उसे जीवंत कर मौजूद जीवन मे डाल आने बाली पीढ़ियो को विरासत मे छोड़ कर जाये । बधाई की पात्र है मौजूद सत्ता और उसका जीवट नेतृत्व जिसने एक लम्बी यात्रा पश्चात अपने सामर्थ के बल नई शिक्षा नीति का श्री गणेश किया । पढ़ाने की विधि और पढ़ने की विषय बस्तु के नाम सारा मामला उलझा पढ़ा है जो संवेदन शील विषय हो सकता है मग...

महाराज के मंत्री बनते ही म.प्र. जुड़ा देश के महानगरो से

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16 जुलाई से उड़ान भरेगे नये रूट पर जहाज  वीरेन्द्र शर्मा  12 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  जैसी की संभावना थी कि श्रीमंत के मंत्री बनते ही म.प्र. को कोई न कोई बड़ी सौगात अवश्य मिलेगी सौ बैसा ही हुआ मंत्रालय मे कामकाज सम्हालते ही म.प्र. कई उड़ाने मिली ही जिनकी शुरूआत भी 16 जुलाई से हो जायेगी । निश्चित ही यह कदम म.प्र. के लिये विकास मे कई आयाम खोलेगा उद्योग व्यापार से लेकर पर्यटन के क्षैत्र मे लोगो को काफी सहुलियत मिलेगी । यह अलग बात है कि श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया के मंत्री बनने पर म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने दिल्ली पहुॅच उन्है अंग बस्त्र भेट कर उनका स्वागत किया और केन्द्रिय मंत्री के रूप मे म.प्र. को समय समय पर बैहतर सहयोग की अपेक्षा की सिंधिया के इस कदम से जहां म.प्र. के लोगो मे हर्ष उल्लास का वातावरण है तो वही केन्द्रिय मंत्री के रूप मे उनसे बड़ी उम्मीदे भी जाहिर की जा रही है ।   

जन जीवन कल्याण मे सिर्फ जनसंख्या ही नही , जन और संख्या नियंत्रण भी अहमं - व्ही. एस. भुल्ले

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  सेवा का आधार ही होता है , सर्बकल्याण का सच्चा सारथी  धमेन्द्र सिंह गुर्जर  11 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  जन जीवन कल्याण मे सिर्फ जनसंख्या नियंत्रण से काम नही चलने बाला बल्कि जन के साथ संख्या नियंत्रण पर काम होना चाहिए । क्योकि सेवा का मूल आधार ही सर्बकल्याण का सच्चा सारथी होता है और यह तब तक संभव नही जब तक की दोनो छोर से जनसंख्या को बांधने की शुरूआत नही हो जाती जिससे जीवन अपने नैसर्गिक स्वछंद स्वभाव अनुरूप जीवन को बगैर व्यावधान के अन्तिम छोर तक अर्थात जीवन के उदगम से लेकर विसर्जन तक का मार्ग सफलता पूर्वक पूरा नही कर लेता जिसके संरक्षण संबर्धन मे मानव जीवन ही एक मात्र ऐसा साधन है जिस सिद्ध होने की पात्रता इस श्रष्टि मे प्राप्त है । उक्त बात स्वराज विचान के मुख्य संयोजक व्ही. एस. भुल्ले ने स्वराज मे आस्था रखने बालेे अपने सहयोगियो के बीच औपचारिक अनौपचारिक तौर पर कही उन्होने कहा कि ऐसा नही कि सर्बकल्याण की शुरूआत कोई नही पहल हो बल्कि सिद्ध पुरूष मानव जीवन अनादि काल से करते रहै है जब भी कभी मानव जीवन अपने जीवन की इस सिद्धि मे अक्षम असफल हुआ है प्रकृति ने ...

सुरषा साबित होती स्वार्थ सिद्धि , जीवन हुआ बैहाल

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श्राफ भोगता सुन्दर समृद्ध शहर  वीरेन्द्र शर्मा  11 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  सौ बर्ष पूर्व सुन्दर समृद्ध अत्याधुनिक सुविधाओ से लेश एक ऐसा शहर जिसे तत्कालीन शासको द्वारा घनघोर जंगलो के बीच पठारी क्षैत्र होने के बाबजूद विभिन्न सुबिधाओ से लेश कर अपनी स्टेट की राजधानी बनाया था जहां सौ बर्ष पूर्व दो वाई दो किलो के रेडियस मे बसे इस समुचे शहर को प्राक्रतिक रूप से वातानुकूलित रखने 18 तालाबो की श्रखंला बारिष के पानी वहाब को ध्यान मे रखकर तैयार की गई जिन तालाबो की तलहटियो समृद्ध रखने जामफलो के बगीचो का निर्माण हुआ तथा समुचे शहर को चैड़ी चैड़ी सड़क चैराहो पुल पुलियाओ सहित पक्की नहरो से पाटा गया जिससे तालाबो के आॅव्हर फलो होने की स्थति या अत्यअधिक बारिस होने पर बारिस के पानी को सुविधा जनक निकासी मिल सके इसक अलावा ग्रांड होटल , सांस्कृकि भव्य भवन , हरी दूव से पटा रहने बाला पोलो ग्राउन्ड जिसे अन्डर ग्राउन्ड अष्ठधातु की पानी लाइन से हरा भरा रखा जाता था , कृषि मण्डी , चूने की पक्की सड़क , रेल सुबिधा बच्चो खेलने पार्क जो आज गाॅधी पार्क के नाम से जाना जाता है । इसके अलावा क्लव ...

सुदृड़ होती , सियासी संस्कृति , बैचैन हुये स्वार्थवत संस्कार

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नये ककहरे से सत्ता ढोने की कवायद  युवाओ पर भरोसा , समझ बूझ , सामर्थ पर विश्वास  वीरेन्द्र शर्मा  8 जून 21 विलेज टाइम्स समाचार म.प्र.  काॅफी जददोजहद के साथ आखिरकार केन्द्रीय मंत्री मंडल मे फेरबदल हो ही गया जिसमे सरकार के नेतृत्व ने कुछ पर विश्वास व्यक्त कर पुरूषकृत कर उनको प्रमोशन किया तो कुछ को बाहर का रास्ता दिखा दिया मगर जिस ककहरे के साथ सत्ता ढोने की कवायद तेज हुई है उसके परिणाम तो आने बाले समय मे देश के सामने होगे मगर जिस तरह से वर्ग विशेष के साथ समझबूझ सामर्थ पर विश्वास कर युवा चेहरो को मौका मिला है पुरूषार्थ प्रदर्शन कर सेवा कल्याण विकास मे योगदान का वह अवश्य काबिले गौर है और सम्मभवतः यह देश की सियासत मे सत्ता मे भागीदारी देने का तीसरा मौका है ऐसे लोगो को जिन्होने सपने मे भी कभी ऐसा नही सोचा होगा कि वह भी कभी एक ऐसी सत्ता के भाग होगे जिस पर इतिहास रचने का दबाब है । शायद इसलिये ही पुरानी परम्पराओ को दरकिनार कर मौजूद सियासत को एक ऐसा संदेश देने का प्रयास हुआ है जिससे स्वार्थवत सियासत खासी अचंभित है । निश्चित ही इससे इतना तो तय है कि भारतीय सियासत मे सुदृड़ सियासी ...

गणमंत्रणा से मेहरूम म्हारा फोन........ ? तीरदांज

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मोबाइल से उम्मीद , मेल के घालमेल समझ से परे  व्ही. एस. भुल्ले  7 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  भैया - मने तो लागे म्हारा तो समझो बैड़ा गरग हो लिया न तो आज तक मेल का जबाब आया न ही आज तक कोई फोन की घंटी घनघनाई बस अब तो उम्मीद सिर्फ और सिर्फ म्हारे महान मोबाइल से है । शायद वह बज उठे मगर काड़ू बोल्या कि जिसको भी बुलाना था बुला लिया गया है और शफत का फाॅरमूला भी जमा दिया गया है । थारी भैंस तो पानी मे गयी समझ बैसै भाया अब तो फिल्म उद्योग मे भी किसी गाॅब गली से नही उम्दा हुनहर कलाकार कहां आ पाता है अब तो घरूघरा ही बाॅक्स आॅफिस पर नाम चमकाया जाता है सो अगर जिन्है तने भला माने उन्होने भी आज के जीवन मे जो प्रचलित है उसे ही दोहराया है तो गलत क्या ? फिर वह सियासत हो सरकार या फिर उद्योग सभी दूर गोल बन्दी का साम्राज्य फैला पढ़ा है । सो मने तो लागे अब मने अपनी काठी उठाउ और गौवंश के हक मे मने भी दो दो हाथ के लिये तैयार हो जाउ ।  भैयै - कै थारे को मालूम कोणी यह कोई फिल्म या फिल्म उद्योग का बिस्तार नही देश के विकास कल्याण के लिये मंत्रणा और पुरूषार्थ का कांरबा बन रहा है सत्ता सियासत ...

सर्बकल्याण को , कृतज्ञ तपस्वी जीवन पर कुण्ठाओ का प्रहार

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 निष्ठा की प्रमाणिकता अनुभूति मे है आरोप प्रत्यारोप में नही  असाधारण आस्था का साधारण आकलंन अनुचित  व्ही. एस. भुल्ले  6 जून 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा  यह सही है कि समृद्ध देश कौम को एक मर्तवा फिर से आगे बढ़ा उसकी प्रमाणिकता सिद्ध करने के तौर तरीको पर समझ सोच अनुसार सबाल हो सकते है मगर निष्ठा पर संदेह नही होना चाहिए क्योकि निष्ठा की प्रमाणिकता अनुभूति मे निहित होती है जो आज सिद्ध होती दिखाई पढ़ रही है मगर इसकी अनुभूति भी सिर्फ उन लोगो को हो सकती है जिसका सर्बकल्याण मे विश्वास हो देश की शीर्ष सत्ता से हतोत्साहित स्वकल्याण मे सिद्ध लोगो के बीच सबाल हो सकते है या फिर समझ सोच के अभाव मे लोग अपने अपने लक्ष्यो को सामने रख आरोप प्रत्यारोप कर सकते है मगर मानव धर्म कहता है कि अगर सर्बकल्याण की सार्थक बात हो तो स्वार्थो को दर किनार कर सेवाकल्याण के साथ अपनी आस्था आधार को जोड़ने मे कोई हर्ज नही यही मानव धर्म होता है । और मानव जाती का कर्म भी मगर यह भी सही है कि अगर कोई असाधारण मानव कृतज्ञता के मार्ग पर त्याग तपस्या पुरूषार्थ कर रहा है तो उसकी सराहना अवश्य होनी चाहिए देश से वि...

कलंककारी कृतयो से कीर्ति बढा़ने की कवायद

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  कंगाली के बीच , कंटको से घिरा जीवन  पाई पाई को मोहताज कृतज्ञ जीवन  5 जून 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  बात लोक कल्याण की हो या फिर कर्मगार जीवन की चहुॅ ओर कंगाली को और अहंकार को लेकर कोहराम मचा है मगर कीर्ति बढ़ाने की कवायद के बीच कोई सुनने तैयार नही अगर यो कहै की कर्तव्य निर्वहन मे लीन जबाबदेह लोगो को सैमीनार वैवीनार से उपर से लेकर नीचे तक किसी को फुरसत नही तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी । जिस शासकीय शब्द के बिना पर लाखो करोड़ो के लोककल्याण के कार्य उधारी मे ही निवट जाते थे अब शायद ही ऐसी कोई कृतज्ञता शेष हो जो नगद मे भी कार्य करने तैयार हो बल्कि एडवांस को वह बैहतर माध्ययम मान कर चल रहै है । जिसमे सबसे अधिक दयनीय स्थति तो म.प्र. के लोकनिर्माण की है जहां बर्षो से लोगो के भुगतान धन के अभाव मे अटके पढ़े है तो मूल कार्यो के भुगतान मे भी कुल बिल का कुछ प्रतिशत ही भुगतान के हुकुम मातहतो को कभी आम लोगो के फोन न उठाने बाले आला अफसरो ने दे रखे है जिसमे एक तो ऐसा भी है जो एक कददावर मंत्री से लिखित माफी मांगने के बाद भी पैर जमाये हुये है जबकि आला स्तर पर उम्मीद यह की जाती है व...

गर खोया स्थापित विश्वास तो , कही के नही रहोगे

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नही बचा आस्था का आधार तो धर्म ध्वजा कौन थामेगा  अहम अहंकार कभी किसी का सगा नही हुआ  व्ही. एस. भुल्ले  5 जून 21 विलेज टाइम्स समाचार म.प्र.  विश्वास की कीमत पर आजकल जिस तरह से अहंम अहंकार फलफूल स्वस्वार्थ के आगोस मे अठखेलिया कर स्थापित विश्वास अगूठा चिड़ा स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध करने की जिद पर अड़ा है इसके दो ही परिणाम हो सकते है दुर्योधन रावण कंश इसलिये आस्था का चुनाव भी उन्है ही करना है जो सर्बकल्याण की ध्वजा पकड़ मानव धर्म मूल्य सिद्धांत और स्वीकार्य आस्था का आधार बचाना चाहते है । कहते है समृद्ध खुशहाॅल जीवन का संघर्ष सर्बकल्याण मे कटंको से भरा रहा है । और जिस भी जीवन ने इसे स्वीकार कर अपने पुरूषार्थ सामर्थ से सिद्ध किया है वही महामानव कहलाने का उत्तराधिकारी रहा है । सौभाग्य दुर्भाग्य का जोड़ा तो अनादिकाल से रहा है सबाल सन्तुलन उसका आधार आज जब श्रेष्ठतम कृतज्ञता का दौर है ऐसे मे चंद स्वस्वार्थ मे डूबे लोगो का विश्वास से विमुख हो उसका तिरस्कार करना उसकी अनदेखी करना पाप है फिर वह सत्ता हो या सियासत या फिर अर्थ , समाज जब तक हमारी आस्था का आधार सर्बकल्याण और सर्बकल्याण के लि...

सिद्ध और सिद्धता का मूल सर्बकल्याण

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जन - जीवन मे उस .खण्ड , कौम की रक्षा , संरक्षण सबसे बड़ा मानव धर्म , जिसकी आस्था पुरूषार्थ सामर्थ अनुसार अनादिकाल से ही स्वकल्याण से पूर्व सर्बकल्याण मे रहा हो  आस्था को लेकर सबाल हो सकते है मगर सत्य पर नही  व्ही. एस. भुल्ले  4 जून 21 विलेज टाइम्स सेवा  कहते है कि सर्बकल्याण के संघर्ष पर विलाप वीर नही वुसदिल करते है क्योकि यह तो वह शौर्य होता है जिसे बड़े से बड़े शूरवीर भी झुककर सलाम करते है जो मानव जीवन का सच्चा सामर्थ भी है और सत्य को समर्पित पुरूषार्थ भी इतिहास भरा पढ़ा ऐसे उल्लेखो से मगर दुर्भाग्य की जब आज सर्बकल्याण के भाव से भरे पुरूषार्थ उस पुरूषार्थ के सामर्थ पर सबाल खड़े करते है तो मानव धर्म मे आस्था रखने बाले हर उस जीवन को दुख भी होता है और दर्द भी होता है खासकर संघर्ष एक ऐसी कौम खण्ड के लिये हो जिसने हजारो बर्ष की त्याग तपस्या कुर्बानियो के बल उसे निरंतर रक्षित संरक्षित किया हो सर्बकल्याण का संदेश भूखे प्यासे अभाव ग्रस्त रहकर दिया हो आज जब उस कौम खण्ड की बात आती है तो कईयेक जीवन बिचलित ही नही आक्रोसित हो जाते है आखिर क्यो ? क्या इतने बर्षो की त्याग तपस्या कुर्ब...

सर्बकल्याण मे बढ़ा विश्वास का संकट , जबाबदेह हुये बैलगाम

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न बची समृद्ध संस्कृति , तो होगा जीवन तार तार  व्ही. एस. भुल्ले  3 जुलाई 21 - विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  आजकल सत्ता , सियासत हो या फिर सेवा कल्याण , समाज अथवा व्यापार सभी दूर अविश्वास का सन्नाटा पसरा पढ़ा है । बैलगाम जबाबदेही के बीच अगर समृद्ध संस्कृति यू ही बिलखती रही तो इतना तो तय है कि जीवन को तार तार होने से कोई नही बचा पायेगा । क्योकि दौहरा जीवन उसकी कृतज्ञता न तो तब सिद्ध सराही गयी जब जीवन के मूल्य सिद्धान्त जान पर भारी थे न ही वह भबिष्य मे किसी भी रूप मे सराही जाने बाली न ही सिद्ध होने बाली है खासकर को जो बर्तमान और भूत को तिलांजली दे बैहतर सुनहरे भबिष्य के लिये आज संघर्षरत है । फिलहाॅल सो टके सबाल तो आज यह है कि आखिर जीवन की समृद्धि , समृद्ध संस्कृति के लिये संघर्षरत वह कौन लोग है जो एक त्याग तपस्या अपने समद्ध जीवन की कुर्बानी के बल जीवन के आधार को सुनिश्चित करने बालो की कृतज्ञता पर कालिख पोतना चाहते है । अदृश्य ही सही अगर वह मानव जीवन के सत्य को नकार नये नये संस्कारो के बल किसी नयी संस्कृति को जन्म दे स्वयं को सबसे बड़ा तपस्वी सिद्ध  पुरूष कौम सिद्ध करना ...