दो वर्ष में ही खुल सकती है 23 हजार गौशाला त्रिस्तरीय माॅडल सटीक, मगर सरकार की शुरूआती सुस्ती पर गंभीर सवाल गौ-सम्वर्धन में सार्थक हो सकता है म.प्र. माॅडल
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। चुनावों से पूर्व वचन पत्र के माध्यम से म.प्र. के बेजुबानों पशुधन को वचन देते वक्त म.प्र. के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शायद ही सपने में सोचा हो कि वह जिस बेजुबान, पीड़ित, वंचित, कंटकग्रस्त गौवंश को वह वचन दे रहे है वह सरकार बनने के पश्चात इस तरह से कलंकित होगा। मगर हालिया खबर यह है कि 7 माह से सत्ता सुख भोग रही काॅग्रेस सरकार म.प्र. में 23 हजार गौशालाओं के स्थान पर त्रिस्तरीय माॅडल के तहत एक हजार गौशाला स्थापित करने जगह चिन्हित कर सकी है। जिसे वह मनरेगा, मंदिर व काॅरपोरेट के माध्यम से चलाने की मंशा रखती है। साथ ही भाजपा से मिले खाली खजाने के चलते गौवंश सरंक्षण हेतु धन जुटाने सरकार शराब, नाॅनज्यूढीशियल स्टाम्प वाहन, मण्डी, पब्लिक इन्टरप्राईजेज पर काऊसेस लगाना चाहती है। जिससे आम आदमी प्रभावित न हो। इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि शासन की योजना में कोई सुराग है। मगर इस कार्यक्रम को और अधिक उम्मदा बना बगैर अतिरिक्त धन खर्च किए एक साथ 23 हजार गौशालायें शुरू की जा सकती है। मगर सत्ता के नशे में चूर सत्तासीनों को फुरसत कहां जो वह सत्ता, सियासत क...