Posts

Showing posts from July, 2019

दो वर्ष में ही खुल सकती है 23 हजार गौशाला त्रिस्तरीय माॅडल सटीक, मगर सरकार की शुरूआती सुस्ती पर गंभीर सवाल गौ-सम्वर्धन में सार्थक हो सकता है म.प्र. माॅडल

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। चुनावों से पूर्व वचन पत्र के माध्यम से म.प्र. के बेजुबानों पशुधन को वचन देते वक्त म.प्र. के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शायद ही सपने में सोचा हो कि वह जिस बेजुबान, पीड़ित, वंचित, कंटकग्रस्त गौवंश को वह वचन दे रहे है वह सरकार बनने के पश्चात इस तरह से कलंकित होगा। मगर हालिया खबर यह है कि 7 माह से सत्ता सुख भोग रही काॅग्रेस सरकार म.प्र. में 23 हजार गौशालाओं के स्थान पर त्रिस्तरीय माॅडल के तहत एक हजार गौशाला स्थापित करने जगह चिन्हित कर सकी है। जिसे वह मनरेगा, मंदिर व काॅरपोरेट के माध्यम से चलाने की मंशा रखती है। साथ ही भाजपा से मिले खाली खजाने के चलते गौवंश सरंक्षण हेतु धन जुटाने सरकार शराब, नाॅनज्यूढीशियल स्टाम्प वाहन, मण्डी, पब्लिक इन्टरप्राईजेज पर काऊसेस लगाना चाहती है। जिससे आम आदमी प्रभावित न हो। इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि शासन की योजना में कोई सुराग है। मगर इस कार्यक्रम को और अधिक उम्मदा बना बगैर अतिरिक्त धन खर्च किए एक साथ 23 हजार गौशालायें शुरू की जा सकती है। मगर सत्ता के नशे में चूर सत्तासीनों को फुरसत कहां जो वह सत्ता, सियासत क...

सही दिशा में देश बड़े न्याय पर सदन की मोहर

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अनगिनत विसंगतियों से भरे समाज राष्ट्र में सियासत सत्ता के संरक्षण में लोकतंत्र का लाभ उठा राष्ट्र-जन को कलंकित करने वाली कुप्रथा, संस्कार, संस्कृति के दो-तरफा सुधार से इतना तो तय है कि विगत 30 वर्ष में सत्ता, सियासत, समाजों में गहरी पैठ बना चुकी बुराईयों का अन्त होना तय है। जिस तरह से राष्ट्र-जन की खातिर बुराईयों पर दो-धारी तलवारों से लोकतांत्रिक तरीकों से संवैधानिक प्रहार और सुधार के प्रयास तेज हो रहे है। उनके चलते कहा जा सकता है कि देश अब सही दिशा में है।  ऐसे में सिर्फ सत्ता, सियासत या उन सरकारांे की सराहना ही काफी नहीं। सराहना तो ऐसे सांस्कृति, सामाजिक, संगठनों सहित उन कार्यकर्ताओं तथा विधा, विद्ववानों की होना चाहिए। जिन्होंने विगत 30 वर्षो से हताश-निराश राष्ट्र-जन के बीच अपने कड़े परिश्रम, त्याग, कत्र्तव्य निर्वहन कृतज्ञता से राष्ट्र-जन को आशा की किरण दिखा गर्व और स्वयं को गौरान्वित होने का अवसर मुहैया कराया है। शैक्षणिक, सांस्कृतिक, धार्मिक रूप से फैली भ्रान्ती और भ्रम फैलाने वालों पर सामाजिक सियासी संवैधानिक उपचार के साथ स्वच्छन्द ...

जीवन में अराजकता रोकना अहम नैसर्गिक जीवन सार्वजनिक सम्पत्ति सेवा, सुविधाओं में बाधा और अतिक्रमण के खिलाफ बने सख्त कानून

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिन कत्र्तव्य, उत्तरदायित्वों के लिए किसी भी व्यवस्था में सरकारें, शासन, सत्तायें, स्वीकार्य सहमति से अस्तित्व में होती है। उनका मूल कत्र्तव्य, दायित्व होना चाहिए कि वह नैसर्गिक जीवन, सार्वजनिक सम्पत्ति, सेवा, सुविधाओं को संरक्षित कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें। मगर इसके उलट आज इन्हीं कत्र्तव्यों और दायित्वों से इतर सत्ता, शासन, सरकारों की विमुखता तथा व्यवस्था में बढ़ती अराजकता चिन्ता का विषय है। मौजूद व्यवस्था में बढ़ती अराजकता का मूल कारण यूं तो जबावदेही विहीन व्यवस्था और उत्तरदायित्व विहीन वह मूल्यांकन है जो अराजक, स्वार्थी लोगों को किसी भी व्यवस्था में बढ़ावा दे उन्हें जीवन में अराजकता फैलाने का घोषित-अघोषित संरक्षण देते है।  देखा जाये तो आज के समय में कुछ लोग अन्धे वैभव और धन लालसा में डूब जिस तरह से लोगों के जीवन को सेवा, सुविधाओं को सार्वजनिक सम्पत्ति पर अतिक्रमण कर लोगों के नैसर्गिक जीवन को संकट ग्रस्त बनाने से नहीं चूक रहे। ऐसे लोग की सोच और जीवन का पैमाना क्या है यह तो वहीं जाने। मगर सत्तायें कानून बना, अवश्य अपने निष्ठापूर्ण कत्र...

अनुग्रह पी ने बढ़ाई सक्रियता प्रशिक्षण केन्द्र से लेकर जाने प्रशासनिक मशीनरी के हाल

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। शिवपुरी। अवकाश से लौटते ही शिवपुरी कलेक्टर अनुग्रह पी ने जिस तरह की सक्रियता विभिन्न क्षेत्रों में लेकर बढ़ाई है उससे बेहाल पड़े तंत्र में हड़कंप मचा हुआ है। ऐसा नहीं कि कलेक्टर शासकीय कार्यालयों के एवं सेवा, सुविधा प्रशिक्षण केन्द्रों के भ्रमण तक सीमित हो। बल्कि भरी बारिश के बीच वृक्षारोपण एवं पर्यटल स्थलों के सुरक्षा को लेकर काफी सक्रिय दिख रही है। आवश्यक प्रशासनिक बैठकों के बाद जिस तरह से स्कूल, छात्रावास, प्रशिक्षण केन्द्र, सेवा, सुविधा केन्द्रों पर पहुंच, उन्होंने व्यवस्थाओं का हाल जाना है। उसको लेकर भी फिलहाल सवाल खड़े हो रहे है। सवाल कर्ताओं का मानना है कि भ्रमण के दौरान अगर सबकुछ दुरूस्त है तो फिर भ्रमणों का क्या ? मगर इस सबसे इतर कलेक्टर के ताबड़-तोड़ भ्रमण इस बात के प्रमाण है कि वह खुद के कार्यालय से इतर अब मैदानी क्षेत्रों में भी जाकर शासन की योजनाओं और कल्याणकारी कार्यो से रूबारू हो रही है। देखना होगा कि प्रमाण-प्रमाणिकता के दौर में कलेक्टर के दौरे अपनी कितनी प्रमाणिकता सिद्ध कर पाते है।

सार्थक, समृद्ध, जीवन में ज्ञान अहम, विज्ञान सिर्फ जरूरत विज्ञान, निर्जीव विकास का धोतक हो सकता है सम्पूर्ण समाधान नहीं

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है हर जीव, जीवन का अपना प्राकृतिक नैसर्गिक स्वभाव, सार्थक गुण आधारित स्वीकार्य समाधान होते है। क्योंकि प्रकृति स्वतः ही समृद्ध और सत्य आधारित ज्ञान पर जीव, जीवन की समस्याओं का सम्पूर्ण समाधान है।  नई उत्तखंटाओं और उन्हें साकार रूप देने की प्रमाणिक जिद्द का नाम भी विज्ञान है वह जीव तथा जीवन की यात्रा में सार्थक, स्वीकार्य समाधान की क्षणिक धोतक तो हो सकता है। मगर खुशहाल, समृद्ध, जीव, जीवन के सार्थक परिणाम नहीं। क्योंकि प्रकृति से उत्पन्न हर जीव, जीवन की अपनी अलग-अलग विशिष्टता उपायदेयता के साथ जीवन में उत्पन्न होने वाली समस्याओं, संकटों का समाधान भी प्रकृति में निहित होता है। मगर अज्ञानता बस जब हमें क्षणिक समस्यायें ही पहाड़-सी दिखती है तब हम विज्ञान के रास्ते उसका क्षणिक अपूर्ण समाधान पाकर या ज्ञान प्राप्त करने की जिद्द और प्रमाणिकता के अंधकार में डूब जीव, जीवन के मूल मार्ग से भटक जाते है। जो जीव जीवन के लिए न तो सार्थक, स्वीकार्य हो पाते है, न ही वह समाधान बन पाते है और न ही अनंत प्रमाणिकता का प्रमाण।  इसलिए जीवन में विज्ञान जरू...

आन्तरिक सुरक्षा पर अनुत्तरित सवाल संसाधन, संख्याबल और क्षमता को लेकर सांसत में राज्य

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है अगर आगाज अच्छा हो तो सुनहरे भविष्य की सम्भावनाऐं स्वतः बलबती हो जाती है। जिस तरह से सदन में पूछे गए सवालों का जबाव देते वक्त देश के गृहमंत्री ने पूरी दृढ़ता के साथ सरकार के सामर्थ और राष्ट्र-जन की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है वह देश वासियों को काबिले गौर होना चाहिए।  पुलिस सुधार से लेकर जघन्य अपराध तथा भीड़ की हिंसा पर उठते सवाल कोई अन्यास ही नहीं। ये अलग बात है कि आज कानून, समाज व लोगों के बीच समरस्ता सौहार्द पूर्ण माहौल बनाने में असफल रहा है तथा सामाजिक मान्यताऐं भी कानून की धज्जियां उड़ाने वालों के आगे असमर्थ है। ऐसे में कानून की धज्जियां उड़ा लोगों में डर का भाव पैदा करने वालों के हौसले बढ़ना स्वभाविक है। ऐसी स्थिति में जब देश की बाह सुरक्षा को चाक-चैबन्द किया जा रहा है। ऐसे में आन्तरिक सुरक्षा के मद्देनजर सवाल उठना स्वभाविक है। देखा जाये तो यह मसला सिर्फ अकेले केन्द्र सरकार का नहीं है बल्कि सीधे तौर पर राज्य सरकारों से भी जुड़ा है। अगर कुछ केन्द्र शासित प्रदेशों को छोड़ दें, तो अधिकांश राज्यों में कानून व्यवस्था और नागरि...

आन्तरिक सुरक्षा पर अनुत्तरित सवाल संसाधन, संख्याबल और क्षमता को लेकर सांसत में राज्य

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है अगर आगाज अच्छा हो तो सुनहरे भविष्य की सम्भावनाऐं स्वतः बलबती हो जाती है। जिस तरह से सदन में पूछे गए सवालों का जबाव देते वक्त देश के गृहमंत्री ने पूरी दृढ़ता के साथ सरकार के सामर्थ और राष्ट्र-जन की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है वह देश वासियों को काबिले गौर होना चाहिए।  पुलिस सुधार से लेकर जघन्य अपराध तथा भीड़ की हिंसा पर उठते सवाल कोई अन्यास ही नहीं। ये अलग बात है कि आज कानून, समाज व लोगों के बीच समरस्ता सौहार्द पूर्ण माहौल बनाने में असफल रहा है तथा सामाजिक मान्यताऐं भी कानून की धज्जियां उड़ाने वालों के आगे असमर्थ है। ऐसे में कानून की धज्जियां उड़ा लोगों में डर का भाव पैदा करने वालों के हौसले बढ़ना स्वभाविक है। ऐसी स्थिति में जब देश की बाह सुरक्षा को चाक-चैबन्द किया जा रहा है। ऐसे में आन्तरिक सुरक्षा के मद्देनजर सवाल उठना स्वभाविक है। देखा जाये तो यह मसला सिर्फ अकेले केन्द्र सरकार का नहीं है बल्कि सीधे तौर पर राज्य सरकारों से भी जुड़ा है। अगर कुछ केन्द्र शासित प्रदेशों को छोड़ दें, तो अधिकांश राज्यों में कानून व्यवस्था और नागरिको...

सामर्थ की सराहना अहम सत्य से विमुख समाज कभी समृद्ध, खुशहाल नहीं हो सकता

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सत्य का स्वरूप रूप जो भी हो उसे स्वीकारने में न तो किसी भी व्यक्ति को लज्जित होना चाहिए और न ही सत्य को अस्वीकार करना चाहिए। क्योंकि सत्य की स्वीकार्यता ही मानव ही नहीं अपितु समूचे जीव-जगत के कल्याण व उसकी समृद्धि, खुशहाली का मार्ग है। जिसके इतिहास में भी प्रमाण है और आज उसकी प्रमाणिकता भी है। जरूरत आज सत्य को साक्षी मान उसे सहर्ष स्वीकारने की है।  जिस बात को कहने का सामर्थ केरल में सम्मानित, संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति ने दिखाया है वह सराहनीय ही कहा जायेगा। ये अलग बात है कि जिस सत्य को संवैधानिक पद पर स्वीकार्य किया गया उसकी अलोचना, प्रत्यालोचना होना, अज्ञानता, स्वार्थवत स्वभाविक है। मगर इस कलयुगी स्वार्थवत दौर में किसी ने तो सत्य को स्वीकारने का सामर्थ दिखाया, दृग्रभ्रमित समाजों को सही मार्ग दिखाया। क्योंकि अगर इतिहास, विरासत, सभ्यता, संस्कृति या वर्तमान को खंगाला जाये तो ब्रम्मत से वास्ता रखने वालों से इस सृष्टि में सर्व कल्याण की खातिर एक से बढ़कर एक त्याग, तपस्या, कुर्बानियां दी है और वह शब्द ब्रम्मत ही है। जिसका मूल्यांकन गुण दो...

सरकार सिद्ध करे ईमानदारी प्राश्चित का वक्त

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सरकार की ईमानदारी सिद्ध करने का सवाल भले ही सत्ताधारी दल से हो, मगर हकीकत में वक्त सिद्धता और सवालों से इतर प्राश्चित का है। देखा जाये तो म.प्र. काॅग्रेस जिस श्राफ के दंश को झेल निस्तानाबूत होने की ओर अग्रसर है तथा म.प्र. सरकार की ईमानदारी को लेकर जिस तरह से सवाल यक्ष है। ऐसे में लगता है कि म.प्र. में काॅग्रेस के लिए प्राश्चित करने का वक्त आ चुका है। आज सवाल सरकार की ईमानदारी सिद्ध करने तक सीमित नहीं। बल्कि सवाल तो अनजाने में ही सही म.प्र. की सत्ता के लिए जो बेजुबानों के विरूद्ध पूर्व में हुए जघन्य नैतिक अपराध से जुड़ा है। जो अन्याय जघन्य अपराध गऊ-चर की भूमि को राजस्व घोषित कर, गौवंश को भूखा मर, दर-दर भटकने तथा तालाब, नालों के कैचमेन्ट ऐरियों पर बढ़ते दबंगों के अतिक्रमण ने प्यासे मरने छोड़ दिया था वह भी सिर्फ सत्ता और वोट की खातिर।  कहते है दुनिया में धन और मां दो ऐसे शब्द है जिनका सम्मान, सिद्धता, स्वीकार्यता अनादिकाल से मानव जगत में रही है। मगर दुर्भाग्य कि म.प्र. में सत्ता व वोट की खातिर वह कलंकित जाने-अनजाने में अपमानित हुए है। जिसने अन...

लोगों की जान से खेलने वालों पर कोई रहम न हो मिलावट खोरेां के खिलाफ सख्त मुख्य सचिव मोहंती का कड़ा प्रहार जमकर बरसो जान से खेलने वालो पर

Image
वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शासन के मुखिया सुधीर रंजन की मोहंती ने प्रदेशभर के कलेक्टर, कमिश्नर पुलिस अधीक्षकों की वीडियों काॅन्फ्रेन्स की बैठक में स्पष्ट किया कि लोगों की जान से खेलने वाले मिलावट खोरेां पर जमकर बरसो। मिलावट खोरों के खिलाफ कार्यवाही में न तो कोई रहम की जरूरत है और न ही कोताही की।  उन्होंने अधिकारियों को कहा कि किसी भी हालत में एक भी मिलावटखोर न बचने पाये फिर वह कोई भी हो। देखना होगा कि प्रदेशभर में मौजूद आलाधिकारी अपने प्रशासनिक मुखिया की मंशा को कैसे लेते है। 

दो धारी तलवार पर स्थिर, नाथ सरकार अधर में काॅग्रेस

Image
वीरेन्द्र शर्मा अगर म.प्र. में सियासी चर्चाओं की माने तो निर्दलीय, सपा, बसपा के समर्थन से सत्ता में स्थापित काॅग्रेस की कमलनाथ सरकार के समर्थन में भाजपा के दो विधायकों की वोटिंग और 4 नम्बर और नाथ सरकार के पक्ष में होने की चर्चाऐं सरगर्म होने से साफ है कि दो धारी तलवार पर सवार म.प्र. की कमलनाथ सरकार स्थिर ही नहीं, मजबूत दिखाई देती है। जिससे साफ है कि कमलनाथ काॅग्रेस और म.प्र. सरकार के लिए एक कुशल प्रबंधक ही नहीं, बल्कि बडे़ कुशल संचालक भी साबित हो रहे है। क्योंकि जिस तरह से कमलनाथ ने अध्यक्ष रहते अपने कुशल प्रबंध से दिग्विजय, सिंधिया को साथ लें काॅग्रेस को सत्ता तक पहुंचाया तथा फ्लोर टेस्ट के दौरान विपक्षी दल के मजबूत संगठन के रहते अपनी सरकार के समर्थन में दो विधायकों को लाकर यह साबित कर दिया कि वह संगठन और सत्ता को मजबूत बना, उसे स्थिर रखने में पारंगत है। जहां तक वेटिंग इन 4 विधायकों का सवाल है जिसकी चर्चा आज समूचे म.प्र. में सरगर्म है।  ये अलग बात है कि इस सियासी खेल में परदे के पीछे का सच जो भी हो और इस खेल का उस्ताद जो भी हो। मगर जिस स्थिर के साथ म.प्र. में काॅग्रेस और उसकी स...

ब्राह्मण समाज के युवाओं द्वारा किया गया वृक्षारोपण

Image
आज ब्राह्मण समाज के सैकड़ों युवाओं के द्वारा ब्राह्मण उत्थान समिति के बैनर तले स्टेडियम के नए भाग में जो कि विकसित अवस्था में है वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया । इस आयोजन में 160 पौधों को रोपकर समाज के युवाओं द्वारा पर्यावरण के प्रति अपनी जागरूकता का संदेश दिया वृक्षारोपण के दौरान पीपल, बरगद, शीशम, नीम, आमला, गुलमोहर, अजवाइन एवं करंज के कुल 160 पौधे रोपे गए । वृक्षारोपण कार्यक्रम में समाज के जागरूक नागरिकों के द्वारा अपने घरों में लगाए गए पीपल एवं बरगद के जो पेड़ बड़े हो गए थे उन्हें भी यहां आकर स्थापित किया गया जिससे कि वह अपनी पूर्ण विकसित अवस्था में विकसित हो सके और पर्यावरण के सुधारने काम आ सके ।

शिवपुरी में जिन्दा लोगों के जीवन को बेहाल करता एल.आई.सी कार्यालय

Image
म.प्र. शिवपुरी। भीषण गर्मी और मसिस के बीच एल.आई.सी की किस्त जमा करने वालों की माने तो जीवन की आर्थिक सुरक्षा के लिए मशहूर भारत सरकार का यह उपक्रम शिवपुरी के लोगों का जीवन बेहाल किए हुए है। लोगों का आरोप है कि सुरंग-नुमा भवन में कार्यरत इस कार्यालय का आलम यह है कि एल.आई.सी की किस्त जमा करने वालों के लिए एक काउन्टर है। जहां पर प्रतिदिन लगभग लाखों रूपये का जमा होता है। जहां प्रतिदिन बड़ी भीड़ होती है। मगर लाखों, करोड़ों का कारोबार करने वाले इस उपक्रम के पास उपभोक्ता के लिए न तो बैठने की सुविधा, न ही पंखा, कूलर के हवा की व्यवस्था। पार्किंग का आलम यह है कि आॅफिस शुरू होते ही लोगों को वाहन अन्य दुकानों के सामने वाहनों को खड़ा करना पड़ता है। जिस छोटी से टीनशर्ट में कर्मचारियों की पार्किंग बनी हुई है उसमें दिन भर जनरेटर का धुंआ भरा रहता है। अब इस व्यवस्था के पीछे का सच क्या है यह तो एल.आई.सी के कर्ता-धर्ता ही जाने। मगर आम उपभोक्ता मजबूर होने के साथ सेवा, सुविधा को लेकर मुखर भी है। 

निलंबन नहीं बर्खास्त की हो, कत्र्तव्य विमुखता का पैमाना

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। ज्ञात हो कि हालिया तौर पर माननीय न्यायालय द्वारा किसी प्रकरण को लेकर टिप्पणी की गई थी जिसकी चर्चा बौद्धिक वर्ग में भी आम रहती थी कि अगर प्रशासनिक व्यवस्था में उम्मदा सुधार करना है तो शासकीय कर्मचारी का निलंबन सिर्फ काफी नहीं बल्कि कत्र्तव्य विमुख व्यक्ति को सेवा से बर्खास्त करना चाहिए। क्योंकि निलंबन अब पर्याप्त कारक बेहतर सेवाओं में नहीं रहा। कारण कि निलंबन के दौरान मिलने वाले वेतन भत्ते कत्र्तव्य विमुख व्यक्ति के लिए पुरूस्कार ही होते है, न कि दण्ड। देखना होगा कि सरकारें व शासन माननीय न्यायालय व आम नागरिकों की मंशा को किस तरह से लेते है।  

बजट के विरूद्ध नगरपालिका में मनमाने प्रस्तावों से आम जन में हड़कंप

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी। कहते है शिवपुरी नगरपालिका में जो कुछ हो जाये वह कम है। हालिया मामला सेवा, सुविधा छोड़ निर्माण कार्यो के मनमाने अंधा-धुंध प्रस्तावों को लेकर सामने है। ऐसा नहीं कि शिवपुरी नगरपालिका वैध-अवैध काॅलोनियों से लेकर उपयोगी अनुपयोगी जनता का करोड़ों रूपया फूंकने के मामले अब्बल रही है। भले ही टैक्स चुकाने वाले नागरिकों के दरवाजों पर सड़क, नाली, बिजली, पानी की सुविधा न हो। मगर अवैध काॅलोनियां में अवश्य आबाद मिल जायेंगी। परिषद की बैठक के नाम पर होने वाला हो हल्ला धमाचैकड़ी से शहरवासी भले ही हताश-निराश हो। मगर अपने कार्यकाल का पड़ाव पूरा करती परिषद के हाथ आज भी शहर के नागरिकों की सेवा, सुविधा और विकास के नाम ढांक के तीन पात ही है।  मगर दुर्भाग्य कि हर 5 वर्ष में एक नई परिषद और नया अध्यक्ष चुना जाता है और 5 वर्ष बाद फिर एक नई परिषद और अध्यक्ष जनता द्वारा चुनकर नगरपालिका भेजा जाता है। मगर हकीकत यह है कि विगत वर्षो से लेकर आज तक नगरपालिका के पास सबसे सुन्दर शहर का न तो कोई प्रोजेक्ट आॅफ गिलान्स है न ही कोई डिटेल, डीपीआर अगर यो कहा जाये कि शिवपुरी सेवा, सुविधा...

करोड़ों के शराब विनिष्टीकरण में बड़े घोटाले की आशंका

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। यूं तो जप्त सुधा या बेकार हो चुकी किसी भी ऐसी सामग्री का विनिष्टीकरण जो लोक उपयोगी न हो स्वभाविक प्रक्रिया है। मगर जब किसी प्रक्रिया में अपुष्ट सवाल उठने लगे तो शंका होना स्वभाविक हो जाती है। ज्ञात हो कि म.प्र. के शिवपुरी जिले में जप्त सुधा करोड़ों की देशी-विदेशी मदिरा का विनिष्टीकरण किया गया। जिसकी विधि गत प्रक्रिया भी लगभग पूर्ण की गई। मगर कुछ विघन सन्तोषियों का मानना है कि शराब विनिष्टीकरण की कार्यवाही में अमानत में खयानत की गई है। सच क्या है यह तो स्वयं शराब महकमा या जिले में मुखिया जिला कलेक्टर ही जाने। मगर जिस तरह के सवाल शराब विनिष्टीकरण को लेकर सियासत के गलियारों में बुलंद है उन्हें देखकर एक निष्पक्ष जांच तो होना ही चाहिए जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। 

रामराज्य में तब्दील परिवहन महकमा

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अगर चर्चाओं की माने तो म.प्र. सरकार का परिवहन महकमा यूं तो राजस्व मामले में नवरत्न के रूप में देखा जाता है। मगर विगत 20-25 वर्षो में सरकारों के लिए जिस तरह से यह महकमा दुधारू गाय साबित होता रहा है वह किसी से छिपा नहीं। सामान्य राजस्व बसूली से लेकर उड़नदस्ता, चैक पोस्ट जैसे माध्यमों से परिवहन महकमा राजस्व की बड़े पैमानें पर बसूली करता है। बसूली के मामले में ऐसा नहीं कि रामराज्य की कल्पना म.प्र. में नवगठित सरकार के दौरान ही कारगार साबित हो रही हो। इससे पूर्व भी कई उदाहरण ऐसे रहे है जिससे परिवहन विभाग में रामराज्य की अनुभूति होना स्वभाविक है।  अगर चर्चाओं की माने तो पात्रता के विरूद्ध चैक पोस्टों पर अमले की पदस्थापना भी म.प्र. में कोई नई बात नहींे। मगर जो रिकार्ड औपचारिक, अनौपचारिक घोषित-अघोषित तौर पर म.प्र. परिवहन में देखने-सुनने में आ रहा है वह काबिले गौर है। कारण उपनिरीक्षक, निरीक्षक लेवल के चैक पोस्टों पर सिपाही, हवलदारों के प्रभार परिवहन महकमें में रामराज्य को समझने काफी है। ये अलग बात है कि परिवहन महकमें के मुखिया जहां पूर्व सरकार में सरकार के लाडले ...

समय सीमा और सार्थक परिणाम होगें पैमाना शासन की मंशा सर्वोच्च अनुग्रह पी आई.ए.एस

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जनसुनवाई पश्चात कोर्ट और तत् पश्चात फिर जनसुनवाई में जुटी शिवपुरी डीएम अनुग्रह पी ने विलेज टाइम्स संपादक वीरेन्द्र भुल्ले द्वारा पूछे गए गौशाला, जल सरंक्षण, बाढ़ नियंत्रण, वृक्षा रोपण, वैध-अवैध उत्खनन से जुड़े सवालों पर कहा कि हमारी स्थिति और तैयारी स्पष्ट है। हमारे लिए शासन की मंशा सर्वोच्च है और हमारे कार्य करने का पैमाना सुनिश्चित समय सीमा और परिणाम होगें।  चुनावी व्यवस्था से पारिग कलेक्टर अनुग्रह पी से जब पूछा गया कि 11 से 1ः30 बजे तक जनसुनवाई फिर न्यायालीन कार्यवाही और फिर जनसुनवाई लगभग 3ः30 बज चुके है कि अब फिर से एक बैठक की तैयारी है। लगता है अभी तक लंच ब्रेक नहीं हुआ है। मगर शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ, सेवा, पेयजल को लेकर निछले स्तर पर कत्र्तव्य विमुखता चरम पर है क्या कहना चाहेंगी आप ? इस पर शान्त स्वभाव अनुग्रह पी ने कहा कि ऐसा नहीं सभी अधिकारी लोगों को सुनते है। जब मैं जिला मुख्यालय पर जनसुवाई करती हूं तब हमारे एसडीएम, तहसीलदार अनुविभाग स्तर पर भी लोगों की समस्या, समाधान करते है। ऐसे में अगर जिला मुख्यालय तक कोई आते है उन्हें सुनना भी मेरा दायित्व...

कृष्णधाम के जीर्णोउद्धार से संभव है समृद्धि, खुशहाली बांकेबिहारी वृन्दावन, द्वारकाधीश मथुरा के लिए बने पायलेट प्रोजक्ट समृद्ध, संस्कृति ही सार्थी हो सकती है समृद्ध राष्ट्र की

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है किसी भी व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र की समृद्धि, खुशहाली में एक समृद्ध, संस्कृति का बड़ा योगदान होता है। सौभाग्यशाली है इस महान भूभाग के वह लोग जिनकी विरासत ही समृद्ध, संस्कृति रही है। आज जब पुर्न निर्माण समृद्धि, खुशहाली की बात होती है तब हमें हमारी महान संस्कृति की याद आना स्वभाविक है और इस महान संस्कृति को आत्मसात करने समझने जरूरी है कि बांकेबिहारी वृन्दावन, द्वारकाधीश मथुरा को पायलेट प्रोजक्ट के तहत एक ऐसे प्रतीक के रूप में स्थापित करने की शुरूआत होना चाहिए जिससे हमारी मौजूद नस्ल और आने वाली पीढ़ी हमारी महान संस्कृति से रूबवा-रूह हो परिचित हो सके। जरूरत आज इस बात की है कि हमारी सरकारें, सत्ता, परिषदें इस अहम सवाल पर गंभीरता से विचार कर अविलम्ब एक खुशहाल समृद्ध, संस्कृति के जीर्णोउद्धार की शुरूआत करे। क्योंकि जितना सैद्धान्तिक सच उसकी स्वीकार्यता, अनुभूति, एहसास का भान हम अपनी इस समृद्ध विरासत से बच्चे, युवा, बुजुर्ग और आने वाली पीढ़ी को करा सकते है। इससे बेहतर और कोई माध्यम, तकनीक इस महान राष्ट्र नहीं हो सकती और यह संभव है। जिसका ल...

सत्य और तथ्य से विमुखता विनाश की जड़ उत्तरदायित्व जबावदेही से बांझ होती व्यवस्था

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। फिलहाल हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था का सैद्धाान्तिक सच जो भी हो, मगर हमारी व्यवहारिक अनुभूति, एहसास इस बात का गवाह है कि उतरदायित्व जबावदेही से बांझ हमारी व्यवस्था अब हमारे लोकतंत्र पर बोझ साबित होने लगी है। कहते है सत्य और तथ्य से विमुखता विनाश की जड़ होती है। अब इसे हम अपना सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य कि जिस तरह से हमने सत्ता, स्वार्थो के चलते अपने 30 वर्ष बर्बाद किये है। उसे सम्हालने में और कितने वर्ष लगेगें फिलहाल कहना मुश्किल है। मगर जिस तरह से विगत 5 वर्षो मेें कुछ सामाजिक, व्यवस्थागत सरोकारों पर कार्य हुआ है वह सराहनीय ही कहा जायेगा। मगर लोकतांत्रिक व्यवस्था में कार्यपालिका को दुरूस्त न कर पाने का दर्द, देश के प्रथम प्रधानमंत्री को तो रहा ही, मगर वर्तमान में कत्र्तव्य विमुखता का जो नंगा नाच देखने में आ रहा है उससे साफ है कि व्यवस्था दुरूस्ती का सपना साकार होने के बजाये इन 50 वर्षो में दिन दूनी रात चैगनी रफ्तार से बढ़ा है।  मगर इस महान राष्ट्र-जन का सुखद पहलू यह है कि विगत 5 वर्षो में सर्वोच्च स्तर से एक भी उदाहरण ऐसा सामने नहीं। जिससे ...

राष्ट्र-जन के सवालों से विमुख, सांसद ने डाली रवानगी

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। देश के प्रधानमंत्री नवनिर्वाचित सांसदों को जबावदेही का ज्ञान कराने कितनी ही बैठकें क्यों न कर लें, मगर किसी ने शायद सच ही कहा है कि सत्ता का नशा हमेशा सर चढ़कर बोलता है। सेवा कल्याण की सेल्फी में मशगून देश की सियायत इस महान राष्ट्र-जन को कहां ले जाकर छोड़ेगी यह तो समय ही तय करेगा।  मगर गुना सांसद ने राष्ट्र-जन से जुड़े सवालों से जिस तरह से विमुखता दिखाई वह काबिले गौर है। सांसद से नजदीकी दिखाने के प्रदर्शन को संघर्षरत कुछ नेता और कुछ लोगों से सांसद घिरे दिखे। जिसके चलते सांसद न तो आम जन को सुन सके, न ही राष्ट्र-जन की बात कर सके। हालात ये बने कि न तो उनका पी.ए. और न ही भाजपा मीडिया प्रभारी भी लोगों को मिलाने में सफल हो सके तथा भोजन उपरान्त सांसद महोदय आनन-फानन में सर्किट हाउस से समस्याओं के आवेदन थामे निकल लिये।  सांसद ने सर्किट हाउस, तो प्रभारी मंत्री ने होटल में मोर्चा संभाला देखा जाये तो आज की शिवपुरी यात्रा में शिवपुरी सर्किट हाउस पर सांसद तथा म.प्र. सरकार के मंत्री को जनता जनार्दन और कार्यकर्ताओं से मिलना था। मगर घंटों इन्तजार के बाद भी न तो जनता...

मुखिया की कार्यशैली और सरकार के संचालन को लेकर सवाल

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  म.प्र. में धनाधन हो रहे ट्रान्सपर और नियुक्तियों को लेकर भले ही वैचारिक आधार सिद्ध करने की कोशिश कितनी ही क्यों न हो। मगर म.प्र. सरकार के मुखिया की कार्य प्रणाली से जुदा सरकार की कार्यशैली समूचे प्रदेश में फिलहाल चर्चा का विषय है। देखा जाये तो कमलनाथ को जिस कार्यशैली के लिए भारतीय राजनीति में जाना जाता है उसके उलट उनकी सरकार की कार्यशैली पर सवाल होना स्वभाविक है। जिस तरह से सरकार बनने के पश्चात प्रशासनिक सर्जरी के नाम थोकबंद तबादलों का दौर चल रहा है और तरह-तरह की चर्चाऐं सियासी गलियारों में गूंज रही है उनका सरकार के मुखिया की कार्यशैली के विरूद्ध जाना अपने-आप में एक सियासी सवाल है।  देखा जाये तो अब समूचे म.प्र. के सियासी गलियारों से लेकर सत्ता के गलियारों तक सवालों की जो सुगबुहाट है उससे समूची आशा-आकांक्षायें मायूस है और राजनीति के पंडित भी अब इस उधेड़बुन में जुट गये है कि कमलनाथ सरकार का संचालन आखिर वह कौन व्यक्ति कर रहा है जिसके इशारे पर सारा संचालन हो रहा है। कम से कम सियासत में दखल रखने वालों की माने तो सरकार जिस ढर्रे पर चल रह...

जनाकांक्षा जबावदेही वचन पत्र से भरा बजट बच्चे, युवा, बुजुर्ग, महिला सहित स्वास्थ, शिक्षा, संसाधनों की उपलब्धता पर जोर

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। ये अलग बात है कि खाली खजाने से जूझती म.प्र. की कमलनाथ सरकार पर किसान रिण माफी से लेकर काॅग्रेस के वचन पत्र को पूर्ण करने का भार है। इसके बावजूद म.प्र. बजट 2019-20 में जो 2 लाख 33 हजार 606 करोड़ का होना संभावित है। जिसमें लगभग 46 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान कृषि और किसान को है। बच्चे, युवा, महिला, बुजुर्गो से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और म.प्र. की समृद्धि, खुशहाली सुनिश्चित करने सेवा, कल्याण एवं संसाधनों की उपलब्धता के लिए भी प्रावधान किया है।  मगर कमलनाथ सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती धन उपलब्धता और योजनाओं प्रभावी क्रियान्वयन की होगी क्योंकि किसी योजना का सटीक क्रियान्वयन ही उसकी सफलता और उसकी प्रमाणिकता का मूल आधार होता है। ये अलग बात है कि म.प्र. के मुख्यमंत्री कमलनाथ एक बेहतर प्लानर प्रबन्धकों में गिने जाते है और उनकी टीम भी प्रभावी है। देखना होगा कि महाराष्ट्र से सटे घने जंगलों के बीच विगत 30-35 वर्षो में छिन्दबाड़ा जैसे सबसे पिछड़े गरीब क्षेत्र को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने वाले कमलनाथ खाली खजाने पर जनाकांक्षा अनुरूप वचन पत्र के साथ म...

राहुल का सामर्थ और काॅग्रेस का पुरूषार्थ सबसे अहम

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। काॅग्रेस में दूध का दूध और पानी का पानी करने पर अडिग राहुल को चाहिए कि अपने सामर्थ के बल वह यह सिद्ध करें कि वह एक सच्चे ही नहीं एक सामर्थवान राष्ट्र भक्त है। जरूरत पढ़े तो सत्ताधारी दल ही नहीं, देश भर में फैले ऐसे वैचारिक सामर्थवान लोगों से सीखने, संघर्ष के मार्ग खोजने में हिचक न करे। मगर यह तभी संभव है जब वह अपने फैसले को सिर्फ सियासी फैसला ही नहीं, बल्कि उसे एक नजीर के रूप में सिद्ध करे। क्योंकि नैतिकता, सत्य के प्रति आग्रह और सविनय अवज्ञा गांधी जी के भी वह अचूक अस्त्र रहे है। जिन्होंने अंग्रेजों को देश छोड़ने पर मजबूर किया। मगर आज सुखद बात यह होना चाहिए कि सत्ता पर हुकूमत किसी विदेशी की नहीं, हमारे अपने लोग है। जो अपने विचार उन्मुख राष्ट्र को समृद्ध खुशहाल बनाना चाहते है।  अगर आज जनसमर्थन उनके साथ है तो कल संघर्ष का मार्ग तथा समृद्धि, खुशहाली का विचार, संगठनात्मक ढांचा मजबूत करने में काॅग्रेस सफल हुई तो यहीं जन आर्शीवाद पलटते देर न होगी। इसलिए सृजन में परोक्ष-अपरोक्ष सार्थक सहभागिता और कत्र्तव्य निर्वहन व्यक्ति, समाज, संगठनों का लोकतं...

बैठकों ने बैठाला, म.प्र. का भट्टा

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  सेवा कल्याण सुरक्षा के नाम अस्तित्व में आई अल्प मत काॅग्रेस की सरकार से यूं तो आम मतदाता को बड़ी उम्मीद थी। मगर जिस तरह से धना-धन स्थानातांरणों का दौर शुरू हो, बैठकों का दौर प्रदेश भर में शुरू हुआ है वह बड़ा ही खतरनाक है। म.प्र. की राजधानी से लेकर संभाग, जिला स्तर से लेकर अनुविभाग स्तर पर होने वाली बैठकों के परिणाम क्या है यह तो सरकार ही जाने। मगर जिस तरह से भीड़ में मौजूद अधिकारी कभी पीसी वीडियों काॅन्फ्रेन्स तो कभी टीएल तो कभी अन्य बैठकों के अलावा दिन भर जानकारियों के संग्लन में डूब कौन-सा विकास, कल्याण सेवा करना चाहते है यह भी सरकार जाने। मगर मोटी बात यह है कि जो अधिकारी हर महीने बैठक समीक्षा के नाम अपना मूल कार्य छोड़ बैठकों में डूबे रहते है उससे लगता नहीं कि आम नागरिक का कुछ खास भला होने वाला है। मगर सरकार है कि उसे फुर्सरत कहां। जो लाखों के वेतन, लग्झरी वाहन आॅफिसों की सुविधा उठाने वालों से यह सवाल कर सके कि प्रमाणिक परिणाम क्या है फिलहाल तो कत्र्तव्य विमुखता की बाढ़ ने आम आशा-आकांक्षायें कलफने पर मजबूर है। देखना होगा कि जिला सरकार को मूर्तरूप देने मे...

नागरिक सुरक्षा से खिलबाड़, सत्ता व सरकारों के लिए शर्मनाक

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   जिस तरह से आज सुरक्षा व्यवस्था संसाधन और आपराधिक संस्कृति से जूझ रही है वह किसी भी सभ्य व्यवस्था के लिए गौरव की बात नहीं हो सकती। बल्कि किसी भी व्यवस्था में नागरिकों की सुरक्षा उसका सबसे बड़ा कत्र्तव्य होता है। वोट नीति के चलते सत्तायें, सभा, परिषदें, सेवा, कल्याण के जुनून में इस कदर डूब चुकी है कि उन्हें यह इल्म ही नहीं कि वह मौजूद अपने नागरिकों और वोटरों को जाने-अनजाने में इस अराजकता के अन्धे कुऐं धकेलने पर मजबूर है।  भीड़ की हिंसा और भीड़ का पुलिस और प्रशासन पर बढ़ता नैतिक अनैतिक दबाव इस बात का प्रमाण है कि हमारी सुरक्षा व्यवस्था जर्ज-जर्ज हो अपने कत्र्तव्यों से मुक्त होने पर मजबूर है। जिस तरह से आये दिन सुरक्षा कर्मियों और अधिकारियों को नैतिक-अनैतिक प्रदर्शनों भीड़ की हिंसा के सामने मान मनोहर कर स्थिति को सम्हालना पड़ता है यह आज की सत्ता, सभा, परिषदें और सरकारों के लिए शर्मनाक बात होनी चाहिए। राज व्यवस्था जो भी हो उसका मूल आधार ही आम नागरिक की सुरक्षा और सेवा से जुड़ा होता है। मगर सुनियोजित तरीके से सुरक्षा को छोड़ सत्ता के लिए सेवा कल्याणों क...

अघोषित माफियाराज की धमक से थर्राता लोकतंत्र

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  भले ही हमारी मौजूद व्यवस्था, सत्ता, परिषदें, अपने-अपने व्यवस्थागत अधिकारों के चलते सेवा, कल्याण के दावे प्रति दावे कितने ही क्यों न करे और उसकी बिना पर हार-जीत के खेल भी खूब चलते रहे। मगर उस कटु सत्य से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। जिसका दंश झेल गांव, गली के गरीब, बैवस, मायूस लोग अपने-अपने मान-सम्मान, स्वाभिमान को तिलांजली दें, व्यवस्था में पनपते अघोषित माफियाराज में जीवन जीने को मजबूर है। लगभग व्यवस्थागत मौजूद सेवा, सुविधा और कल्याण के क्षेत्र में शायद ही कोई ऐसा अहम क्षेत्र बचा हो, जो अघोषित माफियाराज से अछूता हो। धन लालची, धन पिपासु इन्सानियत के दुश्मनों का यह अदृश्य गठजोड़ भले ही दिखाई न देता हो। मगर इसके क्रूर कृतज्ञता से समूची व्यवस्था ही नहीं आम जीव, जगत भी कराहने पर मजबूर है। फिर वह क्षेत्र सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा सुविधा, दवा, पेयजल, खाद्य, भूभाग या फिर अवैध बसूली करने वाले माफियाओं से क्यों न जुड़ा हो। मगर एक भी कृतज्ञ व्यवस्थागत अंश इस अघोषित माफिया से सेवा कल्याण के नाम संघर्ष करता दिखाई नहीं देता।  परिणाम सामने है मग...

भारत की समृद्धि में कृष्णधाम का जीर्णोउद्धार अहम

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   अगर समुची संस्कृति, शिक्षा, संस्कारों का निष्ठापूर्ण सार्थक अध्ययन पश्चात उनकी सटीक व्याख्या हो तो सत्य समझने में कोई संशय न होगा और सत्य शायद आज की स्थिति में यहीं है। जिसे हम कृष्ण के नाम से जानते है पहचानते है। जिसमें समृद्धि का मार्ग स्वतः ही निहित है और इस महान भूभाग पर इस मार्ग को हासिल करना संभव ही नहीं सहज भी है।  क्योंकि कृष्णधाम वह वृहद स्वरूप है मानवीय जीवन की समृद्धि, सभ्यता, संस्कार और शिक्षा का जिसे नकारा नहीं जा सकता। सवाल आज समझ का है। अगर इस सत्य को हमारी सभायें, परिषदें और सत्तायें समझ लें, तो कोई कारण नहीं जो हम पुनः एक मर्तवा फिर से खुशहाल, समृद्ध भारतवर्ष का निर्माण न कर सके। भले ही यह कहावत किसी परिपेक्ष में सटीक रही हो कि एक चना भाड़ नहीं फोड़ सकता। मगर यह भी एक कटु सत्य है कि एक बीज से हजारों बीजों का सृजन और एक चिंगारी से बड़ी आग कि सत्यता को नकारा नहीं जा सकता। इसलिए जब तक हम स्वराज को साक्षी मान कृष्णधाम के जीर्णोउद्धार की ओर अग्रसर नहीं होते तब तक हम विदवंशक शिक्षा, संस्कृति और संस्कारों का शिकार हो, ...

आशा-आशाकांक्षाओं पर भारी महत्वकांक्षा विकास कल्याण के खाके से इतर प्राकृतिक संपदा के अंधाधुंध दोहन और अघोषित स्थानातांरण उघोग से हलाक अपेक्षायें

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। भले ही म.प्र. के मुख्यमंत्री अपने वचनों को पूर्ण करने ऐड़ी चोटी का जोर लगा अल्प मत की सरकार को स्थिर रख विकास कल्याण की, बगैर रोड मैफ और स्पष्ट विजन के साकार रूप देने की कोशिश कर रहे हो। मगर जिस तरह का माहौल सरकार के 4 माह गुजर जाने के बावजूद बना हुआ है। उससे मुख्यमंत्री जी की मंशा और उनकी पार्टी के वचन पत्र का क्या परिणाम होगा यह तो आने वाला समय ही तय करेगा। कहते है कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते है सो हाथ कंगन को आर्सी क्या और पढ़े लिखे को फार्सी क्या, इसलिये जिस तरह से प्रशासनिक मशीनरी और सरकार अपने कत्र्तव्य निर्वहन और पुरूषार्थ की पराकाष्ठा राज्य और जनकल्याण के नाम करने में लगी है वह लगता है कि अब किसी से छिपा नहीं।  जिस मंद गति से गौसंरक्षण के लिए गौशालाओं की शुरूआत चल रही है लगता नहीं कि इतनी आसानी से प्राकृतिक संपदा से समृद्ध यह प्रदेश गौ श्राफ से मुक्त होने वाला है। क्योंकि जिनके रहमों करम पर वोटों की खातिर गौवंश की मिलकीयत उसकी संपदा को सत्ताओं ने दोनों हाथों से लुटाया उसी का परिणाम है कि आज प्रदेश का गौवंश अपना सबकुछ गवां...

वोट नीत और बेवजह के अभियानों ने बैठाला, भट्टा राष्ट्र भक्तों का मान-सम्मान अहम पुरूषार्थ की पराकाष्ठा, आध्यात्म-तकनीक हमारी विरासत

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। स्वार्थ, ज्ञान, विज्ञान की चकाचैंध में लोग देश-विदेश हमें जो भी नाम दें तथा हमारी पहचान और प्रमाणिकता का पैमाना जो भी हो तथा हमारे अपने कत्र्तव्य, जबावदेही का निर्धारण जैसा भी रहा हो। मगर आजादी के 70 वर्ष पश्चात भी कुछ सवाल आज भी यक्ष है। जो नैतिकता, संस्कृति, संस्कार सहित सत्ताओं, परिषद पर सवाल खड़े करने काफी है। आखिर हमारे लिए हमारे द्वारा या हमारे पूर्वजों द्वारा स्थापित व्यवस्था हम लोगों के प्रति इतनी कत्र्तव्य विमुख बेहरहम कैसे हो सकती है। कैसे हम अपना पुरूषार्थ, त्याग, तपस्या की ही अनदेखी कर सकती है।  जिस व्यवस्था में जन्म से लेकर मृत्यु तक के पुरूषार्थ का पैमाना निर्धारित हो वह कैसे पहचान के मोहताज बन गये यह हमारे लिए दर्दनाक भी है शर्मनाक भी। आखिर वह समाज, संस्कृति हमारे बीच से कहां काफुर हो गई, जिस पर हमें गर्व था। आज वक्त है ऐसे पुरूषार्थ शख्यितों को सम्मानित करने का या फिर आज वह हमारे बीच हो या न हो, अगर आने वाली या मौजूद हमारी पीढ़ी और मौजूद व्यवस्था आज भी इस सच से अनभिज्ञ रही तो यह हमारी सबसे बड़ी अक्षमता असफलता ही नहीं नाकामी ...

रोड मेफ न डी.पी.आर कैसे बने समृद्ध, खुशहाल राष्ट्र विजन, अवसर, सुरक्षित, आयडिया, विद्या, विद्यवानों के अभाव में दम तोड़ता त्याग कल्याण विद्याचोर हाइटेक संस्कृति में दम तोड़ती प्रतिभायें

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है, विजन, अवसर, आयडिया, विद्या, विद्यवानों का हुनर असुरक्षित और विद्याचोर, संस्कृति चर्मोत्कर्ष पर हो, ऐसे में बगैर रोड मैफ, डी.पी.आर के कैसे समृद्ध, राष्ट्र बनेगा। यह इस महान भूभाग पर चर्चा का विषय होना चाहिए। जिस पर बहस हो, इसका प्रचार-प्रसार हो और आज यह सबसे बड़ा मुद्दा भी होना चाहिए। ऐसे में यह तय करना हम भारतवर्ष के नागरिकों का कत्र्तव्य ही नहीं जबावदेही भी होना चाहिए और अवसर, आयडिया, विद्या, विद्यवानों का संरक्षण भी। क्योंकि जिस तेजी के साथ इन्टरनेट तकनीक और हाइटेक भावुक तकनीक के सहारे सोशल मीडिया सतत सत्ता के लिए संगठित लोगों का समूह, अघोषित तौर पर काॅरपोरेट कल्चर या संस्कृति के नाम गिरोहबंद, संगठन सक्रिय है। ऐसे में न तो हम भारतीय संस्कृति, शिक्षा के पथ भ्रष्ट करने वाली ताकातों से स्वयं व अपने नौनिहालों के भविष्य को सुरक्षित रख पायेगें, न ही अपनी प्रतिभा, विद्या, विद्यवानों को उनकी क्षमता प्रदर्शन के उचित अवसर मुहैया करा समृद्ध भारत का व्यवहारिक विजन, आयडिया, रोड मैफ, डी.पी.आर तैयार कर इस महान राष्ट्र को आजादी के 70 वर्ष बाद उसका...

कत्र्तव्य विमुखता की भेंट चढ़ते, महा अभियान स्वार्थवत सत्ताओं और धन पिपासुओं की चारागाह बनती आशा-आकांक्षायें

Image
व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जब भी किसी महत्वकांक्षी महा अभियान की शुरूआत या समापन होता है तो बड़े-बड़े दावे आंकड़े बाजी, उपलब्धियों के कीर्तिमान स्थापित हो जाते है। अगर कत्र्तव्य निर्वहन, जबावदेही का पैमाना यहीं है। तो स्पष्ट है कुछ नहीं हो सकता। क्योंकि जिस तरह से विगत 25 वर्षो से म.प्र. में विभिन्न अभियानों का दौर चला उससे कईयो को सत्ता तो कईयों को अकूत धन मिला। मगर न तो म.प्र. के जन न ही म.प्र. को कुछ हासिल हो सका, रही सही प्राकृतिक संपदा जनधन सहित सत्ता का दोहन अवश्य बड़े पैमाने पर हुआ। फिर वह पंचायतीराज, जिला सरकार, ग्राम सम्पर्क सहित विभिन्न सम्मेलन जीर्णोउद्धार से लेकर वृक्षा रोपण, जल, तालाब बचाओं अभियान रहे हो या शौचालय से लेकर आवास और भूमि सुधार सहित किसान मजदूर कल्याण के कार्यक्रम रहे हो। कारण सार्थक विजन डी.पी.आर. सहित सर्वकल्याण की भावना के अभाव के साथ कत्र्तव्य विमुखता तथा लालसा का नंगा नाच आज भी जब ग्रीष्मकाल पश्चात जल, नदी, नाला, तालाब संरक्षण की बात हो और बारिस पश्चात वृक्षा रोपण और समय से शौचालय आवास निर्माणों के साथ, मनरेगा जैसी महत्वकांक्षी योजना उपेक्षा ...

अतार्किक अव्यवहारिक पैमानों के नागपास में दम तोड़ती प्रतिभा, आशा आकांक्षाएं दहशत में भविष्य

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। यूं तो समर्थ, समृद्ध, खुशहाल राष्ट्र में प्रतिभा, संपदा, दमन दोहन की शुरुआत आजादी के लगभग 150 वर्ष पूर्व अर्थात् 1834-36 के दौरान हो चुकी थी। जब लार्ड मैकाले ने अपनी रिपोर्ट भारत भ्रमण पश्चात ब्रितानिया हुकूमत के सामने प्रस्तुत कर अनादिकाल तक भारतीयों को गुलाम बनाए रखने एक नई शिक्षा नीति की रणनीति प्रस्तुत की थी। आजादी के 70 वर्ष बाद विदवान मैकाले आज प्रमाणिक है और उसका विचार समर्थ और सिद्ध भी, अफसोस कि न तो हम हमारी महान शिक्षा, संस्कृति बचा पाए, न ही अपने संस्कारों को सुरक्षित रख स्वयं की समृद्धि को सार्थक, सर्वमान्य होने का मार्ग प्रस्त कर पाए और पैमानों के नागपाश में उलझ अपने प्रचुर संसाधन, प्रतिभाओं के दोहन दमन पर उतर समृद्ध, खुशहाल भूभाग के विनाश पर उतर आए। जिस परसेंटेज और शर्तों के साथ हम स्वयं को विधा विद्वान समझ इस महान राष्ट्र को समृद्ध खुशहाल समर्थ बनाना चाहते हैं। दरअसल यही हमारे विनाश, समस्या की जड़ है। हर व्यक्ति, परिवार, समाज, सत्ताओ के अपने छदम अहम अंहकार के आगे राष्ट्र जन सभी बैवस, बेकार है।  दुर्भाग्य कि हम स्वयं की सत्ता के 70 वर्षों म...

इन्सानियत नेकनियती से बड़ा कुछ नहीं संविधान सर्वोपरि राष्ट्र विरोधी सूचना संवाद पर संज्ञान अहम हर विचार व्यवहार की रक्षा हमारा धर्म

Image
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कभी जिस तिलस्म को स्वयं का सौभाग्य समझने वाला जीव उसके अनुसार आचरण व्यवहार कर अपनी पहचान बनाना बाद में उसका तिरस्कार, यह शोध का विषय होना चाहिए और उसकी जड़ तक हमें जाना चाहिए। क्योंकि इन्सानियत का सबसे बड़ा धर्म नेकनियत और कलाकार का सबसे बड़ा धर्म उसकी कला होती है और कलाकार का धर्म कला से बड़ा कोई दूसरा नहीं हो सकता। वहीं बात आज सभी को समझने वाली होना चाहिए। शायद किसी ने कभी सच ही कहा होगा कि अलग-अलग मत, संस्कृति, व्यवहार के लोग एक साथ नहीं रह सकते उसी का परिणाम है कि कई पीढ़ियों के बाद भी हमारी संस्कृति, आचरण, व्यवहार संविधान अनुरूप नहीं जिसका दंश हम आज भी झेल रहे है।  जय स्वराज

सटीक निर्णय, स्पष्ट संदेश देश, दल से बड़ा कोई नहीं

Image
वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अपने 4 पृष्ठीय इस्तीफे में राहुल ने जिन बातों का उल्लेख किया है या जो बातें छूट गई है उनको समझना और विश्लेषण करना सियासी पंडितों का काम हो सकता है। मगर इतना तो साफ है कि राहुल ने सटीक निर्णय और स्पष्ट संदेश से यह साफ कर दिया है कि उनके लिए देश, दल से बड़ा और कोई नहीं। क्योंकि बगैर मजबूत संगठन तथा समर्पित नेता, कार्यकर्ताओं के सत्ताधारी दल और राजनीति में मौजूद बुराईयों से नहीं लड़ा जा सकता।  अगर यों कहें कि सत्ता का मोह और स्वयं स्वार्थ किसी भी मजबूत संगठन तथा राष्ट्र-जन की सेवा में सबसे बड़ी बाधायें है तो कोई अति संयोक्ति न होगी। उन्होंने अघोषित तौर पर सत्ता उन्मुख सियासत और वंशवाद जैसे आरोपों को निराधार करते हुए आज की सियासत में यह सिद्ध कर दिया कि देश, दल तथा जीवन मूल्य सिद्धान्तों की रक्षा के लिए सत्ता या संगठन प्रमुख का पद उनके लिए  कोई मायने नहीं रखता। यह बात हर काॅग्रेसी को समझने वाली होना चाहिए। राहुल के इस्तीफे के साथ ही दो बातें तो स्पष्ट है कि एक कि सत्ता भोगी उन नेताओं की पहचान स्पष्ट होगी। जिन्होंने संगठन से बड़ा स्वयं क...