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Showing posts from June, 2020

देश के मुखिया का मार्मिक सम्बोधन सप्लाई लाईन पर जोर अगले पांच महीनों तक देश की 80 करोड आबाम को 5 किलो अनाज और एक किलो चना मुफ्त मिलेगा

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस देश में सियासी दावपेंच प्रथम पायदान पर और समस्या तथा समाधान दूसरे पायदान पर अभी तक रहे हो, ऐसे में सत्ता के किसी भी सार्थक कदम के सियासी हल न खोजे जाये ऐसा कैसे संभव हो सकता है। अब देश के मुखिया के सम्बोधन में छुपी घोषणा के पीछे का सच क्या है यह तो सियासी दल और सत्ता ही जाने। मगर इतना तो तय है कि आने वाले पांच महीनों तक कोरोना से संभावित संघर्ष के बीच केन्द्र सरकार ने राशन की पुख्ता व्यवस्था 80 करोड लोगों को अवश्य रख छोडी है। इतना ही नहीं जिस तरह से आर्थिक गतिविधियों को गति देने 2 लाख हजार करोड के पैकेज की घोषणा हुई वह भी संज्ञान योग्य है। मगर जिस तरह की गति ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार गारंटी स्कीम के तहत पकडी है वह निश्चित ही राहत पहुंचाने वाली है। अगर उस पर से 80 करोड लोगों को मुफ्त राशन की व्यवस्था है तो निश्चित ही कोरोना से संघर्ष को बडी ताकत मिलने वाली है। मगर सबसे बडी परेशानी और सबसे बडा संकट इस कोरोनाकाल में उस पाईप लाईन को लेकर है जिसकी चर्चा कभी पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी भी खुले मंच से किया करते थे। ये अलग बात है कि तब...

मंत्री मंडल विस्तार पर फिलहाल विराम-से चर्चाओं का दौर सरगर्म क्या म.प्र. में बडे बदलाव की संभावना

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस गर्मजोशी के साथ मंत्री मंडल विस्तार की सुगबुगाहट शुरू हुई थी मगर हालिया खबरों से लगता है कि फिलहाल मंत्री मंडल विस्तार पर विराम लग चुका है। जिससे मंत्री बनने की उम्मीद लगाये बैठे लोग हैरान-परेशान है। ये अलग बात है कि संभावनाओं का समुद्र अपार है जिससे जहां यह चर्चा भी बडी सरगर्म है कि सत्ताधारी दल का जोर उपचुनाव में सरकार के समर्थन लायक विधायकों की जीत को लेकर ज्यादा है। जिससे सियासी संतुलन बना रहे है। जिससे सरकार पर दल बदलकर भाजपा में आये लोग भाजपा पर दबाव भी न रख सके और सरकार भी पूरे बहुमत के साथ अपने शेष कार्यकाल का सफर र्निविघन रूप से तय कर सके। अगर वर्तमान सरकार का सहज नेतृत्व समस्या समाधान खोजने में असफल हुआ तो निश्चित ही कोई बडा बदलाव सत्ता को लेकर आने वाले भविष्य में साकार हो इस संभावना से इंकार भी नहीं किया जा सकता। अब ऐसे में सत्य क्या है यह तो सरकार के मुखिया या सत्ताधारी दल के कर्ता-धर्ता ही जाने, फिलहाल तो संभावनाओं का सियासी बाजार बडा ही सरगर्म है।

एक्सन मोड में पूर्व मंत्री श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया आने की आहट सुन समाधान में जुटे अधिकारी

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जब से कोरोना महामारी ने दस्तक क्या दी कि लोग हैरान-परेशान रह गये। जब लोगों को लाॅकडाउन में समस्या समाधान के रास्ते नहीं सूझ रहे थे तब संवेदनशील पूर्व मंत्री श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया बडे पैमाने पर खादन्न किटों की व्यवस्था कर शहर के गरीब इलाके ही नहीं दूर-सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक राजमाता विजयाराजे सिंधिया सेवा संस्थान ट्रस्ट के माध्यम से राशन वितरण का कार्य कराया। इतना ही नहीं शिवपुरी से होकर गुजरने वाले मजदूरों भाई को भी सिंधिया ट्रस्ट द्वारा राशन-पानी की व्यवस्था कराई गई। इसके अलावा शिवपुरी सहित ग्वालियर-चंबल के कई जिलों की पुलिस को भी पीपीई किट मुहैया कराई गई और यह कार्य लाॅकडाउन के दौरान पूरे समय चलता रहा। अब जबकि अन-लाॅकडाउन का दौर है और धीरे-धीरे जीवन उपयोगी सहित विकास के कई कार्य अवरूद्ध पडे थे उनमें गति लाने के लिए जैसा कि अपुष्ट सूत्रों का कहना है कि पेयजल से लेकर रोजगार और कोरोना महामारी से सावधानी के साथ विकास कार्यो खासकर सिंध पेयजल और करोडो रूपयों की लागत से शिवपुरी शहर के बीचों-बीच बनने वाले थीम रोड से जुडे अधिकारियों को आडे...

सत्ता की सह पर अवैध उत्खनन की चर्चा सरगर्म

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। ये अलग बात है कि 20 करोडी रेत खदान की आड में म.प्र. के शिवपुरी जिले में कई जगह अवैध रेत उत्खनन की चर्चाऐं सरगर्म है। मगर इस बीच खुटेला मंे आबाद अवैध पत्थर उत्खनन फिलहाल वनों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। अघोषित तौर पर वनों का उजाड और अवैध उत्खनन शिवपुरी जिले में कोई नई बात नहीं। विगत 30 वर्षो में जिस तरह से जंगलों को छलनी किया गया वह किसी से छिपा भी नहीं। सत्तायें आती है जाती है और अवैध उत्खनन का मालिकाना गुरूर बदलता रहता है। मगर वनों का दर्द यह है कि आखिर उनकी रक्षा कैसे और कौन करें। जब रक्षक ही भक्षकों के सार्गिद साबित हो रहे हो, ऐसे में दर्द होना तो स्वभाविक है।

अमर होता भ्रष्टाचार दम तोडती वैद्यानिक व्यवस्थायें उगाई का अस्त्र बना अघोषित धन आभाव और कार्य मूल्यांकन

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह की हौज-पोज व्यवस्था ने संस्थाओं में अपनी गहरी जडे जमा ली है और जिस तरह से आम नागरिक बैवस मजबूर नजर आता है उसे देखकर तो सिर्फ यहीं कहा जा सकता है कि भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था दूर की कोणी ही नहीं असंभव ही है जिसका मूल कारण संस्थाओं में सेवायें देने वालों का समयवद्ध मूल्यांकन का आभाव और अघोषित धन आभाव, यह दो प्रमुख महा दानव सेवा कल्याण के मार्ग में इतने बीभत्स सिद्ध हो रहे है सैकडो कानून समीक्षा और अंकेक्षण के बावजूद भी भ्रष्टाचार रूक पाना असंभव-सा जान पडता है। चाहे अधिकारी कर्मचारियों के जायज भुगतान हो या अन्य लाभ, सभी दूर अपना हक हासिल करने अप्रमाणिक तौर पर उस मार्ग से गुजरना पडता है जिसकी कभी उन्होंने कल्पना भी न की हो। मशीनरी पर प्रभावी होती सियासत ने सिस्टम की इस तरह से कमर तोड रखी है कि अब तो सेवक भी सेवा को अपना अधिकार और व्यवहारिक संवाद को अपना स्वाभिमान समझते है इस लोकतांत्रिक व्यवस्था की महा रस्सा-कसी से फिलहाल सभी हैरान-परेशान है मगर कोई भी जुबान तक खोलना नहीं चाहता। सभी पिस रहे है और अपने-अपने हकों से लुट रहे है समाधान कब प्...

अपहत होता लोकतंत्र कलफती आशा-आकांक्षायें सेवा कल्याण का मातम मनाने मजबूर

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। ये अलग बात है कि करोडो के लेनदेन की चर्चाऐं आजकल सियासी गलियारों और समाचार पत्रों की सुर्खियां बनी रहती है उसे देखकर तो सिर्फ यहीं कहा जा सकता है कि सियासत के नाम गैंग गिरोह मंे तब्दील सियासी लोगों का हुजूम सेवा कल्याण के लिए अब सत्ता चाहता है फिर उसकी तथाकथित कीमत जो भी हो। हालिया तौर पर जिस तरह के आरोप मालवा के एक चुने हुये विधायक ने सत्ताधारी दल पर सौ करोड की राशि को लेकर लगाये है और जिस तरह के आरोप पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा विधायकों की होर्सट्रेडिंग को लेकर खुलेआम लगाये है उनकी सच्चाई क्या है यह तो सत्ताधारी दल और विपक्षी दल ही जाने। मगर जब जनता द्वारा चुने हुये विधायक सार्वजनिक तौर पर इस तरह के आरोप लगा रहे है तो ऐसे आरोपों पर आमजन के बीच विचार अवश्य होना चाहिए और जिम्मेदार सियासी दलों को भी अपना पक्ष लोकतंत्र में स्पष्ट करना चाहिए। क्योंकि लोकतंत्र में जनता जनसेवकों को अपने समृद्ध खुशहाल जीवन की आशा-आकांक्षा के साथ मतदान करती है। अगर करोडों की खरीद-फरोद के आरोप अगर समाचार पत्रों की खबर बनते है तो यह लोकतंत्र के लिए शुभसंकेत नहीं कहे ज...

उपचुनाव से पूर्व बडे सियासी तोड-फोड की संभावना कांग्रेस और बीजेपी के अलावा अन्य प्रभावी दल हो सकते है प्रभावित

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. भोपाल। जिस तरह की सियासी हवा म.प्र. में होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनैतिक हल्कों में चल रही है या तोड-फोड के सैलाव में जिस तरह से कांग्रेस अपनी सत्ता गवां चुकी है उसके जख्म भरने के बजाये और हरे होते दिखाई देते है। सवाल यहां किसी एक दल या नेता का नहीं, सवाल तो अब सियासी आस्थाओं का यक्ष है। कांग्रेस छोडकर जाने वालों के नाम और उनकी आस्था तो फिलहाल सभी के सामने है। मगर सर्वाधिक सशय के दायरे में फिलहाल बीजेपी या अन्य दल अधिक दिखाई देते है। अगर उपचुनाव से पूर्व कोई बडी जोड-तोड चंबल सहित मालवा में दिखे तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।  मगर उन सियासी सिपहसालारों का क्या जो इस तोड-फोड के मंथन से निकलने वाले अमृत पर निगाह गढाये बैठे है। क्योंकि अब सियासी तोड-फोड से इतना तो सिद्ध है कि सेवा कल्याण के नाम अमृत हीरे-जवारत पद प्रतिष्ठा तो सभी चाहते है। मगर सच्ची सेवा कल्याण का जहर कोई नहीं पीना चाहता। देखना होगा कि सजग होती जनता और कोरोनाकाल में कलफते जनमानस के बीच अपने सियासी गणित में कौन सिद्ध हो पाता है। मगर अंदर खाने की अपुष्ट खबर को सही माने त...

प्रभारियों के भार से, थर्राती प्रशासनिक व्यवस्था म.प्र. विधुत वितरण कंपनी को लेकर उठे सवाल

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वीरेन्द्र शर्मा म.प्र. भोपाल। अगर खबरों की माने तो विगत वर्षो से व्यवस्था को चलायमान रखने प्रभारी संस्कृति का जो प्रार्दुभाव प्रशासनिक व्यवस्था में पनपा है उसके भार को देखते हुये व्यवस्था ही नहीं समूचा सेवा कल्याण विकास थर्राया हुआ है। बैवस सत्ता ने इस समस्या से निवटने निचले स्तर पर कार्य के सुचारू संचालन और सेवा कल्याण विकास की चमक अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने संविदा आधार या फिर अनुबंध के आधार पर व्यवस्थायें चाकचैबंद कर छोडी है। मगर आला स्तर पर विधि सम्वत पदौन्नति के मार्ग में खडी अडचनों के मद्देनजर प्रभारी व्यवस्था का सहारा लिया गया। जैसे कि प्रशासनिक हल्को में आम चर्चा बनी रहती है। मगर सत्ता का यह फाॅरमूला सत्ता की अथवा तथाकथित मलाईकाटुओं के अपने स्वार्थपूर्ण करने के लिए दुधारू गाय साबित होती इस व्यवस्था और इस फाॅरमूले का जनहित में खुलकर उपयोग हो रहा है।  हालिया खबर मध्यक्षेत्र विधुत वितरण कंपनी के कारनामों को लेकर है। खबर है कि व्यवस्था बनाये रखने के नाम पर प्रभारियों के सैलाब के बीच अब तो बात सीनियर-जूनियर को दरकिनार कर मनमानी तक आ पहुंची है। जिसमें सत्ता में रसूख रखने वाले लो...

आपदा प्रबंधन का जायजा

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी। गत वर्ष पूर्व घटी म.प्र. के शिवपुरी जिले में दर्दनाक घटना एवं बारिशकाल के शुरू होते ही आपदा प्रबंधन की तैयारियों का जायजा लेने कलेक्टर के निर्देश पर प्रशासन की टीम सुलतानगढ पहुंची। जहां पूर्व में कई पर्यटक इस पर्यटन स्थल पर अचानक पानी से उपजे हालात में अपनी जान गवां चुके है और शिवपुरी का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल सुलतानगढ देशभर के समाचार चैनल अखबारों की सुर्खियां बना उसका आज भ्रमण कर आपदा प्रबंधन की तैयारियां का अधिकारियों ने जायजा लिया। समूचे म.प्र. ही नहीं ग्वालियर-चंबल अंचल के सबसे मनोरम स्थलों पर सुमार और तीन बडे नेशनल पार्को से नजदीक शिवपुरी यूं तो प्राकृतिक सौन्दर्य के बेमिशाल स्थलों में सुमार है। जहां बारिश के मौसम में आसपास के जिले ही नहीं दूर-सुदूर क्षेत्रों के पर्यटक भी इसकी मनोरम छटा और प्राकृतिक सुन्दरता जलप्रपात, झरने तथा हरी-भरी पहाडियों को देखने आते थे। अब यह तो वक्त ही तय करेगा कि सरकार और शासन के इस वर्ष किये जा रहे आपदा प्रबंधन के कार्य कितने कारगार हो पाते है। 

स्वार्थ के सैलाब में सामर्थ का पुरूषार्थ कर्मलोक में जीवन की सिद्धता सृष्टि, सिद्धान्त अनुरूप सृजन में नैसर्गिक स्वभाव, सामर्थ, पुरूषार्थ में कत्र्तव्य निर्वहन की बाध्यता कालखण्ड अनुरूप कत्र्तव्य निर्वहन से कलंकित हो, कलफती मानवता

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। स्वयं के विधान और सृष्टि सिद्धान्त को विसार स्वयं की कृतज्ञता सृजन में सिद्ध करने नैसर्गिक स्वभाव विरूद्ध कत्र्तव्य निर्वहन लोक जीवन में कलंकित हो इस तरह से कलफेगा शायद ही मानव धर्म और सृष्टि सिद्धान्त में आस्था रख अपना निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन करने वाले मानव और महामानवों ने सपने में भी न सोचा होगा। स्वार्थ के मार्ग सामर्थ पुरूषार्थ अनुरूप कृतज्ञता की सिद्धता इस बात का प्रमाण है कि हम महान विरासत के उत्तराधिकारी, मानव धर्म को सर्वोच्च मानने वाले महान मानवों के वंशज स्वयं के जीवन की सिद्धता सिद्ध करने किस कर्मलोक के सहभागी और साक्षी बन चुके है। तार-तार महान संस्कृति, संस्कारों का कफन दफन धारण कर किस संस्कृति, संस्कारों को जाने-अनजाने एवं स्वार्थवत अंगीकार कर चुके है। समाज का तन ढकने जिस संस्कृति, संस्कारों के वस्त्र आज सभ्य मानवता के अंग वस्त्र बन चुके है वह उस महान संस्कृति, संस्कार, विरासत ही नहीं मानव धर्म, मानवता व जीवन के भविष्य को डराने काफी है। फिर मौजूद स्वार्थवत संस्कृति, संस्कारों का प्रदत्त हस्तक्षेप उसकी कृतज्ञता सृष्टि सृजन म...

सत्ता की सार्गिदी और प्राकृतिक संपदा पर माफियाओं की मशकमार 3 दशक से प्राकृतिक संपदा लूट के अखाडे में तब्दील शिवपुरी में नहीं थम रहा सत्ता सार्गिदों का माफियाराज

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह की खबरें सोशल मीडिया से लेकर टी.व्ही चैनल समाचार पत्रों की सुर्खियां बनी रहती है और सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर सरगर्म रहता है यह इस बात का प्रमाण है कि सत्ता किसी की भी हो। मगर अघोषित तौर पर सत्ता सार्गिदों का माफियाराज यथावत बना रहता है। ये अलग बात है कि प्राकृतिक संपदा लूट के वैद्य-अवैध उत्खनन और पत्थर खदानों को लेकर पुलिस और प्रशासनिक कार्यावाहियों का अम्बार कभी-कभी पटा रहता है मगर जैसे ही सत्ता के पद चिन्ह अपने हालात बदलते है सार्गिदों का धंधा भी उसी रूप में आकार लेने आतुर हो जाता है।  अगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो जिस तरह से बडे पैमाने पर अवैध उत्खनन के मामलों में सभी स्तरों पर सहमति-असहमति दिखाई पडती और जिस तरह से पनडुब्बियों से लेकर पाॅकलेन मशीनों की धमाचैकडी स्वीकृत जगह से कहीं दूर अवैध उत्खनन में लगी रहती है उन्हें देखकर सिर्फ यहीं कहा जा सकता है कि समरथ को नहीं दोष गंुसाईं। विगत तीन दशक में जो लोग सत्ता में रहे है या कहीं न कहीं औपचारिक-अनौपचारिक रूप से सत्ता से जुडे रहे है। ऐसे अवैध उत्खननकत्र्ताओं ...

सामर्थ की सत्ता और अनमोल संस्कृति........तीरंदाज ?

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व्ही.एस.भुल्ले भैया- भले ही म्हारी चुनाव चंदा पार्टी के महान गठन के मार्ग में म्हारी महान संस्कृति, संस्कार आडे आते हो। मगर म्हारा सियासी संस्कार और चमकदार संस्कृति की माने तो मने भी सत्ता सिंहासन तक पहुंच सकता हूं और हाथों-हाथ मुखिया बन उडन-खटोला में बैठ निष्ठापूर्ण सेवा कल्याण कर सकता हूं। मगर कै करूं काडू बोल्या कि इस मौजूद सियासत में अगर थारी चमकदार संस्कृति और सामर्थ की दिशा ठीक रही तो थारी पार्टी तो पार्टी हाथों-हाथ सिंहासन तक पहुंचने की चाबी मिल जायेगी।  भैये- कै कोरोनाकाल में कै थारा भी दिमाग सर चढकर बोल रिया शै जो तने भी सत्ता के लिए अभी से अर्र-बर्र बक रिया शै। सबसे पहले तो हाथ सेनेट्राइज करके आ, फिर मुंह में मुसीका लगा मास्क चढा और थोडी दूरी बनाकर बात कर। बगैर संपर्क किये घरों में बैठ  नीति निर्देशों का पालन कर, जरूरत पडे तो घर पर ही बैठ, वीडियों काॅन्फ्रंेस से थारी पार्टी का मंसूबा व्यक्त कर, तब तो पार्टी-मार्टी तो छोड थारी भी चल जायेगी बरना अभी तो लाॅकडाउन के बाद अनलाॅकडाउन है ज्यादा सियासत चढी तो थारे बाप-दादों की झोपडी भी कोरोटाइन हो जायेगी कै थारे को मालूम क...

उन्माद का आतंक कत्र्तव्य तो कलंकित करती निष्ठा सिसकता शान्त समृद्ध भूभाग जबावदेही को मुंह चिढाता समृद्ध मानव समाज

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। विश्वभर में मौजूद भूभाग पर हर जीवन और जीवन से जुडी हर विधा की रक्षा समृद्धि सम्बर्धन से बडा शायद ही कोई धर्म या कर्म हो। जिसमें प्रकृति से लेकर वन पर्यावरण पशु-पक्षी, मानव जीवन, अगर यो कहें कि जल-थल, नवचर सभी का कल्याण समाहित है। जिनकी समृद्धि सुरक्षा संरक्षण का मूल आधार ही मानव का जबावदेह निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन है जो सृजन में एक प्रमाणिक स्वीकार्य सत्य भी है और हो सकता है। मगर जिस तरह से प्रकृति में जीवन की अनमोल समृद्ध कृति मानव जीवन निर्वहन में स्वार्थ उन्माद संस्कृति का शिकार हों, सिसकने पर बैवस मजबूर है वह कत्र्तव्य की निष्ठा को कलंकित करने काफी है।  कहते है कि उन्माद के आतंक से उम्मीद की किरण भले ही धुंधली हो और स्वार्थवत संस्कारों के बीच आशायें कलफती हो तथा गैंग गिरोहबंद होती मानव सभ्यता की भले ही अपनी-अपनी सभ्यता अनुसार कृति संस्कृति हो। मगर मानव कल्याण से विमुख होना किसी के सामर्थ की बात नहीं। आज जब समूचा विश्व कोरोना के महानसंकट से हलाक और वन पर्यावरण के साथ मानव जीवन को लेकर मानव हैरान-परेशान है। ऐसे में जबावदेह निष्ठाप...

वोट नीति का दंश भोगता देश

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह की सियासत विगत 40 वर्षो में सर चढकर सत्ता के लिए परवान चढी अब उसके परिणाम प्रमाणिक रूप से भले ही स्पष्ट न हो। मगर जो रूदनभरी सिसकियां और बैवस दिल आज गांव, गली में भोगने पर मजबूर है वह किसी से छिपा नहीं। ये अलग बात है कि पडोसी दुश्मन से मिले छोटे-बडे घावों से देश की आत्मा भले ही छलनी रही हो, मगर सियासत के उन्माद ने जिस संस्कृति की पताका लहरा सम्राट बनने की ध्वजा पताका लहराईं, उनमें से भले ही अभी तक कोई भी अपने पुरूषार्थ के बल सिद्ध न हुआ हो। मगर सल्तनत सम्राट बनने के उन्माद ने आज सियासत ऐसे मुकाम पर ला छोडी है कि अब सियासी दलों को न तो राष्ट्र-जनहित के मुद्दे सार्थक नजर आते और न ही वह समृद्ध संस्कृति जो उनकी मूल विरासत थी वह नजर आती।  अब्बल उन्मादपूर्ण संस्कृति में डूबते सियासी दल और स्वार्थवत संस्कृति का टाॅप-टू वाॅटम प्रसार इस बात का प्रमाण है कि कहीं न कहीं हमारे सामर्थ और पुरूषार्थ में कमी आई है। कोरोना महासंकट के बीच एक ओर पडोसी दुश्मन का दुस्साहस इस बात का प्रमाण है कि वोट नीति का दंश हमारी महान संस्कृति में इतने अंदर तक सत्...

पुरूषार्थ की पीडा और सामर्थ की र्दुदशा में दम तोडती आशा-आकांक्षायें जबावदेह मुक्त कत्र्तव्य निर्वहन का दंश भोगती मानवता

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   जिस तरह से वर्तमान संस्कृति में भिन्न-भिन्न संस्कारों का प्रार्दुभाव हो रहा है और जिस तरह से प्रतिभा पुरूषार्थी अवसरों के आभाव में दम तोडने पर मजबूर है। ऐसे में कलफती आशा-आकांक्षायें बैवस मजबूर है अपने समृद्ध खुशहाल जीवन के भविष्य को लेकर। ये अलग बात है कि सत्ताओं की अपनी कोशिशे है और सत्ताओं के मातहतों के अपने प्रयास। मगर परिणामों का आभाव यह स्पष्ट करने काफी है कि पुरूषार्थ पूरे मनोयोग से नहीं हो पा रहा है। बेहतर हो सत्ता, संस्थायें बेहतर समन्वय के साथ अपने निष्ठापूर्ण कत्र्तव्यों का निर्वहन सामूहिक तौर पर करने में सक्षम-सफल साबित हो, जिससे पीडित वंचित प्रतिभा और आशा-आकांक्षायें अपने सामर्थ अनुसार पुरूषार्थ का प्रदर्शन कर अपना योगदान समृद्ध खुशहाल समाज और राष्ट्र निर्माण में दे सके, आज यहीं समझने वाली बात होनी चाहिए।  

सृजन में, शान्ति संहार भारतीय संस्कृति, संस्कार, सामर्थ का मूल आधार है मानव धर्म की रक्षा सबसे बडा कर्म विश्व समुदाय की चुप्पी मानवता के साथ अन्याय स्वार्थवत र्दुदान्त दुस्साहियों को सबक समय की दरकार

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   भारतवर्ष का सामर्थ अनादिकाल से पुरूषार्थ मानव धर्म की रक्षा के लिए प्रमाणिक रहा है फिर कीमत कत्र्तव्य मार्ग पर जो भी रही हो। अगर यों कहे कि भारतीय संस्कृति, संस्कार सृजन में शान्ति संहार संरक्षण का मूल आधार रहा है तो कोई अति संयोक्ति न होगी। जिसके एक तरफ जहां शान्तिपुंज तो दूसरी ओर संहार करने का सामर्थ मानव धर्म की रक्षा के लिए हमेशा कटिबद्ध रहा है जो भारतीय संस्कृति की विरासत भी है और उसका सामर्थ भी। आज जब एक मर्तवा फिर से मानव धर्म पर हमला हुआ है ऐसे में इंसानित और मानव कल्याण में विश्वास रखने वाले हर मानव का कत्र्तव्य हो जाता है कि मानवता की रक्षा के लिए वह अपना पुरूषार्थ कर अपने मानव धर्म का पालन करें।  अगर गत दिनों की घटना जिसमें कई वीर सैनिकों की शहादत इस कोरोनाकाल के महासंकट के दौरान अपने कत्र्तव्य निर्वहन के दौरान हुई वह भी स्वार्थवत र्दुदान्त दुस्साहसी मानसिकता के चलते यह समूचे विश्व की मानवता के लिए खतरनाक है। जिस पर कोरोना से पीडित समूचे विश्व मानव जगत को संज्ञान अवश्य लेना चाहिए। क्योंकि जिन स्वार्थाे के लिए आज ...

कोरोनाकाल में माल काटते मातहत मनमाने ढंग से आवाद हुई शराब दुकानें

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   जिस तरह के दावे म.प्र. के शिवपुरी जिले में गत दिनों आबकारी महकमें द्वारा किये गये थे विभागीय शराब दुकान संचालन में वह सबके सब धरासाई नजर आ रहे है। अपुष्ट सूत्रों की माने तो जिस तरह से सोशल डिस्टेंस और कोरोना से बचाव के दिशा-निर्देशों को दरकिनार कर शासकीय दुकानों का संचालन किया जा रहा है वह काबिले गौर है। मगर कहते है कि जब विभाग ही अपनी जबावदेही से आंखे बंद कर लें, तो फिर सही गलत देखने वालों को अपनी आंखे बंद कर लेना ही उचित कहा जाता है। जिस तरह की चर्चाऐं निर्धारित दरों सें अधिक दर पर अघोषित रूप से शराब बिक्री जारी है उसे देखकर लगता है कि सरकारी खजाना भले ही खाली बना रहे। मगर लोगों की जेब खाली नहीं रहना चाहिए। देखना होगा कि आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के नाक के नीचे विगत दिनों से चल रहे शराब के तथाकथित इस काले कारोबार पर वह कब विराम लग पाता है। 

मानवता के र्दुदांत दुश्मनों के खिलाफ आत्मरक्षार्थ तैयारी के साथ विश्व समुदाय को भी आगाह करना अहम चीन के दुसाहस को स्पष्ट संदेश की दरकार

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   भारतीय विरासत और संस्कृति अनुसार भारतवर्ष का आचार-विचार, संस्कार तथा आचरण, व्यवहार हमेशा से सिर्फ भारतवर्ष के परिपेक्ष में ही नहीं बल्कि समूचे विश्व जगत की मानवता की रक्षा और कल्याण का रहा है। आज जब खबरों के अनुसार चीन से निकल समूचे विश्व की मानवता पर कोरोना कहर बनकर टूट रहा है ऐसे में कोरोना के कहर से हलाक मानवता के खिलाफ चीनी सेना का दुस्साहस संघर्ष करते जीवंत और बैवस मानवता के खिलाफ एक जघन्य कृत्य और अक्षम्य अपराध है फिर कारण जो भी रहे हो। ऐसे में विवाद के बहाने भारतीय सैनिकों से चीनी सैनिकों का बगैर हथियार संघर्ष और सैनिकों की शहादतें समूचे विश्व की मानवता पर हमला है। जिसका संज्ञान कोरोना के कहर से हलाक व मानवता में विश्वास रखने वाले समूचे विश्व जगत ही नहीं अन्य राष्ट्रों को भी लेना चाहिए। साथ ही संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्था को भी कोरोनाकाल में ऐसे राष्ट्र को भी स्पष्ट संदेश देना चाहिए जो खतरें में पडी विश्व की मानवता को दरकिनार कर अपने स्वार्थपूर्ण मंसूबों को अंजाम देना चाहते है। क्योंकि जिस तरह से समूचा विश्व मानव कल्याण और मा...

जीवन से जूझती मानव सभ्यता कत्र्तव्य विमुखता की कीमत चुकाता समृद्ध समाज कृतज्ञता हुई कलंकित

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जिस तरह से कोरोनाकाल महासंकट के दौरान मानवीय जीवन नष्ट होने पर बैवस मजबूर है और आये दिन विश्वभर ही नहीं भारतवर्ष में कोरोना से संक्रमित तथा कोरोना से मरने वालों की संख्या के आंकडे आये दिन नित-नये ढंग से मुखातिब हो रहे है इनका भविष्य और परिणाम क्या होगा यह भी फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। मगर संभावनाओं का क्या, जो बढती संक्रमितों की संख्या और मरने वाले लोगों के आंकडो को लेकर चमकदार संस्कृति को मुंह चिढाने में कतई संकोच नहीं करते। जिस तरह का भय कोरोना को लेकर लोगों के बीच व्याप्त होता जा रहा है उसने मानव विकास की जडे हिलाकर रख दी है। इतना ही नहीं जिस तरह से आये दिन प्राकृतिक आपदाओं, भूंकप, तूफान की आहटें हो रही है उसने मानव जीवन को भले ही अभी भी यह सोचने पर मजबूर न किया हो कि आखिर उसकी कृतज्ञता में कहां कमी रह गई या फिर कत्र्तव्य विमुखता का अंबार ऐसा लगा कि अब कत्र्तव्य निर्वहन भी कोरोनाकाल में अपंगों की भांति बैवस जान पडता है। मगर कहते है कि अशिक्षित और स्वयं की संस्कृति से दूर मानव स्वभाव का आचरण व्यवहार कितना क्रूर हो सकता है वह कोरोना ...

लोकतंत्र में प्रतिभाओं को निगलती गिरोहबंद संस्कृति सुशांत की मौत पर सत्य की चुप्पी बाॅलीवुड ही नहीं, राजनीति अर्थ, शिक्षा, समाज, सेवा कल्याण, विकास, सभी तो गिरोहबंद संस्कृति का शिकार है

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   फिल्म स्टार कलाकार सुशांत की मौत का सच जो भी हो। मगर जिस तरह की संकायें उनके परिवारजन मित्रों द्वारा उनकी मौत को लेकर व्यक्त की जा रही है उनसे साफ है कि कहीं न कहीं लोकतंत्र में घर कर चुकी गिरोहबंद संस्कृति अब इतनी कुख्यात-विख्यात होती जा रही है कि वह अब लोगों के जुबान तक आने में संकोच नहीं करती।  ये अलग बात है कि आज इस दंश से बाॅलीबुड ही नहीं राजनीति अर्थ और समाज, विज्ञान, सेवा, कल्याण, विकास, शिक्षा के क्षेत्रों में भी इस तथाकथित गिरोहबंद संस्कृति ने अपनी गहरी जडे जमा कर रखी है। अगर हम बाॅलीबुड की बात करें तो सुशांत की मौत पर खडे सवाल कोई नये नहीं। इससे पूर्व भी कई मामले ऐसे आते रहे है भले ही उनका पुष्ट प्रमाण न हो। इतना ही नहीं राजनैतिक क्षेत्रों में भी या अर्थ-जगत सहित समाज और विज्ञान के क्षेत्र में भी कमतर ऐसे ही हालात है। आज जो लोग गिरोहबंद हो अपनी समृद्धि खुशहाली के बल स्वयं को स्थापित किये हुये है। उनके भी कई मर्तवा ऐसे उदाहरण आम देखे गये है। अगर आज हम देखे तो चाहे वह उद्योग जगत हो राजनैतिक दल या फिर विज्ञान के क्षेत्...

कोरोनाकाल में ताल ठोकती युवाओं की टोली दोनो ही प्रमुख राजनैतिक दलों से खिन्न है युवा

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 विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   जिस तरह से प्रमुख राजनैतिक दल कांग्रेस भाजपा उपचुनाव की तैयारियांें में जुटे है उसे देखकर लगता है कि अपनी-अपनी जीत सुनिश्चित करने में न तो कांग्रेस और न ही भाजपा कोई कोर-कसर छोडना चाहते है। मगर अन्दर खाने की खबर यह है कि कुछ युवाओं की टोली ताल ठोक यह कमर कसने में जुट गई है कि जो दल 70 वर्ष में लोगों का सेवा कल्याण से दूर रख उनकी नैसर्गिक जरूरतों और श्रोतों का सुरक्षित नहीं रख पाईं, उन्हें अगर आने वाले उपचुनाव में जीत हार जो भी मिले उसके बावजूद भी वह क्या सेवा और क्या कल्याण कर पायेंगी। प्रचार-प्रसार से दूर युवाओं की टोली ने नाम न छापने की शर्त पर आत्मविश्वास से भरे अंदाज में कहा कि कोई कितना ही जोर लगा लें, हमारी कोशिश होगी कि इस उपचुनाव में दोनों ही प्रमुख राजनैतिक दलों से यक्ष सवाल अवश्य हो, उन्होंने कहा कि हमारे गांव-गांव में कुएंे, तालाब सूख चुके है जो हमारे जीवोत्पार्जन के प्रमुख श्रोत थे, तो वहीं दूसरी ओर पत्थर और रेत माफियाओं ने जंगल और नदियों का कलेजा छल्ली कर उन्हें बर्बादी के कगार तक पहुंचा दिया, न तो इन 70 वर्षो में युवाओं को सम्म...

कोरोनाकाल में जीत की कवायत तेज थोकबंद कार्यो की स्वीकृतियों पर उठते सवाल

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जब से कांग्रेस सरकार की विदाई और भाजपा सत्ता में आई है तब से उपचुनाव को लेकर समूचा जिला प्रशासन शिवपुरी एलर्ट-मोड पर है। फिर वह मलाईदार विभाग हो या सेवाकल्याण से जुडे विभाग, सभी दूर स्वीकृति प्राकलंन और सेवाकल्याण की होच-पोच मची ह, तो वहीं दूसरी ओर राजनैतिक दल भी ऐडी चोटी का जोर लगा अपनी-अपनी जीत सुनिश्चित करने में जुटे है। ऐसे में अपने रोजमर्रा के कामों के लिये भटकते आम गरीब लोग इस बात को लेकर हैरान है कि इस कोरोना महासंकट के बीच लोगों की जिन्दियां बचाना महत्वपूर्ण है या सत्ता को बचाना। जिस तरह से शिवपुरी जिले में चोटी के अधिकारी आजकल अपने माननीयों की आओभगत में जुटे है उसे देखकर नहीं लगता कि कोरोना जैसा महासंकट भी इस जिले में है। 

कोरोनाकाल के निर्धारित मापदण्डों से इतर आबकारी विभाग ने शुरू की शराब दुकानें

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जब से शराब दुकानें लाॅकडाउन के बाद खोली गई है यूं तो तभी से सोशल डिस्टेंस और कोरोना से बचाव के मापदण्डों को दरकिनार कर दुकानें संचालित होती रही है। इस बीच निर्धारित दर से अधिक पर बिक्री शिकायतें भी उपभोक्ताओं की रही। मगर जिस मनमाने अंदाज में आबकारी महकमा मैदान में है उसे लेकर क्रिया-प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। देखना होगा कि आबकारी महकमा इतनी तल्ख उठने वाले सवालों पर कब लगाम लगा पाता है फिलहाल तो नाके-बराबर कर्मचारियों के माध्यम से लगभग 11 दुकानें संचालित किये जाने की चर्चा आम है, तो वहीं शराब माफिया द्वारा खुलेआम शराब उपलब्ध कराने की चर्चाऐं भी सरगर्म है। 

राजस्व उजाड में जुटा आबकारी महकमा शासकीय राजस्व हुआ निढाल

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  म.प्र. भोपाल। ये अलग बात है कि म.प्र. के शिवपुरी जिले में ठेकेदार द्वारा ठेका छोडने पश्चात पुनः जिले की 33 समूह के निष्पादन का कार्य अभी भी प्रचलित हो। मगर जिस तरह से पूर्व निर्धारित दर से 20 प्रतिशत कम की दर पर दुकानें बांटी जा रही है। भले ही वह एक निर्धारित प्रक्रिया के अधीन हो, जिसमें सात दिवस की व्यवस्था ठेका चलाने उसके बाद ई-टेडरिंग प्रक्रिया की व्यवस्था की गई हो। मगर आनन-फानन में शासन द्वारा जिस तरह से 9 माह पुराने जिला आबकारी अधिकारी को हटा नये जिला आबकारी अधिकारी को शिवपुरी स्थानानांतरित किया गया उसकों लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।  जानकारी के आभाव में अगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो यह तब्दीली सत्ताधारी दल के किसी नेता के इशारे पर की गई है जब यथास्थिति जानने आज जब विलेज टाइम्स ने जिला आबकारी अधिकारी से यथास्थिति जानने सम्पर्क करना चाहा, तो सम्पर्क के आभाव में सूत्रों ने बताया कि आनन-फानन में जिस तरह से शासन के राजस्व को पलीता लगाने की तैयारी गुपचुप तरीके से की जा रही है। अगर योजना कामयाब रही तो शासन को करोडो की चपत लगना तय है। बहरहाल सच क्...

चुनाव चन्दा पार्टी..........तीरंदाज ?

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व्ही.एस.भुल्ले भैया- चुनावों की आहट में मने भी क्यों न एक चुनाव चन्दा पार्टी बना लूं और हाथों-हाथ टिकट बांट टैक्नोलाॅजी की मदद से थोकबंद रैलियां कर डालू। बैसे भी कहते है कि विपक्ष विहीन लोकतंत्र अपंग-सा लगता है। अगर लोकतंत्र मजबूत होने के साथ म्हारी पार्टी भी मजबूत हो, तो सत्ता सिंहासन तक पहुंच मने भी एक मदमुग्ध अंतरमुखी परमानन्दियों की टोली बना डालू और मौजूद पीढी ही नहीं आने वाली अपनी पीढी को समृद्ध खुशहाल बना डालू।  भैये- पहले अपना काला-पीला चिन्दी पन्ना तो चला लें, कोई समझे न समझे थारे स्वराज को कम से कम अपना परलोक न सही इस लोक में तो अपना जीवन समृद्ध खुशहाल बना लें। रही पार्टी-वार्टी की बात, कै थारे को मालूम कोणी म्हारे आयोग में थोकबंद पार्टियों की अस्थियां भरी पडी है। जो कुछ दिये की तरह टिमटिममारही है वो सिम जा रही है उनकी भी फिलहाल घिग्गी बंधी पडी है। कई महानुभावों की तो सुबह से शाम तक हवा फूंकने के बाद भी जनमानस के बीच घुग्गी तक नहीं बज रही है।  भैया- घुग्गा-घुग्गी छोड मने तो तने साफ-साफ बता कि म्हारी पार्टी भी म्हारे लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत कै गठित हो जायेगी और...

व्यापाम से कलंकित प्रदेश में 12वीं परीक्षा क्रूर सोच की पराकाष्ठा

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  कोरोना के कहर के बीच व्यापाम से कलंकित प्रदेश में 12वीं की परीक्षा भले ही शुरू हो, खत्म हो जायेगी। मगर क्रूर सोच की पराकाष्ठा का परिणाम सिद्ध करने परीक्षा कराने का निर्णय काफी है। हो सकता है कि निर्णयकर्ताओं के लिये यह गर्व और गौरव की बात भविष्य में साबित हो, जो वह कोरोनाकाल में कोरोना से बचने घरों में बैठे परीक्षार्थियों को निकालने में कामयाब रहे। हो सकता है कि परीक्षा निर्णय के पीछे निर्णयकर्ताओं की अपनी सार्थक सोच हो। मगर जिस तरह से कोरोनाकाल में नौनिहालों को परीक्षा केन्द्रों तक पहुंचाने जो जोखिम लिया गया है वह कितना सार्थक सिद्ध होगा यह तो फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। मगर जो तारीख कोरोनाकाल में परीक्षा कराने को लेकर लिखी गई है इतिहास उसे किस रूप में लेगा यह तो आने वाला समय ही तय करेगा। 

जंगली प्रवृति में तब्दील होता मानव जीवन, मानवता के लिए घातक बैवसी की लूट पर समाज और शासन की चुप्पी खतरनाक

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। यह सही है कि जिस संस्कृति को हमने समृद्धि खुशहाली की शान मान अपनी महान संस्कृति और विधान को त्याग अंगीकार किया। आज उसी कलंकित संस्कृति ने मानवीय जीवन को जंगली प्रवृति में तब्दील कर दिया। जहां जीवन का आधार किसी र्निबल के जीवन पर निर्भर होता है अर्थात जहां जिन्दा रहने हिंसक ही नहीं, बल्कि अहिंसक तौर पर जाने पहचाने वाले जीव भी अपने से कमजोर बैवस जीव का भखक्षण करने में पीछे नहीं रहते। हालिया प्रमाण कोरोनाकाल में जरूरत की चीजों पर हर स्तर पर जिस तरह से आदमखोर लूट व्यक्ति ने व्यक्ति की आर्थिक तौर पर की वह किसी भी सभ्य समाज को शर्मसार करने काफी है। जिस तरह से कोरोनाकाल में लोगों ने व्यापार के नाम जरूरत की चीजों को मुहैया कराने के नाम आपस में ही एक-दूसरे को आर्थिक तौर पर लूटा वह सभी के सामने है। बैवस सत्तायें भी सिर्फ आदेश-निर्देश निकालने तक ही सीमित रही। क्योंकि जिस तरह की लूट बैवसी के चलते शुरू हुई वह रोकी जा सकती थी मगर मौजूद सिस्टम में यह असंभव भी था। सो गली से लेकर गांव और गांव से लेकर बाजार तक आपस के ही चिरपरिचितों ने निर्धारित दर से अधिक दर ...

जिस सत्ता संस्थाओं में बौद्धिक तथा शासन में संपदा चोर हो ऐसे स्थान पर समृद्धि खुशहाली असंभव सृजन में समृद्धि और खुशहाली तभी संभव है जब स्वच्छंद वातावरण में प्रतिभा प्रदर्शन और पुरूषार्थ सिद्धि के मार्ग सहज और सरल हो

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  आज जब समृद्ध खुशहाल विरासत के उत्तराधिकारियों के बीच समृद्धि खुशहाली को लेकर आत्मनिर्भरता की बात चर्चाओं में प्रबल है और जिसके लिए लोग संकल्पित और प्रतिबद्ध है उसकी सिद्धता तभी संभव है जब हर नागरिक सत्ता संस्थायें और समाज यह सुनिश्चित करने में सफल हो कि सत्ता संस्था में बौद्धिक और शासन में संपदा चोरी असंभव हो तथा प्रतिभाओं को प्रदर्शन के अवसर सहज सुलभ हो तभी खुशहाल समृद्ध मानव समाज और राष्ट्र की कल्पना की जा सकती है।  ये अलग बात है कि हालिया संघीय सत्ता द्वारा मौजूदा सिस्टम के बीच बडे पैमाने पर अवसर उपलब्ध कराने की घोषणा की है और उस दिशा में वह ऐडी-चोटी का जोर लगा पूरी निष्ठा ईमानदारी के साथ प्रयासरत भी है। मगर सबसे बडी बाधा मौजूदा सिस्टम और उस पीढी की है जो नैसर्गिक स्वभाव अनुसार प्रतिभा प्रदर्शन में बाधक की भूमिका में है। मगर गर्व और गौरव करने वाली बात यह है कि मौजूदा सत्ता समूचे राष्ट्र में एक ऐसा वातारण निर्माण करने में अवश्य कामयाब रही है जहां से प्रतिभायें पंख फहला आसमान छूने का मन बना रही है। मगर जिस शिक्षा, सिस्टम और प्रशिक...

स्वराज ने माना उत्तरप्रदेश सरकार का आभार

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  गौवंश हत्या रोकने के लिए उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा लिए गये निर्णय पर स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस. भुल्ले ने उत्तरप्रदेश सरकार के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है तथा यह अपेक्षा भी की है कि कानून के क्रियान्वयन के साथ गौवंश संरक्षण सम्बर्धन के साथ सृजन में गौवंश की विरासत अनुसार महत्वता सिद्ध हो। साथ ही उत्तरप्रदेश सरकार कोई ऐसी सार्थक योजना गौ-संवर्धन के मार्ग में सिद्ध करें जिससे मानवीय जीवन और गौवंश के बीच एक सार्थक संबंध स्थापित होने के साथ कल्याण और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में उसकी सिद्धता स्पर्शी और प्रमाणिक हो। 

म.प्र.: विवेकहीन निर्णय और बेरहम सवाल 9 जून से 12वीं की परीक्षा

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   लगभग 90 फीसद जिलों में पैर पसार नौ हजार के पार कोरोना संक्रमितों के रहते परीक्षा लेने का पुरूषार्थ इतिहास में भले ही एक तारीख के रूप में दर्ज हो। मगर बेरहम सवालों का क्या जो साये की तरह सत्ता से अवश्य यह सवाल करते रहेंगे कि उन मासूमों का गुनाह क्या जो म.ंप्र में कोरोना की उठती लपटों के बीच परीक्षा देने बैवस मजबूर है। आखिर परीक्षा देने वाले भी तो किसी के लाल कलेजे के टुकडे और आंखों के तारे है। हो सकता है कि उनके माँ-बाप की बेजुबान बैवसी लाचार हो, या फिर मजबूर। मगर सेवक सरकार में यह विवेकहीन षडयंत्रपूर्ण निर्णय किसका सामर्थ और किसका पुरूषार्थ है यह तो सत्ता के मुखिया ही जाने। मगर इस निर्णय को लेकर जो आक्रोश आम लोगों में देखने सुनने मिल रहा है और जिस तरह से सोशल मीडिया पर इस निर्णय की आलोचना हो रही है उससे स्पष्ट है कि संवेदनशील सरकार का यह निर्णय कोरोनाकाल में कतई सराहनीय नहीं कहा जा सकता। बेहतर हो कि सत्ता के मुखिया इस निर्णय पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर एक ऐसा स्वीकार्य निर्णय दें, जो प्रदेश के भविष्य के लिये सार्थक और सराहनीय कहा जाय...

उपचुनाव में आसान न होगी, प्रमुख सियासी दलों की जीत कोरोनाकाल में आमजन के सवाल

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जिस तरह से बगैर किसी शोर-शरावे के उपचुनाव की सुगबुहाहट सुन युवाओं के जत्थे सियासत में सक्रिय हो रहे है और वह भी खासकर प्रमुख राजनैतिक दल भाजपा, कांग्रेस जैसे दलों से इतर उसे देखकर नहीं लगता कि प्रमुख राजनैतिक दलों का उपचुनाव में रास्ता इतना आसान रहने वाला। जिस तरह से लोगों ने सोशक और पोशक शब्दों को आधार बना व सेवा कल्याण के नाम स्वयं के स्वार्थ सिद्ध करने वाले दलों के खिलाफ अभियान छेडने का क्रम शुरू किया है उसको जबरदस्त समर्थन मिलने की चर्चाऐं सियासी गलियारों में आजकल सरगर्म है। युवाओं की टोली जिस तरह से मानवीय सरोकारों के साथ लोगों तक अपनी बात पहुंचा और सियासी दलों की पोल खोलने में लगी है उसका भविष्य क्या होगा यह तो फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। मगर युवाओं की टोली का जुनून अगर परवान चढा तो सियासी दलों का रास्ता उतना आसान नहीं होगा जितना वह मानकर चल रहे है। चींटी की चाल और सियासत का हाल का नारा फिलहाल तो चर्चाओं में सरगर्म है। देखना होगा कि चींटी की चाल का नारा परवान चढेगा या सत्ता, संसाधन और सियासत से समृद्ध लोगों का कारवां आगे बढेगा।...

जान-जहान से संतुलन बैठाती मानवीय सभ्यता लाखों में दर्ज संक्रमितों के आंकडे खतरनाक

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जान-जहान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बीच बढते कोरोना संक्रमितों के आंकडे भले ही खतरनाक हो, मगर वर्तमान का सत्य यहीं है। कहते है कि अगर निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन का मार्ग मौजूद संस्कृति से दूर न हुआ होता तो जहान बचाने के चक्कर जान को जोखिम में नहीं डालना पडता। कहते है कि सत्य को वह सिद्ध कान ही सुन पाते है और वह सिद्ध मस्ष्तिक ही समझ पाते है मगर जब-जब जिस-जिस कालखण्ड में सत्य सुनने और समझने वालों का आभाव रहा उस सभ्यता को विनाश का मुंह अवश्य देखना पडा। बात सिस्टम और संसाधनों की नहीं बात है निष्ठापूर्ण जबावदेह कत्र्तव्य निर्वहन की। जिसकी अपेक्षा समृद्धि और खुशहाल जीवन को हर उस व्यवस्था के अंग से होती है जिसका अस्तित्व मानवीय जीवन की सुरक्षा पर निर्भर करता है। कोरोना जैसे महासंकट का भी समाधान सहज हो सकता था मगर लगता है कि सत्य को सुनने समझने वालों का इस महासंकट में भी अकाल-सा है। बरना यह सत्य है कि जीवन को जीवोत्पार्जन के साधन और जीवन में संस्कारों के निष्ठापूर्ण निर्वहन की आवश्यकता होती है जो किसी भी काल में जीवन को सुरक्षित रखने सि...

विज्ञान से राजनीति और बेजान सेवा कल्याण क्रूरता के बीच कोरोना की जंग कैसे बने सुरक्षित समृद्ध, खुशहाल, जीवन और कौन करे भारतवर्ष निर्माण

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जिस जीवंत भूभाग, राष्ट्र, समाज, परिवार, व्यक्ति की चेतन्य शक्ति अचेत हो और महत्वकांक्षी अहम, अहंकारी, स्वार्थवत स्वकल्याण में डूब स्वार्थवत लोगों के गिरोह, गैंग, सेवा कल्याण की ध्वजा थाम सम्राट बनने विज्ञान के रथ पर निकल जाये उस जीवंत भूभाग को अपनी सुरक्षा समृद्धि, खुशहाली की कोई बडी उम्मीद नहीं रखना चाहिए। खासकर तब की स्थिति जब विज्ञान से राजनीति और सिस्टम से सेवा कल्याण का भाव हो तथा सत्ता सियासत का व्यवहारिक सरोकार सार्थक न हो।  काश आर्य पुत्र धृतराष्ट्र ने अपनी पत्नि और हस्तनापुर की महारानी घंधानदारी की सलाह पर वर्तमान का अंधा पुत्रमोह त्याग इतिहास का मान-सम्मान रखा होता और वर्तमान की बजाये भविष्य की चिन्ता की होती तब आज हस्तनापुर का विनाश न हुआ था। ये अलग बात है कि आज चेहरे, स्वरूप, आचरण, व्यवहार, सत्ता, सियासत, समाज, परिवार, व्यक्ति के भिन्न-भिन्न हो सकते है। मगर स्वभाग लगभग महाभारत के पात्रों जैसे ही जान पडते है। अब ऐसे में कैसे तो सुरक्षित, समृद्ध, खुशहाल जीवन होगा और कौन सशक्त, समृद्ध भारतवर्ष का निर्माण करेगा फिलहाल भविष्...

विवेकहीनता की पराकाष्ठा नैतिकता को नौच उसे र्निवस्त करने पर आमदा, निकम्मा निर्णय शर्मनाक कृत्य पर सवाल करती संस्कृति नौनिहालों के जीवन से क्रूर मजाक

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  महान तपस्वनी, देवी अहिल्याबाई की महान कर्मस्थली मालवा में विश्व कन्याओं के हौम से उठी आग की ज्वाला की लपटों से भले ही असुर प्रवृति संहार केे शूल से झुलसने के बाद ज्वाला शान्त होने की जुगत में हो। मगर जिस तरह से कोरोना के कहर ने मालवा की कमर तोड रखी है वह किसी से छिपी नहीं। मगर मदमुग्ध अंतरमुखी परमानन्दियों का अहंकार आज जिस तरह से सर चढकर बोल रहा है वह आज की पीढी खासकर युवाओं को और विद्यवान सहित राष्ट्र व मानवतावादियों को समझने वाली बात होनी चाहिए। जिस तरह से दसवी-बारहवीं की शेष परीक्षा के नाम युवा पीढी की जान से खिलबाड की कोशिश हो रही है वह खतरनाक ही नहीं, किसी भी मानवीय समुदाय के साथ खिलबाड है।  आखिर कोई भी सत्ता इतनी क्रूर विवेकहीन, बेशर्म, लापरवाह कैसे हो सकती है। सेवा, कल्याण, सुरक्षा, विकास के नाम क्रूरतापूर्ण, विवेकहीन निर्णय खासकर दसवीं, बारहवीं शेष परीक्षा लिया जाना उसका प्रमाण है जो ऐसे निर्णयों को प्रमाणिक रूप से सिद्ध करने काफी है।  वातानुकूलित कार्यस्थल या घरों में दुबक कत्र्तव्य विमुखता की प्रमाणिक मिशाल अपने निर...

अन-लाॅकडाउन का वीभत्स स्वरूप को देख दंग है मानवीय जीवन और निराश है जीवन मूल्य

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  यह सही है कि जान और जहान के संघर्ष में आज समूची मानव सभ्यता जिस मुकाम पर खडी है वहां से निदान फिलहाल कोसो दूर नजर नहीं आता है। मगर सजगता, जागरूकता और कत्र्तव्य निर्वहन की प्रसांगिक प्रमाणिकता ही जीवन में सिर्फ एक शेष मार्ग है। जिससे मानवीय जीवन को संरक्षित कर सुरक्षित किया जा सकता है। मगर यह तभी संभव है जब सत्तायें अपना-अपना सत्तामोह त्याग इस परीक्षा की घडी में दल के रूप में मौजूद दप्तक पुत्र की महत्वकांक्षाओं की परवाह किये बगैर अपने-अपने राजधर्म का पालन करंे, नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब दो लाख के करीब जा पहुंचा संक्रमितों का बढता आंकडा बेकाबू हो जाये और अहम अहंकारी सत्ताओं की महत्वकांक्षाओं का महल ताश के पत्तों की तरह धरासायी हो जाये। जो न तो मानव जीवन के हित में है और न ही समृद्ध खुशहाल विरासत के हित में।  जय स्वराज

राजधर्म की दरकार वेलगाम स्वतंत्रता बर्बादी को न्यौता

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जिस तरह से पांचवा लाॅकडाउन के शुरू होते-होते कोरोना संक्रमितों की संख्या में इजाफा हो रहा है वह चिन्ताजनक ही कहा जायेगा। अगर राजधर्म का पालन नहीं हुआ तो इसके खतरनाक परिणाम हो सकते है। जिस तरह से कोरोनाकाल में बैवसी के चलते आजादी, अधिकार सर चढकर बोल रहे है और कत्र्तव्यनिष्ठा मौन रह तमाशा देखने में जुटी है वह मानवीय जीवन के लिये शुभसंकेत कतई नहीं माने जा सकते। इसलिये जरूरत आज सत्ता और सत्ताधीशोे को मोह त्याग धर्म की रक्षा और न्याय की स्थापना के लिये अपना निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन करने की है। जीवन मूल्यों की बिना पर आजाद स्वतंत्रता की कीमत कहीं मानव सभ्यता को इतनी मंहगी न पड जाये कि उसमें सुधार ही संभव न हो सके। समयकाल परिस्थिति अनुसार भूल-चूक होना स्वभाविक है और यह मानव का नैसर्गिक गुण भी। मगर सत्ताओं को सर्वोच्च और पूज्यनीय स्थान किसी भी व्यवस्था में इसलिये प्राप्त है कि वह धर्म और न्याय के लिये हमेशा तूफानों के आगे चट्टान बनकर खडी रहती है। अभी भी वक्त है कि सत्तायें आंखे खोल अपने अहंकार, जुनून को त्याग मानव जीवन की रक्षा और धर्म की स...

मदमुग्ध परमानन्दियों के महाकुंभ में, पाप मुक्त माफिया..........तीरंदाज ?

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व्ही.एस भुल्ले भैया- जब समूची मानवता और विश्व मुंए कोरेाना के कहर से कांप रहा है और म्हारा विज्ञान समृद्ध होने के बावजूद भी कोई समाधान नहीं ढूंढ पा रहा है। ऐसे में थारे को मदमुग्ध अंतरमुखी परमानन्दियों तथा सेवा कल्याण की वेदी पर हौम करने खडा माफिया दिख रहा है। कै थारे को मालूम कोणी मने तो 30 वर्षो के सेवा कल्याण का ऐसा कायाल हुआ हूं कि म्हारा मन बोले मने भी मदमुग्ध परमानन्दियों के महाकुंभ में जा स्नान कर माफिया मण्डलेश्वरों से हाथो-हाथ दीक्षा ले आऊं और मने भी कोरोनाकाल में भरे माफिया महाकुंभ में पाप धो, अपना अलग अखाडा जमा ऊंची और अलग ध्वजा फहराऊं।  भैये- मुंए चुपकर कोरोनाकाल में सेवा कल्याण और मानवता बचाने की बात कर, माफिया नाम तो शिक्षा स्वास्थ्य बन पानी, रशद, खनिज, भू, शराब, सत्ता-सियासत में प्रचलित है। जहां नैतिक-अनैतिक तरीके से मानवीय प्राकृतिक संपदा जनधन से लूट की कहावत प्रचलित है। मने तो बोल्यू कि अगर बात प्रमाण की न हो तो सभी महान क्षेत्रों में माफियाराज का उघगम स्थल सेवा कल्याण में ही निहित है। अमृत का आनंद भोगते बडे-बडे सियासी मण्डलेश्वर संत, सत्ता, सियासत अब तो माफियाओ...