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Showing posts from November, 2018

- प्रचंड जनादेश या जनाक्रोश - 3 फीसदी मतों में छिपे यक्ष सवाल - आयोग का कारवां कामयाब, खराब बीबी,पेडो ने बिगाड़ी फिजा - स्वच्छ शान्तिपूर्ण व्यवस्थित मतदान की हुई सराहना - रिकार्ड वोटिंग के बीच 74.85 प्रतिशत मतदान - 5 करोड़ कुल वोटरों में से 3 करोड़ 77 हजार ने ही डाले वोट - महिलाओं के मतदान में 2.72 प्रतिशत का इजाफा

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। प्रचंड मतदान के बीच भले ही अपने-अपने पक्ष में हवा बनाने यक्ष सवालों से इतर सुनियोजित मुद्दों को मुख्य भूमिका में लाने की कोशिश निर्वाचन के दौरान करोड़ों फूंक होती रही हो। मगर जनता का दर्द सस्ती सृजनात्मक शिक्षा, सहज स्वास्थ सेवा, शुद्ध पेयजल, रोजगार, जीवोत्पार्जन के संसाधन और विषबेल बन चुका भ्रष्टाचार ही बना रहा। जिसकी चर्चा शोर-सरावे से दूर भ्रामक प्रचार से दूर बनी रही। अब जबकि मतदान हो चुका है। ऐसे में कयासों का बाजार कम नहीं। यूं तो भारतीय लोकतंत्र में संभावनाओ का बाजार हमेशा से समृद्ध रहा है। मगर लगभग पौने 3 फीसदी के करीब बड़े मतदान में छिपे यक्ष सवाल फिलहाल बाजार गर्म किए हुए है।   ये अलग बात है कि 11 दिसम्बर को आने वाले परिणामों में संभावनाओं का सच सभी के सामने होगा। मगर 2018 के प्रचंड मतदान की संभावनाऐं अगर सुनामी साबित हो, तो किसी को अति संयोक्ति नहीं होनी चाहिए। क्योंकि आधे से अधिक सस्ते राशन, शिक्षा, स्वास्थ, शुद्ध पेयजल, अल्परक्त और बेरोजगारी के शिकार लोगों की पीड़ा और आम जन का गुस्सा जीवोत्पार्जन को लेकर चर्मोत्कर्स पर देख...

निर्वाचन आयोग की व्यवस्थाऐं हुई चाक-चैबंद, 6 हजार जवान सुरक्षा में तैनात

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी। जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा पत्रकारवार्ता आयोजित कर, आयोग की व्यवस्थाओं के संबंध में पत्रकारों को विषतृत जानकारी दी। साथ ही पुलिस अधीक्षक ने भी सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि 6 हजार सुरक्षाकर्मियों को निष्पक्ष, शान्तिपूर्ण मतदान के लिए तैनात किया गया है। इसके अलावा तकनीकी तौर पर भी सुरक्षा व्यवस्था को इतना मजबूत किया गया है कि 30 सैंकेंड में ही उन्हें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी होने पर सूचना मिल जाएगी और हमारा सिस्टम तत्काल हरकत में होगा।  अन्त में पत्रकारों से भी जिला निर्वाचन अधिकारी ने आवश्यक सहयोग की अपील की। जिससे निष्पक्ष, शान्तिपूर्ण मतदान संपन्न हो सके। 

जाति, धन, बल की ध्वजा, पताकाओं के बीच सिसकता लोकतंत्र जीत के मुगालतों के बीच अप्रत्याशित परिणामों की संभावना

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। असंकित, उपेक्षित, आक्रोश के बीच लहराती जाति, धन, बल की ध्वजा, पताकाओं के बीच भले ही आज लोकतंत्र सिसकने पर मजबूर हो और अहम अहंकार का डंका सरेयाम बज रहा हो। मगर अप्रत्याशित परिणामों की आशंका यह समझने काफी है कि जीत का मुगालता पालने वालों के मुगालते 11 दिसम्बर को धरासायी नजर आए, तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।  क्योंकि सूचना क्रान्ति के दौर में जिस तेजी के साथ आम जन के बीच जागृति बढ़ी है उसने सत्ता भोगी लोगों की सारी पोल खोलकर रख दी है। देखा जाए तो झूठे, चरित्र, ऐश्वर्य का डंका ठोकने वालो को अब जनता बखूबी समझने लगी है। इसलिए आम जन के बीच जिस तरह से सत्ता उन्नमुख तथाकथित गिरोहबंद ,मंडलियों, दल, संगठन, संगठनों को वह पहचान टीका-टिप्पणी कर रही है वह बड़ी ही चैकाने वाली है।  ऐसे में इतना तो तय है कि आम मतदाता का रूक किसके पक्ष में रहता है। यह तो 11 दिसम्बर को ही पता लगेगा। मगर जिस तरह का जनआक्रोश चर्चाओं के बीच है वह उन प्रत्याशियों के पक्ष में कतई नहीं। जो सेवा भाव को दरकिनार कर, स्वयं सेवा का मंसूबा पाले बैठे है।  जय स्वराज

किसका हो, राज तिलक समय सक्षम, समर्थ प्रत्याशी चुनने का 28 नवम्बर का मतदान तय करेगा समृद्धि, खुशहाली

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  कहते है कि जब कोई व्यक्ति, संस्था, संगठन, दल, स्वच्छ, सर्वकल्याणकारी नीति, विचार, सिद्धान्त, सेवा कल्याण को दरकिनार कर, सत्ता नीति में जुट जाते है। तो ऐसे में उनकी दुर्गति होना स्वाभाविक है। र्दुगति तो उन विधा, विद्ववान, संवाद, सूचना तंत्रों की भी होती है। जो लोकतंत्र के महाकुंभ चुनाव के वक्त लोकतंत्र की मालिक जनता द्वारा 5 वर्ष के लिए सेवा कल्याण के लिए सच्चे और अच्छे सेवाभावी प्रत्याशियों को चुनती है। ऐसे में उस महान जनता की आशा-आकांक्षाओं के ताबूत बैठ सत्ता उन्नमुख, स्वार्थवत राजनीति के इशारे पर सस्ती सृजनपूर्ण शिक्षा, सहज स्वास्थ सेवा, शुद्ध पेयजल, रोजगार, समृद्धि, खुशहाली, सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों को दरकिनार कर, भ्रमपूर्ण बेसुरा डोल बजाती है। कर्ज सूतखोरी तो बैसे भी अनादिकाल से किसी भी सभ्य समाज में या व्यवस्था में अच्छी आदत नहीं मा नी जाती और  दरिद्रता हमेशा अस्वीकार रही है।  ऐसे में साढ़े 7 करोड़ की जनसंख्या वाले प्रदेश पर लगभग 2 लाख 15 हजार करोड़ के लगभग कर्ज आधे से अधिक आबादी सस्ते राशन, सुविधा, खादय, बीज, पानी, डीजल,...

अलग अंदाज में दिखे अमित शाह, काॅग्रेस पर जमकर बरसे प्रचंड जीत का आव्हन

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। करैरा, पोहरी भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में शिवपुरी के नरवर में सभा करने आए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुछ अलग अंदाज में दिखे और काॅग्रेस पर जमकर बरसे। प्रचंड जीत का आव्हन उपस्थित जनसमूह से करते हुए जहां उन्होंने काॅग्रेस की नाकामियों को गिनाया। वहीं दूसरी ओर उन्होंने भाजपा की मोदी, शिवराज सरकार उपलब्धियों को विस्तार से बताया।  सभा को केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने सम्बोधित करते हुए कहा कि मोदी और शिवराज सरकार जन व राष्ट्र, सेवा कल्याण के कार्य में जुटी है। समृद्ध म.प्र बनाने के लिए आप लोग भी अपना योगदान 28 नवम्बर को भाजपा को अपना मत देकर  दें। इस मौके पर अमित शाह को सुनने बड़ी संख्या में लोग सभा स्थल पर पहुंचे। कार्यक्रम से पूर्व पोहरी के प्रहलाद भारती भाजपा प्रत्याशी एवं करैरा भाजपा प्रत्याशी राजकुमार खटीक ने राष्ट्रीय अध्यक्ष व केन्द्रीय मंत्री का माल्यार्पण कर स्वागत किया।

नरवर में शाह करेगें सभा को सम्बोधित

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  म.प्र. शिवपुरी/नरवर । भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आज नरवर में भाजपा प्रत्याशी राजकुमार खटीक के पक्ष में सभा को सम्बोधित करने वाले है। जिसको लेकर भाजपा ने बड़े स्तर पर तैयारी की है। देखना होगा कि विभिन्न नामों से अपने प्रतिद्विंदी दल काॅग्रेस को नमाजने वाले अमित शाह नरवर में किन्न मुद्दों को लेकर काॅग्रेस पर बरसेगें। ज्ञात हो कि इस मौके पर उनके साथ केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर भी रहेगें।

तेज हुआ जनसंपर्क समर्थकों ने सम्हाली कमान अच्छे-सच्चे समर्पित, सेवाभावी, जनप्रतिनिधियों की दरकार

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी। जैसे-जैसे म.प्र. में मतदान की तारीख 28 नवम्बर नजदीक आ रही है कि बैसे-बैसे आका-आकांक्षाओं का सैलाब आम मतदाता के बीच सर चढ़कर बोलने लगा है। तो वहीं दूसरी ओर तेज जनसंपर्क के बीच अच्छे-सच्चे समर्पित, सेवाभावी प्रत्याशियों की तलाश तेज हो गई है। मगर अपने खुशहाल, समृद्ध, जीवन से जुड़े सवालों के साथ मतदान से पूर्व काफी सजग और जागरूक नजर आ रहा है।  तो वहीं निष्पक्ष चुनाव की मंशा के मद्देनजर शान्तिपूर्ण निर्वाचन के लिए, निर्वाचन आयोग ने अपनी व्यवस्थाऐं मुस्तैद कर दी है। साथ ही आयोग ने यह भी मंशा साफ कर दी है कि कर्मचारी अपने कार्य को पूरी मुस्तैदी के साथ करें। गड़बड़ी करने वालों को किसी भी हालत में वख्शा नहीं जायेगा। जहां निर्वाचन आयोग निष्पक्ष, शान्तिपूर्ण मतदान को लेकर गंभीर है, तो वहीं विभिन्न प्रत्याशियों के दल, समर्थक अघोषित रूप से कहीं जाति, धर्म तो कहींे प्रबंधन, प्रलोभन की ध्वजा-पताका लगा मैदानी जंग में किला फतह करने कूद पड़े है। मगर आम मतदाता जिस तरह से सृजनात्मक शिक्षा, सहज, स्वास्थ, सेवा, शुद्ध पेयजल, रोजगार को लेकर गंभीर है। उसे देखकर लगता...

5 वर्ष में, सत्तासीन सेवक हुए मालामाल, तो जनता हुई कंगाल 2 लाख 15 हजार करोड़ के कर्ज में डूबा प्रदेश सेवा कल्याण हुआ, बेहाल

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस प्रदेश पर 2 लाख 15 हजार करोड़ का कर्ज, आधे से अधिक आबादी सस्ते राशन, सृजनपूर्ण शिक्षा, सहज, स्वास्थ सेवा, शुद्ध पेयजल, रोजगार, संसाधनों की मोहताज के अलावा अल्परक्त कुपोषण की शिकार हो और गांव, गली, शहर की सड़कों पर अनयंत्रित अप्रशिक्षित हाथों में दौड़ते वाहन हो, बहुमूल्य, पशुधन, भूख, प्यास, सड़कों पर मौंत के शिकार हो, विकास के नाम बेरोजगार हाथ, रोजगार के लिए बेकार हो। ऐेसे में सत्तासीन सेवकों की आय में मात्र 5 वर्ष में अप्रत्याशित आय वृद्धि के आंकड़े इस बात के गवाह है कि अगर गांव, गली, नगर, शहरों के नये धन कुबेरों के आंकड़े खंगाले जाए तो शायद इन सेवकों के चैले-चपाटे समर्थकों की लंबी-चैड़ी फैरिस्त निकले तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।  फिलहाल तो म.प्र. सरकार के 28 मंत्रियों की लिस्ट में 23 मंत्रियों की आय वर्ष-2013 से 2018 तक अघोषित से लेकर घोषित आय में एक मंत्री जी की तो 1 हजार 239.76 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है। अगर ऐसे में प्रदेश पर 2 लाख 15 हजार करोड़ का कर्ज है तो जनता मालिक होकर भी कंगाल हो ली, लंबे-चैड़े कर्ज में दबी है और उसके 60 फीसदी युव...

माया को सुनने उमड़ा जन सैलाब भाजपा, काॅग्रेस के बहकावे में न आए: सुश्री मायावती

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विलेज टाइम्स टाइम्स समाचार सेवा। शिवपुरी स्थित गांधी मैदान में बासपा सुप्रीमों मायावती को सुनने सभा स्थल पर जबरदस्त जन सैलाब उमड़ा। बुजुर्ग यह कहते देखे गए कि स्व. इन्दिरा गांधी की सभा के बाद 30-35 वर्ष में पहली बार किसी नेता को सुनने इतनी बड़ी मात्रा में जन सैलाब देखा गया। लोगों का सुबह से ही गांधी पार्क पहुंचना शुरू हो गया और यह क्रम दोपहर 2 बजे तक लगातार जारी रहा। उपस्थित जन समूह को सम्बोधित करते हुए सुश्री मायावती ने कहा कि जन समुदाये को भाजपा, काॅग्रेस के घोषणा पत्र व मीडिया के झूठे सर्वे से सावधान रहना चाहिए और बासपा को मजबूत बनाना चाहिए।  क्योंकि देश में आर्थिक आरक्षण की लड़ाई बासपा लड़ रही है। नोटबंदी, जीएसटी से व्यापारी और गरीब को नुकसान हुआ है। हम काॅग्रेस के साथ सम्मानजनक गठबंधन चाहते थे। जो पार्टी के हित में था। मगर अब हम अकेले मैदान में है।

गौवंश से श्राफित भू-भाग कैसे बनेगा समृद्ध, खुशहाल

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस गौवंश ने पीढ़ी दर पीढ़ी समूचे जीव जगत सहित पर्यावरण, मानव, मनुष्य, हमारी पीढ़ियों सहित हमें स्वस्थ, संरक्षित, सम्र्बधित कर, हमारा कल्याण किया और अपने बच्चों के हक का पोष्टिक दूध हमारे हलक में डाल हमें स्वस्थ, समृद्ध बनाया। जिनकी सेवा स्वयं प्रभु कृष्ण ने कर लोगों को सेवा व समृद्ध जीवन का संदेश दिया। जिस गौवंश की नस्लों ने जिन गौमाताओं के लालों ने सर्दी, गर्मी, बरसात, दोपहर, रात की परवाह किए बगैर घास-फूस खाकर हमारे खेतों को हरा-भरा और हमारे शरीर को हस्ट-फुष्ट बना, हमें किसान, अन्नदाता होने का सम्मान दिलाया वह भी बगैर किसी सिकवा, शिकायत के आज हमने आखिर क्यों उन बेजुबान, मेहनतकस, पशुधन को प्रकृति, प्रदत्त उनका हक, उनकी संपत्ति, उनका चारा-पानी, उनकी चरनोई की भूमि से बेदखल कर तालाब, बाबड़ियों, पोखर, कुंओं को खत्म कर जिन्दा मरने छोड़, उनका जीवन संकट में डाल, दर-दर भटक, भूखे मरने छोड़ दिया।  आज उजड़ते पर्यावरण, घटते वन, सूखते कुंए, तालाब, पोखर शायद उन बेजुबानों का श्राफ ही है जिससे आसानी से मुक्त होना अब असंभव ही नहीं, नमुमकिन-सा जान पड़ता है। कित...

कोलारस, सहदौरा, सोनहर में दहाड़े-सिंह

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। मोदी जी ने देश से दलाली खत्म कर, विश्व में देश का मान-सम्मान बढ़ाया है। आज काॅग्रेस मोदी जी के राह का रोड़ा बन रही है। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी वीरेन्द्र रघुवंशी, राजकुमार खटीक के समर्थन में सभाऐं कर नरेन्द्र मोदी और शिवराज सिंह के हाथ मजबूत करने की बात कहीं। 

भ्रामक प्रचार, भाषण, घोषणा, वादों, प्रलोभनों से रहे सावधान

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से प्रदेश भर का जागरूक मतदाता सायलेन्ट मोड पर रहकर वोट मांगने वालों के भ्रामक प्रचार, भाषण, घोषणा, वादें, आश्वासन और प्रलोभन भरे वचन, दृष्टि पत्र, घोषणा पत्रों को देख-सुन रहा है। उसके चलते भले ही हार-जीत के आंकड़े साफ न हो। मगर अप्रत्याशित परिणाम अवश्यम भावी लगते है।  जिस तरह से मीडिया में अहम मुद्दे सृजनपूर्ण सस्ती शिक्षा, सहज स्वास्थ सेवा, शुद्ध पेयजल, मानव विकास, संसाधन, रोजगार जैसे मुद्दों को दरकिनार कर दलों के आपसी आरोप-प्रत्यारोप मंचों पर चल रहे है और तथाकथित मीडिया भी कत्र्तव्य विमुख हो, ऐसी खबरों समाचारों को भोले-भाले मतदाताओं के बीच डाल रहे है। उससे आम मतदाता को आज सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि अगर इस भ्रमपूर्ण माहौल में चूके तो फिर 5 साल का इंतजार अच्छे और सच्चे जनप्रतिनिधियों को चुनने करना होगा। इसलिए आम मतदाता का कत्र्तव्य ही नहीं, आज यह धर्म है कि वह अपने व अपने बच्चों के समृद्ध, सुरक्षित, खुशहाल, जीवन के लिए मतदान अवश्य करें। मगर सवाल-जबाव करने साथ सोच-समझकर न किसी के कहने से, न किसी प्रलोभन बस, सिर्फ और सिर्फ अप...

कोलारस, सहदौरा, सोनहर में दहाड़े-सिंह

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। मोदी जी ने देश से दलाली खत्म कर, विश्व में देश का मान-सम्मान बढ़ाया है। आज काॅग्रेस मोदी जी के राह का रोड़ा बन रही है। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी वीरेन्द्र रघुवंशी, राजकुमार खटीक के समर्थन में सभाऐं कर नरेन्द्र मोदी और शिवराज सिंह के हाथ मजबूत करने की बात कहीं। 

चुनाव आयोग की सख्ती से सनाके में सियासी दल

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह की मुश्तैदी चुनाव आयोग ने इस चुनाव के मद्देनजर दिखाई है उसके चलते सियासी दल फिलहाल सनाके में है। चुन-चुन कर सियासी दलों के नारे सार्वजनिक संपतियों से मिटाने तथा विभिन्न फिलाइंग स्काॅटों के माध्यम से नजर रख निर्धारित रूपए से अधिक रूपए ले जाने तथा राजनैतिक कार्यक्रमों में शासकीय कर्मियों की सहभागिता के चलते निर्वाचन आयोग द्वारा सख्त कार्यवाहियों को अंजाम दिया जा रहा है। जिसने एक लंबे अर्स बाद पूर्व चुनाव आयुक्त टी.एन.सेशन के कार्यकाल की याद ताजा कर दी है। जो आजकल जबरदस्त जनचर्चाओं का विषय बना हुआ है।  देखना होगा कि निर्वाचन के दौरान आयोग और क्या ऐसे कदम उठा निर्भीक, निष्पक्ष चुनाव हो सकें, उसके लिए क्या कदम उठाता है। 

मिलकर सत्ता की मलाई लूटने वालों से खिन्न, आम मतदाता मुखर मतदाताओं का मिजाज भारी पड़ सकता है, जीत के मुगालतों पर परिणाम होगा अहम मुद्दा

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार   12 दिसम्बर को आने वाले चुनावी परिणामों में हार-जीत जिसकी भी हो, मगर चुनावों में परिणाम ही अहम मुद्दा रहने वाले है। अगर जनचर्चाओं की माने तो आम मतदाता का सर्वाधिक रोष मिलकर सत्ता की मलाई काटने वालों के खिलाफ है और मतदाता की मुखरता का अंदाजा उसके मिजाज को देखकर लगाया जा सकता है। जो जीत का मुगालता पाले बैठे लोगों की नींद उड़ाने तैयार दिखता है।  मतदाताओं के बीच जिस तरह की जागरूकता का संचार इस चुनाव में देखने मिल रहा है शायद इससे पूर्व के चुनावों में देखने मिला हो।परिणामों को मुहर पर उतावली मानसिकता इस बात की गवाह है कि जीत के लिए उतावले लोागों नेे प्रबंध कितने ही उमंदा क्यों न किए गए हो और कितना ही कूटनीतिक षड़यंत्र आम मतदाता को भोला-भाला समझ तैयार किया हो। मगर जनता के मिजाज से साफ है कि वह तमाम पीड़ाऐं भोगने के बाद अब वह यह समझने तैयार है कि उनकी जिन कमजोरियों का लाभ उठा। चुनावों में भाग्य अजमाने वाले लोग अपनी जीत सुनिश्चित मान लेते थे।  कई लोग तो यह कहते नहीं थकते कि जिस राजनीति पर कभी लोकतंत्र पर नाज था मगर आज की राजनीति के चलत...

सृजन-समाधान के बजाये, सत्ता, वोट की खातिर, जनधन की बर्बादी, सरल, शान्तिपूर्ण, समृद्ध, खुशहाल जीवन नहीं, अन्नत समस्या, अराजकता के संकेत

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। स्वयं सिद्ध, समर्थ, सार्थक, सफल, परिणाम मूलक सेवा कल्याणकारी, विकास उन्मुख साबित करने में असफल सत्ता, सरकारें जनप्रतिनिधि, सियासी दलों ने स्वयं के स्वार्थ सिद्ध, सफल करने सत्ता पाने, सरकार बनाने जिस तरह से वोट की खातिर आश्वासन, घोषणा, वचन पत्र, धेय, दृष्टि, घोषणा पत्रों के माध्यम से धन, बल, पैसे की दम पर तकनीक प्रचार, बल, बाहुबल के सहारे जो तैयारियां दिख रही है। 2018 के चुनावा में उससे न तो आम वोटर, मतदाता, नागरिक, गांव, गली, गरीब, किसान का जीवन सरल, शान्तिपूर्ण, समृद्ध, सृजनपूर्ण, सार्थक, खुशहाल बनने वाला है, न ही उनके बच्चों को सस्ती निःशुल्क, सृजनपूर्ण समर्थ, शिक्षा मिलने वाली है, न ही पर्याप्त रोजगार के साथ सस्ता शुद्ध पेयजल सेवा भावी सहज, सस्ती, स्वास्थ सेवा।  अगर चर्चाओं में मौजूद आंकड़ों को ही ले तो 80 करोड़ से अधिक सस्ते राशन वाले देश तथा 60 फीसदी से अधिक रोजगार के मोहताज युवाओं वाली व्यवस्था एवं 50 फीसदी अल्परक्त तथा कुपोषण के शिकार बच्चे, माताऐं है। इतना ही नहीं, अगर म.प्र. में प्रकाशित हो रहे चुनावी विज्ञापन को देखे, तो 2 करोड़ ...

चुनाव आते ही आम जन की पूछ परक बढ़ी

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से आजकल चुनाव में अपना-अपना भाग्य अजमा रहें प्रत्याशी सुबह होते ही वोट मांगने निकल पड़ते है। कोई पैर छूकर, तो कोई मुस्कुराकर, तो कोई नुक्कड़ सभा और जनसंपर्क कर अपना-अपना जनाधार बढ़ाने में लगे है। सभी को अपनी-अपनी सुनिश्चत जीत का भरोसा है, तो आम जन को कई प्रत्याशियों के बदले व्यवहार को देखकर अक्षमभाः हो रहा है। बड़े-बड़े आश्वासन, लंबे चैड़े वादे, सुन-सुन कर जागरूक मतदाता हदप्रद है। मगर जीत का मुगालता पालने वालों को कोई फर्क नहीं पड़ता। बड़े-बड़े विज्ञापन हैलीकाॅप्टरों से सभाऐं और लग्झरी वाहनों में फर्राटे भरते भाग्यविधाताओं के पास शायद 80 करोड़ के लगभग सस्ते राशन के मोहताज, सस्ती शिक्षा, स्वास्थ सेवा, स्वच्छ पेयजल एवं 60 फीसदी से अधिक रोजगार के मोहताज युवा व 50 फीसदी के आसपास अल्प रक्त के शिकार लोगों के संबंध में न तो किसी के पास कोई समाधान का वादा है और न ही अभी तक सुधार क्यों नहीं हो सका। इस सवाल का जबाव है।  जबकि हर एक जनप्रतिनिधि हर हालात में जीतना चाहता है और जीतने के बाद सेवा करना चाहता है। देखना होगा कि 28 नवम्बर मतदान के दिन आम मतदाता वोट मांगने व...

राष्ट्र-मानवतावादी, सामाजिक, सांस्कृतिक, सेवा भावी संगठनों का संरक्षण, सत्ता, सरकार ,परिषदों का राजधर्म

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। यूं तो व्यक्ति से व्यक्ति, परिवार से परिवार और समाज से समाज मिलकर राष्ट्र का निर्माण होता है। जिनका अस्तित्व राष्ट्र, मानवतावादी, सांस्कृतिक सामाजिक सेवाभावी संगठनों पर निर्भर होता है। जिनकी समृद्धि, कल्याण, सुरक्षा के लिए सत्तायें, सरकारें और परिषदें अस्तित्व में आती है। अब फिर व्यवस्थायें लोकतांत्रिक हो या फिर राजतांत्रिक। मगर जब सत्तायें, सरकारें, परिषदें अपने कत्र्तव्य निर्वहन व जबावदेही निभाने में अक्षम, असफल साबित होने लगे तो इसे दुर्भाग्य पूर्ण ही कहा जायेगा। बेहतर हो कि जब सत्ताये, सरकारें, परिषदें, अक्षम-असफल साबित हो ऐसे में नागरिकों की जबावदेही बढ़ जाती है। जिनके अस्तित्व पर राष्ट्रव समाज का अस्तित्व टिका होता है। बेहतर हो कि जहां नागरिक अपने कत्र्तव्य-जबावदेहियों का निर्वहन करें, तो वहीं सत्ता, सरकारें, परिषदें भी अपने राजधर्म को निभायें, तभी हम समृद्ध, खुशहाल, व्यवस्था बना तथा अपना व अपनी पीढ़ी का जीवन समृद्ध, खुशहाल बना पायेेगें और यह तभी संभव है कि जब हम लोकतंत्र के सबसे बड़े महाकुंभ निर्वाचन के दौरान अपना मताधिकार का उपयोग कर...

अहम मुद्दो से मुंह छिपाते सवाल-जबाव लोकतंत्र के महाकुंभ पर दलों का दुसाहस, शर्मनाक

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जब सत्ता सरकार परिषदों के चुनाव सर पर हो और जनप्रतिनिधि बनने प्रत्याशी जनता के दर पर हो, ऐसे में राष्ट्र, राष्ट्रीयता, आम जन, गांव, गली से जुड़े अहम मुद्दों से इतर व्यक्तिगत प्रतिष्ठा, ऊल-जुलूल बयानबाजी तथा जबाव के बजाए सवाल करने वालो की मंडली ने देश के लगभग 80 करोड़ सस्ते राशन, शिक्षा, स्वास्थ सेवा, शुद्ध पेयजल, की मोहताज आशा-आकांक्षाओं सहित 60 फीसद बेरोजगार युवा तथा 50 फीसद अल्परक्त के शिकार लोगों के भविष्य को दरकिनार कर आज चुनाव के वक्त सारा फोकस जीत हार पर केन्द्रित कर रहे है वह बड़ा ही शर्मनाक भी है, और दर्दनाक भी। मगर आम मतदाता को सबसे बड़ी समझने वाली बात यह है कि जो प्रत्याशी मुंह में मिश्री डाल, हाथ-जोड़ मुस्करा या पैर छीने के रिकार्ड बनाने में लगे है वह चुनाव जीतने के बाद कैसी सेवा और कैसा कल्याण करेगें यहीं यक्ष अहम सवाल आज सभी के सामने होना चाहिए। देखने वाली बात तो इस महाकुंभ में यह होगी कि आम मतदाता अपने व अपने बच्चों सहित प्रदेश-देश के समृद्ध, खुशहाल भविष्य के लिए भ्रामक प्रचार प्रलोभन, जाति, क्षेत्र, धर्म को दरकिनार कर कैसे अ...

राष्ट्र, जन-द्रोही सियासत लोकतंत्र को खतरा झूठे भाषण, भ्रामक प्रचार से पटा लोकतंत्र का चुनावी महाकुंभ सामर्थ, पुरूषार्थ की सिद्धता में प्रदर्शन नहीं, परिणाम अहम भ्रामक प्रसार-प्रसार के भंवर में फसी आशा-आकांक्षायें

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। आज जब लोकतंत्र के महाकुंभ में मतदान का समय है। तब आम गांव, गली, गरीब, बुद्धिजीवी, समर्थ, समृद्ध लोगों की समझदारी, जागरूकता ही बचा सकती है। इस महान लोकतंत्र को और आम जन जीव की स्वच्छंता, समृद्धि और खुशहाली को। क्योंकि जिस तरह से झूठे भ्रामक प्रचार-प्रसार, भाषण इत्यादि का तथा-कथित वोट कबाडृु मंडलियांे द्वारा उपयोग कर लोगों के वोट हासिल करने निकली है और ऐन-केन प्राकरेण जनप्रतिनिधि बन स्वयं को लोकतंत्र में आम जन का महामंडलेश्वर सिद्ध करना चाहती है। ऐसे में आम जन मतदाता, वोटर, गांव, गली में निवासरत हर युवा, बुजुर्ग, माता, बहिनों को जागरूक रहने की जरूत है कि कहीं ऐसा न हो, कि कोई स्वयं को लोकतंत्र के महामण्डेलश्वर का पात्र समझ, हमारा वोट हासिल कर, हमारा भाग्य-विधाता अगले 5 वर्ष के लिए न बन जाए। जिनका न तो जन, जीव, कल्याण, राष्ट्र सेवा विकास से कभी दूर-दूर तक का वास्ता रहा न ही, जिनका कोई सार्वजनिक रूप सेवा कल्याण में रहा। कहीं ऐसा न हो कि लोग हमारा बहुमूल्य वोट हासिल कर, खासकर ऐसे लोग जो स्वयं के स्वार्थ सिद्ध कर सेवा कल्याण के नाम सत्ता सुख भोगना...

अधर में आशा आकांक्षा मुद्दा विहीन मंच वोट लेने-देने तैयार

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अगर फर्स से लेकर अर्स तक पहुंचने की विरासत को विसार धन के फर्स पर अर्स तक कि पहुंचने की कहावत होते देखना है तो टिकट वितरणों की कला से देखा जा सकता है। मगर आज उन आशा-आकांक्षाओं का क्या होगा। जो वोट देने लेने तैयार मुद्दा विहीन मंच पर मातम मनाने मजबूर है। निश्चित ही विगत 3 दशक में जो दुश्वारियों उन आशा-आकाक्षांओं ने आश्वासन, भाषणों के भरोसे झेली है वह किसी से छिपी नहीं।  परिणाम सृजन विहीन शिक्षा, सेवा, संसाधन और मानव संसाधनहीन व्यवस्था के साथ रोजगार विहीन व्यवस्था हमारे बीच मौजूद है। कारण कि हम वर्षो से मुद्दा विहीन माहौल में वोट लेने-देने में ही मशगूल है। जो किसी भी स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए कलंक ही कहा जायेगा। जिस तरह से आज की सियासत सियासी दल धन, बल, जीत के मोहताज हो। आशा-आकांक्षाओं को तिलांजली दें। विचार सिद्धान्तों को दरकिनार कर सत्ता हथियाने सत्ता पाने उतावले है। उससे साफ जाहिर है कि 80 फीसदी सस्ते राशन के मोहताज 50 फीसदी अल्परक्त, कुपोषण के शिकार और 60 फीसदी युवा पीढ़ी के सपने आज भी उनके लिए दूर की कोणी है। भले ही आज लोकतंत...

हजारों वर्ष की त्याग तपस्या को तिलांजली देते लोग

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। समृद्ध, खुशहाल जीवन के लिए हजारों वर्ष की त्याग-तपस्या संधारित संस्कृति, सिद्धान्त, संस्कारों की ऐसी दुर्दशा होगी किसी ने सपने में भी न सोचा होगा। जहां तक सेवा कल्याण शान्ति सदभाव, समरसता को साक्षी मान समृद्ध, खुशहाल जीवन का खाका खींचा गया। वहीं आज सेवा कल्याण के नाम स्वयं स्वार्थ सिद्धि में तब्दील है। मगर यक्ष सवाल आज यह है कि समुचा जीव-जगत जहां अपनी संस्कृति, सुसंस्कृत, सुरक्षित, सरंक्षित रखने में कामयाब है। ऐसे में मानव का अपनी संस्कृति, सभ्यता, संस्कारों से विमुख होना उसके अस्तित्व पर सवाल करने काफी है।  आखिर कब हम अपने अक्स को पहचान अपनी प्रमाणिकता सुनिश्चित कर पायेगें। कब हम अपनी जबावेदही, उत्तरदायित्व समझ अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन निष्ठापूर्ण कर पायेगें। क्योंकि ईश्वर, अल्लाह, ईशू या अन्य धर्मो की सर्वोत्तम कृति, मानव कल्याण व जीव-जगत की सेवा है। अगर जीवन का यहीं मंत्र पथभ्रष्ट होगा तो प्रकृति में कैसे समृद्ध, खुशहाली  होगी। जो कि परमपिता की सर्वोत्तम कृति होने के साथ जीवन का सम्पूर्ण सत्य भी है।

जीत का मुगालता पालने वालो को मुश्किल होगी जीत

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अभी तो फिलहाल टिकट जाने पाने या गवाने वालो का दौड़ खत्म हुई है। मगर जीत का मुगालता तो सभी नामांकन जमा करने वाले प्रत्याशियों को है। कोई अपने दलों की सहमति से तो कुछ बागी है। तो कुछ निर्दलीय ही भाग्य आजमा रहे है। शिवपुरी की 5 विधानसभा शिवपुरी, पोहरी, करैरा, पिछोर, कोलारस पर गत चुनावों में शिवपुरी, पोहरी में भाजपा तो करैरा, पिछोर, कोलारस में काॅग्रेस का कब्जा था।  अब जहां 2018 के लिए नामांकन हो चुका है नामांकन वापसी पश्चात वोट डलना, परिणाम आना शेष है। ऐसे में भाग्य आजमा रहे लोगों के बीच कुछ सवाल होना तय है। जो परिणामों को हवा देने में अहम होगें। जैसे रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ, शुद्ध पेयजल और सेवा। जहां तक पोहरी का सवाल है तो यहां दो बार के भाजपा विधायक तीसरी मर्तवा मैदान में है तो उन्हीं के दल के दो बागी मैदान में है। वहीं सामाजिक समीकरण भी बगावती स्वर में है।  रहा सवाल शिवपुरी का तो यह सीट भी विगत 25 वर्षो से भाजपा की ही झोली में है। मगर इस मर्तवा काॅग्रेस ने बिल्कुल युवा प्रत्याशी उतार नया दाव खेला है। रहा सवाल करैरा, का तो यहां भी ...

संभावना की विसात पर अप्रत्याशित परिणामों का संदेह, रोचक हो सकता है मुकाबला

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सारे प्रायोजित मुद्दों को विसार जिस तरह से आम मतदाता के बीच सेवा कल्याण को लेकर आक्रोश व्याप्त है। इसका खुलासा तो 12 दिसंबर को ही हो सकेगा। मगर जिस तरह का उत्साह मतदान को लेकर गांव, गली, गरीब, मजबूर, किसान और वेतन भोगी कर्मचारियों के बीच जान पड़ता है उससे अप्रत्याशित परिणामों की संभावना काफी प्रबल होती जा रही है।  बगैर किसी लहर प्रायोजित मुद्दों से इतर जिस तरह से रोजगार सस्ती सृजनात्मक शिक्षा, स्वास्थ सेवा सहित सुशासन लोगों की चर्चा के केन्द्र में है उनके मद्देनजर किसी भी प्रकार के दावे प्रति दावे हास्यपद ही कहे जा सकते है। क्योंकि फिलहाल की स्थिति में आम मतदाता मतदान को लेकर उत्साहित तो है। मगर सायलेन्ट मोड पर है। देखना होगा प्रमाण, परिणाम, अनुभूति के बीच समृद्ध, खुशहाल जीवन की आशा-आकांक्षाओं के बीच 12 दिसंबर को सर्वाधिक मतदान किसके पक्ष या विपक्ष में नजर आता है।

असंभव हुई, सत्ता में आम नागरिक की भागीदारी सियासी झूठ, जनधन की लूट को सबक जरूरी मतदाता का वोट ला सकता है प्रदेश में समृद्धि, खुशहाली

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अगर हम अपना जनप्रतिनिधि चुनने या वोट देते वक्त बगैर झूठ को पहचाने सार्वजनिक संपदा व लोगों के हकों की लूट करने वालों की पहचान किए बिना जाति, धर्म, क्षेत्र या लालच या फिर किसी के कहने समझाने, भाषणों से भ्रमित हो वोट देते है वह भी बगैर सोचे-समझे तो हम स्वयं व अपने बच्चों के साथ अन्याय कर ऐसे लोगों को चुनते है। जिनके आचरण व्यवहार से हम सत्ता की भागीदारी तो गवा ही चुके है। साथ ही अपने व अपनों के समृद्ध, खुशहाल जीवन के मार्ग की भी बड़ी बाधा साबित हो रहे है। जो स्वयं के साथ तो अन्याय है ही साथ ही राष्ट्र, समाज के प्रति बड़ा ऐसा अपराध है जिसका दंश हम ही नहीं हमारी आने वाली पीढ़ी भी झेलने मजबूर होगी। क्योंकि जिस तरह से स्वस्थ लोकतंत्र की सियासत में सेवा कल्याण के नाम झूठ और लूट की संस्कृति पनप रही है। वह खतरनाक ही नहीं बड़ी घातक है। जिस तरह से 80 फीसद सस्ते राशन, स्वस्थ सेवा, शुद्ध पेयजल, सृजनात्मक शिक्षा, रोजगार के मोहताज लोग है व 50 फीसद अल्प रक्त से ग्रस्त कुपोषित लोग हमारे बीच है। वह किसी भी सभ्य समाज स्वस्थ लोकतंत्र के लिए दर्दनाक व शर्मनाक है। 60 फ...

वोट हासिल करने गांव, गली, भटकेगें प्रत्याशी क्या प्रबंध, भ्रामक प्रचार से मुक्त रहेगा मतदाता

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। मतदान किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का वह महत्वपूर्ण कार्य होता है। जिसमें आम नागरिक अपने अमूल्य मत का वोट के माध्यम से उपयोग कर अपने व अपनी आने वाली पीढ़ी सहित गांव, गली का जीवन समृद्ध, खुशहाल बनाने ऐसे प्रत्याशी को चुन सके। जो उसकी आशा-आकांक्षाओं पर खरा उतर अपने वोट के माध्यम से विधानसभा में ऐसी सरकार चुने जो सेवा कल्याणकारी होने के साथ कहने से अधिक करने में समर्थ सक्षम हो विकास कल्याण, सेवा के प्रमाण के साथ प्रमाणिकता सिद्ध करने में सफल हो।  मगर जीत के लिए योजना मुद्दा विहीन, धन, बल, प्रबंध, भ्रामक प्रचार-प्रसार, जातिगत, क्षेत्रीयता का झंडा बुलंद कर झूठ बोलने वालो का क्या ? क्या आम मतदाता ऐसे प्रत्याशियों का भ्रम दूर कर सच्चे-अच्छे सेवक प्रत्याशियों को चुनने में सफल होगा। यहीं यक्ष सवाल आज आम बुद्धिजीवी, राष्ट्र समाज सेवकों के साथ आम मतदाता के सामने होना चाहिए। क्योंकि मतदान ही लोकतंत्र की वह ताकत है जिससे लोकतंत्र मजबूत बनता है तथ समझ-बूझ सोच-समझ कर दिए मत से आम मतदाता का जीवन भी समृद्ध, खुशहाल बनता है इसलिए मतदान अवश्य करना चाहिए।

पोहरी, करैरा भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में हुई सभा

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। यूं तो सभा को सम्बोधित करने सरकार के मुखिया आए हुए थे। जिन्होंने विपक्ष के विरूद्ध जमकर कटाक्ष किए और सरकार की उन उपलब्धियों को तो गिनाया, कुछ आंकड़े गिनाए। मगर प्रमाणिकता पर सवाल अवश्य यक्ष रहे। जिनमें सस्ती सृजन पूर्ण शिक्षा, स्वास्थ, शुद्ध पेयजल सहित रोजगार की बात अनउतरित ही रही। देखना होगा कि मुखिया की सभाओं के माध्यम से जीत के लिए की गई मशक्कत क्या रंग लायेगी, यह देखने योग्य बात होगी। जबकि दोनों ही विधानसभा क्षेत्र में उन्हीं के सत्ताधारी दल के बागी प्रत्याशी फिलहाल मैदान मे है।

सरदर्द बनती सभाऐं

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। हालिया दौर में ऐन चुनाव से पूर्व चोटी के जननायक की सभा में जुटी भीड़ को लेकर चर्चाए बड़ी ही सरगर्म है। अगर संदेह पर यकीन करें तो सरदर्द है और हकीकत है तो यह शुभसंकेत नहीं। मगर सियासत का क्या ? जो अहम मुद्दों को विसार कर भी मुकाम तक पहुंचने की हामी रही है। देखना होगा कि अभी तो शुरूआत है आगे-आगे होता है क्या, यह समझने वाली बात है ?

वचन, घोषणाओं के भंवर में वोटर डेढ़ लाख हजार करोड़ का कर्ज भी नहीं बना सका खुशहाल, समृद्ध प्रदेश वोट कबाड़ू जननायकों के बीच सृजनात्मक, सस्ती शिक्षा, स्वास्थ, शुद्ध पेयजल और सामर्थ अनुसार रोजगार का मोहताज हुआ प्रदेश

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। चुनाव आते ही जिस तरह से गांव, गली में वोट कबाड़ने जननायकों की फौज कूद पड़ी है और वचन, घोषणा, क्षेत्र, जाति, सेवा कल्याण के नाम जीत सुनिश्चित करने में जुटी है। ऐसे में वचन, घोषाओं के भंवर कलफते वोटर का क्या जो विगत 70 वर्षो से अपने व अपनी आने वाली पीढी की आशा-आकांक्षा पूर्ति व समृद्ध, खुशहाल जीवन के लिए जननायकों को वोट देते आ रहे है और जननायक वोट लेते आ रहे है।  मगर 70 वर्ष बाद भी सृजनात्मक सस्ती शिक्षा, स्वास्थ, शुद्ध पेयजल और सामर्थ अनुसार रोजगार के मोहताज लोग आज भी अपनी आशा-आकांक्षा तथा समृद्ध, खुशहाल जीवन के नाम मातम मनाते नजर आते है। जिस प्रदेश ने विकास, सेवा कल्याण के नाम डेढ़ लाख हजार करोड़ से अधिक का कर्ज ले रखा हो। उस प्रदेश में बढ़ती आत्म हत्यायें, अपराध और समृद्ध, खुशहाल जीवन के लाले इस बात के स्पष्ट परिणाम है कि वोटर से अपनी-अपनी पसंद के जननायक चुनते वक्त अवश्य भूल हुई है। अब जबकि मतदान नजदीक है और भूल-सुधार का मौका भी तो ऐसे में आम वोटर पूरी सोच-समझ ऐसे जननायक ही चुने जो आशा-आकांक्षाओं पर खरे उतर उनका जीवन समृद्ध, खुशहाल बना पाए ...

परिदर्शिता के साथ प्रभावी परिणाम अहम अहम,अहंकार, नकारात्मक, निकम्मेपन से इतर, साहसी, सक्षम, सकारात्मक सोच से बनेगा समृद्ध समाज

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। केन्द्र व राज्य सरकार की कई महत्वकांक्षी योजना इसीलिए असफल, अक्षम साबित हो रही है क्योंकि परिणाम पारदर्शिता से इतर वह प्रचार-प्रसार के आंगन में ही दम तोड़ जाती है और उदघाटन, समापन की रस्म अदायेगी में उलझ अपने उद्देश्य से ही भटक जाती है। कारण अहम, अहंकार, निकम्मापन आड़े आ रहा है। तो दूसरी ओर साहसी, सेवाभावी सृजन में विश्वास रखने वालो की कमी इस मार्ग के कंटक बने हुए है। आज जब देश के प्रधानमंत्री युवा तरूणाई के बीच उस ऊर्जा को जगाने में सफल हो रहे है जो किसी भी राष्ट्र समाज के उत्थान में सबसे बड़ी बाधा या ताकत होती है।  ऐसे में प्रभावी प्रयासों का असफल होना अच्छे संकेत नहीं। मगर दुर्भाग्य कि आज हम लकीर के फकीर बन समय का रोना रोते है या संसाधनों के आभाव पर मातम मनाते है। रहा सवाल सत्ताओं का तो कोई 5 वर्ष तो कोई 10 वर्ष में परिणाम लाने के लिए कम मानते है जो सच नहीं। अगर हम वाक्य में ही हम प्रकृति पुत्र है और हमारे वह पुरूषार्थ है जिसके लिए हम परम-पिता परमात्मा की संतान भी स्वयं को कहने में संकोच नहीं करते देखा जाए तो जिस तरह से हमारी जननी, प्रकृति पलक झपकते ही...

भ्रम, झूठ और लूट की सियासत से सबक ले मतदाता कार्य सिद्ध और कल्याण को 5 नहीं 1 वर्ष बहुत होता है

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। आज बच्चों को सृजनात्मक शिक्षा, बेहतर स्वास्थ, युवा, कामगार बुजुर्गो के हाथ को रोजगार बहुत जरूरी है। जिससे हर गांव, गली में समृद्धि, सृजन के साथ खुशहाली का संचार हो सके। जिसके लिए 5 वर्ष नहीं सिर्फ 1 वर्ष ही पर्याप्त है। मगर अहम, अहंकार और जीवन पर्यन्त सत्ता सुख भोगने की सामंती सोच तथा सतत सत्ता में बने रहने की साम्राज्यवादी नीतियां आज लोकतंत्र में सबसे बड़ी बाधा है। क्योंकि भोले-भाले भावुक 80 फीसदी सस्ते राशन व 50 फीसदी के करीब सस्ती स्वास्थ सेवाओं शुद्ध पेयजल, के मोहताज तथा 50 फीसदी के लगभग अल्प रक्त की शिकार हमारी मातृ-शक्ति, इतने ही कुषोषण की मार झेलते लोगों को क्या पता कि लोकलुभावन नीतियां झूठे आश्वासन, भाषणों की भरमार तथा वोट हासिल करने की नई-नई कला, तकनीक ने उन्हें किस गर्त में पहुंचा, आर्थिक, सामाजिक गुलामी में धकेल दिया है। आज किस तरह से अपने गाड़े पसीने की जीवन भर की कमाई, जमीन जायात बेच, जिन बच्चों को मंहगे से मंहगी शिक्षा दिला धंधे रोजगार लायक बनाया था कि वह उनके बुढ़ापे की लाठी सहयोगी बनेगंें, न कि उन पर बोझ। आज वह रोजगार व संसाध...

पुरूषार्थ को लज्जित करती सत्ताओं की सार्थकता साहस, सृजन की शून्यता पर सवाल

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जब विज्ञान में एक कण कारण बन क्रिया उपरान्त सार्थक, प्रभावी, अकल्पनीय परिणाम दे सकता है। तो फिर समाज, राजनीति सत्तायें क्यों नहीं ? अगर हम अपनी महान संस्कृति को देखे तो सार्थक, प्रभावी परिणाम साफ दिखते है।  देखा जाए तो आज जिस तरह से माता-बहिनों द्वारा घर परिवार में निभाई जाने वाली जबावदेहियों को निभाने में जनप्रतिनिधि, सत्ता, संगठन, सरकारें अक्षम, असफल हो रही है वह कैसे सेवा कल्याण, विकास करेगीं ? आज यहीं यक्ष प्रश्न लोगों के सामने है कि आखिर क्यों हमारी सरकारें, हमारे जनप्रतिनिधि संगठन, सत्ताऐं, माता-बहिनों की जबावदेही निभाने में अक्षम असफल साबित हो रही है।  अगर भारतीय संस्कृति में झांगे तो परिवार की मुख्य मुखिया व्यवहारिक तौर पर होने के नाते घर की स्वच्छता, अनुशासन, समता, सुरक्षा और समृद्धि सहित सेवा कल्याण में शिक्षा, स्वास्थ पेयजल, रोशनी सहित बेहतर भविष्य, संसाधन जुटाने में अहम भूमिका के साथ सृजन में भी हमारी माता-बहिनों निष्ठापूर्ण अपना कत्र्तव्य निर्वहन कर विभिन्न जबावदेहियों में अपना हाथ बटाती है। मगर दुर्भाग्य कि हमारी सत्...

मार्गदर्शकों की उपेक्षा, पतन के संकेत

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से आजकल इस कलयुग में मार्गदर्शकों की उपेक्षा और स्वार्थवत लोगों का सम्मान का क्रम चल निकला उससे पतन के संकेत स्पष्ट दिखाई पड़ते है। कारण आज की व्यवस्था में स्वार्थवत लोगों का सक्षम, सफल होना इस बात का प्रमाण है कि अच्छे और सच्चे लोग संसाधनों एवं मानव विकास के आभाव में अक्षम, असफल साबित हो रहे है। आज राजनीति, समाज में जिसे सक्षमता, सफलता का तमगा मिल रहा है। निश्चित ही यह क्षणिक मात्र है, पूरा यथार्थ नहीं। जो आने वाले समय में असमर्थ भी होगा और असफल भी। जरूरत समझने की स्वयं स्वार्थ से निकल उस 60 फीसदी मतदाताओं को समझने की है। जो युवा है जिनमें सामर्थ भी है और पुरूषार्थ भी। क्योंकि बच्चे जहां अबोध है और युवा सपनों के सागर में हिचकोले ले रहे है तो बुजुर्ग सहयोग सेवा के मोहताज। ऐसे में स्वयं ही मार्गदर्शित हो, सच्चे, सक्षम प्रत्याशियों का चयन अपने मत के माध्यम से करना आम नागरिक की सार्थकता और सफलता है।  जय स्वराज 

समरथ को कहां, दोष गुसाईं समर्थ, असमर्थो के बीच झूलता लोकतंत्र

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व्ही.एस.भुल्ले अब ऐसे में नारा कोई वंशवाद, परिवार या विचारवाद का बुलंद कर अपनी छवि चमकाने कितना ही, जतन क्यों न करें। मगर सच यहीं है कि इस कलयुग में भी यह कहावत सच साबित हो रही है कि समरथ को कहां दोष गुसांई। आखिर तुलसीदास जी कितने पहुंचे हुए संत थे कि उसका अन्दाजा इसी बात से लगाया जा सकता है जो उन्होंने कलयुग में समर्थ लोगों और स्थिति को लेकर अपनी कल्पना का चित्रण किया था। जो आज भी हूबा-हू सच साबित हो रही है। भले ही आज हम एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में हो। मगर वो सच जो समाज और समर्थ व्यक्तियों के बारे स्पष्ट नजर आता है।   छोटे-मोटे दल, संगठन तो दूर बड़े-बड़े दल भी इस रोग से स्वयं को नहीं बचा सके। परिणाम कि 2018 में जिस तरह से बड़े से बड़ा दल अपना ज्ञान बांट, अपनी सार्थकता लोकतंत्र में सिद्ध करने परिवार, वंशवाद को बांटते घूमते थे आज टिकट वितरण में जिस तरह से परिवार, वंशवाद, धन, बाहुबल, जाति, धर्म, क्षेत्र को लेकर परिदृष्ट लोगों के सामने है। उससे स्पष्ट हो जाता है कि हमारे दल लोकतंत्र को लेकर कितने गंभीर है। शायद इस कटु सच को होने के नाते समझ पाए और और सेवा की सियासत के बहाने स...

मतदान से पूर्व प्रमाणिक परिणामों के साथ, पुख्ता प्लान भी पूछे मतदाता अच्छे प्रत्याशी ही बना सकते है समृद्ध, शिक्षित, स्वस्थ, खुशहाल जीवन

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है लोकतंत्र में मतदान ही वह महाकुंभ होता है जिसमें हम अपने मत का पूर्ण समझदारी, सावधानी के साथ उपयोग कर एक सच्चे और अच्छे प्रत्याशी जनसेवक को चुन अपना जीवन अपना जीवन समृद्ध, शिक्षित, स्वस्थ, खुशहाल बना सकते है तथा अपने बच्चों के सार्थक सपने उनकी आशा-आकांक्षाओं अनुरूप पूर्ण करने वाले जनप्रतिनिधि उस सत्ता तक पहुंचा सकते है। जहां नीति, नियम, कानूनों का निर्माण आम नागरिक के कल्याण व उसके विकास के लिए किया जाता है।  मगर यह तभी संभव है जब अपना अमूल्य मत, वोट देने से पूर्व वोट मांगने वालों से प्रमाणिक परिणामों के साथ उनसे प्लान तथा उनकी जनसेवा, कल्याण की योजना पूछे, ऐसे लोगों को पहचाने जो वोट मांगने चुनावों के दौरान सबसे सरल, सेवक, अच्छे नजर आते है और चुनाव पश्चात वोट देने वालों को भूल जाते है और वोट देने वाले भीड़ में धक्के खा, शासकीय कार्यालयों के दरवाजे छोटी-छोटी समस्याओं या अपने हक पाने, निष्ठा पूर्ण कत्र्तव्य निभाने गिड़गिड़ाते है। साथ ही ऐसे लोगों को भी पहचाने जो लालच, झूठे आश्वासन, धर्म, जाति या क्षेत्र के नाम वोट हासिल कर भोले-भाले ...

कृतज्ञता, पुरूषार्थ को लज्जित करते दल गोलबन्द, गिरोहों में तब्दील सियासत

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से सत्ता व खातिर की लोकतांत्रिक व्यवस्था में सेवा कल्याण के नाम कृतज्ञता, पुरूषार्थ को विसार जीत को अन्तिम लक्ष्य मान चुनावों में जीत सर्वोपरि हुई है। जिसके लिए दल अब गोलबंद गिरोहों की तरह पुरूषार्थ ही नहीं, कृतज्ञता को भी लज्जित करने पर तुले है। यूं तो लोकतंत्र में इसकी शुरूआत कोई नई नहीं, सेवा कल्याण के नाम यह  शुरूआत तो पहले से ही विरासत में अस्तित्व में है। फिर क्षेत्रीय दल क्या प्रादेशिक राष्ट्रीय दलों ने भी जीत को अपना अंतिम लक्ष्य बना लिया है। जिसके लिए वह अब न तो अपराध, अपराधी, भ्रष्टाचार से लेकर परिवार, वंशवाद, बाहुबली पर विश्वास जताने में भी संकोच नहीं कर रहे है। ऐसे में भले ही गांव, गली, गरीब, किसान, पीड़ित, वंचित, सस्ते राशन के मोहताज, कुपोषित, अल्पतरक्त, शुद्ध पेयजल की मोहताज आशा-आकांक्षाओं की मईयत निकले या फिर कृतज्ञता, पुरूषार्थ की मजार पर मातम हो। आखिर सत्ता और जीत के आगे नीति, सिद्धान्त, विचारों की परवाह किसवे। बैवसी, गरीबी आज रोती है। सक्षम, समरत होने के बावजूद जवानी निठल्ली सड़कों को घूमती है। पथरा गई वो आंखें...

आत्म बल खो , लोकतंत्र का धुआं उड़ाते दल* *सत्ता,स्वार्थ के लिए जीत बनी अहम

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* व्ही.एस.भुल्ले* *विलेज टाइम्स समाचार सेवा।* चुनावी मौकों पर बात विकास की हो या फिर राष्ट्रबाद की तब तो बात समझ आती है। मगर जब अघोषित तौर पर धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र स्थानीयता के साथ जीत का पैमाना सुनिश्चित हो तो स्वस्थ लोकतंत्र की बात अधूरी रह जाती है और सत्ता स्वार्थ में दल संगठनों की मंशा लोकतंत्र का धुआं उड़ाते साफ नजर आती है। अगर चर्चाओं की माने तो सत्ता के लिए जीत को सुनिश्चित करने टिकट बांटने से लेकर अकूत धन,तकनीक के बल छवि चमकाऊ संस्कृति के गिरोहबंद परिणाम किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जो भी हो, सत्ता जिसकी भी बने या रहे यह उस व्यवस्था की समृद्धि, खुशहाली के सपने देखने वालों का दीवाला निकलने के समान है। क्योंकि जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था में 80 फीसदी लोग सस्ते राशन के मोहताज 5 फीसदी अति स्वार्थी, महत्वकांक्षी और 15 फीसद लोगों का जीवन जिन्दा रहने संघर्षरत हो। ऐसे में जीत के आगे नीति सिद्धान्तों का होता आत्म बल इस बात के स्पष्ट संकेत है कि सेवा भाव कल्याण से अधिक सत्ता अहम हो गई है। जय स्वराज

दुख, दर्द की लाश पर मलाई काटते दल स्वार्थवत माहौल में कैसे बने सृजन, सेवाभावी, समृद्ध लोकतंत्र

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। किसी भी सशक्त, समृद्ध, सेवाभावी तंत्र में उम्मीद की जाती है कि लोगों की सेवा कल्याण समृद्धि का कार्य सुनिश्चित होगा। मगर जब गांव, गली, गरीब, किसान, पीड़ित, वंचितों के दुख, दर्द की लाश पर सियासत के सहारे सत्ता का मंत्र सिर्फ जीत हो। ऐसे में कैसे सशक्त, समृद्ध तंत्र स्थापित हो। मगर जब विश्व की सर्वोत्तम लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को सत्ता चुनने का अपने मत के माध्यम हक हो, ऐसे में हर नागरिक की जबावदेही होती है कि वह स्वयं ही नहीं, अपनी आने वाली पीढ़ी के समृद्ध, खुशहाल जीवन के लिए ऐसे जनप्रतिनिधि सत्ता, सरकारों को चुन, जो उनके सपने पूर्ण कर उनकी आशा-आकांक्षाओं पर खरे उतरे और एक सशक्त समृद्ध लोकतंत्र का मार्ग प्रस्त करें। मगर यह तभी संभव है जब हर एक मतदाता झूठे आश्वासन, लालच, जाति, धर्म, क्षेत्र के भ्रम जाल में न फस एक अच्छे और सच्चे सक्षम प्रत्याशी को चुने। तभी नागरिक की सफलता और सक्षमता इस महान लोकतंत्र के चुनाव के रूप में होने वाले महा यग में मानी जायेगी। जय स्वराज 

आत्म बल का, लोकतंत्र को धुआं उड़ाते दल सत्ता,स्वार्थ के लिए जीत बनी अहम

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  चुनावी मौकों पर बात विकास की हो या फिर राष्ट्रबाद की तब तो बात समझ आती है। मगर जब अघोषित तौर पर धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र स्थानीयता के साथ जीत का पैमाना सुनिश्चित हो तो स्वस्थ लोकतंत्र की बात अधूरी रह जाती है और सत्ता स्वार्थ में दल संगठनों की मंशा लोकतंत्र का धुआं उड़ाते साफ नजर आती है। अगर चर्चाओं की माने तो सत्ता के लिए जीत को सुनिश्चित करने टिकट बांटने से लेकर अकूत धन,तकनीक के बल छवि चमकाऊ संस्कृति के गिरोहबंद परिणाम किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जो भी हो, सत्ता जिसकी भी बने या रहे यह उस व्यवस्था की समृद्धि, खुशहाली के सपने देखने वालों का दीवाला निकलने के समान है। क्योंकि जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था में 80 फीसदी लोग सस्ते राशन के मोहताज 5 फीसदी अति स्वार्थी, महत्वकांक्षी और 15 फीसद लोगों का जीवन जिन्दा रहने संघर्षरत हो। ऐसे में जीत के आगे नीति सिद्धान्तों का होता आत्म बल इस बात के स्पष्ट संकेत है कि सेवा भाव कल्याण से अधिक सत्ता अहम हो गई है। जय स्वराज

निठल्ली होती, मानवशक्ति, कब जागोगे महान मतदाता 60 फीसदी जवान कौम, काम को मोहताज गड़बड़ाते पर्यावरण प्रबंधन के परिणाम सभ्य, सुसंस्कृत, समाज को घातक

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  सरकारी सम्पत्ति आपकी अपनी है, समय सोना है, इस बर्बाद न करें। जैसी कहावतें, कवि पढ़ने, सुनने मिलती थी। मगर जिस तरह से 60 फीसद मानव शक्ति निठल्ली बैठ अपनी आशा-आकांक्षाओं के लिए सक्षम होने के बावजूद काम के लिए मातम मनाती घूम रही है। इसे देखकर, सुनकर दर्द भी होता है और दुख भी। मगर यक्ष सवाल यहीं है कि आखिर लोग करे तो क्या करें। आखिर ऐसा कौन समझदार, सक्षम व्यक्ति है। जिसके पीछे ये कारवां सृजन के लिए चल पड़े।  मगर दुर्भाग्य कि आज अपने-अपने अहम, अहंकार के आगे न तो कोई कुछ सुनना, समझना चाहता है और न ही कुछ करना। हालात कुछ ऐसे है कि कुछ जिन्दा रहने की मजबूरी व अपने अपनो के सपने के लालच में कुछ करना, बोलना नहीं चाहते। कुछ ऐसे है जो सत्ता, सरकार, स्वार्थियों के रहमोकरम करना चाहते है। अब सवाल फिर कि इस कौम के लिए कर कौन। जब तथाकथित सत्ता, संस्थायें समाज सेवक अघोषित रूप से एक हो स्वयं स्वार्थ सिद्ध कर स्वयं के जीवन को सार्थक ही नहीं सुविधा युक्त ऐश्वर्यवान बनाने पर तुले हो। ऐसे में पर्यावरण प्रबन्धक और परिणामों पर विचार कौन करें। ऐसे में सबसे ब...

आत्म बल खो, लोकतंत्र को धुआं उड़ाते दल सत्ता,स्वार्थ के लिए जीत बनी अहम

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। चुनावी मौकों पर बात विकास की हो या फिर राष्ट्रबाद की तब तो बात समझ आती है। मगर जब अघोषित तौर पर धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र स्थानीयता के साथ जीत का पैमाना सुनिश्चित हो तो स्वस्थ लोकतंत्र की बात अधूरी रह जाती है और सत्ता स्वार्थ में दल संगठनों की मंशा लोकतंत्र का धुआं उड़ाते साफ नजर आती है। अगर चर्चाओं की माने तो सत्ता के लिए जीत को सुनिश्चित करने टिकट बांटने से लेकर अकूत धन,तकनीक के बल छवि चमकाऊ संस्कृति के गिरोहबंद परिणाम किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जो भी हो, सत्ता जिसकी भी बने या रहे यह उस व्यवस्था की समृद्धि, खुशहाली के सपने देखने वालों का दीवाला निकलने के समान है। क्योंकि जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था में 80 फीसदी लोग सस्ते राशन के मोहताज 5 फीसदी अति स्वार्थी, महत्वकांक्षी और 15 फीसद लोगों का जीवन जिन्दा रहने संघर्षरत हो। ऐसे में जीत के आगे नीति सिद्धान्तों का होता आत्म बल इस बात के स्पष्ट संकेत है कि सेवा भाव कल्याण से अधिक सत्ता अहम हो गई है। जय स्वराज

कठिन नहीं, सत्ता की डगर गुरिल्ला अंदाज में लड़ना होगा रण

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  आसन्न 4 राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान जो संदेश साफ है। उसके मद्देनजर काॅग्रेस की रणनीति में बदलाव जरूरी है। क्योंकि आज खासकर 3 राज्य राजस्थान, छत्तीसगढ़, म.प्र. में विरोधी दल जहां संगठन धन, सत्ताबल में मजबूत है। उसके मुकाबले काॅग्रेस उससे कोसो दूर है। ऐसे में काॅग्रेस अपनी रणनीत में बदलाव कर अपने सियासी चाड़क्य व स्वच्छ छवि के चमकदार नेताओं तथा व्यवहारिक तकनीक के साथ सटीक शुरूआत करती है तो परिणाम कुछ भी हो सकते है। मगर यह तभी संभव है जब काॅग्रेस आलाकमान सीधे संज्ञान ले और सीधे कमान संभाल स्वयं को साबित स्थापित करने एक नई शुरूआत करें। जरूरत पढ़े तो नये सहयोगी पदाधिकारी, प्रवक्ता, प्रबंधकों की सीधी नियुक्ति कर, समर में कूद सियासी आगाज करें। जरूरत पड़े तो स्वयं संचार माध्यम उपयोग मात्र 1 घंटे कर 3 राज्यों को जोड़े, जरूरत हो तो दौरे के दौरान उन्हें जुड़ने का आॅफर भी करें। अगर यह रणनीत कामयाब रही तो निश्चित ही काॅग्रेस के लिए यह सोने में सुहागा जैसी स्थिति होगी। 

सत्ता व जीत के आगे नतमस्तक दल सिद्धान्त, सेवा, कल्याण पर उठे सवाल

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जिस साॅशल इन्जीनियरिंग को अलाउद्दीन का चिराग समझ सियासी दल, संसाधनों का स-बल उपयोग कर लोकतंत्र में सत्ता सिंहासन हासिल करने कभी धु्रवीकरण का रास्ता इख्तियार करते है तो कभी भावनाओं का रास्ता। मगर वह शायद यह भूल जाते है कि अर्थ के बल पर वैभव, विलास मानव की सेवा कल्याण नहीं, बल्कि उसकी आने वाली पीढ़ियों तक को बर्बाद करने का मार्ग प्रस्त होता है।  कहते है अगर व्यक्ति, परिवार, समाज अहम,अहंकार भोग, विलास से मुक्त है। समाज में मौजूद विचार बाध्यकारी न होकर कल्याणकारी है तो वह अपनी उपायदेयता उपयोगिता सिद्ध करते है। साथ ही अपने अस्तित्व की रक्षा भी करते है। अन्यथा की स्थिति में वह घातक होने के साथ निरर्थक भी साबित होते है। मगर सबकुछ जानने के बावजूद जिस तरह से सत्ता हासिल करने का मार्ग लोकतंत्र में विचार, सिद्धान्त, संस्कार, संस्कृति को भुला ध्रुवीकरण पर सुनिश्चित हो रहा है। वह मानवीय आशा-आकांक्षा ही नहीं समृद्ध, खुशहाल राष्ट्र के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है। यह आज की स्थिति में समझने योग्य बात है। जो व्यक्ति, परिवार, समाज ही नहीं राष्ट्र के ल...

भ्रम के माहौल में, भाग्य विधाताओं की, पहचान आवश्यक

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  नीति, सिद्धान्त, विचारों को विसार जिस तरह से सत्ता के लिए साम, नाम, दण्ड, भेद की सियासत परवान चढ़ रही है। वह लोकतंत्र ही नहीं आम गांव, गली, गरीब, किसान, पीड़ित, वंचित या फिर साधन संपन्न लोगों के लिए शुभसंकेत नहीं। सेवा कल्याण विकास के नाम सत्ता हासिल करने जिस तरह से स्वार्थवत लोगो द्वारा संसाधनों के बल, भ्रम पूर्ण माहौल चुनावों के वक्त ही नहीं, नई-नई तकनीक के बल पूरे 5 वर्ष धनबल के सहारे तैयार किया जा जाता है। वह किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक ही नहीं, दर्दनाक भी है और शर्मनाक भी है।  भ्रमपूर्ण माहौल आम गांव, गली, गरीब, किसान, पीड़ित, वंचित के साथ धोखा ही नहीं अन्याय भी है। जो अपनी आशा-आकांक्षाओं की खातिर अपने सपनों को पूर्ण करने कई बार भ्रम, झूठ पर विश्वास कर लेते है। मगर दुर्भाग्य यह है कि वह स्वार्थवत, साधन संपन्न दल, संस्था, व्यक्तियों के आगे हमेशा असफल असमर्थ ही साबित हुए है। काश हमनें सच कोे पहचान अच्छे और सच्चे जनप्रतिनिधियों को चुना होता, तो दुख, दर्द का दंश हर चुनाव के बाद न झेलना पड़ता। जय स्वराज