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Showing posts from January, 2021

जीवन संरक्षण संबर्धन सुरक्षा का आकांक्षी होता है न कि बाधा बिवाद और अर्थहीन संघर्ष का

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सत्ता, सियासत , सामर्थ के एहसास पर उठते सबाल घातक प्रकृति बिरूद्ध सामर्थय का आचरण न कभी सफल रहा है न ही न ही रहेगा इतिहास गबाह है   व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  बर्तमान सियासी सत्तागत संस्थागत हालातो को देख सुन इस महान राष्ट्र के पुरूषार्थ सामर्थ को देख दुख भी होता है और दर्द भी होता है यकीनन यह हमारे महान राष्ट्र का न तो सामर्थ हो सकता न ही पुरूषार्थ क्योकि हमारी महान विरासत तो मानव जीव जगत पर्यावरण सहित समुची सृष्टि मे मौजूद जीवन के सर्बकल्याण की रही है जिसके लिये हमारे पूर्वजो ने एक से बढ़कर एक अनगिनत कुर्बानियाॅ दी है और मानव ही नही समुचे जीव जगत के कल्याण कि एक से बढ़कर एक मिशाले प्रस्तुत की है फिर कीमत जान से लेकर जो भी रही हो हमारे पूर्वजो ने रत्ती मात्र संकोच नही किया मगर आज जब हमारे द्वारा स्थापित सत्ता सियासत संस्थाओ का आचरण व्यवहार उनके कर्तव्य निर्वहन की अनुभूति लोक जन जीव कल्याण के विरूद्ध होती है और विधान की विधि की स्थति बैबस नजर आती तो सबाल होना तो स्वभाविक है श्रेष्ठ समृद्ध जीवन के लिये अवश्यक है कि जीवन का संरक्षण संबर्धन सुरक्षा हो न कि बैब...

तंत्र पर अंधविश्वास और अहंकार के आगे गिड़गिड़ाती समृद्धि

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व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  कहते है सत्ता को अहम अहंकारी न होकर सहज सर्बकल्याणकारी होना चाहिए जिससे मानव कल्याण का कार्य सहज रूप से हो सके और प्राक्रतिक समृद्धि का लाभ सभी को समान रूप से मिल सके मगर सिस्टम पर हमारे अंघ विश्वास और अहंम अहंकार के चलते प्रतिभाओ के पास ऐसा कोई आॅपसन मौका ही नही जो वह सर्बकल्याण मे अपनी अधभुत प्रतिभा का प्रदश्र्रन कर स्वयं को सिद्ध कर पाये अभावो मे खेलता बचपन और मुफलिसी मे कटती जवानी और उम्मीदो मे अन्तिम बिदा लेता बुढ़ापा आज की सत्ताओ के आगे भले ही कोई सबाल न हो मगर मानवता का तो तकाजा बनता ही है ये अलग बात है कि लोकतंत्र मे चुनाव और जीत ही अब अहम मुददा रह गया हो मगर समृद्धि का तकाजा तो मानवता पर बनता ही है आखिर क्या कारण है जो जीवन अपनी समृद्धि पर कुलाछे भर शेष जीवन को समृद्ध बना सकता था वह आज बैवस मजबूर है आखिर क्या बैबसी मजबूरी है हमारी जो हम सब कुछ होने के बाबजूद हम बैहाल बने हुये है आज यही सब को समझने बाली बात होना चाहिए । जय स्वराज ।   

हटो बचो के सेवा कल्याण से कंगाल हुआ विकास

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बैठको की बाढ़ से बैहाल हुआ मानव और कल्याण व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  कोरोना से एक बर्ष से बैहाल मानव और कल्याण का जीवन जैसै तैसै पटरी पकड़ ही रहा था कि हटो बचै के सेवा कल्याण से विकास कंगाल नजर आता है तो वही दूसरी ओर बैठको की बाढ़ से मानव जीवन बैहाल होता जा रहा है जिस विचार आज की जरूरत है क्योकि लोग बैहाल है सत्ता सियासत का लोकतंत्र मे धर्म है कि वह लोगो के जीवन को सुरक्षित समृद्ध खुशहाॅल बनाये जिसके लिये आप प्रयासरत भी है मगर परिणामो का अभाव इस बात का प्रमाण है कि सब कुछ ठीक नही चल रहा जिस तरह से हर विभाग मे धन का रोना मचा है विकास अवरूद्ध हो रहा है तो वही कभी बी सी तो कभी बैठको का दौर चल रहा है तो वही सियासत का कारबा मानव धर्म दर किनार नगरीय चुनावो मे जुट चुका है जिसके चलते सीधे लाभ पहुॅचाने बाली योजनाओ पर समुचा अमला मानो लग चुका है मगर चुनावी बैला पर शहीद होता मानवीय सरोकार आज बिलख रहा है जीत चुनाव के नशे मे चूर सेवा कल्याण भी कभी इतना निस्ठुर हो सकता है किसी ने कभी सपने मे भी न सोचा होगा मगर आज सभी को समझने बाली बात यह है कि दीन हीन आशा अकांक्षाये भी त...

दर्द का दंश, अब तो कुछ करो.............?

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व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  72 बर्षो के अथक परिश्रम और पूर्वजो के त्याग बलिदान संघर्ष पर हम आज भी कोई सबाल नही करेगे क्योकि हम संस्कारिक है हमारे पूर्वजो द्वारा अंगीकार विधान हमारी बिरासत है और हमारी पूर्ण आस्था हमारे संबिधान मे है मगर हम वंशानुगत परमार्थी ही नही पुरूषार्थी भी है हमारे सामर्थ की कोई प्रमाणिक सीमा नही जो दुनिया नही कर सकती उसे सहर्ष हम करने मे सक्षम है हमारे धैर्य की गहराई अथाय है जिसको कोई नही पा सकता इतिहास गबाह है ।  मगर माननीय श्रीमानो, माईबाप आप हमारे ही बीच से है आप हमारे अपने है आप मे हमारी निष्ठा है और पूर्ण विश्वास भी कि आप कभी हमारी आशा अकांक्षाओ की पूर्ति मे हमे कभी निराश नही करेगे पुरानी कहावत है अपना मारे छाये मे डारे पराया मारे घाम मे डारे सो अपकी निष्ठा कृतज्ञता मानव जीवन मे निष्ठ है आप पुरूसार्थी होने के साथ परिश्रमि भी है आप पर हमे गर्व है और आपकी सहृदयता पर हमारा कोई सबाल भी नही नही मगर दिल्ली ही नही जब तब आन्दोलनो के नाम जब सड़को पर हमारे विश्वाश आशा अकांक्षाओ सरेआम बलात्कार होता है और सिर्फ आप ही नही हम शर्मिदा होना पढ़ता ...

स्थापित सृजन सिद्धांतो की अनदेखी अनसुनी उसके स्वभाव विरूद्ध सरोकारो से सत्ता सियासत का व्यवहार तो सत्यानाश ता स्वभाविक है

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दिल्ली की सड़को पर मचा कोहराम शर्मनाक, मगर अस्वभाकि नही, अंगीकार किया है तो, विधि विधान मानना जबाबदेहो का मूल कर्म ही नही धर्म और मानव धर्म भी है  व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  विरोध के अधिकार को भुनाने अड़े अन्नदाताओ मौका क्या मिला गणतंत्र दिवस के ही दिन दिल्ली की सड़को कोहराम मच गया कोहराम मचाने वाले भी हमारे अपने ही थे जिन्होने न सिर्फ स्वयं की अहिंसक महान संस्कृति और पुरूषार्थ के इतिहास से पटे पड़े उस भूभाग को कलंकित करने का कार्य किया है जिसकी कीर्ति पर हजारों बर्ष बाद भी  हम स्वयं पर गर्ब कर गौरान्वित मेहसूस करते है और पूर्वजो के भव्य दिव्य जीवन को धर्म मान उन्है शुभ मोको पर याद करते है मगर जो नही होना चाहिए था वह तो हो गया यह वही दिल्ली है जिसने वहा दौर भी देखा जब विदेशी अक्रान्ताओ ने दिल्ली पर फतह हासिल की तो तालिया बजा रहै थे यह वही दिल्ली है जहाॅ हमारी ही बच्चियो पर लोमहर्षक जुर्म भी हुये है यह वही दिल्ली है जिसकी भूमि न जाने कितनी मर्तबा हमारे ही लहु से लाल हुई है । मगर कहते जब जब दर्द के सैलाब पर सियासत ने रोटी सेकने की कोसिश की है तब तब ...

संकट के कंटको से मुक्ती का अचूक आयडिया......? तीरंदाज

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सत्ता सियासत मे प्रायवेटाइजेशन  व्ही. एस. भुल्ले  भैया - मुये बाबले माटी पड़े थारी काठी पर जो तने म्हारे 72 बै गणतंत्र दिवस के मौके पर म्हारी सत्ता सियासत की कृतज्ञता पर हिस्से बाॅटे की बात कर रहा है कै थारे को मालूम कोणी कि सेवा कल्याण सर्बकल्याण के लिये पूरे सामर्थ के साथ पुरूषार्थ विगत 72 बर्षो से निर्विबाद रूप से हो रहा है कै थारे को म्हारी समृद्धि खुशहाॅली की उॅची उॅची ईमारते और सेवा कल्याण से पटे गाॅब गली नजर नही आते चहुॅ ओर रामराज्य के जयकारे है और अब प्रभु राम भी तो जल्द से जल्द भव्य भवन मे विराजने बाले है सत्ता सियासत के नव रतनो की नाक मे नकेल डाल फिर संकट कंटक भय भूख भृष्टाचार सहज सरल सेवा कल्याण की खातिर शासन प्रशासन मे प्रायवेट सेवाओ का दौर भी तो चल रहा है मने तो बोल्यू अटक से लेकर कटक तक पसरी म्हारी निष्ठा पर थारी छाती क्यो फट रही है ।  भैयै - तनै तो म्हारे मसबरे पर यू ही भड़क रहा है मने तो सेवा कल्याण के क्षैत्र मे म्हारी महान सत्ताये सियासत नये नये कीर्तिमान स्थापित करे मने इसलिये नये आयडिया को दे रहा हुॅ जिससे सत्ता सियासत मे भी प्रायवेट एजेन्सियो का सहारा ल...

कंटको से भरा सेवा कल्याण बना कलंक , सेवा बनी संकट

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सबाल साबित होती सत्ताओ की कृतज्ञता   व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  जिस सेवा कल्याण को कभी मानव धर्म मान धर्म मानव जीवन मे अंगीकार हुआ और जिस धर्म की रक्षा के लिये महाभारत तक हुआ आज वही धर्म एक मर्तवा फिर से कंलकित होता जान पड़ता है जिस तरह का सेवा कल्याण सत्ता सियासतो का लक्ष्य बनता जा रहा है वह अब सेवा न होकर संकट का रूप ले चुका है कहते है पहली सेवा उस मात्रभूमि की होती है जो हमे जीवन निर्वहन के लिये हमे अपना पवित्र आचल और उसमे अठखेलिया कर खुशहाॅल जीवन निर्वहन करने स्थान देती है दूसरी सेवा उस परमपिता की होती है जो हमे स्वच्छंद वातावरण हमे देता है तीसरी सेवा उस ब्यबस्था की होती है जो हमे संरक्षण दे हमारे जीवन को सुरक्षित रखने की गारंटी देती है और हमारे विकास कल्याण सेवा को समर्पित रहती है मगर मानव के निष्ठापूर्ण कर्तव्य निर्वहन के बाबजूद जब सत्ता सियासत अपनी कृतज्ञता के प्रति अक्षम असफल होती है तो सबाल होना स्वभाविक है नियम कानूनो का मकड़जाल इतना घना है कि मानव जीवन मानो जकड़ चुका हो मगर परवाह किसे छोटे से छोटे काम के लिये ऐड़ी चोटी का जोर लगाना इस बात का...

विराट जीवन की वैभव गौरबपूर्ण कृतज्ञता का वृतांत कुछ शब्दो मे व्यक्त करना असम्भव

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   जीवट ममत्व संस्कार संघर्ष की जीती जागती मिशाल थी राजमाता विजया राजे सिंधिया वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  जीवन मे सेवा कल्याण की विराटता कड़े संघर्ष के साथ ममत्व और जीवन के प्रति न्यायप्रियता तथा समाधान न होने तक संघर्ष की पराकाष्ठा और जीवन के श्रेष्ठतम संस्कारो का सेवा कल्याण की सियासत मे गहरा समावेश उनकी कार्यशैली मे समाहित था ऐसे विराट जीवन की वैभव गौरवपूर्ण कृतज्ञता का वृतांत कुछ शब्दो मे हो पाना असंभव ही नही न मुमकिन है कै. राजमाता विजयराजे सिंधिया तो जीवट ममत्व संस्कार संघर्ष की जीती जागती मिशाल थी ऐसी शख्सियत को जीवन मे पाकर कौन स्वयं को गौरान्वित महसूस नही करना चाहेगा यह सौभाग्य ही है की ममत्व की उस प्रतिमूर्ति का सानिग्ध हमे मिला हम धन्य है कृतज्ञ की हमे उनका स्नेह आर्शीबाद मिला मगर आज उनकी पुण्यतिथि है गर्व के साथ उस विराट ममत्व का विछोह भी है जिसकी भरपायी शायद इस जीवन को नसीब न हो मगर उनके संघर्ष संस्कारो की विरासत उनके उत्तराधिकारियो के नाते आज हमारे पास जिससे जीवन की सार्थकता सिद्ध कर हम अम्मा महाराज को सच्ची श्रद्धांजली दे सकते है ...

सत्ताधारी दल की फाॅयरब्रान्ड नेता पूर्व मुख्यमंत्री का शराब पर सबाल कितना सार्थक या निर्रथक

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वीरेन्द्र शर्मा म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा   चंद दिनो पूर्व ही ग्रहमंत्री और शराब दुकान म.प्र. मे खोलने की बात अबैध शराब बिक्री रोकने को लेकर कही थी जिस पर भा.ज.पा. की फाॅयर ब्रान्ड नेता पूर्व मुख्यमंत्री का शराब से राजस्व पर कहा है कि उनके पास फाॅरमूला है कि बगैर शराब बिक्री के कैसै अधिक राजस्व शासन को मिल सकता है ज्ञात हो उमा भारती भाजपा कि वही नेता है जिन्होने तिरंगे की खातिर मुख्यमंत्री पद त्याग कानून का सम्मान किया मगर अपुष्ट सूत्रो की माने तो उस समय वह एक षड़यत्र कारी सियासत की शिकार हुई थी मगर लोगो को यह नही भूलना चाहिए की उनके मुख्यमंत्री रहते ही म.प्र. मे शराब माफिया टूटा और कमजोर हुआ था क्योकि म.प्र. की मुख्यमंत्री रहते जिस तरह उन्होने राजस्व की परवाह किये बगैर लोगो को रोजगार देने की गरज से दुकान आबंटन मे लाटरी सिस्टम का सहारा किया उससे लोगो को रोजगार तो मिला ही साथ ही राजस्व मे बड़े उछाल के साथ म.प्र. मे शराब माफिया भी छिन्न भिन्न हो गया था आज जब उमा भारती न तो सत्ता का भाग है न ही मुख्यमंत्री है ऐसे मे वह कितना कुछ कर पायेगी फिलहाॅल देखने बाली बात होगी ज्ञात हो कि हा...

अविश्वास का दंश झेलता देश , अहम मे डूबे सरोकार , संबाद से इतर न तो सरकार न ही अन्नदाता झुकने तैयार

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  व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  बिगत डेढ़ महिने से दिल्ली की सीमाओ पर चल रहे अन्नदाताओ के आन्दोलन का परिणाम जो भी रहै मगर इससे इतना तो साफ हो गया कि अविश्वास आमजन ही नही सत्ता सियासत मे कितना घर कर गया है जो कोई भी संबाद से इतर सरोकारो की खातिर झुकने तैयार नही हालिया खबर यह है कि अगर अन्नदाताओ की ओर से सकारात्मक जबाब नही रहा तो 26 जनबरी को दिल्ली की सड़को पर टेªक्टर मार्च होना तय जो दुर्भाग्य पूर्ण ही कहा जायेगा अब समाधान न होने के पीछे के कारण जो भी रहै मगर गणतंत्र दिवस के दिन सड़क पर सरकार से खिन्न लोगो के हुजूम से न तो देश न ही नागरिक सत्ता सियासत का मान सम्मान बढ़ने बाला है न ही कोई समाधान होने बाला है मगर विधि विधान विरूध विरोध का परिणाम क्या होगा यह कहना जल्द बाजी होगी लेकिन समय रहते सार्थक समाधान हो जाता तो यह अंगीकार व्यवस्था को सार्थक सिद्ध करने दूर की कोणी साबित होती मगर समय रहते ऐसा न हो पाना नियती ही कहा जा सकता है जिसके मूल मे अविश्वास एक कारण हो सकता है जिस विचार अवश्य सभी को करना चाहिए आज के लिये यही सबसे बड़ी समझने बाली बात सभी के लिये होना...

बैलगाम सियासत , माखौल बना लोकतंत्र , विरोध के नाम बिलखली आशा अकांक्षा और विधान

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व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म. प्र.  बैलाम सियासत मे जिस तरह से विरोध के नाम आशा अकांक्षा और विधान सिसकने पर मजबूर है और बिगत एक माह से जिस तरह से लोकतंत्र का माखौल उड़ रहा है वह किसी से छिपा नही मगर सब कुछ खुलेआम चल रहा है जिस तरह से विगत कुछ दिनो से दिल्ली के मार्ग अबरूध है तथा कई दौर की बात आन्दोलन कारियो के बीच असफल हो जाने के बाबजूद जिस तरह से उम्मीद की आश लगाये सत्ता सियासत समाधान का मुॅख देखने आतुर है वह सपना भले ही उनकी उम्मीदो से कोसो दूर हो मगर समाधान की उम्मीद तो लोकतंत्र मे की ही जा सकती है मगर सियासी संग्राम का रूप लेते इस धमासान का इतना सहज समाधान निकलने बाला है यह खामो ख्याली ही कहा जा सकता है न तो जबाबदेह लोग विधान की सुनने तैयार है न ही विधि को मानने तैयार हल कैसे निकलेगा आज यही सबसे बड़ी समझने बाली बात है ऐसे मे सत्ता सियासत तथा विधि का राज धर्म है कि वह सार्थक समाधान खोज लोकतांत्रिक धर्म का पालर करे क्योकि विधि से बढ़कर कोई नही जिसे अंगीकार कर लोगा नंे लोकतंत्र मे आस्था व्यक्त की है ऐसे मे मानव जीवन मूल्यो की रक्षा मे जो भी हो सकता है वह लोकतंत्र...

मूल स्वभाव से संघर्ष करती संवृद्धि , सत्ता स्वरूप बदला सिस्टम बदला नही बदली सूरत

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  स्पष्ट है सिद्धांत विज्ञान रसायन का अर्थ , भ्रम से जूझते यक्ष सबाल स्वराज मे छिपा है समाधान  व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म. प्र.  एक गौरव पूर्ण विरासत के उत्तराधिकारी प्राक्रतिक समृद्धि धनी भूभाग पर समस्या संकट शिक्षा समझ की कंगाली से साफ है कि हमने हमारी ही गलतियो से बहुत कुछ खोया है और उसे हासिल करने मे हम आज भी अक्षम असफल साबित हो रहै तो किसी को कोई अतिसंयोति नही होनी चाहिए आर्यवृत के रूप मे खण्ड खण्ड मे स्थापित यह भूभाग अनादिकाल से ही इर्षा द्वेष स्वार्थ अहंम अहकारियो की महात्वकांक्षाओ का शिकार रहा है और एकता के संघर्ष मे समय बेसमय छिन्न भिन्न होता रहा है परिणाम कि विदेशी आक्रांताओ के लिये यह भूभाग पसंदीदा बनता गया कारण हमारा मूल स्वभाव जिसने कभी हमे यह सौचने का ही वक्त नही दिया कि राष्ट्र के मायने क्या होते है परिणाम छोटे छोटे देश या कुछ सेकड़ा की तादाद मे सैनिको के साथ लूटमार के मंसूबो से हमारे पबित्र भूभाग पर आये लुटेरे हमारे शासक बन गये और हम उनका तीब्र बिरोध खण्ड खण्ड होने के चलते नही कर सके और हजारो बर्षो की गुलामी को हमने अंगीकार कर लिया आज...

जीवन को खेल न समझे सत्ता सियासत , उसका संरक्षण कल्याण ही सबसे बड़ा मानव धर्म - व्ही. एस. भुल्ले मुख्य संयोजक स्वराज

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धर्मेन्द्र सिंह  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  कहते है सृष्टि विरूद्ध सृजन न तो सृष्टि ही स्वीकारती न ही उससे श्रेष्ठ जीवन का निर्माण संम्भव होता है जीव जीवन की सम्पूर्ण उत्पत्ती उसका विर्सजन सार्थक समाधान समझ अनुसार सृष्टि शिक्षा का सामान्य घटनाक्रम है जिसे समझने समझाने ऋषि मुनि तेज तवस्वियो ने कड़ी साधना त्याग तपस्या कर मानव जीवन की उपायदेयता उसकी श्रैष्ठता और कल्याण मे उसकी सार्थकता सिद्ध करने अपना निष्ठापूर्ण कर्तव्य निर्वहन किया सिर्फ इसलिये कि आने बाली उसकी पीढ़िया मानव कर्म की उपायदेयता और सृष्टि कल्याण अर्थात मूल धर्म की रक्षा कर पृथ्वी या मौजूद भूभाग पर उत्पन्न जीवन को समृद्ध खुशहाॅल बना सृष्टि सिद्धांत अनुरूप उसे सार्थक सिद्ध कर उस जीवन का विर्सजन समाधान सार्थक रूप से हो सके उसके लिये मानव ने अपनी अपनी श्रेष्ठ समझ अनुसार विभिन्न विधानो को अंगीकार कर उन्हे स्वीकार किया और अपनी अपनी आस्था समझ अनुसार उसका पालन भी करते आ रहै है मगर सर्बकल्याण को समर्पित मानव जीवन कब स्वकल्याण का सार्थी बन गया यही आज का सबसे यक्ष सबाल होना चाहिए उक्त बात स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही. एस. भुल्ले ...

समृद्ध सियासत , कंगाल हुआ विकास सेवा कल्याण

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आदेश निर्देशो की कब्र पर बैठक वीडियो कांफ्रेस बैबीनार व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  देखा जाय तो जिस कंगाली के बीच आजकल विकास सेवा कल्याण सफर कर रहा वह किसी से छिपा नही है मगर समृद्ध सियासत है कि उसका काॅरबा रूकने का नाम ही नही ले रहा है फिर कीमत जो भी हो आदेश निर्देशो की कब्र पर छाती कूटती बैठक बैबीनार वीडियो कान्फेस का आलम यह है कि माईबापो को फुरसत नही जो वह अपने रोज मर्रा के कार्य देख सके इस बीच बिलबिलाती आशा अकांक्षाओ का भले ही कोई मूल्य न हो मगर सच यह है कि जीवन बैहाल है कारण निष्ठा से विश्वासघात जो न तो सियासत का भला करने बाला है न ही इससे आशा अकांक्षाओ का भला होने बाला है बैहतर कि स्थानीय राज्य सरकारे अपने संसाधनो से अपनी अपनी आय बढ़ाये न कि केन्द्र सरकार के रहमो करम पर अपनी अपनी आशा अकांक्षाओ के सपने पूरे करने का मंसूबा बना समृद्ध खुशहाॅल जीवन का सपना सजाये लोग परेशान है अगर समय रहते इस सच को स्वीकार करने मे संकोच हुआ तो वह दिन दूर नही जब सियासत ही नही सेवा कल्याण भी कंगाल नजर आये । जय स्वराज   

न हम भारतबर्ष रहै न ही यूरोप बन सके , अपनी ही संपदा पर हाथ आजमाते भाई लोग

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मानवीय मूल्यो पर प्रहार करती तथाकथित मूढ़धन्य विद्धबानो की टोली गाॅब गली मे बढ़ती पैठ घातक  व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  सामथ्र्य स्वार्थ बस जिस तरह से प्रतिभाओ के हुनर विधा का दमन संसाधन संरक्षण के अभाव मे हो रहा है ऐसे चरित्र आचरण के बीच इतना तो साफ है कि न तो हम अब भारत बर्ष ही रहै न ही यूरोप के सार्गिद बनने के चक्कर मे यूरोप ही बन सके इतिहास गबाह है कि प्रतिभा विधा संरक्षण संर्बधन के लिये जो पहचान कभी भारतबर्ष के शासको ने स्थापित की और जिसके लिये भारत को भारतबर्ष के रूप मे जाना जाता था वह सामथ्र्य और स्वार्थ के आगे दम तोड़ते नजर आते है वही दूसरी ओर सियासी मठो से निकल तथाकथित विद्यवानो की टोलियो ने गाॅब गली के भोले भाले बैहाल लोगो के बीच अपनी पैठ जमा अपने अपने मंसूबे पूरे करने मानवीय मूल्यो की कीमत पर घातक खेल शुरू किया है वह बड़ा ही खतरनाक है ऐसा नही कि इस खेल सत्ता सियासत अनभिज्ञ हो मगर सत्ता के आगे राष्ट्र मानव कल्याण की किसको पढ़ी है जब से राष्ट्र कल्याण का कार्य क्या शुरू हुआ है तभी से देश मे किसी न किसी बहाने कोहराम मचा रहता है कारण सृष्टि सृजन सिद्धांत...

सामर्थ से तत्कालिक सत्तागत संस्थागत सामाजिक समाधान तो मिल सकता है मगर स्थाई समाधान नही

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समाधान तो तभी संभव है जब पुरूषार्थ कल्याणकारी हो  व्ही. एस. भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा  सामर्थ सत्ता , संस्था , समाज का हो या फिर व्यक्ति समूह संगठन का अगर समाधान कि शर्त सामर्थ है तो उसका समाधान तत्कालिक तो मिल सकता है मगर स्थायी नही और अगर किया गया पुरूषार्थ कल्याणकारी न हो तो वह नासूर बन जीवन को बैहाल बनाने काॅफी होता है इसलिये स्थाई समाधान कि पहली शर्त सर्बकल्याण मे निहित होता है आज के समय मे यह बात सिर्फ सत्ता सियासत ही नही व्यक्ति समूह संगठन के लिये भी समझने बाली होना चाहिए अगर आजाद भारत मे विधि अनुरूप हमने विधान को अगीकार किया है तो फिर विधि अनुरूप ही समाधान स्थाई और कल्याणकारी हो सकता है यह बात न तो सत्ताओ को भूलना चाहिए न ही आमजन को क्योकि विधि के आगे हमारी ब्यबस्था मे कुछ नही और यही विधान का भी तकाजा होता है अगर सत्ता निरंकुश है तो 5 बर्ष मे उसका समाधान है और विधि को मानने बाले निरंकुश है तो उसके लिये कानून है यही हमारी अंगीकार व्यवस्था है और यही लोकतंत्र है जय स्वराज । 

मोदी बर्तमान है तो भबिष्य गढ़ने मे कोहराम क्यो ?

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जो कौम सामर्थ अनुसार कृतज्ञतापूर्ण स्वयं का पुरूषार्थ सिद्ध करने में कोताही करती है भबिष्य उन्है कभी माफ नही करता व्ही. एस. भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. - सत्ता सियासत मे विगत कुछ बर्षो से जो कोलाहलपूर्ण माहोल है इसका सच तो राष्ट्र जन ही जाने मगर इतना तो है कि दोनो ही स्तरो पर कुछ ऐसा घट रहा है जिसे लेकर कोई भी निष्ठापूर्ण सच नही बोलना चाहता आज कि मोदी विरोधि सियासत ने न केवल आमजन बल्कि समुचे राष्ट्र को सोचने विचार करने पर मजबूर कर दिया है मगर ऐसे मे राष्ट्र जन की जबाबदेही बनती है कि वह दूध का दूध और पानी का पानी कर अपने सामर्थ पुरूषार्थ से यह सिद्ध करे कि कौन सही बोल रहा है और कौन झूठ बोल रहा है और यह तभी सिद्ध हो सकता है जब हम बर्तमान की कषोटि पर भूत तथा संभावित भबिष्य की कल्पना कर समीक्षा करे । दूसरी बात यह भी हो सकती है कि अगर मोदी बर्तमान है तो भबिष्य तो हमे ही गढ़ना है हमे यह नही भूलना चाहिए कि जो कौमे समय रहते अपने सामर्थ अनुसार पुरूषार्थ करने मे कोताही या अपनी नैषर्गिक कृतज्ञता सिद्ध करने मे असफल अक्षम सिद्ध होती है उन्है न तो भबिष्य न ही आने बाली पीढ़िया माफ करती है कह...

वंशबाद पर बी डी का ब्यान, बगली झाकते माई बाप, राष्ट्रबाद के सामने फीके पढ़े सियासी रायसुमारी के ख्याल

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वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  म.प्र. - जिस तरह से एक संगठन परम्परा का निष्ठा पूर्ण आगाज करते हुये भा.ज.पा. प्रदेश अध्यक्ष बी डी शर्मा ने सियासी दाॅब संगठन की पहचान अनुरूप चला उसे पढ़ सुन अच्छे अच्छे सियासत दान बगले झाकने पर मजबूर है मगर अब सबाल यह है कि जब प्रदेश के मुखिया ही ने आने बाली सियासत के आगे एक गहरी लकीर भबिष्य की सियासत को लेकर खीच दी है तो अब कौन माई का लाल इसे काट सकता है क्योकि यह भाजपा है जिसकी पहचान ही उसका संगठन तथा संगठन से मिलने बाली जबाबदेही का निष्ठा पूर्ण निर्वहन होता है बहरहाॅल देखना होगा कि उन सियासी सिपहसालारो का क्या होगा जो अपने अपने नौनिहालो की मार्केटिग मे अनौपचारिक ही सही पूरे जोश खरोश के साथ मय संसाधनो के कूद पढ़े थे । 

जन के जान की रक्षा राजसत्ता धर्म , जहरीली शराब से मौतो पर म.प्र. के मुरैना मचा कोहराम

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जबाबदेह बने लाचार, हटने हटाने को लेकर उठे सबाल वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  म.प्र. - गत दिनो जहरीली शराब से हुई 20 से अधिक मौतो पर जबाबदेहो पर कार्यवाही के पश्चात राजसत्ता का अगला कदम राहत हो मगर जो लोग राजसत्ता की लापरबाही के चलते इस दुनिया से चल बसे वह अब लौटने बाले नही कुछ माह पहले की ही तो बात है जब ऐसी ही एक घटना उज्जैन संभाग मे सुनने मिली थी और अब चम्बल संभाग से यह दुखद खबर है भले ही राजसत्ता ने मातहतो को हटा आमजन मेे यह संदेश देने की कोशिस की हो कि वह लापरवाह लोगो के प्रति के कितनी सख्त है मगर क्या राजसत्ता की यह कार्यवाही इस बात की गारंटी है कि अब इस तरह का हादसा दुर्घटना आगे से नही होगी तो इसका सटीक जबाब की कोई गारंटी नही क्योकि जो विभाग सीधे तौर पर इस जबाबदेही को ओढ़े है न तो उसके पास पर्याप्त अमला है न ही उसके पास संसाधन दूसरे नम्बर पर जो अमला आता है उस पर अमला भी है और संसाधन भी मगर उस के सर पर इतना बोझ है कि वह सीधे तौर पर अपनी जबाबदेही ही नही मानता रहा सबाल शराब माफिया का तो उसे तो हर हाॅल मे धन के लिये धंधा करना है सो वह अपने मंसूबो को किसी भी हालत ...

जहर के कारोबार थर्राई मानवता राजस्थान, उ.प्र. के बाद अब म.प्र. भी जकड़ मे

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  आबकारी अधिकारी निलंबित तो कलेक्टर एस पी हटाये  वीरेन्द्र भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. म.प्र. के मुरैना मे अबैध जहरीली शराब से हुई 20 से अधिक मौतो से साफ है कि अबैध जहरीली शराब का कारोबार राजस्थान , उ.प्र. , के बाद अब म.प्र. मे भी अपनी जड़े जमा चुका है मगर सबाल वही है की मोटी मोटी पगार जनधन से प्राप्त करने बाले इतने निर्दयी कैसै हो सकते कि धन लालसा मे डूबे लोगो खुलेयाम शराब के नाम जहर बैच रहै है और समुचा अमला इस बात के इन्तजार मे बना रहता है कि घटना घटे तब वह कार्यबाही की जैहनत उठाये जब कि अबैध शराब न बिचे इसे रोकने की सीधी जबाबदेही आबकारी महकमे की होती है तो वही पुलिस को भी यह जिम्मा विधि अनुरूप मिला हुआ है कि उसके थाना क्षैत्र मे अबैध शराब का कारोबार न हो जिसके लिये वीट गार्ड से लेकर ए एस आई थानेदार सी एस पी तक की जबाबदेही होती है जो हालिया म.प्र. शासन की कार्यवाही से सिद्ध है तो वही आबकारी महकमे को किराये के वाहन गश्त व अबैध शराब कि धरपकड़ के लिये मिले होते है और उपनिरिक्षक से लेकर आरक्षक तक की तैनाती रहती है इसके अलाबा हर गाॅब मे पटवारी ग्राम सहायक पंचायत सच...

बातो के बतासो मे गाॅब गली बैहाॅल, बैबिनार मे सेवा तो बैठको से कल्याण

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वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  म.प्र. - सत्ता सियासत मे आजकल जिस तरह से बातो बैठको का दौर चला है ऐसे मे कलफते सेवा कल्याण के बीच गाॅब गली मे कोहराम मचा है अब इस सच को लोग स्वीकारे या अस्वीकारे मगर हकीकत फिलहाॅल यही है गाॅब गली मे मनमानी पर उतारू सेवा कल्याण जिस तरह से बैफिक्र लापरबाह नजर आता है फिर चाहै वह जल राशन स्वास्थ शिक्षा हो या फिर प्राक्रतिक संपदा पर माफिया राज हो सभी दूर मानवता सिसकने कांपने पर मजबूर नजर आती है रोज रोज की बैठके बैबीनार वीडियो कांफ्रेस मे सेवा कल्याण उतावले माईबापो की निष्ठा देख माननीय श्रीमानो का कलेजा भले चैड़ा होता हो मगर संड़ाध मारती शहर नगरो की नालिया छदबिछद सड़को की नालियो पर जंप करते वाहन भले ही चुप रह सफर करने मजबूर हो आय दिन बाधित जल सप्लाइ्र्र्र और जल सप्लाई मे डलते ही मोटरे फुकने के किस्से आम हो मगर शर्म किसे ये मानो जन जन का सौभाग्य है जो उन्हे बिरासत मे भले ही न मिला हो मगर आज यह उनकी मिलकियत लगती जिसे न तो कोई छीनना चाहता न ही कोई दाबेदार दिखता इतना ही नही अंगीकार विधि विधान मौजूद विधि की बिरासत इतनी अकूत की बड़े बड़े धन कुबेर तक श...

स्थानीय सरकारो मे बजूद की जंग को तैयार वीर सैना

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नीरज जाटब  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  नैतिक समर्थन से लेकर सीधे स्थानीय सत्ता मे सहभागिता को संघर्षरत वीर सैना आसन्न स्थानीय निकाय पंचायत चुनावो मे अपनी माहती भूमिका के लिये तैयार है जिस तरह से लोगो के बीच वीर सैना की प्रमाणिकता लोकप्रियता बढ़ रही है उसके सार्थक परिणाम आने बाले समय मे पूरी प्रमाणिकता के साथ लोगो के सामने होगे उक्त बात वीर सैना संयोजक संजीब जी ने युवाओ को संबोधित करते हुये कही उन्होने कहा कि गाॅब गली की तरूणाई ही लोकतंत्र की वह ताकत है जिनके पुरूषार्थ से आत्मनिर्भर गाॅब गली का सपना गढ़ा जा सकता है और आम गरीब मजदूर किसान सहित पढ़े लिखे युवाओ के रोजगार सपने को पूर्ण कर उनका जीवन समृद्ध खुशहाॅल बनाया जा सकता है क्योकि 72 बर्ष की मौजूद सियासत ने यह सिद्ध कर दिया है की वह समृद्ध खुशहाॅल जीवन निर्माण मे असफल अक्षम सिद्ध हुये है और स्वस्वार्थ मे डूबी सियासत के चलते भबिष्य भी उज्जबल हो इसमे संदेह है क्योकि सेवाकल्याण विकास के नाम जिस तरह से विगत बर्षो मे जन धन और जन भावनाओ कि बरबादी हुई है या हो रही है वह किसी से छिपि नही इस लिये अब समय आ गया कि युवा अपने बुजुर्गो के मार्ग...

प्रकृति विरूद्ध सामर्थ का पुरूषार्थ कल्याणकारी होना असंभव

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कल्याण अर्थात धर्म की रक्षा मानव का नैसर्गिक कर्तव्य सृष्टि सृजन मे कर्तव्य कल्याण भाव अहम  व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  कहते है कि कभी रावण के राज मे राक्षस वीरो को हुकम था कि किसी भी स्थति मे ऋषि मुनियो के यज्ञ पृथ्वी पर नही होने देना चाहिए क्योकि ऋषिमुनि अपने ज्ञान विज्ञान से सिद्ध अस्त्र आर्यो को दे उन्है शक्ति शाली बना देगे और राक्षस कुल का सर्बनाश हो जायेगा यह हुकम उस जमाने मे कोइ्र्र छोटे मोटे राजा रजबाड़े नेता नेती माफिया गैंग गिरोहबन्द दल संगठन का नही बल्कि एक ऐसे शूरवीर राजा का था जिसके आंतक का ढंका तीनो लोको मे गूजता था जो स्वयं घोर तवस्वी सिद्ध पुरूष होने के साथ बहुत बलशाली भी था जिसकी सैना मे एक से बढ़कर एक वीर योद्धा मायावियो की लम्बीचैड़ी फौज थी जिसने लम्बे समय तक राज किया तथा जिसके स्वयं के परिवार मे बड़े शूरवीर सहित एक लाख पूत सबाॅ लख नाती होने कि कहावत प्रचलित थी मगर प्रभु राम ने जंगली जीव जन्तुओ के कल्याण मे गहरी आस्था तथा जीव जगत के प्रति उनके कर्तव्यो का निष्ठा पूर्ण पालन कर उनकी मदद से रावण सहित समुची राक्षस प्रजाति का संहार कर कल्याण अर्थ...

शुम्भ निशुम्भ के संदेश और सासत मे मानव जीवन .........? तीरंदाज

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 शुम्भ निशुम्भ के संदेश और सासत मे मानव जीवन .........? तीरंदाज  व्ही. एस. भुल्ले  भैया- कलयुग मे त्रेता का मंत्र आखिर तनै कै कहना चावै आखिर शुम्भ निशुम्भ के नाम पर तनै किसे डरना चावै इस अर्थयुग मे न तो अब प्रभु राम का राज है न ही रावण का कोई कुल दीपक जो रावण की कीर्ति को आगे बढ़ा सके न इस पृथ्वी पर राक्षस शेष रहै फिर तने क्यो अर्र बर्र बक रिया शै कै तने मानव धर्म कल्याण का भी अर्थ भूल गया शै जिसके लिये इतनी बढ़ी महाभारत हुई और हजारो लाखो सैनिको के साथ बड़े बड़े वीर शूर वीर उस भीषण युद्ध मारे गये मारे को तो थारी भृकुटी और वाणी की गर्जना सुन डर लागे ।  भैयै- आज के समय मे जो डर गया वो समझो मर गया कै थारे को मालूम कोणी यह कलयुग का बाप अर्थ युग है जिसने कलयुग आने पूर्व ही उसकी दिशा पलट दी जिसमे न तो विधि विधान की कोई सुन रहा है न ही सेवा कल्याण की रक्षा को लेकर कोई गम्भीर दिख रहा है सर्बकल्याण के मंत्र से दूर स्वकल्याण मे मानव जगत डूबा हुआ है ।  भैया- तो क्या म्हारी काठी समृद्धि खुशहाॅली के सपनो को देखते देखते ही अभावो के बीच फुक जायेगी और म्हारी आने बाली पीढ़ी भी नैसर्ग...

सर्बकल्याण से इतर स्वकल्याण का सारथी बन साम नाम दण्ड भेद के अचूक अस्त्रो से सुसजित सामर्थ पुरूषार्थ

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    कल्याण को खुली चुनौती देता स्वार्थ व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.  कहते है जब जब कल्याण भाव से कृतज्ञता ने दगा किया है तब तब उसकी बहुमूल्य कीमत भी मानव को बैभाव चुकानी पढ़ी है कारण सर्बकल्याण से इतर स्वकल्याण का भाव फिर जीवन निर्वहन मे अरण्य मे निवासरत जीव हो या फिर ग्रामो मे निवासरत मानव रहै हो जिसने भी जीवन के सबसे बड़े धर्म कल्याण से विश्वासघात कर स्वकल्याण को धर्म और कर्म बनाने की कोसिश की है उसे जीवन मे असफलता या दुर्गति ही प्राप्त हुई है फिर कितनी ही वैभव शाली सत्ताये और कितने ही बड़े वीर क्यो न रहै हो इतिहास के रूप मे परिणाम हमारे सामने है काश इस सच को समृद्ध खुशहाॅल जीवन की इच्छा रखने बाले समझ पाये । कहते है कि अगर जीवन मे सामर्थ पुरूषार्थ स्थापित ब्यबस्था मे स्वयं को अक्षम असफल पाते है तो उन्हे सर्बकल्याण की रक्षा मे उसके संबर्धन मे कर्तव्य निर्वहन मे परिवर्तन मे संकोच नही करना चाहिए और विश्वास की छत्रछाया मे अपना निष्ठा पूर्ण कर्तव्य निर्वहन करना चाहिए।  आज जब हम एक लोकतांत्रिक ब्यबस्था का भाग है और औपचारिक अनौपचारिक रूप जन जन का प्...

बातो के बतासो से संघर्षरत जीवन, हुआ मुहाल

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  वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  म.प्र.- विगत 25 बर्षो मे सियासी दाॅव पैच के चलते जिस तरह से जीवन संघर्षरत हुआ है और सहज जीवन स्वछन्द जीवन के लिये मुहाल हुआ है वह आज कि सियासत के लिये कभी न धुलने बाला कलंक ही कहा जायेगा सेवा सुविधा के नाम जिस तरह से विधि की आढ़ मे सरेआम जन भावनाओ की लूट मची है उससे आज कोई भी अछूता नही ऐसे मे गाॅंब से लेकर नगर महानगरो तक सजे सियासी बातो के बतासो के बाजार से मानो समुचा जनतंत्र सजा हो जहाॅ सहर्ष जीवन तक मुहाल है हर 60 कि. मी. पर चिकनी सड़को के नाम जनधन की बसूली को सजे टाॅल इस बात के प्रमाण है कि आने बाले समय मे जीवन और कितना संघर्ष पूर्ण होने बाला है जबकि हालिया हकीकत यह है सूविधा युक्त सड़को के नाम घटिया सड़के लोगो के जीवन के मौत का सामान बन रही है खासकर जिस तरह के भयानक एक्सीडेन्ट झाॅसी कोटा को जोड़ने बाले एन. एच. 76 पर बढ़े वह विचारणीय होना चाहिए क्योकि मानव जीवन बढ़े नसीब बालो को मिलता है मगर भाई लोगो को फुरसत कहाॅ जो वह यह देख सके की कहाॅ क्या हो रहा है बैचारे लोग सड़को पर सुरक्षित यात्रा के नाम बैबजह बहुमूल्य जीवन गवाने मे जुटे है ...

माफिया के खिलाफ मूड मे मुखिया .........? तीरंदाज

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भैया- न तो अब प्रदेश मे डाकू , दादाभाई, गुन्डो की मण्डली दिखती है न ही जंगलो मे गैगबन्द गिरोह अर्थात विधि का माखौल उड़ाने बालो का अकाल सा जान पड़ता है फिर भी अन्दर खाने की खबर यह है म्हारे प्रदेश के मुखिया और उनके गाड़ी भरे मातहत माफिया को लेकर हेरान परेशान है और अब तो उन्होने सार्वजनिक ऐलान भी ठोक दिया है कि या तो माफिया प्रदेश छोड़ दे या फिर गैर कानूनी धन्धे छोड़ दे भाया राम राज की परिकल्पना मे आखिर गलत ही क्या बैसै भी म्हारे बटाढार की बिदाई से पूर्व बड़ा नारा था भय, भूख, भृष्टाचार मुक्त ब्यबस्था देने का अब अगर माफिया मुक्त प्रदेश का नारा है तो थारे को दर्द कैसा। भैयै- म्हारे को कोई दर्द नाये मने तो सिर्फ इतना कहना चाहु कि सबसे पहले तो यह पता किया जाये कि शहर गाॅब को छोड़ माफिया कहाॅ शिफट हो चुके है जो न अब कही उनके पद चिन्ह लोगो को नसीब है न ही खुलेआम ऐसे लोगो के दर्शन उस पर अपराध अपराधियो से भागती हाथ जोड़ कर काम चलाती म्हारे जाॅबाजो की फौज का क्या करे जो संसाधनो या फिर संख्या बल के अभाव मे बैकफुट पर नजर आती है अब कौन समझाये म्हारे मुखिया को कि पहले संसाधन तो जुटा लो फिर बर्र के छते मे हाथ...

निर्माण अन्र्तराष्ट्र्ीय मानको के अनुरूप हो श्री मंत यसोधरा राजे सिंधिया

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मंत्री ने किया ग्लोवल स्किल पार्क का निरीक्षण वीरेन्द्र शर्मा  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  म.प्र. सरकार की मंत्री श्री मंत यसोधरा राजे सिंधिया ने भोपाल मे बन रहे ग्लोवल स्किल पार्क का निरीक्षण करते हुये उपस्थ्ति अधिकारियो को कहा कि पार्क निर्माण मे अन्र्तराट्र्ीय मानको का पालन सुनिश्चित होना चाहिए जिससे गुणवत्ता पूर्ण कार्य पश्चात उसका लाभ सही तरीके से मिल सके ज्ञात हो कि इस पार्क का निर्माण भोपाल स्थित नरेला संकरी मे 36 एकड़ भूमि पर 645 करोड़ की लागत से किया जा रहा है   

1 लाख रोजगार सृजन और बैलगाम मशीनरी पर शिकंजा कसने की तैयारी

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शौर्य सामर्थ की कुर्बानी पर बढ़ता सेवाकल्याण का काॅरबा  वीरेन्द्र भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. जिस तरह से म. प्र. की सत्ता ने हर माह 1 लाख रोजगार सृजन का आगाज कर बैलगाम मशीनरी पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रखी है उसके परिणाम तो आने बाले समय मे सिद्ध होगे मगर म. प्र. मे हालिया तौर पर सत्ता सियासत मे पैर जमाती नई जोड़ी आज की सियासत मे सेवाकल्याण के क्षैत्र मे कितना सिद्ध कर पायेगी यह देखने बाली बात होगी ये अलग बात है कि जिस शौर्य सामर्थ की कुर्बानी सेवाकल्याण को लेकर म. प्र. की सियासत मे हुई है वह बदले काॅरबा मे कितनी सिद्ध होगी इस का लेकर सियासी गलियारे मे सबाल हो सकते है मगर शंका करना उस निष्ठावान शख्शियत के साथ बड़ा अन्याय होगा । मगर सियासत है सो सियासत का क्या कब किसको जीरो और कब किसको हीरो बना दे यह कहना मुश्किल होता है मगर एक बात मौजूद सत्ता सियासत के बारे मे अवश्य कही जा सकती है कि कंगाल खजाने पर जिस तरह से आशा अकांक्षाओ को बहलाने की कोशिस हो रही है उससे बहुत कुछ होने बाला नही । कहते है कि स्वार्थ और अहंकार कभी किसी के सगे नही हुये मगर सेवा कल्याण की ध्वजा चिरस्थाई ...

जुदा तालमेल का दंश भोगता मानव जीवन सर्बकल्याण में स्वार्थ की आहूती सबसे अहम

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व्ही. एस. भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा  बताशो की मिठास से आखिर कौन परिचित नही मगर मानव जीवन की समस्या निदान को सजे बातो के बतासो के बाजार जीवन मे जो कड़बाहट पैदा कि उससे जीवन की मिठास का घोर संकट खड़ा हो गया है। शायद शैया पर लेटे पितामह भीष्म ने अपने अन्तिम समय पाण्डवो को शासन सेवा जन कल्याण मे राजा के कर्तव्य बोध का ज्ञान देते वक्त सही कहा था कि देश राजा के लिये नही होता , राजा देश के लिये होता है, और वह राजा कभी देश के लिये शुभ नही होता जो अपने देश के सामाजिक आर्थिक रोगो के लिये अपने अतीत को उत्तरदायी ठहरा सन्तुष्ट हो जाये अगर अतीत ने तुम्है एक निर्वल आर्थिक सामाजिक ढाॅचा दिया है तो उसे सुधारो बदलो क्योकि अतीत तो बर्तमान कि कसौटी पर कभी खरा नही उतरा क्योकि अगर अतीत स्वस्थ होता और उसमे देश को प्रगति के मार्ग पर ले जाने कि शक्ति होती तो फिर परिवर्तन ही क्यो हो । आज जब हम राजतंत्र को त्याग लोकतंत्र के भाग है तब स्वयं राजा घोषित होने के बाबजूद और किसी से प्रगति कल्याण समृद्धि की उम्मीद क्यो क्या हमे यह नही स्वीकार लेना चाहिए की हम कर्तव्य बिमुख हो मानव जीवन का मूल कर्तव्य खो च...

वहरगबाॅ इन्दार सड़क निर्माण की क्वालिटी को लेकर चर्चाओ का बाजार गर्म

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नीरज जाटव  म.प्र. विलेज टाइम्स समाचार सेवा  शिवपुरी प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क निर्माण ईकाई मे निजाम क्या बदला फिलहाॅल लोगो कि बाॅछे खिली हुई है कारण जबाहदेहो का लग्झरी स्वभाव और आॅफिस मे बैठ ठेकेदारो पर दबाब जिसके चलते निर्माणाधीन सड़के तो सफर कर ही रही है तो दूसरी घटिया सड़को के निर्माण ने रफतार पकड़ ली है हालिया अपुष्ट खबर यह है कि बहरगबाॅ से इन्दार को जोड़ने बाली प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क पर हुये डामर के कार्य मे मोटाई से समझौते के साथ डामर का पूरा उपयोग नही किया गया है जिससे आने बाले समय मे शासन का धन बर्बाद होना तय है मगर जबाबदेह अभी भी आॅफिसो मे बैठ अपनी अपनी जबाबदेही को सुनिश्चित करने मे जुटे है। 

प्रमाणिक पुरूषार्थ के अभाव मे, निराश आशा अकांक्षा

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  सढ़े सिस्टम से असंभव समृद्ध खुशहाॅल जीवन  व्ही. एस. भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा   म.प्र.- सत्ताये सरकारे कितनी ही कोसिस क्यो न कर ले बगैर सढ़े सिस्टम मे सुधार किये जीवन मे समृद्धि खुशहाॅली दूर कोणी बनी रहने बाली है। क्योकि प्रमाणिक पुरूषार्थ के अभाव जो हालत आशा अकांक्षाओ कि सभी के सामने है वह किसी से छिपी नही है जिस तरह से आशा अकांक्षाओ के बीच निराशा पैठ जमा रही वह बड़ी ही घातक हो सकती है जिस पर सिर्फ विचार ही पर्याप्त नही प्रमाणिक पुरूषार्थ की सख्त दरकार है और यह तभी सम्भव है जब सत्ताये सेवा कल्याण के साथ सिस्टम को दुरूष्त कर अपनी प्रमाणिता सिद्ध करे क्योकि कर्तव्य निर्वहन के मार्ग मे जो बातो के बताशे बाटने का क्र्रम चल निकला है वह अगर अब भी नही थमा तो वह दिन दूर नही जब विश्वसनीयता का अकाल अच्छे अच्छो को रसातल तक का सफर बगैर नही चूकेगा जो न तो उन सत्ताओ के हित मे है न ही जन जीवन राष्ट्र्हित मे होगा बैहतर हो समय रहते सुधार की शुरूआत हो राष्ट्र्हित मे जुटे लोगो की प्रमाणिकता सिर्फ सत्ता ही नही सिस्टम मे भी सिद्ध हो जय स्वराज ।

अंगीकार जटिल दण्ड विधि में जकड़ा जीवन, हुआ असहज बैहाल, कौन सुने, कौन करे समाधान विश्वास खोती सत्ता सियासत स्थापित सिस्टम

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व्ही .एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा  म.प्र.- मण्डियो से कामगारो की छटनी उपज पर टैक्स मे कमी , जी एस टी का मकड़जाल यह वह जीते जागते प्रमाण है जिन्हे झुटलाया नही जा सकता क्योकि यह सच्चाई अब चैराहे पर है । अंगीकार जटिल दण्ड विधि का आलम यह है कि इस स्थापित सिस्टम मे जिन्दा रहने एक नागरिक को मकान दुकान टैैक्स से लेकर टेलीफोन मोबाइल,पानी, बिजली ,बैक खाता आई टी जी एस टी रिटर्न स्वयं का रोजगार टी वी रीचार्ज आय मूलनिवासी जाति प्रमाण पत्र समग्र आधार आई डी और न जाने क्या क्या करना होता है अब ऐसे मे जीवन की गाड़ी को खीचना कितना दुस्वार होता है यह तो समृद्ध जीवन की उम्मीद मे जीवन निर्वहन करने बाला वह प्राणी ही समझ सकता है मगर दुरभाग्य की जो समझ सकते है वह समझना नही चाहते जिन्ह कुछ करना चाहिए वह कुछ करने नही है तैयार ऐसे मे बैहाल जीवन का कलफना तय है बैहतर हो सत्ताये सियासत सिस्टम अपनी अपनी जबाबदेही तय करे वरना ऐसा न हो कि समृद्ध जीवन की तलाश मे असहज बैहाल जीवन कही जबाब न दे जाये जो न तो इस सिस्टम सत्ता सियासत के हित मे होगा न ही आम जीवन के हित मे जय स्वराज ।