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Showing posts from January, 2019

अचानक, आवेदक के घर पहुंचे प्रभारी मंत्री माँ रोती है, तो दर्द होता है- प्रघुमन सिंह तोमर मंत्री म.प्र. शासन

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। वह माँ रो रही थी इसीलिए उसकी हालत का यथार्थ जानने, उसके लिए उसका सेवक बेटा क्या कर सकता है। उसकी तकलीफ कैसे दूर की जा सकती है। इसीलिए मैं उनके घर गया।  उक्त बात बात शिवपुरी जिले के प्रभारी मंत्री एवं म.प्र. शासन के खाद्य मंत्री प्रघुमन तोमर ने विलेज टाइम्स संपादक वीरेन्द्र षर्मा द्वारा पूछे गए सवाल के जबाव में कहीं। उन्होंने कहा जनसेवक होने के नाते यह मेरा कत्र्तव्य भी है और हमारे नेता राहुल गांधी श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित मुख्यमंत्री कमलनाथ जी की भी मंशा है कि अन्तिम लाइन के अन्तिम व्यक्ति तक शासन की मदद पहुंचना चाहिए। मुझे गर्व है कि रोती-विलखती मुन्नी देवी जी के बगैर छत वाले घर तक मुझे जाने का अवसर मिला। मैंने न.पा. राजस्व व स्वयं के विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है। मेरे आने से पूर्व सारी व्यवस्था दुरूस्त हो जाये। 

राजीव, सोनिया की मंशा और त्याग-तपस्या को पलीता लगाती काॅग्रेस सरकार

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   जिस मंशा के साथ पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने अपनी राजनैतिक पारी की शुरूआत कर अपने ऐतिहासिक निर्णयों के ममाध्यम से अपनी विरासत सोनिया को सौंपी थी। उसे बचाने और आगे बढ़ाने के लिए यूपीए अध्यक्ष के रूप में उन्होंने शिक्षा सूचना, रोजगार और खादय अधिकार कानून के अलावा भूमिअधिग्रहण कानून बनाकर देश के सामने एक मिशाल प्रस्तुत की। इस बीच जिस तरह से उन्होंने खादय बिल पास कराने के लिए अपनी बीमारी की परवाह न करते हुए बिल के पास हो जाने तक सदन में डटी रहीं। परिणाम खादय बिल तो पास हो गया। मगर सदन से निकलते ही उनकी तबीयत नासाज हो गई और वह मुर्छित हो गईं।  आज जब तीन प्रदेशों में एक दशक बाद काॅग्रेस की सरकारें लौटी है। ऐसे में सत्ता के लिए मची खींचतान और सरकार में ताकतवर बनने के लिए चल रहे घमासान से इन प्रदेशों में खासकर म.प्र. के आम नागरिक भले ही सांसत में हो। मगर सरकार के कदम हालिया तौर पर स्व.राजीव गांधी तथा श्रीमती सोनिया गांधी की मंशा तथा महात्मा गांधी के बताए रास्तों को पलीता लगाने काफी है। देखना होगा कि नये काॅग्रेस आलाकमान रा...

स्वराज चलायेगा समृद्धि अभियान

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धर्मेन्द्र सिंह गुर्जर विलेज टाइम्स समाचार सेवा। मानव, जीव-जगत की समृद्धि के संकल्प के साथ, आज स्वराज ने देश के महान सपूतों के साथ महात्मा गांधी को याद किया। साथ ही लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने वाली उन महान विभूतियों के साथ पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी को भी याद किया। इस मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी 15 अगस्त पर स्वराज की चर्चा लाल किले की प्राचीर से करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया। वैचारिक आधार पर स्वराज की मशाल उठा मानव सहित जीव-जगत की समृद्धि, खुशहाली के लिए प्रयासरत स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने कहा कि जो स्वराज भारतवर्ष ही नहीं समस्त मानव जीव-जगत की आत्मा और सृष्टि की सवोत्तम कृति रही है। जिसे साक्षी मान कभी जिसकी अनुभूति वीर शहीद सरदार भगत सिंह, महात्मा गांधी ने की और उस पर उन्होेंने अपने-अपने विचार भी जनमानस के सामने रखे तथा जिस स्वराज के क्रियान्वयन के लिए पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी ने संविधान संशोधन किया तथा जिस स्वराज की चर्चा देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से की उस स्वराज को मूर्तरूप देना आज...

म.प्र. में प्रभावी आबकारी नीति की दरकार राजस्व, रोजगार, मद्यनिषेध अहम

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वीरेन्द्र शर्मा            म.प्र. की आबकारी नीति 2019-20 वर्ष के लिए राज्यकीय खजाना भरे जाने को लेकर सरकार की मंशा जो भी हो। मगर लगभग 10 हजार करोड़ से अधिक का धन कमाकर म.प्र. शासन को मुहैया कराने वाला आबकारी विभाग वर्ष 2019-20 के लिए अभी तक आबकारी नीति घोषित नहीं कर सका। जबकि हर वर्ष जनवरी के प्रथम सप्ताह में आबकारी नीति घोषित हो जाती थी और 15 जनवरी तक ठेका प्रक्रिया। मगर 30 जनवरी निकल जाने के बाद भी आबकारी नीति की घोषणा का न होना कई सवालों को जन्म दे रहा है।   जबकि म.प्र. की नई सरकार से लोगों को उम्मीद थी कि वह शासन के राजस्व को बढ़ाने के साथ इस मर्तवा लाॅटरी पद्धति के माध्यम से रोजगार के नये अवसर सृजन के साथ मद्यनिषेध के लिए प्रभावी नीति लायेगी। जिससे एक ओर म.प्र. शासन के खाली खजाने को भरा जा सके, तो वहीं दूसरी ओर म.प्र. के बेरोजगारों को लाॅटरी पद्धति के माध्यम से नये रोजगार उपलब्ध हो सके। मगर जिस तरह से आबकारी महकमें ने एक माह का समय निकाल दिया उससे लगता नहीं कि सरकार और आबकारी विभाग राजस्व, रोजगार, मद्यनिषेध को लेकर गंभीर है।  अगर सरकार चाह...

शिवपुरी में शुरू हुई स्व. सुशील बहादुर अष्ठाना अखिल भारतीय क्रिकेट प्रतियोगिता स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले पहुंचे खिलाड़ियों के बीच

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जयनारायण शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी। विगत 10 वर्षो से पूर्व विधायक एवं लोकप्रिय नेता स्व. सुशील  बहादुर अष्ठाना की स्मृति में डे-नाईट क्रिकेट टूनामेन्ट आयोजित करने वाली कमेटी ने इस मर्तवा अखिल भारतीय स्तर के क्रिकेट टूनामेन्ट का आयोजन किया है। शिवपुरी स्थित तात्या टोपे स्टेडियम में आयोजित क्रिकेट टूर्नामेन्ट की शुरूआत टाॅस पश्चात कोटा और शिवपुरी की टीमों से हुआ।  कार्यक्रम के आयोजक अनुराग अष्ठाना एवं छोटे खां ने स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले जी का माल्यार्पण कर स्वागत किया तथा स्वराज संयोजक ने इस मौके पर स्व. सुशील बहादुर जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस क्रिकेट टूनामेन्ट में एम्पायर के रूप में शाकिर खांन, सोहिब खांन, अमर प्रजापति एवं स्कोरर के रूप में नीरज धाकड़ तथा काॅमेन्टर के रूप गिरीश मामा, कमल बाथम, शेरा, अवधेश, भाजपा नेता अशोक त्यागी बाबा के अलावा बड़ी संख्या में आयोजक कमेटी के सदस्य और दर्शकगण मौजूद थे। 

वादों के ब्रह्मास्त्र से, 2019 फतह की तैयारी हर गरीब को राहुल का न्यूनतम आय का वादा सिंधिया और प्रियंका को चुनौती पूर्ण जबावदेही

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जिस प्रदेश में उसके सहयोगी दल ही काॅग्रेस की उपयोगिता पर उसे गठबंधन से बाहर रख सवाल खड़े करते हो और धुर विरोधी सत्ताधारी दल उसकी भूमिका 2019 में स्वीकारने तैयार न हो। ऐसे प्रदेश की बागडोर सिंधिया और प्रियंका को प्रभारी के रूप में सौंपना दोनों के लिए चुनौती पूर्ण जबावदेही है।  शायद राष्ट्र की कभी संभावना सच थी कि स्व. इन्दिरा के बाद देश का क्या होगा। मगर एक बहिन के कत्र्तव्य निर्वहन और इस राष्ट्र के नागरिक होने के नाते हर गरीब को न्यूनतम आय देने के संकल्प के बीच देश की आशंका कि स्व. इन्दिरा के बाद क्या होगा, पर आज सियासी हल्कों में चर्चा यक्ष है। मगर देखना होगा कि गिरोहबन्द सियासी संस्कृति के चलते वर्तमान में देश का भविष्य कैसा होगा यह आज समझने वाली बात होना चाहिए। जिस तरह से सत्याग्रह के सार्थी सिंधिया को नई जबावदेही के साथ म.प्र. से उत्तरप्रदेश विदा किया गया है और पीड़ित, वंचित, आभावग्रस्तों के बीच सिंधिया के पद को बढ़ाने का ऐलान हुआ है उस पर सियासी सवालों का होना लाजमी है। यूं तो स्वार्थवत सत्ताओं और सियासी लोगों की पहली पसन्द आजकल...

गिरोहबन्द सियासत में सिसकता, लोकतंत्र सेवा कल्याण के नाम सत्ता की लूट

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। आज जिस तरह से गिरोहबन्द सियासत में सेवा कल्याण विकास के नाम मची सत्ता की लूट में लोकतंत्र सिसकता नजर आता है। यह आम युवा, बुजुर्ग, मतदाता को समझने वाली बात होना चाहिए और लोकतंत्र की इस र्दुदशा में राष्ट्र रत्न, शिक्षक, विधा, विद्ववानों को संज्ञान ले, अपनी जबावदेही, कत्र्तव्यों का निर्वहन कर उनका पालन करना चाहिए। साथ ही इस महान राष्ट्र की प्रतिभा, आध्यात्म, तकनीक, विज्ञान का उपयोग हमारे बच्चों को अपनी महान विरासत को बचाने अपने-अपने लक्ष्य निर्धारित कर समाधान के रूप में स्वयं को स्थापित करना चाहिए। क्योंकि आजकल युवा, इन्टरनेट और रोजगार में उलझे और हमारे मार्गदर्शक अपनी महत्वकांक्षा पूर्ण करने अहम, अहंकार में, तो पालक अपने जीवन की सार्थकता सिद्ध करने में लगे है। ऐसे में सबसे बड़ी जबावदेही आज इस महान राष्ट्र के बच्चों के हाथ है। अगर हमारी महान नस्ल विद्यवान कौम स्वयं की सार्थकता, सफलता सिद्ध करने में सार्थक, सफल हुई तो निश्चित ही नवसंस्कृति और अर्थहीन जीवन का अन्त होना सुनिश्चित है। यहीं हमारी प्रमाणिकता होगी। जय स्वराज

दुनिया को अपने आध्यात्म, तकनीक, ज्ञान, विज्ञान के सहारे स्वस्थ समृद्ध जीवन का संदेश देने वाला राष्ट्र, शुगर की बीमारी में नम्बर बन, शर्मनाक

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस राष्ट्र या महान भूभाग पर पग-पग औषधि और डग-डग नीर बहता हो, जहां के आध्यात्म जीवन शैली में समृद्ध, स्वास्थ, शिक्षा, संपदा, प्रतिभाओं का बोल-बाला हो। उस राष्ट्र में मधुमेह जैसे रोगियों की संख्या नम्बर 1 पर हो, यह हमारे लिए दर्दनाक भी है और शर्मनाक भी।  अगर यह किसी सम्प्रभु आजाद राष्ट्र की उपलब्धि है तो इससे बड़ी असफलता, अक्षमता किसी भी महान भूभाग, राष्ट्र, जन की कुछ और हो नहीं सकती। हम कितने ही सक्षम, समर्थ, सेवाभावी, कल्याणकारी, स्वयं को साबित करने की कोशिश क्यों न करें। मगर हकीकत यह है कि हम अपनी पीढ़ी को सम्हालने में अक्षम, असफल साबित हुए है और एक शसक्त, समृद्ध, खुशहाल राष्ट्र बनाने के बजाए धन्धा, व्यापार, धन लालचियों के मंसूबा पूरे करने वालों के लिए कच्चा माल और बाजार के साथ कबाड़ का हब बन चुके है।  काश इस सच को हम पीड़ित, वंचित, आभावग्रस्त, गांव, गली के गरीब समझ अपने राष्ट्र रतनों का सम्मान कर पाए जो सहज भी है और संभव भी। क्योंकि इस महान राष्ट्र के नवरत्न शुरू से ही विधा, विद्ववान, शिक्षक, सैनिक, मजदूर और किसान रहे है। अगर इनका मान-सम्मान, स्...

कच्चा माल, मुनाफाखोर, व्यापार और कामगारों का हब बना समृद्ध, खुशहाल राष्ट्र सहज, अवसर, सरंक्षण, सम्बर्धन का आभाव, स्वार्थवत सत्ताओं की असफलता का प्रमाण

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हमारी महान संस्कृति, स्वभाव और स्वार्थवत सत्ताआंे ने हम आध्यात्म अकूत प्राकृतिक संपदा, ज्ञान, विज्ञान, प्रतिभा के धनी लोगों को, समृद्ध, खुशहाल नहीं रहने दिया व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। दुनिया को सबसे पहले ज्ञान, विज्ञान, तकनीक, व्यापार सफल, सार्थक, व्यवस्था, सेवा, कल्याण, त्याग-तपस्या से अवगत कराने वाले महान भू-भाग आर्यवृत भरतखण्डे अर्थात भारतवर्ष का हर्ष स्वार्थवत सत्ताओं और हमारी महान संस्कृति, स्वभाव के चलते ऐसा होगा किसी ने कभी सपने में भी न सोचा होगा।  मगर आज हम उस महान भारत के वंशजों का कटु सच यह है कि आज हम धन, लालची, अहंकारी, स्वार्थी, जघन्य व्यापारियों के लिए कच्चे के माल और कामगारों का हब बन चुके है। जो इस महान राष्ट्र के लिए दर्दनाक भी है और हमारे लिए शर्मनाक भी। अगर हम महान भारतवर्ष के लोग चाहते तो हम हमारे पूर्वजों की त्याग-तपस्या कुर्बानियों से भरी विरासत को बचा राष्ट्र में मौजूद प्राकृतिक संपदा, प्रतिभाओं का संरक्षण, सम्बर्धन कर उन्हें सहज, संसाधन और अवसर उपलब्ध करा, अपनी समृद्धि को बचा अपने नौनिहालों को सहज, समृद्ध, खुशहाल माहौल मुहैया करा, इस मह...

स्मार्ट सिटी प्रेस क्लब ग्वालियर ने किया स्वराज के मुख्य संयोजक, संपादक व्ही.एस.भुल्ले को सम्मानित किया

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। ग्वालियर स्थित आर.आर.एस इण्डिया सिक्योरिटी सर्विसेस प्रायवेट लिमिटेड के प्रशिक्षिण अकादमी में आयोजित स्मार्ट सिटी प्रेस क्लब के पत्रकार मिलन एवं सम्मान समारोह कार्यक्रम में स्वराज के मुख्य संयोजक, संपादक, प्रेस क्लब अध्यक्ष व्ही.एस.भुल्ले, मुख्य अतिथि विधायक मुन्नालाल गोयल, प्रवीण पाठक, चेम्बरों आॅफ काॅमर्स के सचिव प्रवीण अग्रवाल कार्यक्रम के अध्यक्ष डाॅ. सुरेश सम्राट विशेष अतिथि वरिष्ठ पत्रकार राम विद्रोही, केशव पांडे, देव श्रीमाली, प्रदीप मांडरे, एवं अकादमी के डायरेक्टर योगेश शर्मा संगठन के महासचिव आनंद त्रिवेदी की उपस्थिति में प्रतीक चिन्ह भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। इस मौके पर विलेज टाइम्स के प्रबंध संपादक मुकेश तिवारी सहित बड़ी मात्रा में ग्वालियर के पत्रकार एवं गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

किसानों की खुशहाली तक नहीं रूकने वाली यात्रायें- दिनेश गुर्जर प्रदेश अध्यक्ष किसान काॅग्रेस

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। एक मर्तवा फिर किसान यात्रा लेकर शिवपुरी पहुंचे म.प्र. किसान काॅग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुर्जर ने विलेज टाइम्स संपादक वीरेन्द्र शर्मा से अनौपचारिक चर्चा में कहा कि म.प्र. की काॅग्रेस सरकार अपने नेता राहुल जी के वचन को हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री कमलनाथ जी के नेतृत्व मंे किसानों के रिण माफी को निष्ठा पूर्ण ढंग से निभाने में जुटी है।  ये सही है कि विधानसभा पूर्व भी मैंने किसान यात्रा पूरे म.प्र. में निकाली थी हमें हमारे अन्नदाता का आर्शीवाद मिला आज प्रदेश में कमलनाथ जी के नेतृत्व में काॅग्रेस सरकार है। ये सही है मेरा स्वास्थ खराब है और डाॅक्टरों की सलाह आराम करने की है। मगर प्रदेश के मंत्री सज्जन वर्मा जी ने जिस आशा-आकांक्षाओं के लिए हरी झण्डी दिखा, हमें भोपाल से रवाना किया है एक मर्तवा हम फिर से 41 दिनों में प्रदेश भ्रमण कर, इस किसान यात्रा का समापन मनासा में अपने नेता राहुल जी के आर्शीवाद से करेगें।उन्होंने अन्त में कहा कि म.प्र. के किसानों की खुशहाली तक हमारी यात्रायें इसी तरह जारी रहेगीं।

सत्ता की हनक और सियासी संग्राम से सांसत में लोकतंत्र विरोधियों का दमन सियासत में कोई नई बात नहीं सियासी हनक की शिकार समृद्धि, खुशहाली

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा। एक समय एक विद्यवान आचार्य ने भरी सभा में कहा था कि अपनो के हाथों सम्मानित होने में प्रसन्नता होती है। मगर गर्व और गौरव की बात तो तब होगी जब यह राष्ट्र गौरान्वित होगा और यह राष्ट्र समृद्ध, खुशहाल होगा।  मगर यह तभी संभव है जब व्यक्ति से व्यक्ति परिवार से परिवार और समाज से समाज को मिलाकर इन्हें एक सूत्र में पिरो लोगों के बीच राष्ट्रीय भाव जाग्रत करना होगा और यह कार्य शिक्षक बखूवी रूप से कर सकते है। यह सच है कि हम शस्त्र से पहले शास्त्र से पराजित हुए है जिसके चलते हमें कई मर्तवा अपमानित भी होना पड़ा है। अगर राष्ट्र-जन गांव, गली, पीड़ित, वंचित उपेक्षितों की खातिर हमें सत्ताओं से भी संघर्ष करना पड़े तो हमें अपने बुद्धि कौशल, शिक्षा से पीछे नहीं हटना चाहिए। यहीं विद्या, विद्ववान, शिक्षकों का राजधर्म है। जिस व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र में स्वार्थवत लोग और सत्तायें रहती है उनकी पहचान अस्तित्व आधार कभी खतरों से और संघर्षो से मुक्त नहीं रह सकते।

लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रबल रक्षक थी राजमाता विजयाराजे सिंधिया

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। आज उनकी पुण्यतिथि ही नहीं, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा कर स्वयं को लोकमाता के रूप में स्थापित करने वाली उस महान मातृशक्ति के अवसान का दिन है। जिन्होनें राजमाता होते हुए भी लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए राजपाट महल को दरकिनार कर जेल जाने तक से परहेज नहीं किया। अगर यो कहे कि सबसे बड़े प्रभावी राजवंश की महारानी, राजमाता के रूप में उन्होंने स्व. इन्दिरा गांधी से भी लोहा लेने से गुरेज नहीं किया, तो कोई अतिसंयाक्ति न होगी। ऐसी शखसियत का पुण्य स्मरण आज लोकतंत्र में अहम है जो लोगों को समझने वाली बात होनी चाहिए। 

आदत और अलाली की भेंट चढ़ता स्वच्छता अभियान, फण्ड को ठिये ठिकाने लगा, फोटो छपवा संस्कृति घातक

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। अस्तित्व में आते ही पतन का रास्ता तय करने वाले शहरों में नवनिर्मित मूत्रालयों का यूं तो उदघाटन के पश्चात ही उनके पतन का रास्ता तय हो जाता है। क्योंकि की मूत्रालय तो बना दिए जाते है। मगर उनके रखरखाव और साफ-सफाई की नियमित व्यवस्था का सुनिश्चित न होना, आदत और अलाली को साफ करने काफी है।  जिससे स्पष्ट है कि आज जब स्वच्छ भारत अभियान सरकारों की प्राथमिकता है। ऐसे में जिम्मेदार लोगों, संस्थाओं की उदासीनता, अलाली उनकी आदत समझने काफी है और उस नवनिर्मित संस्कृति जो फण्ड को ठिये-ठिकाने लगा फोटो संस्कृति तक सीमित हो चुकी। सरेयाम जनधन की बरबादी और आम जन के लिए उपलब्ध होने वाली सुविधा की धज्जियां उठाने वालों को समझना होगा कि उनका कत्र्तव्य दायित्व क्या है।

रोक-टोक के अभाव में दम तोड़ता ट्राफिक सेन्स मनचाहे अन्दाज में सड़कों पर दौड़ते वाहन वाहनों से पटी सड़कों पर पैदल चलना हुआ मुहाल

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  भले ही नवनिर्मित संस्कृति, संस्कारों की समझ के बीच, वाहनों से पटी सड़कों पर बैलाम दौड़ते वाहनों से अब पैदल चलना तक मुश्किल हो चुका हो और रोक-टोक के अभाव में दम तोड़ता ट्राफिक सेन्स सरेयाम सड़कों पर कोहराम मचाता हो। मगर फिलहाल की स्थिति में मुख्य व्यवस्थतम मार्ग चैराहों से ट्राफिक पुलिस की अनुपस्थित रहना इस बात का गवाह है कि ट्राफिक की सुदृण व्यवस्था अब गये जमाने की बात तो नहीं। जो कलेेक्टर पुलिस अधीक्षक, जिला न्यायालय चैराहों तक पर बैसेन्स, दौड़ते वाहनों की रोक-टोक करने वाला कोई नहीं। जब अहम चैराहों का आलम यह है और शहर का हदय स्थल माधव चैक अघोषित टेक्सी स्टैण्ड, मजदूर स्थल बन चुके हो। ऐसे में यातायात व्यवस्था का अन्दाजा लगाया जा सकता। जो शिवपुरी जैसे सुन्दर शहर के लिए दर्दनाक है। जो शासन प्रशासन के लिए समझने वाली बात होना चाहिए। 

लोकतंत्र की सुन्दरता पर सवाल, शर्मनाक

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  हालिया मसला ग्वालियर में आयोजित गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री का संदेश वाचन को लेकर चर्चा में है। जिसमें मंत्री महोदय कुछ लाइन पढ़कर कलेक्टर को शेष वाचन करने कहती दिखी। निश्चित ही इसमें ऐसा कुछ नया नहीं था क्योंकि जिस तरह कई मर्तवा मंत्री पद की शपथ के दौरान शपथ दिलाने वाले अतिथि द्वारा एक लाइन पढ़कर शेष वाचन के लिए शपथकर्ताओं को कह दिया जाता है तो इसमें नया क्या।  मगर एक सीधी-साधी महिला जो तीन बार की लगातार चुनी हुई लोकप्रिय विधायक है और इस मर्तवा भी उनके क्षेत्र की जनता ने उन्हें 55 हजार से अधिक ऐतिहासिक मतों से जिताकर विधानसभा भेजा है तथा कमलनाथ सरकार ने महिला एवं बाल विकास मंत्री का प्रभार सौंपा है। ऐसी लोकप्रिय नेता के लिए हास्यपद बताना लोकतंत्र की सुन्दरता पर सवाल खड़े करता है। बैसे भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सबकुछ विधि सम्वत और उल्लेखित है तो फिर किसी के समर्थन या आर्शीवाद पर सवाल उठाना जिसे स्वयं हमारा महान संविधान संरक्षित करता हो, उस पर हास्यपद, टीका-टिप्पणी शर्मनाक ही कहा जायेगा। 

प्रतिभायें अवसरों से वंचित न हो, यह सुनिश्चित किया जायेगा- प्रघुम्न सिंह तोमर खाद्य मंत्री म.प्र. शासन प्राप्त जबावदेही का निष्ठापूर्ण निर्वहन मेरी प्राथमिकता

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  कलेक्टर सुनिश्चित करें कि आर्थिक आभाव में कोई भी प्रतिभा अवसर से वंचित न हो। क्योंकि यह सोच हमारे कै. महाराज श्रीमंत माधराव सिंधिया हमारे नेता राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया और हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री कमलनाथ जी की है। माफियाराज से शक्ति से निवटने के लिए कहा गया है कि फिर चाहें वह खादय, रशद, रेत माफिया सहित अपराधी हो। ऐसे लोगों पर कार्यवाहीं में विधि सम्वत कोई कोताही न वर्ती जाए। हमारा उद्देश्य है कि लोगों को समय से सहज गुणवक्तापूर्ण राशन उपलब्ध हो। इसके लिए जो भी करना पड़े हमारी सरकार करेगी।  उन्होंने कहा कि वह 31 जनवरी को आयोजित जन समस्या निवारण शिविर और अन्तोदय मेले में शिरकत कर, 4-5 घन्टे वह लोगों की समस्या, समाधान हेतु उपस्थित रहेगें। जिससे लोगों की छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान तत्काल किया जा सके। उन्होंने अन्त में कहा कि वह सबसे पहले सेवक जनता और श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया के है। जिनके आर्शीवाद से आज मैं इस पद पर है। उन्होंने तल्ख लहजे में अधिकारी, कर्मचारियों को आगाह करते हुए कहा कि गलत को वख्सा नहीं जायेगा और सही को सराहा जायेगा।...

संयम, सृष्टि ही नहीं, खुशहाल जीवन का नैसर्गिक गुण है

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  संयमित जीवन, जीव-जगत ही नहीं, मानव जगत के सफल, सक्षम, समृद्ध, खुशहाल जीवन का आधार भी है। संतुलित संयममित जीवन सृष्टि की सुन्दर कृति है। उक्त उदगार स्वराज के मुख्य संयोजक एवं विलेज टाइम्स संपादक, प्रेस क्लब अध्यक्ष व्ही.एस.भुल्ले ने शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित मद्य संयम कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कही।  उन्होंने कहा कि जो लोग अपने कत्र्तव्यों के प्रति सजग रह अनुशासित जीवन जीते है। उनका जीवन सिर्फ खुशहाल, समृद्ध ही नहीं वह सफल, सक्षम होने के साथ सार्थक भी होता है। इस मौके पर काॅलेज प्राचार्य विद्धवान, वक्ताओं ने भी अपने-अपने विचार रखे तथा छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर कार्यक्रम के आयोजक आबकारी विभाग के अधिकारियों सहित विभाग के कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राऐं मौजूद थे। कार्यक्रम को सहायक आबकारी अधिकारी श्री राकेश सिंह राड़ा, व्ही.एल दांगी, उपनिरीक्षक संदीप कुमार लुहानी, अशोक कुमार शर्मा, काॅलेज के प्रभारी प्राचार्य प्रोफेसर महेन्द्र जाटव, प्रोफेसर दिग्विजय सिकरवार, रामजीदास राठौर, छ...

राष्ट्र में विद्या, विद्यवान, संपदा, संसाधनों की कमी नहीं, जरूरत उनके संरक्षण सम्वर्धन की है गौवंश से श्राफित भू-भाग कैसे बने समृद्ध, खुशहाल

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   सत्ताओं के संघर्ष में अनुपयोगी घोषित मुद्दे को लेकर गौवंश का दर्द यह है जो वह व्यक्त नहीं कर सकता कि उसके जीवोत्पार्जन सहित रहने का स्थान कहां। नव संस्कृति में डूबे अर्थ मंत्र की गुलाम वर्तमान मानव सभ्यता आज धन, लालसा में इस महान वंश की उपेक्षा कर, अपनी ही पीढ़ी के लिए खड्डे खोदने में जुटी है।  परिणाम कि 38-40 कमर और 56-42 के सीने वाली नस्ल का आकार अब 26-28, 34-36 पर सिमट गया है, क्या यहीं हमारी हकीकत और सस्ंकारिक सच है। 

कब जागेगा देश, व्ही.एस.भुल्ले मुख्य संयोजक स्वराज

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। गिरोहबन्द संस्कृति में तब्दील होता हमारा महान लोकतंत्र और तथाकथित दलीय प्रथा, इस महान संस्कारिक सभ्य सुसंस्कृत, शिक्षित कौम के नाम से जाने वाले राष्ट्र को कहा ले जाकर छोड़ेगी कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी। मगर संभावनाओं का क्या जो यक्ष बन आज भी यह यक्ष सवाल करते नहीं थकतीं कि जिस राष्ट्र की 65 फीसदी मानव ऊर्जा सृजन के नाम बैवस हो, जिसमें लगभग 33 फीसद ऐसे युवाओं की फौज है जिनके कंधो पर देश की सबा अरब आबादी को दिशा देने का भार हो। ऐसे में 80 करोड़ के करीब सस्ते राशन, 50 फीसद शुद्ध पेयजल, अल्प रक्त, सस्ती शिक्षा, स्वास्थ सेवाओं के मोहताज हो।  ऐसे में सृजन, संरक्षण, सम्बर्धन, समस्या समाधान से इतर सत्ता संघर्ष में उलझे सियासी दलों की हकीकत यह है कि जो सेवा कल्याण के नाम अपनी सनातन संस्कृति, सृष्टि के प्राकृतिक सिद्धान्त से इतर हर हाल में सत्ता प्राप्त करना चाहते है। देखना होगा कि जिस पीढ़ी पर हर व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र, गर्व और गौरव मेहसूस करता है वह कितनी सार्थक सिद्ध वर्तमान हालातों में हो पाती है।  जय स्वराज 

छत्रप नेताओं के बीच उमड़ता प्रदेश प्रेम

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वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   जिस तरह की उथल-पुथल वर्तमान राजनैतिक हालातों के चलते म.प्र., राजस्थान के कद्दावर नेताओं के बीच मची है और उनके बीच जिस तरह का प्रदेश प्रेम देखा जा रहा है उसकी चर्चा सियासी गलियारों या मीडिया में भले ही व्यापक तौर पर न हो, मगर म.प्र., राजस्थान के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के व्यान इस बात के गवाह है कि कहीं न कहीं सियासी हांडी में कुछ तो पक रहा है। जिस तरह से म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान और राजस्थान की मुख्यमंत्री अपनी-अपनी स्थिति तल्ख अन्दाज में स्पष्ट कर चुके है। वह काबिले गौर है। जिस तरह से म.प्र. में शिवराज सिंह ने, म.प्र. न छोड़ने की घोषणा कर रखी है और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री बसुन्धरा राजे साफ कर चुकी है कि वह राजस्थान में डोली में आयी थी और अब अर्थी पर ही राजस्थान से बाहर जायेगीं। मगर इस सबसे इतर जिस तरह से काॅग्रेस के कद्दावर नेता जिनकों सामने रखकर म.प्र. का विधानसभा चुनाव हुआ और जिस तरह से विपक्षी दलों ने सिंधिया पर हमला बोलते हुए प्रचार किया। उनके अचानक उत्तरप्रदेश प्रभारी बनाए जाने पर कई यक्ष सवाल सियासी गल...

सेवा, सत्याग्रह को साथ देख, षड़यंत्रकारी सियासत में भूचाल

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 वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज के बीच पूर्व मुख्यमंत्री के निवास पर भेंट हुई है तब से म.प्र. में अघोषित रूप से स्थापित हो रही षड़यंत्रकारी, सियासत में सनाका खिचा है और सियासी गलियारों में कई सियासी सवाल खड़े हो गए है।  ये अलब बात है कि म.प्र. के मुख्यमंत्री पहले ही म.प्र. न छोड़ने की घोषणा कर चुके है वहीं आनन-फानन में पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया को उ.प्र. का प्रभारी बनाया गया है। बहरहाल म.प्र. के दोनों ही कद्दावर नेताओं की मुलाकात के बाद चुप्पी कई सवालों को जन्म देते नहीं थकती। जिन्हें आज म.प्र. की राजनीति में सेवा सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है। 

साक्ष्य के अभाव में प्रकरण खारिज अनावेदक की पैरवी अभिभावक मकसूद कुर्रेशी ने की

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   प्राप्त जानकारी  के अनुसार प्रकरण क्र. 284/2015 संजय श्रीवास्तव, विरूद्ध भारत इन्टर प्रायजेज तथा स्केम पावर सिस्टम के बीच प्रकरण का निराकरण करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम शिवपुरी ने निराकरण करते हुए प्रकरण को खारिज कर दिया है। जिसमें अनावेदक क्र. 2 की ओर से पैरवी वकील मकसूद कुर्रेशी ने की।

काॅग्रेस परिवारवाद की धोतक - नरेन्द्र सिंह, केन्द्रीय मंत्री भारत सरकार

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी। अपने अल्प प्रवास पर अपने ससंदीय क्षेत्र में कार्यकत्र्ताओं की बैठक लेने पहुंचे केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने विलेज टाइम्स संपादक वीरेन्द्र शर्मा से एक अनौपचारिक सवाल के जबाव में कहा कि काॅग्रेस का कदम परिवारवाद का धोतक है।  ज्ञात हो कि नरेन्द्र सिंह प्रियंका गांधी की काॅग्रेस पार्टी में हालिया ताजपोशी पर चुटकी ले रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर अचानक इस तरह से महत्वपूर्ण जबावदेही किसी कार्यकत्र्ता को सौंपी होती और उसे महासचिव बनाया होता, तो समझ आता, यह देश को समझने वाली बात है।

देश में रोजगार कोई समस्या नहीं

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  प्रधानमंत्री चाहे तो मात्र एक माह में एक करोड़ लोगों को रोजगार सृजन कर लगभग 5 करोड़ लोगों को लाभान्वित किया जा सकता है। बशर्ते वह सनातन संस्कृति, शिक्षा के साथ तकनीक का बेहतर इस्तेमाल कर, उन संस्कारों को प्रति स्थापित करने में अपनी सरकार की भूमिका स्वयं तय करें। जिससे विद्या-विद्ववान, प्रतिभाओं के संरक्षण सम्बर्धन के साथ प्रतिभाओं को प्रदर्शन के सहज अवसर उपलब्ध हो सके। यह हर राष्ट्र और कौम को समर्पित शासक के लिए अहम होना चाहिए और यह किसी भी राजा का राजधर्म भी। अगर कत्र्तव्य निर्वहन के साथ इन जबावदेहियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन हुआ तो निश्चित ही देश में न तो कभी रोजगार समस्या रही और न ही भविष्य में रहेगी।  देखना होगा कि केन्द्र व राज्य सरकारें किस रूप में विकट हो चुकी रोजगार समस्या का समाधान ढूंढ पाती है। जय स्वराज

समर्थों के, सत्ता संघर्ष में, अस्त होती मानवीय प्राकृतिक संपदा ज्ञान, ऊर्जा के आगे संरक्षण का संकट

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  व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  यूं तो इस महान भूभाग पर समय-समय पर समयानुसार कई सत्तायें आईं, गईं और भविष्य में भी सत्तायें आयेंगीं और जायेगीं। मगर आर्यवृत भरतखंड के नाम चिरपरिचित इतिहास में दर्ज इस महान भू-भाग पर निवासरत उन भोले-भाले नागरिकों को क्या मिला, जो सत्ताओं को पोषित कर, अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन निष्ठापूर्ण तरीके से करते रहे।  देखा जाए तो वर्तमान में नवनिर्मित संस्कृति के सहारे वर्तमान ही नहीं, भविष्य में उन्हें क्या हासिल होने वाला है, यह देखने वाली बात होगी। ऐसा नहीं कि सत्ताओं के संघर्ष में राष्ट्र कौम की खातिर समय-समय पर अनगिनत ही नहीं, ऐतिहासिक कुर्बानियां न हुई हो। सच तो यह है कि अनगिनत कुर्बानियां भी हुई और जरूरत पड़ने पर इस देश के नागरिकों ने वेताहसा खून बहा सत्य के लिए संघर्ष भी किया और कभी-कभी अहिंसा के रास्ते चल जुल्म को भी सहा। मगर कत्र्तव्य निर्वहन, जबावदेही के आगे न तो कभी यह महान राष्ट्र झुका, न ही इस राष्ट्र का महान नागरिक विचलित हुआ।  मगर जब अनगिनत निर्मम कुर्बानियों, त्याग-तपस्या के बावजूद भी हम अपने महान ज्ञान मानवीय ऊर...

शिवपुरी मेरे पूर्वजों की देन है फिर मैं बाहरी कैसे श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया को धन्यवाद ज्ञापित कर, श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया ने कहा कि मैंने अपना कार्य कर दिया है, अब आपको देखना है।

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी। अपने अल्प प्रवास पर विभिन्न कार्यक्रमों में शिवपुरी शिरकत करने पहुंची पूर्व म.प्र. सरकार की मंत्री शिवपुरी विधायक श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया ने शहर के लिए लगभग 38 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाली थीम रोड और लोक नायक, जनप्रिय भाजपा की जननी श्रीमंत विजयाराजे सिंधिया की प्रतिमा स्थापना के भूमि-पूजन के अवसर पर कहा कि हम सभी जानते है कि शिवपुरी को मेरे पूर्वजों ने बसाया था, तो फिर मैं बाहरी कैसे हो सकती हूं। जैसा कि लोगों ने चुनावों में लोगों ने प्रचारित किया।  उन्होंने कहा मैंने शहर की अधिकांश सड़के नई बनवा व सिन्ध का पानी शिवपुरी लाने के बाद शहर के बीचों बीच करोड़ की लागत से बनने वाली थीम रोड की समस्त औपचारिकता पश्चात भूमि-पूजन किया है। शेष कार्य आप लोगों को देखना है। उन्होंने कहा कि मैं स्थानीय सांसद श्रीमंत ज्योतिरादित्य जी का धन्यवाद देना चाहूंगी कि उन्होंने मुझे पूरा सहयोग किया। इस मौके पर भाजपा नेताओं, अधिकारियों के अलावा गणमान्य नागरिक व पत्रकार मौजूद थे।

अघोषित खाद्य माफियाओं की गिरफ्त में पोषण, भोजन और खाद्य

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  विगत 15 वर्षो में जिस तरह से अघोषित माफिया मंशा अनुरूप गरीब के सस्ते राशन, तेल, बच्चों के पोषण आहार, मध्यान भोजन पर प्रभावी हुआ है। उसने शासन की मंशा को तो पलीता लगाया ही, साथ ही मानवता को भी तार-तार करने का कोई मौका नहीं छोड़ा।  अरबों-खरबों की राशि खर्चने के बावजूद सस्ते राशन को भटकते गांव, गली के गरीब, पोषण आहार, मध्यान भोजन से वंचित अल्प रक्त कुपोषण के शिकार बच्चे इस बात का प्रमाण है कि इन क्षेत्रों में सेवाभावी, समितियों के माध्यम से पैर जमा चुका माफियाराज किस कदर हावी है। अगर म.प्र. के ग्वालियर-चम्बल, शिवपुरी, श्योपुर के आंकड़े टटोले जाए और विगत वर्षो में सामने आए घटनाक्रमों पर संज्ञान लिया जाए, तो सारा सच सामने हो सकता है। मगर 15 वर्षो की बिगड़ी व्यवस्था पर म.प्र. सरकार के मुखिया कमलनाथ कब संज्ञान ले, इस अहम व्यवस्था को सु-व्यवस्थित करेगें यह सोचने वाली बात होगी।

सेवाभावी संस्कृति में स्वार्थवत सत्ता उन्मुखी संस्कृति का प्रार्दुभाव सेवा के नाम, मलाई का संघर्ष, सत्ता का बड़ा संकट सर्वकल्याणकारी शिक्षा, संस्कृति, समृद्ध, खुशहाल जीवन के लिए अहम

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जिस भयाभय दौर में, हमारी स्वार्थवत नवनिर्मित संस्कृति, शिक्षा जा पहुंची है वह अब हमारी  उस महान संस्कृति के अस्तित्व को खतरा और इस मायूस बैवस राष्ट्र जन के लिए खतरनाक है। जिस महान संस्कृति पर कभी हम गर्व कर, स्वयं को गौरान्वित मेहसूस करते थे और विश्व विरादरी में जो हमारी पहचान थी। मगर हमारे परतार्थी स्वभाव और सूतखोर संस्थाओं के आगे हमारी सत्ताओं के समर्पण ने विगत 7 दशक में हम स्वाभिमानी सुसंस्कृत राष्ट्र जन को कहीं का नहीं छोड़ा। जिसके दुष्परिणाम आज हमारे सामने है। वह भी तब की स्थिति में जबकि हमारे संरक्षण, सम्बर्धन, समृद्ध, खुशहाल जीवन के लिए हमारे द्वारा हर 5 वर्ष में चुनी जाने वाली सेवाभावी कल्याणकारी सरकारें, सत्ता, संगठन और हमारे द्वारा पोषित इन सत्ता, सरकारों, संगठन, संस्थाओं को संचालित करने वाले हमारे बीच के ही हमारे अपने लोग है।  मगर फिर भी आज हम जीवन्त, स्पर्शी, दीर्गकालिक, कल्याणकारी, सृजनात्मक, संस्कारिक शिक्षा देने में अक्षम, असफल साबित हो रहे है। परिणाम कि समृद्धि, खुशहाली, सहज जीवन को तरसते हम और हमारे लोग प्रकृत...

खुशहाल, समृद्ध, जन राष्ट्र के लिए समझ अहम अहम, अंहकार, मूड़धन्यता, महत्वकांक्षाओं का दंश झेलता समृद्ध देश प्रतिभा, विघा, विद्ववानों के दमन से कराहते लोग

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। बेजान अर्थ संस्कृति मे तब्दील, संस्कारिक, समृद्ध समाज अपने जन राष्ट्र कल्याण को इस तरह कलफेगा, जहां प्रतिभा, विघा, विद्ववानों को, राष्ट्र जन कल्याण के लिए न तो कोई अवसर नहीं स्थान होगा। कारण बेजान अर्थ संस्कृति मे तब्दील समाज स्वार्थवत गिरोहोंबंद सत्ताये, संस्कृति का लोकतांत्रिक व्यवस्था मे हावी होना हैं। जिस राष्ट्र, व्यवस्था मे त्याग, तपस्या, कल्याण की संस्कृति, संस्कारों को त्याग लोग स्वयं के स्थापित सत्ता उन्मुखी साम्राज्य, संख्या, धन, बल के सहारे स्वयं के स्वार्थ सिद्ध करते हो, जहां सियासत सरेआम, प्रतिभा, विधा, विद्ववानों के दमन पर उतारू हो उसे किसी भी सभ्य, समाज या व्यवस्था मे उचित नहीं कहा जा सकता। मगर यह कटु सच आज हम सबके सामने हैं। कहते है किसी भी व्यवस्था मे सृदृढ़, समृद्ध, शसक्त लोगों की जबावदेही, अधिक होती है। जिनके कंधों पर प्रकृति, मानव, जीव, जगत, पशु , कल्याण का भार होता है। उनका कर्त्तव्य होता है कि वह अपनी प्राकृतिक संपदा जीव जगत सहित मानव कल्याण मे अपना अमूल्य योगदान दे। मगर दुर्भाग्य कि अपनो के ही बीच आशा आकांक्षायें दम तोड़...

जब उत्तम सार्थक, सहज, जीवन, सृजन, कल्याण, सृष्टि की सर्वोत्तम कृति, फिर गौरव, वैभव के लिए भटकाव क्यो ?

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। सभ्यता, संस्कृति, इतिहास, विज्ञान, प्रकृति, मानव जीव जगत, जीवन के साक्ष्य है। इनकी जीवन मे निर्धारित सिद्धता, जीवन की सफलता और सर्वोत्तम कृति है। जिसमें प्रेम त्याग, अहिंसा का सतत प्रवाह जीवन्त जीवन को सार्थक, सफल बनाने मे अहम है। जिसकी सिद्धता को चुनौती देना अंधेरे मे रोशनी और दिन मे सपने देखने के समान हैं। दुनिया की समस्त कृतियाँ, वस्तु, विज्ञान, मानव, जीव जगत के सफल, समृद्ध, खुशहाल जीवन के लिए सार्थक, सिद्धि के माध्यम हो सकते है। मगर अंतिम या सम्पूर्ण सत्य नहीं।

सच से अनभिज्ञ सरकार का सच बुद्धि, विज्ञान और शसक्त आधार का दंश झेलती सरकार

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  सरकार जो भी हो उसका दल, उसकी संस्कृति, संस्कार जो भी हो। मगर सच यह है कि जिस सत्ता, सरकार में बुद्धि विवेक, विज्ञान और आधार का अभाव हो वह हमेशा सच से अनभिज्ञ ही बनी रहती है। जिसका दंश झेलना या तो उसकी नियति बन जाती है या फिर उसका संस्कार जो किसी भी संघर्षपूर्ण व्यवस्था के लिए दर्दनाक भी। काश इस सच को शासक समझ पाये। मगर वर्तमान हालात यह है कि लोग न तो समर्थ, सक्षम लोग और सत्तायें सच समझने, सुनने तैयार है, न कि अपने निहित स्वार्थो को तिलांजली दे, कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हम शसक्त, सक्षम, समृद्ध आज भी है और इतिहास भविष्य हमारी गोद में, फिर भी हम अक्षम, असफल आखिर क्यों ? जय स्वराज 

दलों का दंश और दम तोड़ता लोकतंत्र गिरोहबन्द संस्कृति में कलफते विद्या, विद्ववान

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जिस व्यवस्था में विद्या, विद्ववान ही नहीं, प्रतिभायें अवसर के अभाव में दम तोड़ने पर मजबूर हो उस व्यवस्था व उसे स्वीकार कर उस विधान का पालन करने वालों के लिए यह समझने वाली बात स्वयं के निहित स्वार्थ त्याग, होनी चाहिए। क्योंकि जिन आशा-आकांक्षाओं के साथ लोग अभावग्रस्त, समस्याग्रस्त हो मुफलिसी का जीवन जीने पर मजबूर है।  अगर स्वयं क्षणिक स्वार्थ या अज्ञानता बस लोकतंत्र के नाम, गिरोहबन्द लोग अर्थ संस्कृति के चलते इसी तरह सत्तासीन होते रहे, तो यह सच है कि ऐसे में उन आशा-आकांक्षाओं का भला नहीं होने वाला जो पथराई आंखों से अपने कल्याण को टकटकी लगाए देख रही है।  जय स्वराज 

कत्र्तव्य विमुखता के बीच, प्रवचनों का सैलाब प्रमाण, प्रमाणिकता, सार्थक, सिद्धता, सृष्टि और जीवन के लिए अहम अंग सच से दूर सन्तुष्टि की तलाश

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  मंच, जनसेवा, लोक-सभा, जनसभा, धर्म-सभा, संगठन सभा या फिर सत्ता सामार्थ जनों की हो। मगर आजकल जिस तरह से कत्र्तव्य विमुखता के माहौल के बीच सुधारात्मक प्रवचनों का सैलाब आया है। वह किसी भी, सभ्य, समाज, संगठन, सत्ता, संस्थानों के लिए दर्दनाक ही नहीं शर्मनाक भी होना चाहिए। जिन समर्थ, सत्ता, संगठन, संस्थाओं के कंधों पर सृजन, कल्याण के बीच सेवा, निर्वहन का भार हो, जिनका दायित्व सृजनात्मक, समृद्ध, संरक्षित, संस्कार पूर्ण माहौल, सार्थक विषय वस्तुओं का निर्माण हो। जिनके सम्बर्धन से प्राकृतिक बौद्धिक, सपंदायें, प्रतिभाओं में निखार निर्माण के अवसर समान सहज हो। ऐसी सत्ता, संगठन, संस्थायें, समर्थ लोगों का प्रकृति के विरूद्ध कत्र्तव्य विमुख विलाप किसी भी व्यवस्था में उचित नहीं माना जा सकता।  देखा जाए तो देश में विद्या, विद्यवान, प्रतिभाओं, न ही संसाधनों की कोई कमी है, न ही कत्र्तव्य निर्वहन पर सीमा, न ही जबावदेह जीवन निर्वहन पर बन्दिस, जो जीवन की सार्थकता सफलता ही नहीं, उसकी प्रमाणिकता सिद्ध करने काफी है। मगर यह तभी संभव है। जब हम अपने प्राकृतिक,...

तीन राज्यों में, प्रमाणिक प्रदर्शन, तय करेगा, राहुल का भाग्य 30 दिन में साबित करनी होगी राहुल को सत्ता की सिद्धता

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस तरह से राहुल ने अपने एक्सक्लूसिव इन्टरव्यू में 2019 के संभावित चुनाव परिणामों पर संभावना व्यक्त की है और राष्ट्र, जन से जुड़े अहम मुद्दों पर संज्ञान लिया है। राफेल सहित भ्रष्टाचार, रोजगार, सस्ती शिक्षा, स्वास्थ सेवा, किसान जैसे मुद्दों को आगे रखा है। अगर वह मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान जैसे बड़े राज्यों मेंजहां काॅग्रेस ने लम्बे वनवास के बाद जीत दर्ज कर सत्ता में वापसी की है। अगर एक माह के अन्दर इन तीनो राज्यों में राहुल स्वराज के रास्ते स्वयं की सिद्धता साबित करने में सफल हुए तो उनके लिए 2019 का रास्ता काफी सहज होगा, जिसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए।  मगर यह तभी संभव है जब राहुल स्वराज के रास्ते मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में लोगों की समृद्धि, खुशहाली के लिए अविलम्ब पहल कर, लोगों की आशा-आकांक्षा अनुरूप अपने कत्र्तव्य और जबावदेही का निर्वहन करें। क्योंकि जिस तरह की शुरूआत नई सत्ताओं ने तीनों प्रदेशों में की है लोकसभा चुनाव से पूर्व इन पहलो से बहुत कुछ होने वाला नहीं। देखना होगा कि राहुल जिस नये जोश और अन्दाज में देश को आशान...

शिवपुरी में खाद्य और खाद वितरण पर उठे सवाल अमला अधिकारी मदमस्त

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।      म.प्र. शिवपुरी। जिस तरह से खेती किसानी के समय किसनों को खाद के लिए 2-4 होना पड़ा। वहीं दूसरी ओर सस्ते राशन को मोहताज लोगों की हालत खाद्य वितरण को लेकर कुछ कम खराब नहीं रही।  कारण माफिया अंदाज में एक-एक समिति पर कई राशन की दुकानें तो कहीं कहीं तो, वन समितियां अपना मूल कार्य छोड़ राशन वितरण का मोर्चा सम्हाले हुए है। इससे बड़ी शर्मनाक बात और क्या हो सकती है कि पोहरी विकासखण्ड की ग्राम पंचायत अहेरा में लगभग 50 लोगों को 1 वर्ष से राशन नहीं मिला, तो दूसरी ओर सोसायटियों को खाद मिलने के बावजूद किसानों को बाजार से औने-पौने दाम फसल बचाने खाद खरीदना पड़ा।  अपुष्ट सूत्रों की माने तो एक दल विशेष के लोगों का सरकार बदल जाने के बावजूद खादय और खाद वितरण जैसे क्षेत्रों में अघोषित कब्जा है। जिन्हें कुछ जिम्मेदार अधिकारियों का खुला सरंक्षण प्राप्त है। दूसरी ओर प्रशासन का पक्ष है कि किसान सोसायटी से खाद इसलिए नहीं लेना चाहते कि उन्हें कर्ज चुकाना पढ़ेगा।  तो वहीं सस्ते राशन वितरण व्यवस्था सम्हालने वालों का तर्क है कि सबकुछ आॅन लाइन है। तो गड़बड़ कह...

गाय-भैंसों की सेहत बढ़ाता, पोषण आहार

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   म.प्र. शिवपुरी। जिस तरह से पोषण आहार के मामले में बाजारों में सरेयाम गाय-भैंसों का बिचने के रूप में सामने आये है और जिस तरह की आम चर्चा मध्ययान भोजन, पोषण आहार वितरण को लेकर आम है। वह दर्दनाक भी है और किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक भी। मगर जबावदेहियों का आलम और तल्ख, आंकड़ेबाजी इस बात की गबाह है कि आज भी पूर्व सरकार के संरक्षण की खुमारी अभी भी उनके सर चढ़कर कर बोल रही है। जो मध्यान भोजन, पोषण आहार वितरण का मोर्चा सम्हाले हुए है।  अगर म.प्र. के मुख्यमंत्री कमलनाथ एक अलग एजेन्सी से जांच कराये तो सारे तथ्य सामने होगंे कि पूर्वत सरकार के कार्यकाल में अबोध गरीब बच्चों का मध्ययान भोजन और पोषण आहार वितरण जैसी महत्वकांक्षी योजना में किस तरह से आहार के लूट-पाट की शिकार हुई है और हो रही है। संगठित हकों की लूट का आलम यह है कि सरकार भले ही बदल गयी हो। मगर व्यवस्था आज भी जस की तस है। जो नई सरकार को विचारणीय विषय होना चाहिए। 

आदिवासियों की बददुआ से कैसे बचेगी नई सरकार

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जिस तरह से षड़यंत्र पूर्ण ढंग से आदिवासियों को विगत 15 वर्षो में भूमिहीन किया गया है वह काॅग्रेस की नई सरकार को शर्मनाक और दर्दनाक होना चाहिए। म.प्र. के शिवपुरी जिले के ककरवाया में पट्टे में मिली या आदिवासियों की भूमि का जिस तरह से खरीद फरोत पर बंदरबांट हुआ है वह काबिले गौर है। जिन आदिवासियों के वोटों के दम पर काॅग्रेस सरकार आज सत्ता में है, कम से कम उस सरकार को आदिवासियों के जीवन से जुड़े इस अहम मुद्दे पर संज्ञान अवश्य लेना चाहिए।   अगर काॅग्रेस सरकार ककरवाय में बड़े पैमाने हुई आदिवासियों की जमीनों की खरीद पर संज्ञान लें, दूध का दूध और पानी का पानी करती है, तो ऐसे कई मामले प्रकाश में आएंगें जो किसी भी समाज में उचित नहीं कहा जा सकता।

अवैध काॅलोनियों के नाम, अवैधानिक उगाही कत्र्तव्य विहीन नगरपालिका

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जिस तरह से आये दिन अवैध काॅलोनियों आवाद हो रही है या हो चुकी है वह इस बात का संकेत है कि न तो कत्र्तव्य निर्वहन हुआ न ही जबावदेही तय हो सकी। ऐसे में पीएम के सपने व नई सरकार केे सपने को नपा का व्यवहार पलीता लगाने काफी है।  बेहतर हो कि नवगठित सरकार आम पीड़ित, वंचितों से जुड़े मुद्दों पर संज्ञान लें। पहले तो जिम्मेदार विभाग अतिक्रमाक और अवैध कालोनाइजरों को संरक्षण देते है। फिर अपने कत्र्तव्य निर्वहन का ढिंढोरा पीटने अतिक्रमण हटाने पहुंच जाते है। मगर कभी न तो शासन, न ही नगरपालिका, न ही सरकारें यह तय कर सकी कि जिन कर्मचारी, अधिकारियों के रहते इस तरह के अतिक्रमण या अवैध काॅलोनियां निर्मित हुई आखिर उन पर आज तक कार्यवाही क्यों नहीं हो सकी, क्यों ऐसे अधिकारी,कर्मचारियों को कार्य में लापरवाहीं और कत्र्तव्य के विरूद्ध कूट रचना के संदेह के लिए दंडित कर उत्तरदायी ठहरा गया। यह सरकार के लिए समझने वाली होना चाहिए। 

सड़कों पर फर्राटे भरती मौत जबावदेह, बैलगाम

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  यूं तो परिवहन विभाग जो निधारित शुल्क ले वाहन दौड़ाने का लायसन्स मुहैया कराता है। मगर लायसन्स जारी होने के बाद बगैर लायसन्सधारियों के हाथ दौड़ते अनियंत्रित वाहन इस बात के गवाह है कि सड़कों पर दौड़ती मौत से किसी का वास्ता नहीं। क्योंकि शुल्क बसूली ही अब परिवहन या जबावदेह लोगों का प्रमुख कत्र्तव्य बन गया है। जिसका प्रमाण है कि बगैर प्रशिक्षण स्कूलों के मनमाने ढंग से वाहन चलाना सीख और लायसन्स प्राप्त कर सड़कों पर अनयंत्रित वाहन दौड़ाना है। जिसे सड़कों पर जबावदेह लोग भी देखते है और आम नागरिक भी। 

वोट और वर्चस्व नीति से गांव, गली का भला होने वाला नहीं खुशहाली, समृद्धि की सार्थकता स्वराज से संभव यंत्र से अनभिज्ञ तंत्र-मंत्र की सार्थकता पर सवाल

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व्ही.एस.भुल्ले  विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  जिस तरह से हमारी सरकारें सत्तायें यंत्र को विसार, तंत्र-मंत्र पर अधिक निर्भर नजर आती है उससे स्पष्ट है कि जिस विश्व विरादरी का सिरमोर बन हम हमारी समृद्ध, खुशहाल विरासत के लिए संघर्षरत है। उसे तभी हासिल किया जा सकता है कि जब हम काॅरपोरेट कल्चर से इतर यंत्र पर विचार करे, न तंत्र-मंत्र के सहारे लोगों का जीवन समृद्ध, खुशहाल और विश्व विरादरी का सिरमौर बनने का असफल प्रयास करें।  जीवन में अस्तित्व की जंग सार्थक हो सकती है। मगर सफल नहीं जो समझने वाली बात है। जिस तरह से यंत्र अर्थात प्रतिमा का तिरस्कार कर मशीनरी और उसकी गतिविधियों के सहारे हर संभव निदान की कोशिश हो रही वह कभी पूरी होने वाली नहीं। कारण काॅरपोरेट कल्चर जहां लाभ-हानि अहम होता है और आशा-आकांक्षाओं का कोई अस्तित्व नहीं।  

हायर-हाईटेक लोकतंत्र में कलफते लोग

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  व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  काॅरपोरेट कल्चर में तब्दील संगठन सत्ताओं का हर्ष आने वाले समय में लोकतंत्र में जैसा भी हो। मगर जिस तरह से संगठनों और सत्ताओं का संचालन लोकतंत्र के नाम या वैचारिक आधार पर लगु-लुहान हो रहा है वह लोगों की कलफती आशा-आकांक्षाओं की तकलीफ दुस्वारियां समझने काफी है।  अगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो लोकतंत्र में जिस तरह से तथाकथित नेतृत्व स्थापित कर उसे स्वीकार्य बना लोकतंत्र में स्थापित करने की तकनीकीके नित नये ढंग से संवेदनशीलता से इतर हो रही है। और यह दुस्साहस भी एक ऐसे लोकतंत्र में हो। जिसकी आधे से अधिक आबादी अशिक्षित, अल्प रक्त, शुद्ध पेयजल, सस्ती सहज शिक्षा के लिए राजनीति की शिकार हो और 80 करोड़ से अधिक लोग सस्ते राशन के मोहताज हो तथा 75 फीसदी युवाओं की जमात में 33 फीसदी युवा रोजगार के मोहताज हो, ऐसे राज्य व देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है। जो दर्दनाक ही नहीं, खतरनाक भी है। जिनके कल्याण की आशा-आकांक्षा उस लोकतंत्र से होती है। आज नागरिकों के लिए यह समझने वाली बात होना चाहिए।  आजकल जिस तरह की संस्कृति सो...

सत्ता उघोग में तब्दील लोकतंत्र में निढाल होते प्रतिभा, संपदा, आशा-आकांक्षा हायर-हाईटेक लोकतंत्र में दम तोड़ता स्वराज

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  कहते है कि जो कौम न तो अपने विधान की रक्षा कर पाए, न ही स्थापित संविधान की मंशानुरूप अपने कत्र्तव्य जबावदेहियों का निर्वहन कर पाए। ऐसी व्यवस्था में गांव, गली में स्वराज का सपना तो दूर की कोणी है ही। बल्कि वह कौम अपनी आशा-आकांक्षाओं के अनुरूप जीवन निर्वहन से भी महरूम हो जाती है। फिर वह व्यवस्था राजतांत्रिक हो या फिर लोकतांत्रिक।  मगर यह चर्चा हमें उस महान लोकतंत्र की करना, उचित होगा, जो सनातन था, है, और रहेगा। फिर स्वरूप उसका जो भी रहे। जिसमें राष्ट्र जन जीव कल्याण सेवा को ही सर्वोच्च स्थान रहा है। जो समय-समय पर सराहा भी गया और स्वीकार्य भी रहा है। मगर आज जब हम हायर-हाईटेक लोकतंत्र की उपेक्षा के चलते आभावग्रस्त जीवन जीने पर मजबूर है और सेवा कल्याणकारी सत्ताऐं उघोग में तब्दील जहां सत्ता हासिल करने या तो संगठित गिरोह के रूप में तथाकथित दल, संगठन, काॅरपोरेट कल्चर में तब्दील हो, फिर उनका संगठनात्मक वैचारिक आधार जो भी हो। उनका उद्देश्य सार्वजनिक हो या व्यक्तिगत। मगर सामने मौजूद लोकतांत्रिक कृत्य इस बात के गवाह है कि उनके लक्ष्य सृजन से अ...

एसडीएम तोमर ने सम्हाला शिवपुरी मंडी भार सादक का प्रभार

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  म.प्र. शिवपुरी। प्रदीप तोमर ने शासन निर्देशानुसार आज कृषि उपज मंडी समिति शिवपुरी का भार सादक का प्रभार ग्रहण किया। इस मौके पर मंडी सचिव प्रदीप तोमर सहित लेखापाल श्रीमान जैसवाल भी उपस्थित थे। तोमर ने पदभार ग्रहण करने के पश्चात कहा कि एसडीएम के रूप में मेरी इच्छा थी कि कलेक्ट्रेट के सामने स्थित पोलोग्राउण्ड में लगभग साढ़े 9 मीटर ऊंचा हाई मास्क रोशनी के लिए लगाया जाये। वहीं शहीद तात्या टोपे की प्रतिमा से छेड़छाड़ किए बिना एक नवीन प्रतिमा तात्या टोपे स्मारक में स्थापित की जाए।  इतना ही नहीं, उन्होंने कस्टम गेट भवन के जीर्णोद्धार सहित उसे संरक्षित कर उस पर लाईटिंग की भी इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि चूकि मेरा स्थानातांरण हो चुका है। इसलिए मैं चाहता हूं कि जो भी जागरूक लोग है वह आगे इस दिशा में कार्य अवश्य करें। जिससे शहर की सुन्दरता को और बढ़ाया जा सके। 

ऐतिहासिक विकल्प से वंचित राष्ट्र

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व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।  10 फीसदी संवर्णो को मिले आरक्षण के प्रस्ताव पर लोकसभा में पक्ष-विपक्ष की एकता से साबित होता है कि राष्ट्र जनकल्याण समरस्ता सौहार्द के मुद्दें पर देश एक है। क्योंकि 326 सांसदों की उपस्थिति में 323 सांसदों का समर्थन इस बात का प्रमाण है। मगर दुर्भाग्य कि विगत साढ़े 4 वर्षो में जितना काम देश के गांव, गली, गरीब, किसान, युवा, बेरोजगार के कल्याण और विकास के लिए होना था वह नहीं हो सका। अगर प्रधानमंत्री जी चाहते और वह जिस स्वभाव और सार्थकता के लिए जाने जाते है तो वह राष्ट्र को एक बड़ा सृजनात्मक सर्वमान्य विकल्प देने के साथ सरकार का ऐतिहासिक रिपोर्ट कार्ड दे सकते थे।  मगर दलों के दंश, दासता और वैचारिक उन्माद ने ऐसा होने नहीं दिया। बरना आज यह महान राष्ट्र स्वयं पर गर्व भी करता और स्वयं को गौरान्वित मेहसूस करता तथा गांव, गली का गरीब, पीड़ित, वंचित, किसान, मध्यम आय वाला संघर्षशील इन्सान समृद्धि, खुशहाली का एहसास कर रहा होता। इतना ही नहीं, राष्ट्र के हर कामगार हाथ शिक्षित, अशिक्षित, कुशल, अर्दकुशल मेहनतकस के हाथ भी रोजगार होता और हमारा महान भू-भाग ...

राहुल के सवालों पर प्रधानमंत्री की चुप्पी, राफेल घोटाले का सच- सिंधिया

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विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी। सदन में राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर उठाए गए सवालों पर सरकार व प्रधानमंत्री की चुप्पी राफेल सौदे में हुए घोटाले का सच है। जिस तरह से वित्तमंत्री, रक्षामंत्री द्वारा सवालों के जबाव के बजाए परदेदारी की जा रही है और प्रधानमंत्री चुप है उनकी चुप्पी राफेल घोटाले का सच जानने काफी है।  देखा जाए तो राहुल ने राफेल सौदें को लेकर तीन सवाल सरकार से किए थे। एक राफेल की कीमत, दूसरी जहाजांे की संख्या, तीसरा सौदें का सच। मगर न तो इन सवालों का जबाव देश के वित्त मंत्री और रक्षामंत्री ने दिया, न ही देश के प्रधानमंत्री जबाव देने तैयार है सरकार व प्रधानमंत्री की चुप्पी इस बात का प्रमाण है कि कहीं न कहीं कुछ तो राफेल सौदंे में गड़बड़, घोटाला है। जिसका जबाव राहुल गांधी ही नहीं, समूचा देश चाहता है। क्योंकि राफेल खरीदी का मामला सिर्फ खरीद मामला ही नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा अहम मसला है। जिस पर प्रधानमंत्री को जबाव अवश्य देना चाहिए। उक्त बात विलेज टाइम्स संपादक वीरेन्द्र शर्मा द्वारा पूर्व केन्द्रीय मंत्री सांसद व लोकसभा में सचेतक...